Blog

  • सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम

    सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) को काबू में करने के लिए सरकार (Government) की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र (Southern Maharashtra) में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।


    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी

    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।


    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट

    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • मजदूरी से पढ़ाई तक और फिर KBC की हॉटसीट! विशाल ने 5 लाख जीतकर रचा कमाल, अब सामने होगा 50 लाख का सवाल

    मजदूरी से पढ़ाई तक और फिर KBC की हॉटसीट! विशाल ने 5 लाख जीतकर रचा कमाल, अब सामने होगा 50 लाख का सवाल


    नई दिल्ली। ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ का मंच एक बार फिर ऐसी कहानी का गवाह बना है जिसने ज्ञान के साथ मेहनत और हौसले की ताकत भी दिखा दी। महाराष्ट्र के वाशिम जिले से पहुंचे विशाल प्रेमचंद राठौड़ ने अपनी शानदार समझ और तेज दिमाग के दम पर 5 लाख रुपये की रकम जीत ली है। विशाल की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह ऐसे परिवार से आते हैं जहां रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार के सदस्यों को दिहाड़ी मजदूरी तक करनी पड़ती है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा और अब अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठकर उन्होंने अपनी मेहनत का शानदार उदाहरण पेश किया है। 5 लाख रुपये जीतने के बाद अब विशाल 50 लाख रुपये के सवाल का सामना करेंगे।
    विशाल ने ‘फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट’ राउंड में सबसे तेज जवाब देकर हॉटसीट तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। जब वह अमिताभ बच्चन के सामने पहुंचे तो इस खास पल की खुशी और भावनाओं को संभालना उनके लिए आसान नहीं था। उनके माता-पिता और दोनों बहनें भी शो में मौजूद थीं। बेटे को इतने बड़े मंच पर देखकर परिवार की आंखों में खुशी साफ दिखाई दी। विशाल के लिए यह सिर्फ एक टीवी शो में पहुंचने की उपलब्धि नहीं बल्कि वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बीच मिली बड़ी कामयाबी है।

    विशाल ने शो में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में भी बताया। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और कई बार विशाल भी उनके साथ काम की तलाश में निकलते हैं। उनकी मां सफाईकर्मी के तौर पर काम करती हैं। परिवार की आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं है और इसके बावजूद हर महीने करीब 7 हजार रुपये मकान का किराया देना पड़ता है। विशाल खुद मजदूरी करके रोजाना लगभग 500 से 600 रुपये कमा पाते हैं। सबसे मुश्किल बात यह है कि हर दिन काम मिलना भी तय नहीं होता। कई बार काम नहीं मिलने पर उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।

    इन मुश्किल परिस्थितियों के बीच विशाल ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने मजदूरी के साथ पढ़ाई पूरी की और पिछले करीब तीन साल से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना सरकारी अधिकारी बनने का है। वह चाहते हैं कि एक दिन उनकी मेहनत रंग लाए और वह अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाल सकें।

    हालांकि उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना भी आसान नहीं था। कई बार परीक्षा का फॉर्म भरने तक के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो जाता था। पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें खरीदने में भी आर्थिक परेशानियां सामने आती थीं। लेकिन इन परिस्थितियों ने विशाल के हौसले को कमजोर नहीं किया। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।

    अब KBC 18 ने विशाल को अपनी मेहनत और ज्ञान दिखाने का एक बड़ा मंच दिया है। 5 लाख रुपये जीतने के बाद उनके सामने 50 लाख रुपये का सवाल है। विशाल के आगे का सफर कितना लंबा होगा और क्या वह बड़ी रकम अपने नाम कर पाएंगे यह आने वाले एपिसोड में पता चलेगा। फिलहाल उनकी कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी

    MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक सीनियर मंत्री (Senior Minister) ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता को खारिज करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने तर्क दिया कि चीनी ‘बहुत महंगी’ (Sugar ‘Very Expensive’) होनी चाहिए और जोर देकर कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को चीनी बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

    राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने बुधवार को त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर विपक्षी दलों की आलोचना के जवाब में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं, और उन्होंने खुद भी ऐसी चीज़ें खाना पूरी तरह बंद कर दिया है।

    पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी नेता ने दावा किया कि चीनी की कीमतें लगातार कम हो रही हैं. उन्होंने कहा, “वैसे भी, आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं. मैं आपको बता दूं, मैं बिल्कुल भी मिठाई नहीं खाता हूं.”

    मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मेरा कहना है कि (चीनी) बहुत महंगी होनी चाहिए. (चीनी) सिर्फ़ बच्चों के लिए सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए… बुजुर्गों को चीनी बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर, खासकर आयुर्वेदिक डॉक्टर, 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए चीनी का सेवन अच्छा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा, “अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, तो कभी-कभी गुड़ खा सकते हैं, लेकिन चीनी से पूरी तरह परहेज करें।


    ‘बीजेपी नेता गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं’

    राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधने के लिए विजयवर्गीय के बयानों का सहारा लिया. उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में आए बीजेपी नेता चीनी पर अपने “बेतुके” बयानों से गरीबों और मध्यम वर्ग का अपमान और मज़ाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश बीजेपी नेताओं को देख रहा है. लोग आने वाले चुनावों में उनकी हंसी का मुंहतोड़ जवाब देंगे. तब देखेंगे कि उनकी मुस्कान बनी रहती है या वे आंसू बहाते हैं.”


    पेट्रोल में इथेनॉल और चीनी की कीमतें

    विपक्षी दल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इस नीति से चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है और इसके बजाय कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

    सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के बाद मिल-गेट कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, चीनी की खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम था।

  • रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता

    रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता


    नई दिल्ली।
    सोने (Gold) की रिकॉर्डतोड़ कीमतों (Record-Breaking Prices) ने भारत के करीब 7 लाख करोड़ रुपये के आभूषण बाजार के बुनियादी नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। पहली नजर में यह बड़ा विरोधाभास लगता है, लेकिन आम उपभोक्ता कम वजन का सोना (Low Weight Gold) खरीद रहा है, जबकि कारोबारियों की तिजोरियां रिकॉर्ड कमाई से भर रही हैं। यानी अब बाजार की वृद्धि ज्यादा ग्राम सोना बेचने से नहीं, बल्कि प्रति ग्राम अधिक वैल्यू निकालने से तय हो रही है।

    वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 17.1 फीसदी गिर गई, लेकिन खर्च की गई कुल रकम 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। इस बदलाव को भांपते हुए आभूषण कारोबारियों ने हल्के वजन, कम कैरेट, स्टड डायमंड्स और पुराने सोने की रीसाइक्लिंग को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।


    ब्रांडेड जूलरी पर बढ़ रहा भरोसा :

    जीएसटी, अनिवार्य हॉलमार्किंग और पैन कार्ड नियमों ने असंगठित सुनारों के पारंपरिक बाजार को झटका दिया है। केयरएज के निदेशक अखिल गोयल के मुताबिक, पहले ग्राहक अपने खानदानी सुनार के व्यक्तिगत संबंध पर भरोसा करते थे। लेकिन अब संगठित ब्रांड्स ने इसकी जगह मानकीकृत शुद्धता, पारदर्शी बिलिंग, आसान बायबैक व डिजिटल डिस्कवरी का ऐसा मजबूत ढांचा खड़ा किया है, जो टियर-2 व टियर-3 शहरों में भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है।


    वजन घटा फिर भी बिल बढ़ा

    आंकड़े बताते हैं कि सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण खरीदारों का व्यवहार और बाजार का ढांचा तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 15.4 फीसदी गिरकर 75.1 टन रह गई, लेकिन इसी अवधि में खर्च की गई कुल रकम 34.4 फीसदी के उछाल के साथ 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, पूरे 2026 की पहली छमाही की बात करें तो सोने की मांग वजन में 17.1 फीसदी घटी, जबकि कुल खरीदारी की वैल्यू 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ता अब बजट तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन वजन कम खरीद रहे हैं।

    इस बदलाव का सीधा फायदा संगठित और बड़े ब्रांड्स को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाइटन की जूलरी आय में 43 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसमें तनिष्क और कैरेटलेन में खरीदारों की संख्या दोहरे अंकों में बढ़ी। इसी तरह कल्याण ज्वैलर्स का समेकित राजस्व 46 फीसदी बढ़कर 10,589 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें कुल बिक्री का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग से आया।

    खुदरा बाजार में भी बड़ा बदलाव आया है। सीबीआरई के आंकड़ों के अनुसार, कुल संगठित रिटेल लीजिंग में ज्वैलरी सेक्टर की हिस्सेदारी 2019 के मात्र 2 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 8 फीसदी हो गई है। 8,000 वर्ग फुट से बड़े एक्सपीरियंस सेंटर्स और मेगा शोरूम का दबदबा 50 फीसदी तक पहुंच चुका है।


    पुराना सोना बना ग्रोथ इंजन

    महंगे अंतरराष्ट्रीय आभूषणों से बचने के लिए कंपनियों ने भारतीय घरों की तिजोरियों में पड़े सोने को रिसाइकिल करने का नया मॉडल खड़ा किया है। कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरामन के अनुसार, मई में शुरू हुए शाइन विद इंडिया अभियान के बाद जून में कंपनी के कुल राजस्व में पुराने सोने के एक्सचेंज की हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। कंपनियों को अब महंगा विदेशी सोना आयात करने के बजाय घरेलू ग्राहकों से ही कच्चा माल मिल रहा है, जिससे उनकी पूंजी की लागत घटी है और मुनाफा मार्जिन सुरक्षित हुआ है।


    आभूषण अब निवेश नहीं

    केयरएज रेटिंग्स और सीबीआरई की संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि युवा पीढ़ी के बीच सोने की पारंपरिक 22 कैरेट वाली भारी जूलरी की जगह डेली वियर और स्टाइलिश गहनों ने ले ली है। सेनको गोल्ड और तनिष्क जैसे ब्रांड्स ने 9-कैरेट और 14-कैरेट में स्टडड डायमंड जूलरी पेश की है। जो ग्राहक 22 कैरेट के भारी सोने का सेट नहीं खरीद पा रहे, वे उसी बजट में हल्के 14 कैरेट सोने के साथ हीरे जड़े आकर्षक डिजाइन खरीद रहे हैं। सेनको ने लाइफस्टाइल ब्रांड सेनेस और पुरुषों के लिए 20,000 से एक लाख रुपये के टाइटेनियम गहनों का दायरा बढ़ाया है। युवा खरीदार अब गहनों को सिर्फ लॉकर में बंद रखने वाले निवेश के बजाय रोज पहनने वाले फैशन एक्सेसरी के रूप में देख रहे हैं।

  • Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh बैटरी और 8GB RAM मिलने की संभावना, सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से स्पेसिफिकेशन सामने आए

    Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh बैटरी और 8GB RAM मिलने की संभावना, सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से स्पेसिफिकेशन सामने आए

    नई दिल्ली ।स्मार्टफोन बाजार में Oppo की A7 Pro सीरीज का विस्तार जल्द देखने को मिल सकता है। हाल ही में Oppo A7 Pro Max पेश किए जाने के बाद अब Oppo A7 Pro 5G को लेकर जानकारी सामने आई है। यह स्मार्टफोन कई सर्टिफिकेशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे चुका है, जिससे इसके संभावित डिजाइन और कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशन की जानकारी मिली है।

    Oppo A7 Pro 5G को मॉडल नंबर CPH2931 के साथ ब्राजील की राष्ट्रीय दूरसंचार एजेंसी ANATEL की लिस्टिंग में देखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी इस मॉडल को कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करने की तैयारी कर रही है। हालांकि स्मार्टफोन के आधिकारिक लॉन्च की तारीख और कीमत को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    सर्टिफिकेशन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, Oppo A7 Pro 5G में 8,000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है। यदि यह क्षमता अंतिम मॉडल में मिलती है, तो फोन को लंबे बैटरी बैकअप की जरूरत वाले उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है। बड़ी बैटरी इस फोन की प्रमुख खासियतों में शामिल हो सकती है।

    स्मार्टफोन में 8GB RAM मिलने की संभावना जताई गई है। स्टोरेज के मामले में इसे 128GB और 256GB के दो विकल्पों में उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार स्टोरेज क्षमता चुनने का विकल्प मिल सकता है।

    डिस्प्ले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक Oppo A7 Pro 5G में 6.57 इंच की स्क्रीन दी जा सकती है। हालांकि इसके पैनल का प्रकार, रिजॉल्यूशन और रिफ्रेश रेट जैसे विस्तृत स्पेसिफिकेशन अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। कंपनी की ओर से आधिकारिक पुष्टि होने के बाद इन जानकारियों की तस्वीर साफ होगी।

    फोन के डिजाइन में भी Oppo A7 Pro Max से अलग बदलाव देखने को मिल सकता है। सामने आई जानकारी के अनुसार A7 Pro 5G में कैप्सूल आकार का रियर कैमरा मॉड्यूल दिया जा सकता है। इस मॉड्यूल में दो कैमरा सेंसर के साथ रिंग जैसी फ्लैश यूनिट दिखाई देने की बात सामने आई है। संभावित ब्राउन कलर विकल्प का भी उल्लेख किया गया है।

    Oppo A7 Pro 5G इससे पहले थाईलैंड की NBTC और मलेशिया की SIRIM सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर भी दिखाई दे चुका है। अलग-अलग देशों में सर्टिफिकेशन लिस्टिंग से यह संकेत मिलता है कि फोन की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं, हालांकि इससे लॉन्च की निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं होती।

    इस सीरीज के Oppo A7 Pro Max को हाल ही में चीन में पेश किया गया है। उसमें 6.78 इंच का Full-HD+ AMOLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी गई है। इसमें Snapdragon 4 Gen 5 प्रोसेसर और 50 मेगापिक्सल का मुख्य रियर कैमरा मौजूद है।

    A7 Pro Max में 2 मेगापिक्सल का मोनोक्रोम कैमरा और 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। इसकी 10,000mAh बैटरी 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। हालांकि Oppo A7 Pro 5G के फीचर्स को A7 Pro Max के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

    Oppo A7 Pro 5G से जुड़ी मौजूदा जानकारी अभी संभावित स्पेसिफिकेशन तक सीमित है। कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद इसके कैमरा, प्रोसेसर, चार्जिंग, डिस्प्ले और कीमत से संबंधित अंतिम जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल 8,000mAh बैटरी, 8GB RAM और 128GB तथा 256GB स्टोरेज विकल्प इस आगामी स्मार्टफोन की प्रमुख चर्चित खूबियां हैं।

  • तीन साल की नई ऊंचाई पर पहुंचा चावल का निर्यात…. बढ़ती महंगाई के बीच दाम भी बढ़े

    तीन साल की नई ऊंचाई पर पहुंचा चावल का निर्यात…. बढ़ती महंगाई के बीच दाम भी बढ़े


    नई दिल्ली।
    एक तरफ जहां देश में चावल के दाम (Rice prices) में तेजी (Rise) आ रही है, वहीं इसके निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 26 प्रमुख उपभोक्ता देशों को भारत का चावल निर्यात (Rice Exports) सिर्फ पांच महीनों में तीन साल की नई उंचाई पर आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच बासमती और गैर-बासमती चावल (Non-Basmati rice) का कुल निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन तक पहुंच गया।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण खाड़ी क्षेत्रों में चावल का आयात घट गया है। इसके बावजूद भारत का निर्यात प्रभावित नहीं हुआ है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के अनुसार, पिछले तीन वर्षों की इसी अवधि (नवंबर-मार्च) के औसत की तुलना में निर्यात मूल्य में 1.1 प्रतिशत और मात्रा में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    15% बढ़े दाम तीन हफ्ते में
    पिछले दो-तीन हफ्तों में चावल की खुदरा कीमतों में करीब 15 फीसदी की तेजी आई है। कई किस्मों के चावल 15-20 रुपये प्रति किलो तक महंगे हो गए हैं। सबसे अधिक तेजी प्रीमियम बासमती में देखी जा रही है। इसका भाव 85 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। साधारण और परमल चावल की किस्मों में भी प्रति क्विंटल 100 से 500 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    दालों की खरीद के लिए खुलेंगे 500 नए केंद्र
    दलहन उत्पादकों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने और बिक्री की परेशानियों से बचाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड दोनों मिलकर देशभर में 500 नए केंद्र खोलेंगे। ये दोनों एजेंसियां किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधा दालों की खरीद करेंगी।

    नैफेड के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार के मुताबिक, खरीफ सीजन की दालें जल्द बाजार में आने वाली हैं। इन केंद्रों पर अरहर के साथ ही चना और उड़द जैसी प्रमुख दालों की खरीद होगी। दाल उत्पादन वाले राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। नैफेड देश के करीब 50 जिलों में किसानों के बीच अभियान चलाकर पोर्टल पर उनका पंजीकरण कराएगा।

  • भूत-प्रेत और खौफ का जबरदस्त तड़का! 2026 की इन 6 हॉरर फिल्मों से थिएटर में मचेगा हड़कंप

    भूत-प्रेत और खौफ का जबरदस्त तड़का! 2026 की इन 6 हॉरर फिल्मों से थिएटर में मचेगा हड़कंप


    नई दिल्ली। अगर आपको डरावनी और रहस्यमयी फिल्में देखने का शौक है तो आने वाले महीने आपके लिए बेहद खास होने वाले हैं। साल 2026 में भारतीय सिनेमा की कई हॉरर और हॉरर-कॉमेडी फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस लिस्ट में सिर्फ हिंदी फिल्में ही नहीं बल्कि तमिल और ओडिया भाषा की फिल्में भी शामिल हैं। यानी अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों को डर और रोमांच का अलग अनुभव मिलने वाला है। सितंबर से अक्टूबर के बीच कई ऐसी फिल्में रिलीज होने वाली हैं जिनसे हॉरर फिल्मों के शौकीनों को काफी उम्मीदें हैं।

    इम्मॉर्टल इस लिस्ट में सबसे पहले आने वाली फिल्मों में शामिल है। यह तमिल फैंटेसी हॉरर थ्रिलर फिल्म है जो 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का निर्देशन मरियप्पन चिन्ना ने किया है और इसमें जीवी प्रकाश कुमार तथा कयादु लोहार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। खास बात यह है कि जीवी प्रकाश कुमार के करियर की यह 25वीं फिल्म बताई जा रही है। फिल्म में हॉरर के साथ फैंटेसी और थ्रिल का भी तड़का देखने को मिलेगा।

    इसके बाद डेमोंटे कॉलोनी 3 दर्शकों को डराने के लिए तैयार है। तमिल हॉरर फ्रेंचाइजी की यह तीसरी फिल्म 10 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसका निर्देशन आर अजय ज्ञानमुथु ने किया है। फिल्म में अरुलनिथि, प्रिया भवानी शंकर, गुरु सोमसुंदरम और मीनाक्षी गोविंदराजन जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। डेमोंटे कॉलोनी नाम पहले से ही हॉरर फिल्मों के दर्शकों के बीच पहचान रखता है ऐसे में तीसरे पार्ट को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है।

    ओडिया सिनेमा भी हॉरर के मामले में पीछे नहीं है। दहान: द इविल विद इन 11 सितंबर 2026 को गणेश पूजा के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके बाद कंकना 18 सितंबर को दर्शकों के सामने आएगी। यह ओडिया फैंटेसी थ्रिलर हॉरर फिल्म है जिसका निर्देशन पृथ्वीराज पटनायक ने किया है। फिल्म में सुप्रिया नायक सूर्यमई मोहपात्रा अंकिता मोहंती और चौधरी जयप्रकाश दास जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    हिंदी सिनेमा की बात करें तो नई नवेली भी हॉरर लवर्स के लिए खास होने वाली है। यह हॉरर कॉमेडी फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को रिलीज होने वाली है और इसमें यामी गौतम मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का पोस्टर सामने आने के बाद दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। यामी इससे पहले भूत पुलिस जैसी हॉरर कॉमेडी फिल्म में भी नजर आ चुकी हैं।

    लिस्ट में शक्ति शालिनी का नाम भी शामिल है। यह एक अपकमिंग हॉरर फिल्म है जिसमें रिपोर्ट्स के मुताबिक अनीत पड्डा मुख्य भूमिका में नजर आ सकती हैं। अनीत पड्डा ने सैयारा से बॉलीवुड में डेब्यू किया था और अब हॉरर जॉनर में उनका नया अंदाज देखने को मिल सकता है। हालांकि फिल्म से जुड़ी कई जानकारियां अभी सामने आना बाकी हैं।

    कुल मिलाकर 2026 का आने वाला दौर हॉरर फिल्मों के चाहने वालों के लिए काफी रोमांचक रहने वाला है। तमिल की फैंटेसी हॉरर से लेकर ओडिया की डरावनी कहानियों और हिंदी हॉरर कॉमेडी तक दर्शकों के पास थिएटर में डर और रोमांच का मजा लेने के कई विकल्प होंगे।

  • देश में बनेगा संक्रामक रोगों की जांच का मजबूत नेटवर्क, अगले 5 साल में 732.304 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

    देश में बनेगा संक्रामक रोगों की जांच का मजबूत नेटवर्क, अगले 5 साल में 732.304 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार


    नई दिल्ली।
    देश में नई और तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (Infectious Disease) की पहचान अब दूरदराज के इलाकों में भी पहले से जल्दी हो सकेगी। सरकार (Government) ने अगले पांच साल में 732.304 करोड़ रुपये से देश के हर हिस्से में वायरल बीमारियों (Viral Diseases) की जांच के लिए नेटवर्क बनाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार उन इलाकों में नई प्रयोगशालाएं (New Laboratories) स्थापित करने पर जोर दे रही है, जहां अभी संक्रामक बीमारियों की उन्नत जांच की पर्याप्त सुविधा नहीं है।

    अब तक इस नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों और शोध संस्थानों की बड़ी भूमिका रही है। अब सरकार व्यवस्था को जिला स्तर तक ले जाने की संभावना पर काम कर रही है। हालांकि, भी संख्या तय नहीं हुई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में 167 वायरस अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं।

    सीमावर्ती इलाकों पर नजर
    सरकार दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों को लेकर खासतौर पर चिंतित है। पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे इलाकों में अब भी जांच सुविधा के विस्तार की जरूरत बताई गई है। इन क्षेत्रों में संस्थानों की उपलब्धता कम होने पर मौजूदा नियमों में विशेष प्रावधान करने की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में प्रयोगशालाओं के लिए प्रस्ताव मिल रहे हैं। लेह, दादरा एवं नगर हवेली और नागालैंड के प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन हैं।

  • मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर

    मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर


    नई दिल्ली।
    आप बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) लेते हैं, तो हजारों रुपये का प्रीमियम आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोदी सरकार सिर्फ 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर देती है. जी हां, ये सच है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana) खासी पॉपुलर है, जो एक एक्सीडेंटल बीमा स्कीम है. सरकार ने निम्न आय वर्ग वालों को बीमा का लाभ देने के लिए PMSBY की शुरुआत की थी।

    PMSBY मोदी सरकार की पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर स्कीम है, इसमें सालाना प्रीमियम देना होता है, जो सिर्फ 20 रुपये का है और 2 लाख रुपये की Insurance Cover मिल जाता है. किसी भी दुर्घटना में मृत्यु होने या फिर विकालांग होने पर सरकार तय कवरेज मुहैया कराती है।


    बीमा योजना का ये नियम जान लें

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में बीमाधारक व्यक्ति की अगर एक्‍सीडेंट में मृत्यु हो जाती है या फिर वो पूरी तरह से विकलांग हो जाता है, तो फिर दो लाख रुपये का कवर दिया जाता है. वहीं अगर व्यक्ति किसी दुर्घटना के दौरान आंशिक विकलांग होता है, तो भी सरकार एक लाख रुपये का कवर देती है।


    ये है बीमा योजना की ऐज लिमिट

    आज के समय में 20 रुपये में सिर्फ एक प्याली चाय आती है, लेकिन आप इस एक चाय का पैसा बचाकर 2 लाख रुपये का बीमा करा सकते हैं और भी सरकार की गारंटी के साथ. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का लाभ लेना संकट के समय परिवार को आर्थिक रूप से मदद कर सकता है. इस स्कीम को सालाना आधार पर रिन्यू किया जाता है. इस योजना का लाभ 18 से 70 साल तक की उम्र के लोग ले सकते हैं।


    PMSBY में ऑटो डेबिट की सर्विस

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए आपके पास एक्टिव बैंक खाता होना अनिवार्य है. एक से ज्यादा बैंक खाते होने पर भी सिर्फ एक ही बैंक से इस योजना के तहत बीमा कवर ले सकते हैं. हर साल 1 जून को या इससे पहले ‘ऑटो डेबिट’ सुविधा के जरिए आपके बैंक खाते से 20 रुपये के प्रीमियम की कटौती की जाएगी. बैंक खाते से बीमा प्रीमियम का पैसा सीधे डेबिट होता है. इसलिए अपने बैंक खाते में कम से कम 20 रुपये की राशि जरूर रखें. PMSBY के तहत एनरोलमेंट पीरियड 1 जून से 31 मई तक होता है।

    सरकार ने अब तक किया इतना पेमेंट
    PMSBY Scheme को मोदी सरकार ने 9 मई 2015 को लॉन्च किया था. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसकी शुरुआत से मई 2024 तक ही सरकार को कुल 1,80,812 दावे प्राप्त हुए और 1,37,404 दावों का क्लेम सेटलमेंट किया गया था. इस पर सरकार ने 2,728.85 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया. वहीं जून 2024 से बीते साल 16 अप्रैल 2025 तक योजना में 36.86 करोड़ नए नामांकन जोड़े गए. इस अवधि में 33,906 दावों में से 19,024 का सेटलमेंट हुआ और सरकार ने 377.73 करोड़ रुपये की राशि क्लेम पेमेंट में खर्च की थी।

  • बैंकिंग सेवाओं बनेंगी सुरक्षित… डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों में लागू होगा AI मॉडल

    बैंकिंग सेवाओं बनेंगी सुरक्षित… डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों में लागू होगा AI मॉडल


    नई दिल्ली।
    बैंकिंग सेवाओं (Banking services) को सुरक्षित (Safe) बनाने और डिजिटल फ्रॉड (Digital fraud) रोकने के लिए बैंकों में एआई मॉडल (AI Model) जल्द लागू होगा। धोखाधड़ी को समय रहते पहचानने के लिए डिजिटल पेमेंट्स इंटलीजेंस प्लेटफार्म सिस्टम (Digital Payments Intelligence Platform System) बड़े पैमाने पर लागू होगा।

    सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं से लेकर एमएसएमई ऋण बाजार तक डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम की कोशिश कर रही है। इससे वित्तीय क्षेत्र में एआई और मशीन लर्निंग के जरिये जवाबदेही, पारदर्शिता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

    आरबीआई एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े सभी सुरक्षा मॉडलों को इसमें शामिल करने की तैयारी में है। थर्ड पार्टी एआई से उत्पन्न जोखिम को भी ध्यान में रखा जाएगा। ग्राहकों के सीधे संपर्क में आने वाली एआई प्रणालियों के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय लागू होंगे।