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  • E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं

    E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं


    नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल अपनी नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 ईंधन को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारी पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।

    हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उनसे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम किया है और फिलहाल इसे 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में E20 नीति में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

    E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य इसके इस्तेमाल के जरिए विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और देश में वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत से जोड़कर देखा जाता है।

    पुरी ने दावा किया कि E20 ईंधन को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ईंधन वाहनों के अनुकूल है। हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि वर्ष 2003 से पहले निर्मित कुछ पुराने वाहनों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन की उम्र और निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन संबंधी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    E20 के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुंचने की शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि ईंधन के परिवहन और भंडारण से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने बताया कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों का उपयोग अन्य कामों में भी किया जाता था। इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बड़े पैमाने पर ऐसी समस्या होती तो इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता। हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन के मॉडल उसकी तकनीकी अनुकूलता और रखरखाव जैसी बातों पर निर्भर कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने E20 नीति से देश को 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत होने का दावा भी किया। उनके मुताबिक इसमें से 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिला है और किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिला है। सरकार का तर्क है कि जैव ईंधन की मांग बढ़ने से कृषि आधारित उद्योगों को बाजार मिल सकता है।

    इसी बीच सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि E100 वाहनों की अनुमति और सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा दो अलग-अलग नीतिगत विषय हैं।

    फिलहाल सरकार ने E20 से आगे मिश्रण बढ़ाने की योजना से इनकार किया है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की पुस्तिका में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करें और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लें।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर आठवले की नजर, RPI में शामिल होने का फिर दिया ऑफर

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर आठवले की नजर, RPI में शामिल होने का फिर दिया ऑफर


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शामिल होने का न्योता दिया गया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास आठवले ने दीपके को अपनी पार्टी से जुड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। आठवले का कहना है कि यदि अभिजीत दीपके उनकी पार्टी में शामिल होते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और उनके राजनीतिक सपने को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी है।

    रामदास आठवले ने यह बयान नागपुर में मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके भी आंबेडकरवादी हैं और यदि वे उनकी पार्टी के साथ जुड़ते हैं तो संगठन को मजबूती मिल सकती है। आठवले के मुताबिक उन्होंने पहले भी दीपके से पार्टी में आने को कहा था। हालांकि अभी तक अभिजीत दीपके ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि उनकी ओर से पार्टी में शामिल होने का न्योता खुला है और दीपके आने का फैसला करते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब रामदास आठवले ने अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिया हो। इससे पहले अगस्त में भी उन्होंने दीपके को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया यानी RPI में शामिल होने का न्योता दिया था। उस समय आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को साकार करने और उनकी राजनीतिक विचारधारा को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। इसके बाद भी वह कई मौकों पर दीपके को लेकर बयान दे चुके हैं।

    आठवले ने अभिजीत दीपके को अपने समाज से जुड़ा बताते हुए उनके साथ राजनीतिक सहयोग की संभावना जताई है। हालांकि उन्होंने CJP और उसके समर्थकों की कुछ गतिविधियों तथा बयानों पर नाराजगी भी जाहिर की है। इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि अभिजीत दीपके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे स्पष्ट है कि आठवले एक ओर दीपके को अपनी पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण दे रहे हैं तो दूसरी ओर उनके कुछ राजनीतिक बयानों से असहमति भी जता चुके हैं।

    दूसरी तरफ अभिजीत दीपके पहले दिए गए इस प्रस्ताव पर सरकार और भाजपा के रवैये को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अगस्त में उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए तंज कसा था कि कुछ समय पहले तक उन्हें राष्ट्रविरोधी बताया जा रहा था और अब उन्हें पार्टी में आने का न्योता दिया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी कि क्या वह भविष्य में किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ेंगे या अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगे।

    अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल उनकी पार्टी का चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है। उनके मुताबिक CJP अभी एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगी। इसका अर्थ है कि संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय अपने मुद्दों को उठाने और सरकार तथा राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने की रणनीति पर ध्यान देना चाहता है।

    रामदास आठवले के ताजा बयान के बाद अभिजीत दीपके के अगले कदम पर नजर रहेगी। फिलहाल उनकी ओर से न्योते को स्वीकार करने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि दीपके अपनी मौजूदा राजनीतिक रणनीति पर कायम रहते हैं या भविष्य में RPI के साथ जुड़ने पर विचार करते हैं।

  • कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, चारों सीटों पर हारी पार्टी; बैलेट पेपर पर भी उठे सियासी सवाल

    कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, चारों सीटों पर हारी पार्टी; बैलेट पेपर पर भी उठे सियासी सवाल


    नई दिल्ली। कर्नाटक विधान परिषद सदस्य यानी MLC चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्य में सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों सीटों पर हार गई। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की जबकि जनता दल सेक्युलर यानी JDS को एक सीट मिली। इन नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। खास तौर पर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस की हार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस लंबे समय से चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के इस्तेमाल पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग करती रही है। ऐसे में कर्नाटक के नतीजों को लेकर भाजपा और JDS ने कांग्रेस पर तंज कसा है।

    कर्नाटक में भाजपा और JDS ने मिलकर चुनाव लड़ा था। परिणाम में भाजपा ने उत्तर पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र दक्षिण पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। वहीं बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट JDS के खाते में गई। चारों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

    बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को हराया। रंगनाथ को 10 हजार 810 वोट मिले जबकि पुट्टन्ना को 9 हजार 902 वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर जीत के बाद JDS नेताओं ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और बैलेट पेपर से मतदान को लेकर उसके रुख पर सवाल उठाए। पार्टी नेता निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस EVM को लेकर आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि चुनाव बैलेट पेपर से हुआ था। उन्होंने भाजपा और JDS के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई भी दी।

    उत्तर पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य शशिल जी नामोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को हराया। नामोशी को 15 हजार 596 वोट मिले जबकि मट्टूर को 12 हजार 299 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 3 हजार 297 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा ने अपना प्रभाव बरकरार रखा।

    दक्षिण पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के केएम सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंते मठ को बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एसवी संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिंबिकई को हराया। इन दोनों सीटों पर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने अपना प्रदर्शन मजबूत किया।

    बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का आंकड़ा भी उल्लेखनीय रहा। यहां 81.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 27 हजार 405 मतदाताओं में से 22 हजार 468 लोगों ने मतदान किया। इनमें 21 हजार 56 मत वैध पाए गए जबकि 1 हजार 857 मत अवैध घोषित किए गए।

    कर्नाटक के इन नतीजों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी विधान परिषद की चारों सीटें नहीं जीत सकी। दूसरी ओर भाजपा और JDS गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत हासिल की। विपक्ष अब इन परिणामों को कांग्रेस के चुनावी दावों पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि विधान परिषद के इन चुनावों के नतीजों से पूरे राज्य के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग आम विधानसभा चुनाव से अलग है।

  • पाकिस्तान पर FATF का शिकंजा कसने की तैयारी, मसूद अजहर और आतंकी फंडिंग पर उठेंगे सवाल

    पाकिस्तान पर FATF का शिकंजा कसने की तैयारी, मसूद अजहर और आतंकी फंडिंग पर उठेंगे सवाल


    नई दिल्ली। पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है। भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की बैठक में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत यह सवाल उठाएगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जा चुके मसूद अजहर की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। हालांकि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    रिपोर्ट के अनुसार 28 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में FATF की पूर्ण बैठक आयोजित होनी है। भारत ने इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने के लिए सहयोगी देशों के राजनयिकों और संगठन के प्रमुख सदस्य देशों से संपर्क किया है। बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों और आतंकवादी संगठनों की फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होने की उम्मीद है। भारत का जोर इस बात पर रह सकता है कि पाकिस्तान के दावों के साथ कार्रवाई के प्रमाण भी सामने आने चाहिए।

    इस पूरे मामले में मसूद अजहर भारत के लिए प्रमुख मुद्दा है। जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर का नाम संसद पर 2001 में हुए हमले पठानकोट एयरबेस पर 2016 में हुए हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले जैसे मामलों से जुड़ा रहा है। भारत लंबे समय से उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC 814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत को मसूद अजहर समेत तीन आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा था। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने की बात कही थी लेकिन तालिबान शासन ने इस दावे को खारिज कर दिया। भारत इस मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान से यह सवाल कर सकता है कि मसूद अजहर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और उसके नेटवर्क को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद सहित कुछ अन्य आतंकवादियों से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई के कदम उठाए हैं लेकिन मसूद अजहर के खिलाफ ठोस कार्रवाई के पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान पहले भी FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। वर्ष 2018 से 2022 तक उसे इस सूची में रखा गया था। उस दौरान आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ व्यवस्था मजबूत करने में कमियों को लेकर सवाल उठे थे। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की फंडिंग रोकने तथा संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर भी पाकिस्तान पर दबाव रहा था। FATF की निगरानी के बाद पाकिस्तान ने कई सुधारात्मक कदम उठाए और बाद में उसे ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

    FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने का अर्थ है कि किसी देश की वित्तीय व्यवस्था में आतंकवाद के वित्तपोषण या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर कमियां पाई गई हैं और उन्हें दूर करने के लिए निगरानी की जरूरत है। ऐसी सूची में शामिल होने से देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय छवि प्रभावित हो सकती है और वित्तीय संस्थानों के साथ लेनदेन पर अतिरिक्त जांच का दबाव बढ़ सकता है।

    अब पेरिस में होने वाली बैठक पर नजर रहेगी। भारत मसूद अजहर के मामले को उठाकर आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की मांग कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने का फैसला FATF की समीक्षा और सदस्य देशों के आकलन पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे संभावित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • CJI सूर्यकांत के खिलाफ पोस्ट पर घिरी केरल कांग्रेस, मानी गलती; न्यायपालिका के सम्मान का दिया भरोसा

    CJI सूर्यकांत के खिलाफ पोस्ट पर घिरी केरल कांग्रेस, मानी गलती; न्यायपालिका के सम्मान का दिया भरोसा



    नई दिल्ली। केरल कांग्रेस ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर बिना शर्त माफी मांग ली है। पार्टी ने स्वीकार किया है कि उसके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रकाशित पोस्ट की भाषा अनुचित थी और इसे पार्टी नेतृत्व की जानकारी या मंजूरी के बिना साझा किया गया था। विवाद बढ़ने के बाद पार्टी ने पोस्ट को हटा दिया और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की। कांग्रेस ने अपने जवाब में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और भारत के मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक पद के प्रति सम्मान दोहराते हुए भविष्य में ऐसी घटना नहीं होने देने का भरोसा दिया है।

    केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी KPCC के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और अधिवक्ता मीनेश दुबे की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के जवाब में यह माफी मांगी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि 12 अक्टूबर को उसके आधिकारिक एक्स अकाउंट से की गई पोस्ट कांग्रेस की आधिकारिक नीति या विचारधारा को नहीं दर्शाती थी। नेतृत्व ने भी इन टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए उनसे असहमति जताई थी।

    दरअसल विवादित पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित करते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की गई थी। पोस्ट में कहा गया था कि यदि कानून व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदारी संभालने के लिए खोजा जा सकता है। पोस्ट सामने आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद पार्टी ने पोस्ट हटा दी और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति विजय थोट्टाथिल को पद से हटा दिया। उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए भी कहा गया।

    कानूनी नोटिस के जवाब में केरल कांग्रेस ने माना कि पोस्ट की भाषा मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक पद के प्रति अनादर प्रदर्शित करती थी। पार्टी ने कहा कि ऐसी सामग्री को आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए था। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक फैसलों से असहमति जताना और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल करना अलग-अलग बातें हैं। राजनीतिक मतभेद किसी भी स्थिति में अनुचित टिप्पणी को सही नहीं ठहरा सकते।

    इस मामले में पार्टी ने अपनी सोशल मीडिया व्यवस्था की कमियों को भी स्वीकार किया है। KPCC के मुताबिक आधिकारिक अकाउंट तक पहुंच रखने वाले लोगों के अधिकारों और पोस्ट प्रकाशित करने से पहले मंजूरी लेने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। पार्टी ने कहा कि डिजिटल संचार के लिए किसी बाहरी एजेंसी की सेवाएं लेने से आधिकारिक अकाउंट की निगरानी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। प्रकाशित होने वाली हर सामग्री की उचित जांच और निगरानी जरूरी है।

    पार्टी अब पोस्ट तैयार करने से लेकर उसकी समीक्षा और प्रकाशन तक की प्रक्रिया की जांच करेगी। इसमें अकाउंट की अनुमति से जुड़े विवरण और संबंधित आंतरिक संवाद की भी समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी जांच की जा सके।

    सनी जोसेफ ने विवादित पोस्ट को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित करने या मंजूरी देने से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने संचार व्यवस्था में संभावित चूक को गंभीरता से लेते हुए सुधार की जरूरत स्वीकार की। पार्टी ने भरोसा दिया कि माफी और स्पष्टीकरण को उसी आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर साझा किया जाएगा जहां विवादित पोस्ट प्रकाशित हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद केरल कांग्रेस के सामने अपनी डिजिटल संचार व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की चुनौती है।

  • ट्रेनों में अब रात 11 से सुबह 5 बजे तक मोबाइल चार्ज नहीं कर सकेंगे यात्री… चार्जिंग पॉइंट रहेंगे बंद

    ट्रेनों में अब रात 11 से सुबह 5 बजे तक मोबाइल चार्ज नहीं कर सकेंगे यात्री… चार्जिंग पॉइंट रहेंगे बंद


    जम्मू।
    भारतीय रेल (Indian Railways) में अब यात्रा के दौरान रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक मोबाइल फोन चार्जिंग पॉइंट (Mobile Phone Charging Point) की सुविधा नहीं मिलेगी। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने यात्री सुरक्षा के मद्देनजर सभी जोनल रेलवे को इस अविध में ट्रेन के डिब्बों के मोबाइल फोन चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य रूप से बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

    बोर्ड ने दक्षिण पूर्व रेलवे में हुए एक हादसे के बाद ये निर्देश दोबारा जारी कर उन्हें सख्ती से लागू करने की हिदायत दी है। बोर्ड ने अपने पत्र में बताया कि चार्जिंग पॉइंट बंद नहीं होने से एक यात्री का पावर बैंक फट गया था।

    रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों को निर्देशों के प्रति जागरूक करने, आवश्यक प्रशिक्षण देने और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को औचक निरीक्षण करने को भी कहा गया है।

  • पूर्व मिस स्विट्जरलैंड ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया रेप का आरोप… अमेरिका में मची हलचल

    पूर्व मिस स्विट्जरलैंड ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया रेप का आरोप… अमेरिका में मची हलचल


    वाशिंगटन।
    पूर्व मिस स्विट्जरलैंड (Former Miss Switzerland) बीट्रिस क्यूल (Beatrice Kühl) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) पर 1993 में न्यूयॉर्क के होटल में रेप करने का आरोप लगाया है। क्यूल का दावा है कि घटना के दौरान उनकी ड्रेस फट गई थी और उनके शरीर पर चोटें आई थीं। अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के डेमोक्रेटिक सदस्यों की नई रिपोर्ट में उनके आरोपों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में ट्रंप और यौन अपराधों के दोषी जेफ्री एपस्टीन के कथित संबंधों की भी जांच की गई है। व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट को राष्ट्रपति को निशाना बनाने की राजनीतिक कोशिश बताया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 1993 में क्यूल 24 साल की थीं और मॉडलिंग के साथ फाइनेंसियल सर्विस के सेक्टर में काम करती थीं। जिल हर्थ ने उन्हें अटलांटिक सिटी और न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले डोनाल्ड जे ट्रंप अमेरिकन ड्रीम पेजेंट में शामिल होने के लिए बुलाया था। इस प्रतियोगिता में 16 से 22 साल की युवतियां हिस्सा लेती थीं। क्यूल के मुताबिक, न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल में आयोजित प्रेस लंच के दौरान उनकी मुलाकात ट्रंप से हुई। उस समय यह होटल ट्रंप के मालिकाना हक में था। आरोप है कि ट्रंप ने उन्हें वीजा दिलाने और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में दाखिला पाने में मदद करने का भरोसा दिया। इसके बाद एपस्टीन ने भी उनसे संपर्क किया और इसी तरह की मदद का प्रस्ताव दिया। उसने ट्रंप की फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो संपत्ति में आयोजित होने वाली पार्टी में आने का न्योता भी दिया।


    ‘शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान’

    रिपोर्ट में क्यूल के हवाले से बताया गया है कि बाद में ट्रंप के एक प्रतिनिधि ने उन्हें राष्ट्रपति से मिलने के लिए होटल के ऊपर बने एक कमरे में चलने को कहा। करियर और पढ़ाई में मदद मिलने की उम्मीद में वह उसके साथ कमरे में चली गईं। क्यूल का आरोप है कि कमरे में ट्रंप ने पीछे से उन्हें पकड़ लिया और रेप किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित घटना में उनकी ड्रेस फट गई और शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान पड़ गए। उन्हें खून भी निकलने लगा था। क्यूल ने इस घटना को बेहद क्रूर बताया। आरोप है कि इसके बाद ट्रंप ने वीजा और यूनिवर्सिटी में दाखिले में मदद का भरोसा दोहराया और उन्हें चुप रहने के लिए कहा।


    ‘ट्रंप ने क्यूल से दोबारा किया था संपर्क’

    रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे कहा था, ‘शो जारी रहना चाहिए।’ क्यूल ने डर और सदमे की हालत में प्रतियोगिता पूरी की और फिर स्विट्जरलैंड लौट गईं। बाद में उन्होंने ट्रंप की ओर से आयोजित हवाई की एक अन्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। कुछ महीने बाद ट्रंप ने स्विट्जरलैंड में उनसे दोबारा संपर्क किया, लेकिन क्यूल ने मदद का प्रस्ताव ठुकरा दिया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लॉरेन बिस ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक सांसद राष्ट्रपति ट्रंप की उपलब्धियों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। ट्रंप ने एपस्टीन को अपने मार-ए-लागो क्लब से निकाल दिया था और एपस्टीन से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति को पूरी तरह पाक-साफ बताया।

  • कैंसर के 11,000 के इंजेक्शन के लिए वसूले 1.30 लाख…. SC ने दवाओं की कीमतों पर उठाए सवाल…जताई नाराजगी

    कैंसर के 11,000 के इंजेक्शन के लिए वसूले 1.30 लाख…. SC ने दवाओं की कीमतों पर उठाए सवाल…जताई नाराजगी


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दवाओं की कीमतों (Medicines Prices) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि क्या पूरा सिस्टम (Entire System) दवा कंपनियों (Pharmaceutical Companies) की मदद करने में जुटा है? दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और दुकानदारों को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच भारी अंतर पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि सरकार की नजरों के सामने यह सब हो रहा है। क्या इस तरह की मनमानी की अनुमति दी जा सकती है?

    दवाओं की कीमतों से जुड़े दो मामलों पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि यह संस्था पूरी तरह निष्क्रिय नजर आती है।


    कैंसर के इंजेक्शन की कीमत 11 हजार से सीधे 1.30 लाख रुपये कैसे?

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन का उदाहरण देते हुए दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सवाल उठाए।

    अदालत ने बताया कि एक दवा कारोबारी की पत्नी का निजी अस्पताल में कैंसर का इलाज चल रहा था। कारोबारी ने अस्पताल को बताया कि वह खुद दवा विक्रेता है और उसे कीमोथेरेपी का इंजेक्शन 11,000 रुपये में मिलता है। इसके बावजूद अस्पताल ने उसी इंजेक्शन को उस कीमत पर देने से इनकार कर दिया और इसके लिए 1.30 लाख रुपये वसूले। अदालत ने सवाल किया कि इतनी बड़ी कीमत का कोई औचित्य कैसे हो सकता है? आखिर इस अंतर की वजह क्या है और यह पैसा कहां जा रहा है?

    केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया के कई देशों के मुकाबले कम हैं। इस पर अदालत ने कहा कि जब मरीजों और उनकी जिंदगी का सवाल हो, तो क्या इस तरह की पूंजीवादी सोच अपनाई जानी चाहिए?


    दवाओं की कीमतों पर केंद्र की नीति से संतुष्ट नहीं अदालत

    केंद्र की ओर से कहा गया कि सरकार दवाओं की कीमतों से जुड़ी नीतियों में लगातार बदलाव और सुधार कर रही है। हालांकि, अदालत ने इस दलील पर असहमति जताई। पीठ ने कहा कि सरकार जिस प्रक्रिया को कीमतों में संतुलन बनाने की कोशिश बता रही है, वह बेहद असंगत है। एक इंजेक्शन की कीमत 11,000 रुपये से बढ़कर 1.30 लाख रुपये हो जाना किसी भी तरह से संतुलन बनाने की प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता।

    अदालत ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर मौजूदा व्यवस्था को ‘लूट और डकैती’ करार दिया। पीठ ने कहा कि इस व्यवस्था का खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले से ही मुश्किल परिस्थितियों में हैं।


    कैंसर की दवाओं पर 30 फीसदी ट्रेड मार्जिन की सीमा

    सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को भी कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा था कि जब कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय की जा सकती है, तो दूसरी दवाओं के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत की आलोचना के बाद केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 फीसदी तक ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करने का फैसला किया था। इस फैसले पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की 8 अक्टूबर को हुई 151वीं बैठक में विचार किया गया था।

    सरकार के इस कदम से मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस कदम से संतुष्ट नहीं था। अदालत ने कहा कि इस फैसले में मरीजों के लिए खुशी की कोई खास बात नहीं है।


    11 रुपये की सलाइन बाजार में 270 रुपये में बिक रही

    अदालत ने दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की कीमतों में अंतर के कई अन्य उदाहरण भी दिए।
    – सलाइन ड्रिप: अदालत ने कहा कि एक सलाइन ड्रिप, जिसकी वास्तविक कीमत 11 रुपये है, बाजार में 270 रुपये में बेची जा रही है।
    – हार्ट स्टेंट: भारत में बने एक कार्डियक स्टेंट की कीमत करीब 5,000 रुपये बताई गई, जबकि अस्पताल इसे 25,000 रुपये से अधिक में बेच रहे हैं।
    – एजिथ्रोमाइसिन: आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले इस एंटीबायोटिक की वास्तविक कीमत करीब 28 रुपये है, जबकि इसे 70 रुपये से अधिक में बेचा जा रहा है।
    – अदालत ने इन उदाहरणों के आधार पर दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की कीमतों में अंतर को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए।


    सरकार ने क्या दी दलील?

    केंद्र सरकार का कहना है कि दवाओं की कीमतों पर एक सीमा से अधिक नियंत्रण नहीं लगाया जा सकता। सरकार के मुताबिक, कारोबार में पर्याप्त मार्जिन मिलने से दवाओं को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) के तहत आने वाली दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंच रही हैं, तो उन्हें उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि असली सवाल यह है कि किन दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में रखा जाना चाहिए और किन्हें इससे बाहर रखा जाना चाहिए। दवाओं की कीमतों से जुड़े दोनों मामलों में दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

  • नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी

    नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी


    मुंबई/गांधीनगर।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) को नर्मदा जल विवाद (Narmada Water Dispute) के तहत गुजरात के उकाई बांध से 5 TMC पानी मिलेगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की बैठक में महाराष्ट्र के हिस्से का पानी उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित बताए गए हैं।

    जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने महाराष्ट्र के लिए कुल 10 TMC पानी आवंटित किया है. इसमें से 5 TMC पानी डायवर्जन नहर के जरिए दिया जाएगा, जबकि बाकी 5 TMC पानी गुजरात के उकाई बांध से उपलब्ध कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक में उकाई बांध से 5 TMC पानी छोड़े जाने की मंजूरी मांगी. उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक में महाराष्ट्र को उसके हिस्से का पानी देने का निर्णय लिया गया था।


    सीआर पाटिल ने दिए जरूरी निर्देश

    विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक में आवश्यक निर्देश दिए. बैठक में नर्मदा जल बंटवारे और महाराष्ट्र को उसके निर्धारित हिस्से का पानी उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी शामिल हुए।


    सूखे के बीच पानी की मांग

    महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच पानी की उपलब्धता का मुद्दा अहम हो गया है. जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित हैं. ऐसे में नर्मदा जल बंटवारे के तहत निर्धारित पानी उपलब्ध होने से राज्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, पानी की आपूर्ति कब शुरू होगी और इसका वितरण किन क्षेत्रों में किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।


    नर्मदा परियोजना की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा

    बैठक के दौरान फडणवीस ने नर्मदा परियोजना के तहत महाराष्ट्र की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी. अब उकाई बांध से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया, आपूर्ति का समय और संबंधित व्यवस्थाओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • करवा चौथ पर इस बार ग्रहों का खास संयोग, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जानें व्रत का सही समय

    करवा चौथ पर इस बार ग्रहों का खास संयोग, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जानें व्रत का सही समय


    नई दिल्ली। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था प्रेम और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर गुरुवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार पर्व पर कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं जिन्हें दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग इस पर्व को विशेष बना रहा है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह से चंद्रमा के दर्शन तक उपवास करेंगी और शाम को विधि विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।

    ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार करवा चौथ की चतुर्थी तिथि 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 29 अक्टूबर की रात 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का संबंध चंद्रमा से माना जाता है जबकि मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। चंद्रमा को शीतलता सुंदरता और मन का कारक माना जाता है जबकि मंगल ऊर्जा और कल्याण से जुड़ा ग्रह है। इसी कारण इन नक्षत्रों का संयोग करवा चौथ के धार्मिक महत्व को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    इस बार ग्रहों की स्थिति को लेकर भी विशेष चर्चा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार तुला राशि में सूर्य बुध और शुक्र की उपस्थिति से त्रिग्रही योग बनने की बात कही गई है। इसके साथ बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग का भी उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योग सुख समृद्धि और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य के प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि इन योगों का व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और अन्य ज्योतिषीय परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकता है।

    करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

    करवा चौथ के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। बरेली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान महिलाएं करवा माता और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। पूजा में करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करने की परंपरा है। महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं और करवा में जल भरकर विधि विधान से पूजन करती हैं। शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया जाता है।

    चंद्रोदय के बाद पूरा होगा व्रत

    बरेली में इस बार चंद्रोदय रात 8 बजकर 2 मिनट पर होने का अनुमान बताया गया है। व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। चंद्रोदय का वास्तविक समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण कुछ अलग दिखाई दे सकता है इसलिए अपने शहर के समय की जानकारी अवश्य लें।

    करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि पति पत्नी के बीच प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन परिवार एक साथ पूजा की तैयारी करता है और त्योहार की खुशियां साझा करता है। शुभ संयोगों के बीच महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख शांति और खुशहाली की कामना करेंगी। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए और व्रत खोलते समय हल्का भोजन तथा पर्याप्त पानी लेना चाहिए।