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  • थलाइवा के फैंस के लिए डबल खुशखबरी जेलर 2 के बाद इस फिल्म में दिखेंगे रजनीकांत डॉक्टर का निभाएंगे किरदार

    थलाइवा के फैंस के लिए डबल खुशखबरी जेलर 2 के बाद इस फिल्म में दिखेंगे रजनीकांत डॉक्टर का निभाएंगे किरदार


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत के फैंस के लिए एक साथ दो बड़ी खुशखबरियां सामने आई हैं। अभिनेता की बहुप्रतीक्षित फिल्म जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब उनका अगला प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रजनीकांत ने खुद अपने आगामी प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी साझा की है। इस फिल्म का नाम धर्मन बताया जा रहा है और इसकी शूटिंग फिलहाल जारी है। खास बात यह है कि इस फिल्म में रजनीकांत एक डॉक्टर की भूमिका में दिखाई देंगे। ऐसे में फैंस को सुपरस्टार का एक बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिल सकता है।

    रजनीकांत ने बताया कि जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है और फिल्म अब पोस्ट प्रोडक्शन के चरण में है। जेलर 2 को नेल्सन दिलीपकुमार निर्देशित कर रहे हैं। यह 2023 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म जेलर का सीक्वल है। पहले भाग की सफलता के बाद इसके दूसरे पार्ट को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म में पहले पार्ट से जुड़े कई कलाकारों की वापसी भी हो रही है। राम्या कृष्णन विनायकन मिर्ना योगी बाबू और शिवराजकुमार जैसे कलाकार सीक्वल में नजर आने वाले हैं। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी एक बार फिर अनिरुद्ध रविचंदर के पास है।

    जेलर 2 की रिलीज को लेकर भी फैंस के बीच खासा उत्साह है। फिल्म 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। ऐसे में रजनीकांत एक बार फिर अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का मनोरंजन करते दिखाई देंगे। जेलर के पहले भाग ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और दुनियाभर में करीब 600 से 650 करोड़ रुपये की कमाई करने वाली बड़ी भारतीय फिल्मों में शामिल हुई थी। यही वजह है कि सीक्वल से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    वहीं जेलर 2 के बाद रजनीकांत जिस फिल्म में व्यस्त हैं उसे धर्मन बताया जा रहा है। इस फिल्म का निर्देशन अश्वथ मारिमुथु कर रहे हैं जिन्हें ड्रैगन जैसी फिल्म के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म की शूटिंग अपने दूसरे शेड्यूल में पहुंच चुकी है। फिल्म में रजनीकांत का किरदार डॉक्टर का होगा। यह भूमिका उनके अब तक के कई चर्चित किरदारों से अलग हो सकती है और यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी से चर्चा तेज हो गई है।

    धर्मन की एक और खास बात यह बताई जा रही है कि फिल्म से कमल हासन भी जुड़े हुए हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक कमल हासन फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं और रजनीकांत के साथ इसमें एक्टिंग भी कर रहे हैं। अगर दोनों दिग्गज कलाकार एक ही प्रोजेक्ट में स्क्रीन पर नजर आते हैं तो यह सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद खास मौका होगा। हालांकि फिल्म की कहानी और दोनों कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    रजनीकांत के लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहने से साफ है कि उनका स्टारडम आज भी पूरी मजबूती के साथ कायम है। एक तरफ जेलर 2 जैसी बड़े स्तर की एक्शन एंटरटेनर फिल्म रिलीज के लिए तैयार है तो दूसरी तरफ धर्मन में वह डॉक्टर के किरदार के जरिए नया रंग दिखाने वाले हैं। अब फैंस को इंतजार है कि जेलर 2 में थलाइवा का एक्शन अवतार कितना धमाल मचाता है और उसके बाद धर्मन में उनका नया किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • रवींद्र जडेजा से लेकर आंद्रे रसेल तक की जगह भरने का मौका! IPL 2027 में इन 4 टीमों को चाहिए बेन स्टोक्स

    रवींद्र जडेजा से लेकर आंद्रे रसेल तक की जगह भरने का मौका! IPL 2027 में इन 4 टीमों को चाहिए बेन स्टोक्स


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग में वापसी कर सकते हैं। लंबे समय से आईपीएल से दूर चल रहे स्टोक्स अगर आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन में अपना नाम दर्ज कराते हैं तो उन पर फ्रेंचाइजियों के बीच जबरदस्त बोली देखने को मिल सकती है। स्टोक्स ऐसे खिलाड़ी हैं जो बल्ले और गेंद दोनों से मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि उनकी उपलब्धता कई टीमों के लिए बेहद आकर्षक विकल्प बन सकती है।

    बेन स्टोक्स ने आईपीएल में अब तक तीन फ्रेंचाइजियों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स के साथ आईपीएल डेब्यू किया था। इसके बाद 2018 से 2021 तक वह राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। 2023 में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से आईपीएल मुकाबला खेला था। चेन्नई ने उन्हें 16.25 करोड़ रुपये की बड़ी कीमत पर अपने साथ जोड़ा था। आईपीएल में स्टोक्स के नाम 45 मैचों की 44 पारियों में 935 रन हैं और उनका स्ट्राइक रेट करीब 134 का रहा है। इस दौरान उन्होंने दो शतक और दो अर्धशतक भी लगाए हैं।

    अगर स्टोक्स अगले मिनी ऑक्शन में उतरते हैं तो चेन्नई सुपर किंग्स उन पर दोबारा बड़ा दांव लगा सकती है। टीम के लिए ऑलराउंडर विभाग में बड़ा बदलाव आया है और उसे मिडिल ऑर्डर में अनुभव के साथ गेंदबाजी का विकल्प देने वाले खिलाड़ी की जरूरत हो सकती है। स्टोक्स इस भूमिका में फिट बैठते हैं। चेन्नई के साथ उनका पिछला कार्यकाल चोटों से प्रभावित रहा था लेकिन उनकी ऑलराउंड क्षमता को देखते हुए फ्रेंचाइजी उन्हें फिर से टीम में शामिल करने की कोशिश कर सकती है।

    राजस्थान रॉयल्स भी स्टोक्स के लिए मजबूत दावेदार मानी जा सकती है। स्टोक्स इस टीम के साथ पहले खेल चुके हैं और राजस्थान के लिए उनके बल्ले से बड़ी पारियां भी देखने को मिली हैं। टीम को मध्यक्रम में अनुभव और दमदार ऑलराउंड विकल्प की जरूरत हो सकती है। स्टोक्स का पुराना जुड़ाव राजस्थान को उनके लिए बोली लगाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

    तीसरी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स हो सकती है। आंद्रे रसेल के जाने के बाद टीम को पावर हिटिंग ऑलराउंडर की कमी महसूस हो सकती है। स्टोक्स बल्ले से बड़े शॉट लगाने के अलावा जरूरत पड़ने पर गेंद से भी योगदान दे सकते हैं। इतना ही नहीं उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी का अनुभव भी है। ऐसे में अगर केकेआर को नेतृत्व और ऑलराउंड क्षमता वाला खिलाड़ी चाहिए तो स्टोक्स उसके लिए उपयोगी विकल्प साबित हो सकते हैं।

    लखनऊ सुपर जायंट्स की नजर भी स्टोक्स पर जा सकती है। टीम के पास बल्लेबाजी में कई मजबूत विकल्प हैं लेकिन निचले क्रम में मैच फिनिश करने और दबाव की स्थिति में टीम को संभालने वाला अनुभवी खिलाड़ी अहम साबित हो सकता है। स्टोक्स की बल्लेबाजी में गहराई जोड़ने की क्षमता के साथ उनका नेतृत्व अनुभव भी लखनऊ के काम आ सकता है।

    इस तरह अगर बेन स्टोक्स आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन में उतरते हैं तो उनकी मांग काफी ज्यादा रहने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि उनकी वास्तविक कीमत और कौन सी टीम उन्हें खरीदती है यह ऑक्शन के दौरान ही तय होगा। फिलहाल चेन्नई सुपर किंग्स राजस्थान रॉयल्स कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स जैसी टीमों के साथ उनका नाम जोड़ा जा रहा है। स्टोक्स जैसे अनुभवी ऑलराउंडर की वापसी आईपीएल 2027 के ऑक्शन को निश्चित तौर पर और रोमांचक बना सकती है।

  • रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते में मिठास और अपनापन बढ़ाने वाला अवसर है। इस खास दिन पर घर में बनी मिठाई का स्वाद अलग ही होता है। अगर इस बार बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय कुछ खास तैयार करना चाहती हैं तो मावा गुजिया एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    मावा गुजिया बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम तथा स्वादिष्ट होती है। इसकी भरावन में मावा, पिसी चीनी, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों का मिश्रण गुजिया को पारंपरिक स्वाद के साथ खुशबूदार भी बनाता है।

    गुजिया बनाने के लिए सबसे पहले मैदा तैयार किया जाता है। दो कप मैदा में करीब दो बड़े चम्मच घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। घी और मैदा को हथेलियों के बीच रगड़कर देखें। अगर मिश्रण दबाने पर आसानी से बंधने लगे तो मोयन सही माना जा सकता है।

    इसके बाद थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। गुजिया का आटा बहुत नरम नहीं होना चाहिए। आटा तैयार होने के बाद उसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा बेलने के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाता है।

    अब गुजिया की भरावन तैयार करें। कड़ाही को धीमी आंच पर गर्म करके उसमें मावा डालें। मावे को लगातार चलाते हुए हल्का भूनें। इसका उद्देश्य मावे की अतिरिक्त नमी कम करना और उसकी खुशबू को उभारना है। मावा भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और उसे पूरी तरह ठंडा होने दें।

    मावा ठंडा होने के बाद इसमें पिसी चीनी, बारीक कटे काजू और बादाम, किशमिश तथा इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। मावा गर्म रहते हुए चीनी डालने से भरावन अधिक गीली हो सकती है, इसलिए ठंडा होने के बाद ही चीनी मिलाना बेहतर रहता है।

    इसके बाद तैयार आटे को बराबर हिस्सों में बांटकर छोटी छोटी लोइयां बना लें। प्रत्येक लोई को बेलकर छोटी पूरी जैसा आकार दें। पूरी को बहुत ज्यादा पतला न रखें, क्योंकि पतली परत भरावन डालते समय आसानी से फट सकती है।

    अब पूरी के बीच में तैयार मावे की उचित मात्रा रखें। किनारे पर हल्का पानी लगाकर पूरी को मोड़ दें और अर्धचंद्राकार आकार में बंद करें। किनारों को उंगलियों से अच्छी तरह दबाएं, ताकि तलते समय भरावन बाहर न निकले।

    कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और गुजिया को मध्यम से धीमी आंच पर तलें। तेज आंच पर तलने से बाहरी हिस्सा जल्दी भूरा हो सकता है, जबकि अंदर की परत ठीक से नहीं सिकती। धीमी आंच पर तलने से गुजिया अच्छी तरह कुरकुरी और सुनहरी बनती है।

    गुजिया सुनहरी होने के बाद उसे निकालकर अतिरिक्त तेल या घी निकलने दें। कुछ देर ठंडा होने के बाद इसे परिवार के साथ परोसा जा सकता है। ऊपर से बारीक कटे पिस्ते या बादाम डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं।

    खस्ता मावा गुजिया के लिए सबसे जरूरी बात आटे की सही consistency, मावे को ठंडा करना और तलते समय उचित तापमान बनाए रखना है। इन बातों का ध्यान रखकर रक्षाबंधन पर घर में स्वादिष्ट और कुरकुरी मिठाई तैयार की जा सकती है।

  • खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं

    खाना खाते ही सीने में जलन और गले में खट्टापन तो न करें नजरअंदाज डॉक्टर की सलाह से जानें क्या खाएं क्या नहीं


    नई दिल्ली। सीने या गले में जलन खट्टी डकार और मुंह में खट्टा स्वाद महसूस होना कई लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। आमतौर पर इसे एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसमें पेट का एसिड ऊपर की ओर खाने की नली में पहुंच जाता है जिससे सीने और गले में जलन महसूस हो सकती है। कई बार लोग इससे राहत पाने के लिए तुरंत दवा ले लेते हैं लेकिन अगर समस्या बार बार हो रही है तो केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खानपान की आदतों और दिनचर्या पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    एसिडिटी बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बहुत ज्यादा खाना जल्दी जल्दी खाना तला भुना और अधिक तेल वाला भोजन ज्यादा चाय कॉफी या कैफीन वाले पेय पीना कार्बोनेटेड ड्रिंक लेना और भोजन के तुरंत बाद लेट जाना इसके लक्षणों को बढ़ा सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने और भोजन का समय लगातार बदलने से भी कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। इसलिए सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि कौन सी चीजें आपके लक्षणों को बढ़ाती हैं।

    अगर आपको बार बार एसिडिटी होती है तो बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। लाल मिर्च काली मिर्च हरी मिर्च और बहुत तीखी चटनी कुछ लोगों में सीने की जलन और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकती हैं। इसी तरह पकौड़े समोसे पूरी कचौरी फ्रेंच फ्राइज और दूसरी डीप फ्राइड चीजें भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। अधिक फैट वाला भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रख सकता है और कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ सकते हैं।

    चाय कॉफी एनर्जी ड्रिंक कोला और दूसरे कैफीन वाले पेय भी कुछ लोगों में एसिडिटी को ट्रिगर कर सकते हैं। संतरे या दूसरे बहुत खट्टे फलों का जूस और शराब भी कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा चॉकलेट पेपरमिंट टी मिंट कैंडी और मिंट वाली च्युइंग गम से भी कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता लेकिन अगर किसी खास चीज को खाने के बाद लगातार लक्षण बढ़ते हैं तो उससे दूरी बनाना बेहतर है।

    एसिडिटी के दौरान डाइट में हल्के और कम एसिड वाले फल शामिल किए जा सकते हैं। केला पपीता तरबूज खरबूजा और नाशपाती जैसे फल कई लोगों के लिए अपेक्षाकृत हल्के विकल्प हो सकते हैं। इनमें पानी और फाइबर भी पाया जाता है जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। बहुत खट्टे फलों के बजाय ऐसे विकल्प चुनना कुछ लोगों के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है।

    अनाज में ओट्स दलिया पोहा उबले या हल्के पके चावल और साबुत गेहूं जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। इन्हें कम तेल और हल्के मसालों के साथ खाना बेहतर रहता है। प्रोटीन के लिए मूंग दाल टोफू सोयाबीन और सीमित मात्रा में पनीर जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। भोजन को कम तेल में तैयार करना और एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय संतुलित मात्रा में भोजन करना भी मददगार हो सकता है।

    पानी की पर्याप्त मात्रा लेना भी जरूरी है। सादा पानी प्राथमिक विकल्प है जबकि कुछ लोगों को नारियल पानी छाछ या सौंफ का पानी भी आरामदायक लग सकता है। साथ ही भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचना और नियमित समय पर भोजन करने की कोशिश करना जरूरी है। अगर सीने में जलन लगातार बनी रहती है बार बार होती है या निगलने में परेशानी उल्टी वजन कम होना अथवा सीने में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। खानपान में बदलाव व्यक्ति की समस्या और ट्रिगर के अनुसार अलग हो सकते हैं इसलिए लंबे समय से परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • सिर्फ भाई की कलाई नहीं भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व

    सिर्फ भाई की कलाई नहीं भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व


    नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के बीच प्रेम स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख समृद्धि तथा लंबी उम्र की कामना करती है। लेकिन भारत के अलग अलग हिस्सों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई ऐसी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएं भी हैं जो इस त्योहार को और खास बनाती हैं। इन्हीं में से एक है भाभी के लिए लुंबा राखी बांधने की परंपरा। सामान्य राखी से अलग दिखाई देने वाली लुंबा राखी खास तौर पर भाभी के लिए तैयार की जाती है और इसे कलाई के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जाता है।

    लुंबा राखी का डिजाइन इसकी सबसे खास पहचान होता है। इसमें मोतियों लटकन कुंदन सजावटी धागों और अन्य खूबसूरत चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य राखी की तरह इसे सीधे कलाई पर बांधने के बजाय भाभी की चूड़ियों या कंगन के साथ लटकाया जाता है। यही वजह है कि यह देखने में राखी और पारंपरिक आभूषण का खूबसूरत मेल लगती है। अलग अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके डिजाइन और इसे पहनने का तरीका अलग हो सकता है।

    अब सवाल उठता है कि आखिर भाभी को लुंबा राखी क्यों बांधी जाती है। दरअसल कुछ पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भाभी को परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में उसकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसी रिश्ते को सम्मान देने के लिए कई परिवारों में बहन भाई के साथ भाभी को भी रक्षाबंधन के उत्सव में शामिल करती है। ननद द्वारा भाभी को लुंबा राखी देना उनके बीच स्नेह अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाने वाली परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    इस परंपरा का एक भावनात्मक पक्ष यह भी है कि भाई और उसकी पत्नी को परिवार में एक साथ सम्मान और अपनापन दिया जाए। रक्षाबंधन केवल भाई बहन के रिश्ते तक सीमित न रहकर परिवार के दूसरे रिश्तों को भी प्रेम के धागे से जोड़ने का अवसर बन जाता है। लुंबा राखी इसी भावना का प्रतीक मानी जाती है। इसके जरिए ननद अपनी भाभी के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करती है और दोनों के रिश्ते में अपनापन बढ़ाने का अवसर मिलता है।

    हालांकि यह समझना जरूरी है कि लुंबा राखी बांधने की परंपरा पूरे भारत में एक समान नहीं है। यह विशेष रूप से कुछ समुदायों क्षेत्रों और परिवारों में अधिक प्रचलित है। इसलिए इसे रक्षाबंधन की अनिवार्य रस्म नहीं माना जाता बल्कि क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के तौर पर समझना बेहतर है। जिन परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है वहां लुंबा राखी त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती है।

    इस तरह रक्षाबंधन पर लुंबा राखी केवल एक खूबसूरत सजावटी राखी नहीं है बल्कि यह रिश्तों को सम्मान देने और परिवार में प्रेम तथा अपनापन बढ़ाने का माध्यम भी बनती है। भाई की कलाई पर बंधी राखी जहां भाई बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है वहीं भाभी की चूड़ियों पर सजी लुंबा राखी ननद भाभी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान की खूबसूरत कड़ी जोड़ती है।

  • डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे

    डाइट कम करने के बाद भी नहीं रुक रहा वजन कहीं आप रोजाना ये गलतियां तो नहीं कर रहे


    नई दिल्ली। वजन कम करने की कोशिश करने वाले कई लोगों की शिकायत होती है कि वे पहले की तुलना में काफी कम खाना खा रहे हैं फिर भी वजन घटने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अक्सर लोग सिर्फ अपनी प्लेट में मौजूद रोटी चावल या खाने की मात्रा को देखते हैं जबकि वजन बढ़ने की पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है। पूरे दिन में खाई जाने वाली छोटी छोटी चीजें शारीरिक गतिविधि नींद तनाव और कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन पर असर डाल सकती हैं। इसलिए अगर कम खाने के बावजूद वजन बढ़ रहा है तो अपनी पूरी दिनचर्या पर नजर डालना जरूरी है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि केवल दो रोटी खाना कम भोजन करने का प्रमाण नहीं है। रोटी के साथ सब्जी में इस्तेमाल होने वाला तेल दाल में घी दही अचार मिठाई और दूसरी चीजें भी दिनभर की कुल कैलोरी बढ़ा सकती हैं। इसी तरह भोजन की मात्रा कम करने के बावजूद अगर चाय में ज्यादा चीनी बिस्किट नमकीन जूस सॉफ्ट ड्रिंक या दूसरे छोटे स्नैक्स बार बार लिए जा रहे हैं तो इनकी कुल कैलोरी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। इसलिए कुछ दिनों तक अपनी पूरी डाइट को नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि वास्तव में पूरे दिन में क्या और कितना खाया जा रहा है।

    दूसरी बड़ी वजह शारीरिक गतिविधि की कमी हो सकती है। अगर व्यक्ति कम खाना खाता है लेकिन दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठा रहता है मोबाइल या टीवी देखता है और पैदल चलना या व्यायाम बहुत कम करता है तो शरीर की कैलोरी खर्च करने की मात्रा भी कम हो सकती है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन के साथ रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। छोटी दूरी पर पैदल चलना सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित व्यायाम जैसी आदतें दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं।

    नींद की कमी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार कम सोने से भूख और पेट भरे होने से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण कुछ लोगों में ज्यादा खाने की इच्छा और मीठे या अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग बढ़ सकती है। इसलिए वजन नियंत्रित करने की कोशिश में केवल डाइट पर ध्यान देने के बजाय पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है।

    लगातार तनाव भी वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। तनाव की स्थिति में कई लोगों को मीठा तला हुआ या जंक फूड खाने की इच्छा अधिक होती है। अगर तनाव के दौरान बार बार कुछ खाने की आदत बन जाए तो इसका असर धीरे धीरे वजन पर दिखाई दे सकता है। ऐसे में तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित दिनचर्या पर्याप्त नींद शारीरिक गतिविधि और अपनी पसंद की आरामदायक गतिविधियों को समय देना मददगार हो सकता है।

    इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। अगर वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के बढ़ रहा है और साथ में लगातार थकान ठंड ज्यादा लगना कब्ज त्वचा का रूखा होना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं तो थायरॉयड की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। इसी तरह अगर वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ सूजन सांस फूलना अथवा दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। वजन कम करने के लिए भोजन बहुत कम कर देना हमेशा सही तरीका नहीं होता। संतुलित डाइट पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है तो सावधान माता-पिता की ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

    बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है तो सावधान माता-पिता की ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी


    नई दिल्ली। बच्चों में बढ़ता मोटापा आज कई माता-पिता के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। अक्सर बच्चे का वजन बढ़ने पर परिवार इसे अच्छी सेहत या ज्यादा खाने का संकेत मान लेता है लेकिन अगर वजन उम्र और लंबाई के अनुपात में तेजी से बढ़ रहा है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। बचपन का मोटापा आगे चलकर डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर नींद से जुड़ी परेशानियों और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों की खानपान और दिनचर्या की आदतें बनाने में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कुछ ऐसी गलतियां हैं जिन्हें अनजाने में माता-पिता रोजाना दोहराते हैं और उनका असर बच्चे के वजन पर पड़ सकता है।

    सबसे पहली गलती है बच्चे को मोबाइल टीवी टैबलेट या वीडियो गेम में लंबे समय तक व्यस्त रखना। स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है। खेलना दौड़ना चलना और बाहर की गतिविधियों में समय देने के बजाय अगर बच्चा ज्यादातर समय स्क्रीन पर बिताता है तो उसकी रोजाना की सक्रियता प्रभावित होती है। माता-पिता को बच्चों की उम्र के अनुसार खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय तय करना चाहिए।

    दूसरी बड़ी समस्या बार बार पैकेज्ड और जंक फूड देना है। चिप्स बिस्किट पिज्जा बर्गर इंस्टेंट नूडल्स मिठाइयां और मीठे पेय बच्चों को स्वादिष्ट लगते हैं लेकिन इनका लगातार सेवन उनकी कुल कैलोरी बढ़ा सकता है। घर में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ फल सब्जियां दालें साबुत अनाज और अन्य संतुलित विकल्पों को बच्चों की नियमित डाइट का हिस्सा बनाना जरूरी है। जंक फूड को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी कभी सीमित मात्रा में देना बेहतर तरीका हो सकता है।

    तीसरी गलती बच्चे को उसकी इच्छा से ज्यादा खाने के लिए मजबूर करना है। कई माता-पिता प्लेट पूरी कराने के लिए बच्चे पर दबाव डालते हैं। इससे बच्चा अपनी भूख और पेट भरने के प्राकृतिक संकेतों को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है। खाने को इनाम या सजा के तौर पर इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। बच्चों को संतुलित भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनकी भूख के संकेतों का सम्मान करना जरूरी है।

    चौथी गलती नींद की अनदेखी करना है। देर रात तक मोबाइल चलाना टीवी देखना या रोज अलग समय पर सोने की आदत बच्चों की नींद को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त और नियमित नींद बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है और कम या अनियमित नींद वजन बढ़ने समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। इसलिए बच्चों के लिए उम्र के अनुसार नियमित सोने और जागने का समय तय करना चाहिए।

    पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे वही आदतें जल्दी सीखते हैं जो उन्हें अपने घर में दिखाई देती हैं। अगर माता-पिता खुद लगातार जंक फूड खाते हैं कम सक्रिय रहते हैं या देर रात तक जागते हैं तो बच्चे भी ऐसी दिनचर्या अपना सकते हैं। इसलिए बच्चे का वजन नियंत्रित करने के लिए केवल उसे नियम बताना पर्याप्त नहीं है बल्कि पूरे परिवार को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि बच्चे का वजन लगातार तेजी से बढ़ रहा है तो डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उचित रहेगा।

  • इंदौर से धार्मिक और पर्यटन शहरों तक नई कनेक्टिविटी, भोपाल उज्जैन मांडू समेत 5 रूट पर दौड़ेंगी ई-बसें

    इंदौर से धार्मिक और पर्यटन शहरों तक नई कनेक्टिविटी, भोपाल उज्जैन मांडू समेत 5 रूट पर दौड़ेंगी ई-बसें


    इंदौर। इंदौर और आसपास के शहरों के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। सिटी बस सेवा के बाद अब धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए ग्रीन लाइन इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। एमआईसीटीएसएल ने इंदौर रीजन में कुल 26 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना तैयार की है। इन बसों का संचालन इंदौर से भोपाल उज्जैन मांडू खरगोन खंडवा और सेंधवा जैसे प्रमुख शहरों के लिए किया जाएगा। नई ई-बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि बसों में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    ग्रीन लाइन सेवा के तहत इंदौर से पांच प्रमुख रूट तय किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा आठ बसें इंदौर से भोपाल और आठ बसें इंदौर से खरगोन खंडवा रूट पर चलाने की योजना है। इंदौर से उज्जैन के लिए छह इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं जबकि इंदौर से मांडू और सेंधवा के लिए दो दो बसें संचालित की जाएंगी। इस तरह कुल 26 बसें पांच रूट पर यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएंगी। इन रूट का चयन धार्मिक पर्यटन और आसपास के प्रमुख शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से किया गया है।

    इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों को सौंपी जाएगी। ऑपरेटर करीब आठ साल तक बसों के संचालन और रखरखाव का काम संभालेंगे। सेवा को नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत संचालित किए जाने की योजना है। इसके तहत कंपनी प्रीमियम लेकर ऑपरेटरों को निर्धारित रूट आवंटित करेगी। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग जैसी सुविधा यात्रियों के लिए सफर को और आसान बना सकती है।

    इंदौर से दूरस्थ शहरों को जोड़ने की दिशा में भी परिवहन सेवा का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत 20 से अधिक रूट के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इंदौर से सागर जबलपुर शहडोल और बालाघाट सहित कई अन्य शहरों के लिए ऑपरेटर नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे प्रदेश के अलग अलग हिस्सों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।

    इसके अलावा पीएम ई-बस सेवा के तहत भी नए रूट तैयार किए जा रहे हैं। इंदौर में सिटी बस सेवा के 14 रूट पर पीएम ई-बस सेवा शुरू हो चुकी है। अगले महीने से करीब 150 और बसें चलाने की योजना है। प्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभागों में 170 से ज्यादा बसें चलाने की तैयारी की जा रही है। इन सेवाओं के विस्तार से शहरों के साथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?

    चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?


    नई दिल्ली। इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा (Sawan Purnima) के दिन लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत (India) में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में यहां इसका सूतक काल (Sutak period) भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा पीड़ित अवस्था में माना जाता है। इससे मानसिक अशांति और नकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। इन्हीं को दूर करने के लिए ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य करने की परंपरा है।

    ग्रहण के बाद दान का क्या है महत्व?
    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ईश्वर का ध्यान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, दान हमेशा श्रद्धा और बिना अहंकार के करने की सलाह दी जाती है।

    1. अन्न का करें दान
    ग्रहण समाप्त होने के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराना या अन्न दान करना शुभ माना जाता है। गेहूं, चावल और दाल जैसी खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे चंद्र दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

    2. जरूरतमंदों को धन दें
    ग्रहण के बाद अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को धन का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे धन संबंधी परेशानियां कम होने की मान्यता है।

    3. दीप दान करें
    चंद्र ग्रहण के बाद दीप दान को भी विशेष शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार पवित्र नदी के किनारे मिट्टी का दीपक जलाकर प्रवाहित किया जाता है। यदि नदी के किनारे जाना संभव न हो तो घर में भी शाम के समय चंद्रमा का स्मरण करते हुए दीपक जला सकते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    4. चांदी या मोती का दान
    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा का संबंध चांदी और मोती से माना जाता है। ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी या मोती का दान किया जा सकता है। माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव कम करने और कुंडली में चंद्रमा से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिल सकती है।

    5. सफेद चीजों का दान
    सफेद रंग का संबंध भी चंद्रमा से माना जाता है। इसलिए ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को दूध, चीनी, चावल, सफेद मिठाई या सफेद वस्त्र जैसी चीजें दान करने की परंपरा है। ज्योतिष के अनुसार इससे मन को शांति मिलने और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।

    ध्यान रखें: ये उपाय पारंपरिक धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके प्रभाव और परिणाम व्यक्ति की आस्था, परिस्थितियों, स्थान और अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इन्हें सामान्य धार्मिक जानकारी के तौर पर ही लिया जाना चाहिए, किसी निश्चित लाभ की गारंटी के रूप में नहीं।

  • ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना


    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने रक्षाबंधन को लेकर कृति सेनन के विवादित ज्वैलरी विज्ञापन पर एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने कहा कि उनकी आपत्ति केवल कृति के कपड़ों को लेकर नहीं थी, बल्कि विज्ञापन में रक्षाबंधन जैसे त्योहार को जिस तरह पेश किया गया, उससे थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वैलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया था।

    ‘किसने रोका है कुछ भी पहनने से?’
    कृति सेनन के आउटफिट पर सवाल उठाए जाने को लेकर कंगना ने कहा कि किसी को भी अपनी पसंद के कपड़े पहनने से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कृति ने क्या पहना था, बल्कि यह है कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार को विज्ञापन में किस रूप में दिखाया गया।

    कंगना से जब पूछा गया कि क्या कृति ईद के मौके पर भी इसी तरह के कपड़ों में पोस्ट कर सकती हैं, तो उन्होंने इस पर भी टिप्पणी की और हिंदू पारिवारिक रिश्तों में मर्यादा और सीमाओं का जिक्र किया।

    राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
    ‘डिकोड’ को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कृति सेनन के समर्थन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पोस्ट में रक्षाबंधन का जिक्र नहीं था।

    कंगना ने कहा कि एक महिला रक्षाबंधन पर अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है, लेकिन रक्षाबंधन केवल कपड़ों या फैशन का मामला नहीं, बल्कि एक सभ्यता और धार्मिक परंपरा की अभिव्यक्ति है।

    उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने नजरिए को लेकर भ्रमित हैं। कंगना ने सनातन धर्म को लेकर राहुल गांधी की सोच पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका नजरिया सनातन धर्म के प्रति अलग तरह का है।

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी चीज थी’
    कंगना ने साफ किया कि उनके मुताबिक विज्ञापन में ब्रालेट सबसे बड़ा मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह था कि विज्ञापन में रक्षाबंधन से जुड़े पारंपरिक तत्व लगभग नजर नहीं आए।

    उन्होंने माता-पिता, घर, हलवा-पूरी, भगवान, टीका, अक्षत, धूप और दीप जैसे पारंपरिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षाबंधन को केवल आधुनिक एस्थेटिक्स के जरिए पेश नहीं किया जा सकता।

    कंगना के मुताबिक, “एक त्योहार किसी संस्कृति और सभ्यता का एस्थेटिक एक्सप्रेशन होता है।” उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन में टीका और राखी जैसे पारंपरिक प्रतीकों का अपना महत्व है। अब कंगना की इन टिप्पणियों पर कृति सेनन और राहुल गांधी की ओर से किसी प्रतिक्रिया का इंतजार है।