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  • हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही अटकलों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के विरुद्ध होने वाला सीरीज का निर्णायक मुकाबला रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंतिम मैच कतई नहीं होगा। बोर्ड की इस त्वरित प्रतिक्रिया के बाद स्टार बल्लेबाज के भविष्य को लेकर लगाई जा रही तमाम तरह की मनगढ़ंत कयासबाजियों पर पूरी तरह से रोक लग गई है।

    क्रिकेट जगत में यह प्रशासनिक स्पष्टीकरण उस समय आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि उनतालीस वर्षीय पूर्व कप्तान इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम एकदिवसीय मैच के बाद इस प्रारूप को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि चयन समिति या बोर्ड के भीतर रोहित शर्मा के अंतिम मैच को लेकर ऐसी कोई भी आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह भारतीय एकदिवसीय टीम के एक नियमित और अत्यंत महत्वपूर्ण सदस्य हैं और जब तक वह खेल के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तब तक देश का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे।

    इस प्रकार के विवादों और अफवाहों की शुरुआत मुख्य रूप से तब हुई जब खेल गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि राष्ट्रीय चयन समिति और मुख्य कोच गौतम गंभीर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर टीम में एक बड़े बदलाव की योजना बना रहे हैं। इसके तहत सीमित ओवरों के क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देकर एक दीर्घकालिक ‘ट्रांजिशन फेज’ की शुरुआत करने की बात कही जा रही थी। इसी रणनीतिक बदलाव की खबरों के बीच रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों को जोड़कर देखा जाने लगा, जिसे अब बोर्ड ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

    इसके साथ ही, जारी द्विपक्षीय सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में रोहित शर्मा के बल्ले से बड़ी पारियां न निकलने के कारण भी आलोचकों ने उनके स्थान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हालांकि, बीसीसीआई ने संन्यास की खबरों का खंडन करके खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया है, लेकिन रणनीतिक रूप से बोर्ड अधिकारी भी वर्ष 2027 के आगामी विश्व कप में उनकी निश्चित भागीदारी को लेकर कोई भी पक्का आश्वासन देने से बचते नजर आए। इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि बोर्ड वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर ही भविष्य की योजनाओं को आकार देगा।

    वर्तमान में भारत और इंग्लैंड के मध्य खेली जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां दोनों टीमें बराबरी पर हैं। रविवार को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण और खिताबी मुकाबले में रोहित शर्मा भारतीय टीम के लिए पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतरेंगे। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह राहत की बात है कि टीम इंडिया के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में से एक ‘हिटमैन’ बिना किसी मानसिक दबाव के मैदान पर अपनी स्वाभाविक खेल शैली का प्रदर्शन कर सकेंगे, क्योंकि बोर्ड ने उनके भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

  • भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर देश भर के छात्रों का असंतोष एवं आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेही तय करने और परीक्षार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब अपने अत्यंत नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच, छात्रों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय एक बड़ा संबल मिला जब फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के हक में अपनी आवाज बुलंद की।

    सिनेमाई पर्दे पर ‘सुपर 30’ जैसी शिक्षा केंद्रित फिल्म में एक शिक्षक की जीवंत भूमिका निभाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने सोनम वांगचुक का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और विचारणीय वीडियो साझा किया है। इस डिजिटल संदेश के साथ अभिनेता ने देश के युवा परीक्षार्थियों द्वारा झेले जा रहे अभूतपूर्व मानसिक तनाव और अवसाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि एक शिक्षक के किरदार को जीने के दौरान उन्हें बेहद करीब से यह समझने का अवसर मिला था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के अनिश्चित माहौल में छात्र किस प्रकार के मानसिक आघात और दबाव का सामना करने को विवश हैं।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की सफल फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार का किरदार निभाया था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी बच्चों को आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करते हैं। इस वास्तविक जीवन पर आधारित चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के कारण ही अभिनेता छात्रों की समस्याओं और उनके शैक्षणिक संघर्षों को इतनी संवेदनशीलता और गहराई के साथ महसूस कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस परीक्षा संकट के समय वह मूकदर्शक बने रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    साझा किए गए वीडियो में गंभीर स्वास्थ्य गिरावट के बावजूद बिस्तर पर लेटे हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की सामूहिक अंतरात्मा और जिम्मेदार अधिकारियों पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने अत्यंत क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की इन प्रशासनिक विफलताओं के कारण अब तक लगभग 20 युवा परीक्षार्थी अत्यंत आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो चुके हैं। मेधावी छात्र अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन के अनमोल वर्ष परीक्षाओं की निष्पक्ष तैयारी में लगा देते हैं, लेकिन अंत में उन्हें यह पता चलता है कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया ही लीक या फिक्सिंग की भेंट चढ़ चुकी थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने इस कुप्रथा को पूरे समाज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। उन्होंने सचेत किया कि यदि योग्यता के बजाय नकल और भ्रष्टाचार के माध्यम से अयोग्य लोग चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश पा लेंगे, तो भविष्य में देश के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। यही नियम अभियंताओं और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस बीच, मनोरंजन जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिससे इस छात्र आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय आयाम मिल गया है।

  • टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। डोप परीक्षण के दौरान खिलाड़ी के शरीर में एक प्रतिबंधित पदार्थ के अंश पाए गए थे, जिसके बाद नवाज ने आधिकारिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस कृत्य के लिए शासी निकाय ने उन पर तीन महीने का निलंबन लागू किया है। हालांकि, खेल नियमों के तहत पुनर्वास कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने की शर्त पर इस अवधि को कम कर केवल एक महीने किए जाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश और दुनिया के खेल प्रेमियों के लिए यह घटनाक्रम काफी चौंकाने वाला है। बत्तीस वर्षीय मोहम्मद नवाज का यह डोप परीक्षण इस वर्ष 7 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप के एक मुकाबले के बाद किया गया था। यह मैच पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच खेला गया था, जिसके संपन्न होने के बाद लिए गए जैविक नमूने की जांच रिपोर्ट में कार्बोक्सी-टीएचसी नामक प्रतिबंधित तत्व की पुष्टि हुई थी। आईसीसी की आधिकारिक एंटी-डोपिंग आचार संहिता के अंतर्गत इस विशिष्ट पदार्थ को नशीले या मादक पदार्थों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसके सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

    वैश्विक क्रिकेट निकाय द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, पाकिस्तानी ऑलराउंडर ने अपनी इस प्रशासनिक और नैतिक चूक को बिना किसी प्रतिवाद के स्वीकार कर लिया है। खिलाड़ी ने आईसीसी के समक्ष यह भी प्रमाणित किया कि उक्त प्रतिबंधित पदार्थ का उपयोग प्रतियोगिता की अवधि के बाहर किया गया था और इसका उद्देश्य मैदान पर अपने खेल प्रदर्शन को अनुचित रूप से बेहतर बनाना या कोई अतिरिक्त लाभ प्राप्त करना बिल्कुल नहीं था। इसी तार्किक आधार पर विचार करते हुए आईसीसी ने उन पर अपेक्षाकृत कम समय यानी तीन महीने की अयोग्यता का निर्णय लिया। यह निलंबन 1 मई से प्रभावी माना गया है, क्योंकि इसी तिथि से खिलाड़ी ने स्वैच्छिक रूप से अस्थायी निलंबन स्वीकार कर लिया था।

    शासी निकाय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मोहम्मद नवाज ने अपनी निर्धारित सजा को स्वीकार करने के साथ-साथ संस्था द्वारा निर्देशित नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम में सम्मिलित होने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की है। यदि वह आईसीसी के मानकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की संतुष्टि के अनुरूप इस संपूर्ण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेते हैं, तो उनके निलंबन की अवधि को तीन महीने से घटाकर केवल एक महीना कर दिया जाएगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, ढाई महीने का समय व्यतीत होने के उपरांत उनके अस्थायी निलंबन को भी हटा लिया गया है, जो पुनर्वास की दिशा में एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

    इस पूरे अनुशासनात्मक मामले में खिलाड़ी को सबसे बड़ा झटका उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स के मोर्चे पर लगा है। आईसीसी एंटी-डोपिंग कोड के कड़े नियमों के तहत, 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के विरुद्ध खेले गए मैच से लेकर 1 मई तक की अवधि के बीच मोहम्मद नवाज द्वारा खेले गए सभी आधिकारिक मुकाबलों के व्यक्तिगत प्रदर्शन और रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि इस विशिष्ट समयावधि के दौरान बनाए गए रन या लिए गए विकेटों को अब किसी भी आधिकारिक क्रिकेट सांख्यिकी में मान्यता नहीं दी जाएगी। इस कठोर निर्णय ने एक बार फिर खेल जगत में डोपिंग रोधी नियमों की सर्वोच्चता को सिद्ध किया है।

  • लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) 2026 के छठे सीजन के आधिकारिक आगाज से ठीक पहले क्रिकेट जगत को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रतियोगिता की वर्तमान चैंपियन टीम जाफना किंग्स के सह-मालिक को कथित मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के तहत पुलिस विभाग द्वारा हिरासत में लिया गया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई को खेल संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए गठित विशेष जांच इकाई ने अंजाम दिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के कारण टी20 लीग की शुचिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने उद्घाटन समारोह के ठीक पहले पूरे टूर्नामेंट के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

    श्रीलंका पुलिस विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जाफना किंग्स फ्रेंचाइजी के प्रबंधकीय ढांचे से जुड़े एक प्रमुख साझीदार को खेलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल इस वित्तीय और प्रशासनिक हेराफेरी के नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी और खेल को अवैध रूप से प्रभावित करने वाले बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और संदिग्धों के आने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे इस रैकेट का पूर्ण भंडाफोड़ हो सके।

    यह संपूर्ण विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब टूर्नामेंट का पहला उद्घाटन मुकाबला कोलंबो के ऐतिहासिक सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड पर खेला जाना निर्धारित था। यह मैच पूर्व चैंपियन जाफना किंग्स और गॉल गैलेंट्स के बीच खेला जाना था, जो पिछले सीजन के फाइनल मुकाबले का पुनरावृत्ति भी है। आयोजकों और स्थानीय क्रिकेट बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस प्रशासनिक विवाद और पुलिस कार्रवाई के बावजूद पूर्व निर्धारित खेल कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और सभी मैच योजना के अनुसार ही आयोजित होंगे। हालांकि, मैदान के बाहर हुई इस कानूनी कार्रवाई ने खेल प्रेमियों और प्रायोजकों के बीच एक अनिश्चितता का माहौल अवश्य निर्मित कर दिया है।

    उल्लेखनीय है कि खेल अपराधों और भ्रष्टाचार को रोकने के मामले में श्रीलंका के पास वैश्विक स्तर पर सबसे कठोर और सख्त कानूनी ढांचा मौजूद है। देश में खेल से संबंधित अपराधों की रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और किसी भी प्रकार की अनैतिक हेराफेरी को एक गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी के अपराध के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो दोषियों के लिए भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ दीर्घकालिक कारावास की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। इस सख्त कानून के कारण ही विशेष जांच इकाई को इस स्तर पर त्वरित कार्रवाई करने के अधिकार प्राप्त हुए हैं।

    इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने न केवल लंका प्रीमियर लीग बल्कि संपूर्ण टी20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट की साख को एक बड़ा झटका दिया है। जिस वैश्विक प्रतियोगिता की शुरुआत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्च स्तरीय खेल प्रतिस्पर्धा के रूप में होनी चाहिए थी, वह अब कानूनी और आपराधिक जांच के घेरे में आ चुकी है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं और आरोप सही साबित होते हैं, तो यह वैश्विक मंच पर लीग की विश्वसनीयता, ब्रांड वैल्यू और भविष्य के निवेश को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल देश की सर्वोच्च खेल जांच एजेंसी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।

  • कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    नई दिल्ली । मानव जीवन में कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों के बाद भी कई बार अपेक्षित आर्थिक प्रगति प्राप्त नहीं हो पाती है। ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय वास्तुकला विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक मुख्य कारण आवासीय परिसर के भीतर मौजूद विभिन्न प्रकार के वास्तु दोष हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र मूल रूप से मानव के रहने के स्थान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मध्य एक गहरा एवं संतुलित संबंध स्थापित करने का कार्य करता है। यदि किसी भवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाता है, तो वहां संचित धन की आवक रुक जाती है और अवांछित व्यय में अचानक अप्रत्याशित वृद्धि होने लगती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के वास्तुविदों का मानना है कि घर की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्राचीन ग्रंथों में कुछ अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांत बताए गए हैं, जिनका अनुसरण कर वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अंतर्गत घर की उत्तर दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के अधिपति भगवान कुबेर से संबद्ध होती है। आर्थिक विकास की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए इस दिशा को सदैव भार रहित, खुला और पूरी तरह स्वच्छ रखना अनिवार्य माना गया है। उत्तर दिशा में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण कार्य, सीढ़ियां, भारी फर्नीचर अथवा कबाड़ रखने का स्टोर रूम नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, संचित धन को सुरक्षित रखने वाली अलमारी या तिजोरी को सदैव भवन के दक्षिणी हिस्से की दीवार से सटाकर इस प्रकार स्थापित करना चाहिए कि उसका मुख खुलते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहे। इस विशिष्ट व्यवस्था को धन को आकर्षित करने और उसे स्थायी बनाए रखने में सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

    भवन का मुख्य प्रवेश द्वार केवल निवासियों के आने-जाने का मार्ग नहीं होता, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि के प्रवेश का भी प्राथमिक माध्यम माना जाता है। मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध, गंदगी, सीलन या अंधकार नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार पर स्पष्ट और सुंदर नामपट्टिका के साथ पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे शुभ शक्तियों का घर में आगमन सुगम हो सके। इसके साथ ही, घर के भीतर जल के निकास की दिशा भी वित्तीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जल प्रवाह को सीधे तौर पर धन के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पानी की निकासी हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होनी चाहिए। घर के किसी भी हिस्से में नल का लगातार टपकना भारी आर्थिक क्षति और अपव्यय का कारण बनता है।

    घर का उत्तर-पूर्व कोना जिसे सामान्य भाषा में ईशान कोण कहा जाता है, उसे सबसे पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इस संवेदनशील स्थान पर किसी भी प्रकार का कचरा, झाड़ू, भारी लोहा या खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जो धन के मार्ग में स्थायी रुकावटें पैदा करता है। इस क्षेत्र को जितना पवित्र और खाली रखा जाएगा, मानसिक शांति और समृद्धि उतनी ही तीव्र गति से बढ़ेगी। इसके साथ ही, एक अत्यंत प्रभावी पारंपरिक उपाय के रूप में तिजोरी या धन रखने के स्थान के ठीक सामने एक स्वच्छ दर्पण स्थापित किया जा सकता है। दर्पण में धन का प्रतिबिंब दिखना प्रतीकात्मक रूप से समृद्धि को दोगुना करने और सकारात्मक तरंगों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

  • क्या बाथरूम की छोटी-छोटी गलतियां रोक रही हैं आपकी तरक्की? वास्तु के इन नियमों को अपनाकर घर में बढ़ा सकते हैं सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन

    क्या बाथरूम की छोटी-छोटी गलतियां रोक रही हैं आपकी तरक्की? वास्तु के इन नियमों को अपनाकर घर में बढ़ा सकते हैं सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन

    नई दिल्ली । गृह निर्माण और आंतरिक साज-सज्जा में वास्तु शास्त्र के नियमों का विशेष महत्व होता है। सामान्यतः लोग अपने शयनकक्ष या बैठक की व्यवस्था पर तो पर्याप्त ध्यान देते हैं, लेकिन स्नानघर अथवा बाथरूम की स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय वास्तुकला विशेषज्ञों के अनुसार, घर के प्रत्येक हिस्से की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। बाथरूम की गलत दिशा, वहां फैली गंदगी या अनुपयोगी वस्तुओं का जमावड़ा पूरे परिवार की आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। पारिवारिक समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने के लिए दैनिक जीवन की इन छोटी किंतु महत्वपूर्ण आदतों में सुधार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, भवन में बाथरूम के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त और शुभ दिशा उत्तर या उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण मानी गई है। इसके विपरीत, दक्षिण-पूर्व अर्थात आग्नेय कोण या फिर घर के बिल्कुल मध्य भाग जिसे ब्रह्मस्थान कहा जाता है, वहां भूलकर भी बाथरूम का निर्माण नहीं करना चाहिए। दक्षिण दिशा में स्थित बाथरूम न केवल परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि निरंतर रहने वाले मानसिक तनाव का कारण भी बनता है। इसके साथ ही, खिड़कियों और वेंटिलेशन की सही व्यवस्था न होने से उत्पन्न होने वाला अंधकार भी नकारात्मकता को बढ़ावा देता है, इसलिए वहां हमेशा पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए।

    प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जल के अनियंत्रित प्रवाह को सीधे तौर पर धन की हानि से जोड़कर देखा जाता है। यदि बाथरूम का कोई नल अथवा पाइपलाइन लगातार टपक रही है, तो इसे केवल पानी की बर्बादी नहीं बल्कि संचित धन के धीरे-धीरे नष्ट होने का स्पष्ट सूचक माना जाता है। ऐसे तकनीकी दोषों को बिना किसी विलंब के तुरंत ठीक कराया जाना चाहिए ताकि वित्तीय स्थिरता प्रभावित न हो। इसके अतिरिक्त, स्नान के पश्चात पूरे फर्श को अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए क्योंकि सीलन, अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण उत्पन्न होने वाले दोष घर के भीतर नकारात्मक ऊर्जा के संचरण को तीव्र कर देते हैं।

    बाथरूम के भीतर साफ-सफाई और अनुशासन का अभाव भी दरिद्रता को आमंत्रित करता है। अक्सर लोग टूटी हुई बाल्टी, खाली प्लास्टिक की बोतलें, या अनुपयोगी सौंदर्य प्रसाधनों की सामग्रियां वहीं छोड़ देते हैं, जो वास्तु सम्मत नहीं है। उपयोग के उपरांत बाथरूम के मुख्य द्वार को हमेशा बंद रखना अनिवार्य है, क्योंकि खुला हुआ द्वार वहां की दूषित ऊर्जा को घर के अन्य कमरों में फैलने का अवसर देता है। दर्पण की स्थिति भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाथरूम का शीशा कभी भी प्रवेश द्वार के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए, अन्यथा वहां से निकलने वाली नकारात्मक तरंगें परावर्तित होकर संपूर्ण गृह क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।

    घर की सुख-शांति को बनाए रखने और दूषित प्रभावों को बेअसर करने के लिए वास्तुकला में कुछ बेहद सरल उपाय भी सुझाए गए हैं। इसके अंतर्गत, एक छोटी कांच की कटोरी में समुद्री अथवा सेंधा नमक भरकर बाथरूम के किसी सुरक्षित कोने में स्थापित किया जा सकता है। माना जाता है कि नमक में वातावरण की अशुद्धियों और नकारात्मकता को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है। इस नमक को प्रत्येक सात से दस दिनों के भीतर बदलते रहना चाहिए। इन मूलभूत नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने से न केवल गृह जनित दोषों का शमन होता है, बल्कि पारिवारिक आय में वृद्धि और मानसिक संतोष की प्राप्ति भी संभव होती है।

  • जानिए रुपहले पर्दे पर राज करने वाले कपूर परिवार के 8 सदस्यों की मौत की असली वजह

    जानिए रुपहले पर्दे पर राज करने वाले कपूर परिवार के 8 सदस्यों की मौत की असली वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में दशकों तक एकछत्र राज करने वाले और भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित कपूर परिवार का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, स्वास्थ्य के मोर्चे पर इस परिवार का संघर्ष उतना ही त्रासद रहा है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर वर्तमान पीढ़ी के रणबीर कपूर तक, इस कुनबे ने भारतीय सिनेमा को कई नायाब फिल्ममेकर और अभिनेता दिए हैं। हालांकि, पर्दे पर करोड़ों दिलों को जीतने वाले इस परिवार के कई दिग्गज सदस्यों को बेहद कम उम्र में गंभीर बीमारियों के कारण दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। इस परिवार के आठ प्रमुख सदस्यों की जीवन यात्रा और उनकी मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि कैंसर, हृदय घात और क्रॉनिक बीमारियां इस प्रतिष्ठित परिवार के लिए बेहद घातक साबित हुईं।

    कपूर खानदान की नींव रखने वाले महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर, जिन्होंने ऐतिहासिक फिल्म मुगल-ए-आजम में सम्राट अकबर की भूमिका निभाकर अभिनय के नए मापदंड स्थापित किए थे, वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो गए थे। वर्ष 1972 में मात्र 65 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। इस त्रासदी का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि उनकी पत्नी रामसरनी मेहरा भी इसी घातक बीमारी से ग्रसित थीं और अपने पति के निधन के ठीक 16 दिन बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इसी तरह, पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई और अपने दौर के बेहद सफल अभिनेता त्रिलोक कपूर का निधन वर्ष 1988 में 76 वर्ष की आयु में अचानक आए तीव्र हृदय घात के कारण हुआ था।

    भारतीय सिनेमा के ‘शोमैन’ कहे जाने वाले राज कपूर का अंतिम समय बेहद कष्टदायक रहा। गंभीर अस्थमा से पीड़ित राज कपूर को मई 1988 में एक पुरस्कार समारोह के दौरान दिल्ली में सांस का तीव्र दौरा पड़ा था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराने के बाद चिकित्सकों को ज्ञात हुआ कि उनका निमोनिया बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुका था। लगभग एक महीने तक वेंटिलेटर और कोमा में रहने के बाद आखिरकार 2 जून 1988 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए सिनेमा को नई ऊर्जा देने वाले उनके भाई शम्मी कपूर अपने अंतिम वर्षों में गुर्दे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके कारण 14 अगस्त 2011 को उनका निधन हो गया। वहीं, अपनी उत्कृष्ट संवाद अदायगी के लिए विख्यात शशि कपूर का वर्ष 2017 में सीने में संक्रमण और लंबे समय से चल रही अस्वस्थता के चलते मुंबई के एक अस्पताल में निधन हुआ था।

    राज कपूर की अगली पीढ़ी भी इन गंभीर आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से अछूती नहीं रही। उनकी बड़ी बेटी रितु नंदा का निधन वर्ष 2020 में कैंसर के कारण हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद, हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और ऊर्जावान अभिनेताओं में शुमार ऋषि कपूर भी ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर की चपेट में आ गए। अमेरिका में लंबे समय तक चले उपचार के बाद वह ठीक होकर भारत लौटे थे, किंतु संक्रमण और बीमारी के दोबारा उभरने के कारण 30 अप्रैल 2020 को उनका देहावसान हो गया। इस सिलसिले में सबसे कम उम्र में दुनिया छोड़ने वाले सदस्य राजीव कपूर रहे, जो राज कपूर के सबसे छोटे बेटे थे। फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से लोकप्रियता हासिल करने वाले राजीव कपूर वर्ष 2021 में मात्र 58 वर्ष की आयु में तीव्र हृदय घात का शिकार हो गए और 60 की उम्र भी पार नहीं कर सके। इस प्रकार, इस महान कलात्मक परिवार के स्वास्थ्य इतिहास में कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियां सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरीं।

  • अमेरिका ने ईरान के चाबहार में तबाह किया सर्विलांस टावर, भारत से है कनेक्शन, जाने कैसे ?

    अमेरिका ने ईरान के चाबहार में तबाह किया सर्विलांस टावर, भारत से है कनेक्शन, जाने कैसे ?


    वॉशिंगटन। अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के एक महत्वपूर्ण सर्विलांस टावर को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई का वीडियो फुटेज भी जारी किया है।

    अमेरिका के अनुसार, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की निगरानी और सैन्य क्षमता को कमजोर करने के अभियान का हिस्सा था। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि अमेरिकी सेना ने चाबहार बंदरगाह शहर में स्थित ‘चाबहार शहीद कलंतरी पोर्ट’ सर्विलांस टावर को निशाना बनाया।

    खास बात यह है कि चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत भी कभी ईरान का सहयोगी रह चुका है। भारत ने इस रणनीतिक बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    16 जुलाई को किया गया हमला
    CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 16 जुलाई को इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और चाबहार शहीद कलंतरी पोर्ट के सर्विलांस टावर को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह टावर ईरान के ओमान की खाड़ी तट पर मौजूद समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था। इसका इस्तेमाल कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की निगरानी और कार्रवाई के लिए किया जाता था।

    अमेरिका के अनुसार, टावर के नष्ट होने से IRGC की उस क्षमता को नुकसान पहुंचा है, जिसके जरिए वह रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने और हमलों के समन्वय का काम करता था।

    अमेरिका ने बताई कार्रवाई की वजह
    CENTCOM ने कहा कि इस हमले से नागरिक जहाजों के क्रू सदस्यों को निशाना बनाने की IRGC की क्षमता कम होगी। अमेरिकी कमान ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई से क्षेत्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, अमेरिका ने यह भी कहा कि यह सुविधा उन जहाजों के लिए लागू नहीं होगी, जो ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव
    अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका रणनीतिक रूप से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और प्रभाव मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान लंबे समय से इस इलाके में अपनी सैन्य और निगरानी क्षमता बनाए हुए है।

    चाबहार और भारत का संबंध
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। भारत ने ईरान के साथ मिलकर इस बंदरगाह के विकास में सहयोग किया था। इसका उद्देश्य भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक वैकल्पिक व्यापार मार्ग उपलब्ध कराना था। यही वजह है कि चाबहार का नाम किसी भी सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में आने पर भारत के लिए भी यह घटनाक्रम खास महत्व रखता है।

  • 15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

    15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी


    नई दिल्ली। आईफोन बनाने वाली दिग्गज टेक कंपनी Apple ने करीब 15 महीने बाद एक बार फिर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब हासिल कर लिया है। कंपनी ने मार्केट वैल्यूएशन के मामले में AI चिप निर्माता Nvidia को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया।

    Apple की कुल वैल्यूएशन करीब 4.88 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि Nvidia की वैल्यूएशन में 3.5 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह लगभग 4.86 ट्रिलियन डॉलर रह गई। इस बदलाव के साथ टेक कंपनियों की वैश्विक रैंकिंग में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला और Apple फिर से नंबर-1 कंपनी बन गई।

    खास बात यह है कि Apple पिछले साल अप्रैल के बाद पहली बार इस मुकाम पर लौटी है। कंपनी की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब सीईओ टिम कुक का कार्यकाल खत्म होने की चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुक सितंबर में अपना पद हार्डवेयर विशेषज्ञ जॉन टर्नस को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    निवेशकों का भरोसा Apple पर क्यों बढ़ा?
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का नजरिया अब बदल रहा है। कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर में Nvidia को सबसे बड़ा फायदा उठाने वाली कंपनी माना जा रहा था, लेकिन अब Apple की मजबूत कमाई, विशाल इकोसिस्टम और सर्विस बिजनेस ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है।

    BRI वेल्थ मैनेजमेंट के इन्वेस्टमेंट हेड टोनी मीडोज के अनुसार, Apple को पहले इसलिए पीछे माना जा रहा था क्योंकि कंपनी AI मॉडल बनाने पर भारी खर्च नहीं कर रही थी। लेकिन अब बाजार की सोच बदल रही है।

    उनका कहना है कि Apple पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का दबाव कम है और कंपनी अपनी सर्विसेज, मजबूत इकोसिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड के जरिए AI से कमाई करने की बेहतर स्थिति में है। यह बदलाव AI से जुड़े संभावित फायदों के बजाय कंपनी की स्थिर कमाई पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    Siri में बदलाव से Apple को उम्मीद
    Apple ने हाल ही में अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri में लंबे समय से चल रहे बदलावों को लागू किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नया और बेहतर Siri सिस्टम AI के क्षेत्र में Apple को बड़ी टेक कंपनियों और नए स्टार्टअप्स के करीब लाने में मदद करेगा।

    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Apple के पास हर iPhone में मौजूद यूजर डेटा के रूप में AI के लिए बड़ा आधार है। यह डेटा Siri को अधिक उपयोगी और स्मार्ट बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, कंपनी के सामने चुनौती यह है कि यूजर प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस डेटा की क्षमता का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।

    Nvidia की वापसी की संभावना भी बरकरार
    हालांकि बाजार की स्थिति बदलने पर Nvidia फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर सकती है। Nvidia अब भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU) दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश जनरेटिव AI मॉडल को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि AI सेक्टर में Nvidia की मजबूत पकड़ अभी भी बनी हुई है।

  • चीन में मकॉक बंदरों की कीमतों में उछाल, एक बंदर के लिए देने पड़ रहे ₹25 लाख से ज्यादा, जाने वजह

    चीन में मकॉक बंदरों की कीमतों में उछाल, एक बंदर के लिए देने पड़ रहे ₹25 लाख से ज्यादा, जाने वजह


    नई दिल्ली। चीन में इन दिनों बंदरों की कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है कि वे सोने से भी ज्यादा महंगे साबित हो रहे हैं। खासतौर पर मकॉक बंदरों की मांग इतनी बढ़ गई है कि एक-एक बंदर की कीमत करीब 24 से 25 लाख रुपये तक पहुंच गई है। भारी कीमत चुकाने के बाद भी कई वैज्ञानिकों को ये बंदर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

    इन बंदरों का इस्तेमाल नई दवाओं की खोज और मेडिकल रिसर्च में किया जाता है। हालांकि, कीमतों में अचानक आए इस उछाल के कारण कुछ शोधकर्ताओं को अपनी स्टडी तक रोकनी पड़ रही है।

    क्यों बढ़ी मकॉक बंदरों की कीमत?
    रिपोर्ट के अनुसार, गुआंगझोउ की जिनान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक गुओ शियांगयू दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए नॉन-ह्यूमन प्राइमेट मॉडल विकसित करने पर शोध कर रहे हैं। इसके लिए उनकी लैब में मकॉक बंदरों की जरूरत होती है, लेकिन अब इनकी बढ़ती कीमत और कमी के कारण शोध कार्य प्रभावित हो रहा है।

    चीनी नव वर्ष के बाद से लैब में इस्तेमाल होने वाले मकॉक बंदरों की कीमत लगातार बढ़ी है। वर्तमान में सप्लायर एक मकॉक बंदर के लिए करीब 1 लाख 80 हजार युआन, यानी लगभग 25 लाख 58 हजार 772 रुपये तक मांग रहे हैं।

    गुओ शियांगयू के मुताबिक, समस्या सिर्फ कीमत की नहीं है। कई बार इतनी अधिक रकम देने के बावजूद भी बंदर उपलब्ध नहीं हो पाते, क्योंकि मांग बहुत ज्यादा है और सप्लाई सीमित है। गुओ ग्वांगडोंग प्रोविंशियल की-लैबोरेटरी ऑफ नॉन-ह्यूमन प्राइमेट रिसर्च से जुड़े हैं।

    रिसर्च के लिए मकॉक बंदर ही क्यों जरूरी?
    वैज्ञानिकों के अनुसार, मकॉक बंदर इंसानों के सबसे करीब माने जाने वाले जीवों में शामिल हैं। इनके डीएनए और शरीर की जैविक प्रतिक्रिया इंसानों से काफी मिलती-जुलती है। इसी वजह से नई दवाओं और उपचारों की जांच के लिए इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है।

    गुओ ने बताया कि उनकी लैब को हर साल वैज्ञानिक अध्ययन के लिए करीब 30 से 50 बंदरों की जरूरत होती है। इनमें पैथोलॉजिकल और मॉलिक्यूलर बायोलॉजिकल एनालिसिस जैसे शोध शामिल हैं।

    चीन में दवा और बायोटेक उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। चीनी सरकार नई दवाओं और बायोलॉजिकल मेडिसिन के विकास को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य पश्चिमी देशों की दवा क्षेत्र में पकड़ को चुनौती देकर चीन को दुनिया का प्रमुख मेडिसिन हब बनाना है।

    दवा बनाने की प्रक्रिया में बंदरों की भूमिका
    किसी भी नई दवा को सीधे बाजार में लॉन्च नहीं किया जाता। पहले उसे प्रयोगशालाओं में जांचा जाता है और इसके बाद जानवरों पर परीक्षण किए जाते हैं, ताकि दवा के प्रभाव और सुरक्षा का आकलन किया जा सके। इन चरणों में सफल होने के बाद ही संबंधित अधिकारियों की अनुमति और सर्टिफिकेशन के बाद दवा बाजार में लाई जाती है।

    घटती संख्या बनी वैज्ञानिकों के लिए चुनौती
    चीन ने पिछले कुछ वर्षों में बायोटेक सेक्टर में भारी निवेश किया है। देश में कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, हार्ट अटैक और ऑटोइम्यून जैसी बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

    लेकिन मकॉक बंदरों की कमी अब वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। बढ़ती मांग के कारण जंगलों में इनकी संख्या पर भी असर पड़ रहा है। अनुमान है कि चीन में वर्ष 2025 से 2027 के बीच हर साल लैब रिसर्च के लिए करीब 49 हजार से 52 हजार बंदर ही उपलब्ध हो पाएंगे।