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  • भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक

    भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के तनावपूर्ण संबंधों (Strained Relations) के बीच जल्द एक खुशखबरी मिलने के आसार हैं। खबर है कि भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) इस हफ्ते सीमा पार यात्री ट्रेन (Passenger Train) सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा कर सकते हैं। ये सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति के बाद से बंद हैं जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी मंगलवार से ढाका में अपने भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिन की बैठक करेंगे। इसमें मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस सेवाओं को फिर से शुरू करने और एक नया रेलमार्ग शुरू करने की संभावना पर चर्चा होगी।


    जान ले स्टॉपेज

    इस मामले से अवगत बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम कल से शुरू होने वाली IGRM यानी अंतर-सरकारी रेलवे बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस जैसी रेलवे सेवाओं को फिर से शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।’ मैत्री एक्सप्रेस ढाका को कोलकाता से जोड़ती है, बंधन एक्सप्रेस खुलना को कोलकाता से जोड़ती है जबकि मिताली एक्सप्रेस पहले ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। कोलकाता और न्यू जलपाईगुड़ी, दोनों पश्चिम बंगाल में हैं।


    किस मूड में है बांग्लादेश

    नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजशाही को कोलकाता से जोड़ने वाले एक नए रेल मार्ग का प्रस्ताव रख सकता है। बांग्लादेश की ओर से यह प्रस्ताव दिए जाने की भी संभावना है कि मैत्री एक्सप्रेस जमुना ब्रिज के बजाय हाल में बने पद्मा ब्रिज से होकर ढाका और कोलकाता के बीच चले।

    अधिकारी ने कहा, ‘अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन अगले महीने से फिर शुरू हो सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे अधिकारी भी इन सेवाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखते हैं।


    अब कैसे हैं रिश्ते

    भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और ‘पारस्परिक विश्वास एवं आपसी लाभ के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने’ पर सहमति जताई। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने यहां प्रधानमंत्री के सलाहकार मो इस्माइल जबीउल्ला से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों पर चर्चा की।

    भारतीय उच्चायोग ने उम्मीद जताई कि दोनों संप्रभु देश पारस्परिक विश्वास और आपसी फायदे के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

  • नेपाल: बाढ़ का तांडव देखने वाले बच्चों को सदमे से निकालने का प्रयास… कल से खुलेंगे 65 स्कूल

    नेपाल: बाढ़ का तांडव देखने वाले बच्चों को सदमे से निकालने का प्रयास… कल से खुलेंगे 65 स्कूल


    काठमांडू।
    नेपाल में जल प्रलय (Nepal floods) के दो हफ्ते पूरे होने वाले हैं लेकिन नुवाकोट, रसुवा और आसपास के जिलों में जिन बच्चों ने बाढ़ का तांडव देखा या अपनों को खोया, वे एक अदृश्य डर से जूझ रहे हैं। कोई आधी रात को चौंककर उठ जाता है, कोई गुमसुम हो जाता है, तो कोई आपदा की याद दिलाने वाली किसी भी आवाज से सहम जाता है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (Flood-Affected Areas) को फिर से बसाने की कवायद के बीच इन बच्चों को सदमें से बाहर लाने की कोशिशें भी जारी हैं। मेडिकल टीमें मानसिक सेहत सुधारने के लिए काउंसलिंग भी करा रही है। नुवाकोट के बिधुर में प्रशासन बुधवार से 65 स्कूलों को खोलने की तैयारी भी कर रहा है। बाढ़ से पहले बिदुर में कुल 79 स्कूल चल रहे थे। बिदुर की डिप्टी मेयर प्रभा बोगटी (Deputy Mayor Prabha Bogti) ने कहा, स्कूल इस बात का बंदोबस्त करेंगे कि वे आसानी से अपनी कक्षाओं में शामिल हो सकें।

    इस बीच, आपदा के 13वें दिन नेपाल में राष्ट्रीय शोक मनाया गया। इस दौरान राष्ट्र ध्वज को आधा झुका दिया गया और दीये और मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई।


    चुनौतीपूर्ण, अर्नोल्ड को याद आया सिलक्यारा

    2023 में भारत में सुरंग से 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। उन्होंने कहा, नेपाल का अभियान सिलक्यारा से अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां एक साथ कई स्थानों पर बचाव कार्य चल रहा है।

    1,380 लोगों की गई जान
    5,500 से अधिक लापता
    121 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका


    भारत के सीमांत क्षेत्रों में जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

    महराजगंज, कुशीनगर समेत कई सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ जैसे हालात के कारण मादा क्यूलेक्स मच्छर के पनपने और अंडों को सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

    नेपाल आपदा ने भारत के पूर्वी सीमांत क्षेत्रों में जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए जमीन तैयार कर दी है। अगर निवारक उपायों की दिशा में मजबूत कदम नहीं उठाए गए तो लोगों को दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आपदा से महराजगंज और कुशीनगर समेत कई इलाकों में महीनों दल-दल बने रहने की संभावना है। प्रभावित क्षेत्रों में अब हाईग्रेड फीवर के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं जिसे जापानी इंसेफेलाइटिस का संकेत माना जाता है। ऐसे में ग्रामीणों ने गहरी चिंता जताई है। महराजगंज के सेहगीबर्वा निवासी रामधारी निशाद, कुशीनगर के तमकोही राज निवासी लोकेश और पीपरी घाट निवासी उज्वल सिंह कहते हैं बाढ़ का दूषित पानी गांव के किनारे तक पानी पहुंच गया है। लोग बीमार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को बुखार की चपेट में आने वालों की जापानी इंसेफेलाइटिस की जांच करनी चाहिए।

    जंतु विशेषज्ञ सुनील कुमार कहते हैं, क्यूलेक्स नाम की मादा मच्छर जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए मुख्य रोग वाहक है। यह आमतौर पर तराई वाले क्षेत्रों में देखने को मिलता है। गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया गंडक नदी के आस-पास बसे हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में नमी वाला वातावरण रहता है, जिससे यहां खतरा ज्यादा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक गोरखपुर मंडल में करीब 1125 लोगों की मौत दर्ज की गई।

  • दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं में कमेंटियां बनी, जांच हुई, पर जवाबदेही अब तक तय नहीं… MCD की व्यवस्था पर उठे सवाल

    दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं में कमेंटियां बनी, जांच हुई, पर जवाबदेही अब तक तय नहीं… MCD की व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में भवन गिरने के हादसों (Building Collapse Accidents) के बाद जांच समितियां (Inquiry Committees) गठित करने और रिपोर्ट तैयार करने का सिलसिला पुराना है। जांच रिपोर्टों में कई बार एमसीडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे और अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, लेकिन हर मामले में कार्रवाई का परिणाम एक जैसा नहीं रहा। कहीं अधिकारियों को निलंबित किया गया, कहीं विभागीय कार्रवाई शुरू हुई और कहीं पूरी जिम्मेदारी से ही मुक्त कर दिया गया। इससे हादसों के बाद जवाबदेही तय करने की एमसीडी की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

    27 सितंबर 2011 को चांदनी महल में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत और 23 लोग घायल हुए। एमसीडी की जांच रिपोर्ट में अनधिकृत निर्माण और भवन की उम्र से संरचना कमजोर होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में आठ एमसीडी अधिकारियों को अनधिकृत निर्माण की अनुमति देने का दोषी माना गया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। रिपोर्ट में 30 साल से अधिक पुरानी इमारतों के लिए संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र अनिवार्य करने और खतरनाक भवनों की पहचान के लिए नीति बनाने की सिफारिश भी की गई।

    तीन दिसंबर 2011 को उत्तम नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। जांच में सामने आया कि पड़ोसी भूखंड में नींव के पास की गई खोदाई से ढांचे की नींव प्रभावित हुई थी। एमसीडी आयुक्त ने भवन विभाग के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर सतर्कता जांच के आदेश दिए। वहीं 30 मार्च 2012 को करोलबाग के प्रसाद नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच में विशेषज्ञों ने हादसे का मुख्य कारण कमजोर संरचनात्मक डिजाइन और कंक्रीट की अपर्याप्त मजबूती बताया। आयोग ने एमसीडी अधिकारियों की लापरवाही, निष्क्रियता और निर्माण रोकने में विफलता को स्पष्ट रूप से दर्ज किया।

    18 जुलाई 2015 को विष्णु गार्डन में भवन गिरने से पांच लोगों की मौत हुई। शुरुआत में एमसीडी ने सीवर लाइन से रिसाव को नींव कमजोर होने का कारण बताया और तीन अभियंताओं को निलंबित किया। बाद की जांच में दो या उससे अधिक अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को लेकर भवन विभाग के जेई, एई और ईई को प्रथमदृष्टया लापरवाही और कर्तव्य में चूक के लिए जिम्मेदार माना गया। हालांकि अतिरिक्त मंजिलें किस अवधि में बनीं, यह निश्चित नहीं हो सका, इसलिए सतर्कता विभाग को आगे जांच की जिम्मेदारी दी गई।

    13 सितंबर 2021 को सब्जी मंडी-मलकागंज में भवन गिरने से दो बच्चों की मौत हुई। एमसीडी की तीन सदस्यीय जांच समिति ने उपायुक्त और तीन अभियंताओं समेत चार अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार भवन को पहले खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। वहीं 30 मई 2026 को सैदुल्लाजाब में भवन गिरने से छह लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट में हादसे को रोके जा सकने योग्य बताया गया। रिपोर्ट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने, शिकायतों पर ध्यान न देने और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए।

  • शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका

    शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका


    नई दिल्ली । शेयर मार्केट आज के दौर में निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बहुत से लोग अपनी बचत को बढ़ाने के लिए शेयर बाजार का रुख कर रहे हैं लेकिन बाजार में कदम रखने से पहले इसकी बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है। शेयर मार्केट में कमाई के अवसर मौजूद हैं लेकिन यहां जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी और बिना रणनीति के पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है। खासतौर पर नए निवेशकों को किसी शेयर के तेजी से बढ़ने की खबर देखकर तुरंत निवेश करने से बचना चाहिए।

    शेयर मार्केट में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। डीमैट अकाउंट में आपके खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। इसके बाद बैंक अकाउंट को इनसे जोड़ा जाता है ताकि निवेश के लिए पैसा भेजा जा सके और जरूरत पड़ने पर रकम वापस ली जा सके। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी जरूर समझ लेनी चाहिए।

    नए निवेशक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत छोटी रकम से की जाए। शेयर बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे धीरे निवेश करने की आदत बनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार कंपनी की कमाई कर्ज भविष्य की योजनाओं और उद्योग की स्थिति को समझना चाहिए। केवल सोशल मीडिया या किसी दोस्त की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय यह भी समझना जरूरी है कि हर दिन शेयर की कीमत ऊपर नहीं जाएगी। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य बात है। कई बार अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार की परिस्थितियों के कारण नीचे आ सकते हैं। ऐसे समय में घबराकर तुरंत बेचने के बजाय निवेश के उद्देश्य और कंपनी की वास्तविक स्थिति को देखना चाहिए। हालांकि किसी भी निवेश में नुकसान की संभावना बनी रहती है इसलिए अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।

    शुरुआती निवेशकों के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में शोध के बाद निवेश करके समय के साथ अपने निवेश को बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके अलावा अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में पैसा बांटकर निवेश करने से किसी एक शेयर पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसे डायवर्सिफिकेशन कहा जाता है।

    अगर कोई व्यक्ति रोज शेयर खरीदने और बेचने यानी ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहता है तो उसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ट्रेडिंग में कीमतों में छोटे बदलाव से भी तेजी से लाभ या नुकसान हो सकता है। बिना पर्याप्त ज्ञान के इंट्राडे ट्रेडिंग या जोखिम वाले कारोबार में उतरना नुकसानदेह हो सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेयर मार्केट को जल्दी अमीर बनने का रास्ता नहीं समझना चाहिए। सही जानकारी अनुशासन धैर्य और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश की शुरुआत करना ज्यादा जरूरी है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें आप कितना जोखिम उठा सकते हैं यह समझें और जिस पैसे की जल्द जरूरत पड़ सकती है उसे बाजार में लगाने से बचें। शेयर बाजार में सफलता किसी एक टिप या एक शेयर पर निर्भर नहीं होती बल्कि समझदारी और लगातार सीखने की आदत पर निर्भर करती है।

  • वास्तु के इन छोटे नियमों से घर में बढ़ सकती है सकारात्मकता, धन सुख और शांति के लिए जानें आसान वास्तु टिप्स

    वास्तु के इन छोटे नियमों से घर में बढ़ सकती है सकारात्मकता, धन सुख और शांति के लिए जानें आसान वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली । घर केवल रहने की जगह नहीं होता बल्कि यह परिवार की भावनाओं और रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़ा स्थान भी है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और अलग अलग स्थानों की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार घर में सही दिशा और साफ सफाई का ध्यान रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि लोग घर बनवाते समय या घर की सजावट करते समय वास्तु के कई नियमों का ध्यान रखते हैं। अगर आप भी अपने घर में सुख शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान वास्तु टिप्स अपनाए जा सकते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य दरवाजे के आसपास हमेशा साफ सफाई रखनी चाहिए और वहां बेकार सामान जमा करने से बचना चाहिए। दरवाजा खुलने और बंद होने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक होता है। मुख्य द्वार पर पर्याप्त रोशनी रखना भी अच्छा माना जाता है।

    घर की रसोई को लेकर भी वास्तु में कई बातें बताई गई हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार रसोई में अग्नि तत्व का विशेष महत्व होता है। गैस चूल्हे और खाना बनाने की जगह को व्यवस्थित और साफ रखना चाहिए। सिंक और चूल्हे के आसपास गंदगी जमा नहीं होने देना चाहिए। रसोई में खराब या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाले उपकरणों को पड़े रहने से बचाना चाहिए। घर की साफ सफाई केवल वास्तु के लिहाज से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सुविधा के लिए भी जरूरी है।

    पूजा घर को घर का शांत और पवित्र स्थान माना जाता है। यहां अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए और पूजा स्थान को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। भगवान की प्रतिमाओं या तस्वीरों के आसपास भी व्यवस्था बनाए रखना बेहतर माना जाता है। पूजा के समय दीपक और अगरबत्ती का इस्तेमाल करते समय पर्याप्त वेंटिलेशन का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार शांत मन से की गई पूजा घर के वातावरण में सकारात्मकता का अनुभव कराने में मदद कर सकती है।

    बेडरूम में भी व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बिस्तर के आसपास कपड़े और अनावश्यक सामान इकट्ठा नहीं करना चाहिए। सोने की जगह को शांत और आरामदायक रखना बेहतर होता है। कमरे में बहुत ज्यादा सामान भरने के बजाय खुली जगह रखना चाहिए। टूटे हुए फर्नीचर और खराब वस्तुओं को लंबे समय तक घर में रखने से बचना चाहिए क्योंकि इससे घर अस्त व्यस्त दिखाई देता है।

    वास्तु में आईना रखने को लेकर भी कई पारंपरिक मान्यताएं हैं। घर में आईने को ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है जहां उसका उपयोग सुविधाजनक हो और वह कमरे को अनावश्यक रूप से अस्त व्यस्त न दिखाए। इसके साथ ही घर में टूटे हुए शीशे या खराब सजावटी सामान रखने से बचना चाहिए। पुराने और बेकार सामान की समय समय पर छंटाई करना घर को व्यवस्थित रखने का आसान तरीका है।

    घर में पौधे लगाने की परंपरा भी सकारात्मक वातावरण से जोड़ी जाती है। ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं जिनकी देखभाल आसानी से हो और जो घर के वातावरण के अनुकूल हों। सूखे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में रखने के बजाय उन्हें हटा देना चाहिए। प्राकृतिक रोशनी और हवा का घर में पर्याप्त प्रवेश भी जरूरी है।

    कुल मिलाकर वास्तु के नियमों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए केवल वास्तु पर निर्भर रहने के बजाय साफ सफाई अच्छी रोशनी पर्याप्त हवा व्यवस्थित सामान और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान को भी महत्व देना चाहिए। सकारात्मक सोच और अच्छा व्यवहार किसी भी घर के माहौल को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

  • आज 8 सितंबर 2026 का राशिफल: धन प्रेम करियर और स्वास्थ्य में आएंगे बड़े बदलाव पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज 8 सितंबर 2026 का राशिफल: धन प्रेम करियर और स्वास्थ्य में आएंगे बड़े बदलाव पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली ।
    आज 8 सितंबर 2026 का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग संभावनाएं लेकर आया है। ग्रहों की बदलती चाल का असर करियर धन व्यापार परिवार प्रेम संबंध और स्वास्थ्य पर देखने को मिल सकता है। आज कुछ लोगों के अधूरे काम पूरे होने की संभावना है जबकि कुछ जातकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करने से परिस्थितियां आपके पक्ष में बन सकती हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और आपकी मेहनत की सराहना होगी। आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाएं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं।

    वृषभ राशि वालों को आज धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। कार्यस्थल पर किसी बात को लेकर तनाव महसूस हो सकता है लेकिन शांत रहकर स्थिति को संभाल सकते हैं। धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी रहेगी। परिवार के किसी सदस्य से अच्छी खबर मिल सकती है।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए दिन नए अवसर लेकर आ सकता है। आपकी संवाद क्षमता और समझदारी से रुके हुए काम आगे बढ़ेंगे। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। विद्यार्थियों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और पर्याप्त आराम करें।

    कर्क राशि के जातकों को आज भावनाओं के बजाय व्यावहारिक सोच के साथ काम करना चाहिए। नौकरी और व्यापार में नई योजनाओं पर काम शुरू हो सकता है। परिवार का सहयोग मिलेगा। धन की स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना बेहतर होगा।

    सिंह राशि वालों के लिए आज आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी और परिवार में खुशी का माहौल रह सकता है।

    कन्या राशि के जातकों को आज कामकाज में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। किसी पुराने काम को पूरा करने में सफलता मिलेगी। आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें और खानपान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए आज का दिन संतुलन बनाकर चलने का है। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों के साथ तालमेल अच्छा रहेगा। व्यापार में नए संपर्क लाभ दे सकते हैं। परिवार के साथ किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो सकती है। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव के योग हैं।

    वृश्चिक राशि के जातकों को आज अपनी योजनाएं गोपनीय रखनी चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया फैसला परेशानी बढ़ा सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। धन के मामले में स्थिति बेहतर रहने की संभावना है।

    धनु राशि वालों के लिए आज यात्रा या नई योजना के अवसर बन सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित होगी। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    मकर राशि के जातकों को आज अपनी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में रुके हुए काम पूरे होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। परिवार में किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    कुंभ राशि वालों के लिए आज नए विचार सफलता का रास्ता खोल सकते हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दोस्तों और परिवार का सहयोग मिलेगा। खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन उम्मीदों और नई संभावनाओं से भरा रह सकता है। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे और मेहनत का परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए सकारात्मक सोच और धैर्य का सहारा लें।

    कुल मिलाकर आज का दिन कई राशियों के लिए प्रगति और नए अवसर लेकर आया है। सही समय पर सही फैसला लेना सफलता दिला सकता है। ग्रहों के संकेतों को मार्गदर्शन के रूप में लेते हुए अपने कर्म और प्रयासों पर भरोसा रखें।

  • कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार

    कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार


    पटना। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा के पेपर लीक मामले (Paper leak cases) में जांच आगे बढ़ने के साथ एक और आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ गया है। झारखंड CID की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पटना से राजन कुमार को गिरफ्तार किया है। राजन पटना में कारोबार करता है। जांच के दौरान रैकेट से उसके कथित जुड़ाव के संकेत मिलने के बाद CID की टीम काफी समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

    परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाने का आरोप
    जांच में सामने आया है कि राजन कुमार ने कथित तौर पर कई परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी दी गई और संभावित सवालों के जवाब बताए गए। इसके बदले परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का भी आरोप है।

    CID को आशंका थी कि राजन पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है। टीम ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी के साथ मामले से जुड़े सबूत जुटाए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद SIT ने पटना पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

    पेपर सेट करने वाली एजेंसी से कनेक्शन की जांच
    पूरे मामले में ICN एजेंसी का नाम भी सामने आया है, जिसे परीक्षा का पेपर सेट करने वाली एजेंसी बताया जा रहा है। जांच के मुताबिक, राजन कुमार को ICN एजेंसी से जुड़े मिथिलेश सिंह का करीबी माना जाता है। इसी कथित संपर्क के जरिए राजन तक परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

    अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में राजन के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही CID मिथिलेश सिंह की कथित भूमिका और राजन के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश
    CID की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी किस स्तर से बाहर निकली और इसे परीक्षार्थियों तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की। जांच एजेंसी को आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क राजन कुमार और मिथिलेश सिंह तक सीमित नहीं है। पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

  • ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार

    ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार


    नई दिल्ली। दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल से बाहर का कोई व्यक्ति राज्य के लोगों के खान-पान और पहनावे को लेकर फैसला नहीं सुना सकता। उनके मुताबिक बंगाल की अपनी सांस्कृतिक परंपराएं हैं और लोगों की भोजन संबंधी आदतों को किसी के कहने पर नहीं बदला जा सकता।

    धीरेंद्र शास्त्री ने हाल में कहा था कि जो लोग खुद को धार्मिक बताते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे मांसाहारी भोजन बनाते हैं, उन्हें धार्मिक नहीं बल्कि पाखंडी कहा जाना चाहिए। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील भी की थी। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की परंपराओं और खान-पान को बाहर से आकर तय नहीं किया जा सकता।

    ‘बंगाली वही खाएंगे जो खाते आए हैं’

    समिक भट्टाचार्य ने कहा, “मुझे अपनी मर्जी से जीने दें, बंगाली वहीं खाएंगे जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते?”

    उन्होंने बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि मां काली को बकरे और मांस का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। उनके मुताबिक अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाने की भी बंगाल में पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है।

    भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाना जारी रखेंगे। कोई भी बंगाल के लोगों को ये नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए।”

    धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान, लेकिन राय थोपने के खिलाफ

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत राय को पूरे बंगाली समाज पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई संत या डॉक्टर लोगों को शाकाहारी भोजन अपनाने की सलाह दे सकता है, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि बंगाल के लोग क्या खाएं या क्या पहनें।

    इस बयान के साथ ही दुर्गा पूजा के दौरान खान-पान को लेकर शुरू हुई बहस ने बंगाल की स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को लेकर राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

  • ट्रंप की रेटिंग ऑल टाइम लो, मिडटर्म में रिपब्लिकन के लिए बढ़ी चुनौती

    ट्रंप की रेटिंग ऑल टाइम लो, मिडटर्म में रिपब्लिकन के लिए बढ़ी चुनौती


    नई दिल्ली। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बन गई है। चुनाव से करीब दो महीने पहले सामने आए ताजा सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। ऐसे संकेत हैं कि नवंबर में होने वाले चुनाव में डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वापसी कर सकते हैं।

    रॉयटर्स और इप्सॉस के ताजा सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग ऑल टाइम लो पर है। बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ईरान युद्ध और देश की आर्थिक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप की घटती लोकप्रियता का सीधा असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    सर्वे में रजिस्टर्ड वोटरों से पूछा गया कि अगर अभी कांग्रेस के चुनाव कराए जाएं तो वे किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट देंगे। जवाबों में डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पर 5 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली। खास बात यह है कि डेमोक्रेट समर्थक चुनाव को लेकर रिपब्लिकन समर्थकों की तुलना में ज्यादा उत्साहित नजर आए।

    हाउस में बहुमत का बेहद करीबी मुकाबला

    मिडटर्म चुनाव में सबसे बड़ा मुकाबला प्रतिनिधि सभा को लेकर माना जा रहा है। फिलहाल हाउस में रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए डेमोक्रेट्स को केवल 3 सीटें और हासिल करनी होंगी। करीब 50 सीटों पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है, ऐसे में कुछ सीटों के नतीजे ही सदन का पूरा समीकरण बदल सकते हैं।

    अगर डेमोक्रेट्स हाउस में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। उनके पास प्रशासन के खिलाफ कई जांच शुरू करने की ताकत होगी। साथ ही, सरकार को अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ समझौते करने पड़ सकते हैं।

    सीनेट में भी रिपब्लिकन के सामने चुनौती

    सीनेट की तस्वीर फिलहाल हाउस की तुलना में कम स्पष्ट है, लेकिन यहां भी कई सीटों पर मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए रिपब्लिकन की 4 सीटें जीतनी होंगी।

    अगर डेमोक्रेट्स सीनेट पर भी नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप प्रशासन के लिए कई अहम नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर राष्ट्रपति के नामित उम्मीदवारों की नियुक्ति रोकने की उनकी क्षमता बढ़ जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में किसी जज का पद खाली होने की स्थिति में सीनेट का यह समीकरण और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

    ट्रंप की लोकप्रियता क्यों बन रही चुनावी मुद्दा?

    अमेरिका में मिडटर्म चुनाव को अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति के कार्यकाल पर जनता के अप्रत्यक्ष जनमत संग्रह के तौर पर देखा जाता है। राष्ट्रपति की पार्टी को इन चुनावों में अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। इस बार ट्रंप की कम अप्रूवल रेटिंग रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।

    इतिहास भी रिपब्लिकन के लिए ज्यादा राहत देने वाला नहीं है। 1938 के बाद से केवल दो मिडटर्म चुनाव ऐसे रहे हैं, जब राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई। ऐसे में नवंबर का चुनाव सिर्फ ट्रंप की लोकप्रियता की परीक्षा नहीं, बल्कि संसद में रिपब्लिकन की मौजूदा पकड़ बचाने की भी बड़ी लड़ाई माना जा रहा है।

  • यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार

    यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार


    नई दिल्ली। यमन में सोमवार को एक जेल पर कथित हवाई हमले के बाद तनाव बढ़ गया। हूती विद्रोहियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। हूतियों के मुताबिक, उत्तरी यमन के जौफ प्रांत में हुए हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 7 अन्य लोग घायल बताए गए हैं, जिनमें एक महिला शामिल है।

    हमला जौफ प्रांत के हज्म शहर स्थित सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी पर होने का दावा किया गया है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इमारत के मलबे में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला के दबे होने की आशंका है।

    हूती मीडिया ने हमले के बाद के दृश्य भी प्रसारित किए हैं। फुटेज में क्षतिग्रस्त इमारत, चारों ओर बिखरा मलबा और राहत एवं बचाव दल के सदस्य तलाशी अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं।

    हूती प्रवक्ता ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जौफ में एयरस्ट्राइक कर ‘नरसंहार’ किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी होगी।

    सरी ने बाद में यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटे में हूती बलों ने सऊदी अरब के चार टोही ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    कई इलाकों में आगे बढ़ रही सरकारी सेना

    जेल पर हमले के ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रति वफादार बल कई मोर्चों पर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं। इनमें जौफ के अलावा बैदा, दहले और मारिब के इलाके शामिल हैं।

    यमन का गृहयुद्ध 2014 में उस समय शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

    जेलों को पहले भी बनाया जा चुका है निशाना

    यमन के संघर्ष में जेल और हिरासत केंद्र पहले भी हवाई हमलों का शिकार हो चुके हैं। 2022 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हमले में सादा की एक डिटेंशन फैसिलिटी में कम से कम 87 कैदियों की मौत हुई थी।

    इससे पहले 2019 में धमार में हूतियों द्वारा संचालित डिटेंशन फैसिलिटी पर हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

    डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान

    संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की जान जा चुकी है। युद्ध की वजह से देश गंभीर मानवीय और खाद्य संकट की ओर भी धकेला गया है।

    वर्ष 2022 से बड़े स्तर पर कायम युद्धविराम अब कमजोर पड़ चुका है और अलग-अलग मोर्चों पर जारी सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।