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  • हनुमान जी की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या न करें? जानें प्रिय भोग, फूल और पूजा के आसान उपाय

    हनुमान जी की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या न करें? जानें प्रिय भोग, फूल और पूजा के आसान उपाय


    नई दिल्ली । भगवान हनुमान को संकटमोचन और भक्तों के दुखों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और निस्वार्थ भक्ति से जल्दी प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि जहां भगवान राम का नाम लिया जाता है वहां हनुमान जी की कृपा अवश्य बनी रहती है। यही कारण है कि मंगलवार और शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर बजरंगबली की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

    हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भव्य और महंगे भोग की अपेक्षा सच्चे मन से की गई पूजा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में लाल और केसरिया रंग का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए कई श्रद्धालु हनुमान जी को लाल फूल अर्पित करते हैं। गुड़हल का फूल विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसके अलावा भक्त लाल रंग के वस्त्र और लाल रंग की पूजा सामग्री का भी उपयोग करते हैं।

    हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा भी बहुत प्रचलित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार सिंदूर का संबंध माता सीता और भगवान राम के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए भक्त बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया यह पूजन भक्त के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।

    भोग की बात करें तो हनुमान जी को बूंदी के लड्डू और बेसन के लड्डू विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। मंगलवार और शनिवार को भक्त मंदिरों में लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद बांटते हैं। इसके अलावा गुड़ और चने का भोग भी बजरंगबली को अर्पित किया जाता है। कई जगहों पर केले और अन्य सात्विक फलों का भोग लगाने की परंपरा भी है। माना जाता है कि भोग हमेशा शुद्ध और सात्विक होना चाहिए और उसे पहले भगवान को अर्पित करने के बाद ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।

    हनुमान जी भगवान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं। इसलिए राम नाम का जाप और रामायण या सुंदरकांड का पाठ भी हनुमान जी को अत्यंत प्रिय बताया गया है। भक्त अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा पढ़ने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में आत्मविश्वास तथा साहस का संचार होता है।

    पूजा के दौरान भगवान हनुमान के सामने दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। चमेली के तेल का दीपक कई श्रद्धालु विशेष रूप से जलाते हैं। इसके साथ ही भगवान राम और हनुमान जी का स्मरण करते हुए सच्चे मन से प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा में पवित्रता और संयम का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार हनुमान जी को सबसे अधिक प्रिय है सच्ची भक्ति और सेवा का भाव। जरूरतमंद की मदद करना गरीबों को भोजन कराना और किसी के प्रति मन में बुराई न रखना भी भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। इसलिए अगर आप हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा के साथ अपने व्यवहार और कर्मों को भी सकारात्मक रखें। सच्चे मन से भगवान राम का नाम लें हनुमान चालीसा का पाठ करें और श्रद्धा के साथ लड्डू गुड़ चना फल लाल फूल तथा सिंदूर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि भक्त की सच्ची आस्था देखकर संकटमोचन हनुमान उसके जीवन के कष्टों और बाधाओं को दूर करने की कृपा करते हैं।

  • मंगलवार व्रत से दूर हो सकती हैं जीवन की बाधाएं, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जानें पूजा विधि और जरूरी नियम

    मंगलवार व्रत से दूर हो सकती हैं जीवन की बाधाएं, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जानें पूजा विधि और जरूरी नियम


    नई दिल्ली । मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में भगवान हनुमान की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरी आस्था और विश्वास के साथ बजरंगबली का व्रत रखते हैं और उनसे जीवन की परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान शक्ति साहस भक्ति और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। उन्हें संकटमोचन भी कहा जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी पूजा करने वाले भक्तों के जीवन से अनेक प्रकार के संकट और बाधाएं दूर हो सकती हैं। मंगलवार का व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान को साफ कर भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा की शुरुआत भगवान श्रीराम और माता सीता के स्मरण के साथ करना शुभ माना जाता है क्योंकि हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं। इसके बाद बजरंगबली को लाल फूल सिंदूर और लाल रंग का वस्त्र अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक परंपराओं में हनुमान जी को चमेली के तेल के साथ सिंदूर चढ़ाने की भी विशेष मान्यता है।

    पूजा के दौरान भगवान हनुमान को गुड़ चना बूंदी के लड्डू या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फल और मिठाई भी अर्पित करते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुंदरकांड का पाठ और राम नाम का जाप भी किया जा सकता है। पूजा करते समय मन को शांत रखकर भगवान हनुमान का ध्यान करना चाहिए और जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करनी चाहिए।

    व्रत रखने वाले लोग दिनभर सात्विकता और संयम का पालन करते हैं। कई श्रद्धालु फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। यह व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। व्रत के दौरान क्रोध नकारात्मक विचार और किसी के प्रति बुरी भावना से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि केवल भोजन का त्याग करना ही व्रत नहीं होता बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी होती है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना और किसी का अपमान न करना भी शुभ माना जाता है।

    मंगलवार की शाम को दोबारा भगवान हनुमान की पूजा की जा सकती है। दीपक जलाकर आरती करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटें। व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना उचित माना जाता है। कुछ परंपराओं में नमक का सेवन नहीं किया जाता जबकि कई लोग सामान्य सात्विक भोजन करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाना चाहिए। इसे किसी डर या दबाव में रखने के बजाय मन की शांति और आत्मिक विश्वास के लिए करना बेहतर माना जाता है। हनुमान जी की पूजा व्यक्ति को साहस धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती है। जीवन में जब चुनौतियां बढ़ती हैं और मन परेशान होता है तब भक्ति और सकारात्मक सोच व्यक्ति को मानसिक मजबूती प्रदान कर सकती है। मंगलवार के दिन श्रद्धा के साथ की गई हनुमान आराधना इसी विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने का माध्यम मानी जाती है।

  • MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश

    MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब तक सीजन के सामान्य बारिश के कोटे का 83.5% पूरा कर चुका है। प्रदेश में औसतन 31.1 इंच यानी 790.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भोपाल समेत 12 जिलों में बारिश सामान्य से अधिक है, जबकि 31 जिले अभी भी औसत से पीछे चल रहे हैं। अगले कुछ दिनों में बारिश का फोकस प्रदेश के पूर्वी हिस्से में रहने की संभावना है।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक सामान्य से अधिक बारिश वाले जिलों में भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया शामिल हैं।

    वहीं उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर में सामान्य बारिश का 90% से ज्यादा कोटा पूरा हो चुका है।

    पूर्वी MP में सबसे ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में सबसे कम पानी

    पूरे मानसून सीजन में बारिश के लिहाज से प्रदेश के पूर्वी हिस्से की स्थिति बेहतर रही है। इसके उलट इंदौर-उज्जैन संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में सबसे कम बारिश हुई है।

    जिलेवार आंकड़ों में मऊगंज सबसे आगे है, जहां अब तक करीब 53 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं आलीराजपुर में सबसे कम 13.6 इंच पानी गिरा है।

    11 सितंबर तक रीवा-शहडोल में बारिश

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में इस दौरान हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने पर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    सामान्य से 2 इंच कम, कुल कमी 6%

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 790.8 मिमी यानी 31.1 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 840.6 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक करीब 2 इंच कम बारिश हुई है और ओवरऑल कमी 6% है।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 1% ज्यादा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    31 जिलों में 3% से 54% तक कमी

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 3% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में सामान्य से आगे पहुंचा है और सोमवार तक यहां 1% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिले अब भी पीछे

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति अभी भी कमजोर है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 7% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • ‘स्वच्छ वायु’ में दिल्ली ने मारी बड़ी छलांग, श्रीनगर-बेंगलुरु समेत कई बड़े शहर पीछे, इंदौर दूसरे स्‍थान पर

    ‘स्वच्छ वायु’ में दिल्ली ने मारी बड़ी छलांग, श्रीनगर-बेंगलुरु समेत कई बड़े शहर पीछे, इंदौर दूसरे स्‍थान पर


    नई दिल्ली।
    सर्दियों में जहरीली हवा और 400 के पार पहुंचने वाले AQI के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली दिल्ली ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में राजधानी ने 172 अंक के साथ 21वां स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि इस रैंकिंग में दिल्ली ने श्रीनगर, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया।

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी सर्वेक्षण में दिल्ली और विशाखापत्तनम को संयुक्त रूप से 21वां स्थान मिला। श्रीनगर 162.6 अंक के साथ 26वें, जबकि बेंगलुरु 152.6 अंक के साथ 32वें स्थान पर रहा। मुंबई को 160.8 अंक मिले और वह 28वें स्थान पर रही। चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा।

    हालांकि, दिल्ली की बेहतर रैंकिंग का मतलब यह नहीं है कि राजधानी की हवा इन शहरों से ज्यादा साफ हो गई है। दरअसल, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में केवल वास्तविक वायु गुणवत्ता को नहीं देखा जाता, बल्कि प्रदूषण कम करने के लिए शहरों की ओर से किए जा रहे प्रयासों और उनके अमल का भी मूल्यांकन किया जाता है।

    प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर मिलते हैं अंक

    सर्वेक्षण में सड़क की धूल पर नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे कई मानकों को शामिल किया जाता है।

    यही कारण है कि किसी शहर की हवा खराब होने के बावजूद यदि वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर योजनाएं लागू करता है तो उसे रैंकिंग में फायदा मिल सकता है। इसलिए दिल्ली की 21वीं रैंक को उसकी वायु गुणवत्ता का सीधा प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

    लखनऊ नंबर-1, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे नंबर पर

    10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। मध्य प्रदेश का इंदौर 197 अंक लेकर दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और वे संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। यहां यह समझना जरूरी है कि स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण अलग-अलग मानकों पर आधारित होते हैं। इसलिए किसी शहर की दोनों रैंकिंग की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।

    इन शहरों से आगे निकली दिल्ली

    दिल्ली की 21वीं रैंकिंग कई प्रमुख शहरों से बेहतर रही। पटना 178 अंकों के साथ 16वें और हैदराबाद 19वें स्थान पर रहा। विशाखापत्तनम दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से 21वें स्थान पर रहा।

    इसके बाद मुंबई 28वें, बेंगलुरु 32वें, चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा। यानी राजधानी ने मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता को पीछे छोड़ दिया, हालांकि पटना और हैदराबाद उससे आगे रहे।

    एक साल में 11 पायदान ऊपर पहुंची राजधानी

    दिल्ली के प्रदर्शन में पिछले साल के मुकाबले भी सुधार दर्ज हुआ है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में दिल्ली 32वें स्थान पर थी और उसका स्कोर 157.3 था। इस बार राजधानी का स्कोर बढ़कर 172 हो गया और रैंकिंग 21वें स्थान तक पहुंच गई।

    इस तरह दिल्ली ने एक साल में 11 पायदान की छलांग लगाई है। यह प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में सुधार का संकेत जरूर है, लेकिन राजधानी की वास्तविक वायु गुणवत्ता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    PM2.5 और PM10 की स्थिति अब भी चिंताजनक

    केंद्र सरकार ने 2025 को दिल्ली के लिए 2018 के बाद का सबसे बेहतर साल बताया था, हालांकि कोविड-19 से प्रभावित 2020 को इसमें अलग रखा गया था। इसके बावजूद राजधानी में वार्षिक औसत PM10 का स्तर 198 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का स्तर 97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

    इसके मुकाबले राष्ट्रीय वार्षिक मानक PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 के लिए 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी रैंकिंग में सुधार के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से काफी ऊपर बना हुआ है।

    सर्दियों में फिर लागू करना पड़ा था GRAP-IV

    दिल्ली की प्रदूषण समस्या की गंभीरता 2025-26 की सर्दियों में भी देखने को मिली। जनवरी 2026 में वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने के बाद राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-IV लागू करना पड़ा था।

    राजधानी में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, मौसम की स्थिति और पराली का धुआं मिलकर सर्दियों में स्थिति को और गंभीर बना देते हैं।

    रैंकिंग बढ़ी, लेकिन साफ हवा की चुनौती कायम

    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दिल्ली की 21वीं रैंक निश्चित रूप से यह बताती है कि प्रदूषण से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके क्रियान्वयन में सुधार हुआ है। लेकिन इसे राजधानी की हवा साफ होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    असल कामयाबी तब होगी, जब दिल्ली का PM2.5 और PM10 स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचे और सर्दियों में AQI 400 के पार जाने वाली स्थिति पर प्रभावी तरीके से रोक लगे। फिलहाल दिल्ली ने रैंकिंग में जरूर छलांग लगाई है, लेकिन राजधानी के सामने स्वच्छ हवा की असली परीक्षा अभी बाकी है।

  • 8 सितंबर को कई राशियों के लिए बनेंगे सफलता और लाभ के योग, करियर, परिवार, कारोबार और स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस

    8 सितंबर को कई राशियों के लिए बनेंगे सफलता और लाभ के योग, करियर, परिवार, कारोबार और स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस

    नई दिल्ली । 8 सितंबर 2026 का दिन सभी राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आएगा। कुछ जातकों के लिए करियर और कारोबार में प्रगति के अवसर बनेंगे, तो कुछ को स्वास्थ्य और लेन-देन के मामलों में सावधानी बरतनी होगी। परिवार, संबंधों और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में संयम और समझदारी से आगे बढ़ना लाभकारी रहेगा।

    मेष राशि वालों के प्रबंधन से जुड़े प्रयास प्रभावी रहेंगे और लक्ष्य हासिल करने में सफलता मिल सकती है। भवन और वाहन से जुड़े मामले हल होंगे। परिजनों की बातों को नजरअंदाज न करें और अति उत्साह या आवेश से बचें। संबंधों में जल्दबाजी से निर्णय न लें। शुभ अंक 1, 8 और 9 तथा शुभ रंग लाल रहेगा। हनुमानजी के दर्शन करें, लाल वस्तुओं का दान करें और ‘ओम् अं अंगारकाय नमः’ का जाप करें।

    वृष राशि के जातकों के सामाजिक कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और वाणिज्यिक गतिविधियों में सहजता बनी रहेगी। वाणी और व्यवहार पर संयम रखने से अपेक्षित परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी। सबको साथ लेकर आगे बढ़ें। शुभ अंक 6, 8 और 9 तथा शुभ रंग क्रीम है। हनुमानजी की वंदना करें, लाल वस्तुओं का दान बढ़ाएं और धर्म कार्यों से जुड़ें।

    मिथुन राशि वालों के घर-परिवार में आनंद रहेगा और इच्छित प्रस्ताव मिलने से उत्साह बढ़ेगा। आर्थिक मामलों को गति मिलेगी, रक्त संबंध मजबूत होंगे और उपहार या भेंट के अवसर मिल सकते हैं। शुभ अंक 5, 8 और 9 तथा शुभ रंग बादामी है। हनुमानजी के दर्शन करें और अपने वादे निभाएं।

    कर्क राशि के व्यवहार में मधुरता आएगी और संबंधों में सुधार होगा। रचनात्मक प्रयासों को बल मिलेगा। करियर और व्यापार में तेजी आएगी तथा नए अनुबंध बनने के योग हैं। शुभ अंक 1, 2, 8 और 9 तथा शुभ रंग आम्र समान है। हनुमानजी की वंदना करें और आधुनिक सोच के साथ काम करें।

    सिंह राशि वालों को कामकाज में नीति और नियमों का पालन करना होगा। विदेश से जुड़े मामलों में तेजी आ सकती है, जबकि सामान्य कार्यों की गति धीमी रह सकती है। कानूनी मामलों में सतर्क रहें। शुभ अंक 1, 3 और 9 तथा शुभ रंग चेरी रेड है। हनुमानजी के दर्शन करें और विनम्र रहें।

    कन्या राशि के जातकों को वाणिज्यिक लाभ मिलेगा। व्यापार और नई गतिविधियों में सफलता के योग हैं। करियर और कारोबार में तेजी रहेगी तथा पेशेवर प्रदर्शन बेहतर होगा। शुभ अंक 1, 3, 5 और 9 तथा शुभ रंग मरून है। हनुमानजी की वंदना करें और अहंकार से बचें।

    तुला राशि वालों को कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान मिलेगा। सहकर्मियों और वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा। नए लोगों पर तुरंत भरोसा न करें। प्रशासनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन में प्रभावी रहेंगे। शुभ अंक 6, 8 और 9 तथा शुभ रंग पीच है। हनुमानजी के दर्शन करें और सहकारिता बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि के जातकों को भाग्य का पूरा साथ मिल सकता है। धार्मिक कार्यों की रूपरेखा बनेगी, लाभकारी योजनाएं आगे बढ़ेंगी और मित्रों का सहयोग मिलेगा। दीर्घकालिक योजनाओं को गति मिलेगी। शुभ अंक 3, 8 और 9 तथा शुभ रंग गुलाबी है। हनुमानजी की वंदना करें, लाल वस्तुओं का दान करें और धर्मकार्य करें।

    धनु राशि वालों को कामकाज में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। परिचित लोगों से सतर्क रहें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को नजरअंदाज न करें। बड़ों का सानिध्य मनोबल बढ़ाएगा। शुभ अंक 3, 8 और 9 तथा शुभ रंग केशरिया है। हनुमानजी के दर्शन करें और सहनशील रहें।

    मकर राशि के व्यक्तिगत प्रयास सफल होंगे। पद और प्रतिष्ठा बढ़ सकती है तथा जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। औद्योगिक मामले हल होंगे और योजनाओं में तेजी आएगी। शुभ अंक 5, 8 और 9 तथा शुभ रंग रस्ट है। हनुमानजी की वंदना करें और मदद का भाव बनाए रखें।

    कुंभ राशि वालों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना होगा। पेशेवर संबंध अनुकूल रहेंगे, लेकिन खर्च और लेन-देन पर ध्यान दें। बहस से बचते हुए सकारात्मक सोच रखें। शुभ अंक 6, 8 और 9 तथा शुभ रंग गेहूंआ है। हनुमानजी के दर्शन करें और ‘ओम् अं अंगारकाय नमः’ का जाप करें।

    मीन राशि के जातकों को अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और करियर उम्मीद से बेहतर रह सकता है। संतान से शुभ समाचार मिलने के योग हैं। दोस्तों का भरोसा बना रहेगा और लाभ के अवसर मिलेंगे। शुभ अंक 3, 6, 8 और 9 तथा शुभ रंग सिंदूरी है। हनुमानजी की वंदना करें, लाल वस्तुओं का दान करें और भेंट बढ़ाएं।

  • लहसुन-प्याज के फायदे के बावजूद जैन समाज क्यों नहीं करता सेवन? वायरल वीडियो में मुनि के जवाब पर बजीं तालियां

    लहसुन-प्याज के फायदे के बावजूद जैन समाज क्यों नहीं करता सेवन? वायरल वीडियो में मुनि के जवाब पर बजीं तालियां

    नई दिल्ली । लहसुन और प्याज भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल हैं। इनके सेवन को सामान्य तौर पर स्वाद और पोषण से जोड़ा जाता है। हालांकि जैन समाज में प्याज, लहसुन, आलू और जमीन के भीतर उगने वाली कई अन्य कंद-मूल सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता। इसके पीछे केवल खानपान से जुड़े कारण नहीं, बल्कि जैन धर्म की धार्मिक मान्यताएं और अहिंसा का सिद्धांत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इसी विषय को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से चर्चा में है। वीडियो में ‘भाभी जी घर पर है’ के कलाकार सानंद वर्मा, मुनिपुंगवश्री सुधा सागरजी महाराज से जैन समाज में प्याज और लहसुन के सेवन से परहेज किए जाने की वजह पूछते नजर आते हैं। मुनि ने सवाल का जवाब देते हुए भोजन और जैन जीवनशैली से जुड़ी मान्यताओं को समझाया।

    वीडियो में सानंद वर्मा पहले मुनिपुंगवश्री सुधा सागरजी महाराज का आशीर्वाद लेते हैं और फिर उनसे पूछते हैं कि जैन समाज के लोग प्याज और लहसुन क्यों नहीं खाते। इसके जवाब में महाराज उनसे सवाल करते हैं कि उन्हें किस समाज के लोगों की बुद्धि सबसे तेज लगती है। बातचीत के दौरान वह मजाकिया अंदाज में बनिया समाज का उल्लेख करते हैं और इसके बाद जमीन के अंदर उगने वाली चीजों को लेकर अपनी बात रखते हैं।

    सागरजी महाराज के अनुसार जमीन के अंदर उगने वाले पदार्थ अंधेरे, नमी और मिट्टी के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में जमीन के नीचे उगने वाले फल खाने और जमीन के ऊपर उगने वाले फल खाने के बीच अंतर समझाने की कोशिश की। उनके कथन के अनुसार जमीन के ऊपर उगने वाले पौधों को प्रकाश और ऑक्सीजन मिलती है। इसी बात को उन्होंने जैन समुदाय के खानपान और मानसिक तेज होने की धारणा से जोड़कर बताया।

    इसके बाद महाराज ने जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों से परहेज का दूसरा कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे मौजूद चीजों को निकालते समय छोटे-छोटे जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। पौधे को जड़ समेत उखाड़कर खाने से कई जीवों के नष्ट होने की आशंका रहती है। उन्होंने इसे अहिंसा के सिद्धांत से जोड़ते हुए भोजन के चयन का कारण बताया।

    जैन धर्म में अहिंसा को विशेष महत्व दिया गया है। जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव में आत्मा मानी जाती है और किसी भी जीव को अनावश्यक कष्ट पहुंचाना हिंसा के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से भोजन चुनते समय भी ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है, जिनसे जीवों को कम से कम नुकसान पहुंचे।

    जैन आहार परंपरा में आलू, प्याज, लहसुन, गाजर और मूली जैसे कई कंद-मूल को लेकर विशेष नियम माने जाते हैं। इन्हें जमीन से निकालने के लिए पौधे को उखाड़ना पड़ता है, जिससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचने की धार्मिक मान्यता है। कुछ कंदों से दोबारा पौधा विकसित होने की क्षमता को भी जैन दर्शन में जीवों की उपस्थिति से जोड़कर देखा जाता है।

    वीडियो में सानंद वर्मा महाराज की बात सुनने के बाद कहते हैं कि वह आगे से जमीन के ऊपर उगने वाले फल खाने की कोशिश करेंगे। जैन परंपरा में प्याज और लहसुन का त्याग केवल जमीन के भीतर उगने के कारण नहीं माना जाता, बल्कि संयम और आध्यात्मिक साधना से भी जोड़ा जाता है। भोजन को शरीर की आवश्यकता पूरी करने के साथ मन और इंद्रियों पर नियंत्रण का माध्यम माना जाता है। जैन साधु-साध्वियों के लिए आहार संबंधी नियम और भी अधिक कठोर होते हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ की कमाई ने 31वें दिन पकड़ी रफ्तार, 22.75 करोड़ कलेक्शन के साथ फिल्म ने बनाए कई बड़े रिकॉर्ड

    ‘हनुमान अंश’ की कमाई ने 31वें दिन पकड़ी रफ्तार, 22.75 करोड़ कलेक्शन के साथ फिल्म ने बनाए कई बड़े रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। फिल्म की कमाई में हर गुजरते दिन के साथ तेजी देखने को मिल रही है। रिलीज के 31वें दिन फिल्म ने ऐसा कलेक्शन किया, जिसने कई बड़ी फिल्मों के 31वें दिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। फिल्म अब तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर इसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।

    31वें दिन फिल्म ने 22.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इस दौरान फिल्म को 7077 शोज मिले और इसकी ऑक्यूपेंसी 73 प्रतिशत रही। 31वें दिन की कमाई के मामले में फिल्म ने ‘धुरंधर’, ‘छावा’, ‘उरी’, ‘स्त्री 2’, ‘धुरंधर 2’, ‘महावतार नरसिम्हा’, ‘पुष्पा 2’, ‘तान्हाजी’ और ‘बाहुबली 2’ जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।

    इन फिल्मों की 31वें दिन की कमाई की बात करें तो ‘धुरंधर’ ने 12.75 करोड़ रुपये, ‘छावा’ ने 8 करोड़ रुपये, ‘उरी’ ने 5.66 करोड़ रुपये और ‘स्त्री 2’ ने 5.40 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। वहीं ‘धुरंधर 2’ ने 4.65 करोड़ रुपये, ‘महावतार नरसिम्हा’ ने 6.15 करोड़ रुपये, ‘पुष्पा 2’ ने 5.50 करोड़ रुपये, ‘तान्हाजी’ ने 3.45 करोड़ रुपये और ‘बाहुबली 2’ ने 3.16 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

    ‘हनुमान अंश’ के अब तक के कुल कारोबार पर नजर डालें तो फिल्म ने 122.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है। वहीं इसका ग्रॉस कलेक्शन 144.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी रही थी। रिलीज के पहले दिन फिल्म ने केवल 10 लाख रुपये कमाए थे। पहले सप्ताह में भी फिल्म का कारोबार सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये रहा था। उस समय फिल्म को लगभग 300 से 400 शोज ही मिले थे।

    दूसरे सप्ताह में फिल्म के शोज की संख्या और घट गई थी। उस दौरान इसे सिर्फ 25 से 30 शोज मिले और फिल्म ने महज 40 लाख रुपये का कारोबार किया। इसके बाद तीसरे सप्ताह में फिल्म की स्थिति पूरी तरह बदल गई। दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का असर बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दिया और फिल्म ने तीसरे सप्ताह में 10.40 करोड़ रुपये की कमाई कर ली।

    चौथे सप्ताह में फिल्म ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए 61 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके बाद फिल्म की कमाई लगातार बढ़ती गई। 29वें दिन फिल्म ने 10 करोड़ रुपये, 30वें दिन 16.50 करोड़ रुपये और 31वें दिन 22.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।

    फिल्म के शोज की संख्या भी अब बढ़कर करीब सात हजार तक पहुंच गई है। धीमी शुरुआत के बाद ‘हनुमान अंश’ का इस तरह तेजी से आगे बढ़ना बॉक्स ऑफिस पर इसकी मजबूत होती पकड़ को दिखाता है। 31वें दिन की कमाई ने फिल्म के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है।

  • अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि उसके पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन यानी ईएसजी प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है। कंपनी का ईएसजी स्कोर पिछले मूल्यांकन के 65 अंक से बढ़कर 66 अंक हो गया है। कंपनी के अनुसार, इस सुधार के साथ उसने भारतीय ताप विद्युत, मिश्रित ईंधन और एकीकृत ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बीच अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।

    कंपनी को एनएसई सस्टेनेबिलिटी के नवीनतम आकलन में एक बार फिर ‘एस्पायरिंग’ श्रेणी में रखा गया है। एनएसई सस्टेनेबिलिटी सेबी-पंजीकृत ईएसजी रेटिंग प्रदाता और एनएसई इंडिसीज की सहायक कंपनी है। यह सूचीबद्ध कंपनियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।

    अदाणी पावर के अनुसार, ईएसजी स्कोर में हुआ सुधार स्थिरता से जुड़ी पहलों और परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम है। कंपनी ने बताया कि उसने अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक वाले कम उत्सर्जन संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाया है। इसके साथ लगातार उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणालियों, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों, जल संरक्षण उपायों और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी पहलों को भी मजबूत किया गया है।

    सामाजिक क्षेत्र में कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर केंद्रित कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इन पहलों का उद्देश्य उसके परिचालन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

    एनएसई सस्टेनेबिलिटी हर वर्ष भारत की 500 सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्यांकन करता है। इसके माध्यम से निवेशकों और अन्य हितधारकों को कंपनियों की दीर्घकालिक मूल्य सृजन क्षमता तथा ईएसजी प्रदर्शन का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध कराया जाता है।

    सुशासन के क्षेत्र में अदाणी पावर ने बताया कि उसकी विभिन्न बोर्ड समितियों में स्वतंत्र निदेशकों का प्रतिनिधित्व नियामकीय आवश्यकताओं से अधिक है। कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों के लिए भी ईएसजी मानकों को अपनाने की बात कही है। इसके पीछे पूरे कारोबारी तंत्र में जिम्मेदार कारोबारी प्रथाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य बताया गया है।

    कंपनी को हाल के वर्षों में कई अन्य वैश्विक और घरेलू स्थिरता रेटिंग्स भी मिली हैं। अदाणी पावर को एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट में 100 में से 71 अंक मिले हैं। वहीं एफटीएसई रसेल ने कंपनी को 5 में से 4.3 अंक की रेटिंग दी है।

    इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने अदाणी पावर को 100 में से 80 अंक दिए हैं। इस स्कोर के आधार पर कंपनी को एजेंसी की ‘लीडरशिप’ श्रेणी में रखा गया है, जिसे उद्योग के औसत स्तर से ऊपर माना जाता है।

    अदाणी पावर के अनुसार ये रेटिंग्स उसके कारोबार और दीर्घकालिक विकास रणनीति में स्थिरता संबंधी सिद्धांतों को शामिल करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं शेयर बाजार में सोमवार को एनएसई पर अदाणी पावर का शेयर 204.40 रुपये पर बंद हुआ।

  • Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल

    Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंतराल को घटाकर 25 दिन कर दिया है। नए नियम के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता समान समय अंतराल पर अगला रिफिल बुक करा सकेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति में सुधार और लंबित रिफिल बुकिंग में कमी आने के बाद प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए पहले निर्धारित 45 दिन की अवधि को कम किया गया है।

    इससे पहले ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव के दौरान ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू थी। शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी ग्राहक 25 दिन के अंतराल पर रिफिल बुक कर सकते थे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अगली बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतराल निर्धारित किया गया था। अब यह अंतर समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू मांग पूरी करने और उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर निगरानी और नियंत्रणात्मक उपाय किए थे।

    अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग तथा आपूर्ति संबंधी व्यवधान के दौरान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा था। इसका असर एलपीजी की उपलब्धता पर भी पड़ा था। संभावित कमी को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने रिफिल बुकिंग और आपूर्ति से जुड़े कुछ प्रतिबंध लागू किए थे।

    अब आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आने के बाद ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी शहरी ग्राहकों के समान 25 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक करने की अनुमति मिल गई है। इससे विशेष रूप से उन ग्रामीण परिवारों को सुविधा मिलने की उम्मीद है जिनकी घरेलू एलपीजी खपत अपेक्षाकृत अधिक है और जिन्हें पहले अगली बुकिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों को संशोधित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग प्रक्रिया को सामान्य करना और एलपीजी की बेहतर उपलब्धता का लाभ सीधे घरेलू ग्राहकों तक पहुंचाना है।

    सरकार ने इससे पहले वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों में भी चरणबद्ध तरीके से राहत दी थी। जून में गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति को संघर्ष-पूर्व स्तरों के अनुरूप सामान्य करने के निर्देश दिए गए थे। इससे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध कराने की दिशा में राहत मिली।

    ऊर्जा संकट के दौरान व्यावसायिक गतिविधियों पर असर कम करने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले की खपत के 50 प्रतिशत तक बहाल करने की अनुमति भी दी गई थी। बाद में आपूर्ति की स्थिति में सुधार के साथ प्रतिबंधों में और ढील दी गई।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के उपाय किए थे। अब ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन की रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू होने से देशभर में घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए नियम अधिक समान हो गया है।

  • राजनीतिक मतभेदों के बीच महिलाओं के सम्मान पर समझौता नहीं, तृषा विवाद के बाद विजय ने आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया

    राजनीतिक मतभेदों के बीच महिलाओं के सम्मान पर समझौता नहीं, तृषा विवाद के बाद विजय ने आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा में सोमवार को उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीति में विचारों और नीतियों को लेकर तीखी बहस हो सकती है, लेकिन किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा और सफलता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में महिलाओं के खिलाफ गलत, गंदी या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उन्हें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    विजय का यह बयान अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़े हालिया विवाद के बीच सामने आया है। इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीति में भी काफी चर्चा पैदा की है। मामले को लेकर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके की ओर से विरोध दर्ज कराया गया था।

    विवाद की शुरुआत कावेरी नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े राजनीतिक मुद्दे को लेकर हुई बहस के दौरान हुई। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार को इस मुद्दे पर घेरा था। इसी दौरान अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।

    इसके बाद टीवीके कार्यकर्ताओं ने मामले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में इस कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और संबंधित लोगों की रिहाई हुई। पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बयानबाजी में भाषा और मर्यादा को लेकर नई बहस छेड़ दी।

    मुख्यमंत्री विजय ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन महिलाओं को निशाना बनाकर आपत्तिजनक टिप्पणी करना अलग विषय है। उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं के बीच आलोचना और बहस हो सकती है, मगर व्यक्तिगत गरिमा और महिलाओं के सम्मान की सीमा नहीं टूटनी चाहिए।

    इसी विवाद से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने उद्यमी प्रवीन गणेशन को गिरफ्तार किया है। 35 वर्षीय गणेशन हांगकांग से भारत लौट रहे थे। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

    गणेशन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके खिलाफ जून में किए गए एक पोस्ट को लेकर लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। उनका कहना है कि संबंधित पोस्ट बाद में हटा दिया गया था। इसके बावजूद मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    तृषा कृष्णन से जुड़ा विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि साइबर अपराध और कानूनी कार्रवाई का विषय भी बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विजय का विधानसभा में दिया गया बयान महिलाओं के सम्मान को लेकर उनकी पार्टी और सरकार के रुख को सामने रखता है।

    तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके के सत्ता में आने के बाद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माहौल भी तेज हुआ है। ऐसे में महिला सम्मान, सार्वजनिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर नेताओं तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री विजय ने साफ किया है कि राजनीतिक संघर्ष अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।