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  • शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल

    शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल


    नई दिल्ली । पारंपरिक लुक को खास बनाने में ज्वेलरी का हमेशा अहम रोल रहा है और खासकर बैंगल्स यानी चूड़ियां। ये न केवल हाथों की खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि साधारण सूट या कुर्ती को भी एक डिजाइनर टच देती हैं। फैशन की दुनिया में नए ट्रेंड्स आते रहते हैं लेकिन पारंपरिक एथनिक स्टाइल का क्रेज कभी कम नहीं होता। आइए जानते हैं 5 लेटेस्ट बैंगल डिज़ाइन जो आपके लुक को रॉयल बना देंगे।

    ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बैंगल्स

    ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी आजकल काफी ट्रेंड में है। अगर आप कॉटन कुर्ती या इंडो वेस्टर्न सूट पहन रही हैं तो चांदी जैसी दिखने वाली ऑक्सीडाइज्ड चूड़ियां बेस्ट ऑप्शन हैं। इन्हें आप जींस कुर्ती के साथ भी पहन सकती हैं। ये स्टाइलिश होने के साथ साथ आपको बोहेमियन और एथनिक लुक भी देती हैं।

    सिल्क थ्रेड बैंगल्स

    रेशमी धागों से बनी सिल्क थ्रेड बैंगल्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। इन्हें सूट के रंग के अनुसार कस्टमाइज कराना आसान है। मोती स्टोन और मिरर वर्क इन्हें हैवी सूट या छोटे फंक्शन के लिए परफेक्ट बनाता है। ये त्योहारों और हल्के समारोहों के लिए एक बेहतरीन चॉइस हैं।

    कश्मीरी बैंगल्स

    अगर आप कुछ यूनिक और कलात्मक पहनना पसंद करती हैं तो कश्मीरी बैंगल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। इन पर की गई हैंड पेंटिंग और फ्लोरल डिज़ाइन इन्हें बाकी चूड़ियों से अलग बनाती हैं। अक्सर इन्हें स्टेटमेंट ज्वेलरी के तौर पर ही पहना जाता है।

    वेलवेट बैंगल्स

    सर्दियों और रात की शादियों के लिए वेलवेट बैंगल्स बेस्ट हैं। मखमली टेक्सचर और गहरा रंग साधारण सूट को भी रॉयल और महंगा लुक देता है। आजकल इन्हें पूरी कलाई भरकर पहनने के बजाय गोल्ड या कुंदन के कड़ों के बीच में सेट करके पहनना ट्रेंड में है।

    कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े

    शादी या बड़ी पार्टी के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े सबसे शानदार विकल्प हैं। इन्हें पूरी चूड़ियों के सेट के बजाय एक एक चौड़ा कड़ा दोनों हाथों में पहनना आजकल पसंद किया जाता है। अगर आपकी कुर्ती पर हैवी एम्ब्रॉयडरी है तो ये कड़े आपको रॉयल और क्लासी लुक देंगे।बैंगल्स सही डिजाइन और सेटिंग के साथ किसी भी लुक को हाई फैशन और रॉयल बना सकते हैं। चाहे त्योहार हो या शादी इन 5 बैंगल डिज़ाइनों से आपका सूट भी एथनिक और स्टाइलिश लगेगा।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर

    चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दौरान भक्त पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 26 मार्च को होगा। इसी दिन महानवमी के साथ साथ राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।

    नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है जिसे देवी पूजा का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 6:23 बजे से 7:32 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यदि किसी कारणवश इस समय स्थापना न हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी घटस्थापना की जा सकती है। इस समय विधि विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और नौ दिनों तक नियमित पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसी आधार पर माता दुर्गा के आगमन का वाहन तय होता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है इसलिए मान्यता है कि माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। हाथी को समृद्धि अच्छी वर्षा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विशेष बात यह है कि इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग भी एक ही दिन पड़ रहा है। 26 मार्च को अष्टमी और नवमी का संयुक्त पूजन कन्या पूजन और हवन किया जाएगा। इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा जिससे यह दिन और भी अधिक शुभ माना जा रहा है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी सातवें दिन मां कालरात्रि आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों में अलग अलग भोग अर्पित करते हैं और मां से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है तथा हवन भी किया जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घटस्थापना से पहले घर और पूजा स्थान की साफ सफाई की जाती है। मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं कलश में जल सुपारी और सिक्का रखा जाता है तथा ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

    नवरात्रि के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए रोज सुबह शाम मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए और दान पुण्य करना चाहिए। वहीं मांस मदिरा का सेवन झूठ बोलना और क्रोध करने से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया नवरात्रि पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

  • कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर

    कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर


    नई दिल्ली। इस सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए समय जिम्मेदारी, आत्मविश्लेषण और प्रगति का संकेत दे रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति आपके जीवन के कई क्षेत्रोंखासकर करियर, रिश्तों और मानसिक संतुलनपर प्रभाव डाल सकती है। इस दौरान व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी रहेगा।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस सप्ताह चंद्रमा 16 मार्च को छठे भाव में, 18 मार्च को सातवें भाव में और 21 मार्च को आठवें भाव में गोचर करेंगे। वहीं सूर्य, शुक्र और शनि की युति मीन राशि में बनी हुई है, जबकि मंगल, राहु और वक्री बुध कुंभ राशि में स्थित हैं। इसके साथ ही बृहस्पति आपके दसवें भाव में मौजूद हैं, जो करियर और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

    इन ग्रह स्थितियों के कारण व्यवसाय विस्तार और विदेशी संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना बन रही है। हालांकि वक्री बुध की वजह से किसी भी बड़े फैसले या बातचीत में सावधानी रखना जरूरी होगा।

    स्वास्थ्य
    इस सप्ताह स्वास्थ्य के मामले में अनुशासन और संतुलित दिनचर्या बेहद जरूरी रहेगी। सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा का प्रभाव आपको अपने खान-पान और लाइफस्टाइल के प्रति जागरूक बनाएगा।
    मध्य सप्ताह में काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव या भावनात्मक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना आपको मानसिक शांति देगा।

    सप्ताहांत में ऊर्जा का स्तर थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है, इसलिए अधिक काम से बचें। हल्का व्यायाम, योग और ध्यान आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    परिवार और संबंध
    रिश्तों के लिहाज से यह सप्ताह आत्मचिंतन और सुधार का अवसर लेकर आएगा। शुरुआत में व्यस्तता के कारण परिवार को समय कम दे पाएंगे, लेकिन जैसे ही चंद्रमा सातवें भाव में प्रवेश करेगा, रिश्तों में सुधार दिखाई देगा।

    जीवनसाथी या पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करने से पुरानी गलतफहमियां दूर हो सकती हैं। शुक्र का मजबूत प्रभाव रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ाएगा।

    हालांकि सप्ताह के अंत में घर में किसी गंभीर विषय पर चर्चा हो सकती है, इसलिए अनावश्यक बहस से बचना ही बेहतर रहेगा।

    शिक्षा और करियर
    छात्रों के लिए यह सप्ताह मेहनत और सीखने का समय रहेगा। छठे भाव का चंद्रमा आपको अनुशासन में रखेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

    मध्य सप्ताह में ग्रुप स्टडी और शिक्षकों से मार्गदर्शन फायदेमंद साबित होगा। सप्ताहांत में शोध, विश्लेषण और गहराई से पढ़ाई करने वाले विषयों पर फोकस बढ़ेगा।एकाग्रता के साथ किया गया काम ही बेहतर परिणाम दिला सकता है।

    कुल मिलाकर यह सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए धीरे-धीरे लेकिन स्थिर प्रगति का संकेत देता है। ग्रहों की स्थिति आपको जिम्मेदारी निभाने, आत्मविकास करने और सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी।

    बृहस्पति और उच्च के शुक्र की कृपा से नए अवसर और सहयोग मिलने की संभावना है। अगर आप धैर्य और स्पष्ट संवाद बनाए रखेंगे, तो यह सप्ताह आपके लिए सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

    उपाय
    रोजाना “ओम बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।

    बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

    जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग की दाल या हरी सब्जी दान करें।

    मानसिक शांति के लिए नियमित ध्यान और योग करें।

    सुबह पक्षियों को दाना डालें।

    संक्षेप में यह सप्ताह कन्या राशि के लिए जिम्मेदारी, रिश्तों में सुधार और करियर में नए अवसरों का संकेत दे सकता है। सही संवाद और धैर्य आपके लिए सफलता के रास्ते खोल सकते हैं।

  • कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद

    कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद


    नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फलों को डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन्हीं फलों में से एक है कीवी, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। हल्का खट्टा-मीठा स्वाद रखने वाला यह फल न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि कीवी को जूस के रूप में पीना ज्यादा फायदेमंद है या इसे सीधे फल के रूप में खाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही तरीके लाभकारी हैं, लेकिन साबुत फल खाने से शरीर को ज्यादा फाइबर मिलता है, जबकि जूस जल्दी ऊर्जा देने में मदद करता है।

    कीवी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, विटामिन-ई, पोटैशियम, फोलेट, फाइबर, कॉपर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसका सेवन शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में कीवी का जूस पीना शरीर को तरोताजा रखने में सहायक होता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुबह के समय इसका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं।

    कीवी या उसके जूस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से राहत दिलाने में मदद करता है। कई बार डॉक्टर डेंगू बुखार के दौरान भी कीवी या कीवी के जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है।

    कीवी का सेवन दिल की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है, जिससे दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, इसमें मौजूद पोषक तत्व जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मददगार माने जाते हैं। कीवी आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं।

    अगर आप कीवी का जूस बनाना चाहते हैं तो इसे अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसे मिक्सर में डालकर थोड़ा पानी, स्वादानुसार काला नमक और चाहें तो थोड़ी चीनी मिलाकर ब्लेंड कर लें। अंत में इसमें थोड़ा नींबू का रस मिलाकर ताजगी से भरपूर जूस तैयार किया जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संभव हो तो कीवी को जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर को फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

  • मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

    मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली:आजकल फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मसल्स बनाने और शरीर को मजबूत रखने के लिए लोग जिम में घंटों मेहनत करते हैं और कई बार महंगे सप्लीमेंट का भी सहारा लेते हैं। हालांकि शरीर को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज संतुलित आहार और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन है। कई लोग नॉनवेज फूड्स से प्रोटीन की कमी पूरी कर लेते हैं लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में लोबिया दाल एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आती है जो स्वाद के साथ साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल को प्लांट बेस्ड प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और उनके विकास के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। अगर आप नियमित रूप से लोबिया दाल का सेवन करते हैं तो इससे मसल्स मजबूत बनने में मदद मिल सकती है। लगभग सौ ग्राम उबले हुए लोबिया में करीब आठ से दस ग्राम प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देने और मांसपेशियों को ताकत देने में सहायक होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं और बढ़ते बच्चों के लिए यह दाल काफी फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल वजन कम करने में भी मददगार हो सकती है। इसमें डाइटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन प्रक्रिया को धीरे चलने में मदद करती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इससे बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और व्यक्ति अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाता है। इसके साथ ही लोबिया में कैलोरी की मात्रा कम होती है और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं जिससे यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाती है।

    पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी लोबिया दाल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पेट से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसका नियमित सेवन कब्ज की समस्या को कम करने और आंतों की सफाई करने में सहायक माना जाता है। फाइबर शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।

    लोबिया दाल केवल मसल्स और पाचन के लिए ही नहीं बल्कि दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा लोबिया बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होती है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा भी कम हो सकता है।

    भारत में महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी एक आम समस्या है। लोबिया दाल आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत मानी जाती है जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर हो सकता है और थकान तथा कमजोरी की समस्या कम हो सकती है।

    इसके अलावा लोबिया में मौजूद जिंक और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट में पौष्टिक और संतुलित भोजन शामिल करना चाहते हैं तो लोबिया दाल को नियमित रूप से खाना एक अच्छा और फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है।

  • लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

    लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा।

    उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।

  • पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को

    पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को


    Election
    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग ने रविवार को पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। पुडुचेरी, केरल और असम में 09 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। सभी के नतीजे 0 4 मई को आयेंगे।

    असम, पुडुचेरी और केरल की सभी 126, 30 और 140 सीटों पर 16 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को की जाएगी। उम्मीदवार 26 मार्च तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटो पर 30 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 06 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 07 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 09 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटो पर 02 अप्रैल अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 09 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    इसके अलावा आयोग ने आज गोवा की पोंडा, गुजरात की उमरेठ, कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ, महाराष्ट्र की राहुरी और बारामती, नगालैंड की कोरिडांग (एसटी) तथा त्रिपुरा की धर्मनगर पर उपचुनाव की घोषणा की है। इन सभी सीटों पर संबंधित विधायकों के निधन के कारण रिक्ति उत्पन्न हुई है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव कराया जाएगा। इनमें से गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल और बाकी सभी सीटों पर 09 अप्रैल को मतदान होगा।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ दिल्ली में आज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से जुड़ी पत्रकार वार्ता की। इसमें कुमार ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी जगह पर आदर्श आचार संहिता लग गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग नियम और व्यवस्था के तहत काम करता है और आचार संहिता लगने से पूर्व लिए गए सरकारी फैसलों और राजनीतिक बयानों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद दिए गए बयानों और प्रशासनिक निर्णय पर चुनाव आयोग कड़ी नजर रखेगा।

    चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं। कुल 824 विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 07 मई तमिलनाडु का 10 मई, असम 20 मई और केरल 23 मई को समाप्त होगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक है।

    कुल 824 विधानसभा सीटों में असम में 126, केरल में 140, पुडुचेरी में 30, तमिलनाडु में 234 और पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं। असम में 09 एससी और 19 एसटी सीटें, केरल में 14 एससी और 02 एसटी सीटें, पुडुचेरी में 05 एससी सीटें, तमिलनाडु में 44 एससी और 02 एसटी सीटें तथा पश्चिम बंगाल में 68 एससी और 16 एसटी सीटें आरक्षित हैं।

    आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता लगभग 17.4 करोड़ हैं। असम में लगभग 2.50 करोड़, केरल में 2.70 करोड़, पुडुचेरी में करीब 9.44 लाख, तमिलनाडु में लगभग 5.67 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता हैं।

  • एलपीजी बुकिंग घटकर 77 लाख हुईं, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं: सरकार

    एलपीजी बुकिंग घटकर 77 लाख हुईं, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं: सरकार


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने सरकार ने कहा है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। देश में घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी रिफिल की बुकिंग में गिरावट आई है, यह घटकर अब करीब 77 लाख पर पहुंच गई है, जबकि 13 मार्च को ये 88.8 लाख थी।

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि देशभर में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, जबकि तेल विपणन कंपनियों के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। मंत्रालय के मुताबिक हालिया दहशत में कमी आने के बाद एलपीजी बुकिंग 88 लाख से घटकर लगभग 77 लाख रह गई है। केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें और ऑनलाइन रिफिल बुक करें।

    मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रभाव पर जारी दैनिक अपडेट में बताया कि ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग का हिस्सा बढ़कर लगभग 87 फीसदी हो गया है, जो पहले 84 फीसदी था। इसका श्रेय तेल विपणन कंपनियों के डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा देने और लोगों को एलपीजी डीलरशिप पर लंबी कतारों में खड़ा होकर आवश्यकता से ज्यादा खरीदारी करने से रोकने वाले अभियान को दिया गया है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश की सभी घरेलू रिफाइनरी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और पर्याप्त कच्चे तेल का भंडारण बनाए हुए हैं। देश पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इन ईंधनों का कोई आयात आवश्यक नहीं है। तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन खुदरा बिक्री केंद्रों या एलपीजी वितरकों के पास भंडारण खत्म होने की कोई जानकारी नहीं दी है। पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की आपूर्ति नियमित रूप से बनाए रखी जा रही है। एलपीजी बुकिंग में गिरावट आई है। इससके एक दिन पहले शनिवार को लगभग 77 लाख बुकिंग दर्ज की गई थी, जबकि 13 मार्च, 2026 को यह संख्या 88.8 लाख थी। इसके साथ ही ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग बढ़कर 84 फीसदी से लगभग 87 फीसदी हो गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देना और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना फिलहाल जारी रहेगा, विशेषकर घरों और प्राथमिक क्षेत्रों जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के लिए। केंद्र सरकार ने बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन के लिए निर्देश जारी किए हैं। वहीं, राज्य सरकारें पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए कड़ाई से निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं।

    पेट्रोयिम मंत्रालय के मुताबिक एलपीजी का उत्पादन अधिकतम किया गया है और बुकिंग अंतराल को समुचित रूप से निर्धारित किया गया है, ताकि समान वितरण भी सुनिश्चित हो सके। अद्यतन जानकारी में सरकार ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों को 24 घंटे हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है। 28 फरवरी के बाद से लगभग 1.94 लाख यात्रियों को भारत लौटाया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक सरकारी तेल विपणन कंपनियां डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा दे रही हैं, घबराकर बुकिंग करने से रोक रही हैं। एलपीजी वितरकों को रविवार को भी खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपूर्ति सुचारू रहे। सरकार ने कहा कि नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे घबराकर बुकिंग न करें, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें। इसके अलावा नागरिकों को पीएनजी जैसी वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट

    डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से एयर इंडिया को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अस्थायी छूट दी है।

    आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी जानकारी में बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित कर रही है। विमानन नियामक डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय-सीमा में अस्थायी ढील दी है, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेगी।

    डीजीसीए ने इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, पायलटों के समय-सारणी में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा की जरूरत को भी छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की जेद्दा उड़ान में कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट है, जो अनुमत सीमा से 10 मिनट अधिक है।

    डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि है जब विमान उड़ान भरने के लिए जमीन से उठकर सुरक्षित लैंडिंग तक चलता है। कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करता है और तब खत्म होती है जब वह अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद अपनी ड्यूटी समाप्त करता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में कटौती की है। डीजीसीए ने कहा कि यह छूट पायलटों की सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ान संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।

  • 2030–2036 के वैश्विक खेल चक्र की तैयारी अभी से जरूरी: जय शाह

    2030–2036 के वैश्विक खेल चक्र की तैयारी अभी से जरूरी: जय शाह


    नई दिल्ली।
    भारतीय खेलों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत पर जोर देते हुए आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि देश को 2030 से 2036 के वैश्विक खेल चक्र की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल महासंघों, कॉरपोरेट जगत, खिलाड़ियों और मीडिया के समन्वित प्रयास से ही भारत अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

    जय शाह रविवार को स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजेएफआई) के गोल्डन जुबली राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन आयोजित ग्रैंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया था, जिसकी मेजबानी दिल्ली स्पोर्ट् जर्नलिस्ट एसोसिएशन (डीएसजेए) ने की।

    जय शाह ने कहा कि मौजूदा प्रतियोगिताओं पर ध्यान देने के साथ-साथ भविष्य की बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के लिए भी अभी से तैयारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और 2036 ओलंपिक जैसे आयोजनों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी, तभी भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना पाएगा।

    भारतीय क्रिकेट की हालिया उपलब्धियों का जिक्र करते हुए शाह ने 2019 से 2026 के दौर को स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में भारतीय क्रिकेट ने अंडर-19 टूर्नामेंट से लेकर बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों तक हर स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने भारत की टी20 विश्व कप जीत को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए खेल पत्रकारों की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने इन उपलब्धियों को देशभर के करोड़ों प्रशंसकों तक पहुंचाया।


    कॉरपोरेट क्षेत्र खेलों की वृद्धि का अहम आधार

    कॉन्क्लेव में संजय भान ने कहा कि पिछले दशक में भारतीय खेलों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि क्रिकेट के अलावा फुटबॉल, हॉकी और गोल्फ जैसे खेल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि आज कॉरपोरेट केवल जर्सी पर लोगो लगाने वाले प्रायोजक नहीं रह गए हैं, बल्कि वे लीग स्थापित करने, जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकसित करने और खिलाड़ियों के लिए पेशेवर मंच तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही उन्होंने खेल मीडिया को भी इस पूरे तंत्र का अहम हिस्सा बताया, जो खिलाड़ियों की कहानियों को देशभर तक पहुंचाता है।


    मीडिया अभियान से बढ़ता है खेलों का उत्साह

    नेविल बस्तावाला ने कहा कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान मीडिया अभियान राष्ट्रीय उत्साह पैदा करने और खिलाड़ियों को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एशियाई खेलों से पहले चलाए गए ‘मिशन 100’ अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआत में यह लक्ष्य कठिन लग रहा था, लेकिन मीडिया के सहयोग से पूरे देश में विश्वास पैदा हुआ और भारत ने अंततः 100 से अधिक पदक जीतने में सफलता हासिल की।

    उन्होंने कहा कि प्रसारक और मीडिया खेलों के आसपास सकारात्मक माहौल और कहानी गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे खिलाड़ी और प्रशंसक दोनों प्रेरित होते हैं।


    पारदर्शिता से बढ़ेगा कॉरपोरेट निवेश

    कॉन्क्लेव में रेमस डि क्रूज ने खेल संगठनों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि खेल महासंघ मजबूत प्रशासन और स्पष्ट नीतियों के साथ काम करें तो इससे कॉरपोरेट क्षेत्र का भरोसा बढ़ेगा और खेलों में निवेश भी बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय और राज्य स्तर के खेल संगठनों में बेहतर प्रशासनिक सुधार से जमीनी स्तर पर खेलों के विकास के नए अवसर खुल सकते हैं।

    एसजेएफआई के गोल्डन जुबली राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन आयोजित यह ग्रैंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य और भविष्य की दिशा पर चर्चा का प्रमुख मंच बना, जिसमें प्रशासकों, कॉरपोरेट प्रतिनिधियों, प्रसारकों और खेल पत्रकारों ने भाग लिया।