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  • उज्जैन पहुंचीं उमा भारती ने नागपंचमी हादसे पर जताया दुख, CJP बयान का जवाब दिया और शराबबंदी पर रखी अपनी बात

    उज्जैन पहुंचीं उमा भारती ने नागपंचमी हादसे पर जताया दुख, CJP बयान का जवाब दिया और शराबबंदी पर रखी अपनी बात


     मध्यप्रदेश: की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सोमवार दोपहर उज्जैन पहुंचीं। यहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना भी की। दर्शन के बाद उमा भारती ने नागपंचमी पर हुए हादसे, सिंहस्थ की तैयारियों, सीएम डॉ. मोहन यादव, कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और सागर शराब कांड को लेकर अपनी बात रखी।

    महाकाल मंदिर पहुंचने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने गर्भगृह में बाबा महाकाल का पूजन और अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान वे भक्ति में लीन नजर आईं। दर्शन के बाद उन्होंने नंदी के कानों में अपनी मनोकामना कही और नंदी को दुलार भी किया। इसके बाद उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

    मीडिया से बातचीत के दौरान उमा भारती ने कहा कि जब भी वह महाकाल मंदिर आती हैं, उन्हें अच्छी व्यवस्था मिलती है। हालांकि, उन्होंने नागपंचमी पर हुए हादसे पर दुख भी जताया। उन्होंने कहा कि कई भगवानों की पूजा लोग घर पर ही कर सकते हैं और परिस्थितियों को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक व्यवस्था, पुलिस और प्रशासन की भी अपनी एक सीमा होती है। कई बार ये सीमाएं लोगों की आस्था के सामने टूट जाती हैं। इसलिए लोगों को भी सुव्यवस्थित तरीके से चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ अनुमान गलत हुए थे और यह घटना आगे के लिए सबक है। उन्हें विश्वास है कि प्रशासन भविष्य में इसका ध्यान रखेगा।

    सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर उमा भारती ने कहा कि काम अच्छी तरह चल रहा है। उन्होंने बताया कि लैंड पुलिंग को उज्जैन की भूमि से बाहर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। उमा भारती ने डॉ. मोहन यादव को महाकाल का बालक बताया और कहा कि उन पर भगवान का आशीर्वाद बना रहे।

    CJP को लेकर पूछे गए सवाल पर उमा भारती ने ‘कॉकरोच चप्पल और हिट छिड़कने से मर जाएंगे’ वाले बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच गंदगी से पैदा होते हैं और यदि गंदगी रहेगी तो वे फिर पैदा हो जाएंगे। उनके अनुसार सिस्टम की गंदगी खत्म करने की जरूरत है। अगर सिस्टम में गंदगी बनी रहेगी तो चप्पल और हिट से कुछ नहीं होने वाला।

    सागर शराब कांड पर उमा भारती ने दुख जताते हुए कहा कि शराब पीना ही नहीं चाहिए और अवैध शराब की बिक्री भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब की बिक्री होने पर समाज को सख्ती बरतनी चाहिए। उन्होंने सरपंच, पंचायत सदस्य, जनपद अध्यक्ष, नगर पंचायत सदस्य और अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष, पार्षद, विधायक तथा सांसद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है और क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वे अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को भी अपना काम करना चाहिए।

    उमा भारती ने कहा कि मोहन सरकार सख्ती बरतेगी और मुख्यमंत्री मोहन यादव को शराब से सख्त नफरत है। उन्होंने कहा कि यदि मोहन के हाथ में हो तो पूरे हिंदुस्तान में आदमी शराब न पी सके। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान भी इसी तरह थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी नीति को लागू करने के लिए जनसहयोग भी पूरी तरह जरूरी है।

  • दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चार दिवसीय दुबई प्रवास का दूसरा दिन सोमवार, 7 सितंबर को मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री एआईएम कांग्रेस 2026 में भाग लेंगे और विभिन्न देशों के राजनीतिक एवं शासन स्तर के प्रतिनिधियों, निवेशकों तथा संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ संवाद करेंगे। दिनभर होने वाले कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक संभावनाओं और वैश्विक साझेदारी के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस 2026 के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इसके साथ ही वे मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन करेंगे। एआईएम कांग्रेस के मंच पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश के अवसर और प्रदेश में उपलब्ध अनुकूल कारोबारी वातावरण को वैश्विक निवेश समुदाय के सामने रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सर्वोच्च परिषद के सदस्य और रास अल खैमाह के शासक महामहिम शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी से शिष्टाचार भेंट करेंगे। यह मुलाकात मध्यप्रदेश और यूएई के बीच निवेश तथा आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी।

    एआईएम कांग्रेस के लीडर्स सेशन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की मौजूदगी में संबोधित करेंगे। इस वैश्विक मंच पर वे मध्यप्रदेश की विकास यात्रा, राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं और उद्योगों के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष रखेंगे। इसी अवसर पर इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव तातारस्तान गणराज्य, रूस के गवर्नर के साथ भी बैठक करेंगे। इस बैठक में मध्यप्रदेश और रूस के बीच औद्योगिक तथा निवेश सहयोग की संभावनाओं को लेकर संवाद होगा। इसके बाद दिन के प्रमुख कार्यक्रमों में ‘इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश, इंडिया’ निवेश सत्र आयोजित होगा।

    इस निवेश सत्र में मुख्यमंत्री वैश्विक निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, प्रमुख क्षेत्रों, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी देंगे। उनका संबोधन प्रदेश को एक विश्वसनीय और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने पर केंद्रित रहेगा।

    इसके बाद यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव संबोधित करेंगे। यह संवाद भारत, मध्यप्रदेश और यूएई के बीच व्यापार तथा निवेश संबंधों को व्यापक बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री महामहिम अब्दुल्ला बिन तौक अल मरी के साथ भी बैठक होगी। इसमें निवेश, व्यापार, पर्यटन और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री विदेश व्यापार राज्य मंत्री और एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी से बैठक करेंगे।

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक यूसुफ अली एम.ए. के साथ मुख्यमंत्री की बैठक भी महत्वपूर्ण रहेगी। इस दौरान मध्यप्रदेश में निवेश और व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। दिन के समापन पर दुबई के महावाणिज्य दूत द्वारा आयोजित रात्रिभोज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहभागिता करेंगे।

  • रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा: के संजय गांधी अस्पताल में मरीज के इलाज और देखरेख को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ दिनों बाद अर्चना की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई।

    जानकारी के मुताबिक, अर्चना गुप्ता 30 अगस्त को स्कूटी हादसे के बाद संजय गांधी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय वह बातचीत कर रही थीं और उनकी हालत सामान्य थी। परिवार के अनुसार, शुरुआती दिनों के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद मरीज की स्थिति को लेकर परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में कथित लापरवाही के कारण अर्चना के शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिवार का कहना है कि मरीज की हालत देखकर वे उसे बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन उनके अनुसार डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की अनुमति नहीं दी।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब परिजन मरीज की स्थिति का वीडियो बनाने के लिए आईसीयू पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां मौजूद एक डॉक्टर ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बनी और परिजनों ने हंगामा करते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    फिलहाल अर्चना गुप्ता को संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू नंबर दो में भर्ती बताया जा रहा है। उनकी बेटी नैंसी गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान हुई घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    संजय गांधी अस्पताल में हाल के दिनों में सामने आए अन्य मामलों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले में अस्पताल के डॉक्टरों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी।

    इसके बाद अस्पताल में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस घटना को लेकर परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसी अवधि में एक युवक ने आरोप लगाया था कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने पर उसे कथित तौर पर एंटी रेबीज के बजाय एंटी वेनम इंजेक्शन लगा दिया गया।

    हालांकि अर्चना गुप्ता के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन के अनुसार मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है।

    अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। ऐसे में अर्चना गुप्ता के मामले में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और किसी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

  • रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग

    रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग


    मध्य प्रदेश:
    के रीवा में कांग्रेस की ओर से आयोजित धरने में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह शामिल हुए। यह प्रदर्शन संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। धरने के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह देर रात रीवा पहुंचे और जयस्तंभ चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के धरने में शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाएगा तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अपने गृह जिले रीवा में भी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। उनके मुताबिक, जिस अस्पताल को क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था माना जाता है, वहां लगातार गंभीर घटनाएं सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    संजय गांधी अस्पताल को लेकर उन्होंने कई मुद्दे उठाए। दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में कथित तौर पर जीवित व्यक्ति के पोस्टमार्टम की कोशिश के पुराने मामले का उल्लेख करते हुए मौजूदा घटना से इसे जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक ओर ऐसी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आते हैं और दूसरी ओर प्रसूता तथा नवजात की मौत जैसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं।

    दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्वास्थ्य विभाग में हुई भर्तियों और प्रशिक्षण व्यवस्था में रही खामियों का असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने नर्सिंग भर्तियों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए सरकार से व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इस दौरान नर्सिंग क्षेत्र में कई विवाद सामने आए हैं। उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा नहीं होने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि उनके लगाए आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस घटनाक्रम में सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि मरीजों और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इस बीच कल्पना मिश्रा के पिता भी रीवा के सिरमौर चौराहे पर अलग से धरने पर बैठे हैं। बेटी और नवजात की मौत के मामले में परिवार की ओर से जवाबदेही और न्याय की मांग की जा रही है। दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे धरनों के कारण यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    रीवा में सामने आए इस घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, चिकित्सकीय निगरानी और नर्सिंग व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, मौत के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की स्पष्टता जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही सामने आएगी।

  • दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    मध्य प्रदेश: के दमोह जिले के हटा विकासखंड में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चंडी जी वार्ड स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र में सोमवार को बच्चों के लिए तैयार की गई आलू की सब्जी में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। घटना के बाद बच्चों को दिया जाने वाला खाना वापस भेज दिया गया।

    बताया गया कि सोमवार दोपहर जब बच्चों के परिजन उन्हें लेकर आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे, उसी दौरान भोजन की जांच करने पर सब्जी में कीड़े दिखाई दिए। बच्चों की माताओं ने तत्काल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की मांग की।

    बच्चे को केंद्र लेकर पहुंचीं दीपा प्रजापति ने बताया कि उनका बच्चा नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताते हुए कहा कि बच्चों को साफ और अच्छा खाना मिलना जरूरी है। सोमवार को आलू की सब्जी में इल्ली मिलने के बाद उन्होंने चिंता जताई कि यदि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य और विकास पर इसका क्या असर पड़ेगा।

    दीपा ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही बच्चों के अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन जाती है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    एक अन्य महिला अनीता प्रजापति ने भी भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत की। उनका कहना है कि इस तरह की समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी आंगनवाड़ी केंद्र में दिए जाने वाले भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आ चुकी है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।

    मामला सामने आने के बाद केंद्र में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन वापस भेज दिया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच किस स्तर पर की जाती है। छोटे बच्चों के लिए तैयार भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन मां लक्ष्मी स्वसहायता समूह की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। भोजन तैयार करने और केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में गुणवत्ता तथा स्वच्छता के मानकों का पालन होना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में कीड़े भोजन में किस स्तर पर पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    हटा के एसडीएम राकेश कुसरे ने मामले की जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उस समय वह बैठक में थे और पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही किस स्तर पर हुई।

    घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अब परिजनों को प्रशासन की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

  • ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर :जिले के डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय पासपोर्ट तैयार किए जाने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने इस मामले में ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है, जिसने कथित रूप से एक ही स्थानीय पते का इस्तेमाल कर कई पासपोर्ट तैयार करवाए। मामला सामने आने के बाद दस्तावेजों की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने आवेदन प्रक्रिया में सहयोग किया।

    जांच के अनुसार, इन 20 बांग्लादेशी नागरिकों को डबरा के एक बौद्ध विहार में रहने वाला और बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया था। सभी पासपोर्ट में एक ही व्यक्ति को गवाह के रूप में दर्ज किए जाने से जांच का दायरा बढ़ गया है। STF ने इसी गवाह रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

    मामले की जांच में स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेजों की भूमिका भी सामने आई है। बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और दसवीं की अंकसूची समेत कई दस्तावेज तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पहचान साबित करने और पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में किया गया।

    एक ही पते से 20 पासपोर्ट जारी होना जांच का अहम बिंदु बन गया है। पासपोर्ट आवेदन के दौरान आवेदक के पते, पहचान और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में एक ही स्थान से इतने लोगों के दस्तावेज तैयार होने और उनका सत्यापन पूरा होने की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।

    STF यह पता लगाने में जुटी है कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या इसके पीछे किसी व्यक्ति अथवा कर्मचारियों की मिलीभगत थी। जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल इस पहलू पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित पासपोर्ट करीब पांच साल पहले तैयार किए गए थे। इनमें से कुछ पासपोर्ट का इस्तेमाल विदेश यात्राओं के लिए किए जाने की जानकारी मिली है। कुछ संदिग्धों के थाईलैंड, चीन और भूटान सहित अन्य देशों की यात्रा करने की बात सामने आई है। STF अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और यात्राओं के दौरान इन दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

    रियाल चौधरी की गिरफ्तारी के बाद 44 अन्य पासपोर्ट भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें से कई दस्तावेजों में समान पते और गवाह से जुड़े विवरण मिलने की बात सामने आई है। STF इन सभी रिकॉर्ड की जांच कर यह निर्धारित करने में जुटी है कि उनका संबंध भी इसी नेटवर्क से है या नहीं। एक अन्य संदिग्ध से पूछताछ भी की जा रही है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए STF ने करीब 10 टीमों को जांच में लगाया है। मध्य प्रदेश में चार टीमें स्थानीय स्तर पर नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं, जबकि छह टीमें असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। जांच का फोकस कथित बिचौलियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद करने वाले लोगों पर है।

    इस मामले ने पहचान और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। STF की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क कितना व्यापक था, इसमें कितने लोग शामिल थे और 20 संदिग्ध पासपोर्ट के अलावा सामने आए 44 अन्य पासपोर्ट का वास्तविक स्वरूप क्या है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • जबलपुर एयरपोर्ट पर अचानक कैंसिल हुई इंडिगो की उड़ान, यात्रियों ने जताई नाराजगी; वैकल्पिक यात्रा का दिया गया भरोसा

    जबलपुर एयरपोर्ट पर अचानक कैंसिल हुई इंडिगो की उड़ान, यात्रियों ने जताई नाराजगी; वैकल्पिक यात्रा का दिया गया भरोसा

    मध्‍य प्रदेश : जबलपुर एयरपोर्ट पर सोमवार को इंडिगो की उड़ान तकनीकी खराबी के कारण रद्द होने से करीब 45 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हैदराबाद से जबलपुर पहुंचने के बाद इसी विमान को यात्रियों को लेकर इंदौर रवाना होना था, लेकिन तकनीकी समस्या सामने आने के बाद उड़ान संचालित नहीं की जा सकी।

    इंडिगो की फ्लाइट 6E7315 सोमवार सुबह हैदराबाद से जबलपुर पहुंची थी। इसके बाद विमान को जबलपुर से इंदौर के लिए उड़ान भरनी थी। इस चरण में करीब 45 यात्री इंदौर जाने के लिए विमान में सवार होने वाले थे। हालांकि तकनीकी खराबी के चलते उड़ान रद्द करने का फैसला लिया गया।

    यात्रियों को जब फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिली तो एयरपोर्ट पर नाराजगी की स्थिति बन गई। कई यात्रियों का कहना था कि उन्होंने इंदौर पहुंचने के लिए पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। कुछ यात्रियों को जरूरी काम के सिलसिले में इंदौर जाना था, इसलिए अचानक उड़ान रद्द होने से उनके कार्यक्रम प्रभावित हुए।

    फ्लाइट रद्द होने की सूचना के बाद यात्रियों ने एयरपोर्ट पर अपनी नाराजगी जाहिर की। यात्रियों के मुताबिक उन्हें उड़ान रद्द होने की जानकारी अचानक मिली, जिससे आगे की यात्रा को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े।

    स्थिति को देखते हुए एयरलाइन अधिकारियों ने यात्रियों से बातचीत की और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरे मार्गों और कनेक्टिंग फ्लाइट की संभावनाओं पर काम किया गया।

    एयरलाइन की ओर से कुछ यात्रियों को कनेक्टिंग रूट के जरिए इंदौर भेजने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई। इससे यात्रियों के लिए तत्काल यात्रा का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। हालांकि अचानक हुए बदलाव के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं में परिवर्तन करना पड़ा।

    कुछ यात्रियों ने अपनी यात्रा को आगे के लिए रीशेड्यूल कराया। वहीं कुछ यात्रियों ने टिकट कैंसिल कराने का विकल्प चुना। यात्रियों का कहना था कि उड़ान रद्द होने के कारण उनके समय और आगे की निर्धारित योजनाओं पर असर पड़ा।

    तकनीकी खराबी के कारण विमान संचालन रोकना विमानन सुरक्षा से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में विमान को उड़ाने के बजाय तकनीकी जांच और आवश्यक सुधार को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि यात्रियों के लिए अचानक उड़ान रद्द होना असुविधाजनक स्थिति पैदा करता है, खासकर तब जब उन्होंने आगे की यात्रा या जरूरी कार्यों के लिए समय निर्धारित किया हो।

    जबलपुर और इंदौर के बीच हवाई संपर्क यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दोनों शहरों के बीच कम समय में यात्रा की सुविधा मिलती है। ऐसे में उड़ान रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ा।

    फिलहाल प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक रूट, रीशेड्यूलिंग और टिकट रद्द कराने जैसे विकल्प उपलब्ध कराए गए। घटना के बाद यात्रियों की मुख्य चिंता अपने निर्धारित समय पर इंदौर पहुंचने की रही। तकनीकी समस्या के कारण उड़ान संचालन नहीं होने से सोमवार की यह यात्रा कई यात्रियों के लिए परेशानी भरी साबित हुई।

  • 14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    भोपाल: के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान वाटर कैनन की चपेट में आने से एक इंटर्न डॉक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस संबंध में शासन की ओर से निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।

    इसी के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए मार्च निकालने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्या रखना चाहते थे। हालांकि मार्च शुरू होने से पहले ही अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और बाहर निकलने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

    पुलिस की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल के गेट और बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जताने लगे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर डॉक्टरों के बैठने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    अस्पताल परिसर में पुलिस की ओर से इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई। मौके पर वाटर कैनन वाहन सहित पुलिस के अन्य वाहन तैनात रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान वाटर कैनन चलाया गया और एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख चुके हैं और सभी नियमों का पालन किया गया, लेकिन जब उनकी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का फैसला लिया गया।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिखित सरकारी आदेश के रूप में जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें 14,337 रुपये नहीं, बल्कि न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चाहिए।

    मोहित मिश्रा के मुताबिक उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की ओर से पहले कहा गया था कि यदि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाता है तो मध्य प्रदेश में भी उस दिशा में निर्णय लिया जाएगा। अब उत्तर प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का आदेश जारी होने के बाद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर भी अपने राज्य में इसी तरह के निर्णय की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब दो हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि प्रदेश में कुल इंटर्न डॉक्टरों की संख्या लगभग 3,600 बताई जा रही है। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के भी आंदोलन में शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोका गया।

    डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • : जैस्मीन भसीन और अली गोनी के ब्रेकअप की अफवाहों पर अभिनेत्री ने तोड़ी चुप्पी, टैटू को लेकर ट्रोलर्स को दिया जवाब

    : जैस्मीन भसीन और अली गोनी के ब्रेकअप की अफवाहों पर अभिनेत्री ने तोड़ी चुप्पी, टैटू को लेकर ट्रोलर्स को दिया जवाब

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री जैस्मीन भसीन इन दिनों अपने नए टैटू और अली गोनी के साथ रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के कारण सुर्खियों में हैं। अभिनेत्री ने हाल ही में अपना पहला टैटू बनवाया, जिस पर ‘मैं काफी हूं’ लिखा है। टैटू के साथ साझा की गई उनकी भावुक बातों को सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके रिश्ते से जोड़ लिया और देखते ही देखते जैस्मीन तथा अली गोनी के ब्रेकअप की अफवाहें फैलने लगीं।

    जैस्मीन और अली गोनी लंबे समय से एक-दूसरे के साथ रिश्ते में हैं और दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर साथ नजर आते हैं। ऐसे में अभिनेत्री के टैटू और उसके पीछे की कहानी को कुछ लोगों ने उनके निजी रिश्ते से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। बढ़ती चर्चाओं के बीच जैस्मीन ने अपनी पोस्ट हटा दी और बाद में इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए पूरे मामले पर अपनी बात स्पष्ट की।

    अभिनेत्री ने कहा कि उनकी जिंदगी से जुड़ी हर पोस्ट का मतलब उनके रिश्ते के बारे में कोई रहस्यमयी संदेश नहीं होता। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में कहा कि कभी-कभी एक महिला सिर्फ अपने बारे में बात कर रही होती है। जैस्मीन ने इस प्रतिक्रिया के जरिए साफ किया कि उनके टैटू को सीधे अली गोनी के साथ उनके रिश्ते से जोड़ना सही नहीं है।

    जैस्मीन ने मीडिया पेजों और ट्रोलर्स पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि व्यूज और ध्यान आकर्षित करने के लिए कई बार पोस्ट को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। उनके मुताबिक, कपल्स की तस्वीरों का इस्तेमाल करके किसी सामान्य पोस्ट को इस तरह दिखाया जाता है कि वह लोगों के बीच ज्यादा चर्चा पैदा करे। अभिनेत्री ने ऐसी अटकलों पर लोगों से शांत रहने की अपील भी की।

    दरअसल, जैस्मीन ने अपने पहले टैटू के पीछे की कहानी साझा करते हुए बताया था कि उन्होंने लंबे समय तक खुद को दूसरों के मुताबिक बदलने की कोशिश की। उन्हें लगता था कि खुद में बदलाव करके किसी दूसरे व्यक्ति से प्यार और स्वीकार्यता हासिल करना आसान होगा। इस कोशिश में उन्होंने खुद को अलग-अलग परिस्थितियों में ढालने और अपनी पसंद तथा व्यक्तित्व को पीछे रखने की कोशिश की।

    अभिनेत्री ने बताया कि इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि दूसरों के लिए ‘काफी’ बनने की कोशिश में उन्होंने खुद को ही नजरअंदाज कर दिया था। एक हीलिंग सेशन के दौरान उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि किसी और की दुनिया में फिट होने के लिए खुद को छोटा करने की जरूरत नहीं है। इसी सोच के बाद उन्होंने अपने शरीर पर ‘मैं काफी हूं’ शब्द गुदवाने का फैसला किया।

    जैस्मीन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका टैटू खुद को परफेक्ट मानने के बारे में नहीं, बल्कि खुद को स्वीकार करने और प्यार पाने के लिए अपनी पहचान न बदलने के संकल्प के बारे में है। उन्होंने कहा कि वह जैसी हैं, उसी रूप में प्यार और स्वीकार किए जाने की हकदार हैं। उनके लिए यह टैटू खुद से किया गया एक वादा है कि वह दोबारा किसी के प्यार या अपनापन पाने के लिए खुद को नहीं खोएंगी।

    इस पूरे मामले में जैस्मीन की प्रतिक्रिया के बाद अली गोनी के साथ उनके ब्रेकअप की चर्चाओं को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अभिनेत्री ने अपने टैटू और भावुक पोस्ट को व्यक्तिगत आत्मस्वीकृति से जुड़ा बताया है, न कि रिश्ते में किसी बदलाव का संकेत। जैस्मीन हाल ही में खतरों के खिलाड़ी 15 में भी नजर आई थीं और अपने काम को लेकर लगातार सक्रिय हैं।

  • हार्दिक पांड्या संग लिंकअप की अफवाहों पर अमीषा पटेल का करारा जवाब, वायरल वीडियो को लेकर बोलीं- सच में रोमांटिक था

    हार्दिक पांड्या संग लिंकअप की अफवाहों पर अमीषा पटेल का करारा जवाब, वायरल वीडियो को लेकर बोलीं- सच में रोमांटिक था

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल इन दिनों क्रिकेटर हार्दिक पांड्या के साथ कथित लिंकअप की खबरों को लेकर चर्चा में हैं। दोनों को मुंबई के ताज महल पैलेस में बातचीत करते हुए देखा गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। वायरल वीडियो में अमीषा हार्दिक से बातचीत करती और उन्हें अपने दोस्तों से मिलवाती दिखाई दे रही हैं। इसी दौरान अभिनेत्री ने हार्दिक के कंधे पर हाथ रखा, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    वीडियो सामने आने के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने दोनों की मुलाकात को दोस्ती से आगे जोड़ते हुए पोस्ट साझा की। पोस्ट में अमीषा के हार्दिक के कंधे पर हाथ रखने को उनके बीच कथित रोमांटिक नजदीकी का संकेत बताया गया। साथ ही सोशल मीडिया पर पहले से चल रही दोनों के लिंकअप की चर्चाओं का भी जिक्र किया गया। देखते ही देखते यह वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

    अमीषा पटेल ने इस पूरे मामले पर चुप रहने के बजाय खुद जवाब दिया। अभिनेत्री ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर सोशल मीडिया यूजर की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया और उसके दावे पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी। अमीषा ने लिखा कि बिल्कुल सही कहा गया है और जिस तरह उनका हाथ हार्दिक के कंधे पर था, वह सच में बहुत रोमांटिक था। उनके इस जवाब से साफ था कि वह वीडियो को लेकर बनाए जा रहे निष्कर्षों पर तंज कस रही थीं।

    इसके बाद अमीषा ने उस यूजर को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वह उसे नहीं जानतीं, लेकिन शायद उसकी कोई महिला मित्र भी नहीं होगी। अभिनेत्री ने सलाह दी कि ऐसी चीजों के बारे में पोस्ट करने से पहले उसे किसी लड़की को दोस्त बनाना चाहिए। अमीषा की इस प्रतिक्रिया के बाद उनके और हार्दिक के कथित लिंकअप को लेकर चल रही सोशल मीडिया चर्चा और तेज हो गई।

    हालांकि, वायरल वीडियो में दोनों को बातचीत करते हुए देखा गया है, लेकिन केवल इस मुलाकात और अमीषा के हार्दिक के कंधे पर हाथ रखने से किसी रोमांटिक रिश्ते की पुष्टि नहीं होती। अभिनेत्री ने भी अपने जवाब में इस दावे को स्वीकार करने के बजाय व्यंग्य के जरिए सोशल मीडिया पर लगाई जा रही अटकलों पर सवाल उठाया है। ऐसे में दोनों के बीच रिश्ते को लेकर फिलहाल कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।

    हार्दिक पांड्या की निजी जिंदगी इससे पहले भी सुर्खियों में रही है। नताशा स्टेनकोविच से अलग होने के बाद उनका नाम मॉडल माहिका शर्मा के साथ जोड़ा गया। अक्टूबर 2025 में हार्दिक ने सोशल मीडिया पर माहिका के साथ समुद्र किनारे की तस्वीर साझा की थी। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं सामने आई थीं।

    वहीं अमीषा पटेल के फिल्मी करियर की बात करें तो अभिनेत्री ने कहो ना प्यार है और गदर जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2023 में वह सनी देओल के साथ गदर 2 में सकीना के किरदार में नजर आई थीं। फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। अमीषा ने मई में गदर 3 को लेकर भी पुष्टि की थी कि फिल्म पर काम चल रहा है। ऐसे में हार्दिक पांड्या के साथ वायरल वीडियो ने अभिनेत्री की निजी जिंदगी से जुड़ी चर्चाओं को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।