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  • छह महीने की प्रेग्नेंसी में कियारा आडवाणी ने बारिश वाला सीन किया, हुमा कुरैशी ने बताया कैसे मिली प्रेरणा

    छह महीने की प्रेग्नेंसी में कियारा आडवाणी ने बारिश वाला सीन किया, हुमा कुरैशी ने बताया कैसे मिली प्रेरणा

    नई दिल्ली ।यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से उत्सुकता बनी हुई है। इसी बीच चेन्नई में आयोजित प्री रिलीज कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ा एक अनुभव साझा किया, जिसमें उन्होंने कियारा आडवाणी की पेशेवर प्रतिबद्धता और मुश्किल परिस्थितियों में काम करने की क्षमता की तारीफ की।

    हुमा ने बताया कि फिल्म के एक दृश्य में उन्हें और कियारा को साथ काम करना था। इस दृश्य में बारिश का इस्तेमाल किया गया था और दोनों कलाकारों को बारिश में शूटिंग करनी थी। हुमा के मुताबिक उस दौरान उन्हें तेज सिरदर्द हो रहा था और ऐसे समय में कियारा को देखकर उन्हें हिम्मत मिलती थी।

    हुमा ने बताया कि शूटिंग के दौरान कियारा गर्भावस्था के छठे महीने में थीं। इसके बावजूद वह बारिश वाले दृश्य में पूरी मजबूती के साथ खड़ी होकर अपना काम कर रही थीं। हुमा के लिए यह अनुभव इसलिए खास था क्योंकि खुद असहज महसूस करने के बावजूद वह कियारा की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता देखकर प्रेरित होती थीं।

    हुमा के मुताबिक जब भी उन्हें अपनी परेशानी की शिकायत करने का मन करता, वह कियारा की ओर देखती थीं। कियारा की स्थिति देखकर उन्हें लगता था कि उन्हें भी अपनी परेशानी के बावजूद काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस अनुभव को अपने लिए प्रेरणादायक बताया और कियारा की दृढ़ता की सराहना की।

    ‘टॉक्सिक’ में कियारा आडवाणी के साथ हुमा कुरैशी भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म में यश मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज से पहले इसके गाने और प्रचार सामग्री को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा रही है। फिल्म की कहानी और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    कियारा और हुमा की जोड़ी फिल्म के उस दृश्य में साथ दिखाई देगी, जिसका जिक्र हुमा ने कार्यक्रम के दौरान किया। हालांकि उन्होंने बातचीत में दृश्य से जुड़ी पूरी जानकारी साझा नहीं की और इसे फिल्म के कथानक के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए केवल अपने शूटिंग अनुभव तक ही बात सीमित रखी।

    कियारा आडवाणी की निजी जिंदगी भी पिछले कुछ समय से प्रशंसकों की दिलचस्पी का विषय रही है। कियारा और अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने वर्ष 2023 में राजस्थान के जैसलमेर में शादी की थी। दोनों कलाकार इससे पहले फिल्म ‘शेरशाह’ में साथ नजर आए थे। फिल्म में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया था और इसके बाद दोनों के रिश्ते की चर्चाएं भी सामने आई थीं।

    बाद में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया और शादी की। इसके बाद उनके परिवार में बेटी के जन्म की खुशी भी आई। दोनों ने अपनी निजी जिंदगी और बेटी की तस्वीरों को लेकर मीडिया से निजता बनाए रखने की अपील की थी।

    अब ‘टॉक्सिक’ के साथ कियारा एक बार फिर बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी। फिल्म में उनका किरदार कैसा है, इसे लेकर पूरी जानकारी रिलीज के बाद ही सामने आएगी। वहीं हुमा कुरैशी द्वारा साझा किया गया शूटिंग अनुभव फिल्म से जुड़े कलाकारों की मेहनत और कठिन परिस्थितियों में काम करने की प्रक्रिया की एक झलक देता है। दर्शकों की नजर अब फिल्म की रिलीज और कलाकारों के प्रदर्शन पर है।

  • क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया बांगड़ को दी बड़ी राहत, कम्युनिटी क्रिकेट में वापसी के साथ एलीट क्रिकेट की शर्तें भी तय

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया बांगड़ को दी बड़ी राहत, कम्युनिटी क्रिकेट में वापसी के साथ एलीट क्रिकेट की शर्तें भी तय

    नई दिल्ली ।पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ट्रांस महिला बेटी अनाया बांगड़ के क्रिकेट करियर को लेकर बड़ी राहत सामने आई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें महिलाओं के लोकल क्रिकेट में खेलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अनाया एक बार फिर क्रिकेट मैदान पर वापसी की तैयारी कर रही हैं और ऑस्ट्रेलिया में अपने लिए उपयुक्त क्रिकेट क्लब तलाश रही हैं।

    अनाया कुछ समय पहले तक पुरुष वर्ग में क्रिकेट खेलती थीं और मुंबई की अंडर 19 टीम का हिस्सा भी रह चुकी हैं। इसके बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्रिकेट करियर को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि एक समय उन्हें लगने लगा था कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी।

    अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली अनुमति ने उनके लिए खेल में वापसी का रास्ता खोल दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें तत्काल कम्युनिटी क्रिकेट में खेलने की मंजूरी मिली है। इसके दायरे में स्थानीय और राज्य स्तर की क्रिकेट शामिल है। इससे अनाया को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में दोबारा कदम रखने का अवसर मिलेगा।

    हालांकि उच्च स्तर के एलीट महिला क्रिकेट में खेलने के लिए अलग पात्रता शर्तें लागू होंगी। उपलब्ध नियमों के मुताबिक मार्च 2027 तक अनाया को अपने शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर बनाए रखना होगा। इसके साथ उन्हें संबंधित परीक्षणों में पात्रता बनाए रखना जरूरी होगा। एलीट स्तर पर खेलने की उनकी संभावनाएं इन्हीं शर्तों की पूर्ति पर निर्भर रहेंगी।

    महिला बिग बैश लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने के लिए एलीट क्रिकेट की पात्रता महत्वपूर्ण होगी। इसलिए फिलहाल अनाया का अगला लक्ष्य स्थानीय क्रिकेट से प्रतिस्पर्धी वापसी करना और निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनी पात्रता बनाए रखना है। उनकी क्रिकेट यात्रा अब धीरे धीरे नए चरण में प्रवेश कर रही है।

    अनाया ने अपने अनुभव साझा करते हुए भारतीय क्रिकेट व्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया के रुख में अंतर का भी जिक्र किया। उनके अनुसार उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित रिसर्च डेटा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सामने रखा था, लेकिन उन्हें वहां से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके विपरीत क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी मेडिकल हिस्ट्री और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद अपना फैसला लिया।

    अनाया के लिए यह सफर केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने बताया कि जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक स्तर पर चुनौतीपूर्ण रही। इस दौरान परिवार, दोस्ती और करियर से जुड़े कई पहलुओं में बदलाव आया। हालांकि उनका कहना है कि अपने बदलाव के बाद वह अब पहले की तुलना में अधिक खुश और सुकून महसूस करती हैं।

    हार्मोन थेरेपी के बाद शरीर में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए अनाया ने अपनी शारीरिक क्षमता में कमी महसूस होने की बात कही। उन्होंने बताया कि पहले उनके शरीर में अधिक ताकत थी, जबकि अब मांसपेशियों की ताकत कम महसूस होती है। इसी वजह से तेज गति की गेंदों का सामना करना उनके लिए पहले जैसा आसान नहीं रहा।

    अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अनुमति के बाद अनाया के सामने मैदान पर लौटने का अवसर है। क्लब क्रिकेट से शुरुआत करते हुए उनका प्रदर्शन और आगे की पात्रता यह तय करेगी कि वह महिला क्रिकेट के किस स्तर तक पहुंच पाती हैं। उनके लिए यह वापसी लंबे अंतराल के बाद क्रिकेट से दोबारा जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

  • यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न

    यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न


    नई दिल्ली ।
    यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की रिलीज को लेकर लंबे समय से उत्साहित प्रशंसकों ने इसे सामान्य फिल्म प्रदर्शन की तरह नहीं, बल्कि किसी उत्सव की तरह मनाया। कर्नाटक में कई सिनेमाघरों के बाहर सुबह से ही दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। कुछ प्रशंसक तड़के करीब तीन बजे ही सिनेमाघरों में पहुंच गए और फिल्म के प्रदर्शन का इंतजार करते नजर आए।

    फिल्म की रिलीज के मौके पर प्रशंसकों का उत्साह खास तौर पर सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया। कई जगहों पर डीजे और संगीत के बीच दर्शक नाचते नजर आए। कुछ प्रशंसक झंडे लहराते हुए अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि कुछ ने दोस्तों को कंधे पर उठाकर जश्न मनाया। सिनेमाघरों के आसपास का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा और प्रशंसकों ने यश के प्रति अपनी दीवानगी खुलकर जाहिर की।

    कर्नाटक के एक सिनेमाघर के बाहर दर्शकों की लंबी कतार भी दिखाई दी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए फिल्म देखने के लिए उत्सुक नजर आए। सिनेमाघर के बाहर यश की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। कई दर्शक फिल्म के पहले शो का हिस्सा बनने के लिए सुबह-सुबह ही पहुंच गए थे।

    कुछ स्थानों पर फिल्म की रिलीज को लेकर विशेष आयोजन भी देखने को मिले। सिनेमाघर के बाहर बनाए गए मंच पर प्रशंसक संगीत की धुन पर डांस करते नजर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा दर्शकों ने हिस्सा लिया। फिल्म को लेकर पहले से बने माहौल के बीच रिलीज के दिन प्रशंसकों की यह प्रतिक्रिया यश की लोकप्रियता को दर्शाती है।

    इसी बीच यश की मौजूदगी से जुड़े एक वीडियो ने भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा। इसमें अभिनेता एक मॉल में नजर आए, जहां उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रशंसक मॉल की छत और आसपास के स्थानों से यश को देखने की कोशिश करते दिखाई दिए। अभिनेता को देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति प्रशंसकों की उत्सुकता को और स्पष्ट किया।

    हालांकि फिल्म की रिलीज के साथ सभी दर्शकों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में फिल्म देखकर सिनेमाघर से बाहर निकलने वाले दर्शकों से उनकी राय पूछी गई। इनमें एक दर्शक की प्रतिक्रिया से ऐसा संकेत मिला कि वह फिल्म से प्रभावित नहीं हुआ। इससे यह भी सामने आया कि शुरुआती दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    टॉक्सिक में यश के साथ कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और नयनतारा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को लेकर यश के प्रशंसकों के बीच पहले से काफी उत्सुकता बनी हुई थी। रिलीज के दिन सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया उत्साह इसी प्रतीक्षा का परिणाम माना जा रहा है।

    फिलहाल फिल्म को लेकर दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उत्साह और निराशा दोनों तरह के संकेत सामने आए हैं। आने वाले दिनों में दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि टॉक्सिक कहानी और अभिनय के स्तर पर कितनी मजबूत साबित होती है और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।

  • महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    नई दिल्ली । महिला समानता दिवस के अवसर पर अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिलाओं की वास्तविक स्थिति और समानता को लेकर अपने विचार साझा किए। करीब दो दशक से महिलाओं के साथ काम करने के दौरान हिंसा और असुरक्षा झेल रही महिलाओं के अनुभवों को करीब से देखने वाली सोमी अली का कहना है कि केवल बराबरी की बातें करने से बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए व्यवस्था, सामाजिक सोच और संस्थागत प्रतिक्रिया में ठोस परिवर्तन जरूरी है।

    सोमी अली के अनुसार महिलाओं के मुद्दों पर पहले की तुलना में अधिक बातचीत हो रही है और यह सकारात्मक बदलाव है। लंबे समय तक महिलाओं का चुप रहना सामान्य माना जाता था, जबकि कई मामलों में यही चुप्पी अत्याचार करने वालों को बचाती रही। हालांकि, उनका मानना है कि आवाज उठाने के बाद वास्तविक बदलाव तभी माना जाएगा जब अदालतों, पुलिस, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था की प्रतिक्रिया भी बदले।

    उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई जो तत्काल खतरे में होती हैं। उनके मुताबिक ऐसी महिलाओं को सहायता मिलने में अक्सर समय लग जाता है। सुरक्षा आदेश, आश्रय और कानूनी प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं के बीच महिला को कई बार उसी परिस्थिति में रहना पड़ता है जहां उसकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है। सोमी अली का कहना है कि सबसे जरूरी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे गंभीर खतरे में मौजूद महिला को जल्द सुरक्षित स्थान मिल सके।

    महिला सशक्तीकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और कानूनी सहायता को भी उन्होंने महत्वपूर्ण माना। लेकिन उनके मुताबिक इन सुविधाओं के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। कई महिलाएं संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद डर, सामाजिक दबाव या दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता के कारण अपने फैसले लेने में कठिनाई महसूस करती हैं। इसके विपरीत कुछ महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लिए सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन का रास्ता चुना है।

    सोमी अली ने समानता की बहस में संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि महिला समानता का अर्थ हर परिस्थिति में महिला को सही और पुरुष को गलत मान लेना नहीं है। उनके अनुभव में महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार के मामले वास्तविक हैं, लेकिन किसी भी पक्ष को बिना तथ्य के हमेशा सही मान लेना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

    उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और पुरुषों दोनों को इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनके व्यवहार और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। उनके अनुसार वास्तविक समानता का आधार किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्य और सच के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    सोमी अली ने यह भी कहा कि झूठे आरोपों की स्थिति उन महिलाओं के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है जो वास्तव में हिंसा का सामना कर रही हैं। इससे वास्तविक पीड़ितों की शिकायतों पर संदेह बढ़ सकता है और न्याय पाने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। इसलिए उनका जोर इस बात पर है कि कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सुरक्षा हो, लेकिन गलत को केवल किसी पक्ष के आधार पर सही न ठहराया जाए।

    महिला समानता दिवस पर उनका संदेश महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी तथा निष्पक्षता को जोड़ता है। उनके मुताबिक बदलाव तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को अपनी बात कहने का भरोसा मिले, खतरे के समय व्यवस्था तेजी से काम करे और समाज समानता को केवल चर्चा का विषय न रखकर व्यवहार और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाए।

  • इला अरुण ने फेमिनिज्म और महिलाओं की बदलती स्थिति पर कहा, बराबरी के साथ जिम्मेदारी और शोषण के खिलाफ आवाज जरूरी

    इला अरुण ने फेमिनिज्म और महिलाओं की बदलती स्थिति पर कहा, बराबरी के साथ जिम्मेदारी और शोषण के खिलाफ आवाज जरूरी

    नई दिल्ली ।महिला समानता दिवस के मौके पर अभिनेत्री और गायिका इला अरुण ने सिनेमा में महिलाओं की स्थिति, अपने करियर और फेमिनिज्म को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने चर्चित गीत चोली के पीछे क्या है से जुड़ी पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि इस गीत ने उन्हें लोकप्रियता तो दी, लेकिन इसके साथ उनके ऊपर एक ऐसा ठप्पा भी लगा, जिसके कारण उनके दूसरे कामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं गया।

    इला अरुण ने कहा कि लोगों ने उनके कई अन्य गीतों और एल्बमों को उस तरह नहीं सुना, जिस तरह एक चर्चित फिल्मी गीत को सुना गया। उनका मानना है कि सिनेमा का प्रभाव बहुत व्यापक होता है और किसी एक लोकप्रिय गीत या किरदार के आधार पर कलाकार की पूरी पहचान तय कर देना उचित नहीं है।

    उन्होंने अपने अभिनय करियर के अलग-अलग किरदारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कलाकार को लगातार नई भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। उन्होंने स्क्रीन पर मां, सौतेली मां, मजबूत महिला और वेश्या जैसे अलग-अलग किरदार निभाए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी भूमिका उनकी वास्तविक व्यक्तिगत पहचान को परिभाषित नहीं करती। उनके अनुसार कलाकार के किरदार और उसके निजी व्यक्तित्व के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    समाज और महिलाओं के रिश्ते पर इला अरुण ने कहा कि वह न तो समाज के दबाव में रहती हैं और न ही समाज को पूरी तरह नजरअंदाज करती हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति और समाज साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं द्वारा मिले समर्थन और प्यार को महत्वपूर्ण बताया।

    फिल्म उद्योग में महिलाओं के साथ भेदभाव के सवाल पर इला ने अपने अनुभव को अलग तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि बतौर चरित्र कलाकार उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ऐसा भेदभाव बहुत अधिक महसूस नहीं हुआ, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके दौर में महिलाओं को लेकर सोच में अंतर नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं के लिए केंद्रित और मजबूत भूमिकाओं वाली कहानियां अपेक्षाकृत कम लिखी जाती थीं।

    इला के अनुसार, समय के साथ इस स्थिति में बदलाव आया है। अब महिलाओं को केंद्र में रखकर कहानियां लिखी जा रही हैं और महिला प्रधान भूमिकाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक अवसर दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि दर्शकों की पसंद भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि दर्शक महिलाओं की मजबूत कहानियों वाली फिल्में देखते हैं तो फिल्म उद्योग भी ऐसी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए आगे आता है।

    देश में महिलाओं की स्थिति पर इला अरुण ने कहा कि पूरे भारत को एक ही नजरिए से देखना संभव नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने माना कि कई जगहों पर आज भी लड़कियों को शिक्षा नहीं मिलती और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि देश धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने पुरुषों के नजरिए में भी बदलाव की बात कही। उनके अनुसार आज कई पुरुष अधिक संवेदनशील हो रहे हैं, परिवार में जिम्मेदारियां साझा कर रहे हैं और अपनी पत्नियों तथा बच्चों के प्रति सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

    फेमिनिज्म पर इला अरुण ने संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही। उन्होंने महिलाओं के अधिकार और बराबरी की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि किसी भी विचार का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार बराबरी का अर्थ किसी के साथ अनुचित व्यवहार करना या जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना नहीं है।

    उन्होंने महिलाओं के शोषण के मामलों में आवाज उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि पेशेवर जीवन में गलत व्यवहार का सामना करने वाली कई महिलाएं डर या दबाव के कारण बोल नहीं पातीं। ऐसी महिलाओं के लिए समाज और अन्य लोगों को आगे आकर समर्थन देना चाहिए। इला के विचारों में महिला समानता का अर्थ अधिकारों के साथ जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और एक दूसरे के समर्थन से जुड़ा हुआ है।

  • ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बदली चाल, नए हमले से पीछे हटे रुबियो; होर्मुज में नौसैनिक दबाव और प्रतिबंधों पर फोकस

    ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बदली चाल, नए हमले से पीछे हटे रुबियो; होर्मुज में नौसैनिक दबाव और प्रतिबंधों पर फोकस


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों को बताया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर नए सैन्य हमले शुरू करने की तैयारी नहीं कर रहा है। रुबियो के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका तत्काल सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय आर्थिक प्रतिबंधों समुद्री दबाव और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही को सामान्य करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि ईरान की तरफ से किसी हमले की स्थिति में अमेरिका ने सैन्य विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं किया है।

    अमेरिका की बदली रणनीति में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा बन गया है। अमेरिकी नौसेना इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि सैन्य अभियान के चलते ईरान की उस क्षमता को काफी कमजोर किया गया है जिसके जरिए वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना सकता था। होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने की कोशिश भी की जा रही है और कुछ तेल टैंकरों ने दक्षिणी समुद्री रास्ते से आवाजाही शुरू कर दी है। इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

    अमेरिका की ओर से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों का सहारा लिया जा रहा है। वॉशिंगटन ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों और कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस रणनीति का मकसद ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करना और उसे सीधे सैन्य टकराव के बजाय दबाव के जरिए बातचीत की मेज पर लाना बताया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह नीति नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव तक जारी रह सकती है।

    दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी दबाव और समुद्री कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए खारिज किया है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल जहाजों की आवाजाही पर फीस लगाने की योजना को भी लगभग अंतिम रूप दिए जाने की बात सामने आई है। संसदीय समिति की ओर से कहा गया है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से मेंटेनेंस और नेविगेशन फीस ली जा सकती है। हालांकि यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो वैश्विक तेल कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    इसी बीच ईरान और ओमान ने होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने पर चर्चा की है। दोनों देश जलमार्ग से बारूदी सुरंगें हटाने की दिशा में भी काम करने की बात कर चुके हैं। हालांकि तनाव के बीच एक तेल टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दबाव की स्थिति बनी हुई है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान भी अहम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के ईरान दौरे और वहां नेताओं के साथ बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है। फिलहाल अमेरिका की रणनीति को सीधे नए हमले की बजाय आर्थिक और समुद्री दबाव के रूप में देखा जा रहा है। रुबियो के बयान से इतना जरूर साफ है कि वॉशिंगटन तत्काल सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है लेकिन ईरान पर दबाव कम करने की भी उसकी कोई तैयारी नहीं दिख रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज और अमेरिकी प्रतिबंध इस टकराव की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • भारत चीन संबंधों पर डोभाल और वांग यी की अहम वार्ता, सीमा विवाद सुलझाने और शांति बनाए रखने पर बनी सहमति

    भारत चीन संबंधों पर डोभाल और वांग यी की अहम वार्ता, सीमा विवाद सुलझाने और शांति बनाए रखने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली ।भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत चीन संबंधों के साथ सीमा विवाद और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने से जुड़े मुद्दों पर विचार किया। बातचीत ऐसे समय हुई है जब दोनों देश लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव को कम करने और आपसी संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

    वांग यी ने बातचीत के दौरान कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और दोनों देशों के बीच समझ बढ़ाने के लिए काम करने को तैयार है। उन्होंने भारत चीन संबंधों को दोनों देशों के लोगों के हितों के साथ ही व्यापक वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच स्वस्थ और स्थिर संबंध वैश्विक दक्षिण की साझा आकांक्षाओं के लिए भी उपयोगी हैं।

    चीनी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कजान तथा तियानजिन में हुई मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रणनीतिक दृष्टिकोण से संबंधों को आगे बढ़ाने, संवाद मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से दूर करने की दिशा में प्रयास जारी रखने चाहिए। उन्होंने भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी, मित्र तथा पारस्परिक सफलता के साझेदार के रूप में आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।

    वांग यी ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं में बनी सहमतियों को क्रमबद्ध तरीके से लागू करने की बात भी कही। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दिए। सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष, उचित और दोनों देशों को स्वीकार्य रास्ता तलाशने पर भी जोर दिया गया।

    अजीत डोभाल ने भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताओं तथा महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं वाला देश बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत चीन संबंधों को सही दिशा में लौटने की बात कही और रणनीतिक संवाद को मजबूत करने, पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को आगे बढ़ाने तथा बहुपक्षीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने का समर्थन किया।

    दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के रूप में डोभाल और वांग यी सीमा संबंधी वार्ता के प्रमुख माध्यम हैं। यह व्यवस्था भारत चीन सीमा विवाद के व्यापक समाधान के उद्देश्य से वर्ष 2003 में शुरू की गई थी। सीमा विवाद का अंतिम समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, लेकिन विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

    डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ भी बातचीत हुई। इसमें सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में संबंध सुधारने के उपायों पर चर्चा हुई।

    भारत और चीन के रिश्तों में वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहने के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने और सीमा पर स्थिति को स्थिर करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत की है। ऐसे में विशेष प्रतिनिधि वार्ता को आगे बढ़ाना दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

    आने वाले समय में सीमा प्रबंधन, विश्वास बढ़ाने वाले उपाय और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं। दोनों देशों के बीच संवाद का यह दौर संबंधों को स्थिर करने की कोशिश के तौर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि, सीमा विवाद का स्थायी समाधान अभी भी एक जटिल चुनौती बना हुआ है और आगे की प्रगति दोनों पक्षों की बातचीत तथा जमीन पर शांति बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

  • बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन

    बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए चीन निर्मित J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित सौदे को देश के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके साथ ही अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी हेलीकॉप्टर और ड्रोन प्रणालियां खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है।

    बांग्लादेश सरकार के अनुसार, J-10CE और अटैक हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्ताव पर खरीद समितियों ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब इन दस्तावेजों को सशस्त्र बल प्रभाग और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार की योजना उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर खरीद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने या अगले बजट में शामिल करने की है।

    J-10CE चीन का चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह अलग-अलग प्रकार के हवाई अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बांग्लादेश की ओर से विमान की क्षमताओं और लागत को खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि समान श्रेणी के कुछ पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में चीनी विकल्प अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध हो सकते हैं।

    बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने J-10CE के युद्ध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष का हवाला दिया। हालांकि, किसी राफेल विमान को J-10CE द्वारा मार गिराए जाने की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अलग-अलग विरोधाभासी बातें सामने आती रही हैं, इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं है।

    ढाका की प्रस्तावित खरीद केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सरकार अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की वायुसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना बताया गया है।

    J-10CE की संभावित खरीद का क्षेत्रीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में ढाका की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बढ़ने पर दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर चर्चा स्वाभाविक है।

    हालांकि, प्रस्तावित खरीद को अभी अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता। मसौदा समझौतों को विभिन्न सरकारी स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसके बाद ही विमान और अन्य रक्षा उपकरणों की वास्तविक खरीद, संख्या, कीमत तथा आपूर्ति से जुड़ी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी।

    बांग्लादेश सरकार इस रक्षा योजना को अपनी रणनीतिक निर्णय क्षमता से भी जोड़ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश अब अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश और रक्षा नीति से जुड़े फैसले लेने पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संदर्भ में चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा को स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    J-10CE सौदा आगे बढ़ता है तो यह बांग्लादेश की वायुसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सामरिक उपयोगिता विमान की संख्या, हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण, रखरखाव और परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढाका ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है और संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के चरण में पहुंच चुके हैं।