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  • CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए 19 निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीकों, प्रोग्रामिंग और उभरते तकनीकी क्षेत्रों की शुरुआती जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य की शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकें।

    इन सभी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। छात्र अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार इनमें पंजीकरण कर सकते हैं तथा अपनी गति से पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। बोर्ड का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने वाली यह पहल विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, नवाचार की सोच और व्यावहारिक कौशल विकसित करने में मदद करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों की अवधि विषय के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। कुछ कोर्स लगभग डेढ़ घंटे में पूरे किए जा सकते हैं, जबकि कई पाठ्यक्रमों की अवधि 20 घंटे या उससे अधिक है। इस लचीली व्यवस्था के कारण विद्यार्थी अपनी नियमित स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त तकनीकी ज्ञान भी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

    पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनरेटिव एआई, पाइथन प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग एवं पब्लिशिंग, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, वीएलएसआई डिजाइन फ्लो, चिप डिजाइन, थ्री-डी प्रिंटिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तथा AWS DevSecOps जैसे आधुनिक और रोजगारोन्मुख विषय शामिल किए गए हैं। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सीबीएसई का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल और तकनीकी कौशल का महत्व लगातार बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही नई तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। इससे उनमें प्रोग्रामिंग क्षमता, तार्किक सोच, समस्या समाधान की योग्यता और तकनीकी नवाचार के प्रति रुचि विकसित होगी। यह पहल केवल परीक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने के इच्छुक विद्यार्थी एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद वे अपनी पसंद का कोर्स चुनकर तुरंत ऑनलाइन अध्ययन शुरू कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

    शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौर में ऐसी पहलें विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आधुनिक तकनीकों की प्रारंभिक समझ उन्हें उच्च शिक्षा, नवाचार और करियर के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगी।

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 674.19 अरब डॉलर पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व; गोल्ड रिजर्व भी मजबूत हुआ

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 674.19 अरब डॉलर पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व; गोल्ड रिजर्व भी मजबूत हुआ

    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देते हुए देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.193 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले सप्ताह आई गिरावट के बाद यह वृद्धि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में केवल विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं, बल्कि देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.669 अरब डॉलर बढ़कर 105.205 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में भी वृद्धि दर्ज हुई और इसका मूल्य बढ़कर 18.623 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    इससे पहले 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 5.65 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के सप्ताहों में भंडार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश की वित्तीय स्थिरता को मजबूत आधार प्रदान करता है।

    हालांकि वर्तमान स्तर अभी भी फरवरी 2026 में दर्ज रिकॉर्ड उच्च स्तर 728.494 अरब डॉलर से नीचे है, फिर भी हालिया बढ़ोतरी को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार आयात भुगतान, विनिमय दर की स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक वित्तीय झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है और अर्थव्यवस्था की साख को बल मिलता है।

    इस बीच, आरबीआई की संशोधित फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा योजना का भी सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। बैंकिंग क्षेत्र के अनुसार, इस योजना के तहत विदेशों से धन का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में बैंकों ने लगभग 3 से 4 अरब डॉलर तक की जमा राशि जुटाई है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बैंकिंग क्षेत्र का अनुमान है कि संशोधित एफसीएनआर-बी योजना के माध्यम से समय के साथ 40 से 50 अरब डॉलर तक की नई जमा राशि आकर्षित की जा सकती है। विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के बीच इस योजना को लेकर रुचि बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बैंक इस उद्देश्य से जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं और प्रवासी भारतीय ग्राहकों से सीधे संपर्क कर योजना की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची ब्याज दरें, आरबीआई द्वारा हेजिंग लागत से जुड़ी सुविधा और बेहतर निवेश विकल्प इस योजना को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। यदि आने वाले महीनों में विदेशी निवेश और एनआरआई जमा में निरंतर बढ़ोतरी जारी रहती है, तो इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूती मिल सकती है। यह स्थिति न केवल देश की बाहरी वित्तीय क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को भी और सुदृढ़ बनाएगी।

  • न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के स्नेह से भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी, बोले- चार दशक बाद भी भारत से जुड़ाव उतना ही मजबूत

    न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के स्नेह से भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी, बोले- चार दशक बाद भी भारत से जुड़ाव उतना ही मजबूत

    नई दिल्ली । तीन देशों की विदेश यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑकलैंड में गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। लगभग चार दशकों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा मानी जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के स्नेह, अपनापन और भारत के प्रति उनके मजबूत जुड़ाव की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों का अपने देश से भावनात्मक रिश्ता आज भी पूरी मजबूती के साथ कायम है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड में बसे भारतीयों का उत्साह और आत्मीयता उनके लिए बेहद भावुक करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने उल्लेख किया कि लंबे समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के आधिकारिक दौरे को लेकर वहां के भारतीय समुदाय में विशेष उत्साह देखने को मिला। उनके अनुसार यह केवल स्वागत का अवसर नहीं, बल्कि भारत और उसके प्रवासी नागरिकों के बीच गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का भी प्रतीक है।

    ऑकलैंड पहुंचने पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने स्वयं एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। दोनों नेताओं की मुलाकात को भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वागत के लिए न्यूजीलैंड सरकार और प्रधानमंत्री लक्सन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से होने वाली चर्चाओं को लेकर उत्साहित हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने, आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय समुदाय के साथ संवाद उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    प्रधानमंत्री के स्वागत को विशेष बनाने के लिए ऑकलैंड के प्रसिद्ध स्काई टावर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया। इस पहल को भारत और न्यूजीलैंड के बीच मित्रता तथा मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना गया। शहर में भारतीय समुदाय ने भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक स्वागत के माध्यम से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता और आपसी सम्मान की झलक भी देखने को मिली।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। न्यूजीलैंड में रहने वाला भारतीय समुदाय वहां के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को और सुदृढ़ करने का अवसर भी माना जा रहा है।

    आगामी कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा के साथ-साथ भविष्य की साझेदारी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।

  • फिरोजाबाद में मासूम को पटककर मारने वाले हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

    फिरोजाबाद में मासूम को पटककर मारने वाले हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा


    फिरोजाबाद । फिरोजाबाद में डेढ़ साल के बच्चे के हत्यारे को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। युवक ने बच्चे को जमीन पर 8 बार पटक-पटक कर मार डाला था। वह एकतरफा प्यार में बच्चे की मां से शादी की जिद कर रहा था। बच्चे की मां के मना करने के बाद से युवक गुस्से में था।

    कोर्ट ने शुक्रवार को 2.45 बजे अपना फैसला सुनाया। बच्चे की हत्या का सीसीटीवी भी सामने आया था। इसमें युवक बच्चे की हत्या करते हुए देखा गया था। पुलिस ने आरोपी के दोनों पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार किया था। घटना 30 मई की शिकोहाबाद क्षेत्र की है।

    एक महीने 10 दिन में कोर्ट ने फैसला सुनाया
    सरकारी वकील राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि कोर्ट ने 1 महीने 10 दिन में फैसला दिया है। पुलिस ने 6 दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। बचाव की पक्ष की तरफ से दलील दी गई थी कि घटना के वक्त आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन, कोर्ट ने विराज को आरोपी माना है।

    हत्यारे को फांसी की सजा सुनाने में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज की रही। कोर्ट में जब फुटेज दिखाया गया तो आरोपी खुद अपने आप को थप्पड़ मारने लगा था। वह घटना से काफी दुखी प्रतीत हो रहा था। वकील ने कहा कि देश स्तर पर फैसले का संदेश जाएगा। साथ ही लोगों में भी विश्वास पैदा होगा।

    यह है मामला
    अरांव इलाके के बामई गांव की रहने वाली पिंकी बेटी रति और डेढ़ साल के नाती आरव के साथ यादव कॉलोनी में सहेली पुष्पलता पाठक से मिलने आई थीं। पुष्पलता हाल ही में एक सड़क हादसे में घायल हुई थीं। रति की शादी करीब 3 साल पहले बदायूं के सियारण नगर निवासी सुनीत से हुई थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा।

    आरोप है कि सुनीत की बुआ का बेटा बदायूं के शेखूपुर निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक लंबे समय से रति पर शादी का दबाव बना रहा था। परिवार वालों के मुताबिक, रति ने उसका प्रपोजल ठुकरा दिया था। इसके बाद से विराज नाराज था। 30 मई की दोपहर तीन बजे विराज भी पुष्पलता के घर पहुंच गया।

    टॉफी दिलाने के बहाने बच्चे को साथ ले गया
    विराज आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। कुछ दूर जाकर गली में उसने सन्नाटा देखकर बच्चे को 8 बार जमीन पर पटका। इससे आरव के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसकी मौत हो गई। इसके बाद विराज आरव को गोद में लेकर आया। उसे घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया।

    परिजनों की नजर पड़ी तो वह आरव को अस्पताल लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी चेक किए तो उसमें विराज बच्चे को पटकता हुआ दिखाई दिया।

  • झांसी में 7 साल की बच्ची से दुष्‍कर्म, लोगों ने चप्पलों से पीटा, जमकर की धुनाई, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

    झांसी में 7 साल की बच्ची से दुष्‍कर्म, लोगों ने चप्पलों से पीटा, जमकर की धुनाई, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

    झांसी । झांसी में एक युवक ने घर से 100 मीटर दूरी पर रहने वाली 7 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। 7 जुलाई को सुबह 9 बजे के करीब वह अपनी सहेली के साथ घर के बाहर खेल रही थी।

    तभी आरोपी आया और हाथी दिखाने के बहाने बच्ची को अपने साथ ले गया। सूनी गली में कार के पीछे बच्ची से दरिंदगी की। फिर लहूलुहान हालत में छोड़कर भाग गया। खून से सनी बच्ची को देखकर परिजन सकपका गए। उन्होंने बेटी से पूछताछ की। बेटी ने आरोपी के बारे में इनपुट दिया। जिसके बाद से परिजन आरोपी की तलाश कर रहे थे।

    उन्होंने अपने मकान मालिक को घटना की जानकारी दी थी। उससे बात करने पर आरोपी का सुराग मिला। जिसके बाद शुक्रवार सुबह परिजन उसके घर पहुंचे। आरोपी को पकड़कर अपने घर ले आए। बेटी ने आरोपी को पहचान लिया। उसके बाद भीड़ ने आरोपी की चप्पलों से पिटाई की। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आज दोपहर 12:30 बजे दुष्कर्म का केस दर्ज कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है।

    यह है पूरा मामला

    7 जुलाई को घर के बाहर से बुलाकर ले गया था
    बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी एक युवक ने बताया- मैं अपने परिवार के साथ एक कॉलोनी में रहता हूं। मेरे 3 बच्चे हैं। जिसमें 12 साल की बेटी, 10 साल का बेटा और सबसे छोटी बेटी 7 साल की है। मैं ई-रिक्शा चलाता हूं, जबकि पत्नी घरों में झाड़ू-पोछा का काम करती है।

    7 जुलाई को सुबह करीब 9 बजे मैं ई-रिक्शा चलाने गया था और पत्नी भी काम पर गई थी। 7 साल की बेटी उस समय घर के बाहर सहेली के साथ खेल रही थी। बाकी के दो बच्चे घर पर थे। तभी एक युवक आया और बेटी से कहने लगा कि चलो हाथी दिखाएंगे। झांसे में आकर बच्ची उसके साथ चली गई। जब सहेली भी साथ जाने लगी तो उसे डांटकर भगा दिया।

    पिता काम से लौटकर आए तो हुई घटना की जानकारी
    पिता ने आगे बताया- आरोपी बेटी को एक सूनी गली में ले गया और वहां पर खड़ी कार के पीछे रेप किया। फिर लहूलुहान हालत में बेटी को छोड़कर भाग गया। शाम लगभग 4 बजे मैं घर पहुंचा तो बेटी गेट पर खड़ी थी और रो रही थी। उसके कपड़ों पर खून लगा था।

    बेटी ने आरोपी के बारे में दिया था इनपुट
    मैंने पत्नी को फोन करके बुलाया। तब बेटी ने घटना के बारे में जानकारी दी। बेटी ने यह भी बताया कि आरोपी चेहरे पर तौलिया बांधे था और काले कपड़े पहने था। वो नाम और उसके बारे में जानकारी नहीं दे पाई। हम लोग भी डर गए थे। इसलिए उस समय किसी को कुछ नहीं बताया।

    मकान मालिक से बात करने पर आरोपी का मिला सुराग
    9 जुलाई को हिम्मत करके मैंने अपने मकान मालिक को घटना की जानकारी दी। तब पता चला कि कुछ देर पहले एक आरोपी ने इसी तरह घोड़ा दिखाने के बहाने बच्ची को ले जाने की कोशिश की। बच्ची के चिल्लाने पर वो भाग गया। तब हम लोगों ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    बच्ची ने आरोपी को पहचाना
    पिता ने आगे बताया- आज सुबह करीब 11 बजे पता चला कि कुछ दिन पहले मोनू सिकरवार नाम का युवक किराए पर रहने आया था। वह 7 जुलाई को काले कपड़े पहने था। हम लोग उसे खोजते हुए उसके घर पहुंचे तो वो मिल गया। उसे पकड़कर अपने घर पर लाए। जहां पर मेरी बच्ची ने पहचान लिया कि इन्हीं अंकल ने मेरे कपड़े उतारकर गलत काम किया। इसके बाद भीड़ ने उसकी धुनाई कर दी। फिर पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी मध्य प्रदेश के गुना का रहने वाला है।

    पुलिस बोली- केस दर्ज किया, मेडिकल करा रहे
    सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया- आज परिजनों ने थाने आकर रेप की तहरीर दी है। जिस पर पॉक्‍सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल करवाया जा रहा है। आरोपी से भी पूछताछ की जा रही है।

  • महोबा: स्मार्ट क्लास में अश्लील भोजपुरी गाना चलाने का आरोप, हेडमास्टर निलंबित, जांच में शिकायतें सही मिलीं

    महोबा: स्मार्ट क्लास में अश्लील भोजपुरी गाना चलाने का आरोप, हेडमास्टर निलंबित, जांच में शिकायतें सही मिलीं

    महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में स्मार्ट क्लास की एलईडी स्क्रीन पर कथित रूप से अश्लील भोजपुरी गीत चलाने और अनुचित आचरण का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने जांच कराई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया।

    यह मामला खरेला क्षेत्र के टिकरी प्राथमिक विद्यालय का है। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर की गई जांच के बाद विभाग ने आरोपी हेडमास्टर रमेश चंद्र के खिलाफ कार्रवाई की है। साथ ही अन्य विभागीय कार्रवाई के लिए भी संस्तुति की गई है।

    स्कूल में कथित अनुचित हरकत का वीडियो वायरल
    जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित टिकरी प्राथमिक विद्यालय में रमेश चंद्र पिछले एक वर्ष से प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि 8 जुलाई को विद्यालय की छुट्टी के बाद वह शाम करीब 4 बजे स्कूल लौटे। उनके नशे की हालत में होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने स्मार्ट क्लास में लगी डिजिटल एलईडी स्क्रीन पर अश्लील भोजपुरी गीत चला दिए और कक्षा की बेंच पर लेट गए। तेज आवाज में गीत बजते रहे और वह वहीं आराम करते रहे।

    ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवाज देने के बावजूद उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    ग्रामीणों ने लगाए कई गंभीर आरोप
    ग्रामीणों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राहुल मिश्रा को फोन पर शिकायत करने के साथ लिखित शिकायत भी सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हेडमास्टर अक्सर विद्यालय परिसर में ही रहते हैं, नशे की हालत में दिखाई देते हैं और बच्चों के सामने अनुचित वेशभूषा में घूमते हैं। शिकायत में अभद्र भाषा का प्रयोग करने, विद्यालय परिसर में रात के समय शराब पार्टी होने और विरोध करने वालों को धमकाने जैसे आरोप भी लगाए गए।

    जांच के बाद हुई कार्रवाई
    बीएसए राहुल मिश्रा ने बताया कि शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अनुचित है।

    खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अश्वनी यादव ने बताया कि जांच के दौरान वायरल वीडियो और शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी गई, जिसके आधार पर हेडमास्टर रमेश चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही आगे की विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है।

  • सही बीमारी का पता चलने में हुई देरी, शमिता शेट्टी ने महिलाओं को दी अहम सलाह- शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

    सही बीमारी का पता चलने में हुई देरी, शमिता शेट्टी ने महिलाओं को दी अहम सलाह- शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

    नई दिल्ली । अभिनेत्री शमिता शेट्टी ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर खुलकर बात करते हुए अपने जीवन के कठिन दौर का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय तक एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझती रहीं, लेकिन शुरुआत में बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाने के कारण इलाज में काफी देरी हुई। शमिता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक अपने शरीर में होने वाले बदलावों और दर्द को सामान्य मान लिया था, जिसकी वजह से समस्या धीरे-धीरे बढ़ती चली गई।

    एक बातचीत के दौरान शमिता शेट्टी ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि जो शारीरिक तकलीफें और बदलाव वह महसूस कर रही हैं, वे सामान्य हैं या किसी गंभीर बीमारी के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार डॉक्टर से संपर्क किया तो कई जरूरी जांच कराई गईं, लेकिन रिपोर्ट सामान्य आने के कारण बीमारी की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी। इसके बाद हर बार लक्षण सामने आने पर उन्हें यही लगता रहा कि शायद यह महिलाओं के जीवन का सामान्य हिस्सा है।

    शमिता ने कहा कि महिलाओं के साथ अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है कि वे अपने दर्द और असुविधा को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, हार्मोनल बदलाव या अन्य शारीरिक परेशानियों को कई बार इतनी सामान्य चीज समझ लिया जाता है कि गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत भी अनदेखे रह जाते हैं। उन्होंने माना कि समाज में भी महिलाओं की कई स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है, जिससे समय पर जांच और उपचार नहीं हो पाता।

    अभिनेत्री ने बताया कि सर्जरी से कुछ महीने पहले उनकी स्थिति काफी कठिन हो गई थी। दर्द धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और नींद पर भी पड़ने लगा। उन्होंने कहा कि जब दर्द की वजह से उनकी नींद बार-बार टूटने लगी, तब उन्हें महसूस हुआ कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है। उसी समय उन्होंने अपनी परेशानी की वास्तविक वजह जानने का निर्णय लिया और आगे की जांच कराई।

    शमिता शेट्टी ने यह भी बताया कि उसी दौरान वह पेरिमेनोपॉज के चरण से भी गुजर रही थीं। शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलावों के कारण उनके लिए यह समझना और भी मुश्किल हो गया था कि उनकी तकलीफ का कारण एंडोमेट्रियोसिस है या पेरिमेनोपॉज से जुड़े परिवर्तन। लगातार बदलते शारीरिक संकेतों ने स्थिति को और जटिल बना दिया था। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौरान उन्हें काफी भ्रम और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

    उन्होंने महिलाओं को सलाह देते हुए कहा कि शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी प्रकार का दर्द, असामान्य लक्षण या स्वास्थ्य समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो उसे सामान्य मानकर सहते रहने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है। समय पर जांच और सही उपचार कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ने से रोक सकता है।

    शमिता की इस स्वास्थ्य यात्रा ने एक बार फिर महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय रहते लक्षणों की पहचान और चिकित्सकीय सलाह लेने से बेहतर उपचार संभव हो सकता है। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा करना और जागरूकता बढ़ाना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

  • सात साल के रिश्ते का दावा बना विवाद की वजह, युवती की शादी रोकने के लिए पोस्टर अभियान चलाने वाला युवक दोस्तों समेत गिरफ्तार

    सात साल के रिश्ते का दावा बना विवाद की वजह, युवती की शादी रोकने के लिए पोस्टर अभियान चलाने वाला युवक दोस्तों समेत गिरफ्तार

    नई दिल्ली । तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला जिले में एक प्रेम प्रसंग उस समय बड़ा विवाद बन गया, जब एक युवक ने कथित तौर पर युवती की शादी रुकवाने के उद्देश्य से पूरे गांव में पोस्टर चिपका दिए। पोस्टरों में उसने युवती के साथ अपने संबंध का दावा किया और विवाह रुकवाने की अपील जैसी बातें सार्वजनिक कर दीं। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में हलचल मच गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया।

    बताया गया कि युवक का दावा है कि उसका युवती के साथ पिछले करीब सात वर्षों से प्रेम संबंध था। इस बीच युवती के परिवार ने उसका विवाह दूसरे युवक से तय कर दिया। युवक का आरोप है कि दोनों परिवार उनके रिश्ते के बारे में जानते थे, लेकिन इसके बावजूद शादी का फैसला लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि युवती की इच्छा के विपरीत विवाह कराया जा रहा था।

    आरोप है कि युवक ने अपनी बात सार्वजनिक करने के लिए पोस्टर तैयार करवाए। इन पोस्टरों में उसने अपनी और युवती की तस्वीरों के साथ दूल्हे की तस्वीर भी प्रकाशित कर दी। इतना ही नहीं, पोस्टरों में दूल्हे और उसके परिवार से जुड़ी निजी जानकारी भी शामिल कर दी गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद देर रात गांव के प्रमुख चौराहों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर ये पोस्टर लगा दिए गए।

    अगली सुबह जब ग्रामीणों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी तो पूरे क्षेत्र में इस घटना की चर्चा शुरू हो गई। पोस्टरों में प्रकाशित निजी जानकारी और लगाए गए आरोपों को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इस घटना से विवाह समारोह से जुड़े परिवारों में भी चिंता का माहौल बन गया।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी युवक को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही इस पूरी घटना में सहयोग करने के आरोप में उसके पांच साथियों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पोस्टर कहां तैयार किए गए, उन्हें किसने छापा और पूरी योजना में किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसके अलावा पोस्टरों में निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्तिगत विवाद या संबंध को सार्वजनिक करते हुए किसी व्यक्ति की निजी जानकारी बिना अनुमति के साझा करना गंभीर कानूनी मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निजता के अधिकार, मानहानि और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। इसलिए किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि व्यक्तिगत विवादों का समाधान कानून और संवाद के माध्यम से करें तथा किसी भी परिस्थिति में ऐसा कदम न उठाएं जिससे किसी अन्य व्यक्ति की निजता, प्रतिष्ठा या सुरक्षा प्रभावित हो।

  • शनि देव पर सरसों का तेल चढ़ाने से क्यों दूर होती हैं बाधाएं जानिए शनिवार की पूजा का महत्व और सही विधि

    शनि देव पर सरसों का तेल चढ़ाने से क्यों दूर होती हैं बाधाएं जानिए शनिवार की पूजा का महत्व और सही विधि


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन भगवान शनि की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। देशभर के शनि मंदिरों में इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और सुख शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनि न्याय के देवता हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शनिवार को शनि पूजा और तेल अर्पित करने की परंपरा आज भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ निभाई जाती है।

    धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान शनि पर सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा का संबंध भगवान हनुमान से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब भगवान हनुमान ने शनि देव को संकट से मुक्त कराया तब शनि देव के शरीर पर लगी पीड़ा को शांत करने के लिए तेल लगाया गया। उसी समय से यह विश्वास प्रचलित हुआ कि शनिवार के दिन श्रद्धापूर्वक तेल अर्पित करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। हालांकि यह एक धार्मिक मान्यता है और अलग अलग परंपराओं में इसकी व्याख्या भिन्न हो सकती है।

    ज्योतिष शास्त्र में भी शनिवार को तेल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि शनि ग्रह अनुशासन धैर्य न्याय और कर्म का प्रतीक है। श्रद्धा के साथ की गई पूजा व्यक्ति को आत्मसंयम और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करती है। कई श्रद्धालु इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि मंत्र का जाप करते हैं और शनि चालीसा का पाठ करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

    शनिवार की पूजा में केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अच्छे कर्मों का पालन भी उतना ही आवश्यक बताया गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना बुजुर्गों का सम्मान करना सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलना तथा किसी के साथ अन्याय न करना शनि देव की कृपा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण उपाय माने जाते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन काला तिल उड़द की दाल सरसों का तेल और भोजन का दान भी करते हैं जिसे पुण्यदायी माना जाता है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान हनुमान की उपासना से शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शनिवार को मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

    धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल अनुष्ठान करना नहीं बल्कि जीवन में अच्छे विचार और श्रेष्ठ कर्मों को अपनाना है। श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ भगवान शनि की आराधना करने वाला व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक बनता है। इसलिए शनिवार को तेल अर्पित करने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि कर्म अनुशासन सेवा और सदाचार का संदेश भी देती है।

  • हिजबुल कमांडर के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल, कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का किया सार्वजनिक दावा

    हिजबुल कमांडर के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल, कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का किया सार्वजनिक दावा

    नई दिल्ली । प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शमशेर खान का एक कथित वीडियो सामने आने के बाद सीमा पार आतंकवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वीडियो में उसने दावा किया है कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आए आतंकी कश्मीर में सक्रिय रहे और उनकी कब्रें घाटी के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद हैं। इस बयान को सुरक्षा मामलों के जानकार महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इसमें सीमा पार से आतंकवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से दावा किया गया है।

    वीडियो में शमशेर खान कथित तौर पर कहता दिखाई देता है कि कुपवाड़ा, लोलाब और कठुआ सहित कश्मीर के अनेक इलाकों में ऐसे कब्रिस्तान हैं, जहां पाकिस्तान से आए आतंकियों को दफनाया गया है। उसने अपने संबोधन में इन लोगों को कश्मीर में लड़ाई के दौरान मारे जाने का दावा करते हुए उनके प्रति समर्थन भी व्यक्त किया। साथ ही उसने पाकिस्तान और कश्मीर के संबंधों को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि इस रिश्ते को कोई समाप्त नहीं कर सकता।

    इसी भाषण के दौरान उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर भी तीखा हमला बोला। उसने संगठन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे अपने विचारों के विपरीत बताया और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध किया। उसके बयान में संगठन के प्रति कड़ी आलोचना और राजनीतिक मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।

    मिली जानकारी के अनुसार यह भाषण आठ जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। यह कार्यक्रम हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर बुरहान वानी की बरसी के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर बुरहान वानी और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोस्टर भी लगाए गए थे। इस आयोजन में मौजूद लोगों के बीच शमशेर खान ने अपना संबोधन दिया, जिसका वीडियो बाद में सामने आया।

    सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान भारत की लंबे समय से व्यक्त उस चिंता के संदर्भ में चर्चा का विषय बनते हैं जिसमें सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन मिलने की बात कही जाती रही है। हालांकि किसी भी वीडियो या दावे की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।

    जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं और सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी भी बढ़ाई गई है। पिछले कुछ वर्षों में कई आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो और सार्वजनिक बयान सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत भी बन सकते हैं। यदि इनमें किए गए दावों की पुष्टि होती है तो यह सीमा पार आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं। फिलहाल इस वीडियो और उसमें किए गए दावों को लेकर संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर स्थिति का आकलन कर रही हैं।