Blog

  • प्रयागराज-हडपसर के बीच 1 अप्रैल से साप्ताहिक विशेष ट्रेन: 16-16 फेरों में सुविधा, भोपाल मंडल से होकर गुजरेगी

    प्रयागराज-हडपसर के बीच 1 अप्रैल से साप्ताहिक विशेष ट्रेन: 16-16 फेरों में सुविधा, भोपाल मंडल से होकर गुजरेगी



    नई दिल्ली। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय रेलवे ने प्रयागराज और हडपसर के बीच साप्ताहिक विशेष ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। यह ट्रेन भोपाल मंडल मार्ग से होकर गुजरेगी और 1 अप्रैल 2026 से 15 जुलाई 2026 तक कुल 16-16 फेरों में चलेगी। ट्रेन का संचालन यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि भीड़ के समय में सफर आरामदायक और सुरक्षित रहे।

    गाड़ी संख्या 04107 प्रयागराज-हडपसर विशेष ट्रेन प्रत्येक बुधवार को प्रयागराज से सुबह 10:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन शाम 7:30 बजे हडपसर पहुंचेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 04108 हडपसर-प्रयागराज विशेष ट्रेन प्रत्येक गुरुवार को रात 10:40 बजे हडपसर से प्रस्थान कर शनिवार सुबह 6:30 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 20 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें विभिन्न श्रेणियों की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    ट्रेन मार्ग में शंकरगढ़, डभौरा, मानिकपुर, चित्रकूट धाम, बांदा, महोबा, खजुराहो, छतरपुर, टीकमगढ़, ललितपुर, बीना, रानी कमलापति, इटारसी, खंडवा, भुसावल, मनमाड, कोपरगांव, बेलापुर, अहिल्यानगर और दौंड कॉर्ड लाइन जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव रहेगा।

    रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन की समय-सारणी और आरक्षण संबंधी जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, एनटीईएस पोर्टल या रेलवे हेल्पलाइन से अवश्य प्राप्त करें। इससे यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी।

  • तेज रफ्तार बनी मौत का कारण: भोपाल में कार फेंसिंग तोड़ खदान में गिरी, 24 साल के ड्राइवर की मौत

    तेज रफ्तार बनी मौत का कारण: भोपाल में कार फेंसिंग तोड़ खदान में गिरी, 24 साल के ड्राइवर की मौत


    भोपाल भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार कंचन खदान के पास टर्न पर अनियंत्रित होकर फेंसिंग का तार और खंभा तोड़ते हुए सीधे खदान में भरे पानी में जा गिरी। इस हादसे में 24 वर्षीय रोहित माली की मौत हो गई, जबकि उसके साथ कार में सवार दो दोस्त घायल हो गए। सूचना मिलते ही अयोध्या नगर पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

    पुलिस के अनुसार रोहित माली पेशे से ओला कैब चालक था। शनिवार शाम करीब 5:30 बजे वह सवारी छोड़ने के बाद पिपरिया जाहिर पीर इलाके से अपने दो दोस्तों को कार में बैठाकर अयोध्या नगर की ओर लौट रहा था। इसी दौरान अरेड़ी क्रेशर बस्ती के पास कंचन खदान के नजदीक एक टर्न पर कार की रफ्तार ज्यादा होने के कारण वह वाहन को मोड़ नहीं पाया। कार सीधे फेंसिंग तोड़ते हुए खदान में भरे करीब 8 से 10 फीट गहरे पानी में जा गिरी।

    हादसा होते ही आसपास के लोगों ने शोर सुनकर मौके पर पहुंचकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह कार में सवार दोनों युवकों को पानी से बाहर निकाल लिया, लेकिन चालक रोहित माली सीट बेल्ट लगाए होने के कारण कार के अंदर ही फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। पुलिस और नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे बाहर निकाला और तुरंत सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

    इसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं खदान में डूबी कार को नगर निगम की क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया। अयोध्या नगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। रोहित के शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मोर्चुरी में रखवाया गया है, जहां रविवार को उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा।

  • घर में एक्सपायर्ड दवाओं का स्मार्ट इस्तेमाल: बर्तन साफ करें, ब्लेड तेज करें और कीड़े भगाएं

    घर में एक्सपायर्ड दवाओं का स्मार्ट इस्तेमाल: बर्तन साफ करें, ब्लेड तेज करें और कीड़े भगाएं


    नई दिल्ली । आजकल हर घर में मेडिकल स्टॉक रहता है लेकिन एक्सपायर्ड दवाओं को ज्यादातर लोग सीधे डस्टबिन में फेंक देते हैं। दरअसल इनके रेपर यानी गोलियों और कैप्सूल की एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल घरेलू कामों में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

    सबसे पहले रेपर से दवाओं को निकालकर अलग रख लें। यह कड़ाही तवा और अन्य बर्तनों की सफाई में काम आता है। हल्का रगड़ने पर बर्तन फिर से चमकने लगते हैं। इसके अलावा कैंची या मिक्सर ब्लेड की धार कम होने पर भी इन्हीं रेपर से इसे तेज किया जा सकता है। कैंची से रेपर को कई बार काटने पर धार बढ़ती है जबकि मिक्सर ब्लेड के लिए रेपर को छोटे टुकड़ों में काटकर पीस दें।

    एक्सपायर्ड दवाओं का इस्तेमाल कीड़े और बदबू दूर करने में भी होता है। इसके लिए रेपर को गर्म पानी में घोलें और हल्का मीठा सोडा मिलाकर सिंक में डाल दें। इससे कीड़े ब्लॉकेज और बदबू दूर होती है। यह मिश्रण पौधों में लगने वाले फंगस से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।

    इस तरह घर में पड़े एक्सपायर्ड दवाओं को केवल फेंकने की बजाय उनका स्मार्ट इस्तेमाल करके आप पैसों की बचत भी कर सकते हैं और रसोई-सफाई ब्लेड तेज करना और कीट नियंत्रण जैसे कई काम कर सकते हैं। यह तरीका सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है।

  • पत्नी पर हाथ उठाने का आरोप! करोड़पति यूट्यूबर अनुराग डोबाल विवादों में, भाई ने खोली पोल

    पत्नी पर हाथ उठाने का आरोप! करोड़पति यूट्यूबर अनुराग डोबाल विवादों में, भाई ने खोली पोल


    नई दिल्ली। रियलिटी शो बिग बॉस 17 में नजर आए यूट्यूबर अनुराग डोबाल इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े विवाद में घिरे हुए हैं। 5 मार्च को अपने यूट्यूब चैनल पर दो घंटे लंबा वीडियो शेयर करते हुए अनुराग ने दावा किया कि उनके माता-पिता और भाईयों ने उन्हें परेशान किया और इसी वजह से उनकी पत्नी रितिका चौहान घर छोड़कर चली गई। वीडियो में उन्होंने अपने जीवन की परेशानियों का विवरण देते हुए सुसाइड की ओर इशारा भी किया।

    अनुराग के इस वीडियो के बाद उनके भाई कलम ने इसका जवाब दिया। कलम ने आरोप लगाया कि अनुराग यह सब व्यूज पाने के लिए कर रहे हैं और यह कहानी पूरी तरह झूठ पर आधारित है। कलम ने अपने इंस्टाग्राम चैनल K-Old World पर कई स्क्रीनशॉट शेयर किए, जिसमें अनुराग खुद अपनी पत्नी पर हाथ उठाने की बात कुबूल करते दिखाई दे रहे हैं। एक स्क्रीनशॉट में अनुराग अपनी करीबी दोस्त को बताते हैं कि उन्होंने रितिका को थप्पड़ मारा क्योंकि वह उन्हें परेशान कर रही थीं। इस चैट में अनुराग ने लिखा कि उन्हें रितिका को मारना नहीं चाहिए था लेकिन परिस्थितियों ने मजबूर कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने हंसने वाली इमोजी भी भेजी।

    भाई कलम ने अपनी स्टोरीज में लिखा कि अनुराग रोजाना इसी तरह का ड्रामा करते हैं और यह सब केवल सोशल मीडिया पर ट्रैक्शन पाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुराग ने परिवार और पेरेंट्स पर फेक केस भी किया था और कानूनी रूप से हारने के बाद उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। कलम ने अपने फैंस से अपील की कि इस विवाद में न पड़ें।

    अनुराग डोबाल ने वीडियो में बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि परिवार और परिस्थितियां उन्हें ऐसे पीछे धकेलेंगी। उन्होंने बताया कि 14 साल की उम्र में उन्हें ब्रेन ट्यूमर निकाला गया और जीवन की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया।

    यूट्यूबर ने यह भी दावा किया कि उनके माता-पिता ने उनकी शादी रितिका से जाति के कारण विरोध किया और विवाह समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार ने उन्हें अन्य रिश्तेदारों के सामने माफी मांगने पर मजबूर किया और कहा कि वे खुश नहीं रहेंगे और उन्हें भी खुश नहीं रहने देंगे। अनुराग ने आगे कहा कि रितिका को कई लोगों ने प्रभावित किया और झूठ बोला, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी पत्नी से प्यार किया।

    इस विवाद ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है और दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने तर्कों के साथ सामने आ रहे हैं। अनुराग डोबाल और उनके भाई कलम के बीच सामने आए स्क्रीनशॉट और बयान इस कहानी को और विवादित बना रहे हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और यूट्यूबर परिवार और पत्नी के बीच सुलह कर पाते हैं या नहीं।

  • वर्ल्ड कप फाइनल तक भारत को ले जाने वाले ये हैं 5 कप्तान, जानिए सूर्यकुमार यादव के अलावा सूची में किसका नाम

    वर्ल्ड कप फाइनल तक भारत को ले जाने वाले ये हैं 5 कप्तान, जानिए सूर्यकुमार यादव के अलावा सूची में किसका नाम


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक और ऐतिहासिक पल आ गया है। 2026 के आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली है। रोहित शर्मा के संन्यास के बाद जब टीम की कमान सूर्यकुमार के हाथों में आई तो कोई नहीं जानता था कि वह अपने पहले बड़े आईसीसी टूर्नामेंट में ही टीम को फाइनल तक पहुँचाने में कामयाब होंगे। सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराकर भारत ने लगातार दूसरे टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में प्रवेश किया और इस सफलता के साथ सूर्यकुमार यादव का नाम उन कप्तानों की लिस्ट में जुड़ गया है जिन्होंने भारतीय टीम को विश्व कप फाइनल तक पहुँचाया है।

    विश्व कप फाइनल की कहानी

    भारतीय क्रिकेट में विश्व कप फाइनल की कहानी 1983 से शुरू होती है जब कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहला खिताब जीता। जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 175 रनों की पारी ने टीम को टूर्नामेंट में बनाए रखा और फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर भारत ने इतिहास रच दिया। उसके बाद दो दशक के अंतराल में 2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम ने दक्षिण अफ्रीका में खेली गई प्रतियोगिता में फाइनल तक की शानदार यात्रा पूरी की। गांगुली ने तीन शतक लगाए और टीम को मजबूत अभियान चलाने में मदद की हालांकि फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार मिली।

    इनके नाम सबसे बड़ा रिकॉर्ड

    फाइनल में पहुँचने के मामले में सबसे बड़ा रिकॉर्ड महेंद्र सिंह धोनी के नाम दर्ज है। धोनी ही वह कप्तान हैं जिन्होंने भारत को तीन अलग-अलग विश्व कप फाइनल तक पहुँचाया। 2007 में टी20 विश्व कप का खिताब जीता 2011 में वनडे विश्व कप में भारत को गौरव दिलाया और 2014 में टी20 फाइनल में श्रीलंका के हाथों हार का सामना किया। रोहित शर्मा ने भी अपनी कप्तानी में टीम को लगातार दो विश्व कप फाइनल तक पहुँचाया। 2023 में वनडे वर्ल्ड कप में और 2024 में टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी तक पहुँच बनाई।

    भारत को फिर से जीत की उम्मीद

    अब सूर्यकुमार यादव ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया है। हर कप्तान का दौर अलग रहा विरोधी टीमें अलग रही लेकिन फाइनल तक पहुँचने की यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट की ऐतिहासिक विरासत को एक साझा धागे में जोड़ती है। 1983 के वनडे युग से लेकर 2026 के टी20 फाइनल तक भारतीय कप्तानों ने अलग परिस्थितियों में निरंतरता और नेतृत्व की मिसाल पेश की है। अब सभी की निगाहें 2026 के फाइनल पर हैं जहां सूर्यकुमार यादव की टीम भारत के लिए फिर से जीत की उम्मीद जगाएगी।

  • देवताओं की होली रंग पंचमी कल जानें तिथि पूजा विधि और भगवान को किस रंग का गुलाल चढ़ाना होता है शुभ

    देवताओं की होली रंग पंचमी कल जानें तिथि पूजा विधि और भगवान को किस रंग का गुलाल चढ़ाना होता है शुभ


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में होली के बाद आने वाला रंग पंचमी का पर्व बेहद खास और आध्यात्मिक महत्व वाला माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को अबीर गुलाल अर्पित करने की परंपरा है इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है और भगवान को रंग अर्पित कर भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी देवताओं को अबीर गुलाल चढ़ाने से कुंडली के दोष कम होते हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 8 मार्च को रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। पंचमी तिथि उदया तिथि के अनुसार 8 मार्च को पड़ रही है इसलिए इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कई स्थानों पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और कई जगह भव्य शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। ढोल नगाड़ों की गूंज और भक्ति संगीत के साथ पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है।

    रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि विधान के साथ पूजा करने से घर परिवार में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर एक चौकी रखकर उस पर राधा कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है और उन्हें फूल माला तथा फल अर्पित कर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान को अबीर गुलाल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप किया जाता है और अंत में भगवान की आरती उतारी जाती है तथा प्रसाद का वितरण किया जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में रंग पंचमी के दिन अलग अलग रंग के गुलाल का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि अलग अलग रंग जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लाल रंग को ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इसे सूर्य तथा मंगल से जुड़ा हुआ रंग बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति के कामों में बाधा आ रही हो या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो रही हो तो भगवान को लाल रंग का गुलाल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    पीला रंग शुभता और मंगल कार्यों से जुड़ा माना जाता है और इसे देवगुरु बृहस्पति का रंग कहा जाता है। यदि विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही हो या संतान की शिक्षा में परेशानी हो तो भगवान को पीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

    हरा रंग समृद्धि शांति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है और ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध बुध ग्रह से होता है। यदि वाणी और बुद्धि में असंतुलन के कारण जीवन में समस्याएं आ रही हों तो रंग पंचमी के दिन भगवान को हरे रंग का गुलाल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

    वहीं नीले रंग को वास्तु और ज्योतिष दोनों में विशेष महत्व दिया गया है। यह रंग सुरक्षा सत्य और गहराई का प्रतीक माना जाता है और इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है। जीवन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए भगवान को नीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

    इस तरह रंग पंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

  • ऑनलाइन खाने की गुणवत्ता पर फिर सवाल सागर के रेस्टोरेंट में छापा बासी पनीर और खराब सूप मिलने से मचा हड़कंप

    ऑनलाइन खाने की गुणवत्ता पर फिर सवाल सागर के रेस्टोरेंट में छापा बासी पनीर और खराब सूप मिलने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेश के सागर शहर में ऑनलाइन मंगाए गए खाने की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है जहां एक परिवार द्वारा ऑर्डर किए गए छोले कुलचे खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद परिजनों ने भोजन की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए खाद्य विभाग से शिकायत की जिसके बाद विभाग की टीम ने संबंधित रेस्टोरेंट पर छापेमारी कर जांच की। जांच के दौरान किचन में कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं और कुछ खाद्य सामग्री संदिग्ध अवस्था में पाई गई जिससे ऑनलाइन फूड डिलीवरी की सुरक्षा और गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार सागर निवासी अभिषेक अग्रवाल ने एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट से ऑनलाइन ऐप के माध्यम से छोले कुलचे का ऑर्डर दिया था। खाना घर पहुंचने के बाद बच्चों ने उसे खाया लेकिन कुछ ही समय बाद बच्चों को पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने लगी। बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजनों को भोजन की गुणवत्ता पर शक हुआ। जब खाने की स्थिति को ध्यान से देखा गया तो उन्हें लगा कि खाना बासी हो सकता है। इसके बाद अभिषेक अग्रवाल ने बिना देर किए पूरे मामले की शिकायत खाद्य विभाग से की ताकि मामले की जांच हो सके और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

    शिकायत मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और सागर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित सागर गैरे नामक रेस्टोरेंट पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम ने किचन और स्टोर रूम की जांच की तो वहां कई गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों को किचन में साफ सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं लगी और खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। जांच के दौरान टीम को बासी पनीर खराब गुणवत्ता का हॉट एंड सॉर सूप और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ संदिग्ध हालत में मिले। इसके अलावा किचन की स्वच्छता व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई जिस पर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई।

    खाद्य विभाग की टीम ने मौके से पनीर सूप और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल लिए हैं जिन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संबंधित खाद्य सामग्री मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में खाद्य पदार्थ अमानक या असुरक्षित पाए जाते हैं तो संबंधित रेस्टोरेंट के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने बच्चों के लिए छोले कुलचे मंगवाए थे लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद बच्चों की तबीयत खराब हो गई। उन्हें भोजन की स्थिति संदिग्ध लगी इसलिए उन्होंने तुरंत विभाग में शिकायत दर्ज कराई ताकि अन्य लोगों की सेहत को खतरा न हो और इस तरह की लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई हो सके।

    खाद्य विभाग ने इस घटना के बाद आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि यदि किसी भी रेस्टोरेंट ढाबे या ऑनलाइन फूड डिलीवरी से मिलने वाले भोजन में बासीपन मिलावट या खराब गुणवत्ता का संदेह हो तो तुरंत इसकी जानकारी विभाग को दें ताकि समय रहते जांच कर कार्रवाई की जा सके और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • मुरैना: 16 दिन पहले पिता बना था लवकुश, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर सोते हुए पति को उतार दिया मौत के घाट

    मुरैना: 16 दिन पहले पिता बना था लवकुश, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर सोते हुए पति को उतार दिया मौत के घाट


    नई दिल्ली।  रिश्तों के कत्ल की एक रूह कंपा देने वाली साजिश का सिहोनिया पुलिस ने महज 4 दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। 3 मार्च की रात जिस लवकुश माहौर की मौत को उसकी पत्नी ने ‘आत्महत्या’ करार दिया था, वह दरअसल एक सोची-समझी ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ जैसी वारदात निकली। पुलिस ने मृतक की पत्नी राखी और उसके पड़ोसी प्रेमी विक्रम परमार को गिरफ्तार कर लिया है।

    वारदात: बेटे के जन्म की खुशी और खूनी अंत
    लवकुश माहौर गुजरात के सूरत में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। करीब 16 दिन पहले उसके घर में बेटे का जन्म हुआ, जिसकी खुशी मनाने वह अपने गांव सिहोनिया आया था। वह होली का त्योहार मनाकर वापस सूरत जाने की तैयारी में था, लेकिन उसे क्या पता था कि उसके घर में ही उसकी मौत का जाल बुना जा चुका है।

    खौफनाक रात: 3 मार्च की रात करीब 3 बजे, जब लवकुश गहरी नींद में था, पड़ोसी विक्रम परमार कमरे में दाखिल हुआ और बेहद करीब से लवकुश को गोली मार दी।वारदात के बाद विक्रम फरार हो गया, जबकि पत्नी राखी ने शोर मचाते हुए यह कहानी रची कि लवकुश ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है।

    मोबाइल चैट ने खोला ‘बेवफाई’ का राज
    पुलिस को शुरुआत से ही पत्नी के बयानों पर संदेह था। एसडीओपी विजय भदौरिया के नेतृत्व में जब जांच आगे बढ़ी, तो पुलिस ने राखी का मोबाइल खंगाला।

    साजिश के सबूत: मोबाइल में पड़ोसी विक्रम परमार के साथ राखी की लंबी बातचीत और हत्या की प्लानिंग से जुड़ी चैट्स मिलीं। कड़ाई से पूछताछ करने पर राखी टूट गई और उसने स्वीकार किया कि लवकुश उनके प्रेम संबंधों में कांटा बन रहा था, इसलिए उसे रास्ते से हटाने के लिए विक्रम के साथ मिलकर यह साजिश रची।

    जनाक्रोश और पुलिस की मुस्तैदी
    घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने लवकुश की मौत को संदिग्ध बताते हुए नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया था। लोगों की मांग थी कि असली कातिलों को पकड़ा जाए। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक (मोबाइल चैट) के आधार पर 4 दिन के भीतर कातिल पत्नी और उसके प्रेमी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

    यह घटना समाज की गिरती नैतिक मर्यादाओं का उदाहरण है; जहाँ एक तरफ पालने में 16 दिन का मासूम सो रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसकी माँ अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके पिता की हत्या की पटकथा लिख रही थी।

    मुख्य कीवर्ड्स (Keywords with Comma)
    मुरैना हत्याकांड, सिहोनिया न्यूज़, लवकुश माहौर मर्डर, पत्नी ने की पति की हत्या, अवैध संबंध, मोबाइल चैट से खुलासा, एमपी पुलिस, 16 दिन का नवजात, ग्वालियर-चंबल क्राइम, विक्रम परमार गिरफ्तार।

  • होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई

    होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम के ग्वालटोली रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें होटल संचालक अशोक नवलानी (60) का साइलेंट अटैक से निधन हो गया। घटना उस समय हुई जब अशोक नवलानी ग्राहकों को खाना परोस रहे थे। जैसे ही उन्होंने एक थाली में सब्जी रखी, अचानक वह जमीन पर गिर पड़े। घटना का सीसीटीवी वीडियो शनिवार सुबह सामने आया, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि गिरते ही आसपास के लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ। कुछ ही पलों में अशोक के भाई पप्पन नवलानी और अन्य कर्मचारी दौड़कर उन्हें उठाने पहुंचे और तुरंत सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
     
    अशोक नवलानी गोकुलपुरी की सिंधी कॉलोनी के निवासी थे और अपने भाई पप्पन नवलानी के साथ मिलकर ‘चाचा-भतीजा’ नाम से होटल चला रहे थे। पप्पन ने बताया कि गुरुवार रात दोनों दुकान पर ही थे। वह सब्जी बना रहे थे और अशोक ग्राहकों को टेबल पर खाना परोस रहे थे। थाली में सब्जी रखते ही अचानक गिरने के बाद उन्होंने सीपीआर की कोशिश की, लेकिन अशोक अचेत हो गए। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पप्पन ने आगे बताया कि अशोक परिवार में सबसे बड़े भाई थे, उनके छह भाई-बहन हैं, और उनकी एक बेटी की शादी हो चुकी है। पिछले तीन साल में गर्मियों में उन्हें दो-तीन बार हल्की घबराहट और बीपी कम होने की समस्या हुई थी, लेकिन हार्ट की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    नर्मदापुरम जिला अस्पताल के क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जैन ने कहा कि आजकल असीमित दिनचर्या, तनाव, बिगड़ा खानपान और व्यायाम की कमी से हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी से कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, नियमित रूटीन चेकअप कराएं, 7-8 घंटे की नींद लें और रोजाना व्यायाम या योग से तनाव कम करें।

    होटल में हुए इस हादसे ने स्थानीय लोगों और परिवार में शोक की लहर फैला दी है। अशोक नवलानी का निधन इस बात का भी संदेश देता है कि व्यस्त दिनचर्या और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना गंभीर परिणाम ला सकता है।

    इस घटना की वजह से लोगों में चेतना बढ़ी है कि कार्यस्थल पर भी स्वास्थ्य और आराम को महत्व देना जरूरी है, खासकर व्यवसायिक जीवन में तनाव और थकान के बीच।

  • रंग पंचमी: क्यों कहा जाता है इसे देवताओं की होली, जानिए धार्मिक महत्व और खास परंपराएं

    रंग पंचमी: क्यों कहा जाता है इसे देवताओं की होली, जानिए धार्मिक महत्व और खास परंपराएं


    नई दिल्ली। होली के रंगों और उत्साह से भरे माहौल के बीच आने वाला रंग पंचमी का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार हर वर्ष होली के पांचवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। भारत के कई हिस्सों में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है हालांकि मध्यप्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और ब्रज क्षेत्र में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

    रंग पंचमी को देव पंचमी या कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। यही कारण है कि इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। जिस तरह कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली मानी जाती है उसी तरह रंग पंचमी को देवताओं की होली के रूप में देखा जाता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रज में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी। इसी परंपरा के चलते आज भी कई मंदिरों में इस दिन विशेष रंगोत्सव आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में चंदन हल्दी और फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्त भी एक दूसरे पर रंग लगाकर इस उत्सव में शामिल होते हैं।

    ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है और रंग पंचमी के साथ इस उत्सव का समापन माना जाता है। इसलिए यह पर्व होली की विदाई का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं और आपसी प्रेम भाईचारे और सद्भाव का संदेश फैलाते हैं।

    रंग पंचमी के दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। भक्त सबसे पहले राधा कृष्ण की पूजा करते हैं और गुलाल उनके चरणों में अर्पित करते हैं। कई मंदिरों में इस दिन भगवान की विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही सामूहिक रंगोत्सव भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।

    इस अवसर पर कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें लोकगीत नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। शहरों कस्बों और गांवों में लोग मिलकर रंगों का उत्सव मनाते हैं और पुराने मतभेदों को भुलाकर नए सिरे से रिश्तों को मजबूत करते हैं।

    घर घर में इस दिन विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर उत्सव का आनंद लेते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई रंग पंचमी के रंगों में सराबोर दिखाई देता है। इस तरह रंग पंचमी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है बल्कि यह सामाजिक एकता प्रेम और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है।