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  • हिजबुल कमांडर के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल, कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का किया सार्वजनिक दावा

    हिजबुल कमांडर के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल, कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी का किया सार्वजनिक दावा

    नई दिल्ली । प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शमशेर खान का एक कथित वीडियो सामने आने के बाद सीमा पार आतंकवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वीडियो में उसने दावा किया है कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आए आतंकी कश्मीर में सक्रिय रहे और उनकी कब्रें घाटी के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद हैं। इस बयान को सुरक्षा मामलों के जानकार महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इसमें सीमा पार से आतंकवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से दावा किया गया है।

    वीडियो में शमशेर खान कथित तौर पर कहता दिखाई देता है कि कुपवाड़ा, लोलाब और कठुआ सहित कश्मीर के अनेक इलाकों में ऐसे कब्रिस्तान हैं, जहां पाकिस्तान से आए आतंकियों को दफनाया गया है। उसने अपने संबोधन में इन लोगों को कश्मीर में लड़ाई के दौरान मारे जाने का दावा करते हुए उनके प्रति समर्थन भी व्यक्त किया। साथ ही उसने पाकिस्तान और कश्मीर के संबंधों को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि इस रिश्ते को कोई समाप्त नहीं कर सकता।

    इसी भाषण के दौरान उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर भी तीखा हमला बोला। उसने संगठन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे अपने विचारों के विपरीत बताया और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध किया। उसके बयान में संगठन के प्रति कड़ी आलोचना और राजनीतिक मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।

    मिली जानकारी के अनुसार यह भाषण आठ जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। यह कार्यक्रम हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर बुरहान वानी की बरसी के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर बुरहान वानी और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोस्टर भी लगाए गए थे। इस आयोजन में मौजूद लोगों के बीच शमशेर खान ने अपना संबोधन दिया, जिसका वीडियो बाद में सामने आया।

    सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान भारत की लंबे समय से व्यक्त उस चिंता के संदर्भ में चर्चा का विषय बनते हैं जिसमें सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन मिलने की बात कही जाती रही है। हालांकि किसी भी वीडियो या दावे की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।

    जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं और सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी भी बढ़ाई गई है। पिछले कुछ वर्षों में कई आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो और सार्वजनिक बयान सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत भी बन सकते हैं। यदि इनमें किए गए दावों की पुष्टि होती है तो यह सीमा पार आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं। फिलहाल इस वीडियो और उसमें किए गए दावों को लेकर संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर स्थिति का आकलन कर रही हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील का अभूतपूर्व हंगामा, जजों के सामने अभद्र व्यवहार के बाद सुरक्षा कर्मियों ने कोर्टरूम से बाहर निकाला

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील का अभूतपूर्व हंगामा, जजों के सामने अभद्र व्यवहार के बाद सुरक्षा कर्मियों ने कोर्टरूम से बाहर निकाला


    नई दिल्ली ।
    सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक वकील ने अदालत की कार्यवाही के बीच अभद्र व्यवहार करते हुए न्यायिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया। मामले की सुनवाई जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ कर रही थी। इसी दौरान वकील ने न्यायालय के प्रति अनुचित आचरण किया, जिससे कुछ समय के लिए कोर्टरूम का वातावरण तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले जाया गया।

    घटना उस समय हुई जब संबंधित याचिका पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत के समक्ष असामान्य तरीके से अपनी बात रखनी शुरू की। न्यायाधीशों के साथ संवाद के दौरान उसने ऐसी भाषा और व्यवहार अपनाया जिसे अदालत की गरिमा के विपरीत माना गया। इसके बाद उसने अपने पास मौजूद केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए, जिससे कुछ देर के लिए कोर्टरूम में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। अदालत में मौजूद अधिवक्ता और अन्य लोग इस घटनाक्रम से हैरान रह गए।

    सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को न्यायालय कक्ष से बाहर निकाल दिया। घटना के बाद पीठ ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक तनाव की स्थिति में प्रतीत होता है तथा उसके प्रति सहानुभूति रखी जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह तत्काल उसके खिलाफ अलग से कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करना चाहती। हालांकि संबंधित याचिका पर विचार करने के बाद पीठ ने कहा कि विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं पाया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर न्यायालयों में पेशेवर आचरण और अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। कानूनी व्यवस्था में अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अदालत की गरिमा, अनुशासन और पेशेवर मानकों का पूरी तरह पालन करें। यदि कोई अधिवक्ता इन मानकों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित बार काउंसिल प्रारंभिक जांच कर मामले को अनुशासनात्मक समिति के समक्ष भेज सकती है।

    यदि जांच में पेशेवर कदाचार सिद्ध होता है तो संबंधित अधिवक्ता को चेतावनी, निश्चित अवधि तक वकालत पर रोक या गंभीर मामलों में बार काउंसिल की सूची से नाम हटाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि किसी भी कार्रवाई का निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही लिया जाता है।

    सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अदालत की कार्यवाही के दौरान इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत दुर्लभ मानी जाती हैं। अतीत में भी कुछ मामलों में अदालत की अवमानना या अनुचित व्यवहार के आरोप सामने आए हैं, जिनमें न्यायपालिका ने कानून के अनुरूप कार्रवाई की है। ताजा घटना ने न्यायालयों में अनुशासन, पेशेवर नैतिकता और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।

  • दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब

    दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब


    कानपुर कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) के आठवें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को शिक्षा और उपलब्धियों के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। समारोह की अध्यक्षता करने पहुंचीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की व्यवस्थाओं को लेकर तीखे सवाल पूछे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक साल पहले जिन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

    अध्यक्षीय संबोधन के दौरान राज्यपाल ने फाइनेंस कंट्रोलर और कुलसचिव से पूछा कि आखिर हॉस्टलों में बिजली की समस्या अब तक क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय के पास बजट की कमी है और यदि नहीं तो फिर इन सुविधाओं को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया। राज्यपाल की इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया।

    दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने एक क्लिक के जरिए सभी 996 विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिलॉकर पर जारी कीं। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि छात्र डिजिलॉकर का अपेक्षित उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार बेहतर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो उनका अधिक से अधिक इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को कम डाउनलोड के कारणों की जानकारी लेकर राजभवन में प्रस्तुत होने के निर्देश भी दिए।

    समारोह में कुल 996 छात्र-छात्राओं को 1071 डिग्रियां प्रदान की गईं। कुछ विद्यार्थियों को मेजर और माइनर पाठ्यक्रम पूरा करने के कारण दो-दो डिग्रियां भी मिलीं। विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रज्ञान वर्मा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक और एक प्रायोजित स्वर्ण पदक सहित तीन सम्मान प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें 40 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। कुल 47 मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदकों और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

    राज्यपाल ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उन्नाव की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट और शैक्षणिक सामग्री वितरित करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। समारोह में प्रस्तुति देने वाले स्कूली बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट देकर उनका उत्साह भी बढ़ाया।

    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और एफडीडीआई के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने स्वयं को HBTU का पूर्व छात्र बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आज यहां से निकलने वाले विद्यार्थी भी देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे।

    शिक्षा, उपलब्धियों और सम्मान के इस समारोह में राज्यपाल का प्रशासन को दिया गया स्पष्ट संदेश सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी संस्थानों में केवल उत्कृष्ट परिणाम ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

  • अयोध्या से विपक्ष पर सीएम योगी का तीखा हमला, हनुमानगढ़ी विवाद का जिक्र कर आस्था और विरासत के मुद्दे पर साधा निशाना

    अयोध्या से विपक्ष पर सीएम योगी का तीखा हमला, हनुमानगढ़ी विवाद का जिक्र कर आस्था और विरासत के मुद्दे पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान धार्मिक आस्था, अयोध्या के विकास और विपक्ष की नीतियों को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। 432 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 217 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह में संबोधित करते हुए उन्होंने हनुमानगढ़ी से जुड़े एक कथित पुराने विवाद का उल्लेख किया और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस पर धार्मिक आस्थाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और हनुमानगढ़ी उसकी प्रमुख धार्मिक पहचान मानी जाती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दूसरे धर्म के धार्मिक अनुष्ठान स्वीकार्य नहीं हैं, तो अयोध्या जैसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार की घटनाओं को क्यों होने दिया गया। उन्होंने अपने भाषण में इस मुद्दे को पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल से जोड़ते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर प्रश्न उठाए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास हुआ है और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। उनके अनुसार, इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण, आधुनिक परिवहन सुविधाओं और शहर के व्यापक विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। उनके अनुसार, हवाई अड्डे, सड़क संपर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से शहर की नई पहचान बनी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि पूर्व में अयोध्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति अपनाई है। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या से दिया गया यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी मुद्दे राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। मुख्यमंत्री के वक्तव्य को विपक्ष पर राजनीतिक हमला और अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल मुख्यमंत्री के इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। वहीं, अयोध्या में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और धार्मिक विरासत के संरक्षण से जुड़े सरकारी प्रयास भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

  • कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    कल्याणी इम्पेक्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, कनाडा, अमेरिका और UAE में अघोषित संपत्तियों व बैंक खातों के मिले अहम सुराग

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कल्याणी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी से जुड़े मामले में व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस कार्रवाई के दौरान विदेशों में अघोषित बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध सीमा-पार वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। फिलहाल एजेंसी इन सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।

    जांच के दौरान ईडी को ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनी के निर्यात से प्राप्त होने वाली कुछ विदेशी रकम निर्धारित समय के भीतर भारत नहीं लाई गई। एजेंसी के अनुसार, लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने के बावजूद बकाया राशि की वसूली के लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रयास नहीं किए गए। इससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका और मजबूत हुई है।

    प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निर्यात भुगतान उन विदेशी कंपनियों से प्राप्त हुए, जिनका नाम निर्यात दस्तावेजों, इनवॉइस या शिपिंग बिल में खरीदार अथवा भुगतानकर्ता के रूप में दर्ज नहीं था। ईडी का मानना है कि इस प्रकार के लेनदेन की प्रकृति और उद्देश्य की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।

    जांच एजेंसी ने अब तक कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों और संभावित निवेशों की पहचान किए जाने का दावा किया है। इन खातों और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों और संपत्तियों की जानकारी संबंधित भारतीय प्राधिकरणों के समक्ष विधिवत घोषित की गई थी या नहीं।

    तलाशी अभियान के दौरान बरामद दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि धर्मेश नरेंद्र संगानी की कनाडा में संचालित एक कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हो सकती है। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस विदेशी निवेश और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी नियामकीय संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ अघोषित संपत्तियों के संबंध में दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।

    ईडी ने तलाशी के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य सामग्री को अपने कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक और वित्तीय जांच शुरू कर दी है। एजेंसी विभिन्न देशों से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी संस्थाओं के साथ कारोबारी संबंधों का भी विश्लेषण कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जानकारी साझा करने और सहयोग लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

    फिलहाल यह जांच प्रारंभिक चरण में है और एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करेगी। मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

  • यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट

    यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून ने पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और इसकी पहली बड़ी मार प्रदेश के कई जिलों पर साफ दिखाई देने लगी है। शुक्रवार सुबह से वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, सहारनपुर, बांदा, हापुड़, बिजनौर, प्रतापगढ़ समेत करीब 30 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गई हैं, निचले क्षेत्रों में पानी घरों तक पहुंच गया है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    सहारनपुर में भारी बारिश ने बेहद संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी। कब्रिस्तान की मिट्टी बह जाने से कई पुराने शवों के अवशेष बाहर आ गए, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल बन गया। वहीं मुजफ्फरनगर में नहर ओवरफ्लो होकर टूट गई, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया और किसानों की फसलें प्रभावित होने लगीं।

    बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र में सरकारी जूनियर हाईस्कूल की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय स्कूल में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। वाराणसी और प्रतापगढ़ में गलियां जलमग्न हो गईं, जबकि प्रयागराज में जलभराव के कारण एक कार नाले में जा घुसी। स्थानीय लोगों की मदद से वाहन चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हापुड़ के कई इलाकों में दो-दो फीट तक पानी भर गया है, जबकि बांदा में बारिश का पानी घरों में घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ में पूरी रात बारिश होने के बाद सुबह भी बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खराब मौसम को देखते हुए मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद समेत 13 जिलों में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।

    बारिश से जुड़े हादसों में पिछले 48 घंटों के दौरान प्रदेश में 13 लोगों की जान जा चुकी है। संभल में सड़क दुर्घटना में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि मुजफ्फरनगर और बदायूं में कच्चे मकानों की दीवार गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों और अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हुआ मानसूनी सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच चुका है, जिसका व्यापक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 49 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है और अगले पांच दिनों तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के 69 शहरों में बारिश दर्ज की गई थी। बिजनौर के नजीबाबाद में 24 घंटे के दौरान 306 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो 1952 के बाद चौथी सबसे अधिक और जुलाई महीने की तीसरी सबसे बड़ी बारिश मानी गई है। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए प्रशासन और मौसम विभाग दोनों ही लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

  • इजरायली खुफिया दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल, डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित साजिश पर अमेरिका सतर्क

    इजरायली खुफिया दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल, डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित साजिश पर अमेरिका सतर्क

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच इजरायल की एक खुफिया रिपोर्ट ने नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका के साथ साझा की गई एक खुफिया जानकारी में दावा किया है कि ईरान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित योजना बनाई थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसके बावजूद इस रिपोर्ट ने सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियां लंबे समय से ईरान की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। इसी निगरानी के दौरान जुटाई गई जानकारी अमेरिका के साथ साझा की गई, जिसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और नीति-निर्माताओं के बीच इस मामले को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस तरह की खुफिया सूचनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीतिक नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस प्रकार के दावों को विश्वसनीय माना जाता है तो इसका असर अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित कूटनीतिक पहल पर पड़ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी संबंधित एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को अभी खुफिया इनपुट के रूप में ही देखा जा रहा है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है। जनवरी 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। उस घटना के बाद कई बार दोनों देशों के बीच तीखे बयान, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियां देखने को मिली हैं। डोनाल्ड ट्रंप भी पहले सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि उन्हें ईरान से खतरा हो सकता है, हालांकि उन्होंने ऐसे खतरों को लेकर चिंता व्यक्त नहीं की थी।

    हाल के सप्ताहों में क्षेत्र में संघर्षविराम की कोशिशों के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। विभिन्न सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान पर जोर देने की आवश्यकता भी दोहराई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी रणनीतिक समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    फिलहाल इजरायल के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र सत्यापन सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में संबंधित देशों की प्रतिक्रियाओं और आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक संवाद और संयम ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    अयोध्या । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत 13 जुलाई को इस प्रकरण से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।

    इस बीच चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां चढ़ावे में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, वहीं अब 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे नकदी की गिनती में अधिक समय लग रहा है और कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

    कर्मचारियों के मुताबिक पहले 500 रुपये के नोटों की 70 से 80 गड्डियां तैयार हो जाती थीं, जबकि अब मुश्किल से 15 गड्डियां बन पाती हैं। इसके अलावा पहले दो शिफ्टों में होने वाला काम अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट में कराया जा रहा है, जबकि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इस्तीफों के बाद बैंक के पास अब केवल 13 गणना कर्मी ही बचे हैं।

    चढ़ावा विवाद का असर अयोध्या से बाहर भी देखने को मिला है। नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में इस तरह की घटना न पहले कभी सुनी और न देखी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महंत ने बताया कि सावन माह में जनकपुर से 5 से 7 श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल अयोध्या पहुंचकर दर्शन करेगा और अपनी संवेदना प्रकट करेगा।

    इधर, विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा की और इंजीनियरों व ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    अब इस बहुचर्चित मामले पर सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।

  • चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी

    चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी


    मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को उनकी तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दोबारा जेल भेजने के निर्देश दिए। कोर्ट ने इस दौरान अभिनेता के आचरण को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि मामले में उनका व्यवहार “संदिग्ध” रहा है। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।

    2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिया था 5 करोड़ रुपये का कर्ज
    यह मामला वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और तय समय पर कर्ज की अदायगी नहीं हो सकी। कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।

    2018 में सुनाई गई थी सजा
    अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद अभिनेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।

    मामले से जुड़े सात अलग-अलग प्रकरणों में वर्ष 2025 के अंत तक करीब 9 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई थी, जिसमें प्रत्येक मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था।

    अदालत ने वादे पूरे नहीं करने पर जताई नाराजगी
    जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए राजपाल यादव को बकाया राशि चुकाने का अवसर दिया था। हालांकि अदालत के अनुसार अभिनेता बार-बार अपने आश्वासन पूरे करने में असफल रहे। इसी कारण 2 फरवरी को उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया था और अब अदालत ने उनकी सजा को भी बरकरार रखा है।

    बयानों में विरोधाभास पर कोर्ट की टिप्पणी
    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों और पहले दिए गए आश्वासनों में विरोधाभास है। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उसके सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और पहले दी गई अंडरटेकिंग से अलग बातें कही जा रही हैं।

    शिकायतकर्ता कंपनी का पक्ष
    शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं और अब वे अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

    समझौते की कोशिश भी नहीं हुई सफल
    मामले के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर अंतिम समझौते के लिए भी तैयार हो गई थी, लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

    अभिनेता ने अदालत को बताया कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यहां तक कि संपत्ति भी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी राशि चुका चुके हैं। अदालत ने 3 करोड़ रुपये के भुगतान का एक संभावित तरीका भी सुझाया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह केवल न्यायिक सुझाव है, अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष सहमति तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    फरवरी 2026 में मिली थी अंतरिम जमानत
    चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण के बाद राजपाल यादव 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजे गए थे। बाद में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने 1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। अब अदालत ने उनकी तीन महीने की सजा को बरकरार रखते हुए दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है।

  • चौथे टी20 में टीम इंडिया पस्त, साल्ट और ब्रूक ने 146 रन जोड़कर इंग्लैंड को दिलाई ऐतिहासिक जीत

    चौथे टी20 में टीम इंडिया पस्त, साल्ट और ब्रूक ने 146 रन जोड़कर इंग्लैंड को दिलाई ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त के साथ सीरीज अपने नाम कर ली। बारिश के कारण पहला मुकाबला रद्द होने के बाद इंग्लैंड ने लगातार तीन मैच जीतकर भारत के खिलाफ ऐतिहासिक टी20 द्विपक्षीय सीरीज जीत दर्ज की।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। महज 48 रन तक तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने पहले शिवम दुबे के साथ 53 रन, फिर तिलक वर्मा के साथ 29 रन और वॉशिंगटन सुंदर के साथ 27 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

    अय्यर ने 49 गेंदों में 80 रन की शानदार नाबाद पारी खेली, जिसमें 4 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा कोई भी भारतीय बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। शिवम दुबे ने 22, तिलक वर्मा ने 11 और वॉशिंगटन सुंदर ने 5 रन बनाए। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन बनाए।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने दो-दो विकेट लिए, जबकि आदिल रशीद और विल जैक्स को एक-एक सफलता मिली।

    159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड को शुरुआती झटका जोस बटलर के रूप में लगा, जो सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कप्तान हैरी ब्रूक और फिल साल्ट ने भारतीय गेंदबाजों पर पूरी तरह दबदबा बना लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए सिर्फ 68 गेंदों में नाबाद 146 रन की विस्फोटक साझेदारी की। हैरी ब्रूक ने 35 गेंदों पर 79 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वहीं फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों की शानदार बल्लेबाजी के दम पर इंग्लैंड ने लक्ष्य सिर्फ 13.5 ओवर में हासिल कर लिया।

    भारत की ओर से एकमात्र विकेट अर्शदीप सिंह ने लिया। हालांकि बाकी गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर कोई दबाव नहीं बना सके। अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथैम्पटन में खेला जाएगा, जहां भारत क्लीन स्वीप से बचने के इरादे से मैदान में उतरेगा।