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  • ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत

    ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत


    नई दिल्ली। ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खेलो इंडिया संवाद के दौरान देश के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद करते हुए भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है और भारत को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना जरूरी है। पीएम मोदी ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का जिक्र करते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया और कहा कि उनका जीवन देश की खेल परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि जो खेले वो खिले। उनके मुताबिक मैदान पर खेलने से केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं बढ़ती बल्कि उसके परिवार का गौरव बढ़ता है और उसके स्कूल कॉलेज जिले तथा पूरे राज्य की पहचान मजबूत होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि देश को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से ऐसी प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी जो आने वाले वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए बड़े टैलेंट हंट अभियान की बात कही। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की खेल में रुचि जानना नहीं बल्कि यह पहचानना भी होगा कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से बेहतर है। इसके आधार पर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    उन्होंने भारत की ओलंपिक भागीदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीएम मोदी के अनुसार भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता जिनमें दुनिया के दूसरे देश पदक जीत रहे हैं। ऐसे में देश को सर्फिंग स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने तक सहयोग मिले। उन्होंने खेलों को फिटनेस और बेहतर जीवनशैली से भी जोड़ा और कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक खेल अब केवल शौक नहीं बल्कि करियर का भी मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने शीतल देवी अवनी लेखरा सुमित अंतिल और नितेश कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेल हमें जीत के साथ हार के बाद दोबारा उठना भी सिखाता है और यही खेल भावना जीवन को मजबूत बनाती है। अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम करने और मैदान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है। उनके मुताबिक खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की असली शक्ति है।

  • 5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा

    5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा


    नई दिल्ली। विवेकानंद शिला स्मारक और विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन से देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके लंबे योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ए. बालकृष्णन ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने विवेकानंद केंद्र के शुरुआती जीवनव्रतियों में शामिल होकर देश के अलग अलग हिस्सों में लगातार काम किया और विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले ए. बालकृष्णन के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार उनके कार्यकर्ताओं और बालकृष्णन से जुड़े सभी प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    ए. बालकृष्णन का जीवन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। विवेकानंद केंद्र से जुड़े उनके कार्यकाल में शिक्षा सामाजिक गतिविधियों और संगठन निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। पूर्वोत्तर भारत में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि उनके निधन पर देश के अलग अलग हिस्सों से नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा और खासकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को वहां के लोग और पूरा देश लंबे समय तक याद रखेगा। रिजिजू ने उन्हें सच्चा कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा भावना का प्रतीक था। उन्होंने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बालकृष्णन के निधन को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन का ध्येय बनाकर बालकृष्णन ने पांच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य समाज जागरण शिक्षा और संगठन निर्माण के लिए खुद को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन के योगदान को राष्ट्रसेवा की प्रेरक परंपरा बताया और उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी ए. बालकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सच्चा कर्मयोगी और जीवनव्रती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कन्याकुमारी से लेकर असम और पूर्वोत्तर भारत तक विवेकानंद केंद्र के काम को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी। ए. बालकृष्णन का निधन समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसी कमी छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनके जीवन और कार्यों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित सेवा की लंबी यात्रा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख

    अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख


    भोपाल । भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने करीब 96 दिनों तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए अपने नियंत्रण में रखा और उन्हें करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। कभी खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया तो कभी चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर दंपती को डराया गया। आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति सीज होने का भय दिखाकर उनसे 22 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम देने के बाद भी जब ठगों ने उन्हें डिजिटल निगरानी से मुक्त नहीं किया तो दंपती को शक हुआ और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस के अनुसार कृष्णा कॉम्प्लेक्स गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। परिवार के साथ फरवरी में शिवरात्रि मनाने के लिए वे आंध्र प्रदेश गए थे। इसी दौरान 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया और दावा किया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें बताया गया कि दिल्ली केनरा बैंक से जुड़े एक खाते के जरिए नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है और उसमें उनका नाम सामने आया है।

    इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू कर दी। दंपती को निर्देश दिया गया कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे और घर से बाहर भी नहीं निकलेंगे। 21 मई को एक महिला ने खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताते हुए बैंक खातों और दूसरी वित्तीय जानकारी मांगी। अगले दिन दंपती की वीडियो कॉल पर एक कथित जज से बात कराई गई। इस फर्जी जज ने उनके आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी दिखाकर कार्रवाई का डर पैदा किया और उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं।

    9 जून को कथित जज ने वीडियो कॉल पर दंपती को संपत्ति सीज करने की धमकी दी। इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने उन्हें भोपाल लौटने के लिए कहा। ठगों ने मामले को खत्म करने के नाम पर एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने का दबाव बनाया। डर के कारण दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से भोपाल के लिए रवाना हुए और 11 जून को यहां पहुंचे। अगले ही दिन उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए जुटाए।

    आरोपियों के निर्देश पर दंपती ने पांच अलग-अलग बार रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की। ठगों ने संपर्क बनाए रखने के लिए सात अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी दंपती को राहत नहीं मिली। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से बात नहीं करने का दबाव बनाया जाता रहा। यह सिलसिला 23 अगस्त तक चलता रहा। यानी 19 मई से 23 अगस्त तक करीब 96 दिनों तक बुजुर्ग दंपती साइबर ठगों के डर और दबाव में रहे।

    बाद में दंपती को पूरे मामले पर संदेह हुआ और उन्होंने जब संबंधित जानकारी की जांच कराई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया आदेश भी फर्जी था। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। 27 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज की गई और केस डायरी कोलार थाने भेजी गई। पुलिस अब सातों WhatsApp नंबरों पांच बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन वीडियो कॉल और आरोपियों की पहचान से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर डर पैदा कर पैसे मांगना साइबर ठगी का बड़ा तरीका बन चुका है। किसी भी जांच या गिरफ्तारी के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगने वालों पर भरोसा करने के बजाय तत्काल संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना जरूरी है।

  • बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर

    बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर


    भोपाल । भोपाल में इस बार बारिश ने शहर की सड़कों की हालत पूरी तरह बिगाड़ दी है। राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों की अंदरूनी गलियों तक जगह जगह बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो गया है। बारिश होते ही यही गड्ढे पानी से भरकर छोटे तालाब का रूप ले लेते हैं और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐशबाग में तो थाने के सामने करीब 80 मीटर तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। इन रास्तों से गुजरते समय वाहन हिचकोले खाते हैं और ऐसा लगता है जैसे सड़कें डांसिंग स्पॉट बन गई हों।

    ऐशबाग थाने के सामने सड़क पर जगह जगह गड्ढे होने से स्थानीय लोगों को रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में किसी तरह वाहन निकल जाते हैं लेकिन बारिश के दौरान मुश्किल कई गुना बढ़ जाती है। पानी भर जाने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि अचानक गड्ढे में पहिया जाने से बाइक या स्कूटी फिसलने और पलटने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार दोपहिया वाहन चालक यहां दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।

    सड़क की बदहाली का असर केवल निजी वाहन चालकों पर ही नहीं बल्कि ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों पर भी पड़ रहा है। ऑटो चालकों का कहना है कि बारिश के दौरान पानी और गड्ढों के बीच वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। यात्रियों को भी सफर के दौरान झटकों और दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या नई नहीं है और लंबे समय से मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।

    भोपाल के पॉश और व्यस्त इलाकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। अटल पथ लिंक रोड नंबर 2 एमपी नगर न्यू मार्केट और रोशनपुरा जैसे प्रमुख इलाकों में भी कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को यह पता लगाना मुश्किल होता है कि आगे सड़क कितनी गहरी है। बारिश थमने के बाद यही सड़कें धूल उड़ाती नजर आती हैं जिससे राहगीरों की परेशानी और बढ़ जाती है।

    रायसेन रोड पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सुभाषनगर से रत्नागिरी चौराहे तक मेट्रो का काम चलने के कारण सड़क के दोनों ओर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। बड़ी संख्या में वाहन और लोग इस मार्ग से रोज गुजरते हैं लेकिन खराब सड़क के कारण उन्हें बेहद धीमी रफ्तार से सफर करना पड़ रहा है। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि अंधेरे में पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राजधानी की सड़कों पर बढ़ते गड्ढे केवल परेशानी नहीं बल्कि सुरक्षा का गंभीर मुद्दा हैं। लोगों ने संबंधित विभागों से बारिश के दौरान अस्थायी तौर पर गड्ढे भरने के साथ ही सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। सवाल यह है कि हर साल बारिश के बाद सामने आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा। फिलहाल भोपाल की सड़कों पर सफर करने वालों को गड्ढों से बचते हुए ही अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।

  • जन्मदिन की पार्टी में तलवारबाजी पड़ी भारी, वीडियो वायरल होने के बाद FIR; कोलार रोड में युवक की हरकत से पुलिस अलर्ट

    जन्मदिन की पार्टी में तलवारबाजी पड़ी भारी, वीडियो वायरल होने के बाद FIR; कोलार रोड में युवक की हरकत से पुलिस अलर्ट


    भोपाल । भोपाल के कोलार रोड इलाके में जन्मदिन मनाने के दौरान तलवार लहराकर केक काटने का मामला सामने आया है। जन्मदिन की खुशी में की गई इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। आरोपी की पहचान सर्वधर्म सी सेक्टर कोलार रोड निवासी विशाल पाठक के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक विशाल ने 21 अगस्त को किड्स कैंपस स्कूल के पास अपना जन्मदिन मनाया था। इसी दौरान उसने तलवार हाथ में लेकर केक काटा और इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उसकी जांच शुरू की और अब आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

    कोलार रोड पुलिस के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर इस तरह तलवार लहराने से आसपास मौजूद लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा हो सकता है। पुलिस ने वायरल वीडियो को जांच का आधार बनाया और घटनाक्रम की पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि जन्मदिन के दौरान इस्तेमाल की गई तलवार आरोपी के पास कहां से आई थी और उसे रखने या इस्तेमाल करने को लेकर उसके पास कोई वैध अनुमति थी या नहीं।

    वायरल वीडियो में युवक तलवार हाथ में लेकर जन्मदिन का केक काटता नजर आ रहा है। उसके आसपास कुछ अन्य लोग भी मौजूद दिखाई देते हैं। पुलिस अब वीडियो में नजर आने वाले लोगों और पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि कार्यक्रम के दौरान तलवार किस उद्देश्य से लाई गई थी और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने भी इस गतिविधि में उसका साथ दिया था।

    मामले को लेकर एक और बात चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक आरोपी अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर खुद को बीजेपी कार्यकर्ता बताता है। हालांकि किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना या सोशल मीडिया पर खुद को किसी संगठन का कार्यकर्ता बताना कानून से ऊपर नहीं करता। पुलिस की कार्रवाई वायरल वीडियो में सामने आई गतिविधि और उसके आधार पर की गई जांच पर केंद्रित है। अब पुलिस आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और वायरल वीडियो की भी पड़ताल कर रही है ताकि पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

    जन्मदिन जैसे निजी समारोह में उत्साह और जश्न मनाना आम बात है लेकिन सार्वजनिक स्थान पर हथियार का प्रदर्शन कानून व्यवस्था के लिहाज से गंभीर माना जा सकता है। भोपाल पुलिस की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और लोकप्रियता के लिए युवा किस तरह जोखिम भरे वीडियो बनाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। इस मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि तलवार कहां से आई थी और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी। फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुई एफआईआर ने जन्मदिन के जश्न को कानूनी कार्रवाई के घेरे में ला दिया है।

  • दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता

    दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता


    नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व कप्तान डीन एल्गर ने प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। करीब डेढ़ दशक तक क्रिकेट के मैदान पर अपनी जुझारू बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले एल्गर 2026 काउंटी चैम्पियनशिप सीजन के समाप्त होने के बाद क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदाई ले लेंगे। 39 वर्षीय इस अनुभवी बल्लेबाज ने अपने फैसले के पीछे परिवार को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका मानना है कि अब क्रिकेट के लंबे सफर को विराम देने और जिंदगी के अगले अध्याय की ओर बढ़ने का सही समय आ गया है। एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में जो योगदान दिया उसे वहां की क्रिकेट विरासत में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    डीन एल्गर की पहचान एक ऐसे टेस्ट बल्लेबाज के रूप में रही जिसने मुश्किल परिस्थितियों में डटकर मुकाबला किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए 86 टेस्ट मुकाबले खेले और 35.92 की औसत से 5347 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 23 अर्धशतक निकले। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 199 रन रहा जो उन्होंने 2017 में बांग्लादेश के खिलाफ बनाया था। एल्गर की बल्लेबाजी में आक्रामकता से ज्यादा धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता नजर आती थी। वह नई गेंद के सामने घंटों टिककर बल्लेबाजी करने और विपक्षी गेंदबाजों को थकाने के लिए जाने जाते थे। यही वजह रही कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका के सबसे भरोसेमंद टेस्ट ओपनरों में गिना गया।

    टेस्ट क्रिकेट के अलावा एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए 8 वनडे मुकाबले भी खेले जिसमें उनके नाम 104 रन दर्ज हैं। उन्होंने 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और करीब 12 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट टीम के अहम सदस्य बने रहे। 2024 की शुरुआत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। भारत के खिलाफ केपटाउन में खेला गया टेस्ट उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला बना। इस मैच में चोटिल टेम्बा बावुमा की गैरमौजूदगी में उन्हें दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी भी करनी पड़ी थी। संयोग देखिए कि अपने विदाई टेस्ट को उन्होंने यादगार भी बना दिया। एल्गर ने शानदार 185 रनों की पारी खेली और दक्षिण अफ्रीका को मुकाबले में मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। मेजबान टीम ने वह मुकाबला पारी से जीता और सीरीज 1-1 से बराबर करने में कामयाब रही।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई के बाद भी एल्गर का बल्ला रुका नहीं। उन्होंने इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट को अपनी दूसरी पारी के तौर पर चुना। टेस्ट क्रिकेट के सीमित होते शेड्यूल को देखते हुए उन्होंने एसेक्स का रुख किया जहां उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली। वह टीम में दिग्गज एलेस्टेयर कुक की जगह भरने पहुंचे थे। 2024 में एसेक्स से जुड़ते ही एल्गर ने शानदार प्रदर्शन किया और काउंटी चैम्पियनशिप में 1000 से ज्यादा रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्हें क्लब का बैटर ऑफ द ईयर भी चुना गया। टी20 ब्लास्ट में भी उन्होंने 300 से ज्यादा रन बनाए। इससे पहले वह समरसेट और सरे के लिए भी काउंटी क्रिकेट खेल चुके थे।

    अब 2026 सीजन उनके प्रोफेशनल क्रिकेट करियर का अंतिम अध्याय होगा। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की इच्छा के साथ एल्गर ने मैदान से विदाई का फैसला किया है। उनके करियर को सिर्फ आंकड़ों से नहीं बल्कि उस जज्बे से भी याद किया जाएगा जिसके साथ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। दक्षिण अफ्रीका को एक भरोसेमंद ओपनर और अनुभवी नेतृत्व देने वाले एल्गर अब जल्द ही क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। उनका आखिरी सीजन उनके शानदार और संघर्षपूर्ण क्रिकेट सफर को एक भावुक विदाई देने का मौका होगा।

  • दिल्ली में मॉडल की सनसनीखेज हत्या से हड़कंप, जिम ट्रेनर पर गंभीर शक; CCTV खंगाल रही पुलिस

    दिल्ली में मॉडल की सनसनीखेज हत्या से हड़कंप, जिम ट्रेनर पर गंभीर शक; CCTV खंगाल रही पुलिस


    नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में एक युवती की घर में घुसकर हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतका की पहचान मुस्कान के रूप में हुई है जो पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम मॉडलिंग भी करती थी। बताया जा रहा है कि वारदात के समय मुस्कान घर में अकेली थी तभी एक हमलावर उसके घर में दाखिल हुआ और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवती को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शुरुआती जांच और परिवार के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर एक जिम ट्रेनर इमरान पर मुख्य रूप से शक जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मुस्कान जिस जिम में जाती थी वहां इमरान ट्रेनर के तौर पर काम करता था और वह युवती को पहले से जानता था। परिवार और उसके दोस्तों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि इमरान काफी समय से मुस्कान को परेशान कर रहा था। हालांकि हत्या की असली वजह क्या थी और वारदात के पीछे आरोपी का मकसद क्या था इसकी पुष्टि पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    मुस्कान के भाई आकाश ने पुलिस और परिवार के लोगों को बताया कि इमरान ने उसकी बहन पर चाकू से हमला किया। परिवार के करीबियों के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि CCTV फुटेज में संदिग्ध को देखा गया है और मुस्कान के भाई ने भी उसकी पहचान इमरान के तौर पर की है। पुलिस अब इसी CCTV फुटेज और दूसरे सुरागों की मदद से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    मृतका के दोस्त अमन ने भी घटना को लेकर कई अहम बातें बताईं। उसके मुताबिक मुस्कान तीन बहनों में सबसे छोटी थी और उसका कोई विवाह नहीं हुआ था। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोगों ने उसे तत्काल घर पहुंचने के लिए फोन किया। जब वह वहां पहुंचा तब तक एंबुलेंस आ चुकी थी और मुस्कान को अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसके बाद वह भी अस्पताल पहुंचा लेकिन युवती की जान नहीं बचाई जा सकी।

    दोस्त ने यह भी दावा किया कि इमरान काफी समय से मुस्कान के पीछे पड़ा हुआ था और उसे परेशान करता था। उसके मुताबिक इमरान पहले भी इस तरह की हरकत कर चुका था। इसी वजह से वारदात के बाद परिवार और परिचितों का शक सबसे पहले उसी पर गया। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि आरोपी करीब शाम 5 बजकर 40 मिनट के आसपास मुस्कान के घर में दाखिल हुआ था। पुलिस अब आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है ताकि आरोपी के आने और वारदात के बाद भागने की दिशा का पता लगाया जा सके। साथ ही पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी और मुस्कान के बीच किस तरह का संबंध था और आखिर किस वजह से उसने इतना बड़ा कदम उठाया।

    इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस की जांच में CCTV फुटेज के साथ परिवार और दोस्तों के बयान भी अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस आरोपी को कब तक गिरफ्तार करती है और पूछताछ में हत्या की असली वजह क्या सामने आती है।

  • यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?

    यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?


    नई दिल्ली। कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार यश की फिल्म Toxic को लेकर पिछले चार साल से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई थी। KGF जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद यश की अगली फिल्म से उम्मीदें स्वाभाविक तौर पर बहुत ज्यादा थीं। लंबे इंतजार के बाद जब Toxic सिनेमाघरों में पहुंची तो दर्शक यश के नए अंदाज और एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे। हालांकि फिल्म देखने के बाद सामने आई राय उम्मीदों से काफी अलग नजर आती है। फिल्म में यश की परफॉर्मेंस दमदार है और तकनीकी स्तर पर भी Toxic कई जगह प्रभावित करती है लेकिन कमजोर राइटिंग और धीमी कहानी फिल्म के सबसे बड़े कमजोर पक्ष बनकर सामने आते हैं।

    करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी Toxic से यह उम्मीद की जा सकती है कि कहानी को स्थापित करने में थोड़ा समय लगेगा। फिल्म की शुरुआत भी इसी अंदाज में होती है और दर्शक धैर्य के साथ कहानी के खुलने का इंतजार करता है। समस्या तब शुरू होती है जब आधी फिल्म गुजरने के बावजूद कहानी ऐसा मजबूत मोड़ नहीं ले पाती जो दर्शकों को पूरी तरह बांध सके। इंटरवल के आसपास एक बड़ा सीन जरूर आता है लेकिन वह भी वैसा असर नहीं छोड़ता जिसकी उम्मीद यश जैसे बड़े स्टार की फिल्म से की जाती है। पूरी फिल्म के दौरान यही उम्मीद बनी रहती है कि अब कहानी रफ्तार पकड़ेगी और कोई बड़ा सरप्राइज मिलेगा लेकिन कई मौकों पर यह इंतजार निराशा में बदल जाता है।

    Toxic की सबसे बड़ी समस्या इसकी राइटिंग बताई जा सकती है। यश को एक बेहद प्रभावशाली और खतरनाक किरदार में पेश करने की कोशिश की गई है लेकिन इस कोशिश में कहानी और स्क्रीनप्ले पीछे छूटते नजर आते हैं। कई डायलॉग जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होते हैं और किरदारों के बीच संवाद भी कई जगह स्वाभाविक नहीं लगते। यश को देखकर लगातार Rocky Bhai की याद आती है और फिल्म का नया किरदार अपनी अलग पहचान बनाने के बजाय उसी छवि के आसपास घूमता हुआ दिखाई देता है। यही वजह है कि दर्शक किरदार से भावनात्मक रूप से जुड़ने में परेशानी महसूस कर सकता है।

    हालांकि अभिनय के मोर्चे पर यश बिल्कुल निराश नहीं करते। फिल्म में उनका डबल रोल है और दोनों किरदारों को उन्होंने अलग अंदाज में निभाने की पूरी कोशिश की है। खास तौर पर Raya के किरदार में उनकी एक्टिंग रेंज दिखाई देती है। यश की स्क्रीन प्रेजेंस और स्टारडम अब भी जबरदस्त है लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले उनकी मेहनत पर भारी पड़ता है। नयनतारा भी फिल्म में यश की बहन के किरदार में प्रभावी नजर आती हैं और उन्होंने अपने हिस्से की भूमिका को मजबूती से निभाया है। दोनों के बीच के भावनात्मक दृश्यों में क्षमता नजर आती है लेकिन कहानी उन्हें उस स्तर तक विकसित नहीं कर पाती जहां दर्शक पूरी तरह जुड़ सके।

    तकनीकी और विजुअल स्तर पर Toxic बेहतर अनुभव देती है। बड़े पर्दे पर फिल्म के विजुअल्स और एक्शन सीक्वेंस आकर्षक लग सकते हैं और अच्छे थिएटर में इसका प्रभाव और बढ़ सकता है। लेकिन किसी भी फिल्म की असली ताकत उसकी कहानी होती है और यहीं Toxic कमजोर पड़ती दिखाई देती है। चार साल तक जिस फिल्म का इंतजार किया गया उससे दर्शकों को सिर्फ स्टारडम और शानदार विजुअल्स नहीं बल्कि एक मजबूत कहानी की भी उम्मीद थी।

    इसलिए Toxic को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यश से नहीं बल्कि फिल्म की राइटिंग से है। यश ने अपनी तरफ से शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन कहानी उनकी क्षमता के अनुरूप नहीं बन पाई। चार साल के इंतजार के बाद दर्शक जिस दमदार सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे थे वह पूरी तरह हासिल होता नजर नहीं आता। अब यश की अगली बड़ी फिल्म Ramayana को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। सवाल यही है कि क्या वहां यश अपनी पिछली फिल्म से मिली निराशा को दूर कर पाएंगे या फिर दर्शकों को एक बार फिर उम्मीदों का इंतजार करना पड़ेगा।

  • विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा

    विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में टीम इंडिया ने पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त हासिल की लेकिन इसी बीच भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के नाम ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे शायद ही कोई गेंदबाज अपने नाम देखना चाहेगा। टेस्ट क्रिकेट में जडेजा की नो-बॉल फेंकने की समस्या एक बार फिर सामने आई और आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 से अब तक वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले स्पिन गेंदबाज बन गए हैं। जडेजा के नाम इस अवधि में कुल 88 नो-बॉल दर्ज हो चुकी हैं और इस मामले में वह बाकी स्पिनर्स से काफी आगे हैं।

    कोलंबो टेस्ट में भी भारतीय स्पिन गेंदबाजों की ओर से नो-बॉल की समस्या देखने को मिली। मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स अब तक कुल 10 नो-बॉल फेंक चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों द्वारा नो-बॉल करना वैसे भी टीम के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका मिलने के साथ विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन भी मिलते हैं। जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज से ऐसी गलती बार-बार होना टीम के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

    साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रवींद्र जडेजा 88 नो-बॉल के साथ इस अनचाही सूची में सबसे ऊपर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यानी जडेजा और दूसरे नंबर के गेंदबाज के बीच भी बड़ा अंतर है। श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जैक लीच ने इस दौरान 19 नो-बॉल फेंकी हैं। वहीं वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान के नाम 17-17 नो-बॉल दर्ज हैं।

    जडेजा के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है। ऐसे में नो-बॉल की बार बार होने वाली गलती विपक्षी टीम के खिलाफ भारत की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब एक विकेट के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है तब नो-बॉल पर मिला अतिरिक्त मौका मैच का रुख बदल सकता है।

    अगर कोलंबो टेस्ट की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 503 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हो गई और भारत को 213 रन की बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला किया। दूसरी पारी में श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए।

    हालांकि इसके बाद पासिंदु सूर्यबंदारा और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाल लिया। चौथे दिन बारिश के कारण खेल जल्दी समाप्त होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 6 विकेट पर 229 रन बना लिए थे और टीम ने भारत के खिलाफ 16 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों के लिए आखिरी विकेट हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था। इस दौरान जडेजा की नो-बॉल भी चर्चा का बड़ा कारण बनी।

    जडेजा भले ही इस रिकॉर्ड को कभी याद नहीं रखना चाहेंगे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नो-बॉल उनकी गेंदबाजी की एक बड़ी कमजोरी बन गई है। अब भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि आगे के मुकाबलों में वह इस गलती पर नियंत्रण पाएंगे और अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाएंगे।

  • साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की उल्टी गिनती शुरू, 28 अगस्त को इतने बजे से रहेगा ग्रहण; भारत में सूतक भी नहीं

    साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की उल्टी गिनती शुरू, 28 अगस्त को इतने बजे से रहेगा ग्रहण; भारत में सूतक भी नहीं


    नई दिल्ली। साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है और इस खगोलीय घटना को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। यह ग्रहण सावन मास की पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण उपच्छाया यानी पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण है और दुनिया के कुछ हिस्सों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे जुड़ा सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में सामान्य धार्मिक और शुभ कार्यों को रोकने की जरूरत नहीं होगी।

    भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त की सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर होगी। इसके बाद सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर ग्रहण का आंशिक चरण शुरू होगा। ग्रहण अपने चरम पर सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर पहुंचेगा। इसके बाद धीरे धीरे ग्रहण का प्रभाव कम होगा और दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा। यानी ग्रहण की पूरी अवधि करीब 5 घंटे 38 मिनट बताई गई है। हालांकि भारत से इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।

    इस चंद्र ग्रहण की खास बात यह भी है कि इसका असर दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से दिखाई देगा। पश्चिमी एशिया के कुछ क्षेत्रों के अलावा दक्षिण अमेरिका अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक को लेकर किसी तरह की विशेष पाबंदी नहीं होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन स्थानों पर ग्रहण दिखाई देता है वहां ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल माना जाता है। लेकिन भारत में दृश्यता नहीं होने के कारण यह नियम यहां लागू नहीं होगा।

    ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो जिन स्थानों पर यह दिखाई देता है वहां लोग इस दौरान पूजा पाठ मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करने जैसी गतिविधियां करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र चंद्र देव के मंत्र हनुमान चालीसा सुंदरकांड और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने की परंपरा भी बताई जाती है। हालांकि इन उपायों का संबंध धार्मिक आस्था से है और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता है।

    ग्रहण से पहले भोजन पानी और दूध में तुलसी की पत्तियां रखने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है। यह भी धार्मिक मान्यता है जिसे व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार अपना सकता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने घर की साफ सफाई करने और पूजा स्थल को व्यवस्थित करने की परंपरा बताई गई है।

    इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। चंद्र ग्रहण के कारण लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या राखी बांधने पर इसका कोई असर पड़ेगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने और सूतक मान्य नहीं होने के कारण रक्षाबंधन के आयोजन पर किसी विशेष रोक की बात नहीं है। हालांकि राखी बांधने और पूजा के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ समय को देखना बेहतर रहेगा। इस तरह 28 अगस्त का दिन खगोलीय घटना और भाई बहन के प्रेम के पर्व दोनों के लिहाज से खास रहने वाला है।