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  • यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट

    यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून ने पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और इसकी पहली बड़ी मार प्रदेश के कई जिलों पर साफ दिखाई देने लगी है। शुक्रवार सुबह से वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, सहारनपुर, बांदा, हापुड़, बिजनौर, प्रतापगढ़ समेत करीब 30 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गई हैं, निचले क्षेत्रों में पानी घरों तक पहुंच गया है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    सहारनपुर में भारी बारिश ने बेहद संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी। कब्रिस्तान की मिट्टी बह जाने से कई पुराने शवों के अवशेष बाहर आ गए, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल बन गया। वहीं मुजफ्फरनगर में नहर ओवरफ्लो होकर टूट गई, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया और किसानों की फसलें प्रभावित होने लगीं।

    बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र में सरकारी जूनियर हाईस्कूल की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय स्कूल में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। वाराणसी और प्रतापगढ़ में गलियां जलमग्न हो गईं, जबकि प्रयागराज में जलभराव के कारण एक कार नाले में जा घुसी। स्थानीय लोगों की मदद से वाहन चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हापुड़ के कई इलाकों में दो-दो फीट तक पानी भर गया है, जबकि बांदा में बारिश का पानी घरों में घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ में पूरी रात बारिश होने के बाद सुबह भी बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खराब मौसम को देखते हुए मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद समेत 13 जिलों में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।

    बारिश से जुड़े हादसों में पिछले 48 घंटों के दौरान प्रदेश में 13 लोगों की जान जा चुकी है। संभल में सड़क दुर्घटना में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि मुजफ्फरनगर और बदायूं में कच्चे मकानों की दीवार गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों और अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हुआ मानसूनी सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच चुका है, जिसका व्यापक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 49 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है और अगले पांच दिनों तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के 69 शहरों में बारिश दर्ज की गई थी। बिजनौर के नजीबाबाद में 24 घंटे के दौरान 306 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो 1952 के बाद चौथी सबसे अधिक और जुलाई महीने की तीसरी सबसे बड़ी बारिश मानी गई है। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए प्रशासन और मौसम विभाग दोनों ही लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

  • इजरायली खुफिया दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल, डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित साजिश पर अमेरिका सतर्क

    इजरायली खुफिया दावे से बढ़ी वैश्विक हलचल, डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित साजिश पर अमेरिका सतर्क

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच इजरायल की एक खुफिया रिपोर्ट ने नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका के साथ साझा की गई एक खुफिया जानकारी में दावा किया है कि ईरान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की कथित योजना बनाई थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसके बावजूद इस रिपोर्ट ने सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियां लंबे समय से ईरान की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। इसी निगरानी के दौरान जुटाई गई जानकारी अमेरिका के साथ साझा की गई, जिसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और नीति-निर्माताओं के बीच इस मामले को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस तरह की खुफिया सूचनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीतिक नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस प्रकार के दावों को विश्वसनीय माना जाता है तो इसका असर अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित कूटनीतिक पहल पर पड़ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी संबंधित एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को अभी खुफिया इनपुट के रूप में ही देखा जा रहा है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है। जनवरी 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। उस घटना के बाद कई बार दोनों देशों के बीच तीखे बयान, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियां देखने को मिली हैं। डोनाल्ड ट्रंप भी पहले सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि उन्हें ईरान से खतरा हो सकता है, हालांकि उन्होंने ऐसे खतरों को लेकर चिंता व्यक्त नहीं की थी।

    हाल के सप्ताहों में क्षेत्र में संघर्षविराम की कोशिशों के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। विभिन्न सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान पर जोर देने की आवश्यकता भी दोहराई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी रणनीतिक समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    फिलहाल इजरायल के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र सत्यापन सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में संबंधित देशों की प्रतिक्रियाओं और आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक संवाद और संयम ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    अयोध्या । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत 13 जुलाई को इस प्रकरण से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।

    इस बीच चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां चढ़ावे में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, वहीं अब 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे नकदी की गिनती में अधिक समय लग रहा है और कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

    कर्मचारियों के मुताबिक पहले 500 रुपये के नोटों की 70 से 80 गड्डियां तैयार हो जाती थीं, जबकि अब मुश्किल से 15 गड्डियां बन पाती हैं। इसके अलावा पहले दो शिफ्टों में होने वाला काम अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट में कराया जा रहा है, जबकि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इस्तीफों के बाद बैंक के पास अब केवल 13 गणना कर्मी ही बचे हैं।

    चढ़ावा विवाद का असर अयोध्या से बाहर भी देखने को मिला है। नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में इस तरह की घटना न पहले कभी सुनी और न देखी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महंत ने बताया कि सावन माह में जनकपुर से 5 से 7 श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल अयोध्या पहुंचकर दर्शन करेगा और अपनी संवेदना प्रकट करेगा।

    इधर, विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा की और इंजीनियरों व ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    अब इस बहुचर्चित मामले पर सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।

  • चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी

    चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी


    मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को उनकी तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दोबारा जेल भेजने के निर्देश दिए। कोर्ट ने इस दौरान अभिनेता के आचरण को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि मामले में उनका व्यवहार “संदिग्ध” रहा है। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।

    2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिया था 5 करोड़ रुपये का कर्ज
    यह मामला वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और तय समय पर कर्ज की अदायगी नहीं हो सकी। कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।

    2018 में सुनाई गई थी सजा
    अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद अभिनेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।

    मामले से जुड़े सात अलग-अलग प्रकरणों में वर्ष 2025 के अंत तक करीब 9 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई थी, जिसमें प्रत्येक मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था।

    अदालत ने वादे पूरे नहीं करने पर जताई नाराजगी
    जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए राजपाल यादव को बकाया राशि चुकाने का अवसर दिया था। हालांकि अदालत के अनुसार अभिनेता बार-बार अपने आश्वासन पूरे करने में असफल रहे। इसी कारण 2 फरवरी को उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया था और अब अदालत ने उनकी सजा को भी बरकरार रखा है।

    बयानों में विरोधाभास पर कोर्ट की टिप्पणी
    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों और पहले दिए गए आश्वासनों में विरोधाभास है। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उसके सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और पहले दी गई अंडरटेकिंग से अलग बातें कही जा रही हैं।

    शिकायतकर्ता कंपनी का पक्ष
    शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं और अब वे अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

    समझौते की कोशिश भी नहीं हुई सफल
    मामले के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर अंतिम समझौते के लिए भी तैयार हो गई थी, लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

    अभिनेता ने अदालत को बताया कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यहां तक कि संपत्ति भी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी राशि चुका चुके हैं। अदालत ने 3 करोड़ रुपये के भुगतान का एक संभावित तरीका भी सुझाया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह केवल न्यायिक सुझाव है, अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष सहमति तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    फरवरी 2026 में मिली थी अंतरिम जमानत
    चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण के बाद राजपाल यादव 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजे गए थे। बाद में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने 1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। अब अदालत ने उनकी तीन महीने की सजा को बरकरार रखते हुए दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है।

  • चौथे टी20 में टीम इंडिया पस्त, साल्ट और ब्रूक ने 146 रन जोड़कर इंग्लैंड को दिलाई ऐतिहासिक जीत

    चौथे टी20 में टीम इंडिया पस्त, साल्ट और ब्रूक ने 146 रन जोड़कर इंग्लैंड को दिलाई ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त के साथ सीरीज अपने नाम कर ली। बारिश के कारण पहला मुकाबला रद्द होने के बाद इंग्लैंड ने लगातार तीन मैच जीतकर भारत के खिलाफ ऐतिहासिक टी20 द्विपक्षीय सीरीज जीत दर्ज की।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। महज 48 रन तक तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने पहले शिवम दुबे के साथ 53 रन, फिर तिलक वर्मा के साथ 29 रन और वॉशिंगटन सुंदर के साथ 27 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

    अय्यर ने 49 गेंदों में 80 रन की शानदार नाबाद पारी खेली, जिसमें 4 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा कोई भी भारतीय बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। शिवम दुबे ने 22, तिलक वर्मा ने 11 और वॉशिंगटन सुंदर ने 5 रन बनाए। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन बनाए।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने दो-दो विकेट लिए, जबकि आदिल रशीद और विल जैक्स को एक-एक सफलता मिली।

    159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड को शुरुआती झटका जोस बटलर के रूप में लगा, जो सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कप्तान हैरी ब्रूक और फिल साल्ट ने भारतीय गेंदबाजों पर पूरी तरह दबदबा बना लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए सिर्फ 68 गेंदों में नाबाद 146 रन की विस्फोटक साझेदारी की। हैरी ब्रूक ने 35 गेंदों पर 79 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वहीं फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों की शानदार बल्लेबाजी के दम पर इंग्लैंड ने लक्ष्य सिर्फ 13.5 ओवर में हासिल कर लिया।

    भारत की ओर से एकमात्र विकेट अर्शदीप सिंह ने लिया। हालांकि बाकी गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर कोई दबाव नहीं बना सके। अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथैम्पटन में खेला जाएगा, जहां भारत क्लीन स्वीप से बचने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • टीम इंडिया फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप, इंग्लैंड ने 9 विकेट से रौंदकर सीरीज पर किया कब्जा

    टीम इंडिया फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप, इंग्लैंड ने 9 विकेट से रौंदकर सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने इतिहास रचते हुए पहली बार भारत के खिलाफ दो या उससे अधिक मैचों वाली टी20 द्विपक्षीय सीरीज अपने नाम कर ली।

    इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी। वहीं टीम इंडिया को आयरलैंड के बाद लगातार दूसरी टी20 सीरीज में हार झेलनी पड़ी। इससे पहले 2019 में भारत लगातार दो टी20 सीरीज न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से हारा था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर सिर्फ 158 रन ही बना सकी। कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार 80 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

    युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी 15 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि अभिषेक शर्मा 16 रन ही बना सके। ईशान किशन का खराब फॉर्म जारी रहा और वह केवल 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। शिवम दुबे ने 22 रन, तिलक वर्मा ने 11 रन, वॉशिंगटन सुंदर ने 5 रन और अक्षर पटेल ने सिर्फ 1 रन का योगदान दिया। भारतीय बल्लेबाजी एक बार फिर बड़े स्कोर तक पहुंचने में नाकाम रही।

    159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। फिल साल्ट ने नाबाद 59 रन बनाए, जबकि कप्तान हैरी ब्रूक ने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। ब्रूक ने अपनी पारी में 8 चौके और 4 छक्के लगाए। हालांकि जोस बटलर केवल 8 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन इसके बाद इंग्लैंड ने कोई और विकेट नहीं गंवाया।

    इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर भारत को 9 विकेट से हराया और सीरीज पर कब्जा जमा लिया। अब दोनों टीमों के बीच पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन में खेला जाएगा, जहां भारत सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • फ्रांस सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार अंतिम चार में पहुंचा

    फ्रांस सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार अंतिम चार में पहुंचा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मोरक्को को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व कप के अंतिम चार में पहुंच गया, जबकि मोरक्को का अभियान क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया और मोरक्को के गोल पर लगातार दबाव बनाया। पांचवें मिनट में दायोट उपामेकानो के हेडर को गोलकीपर यासीन बुनू ने शानदार बचाव करते हुए गोल में जाने से रोक दिया। इसके बाद फ्रांस को पेनल्टी भी मिली, लेकिन कप्तान किलियन एम्बाप्पे उसे गोल में नहीं बदल सके। बुनू ने बेहतरीन सेव कर अपनी टीम को शुरुआती झटका लगने से बचाया।

    पहले हाफ में फ्रांस ने कई मौके बनाए, लेकिन मोरक्को का मजबूत डिफेंस और गोलकीपर लगातार दीवार बने रहे। नतीजतन शुरुआती 45 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं।

    दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। मैच के 60वें मिनट में कप्तान एम्बाप्पे ने शानदार कर्लिंग शॉट के जरिए गोल दागकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिलाई। यह इस विश्व कप में उनका आठवां गोल रहा। इसके सिर्फ छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने एम्बाप्पे के सटीक पास पर गोल करते हुए बढ़त को 2-0 कर दिया।

    दो गोल की बढ़त मिलने के बाद फ्रांस ने पूरे मैच पर नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। मजबूत डिफेंस और बेहतरीन मिडफील्ड खेल के दम पर फ्रांस ने आसानी से जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल का टिकट कटाया।

    फ्रांस अब 15 जुलाई को सेमीफाइनल मुकाबले में मैदान पर उतरेगा। टीम की नजर लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने और एक बार फिर खिताब जीतने पर होगी। वहीं मोरक्को का अभियान समाप्त होने के बावजूद टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपने जुझारू प्रदर्शन से फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीता।

  • ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

    ब्रिस्टल में टीम इंडिया का बुरा हाल, हैरी ब्रूक की तूफानी पारी से इंग्लैंड ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली । ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस हार के साथ ही भारतीय टीम ने 2019 के बाद पहली बार लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाई हैं। इससे पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज 0-2 से हार चुका था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 158 रन ही बना सकी। बल्लेबाज एक बार फिर बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और टीम चुनौतीपूर्ण स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। जवाब में इंग्लैंड ने सिर्फ 13.5 ओवर में एक विकेट खोकर 159 रन बनाते हुए मुकाबला 37 गेंद शेष रहते अपने नाम कर लिया।

    गेंदों के लिहाज से यह भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीसरी सबसे बड़ी हार रही। वहीं 150 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने विकेटों के लिहाज से अपनी संयुक्त रूप से दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इंग्लैंड की जीत के हीरो कप्तान हैरी ब्रूक रहे, जिन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में 79 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर फिल साल्ट ने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 68 गेंदों में 146 रन की अविजित साझेदारी कर मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में कर दिया।

    यह जीत इंग्लैंड के लिए ऐतिहासिक भी रही। पहली बार उसने भारत को दो या उससे अधिक मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में हराया है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई छह टी20 द्विपक्षीय सीरीज में भारत ने पांच जीती थीं, जबकि एक सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई थी।

    अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम टी20 मुकाबला 11 जुलाई को साउथेम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि इंग्लैंड की नजर क्लीन स्वीप पर होगी।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते पर छिड़ी क्रेडिट की लड़ाई, कांग्रेस बोली- इतिहास जानिए, फिर उपलब्धि का दावा कीजिए

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर हुई प्रगति के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस उपलब्धि का श्रेय लेने को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों दल इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को सामने रखकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

    भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख लगातार मजबूत हुई है, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देश के साथ रणनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। पार्टी का दावा है कि वर्तमान नेतृत्व में भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार रणनीतिक साझेदार के रूप में स्वीकार किया गया है, जिससे यूरेनियम सहयोग जैसे महत्वपूर्ण समझौते संभव हो सके हैं।

    वहीं कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों का विरोध करते हुए कहा है कि भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता कई वर्ष पहले ही खुल चुका था। पार्टी का तर्क है कि इस दिशा में प्रारंभिक और महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लिए गए थे। कांग्रेस का कहना है कि उस समय दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बिक्री की नीति में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता बढ़ी और उसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के प्रति अपनी नीति में परिवर्तन किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार को पूरे घटनाक्रम के ऐतिहासिक संदर्भ को समझे बिना केवल राजनीतिक लाभ के लिए पूरे श्रेय का दावा नहीं करना चाहिए। कांग्रेस ने भाजपा के नेताओं से तथ्यों का अध्ययन करने और ऐतिहासिक घटनाक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की सलाह भी दी है।

    दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को अंतिम रूप तक पहुंचाने में वर्तमान सरकार की सक्रिय कूटनीति, रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुए हैं, जिसका लाभ परमाणु ऊर्जा सहयोग में भी दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति और रणनीतिक समझौतों को लेकर श्रेय की राजनीति नई नहीं है। अक्सर अलग-अलग सरकारें अपने कार्यकाल में हुई प्रगति को प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जबकि ऐसे समझौते कई वर्षों तक चलने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। इसलिए किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के पीछे विभिन्न चरणों में किए गए प्रयासों और निरंतर संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं। हालांकि यूरेनियम सहयोग को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय हित से जुड़े ऐसे विषयों पर दीर्घकालिक कूटनीतिक प्रयासों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई दिशा देने वाला भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप लॉन्च किया। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेलों को दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बताते हुए भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने का संकल्प जताया।

    एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की। क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल से जुड़े खिलाड़ियों ने उनसे बातचीत की, ऑटोग्राफ लिए और सामूहिक तस्वीरें खिंचवाईं। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्टालेकर भी मौजूद रहीं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड हर भारतीय के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां आते ही भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मुकाबलों की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि साझा जुनून और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें देखकर भविष्य के चैंपियनों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि खेल देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में खेलों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप के तहत दोनों देश क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, खेल विज्ञान, तकनीक, खेल अवसंरचना, निवेश और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे खेलो इंडिया कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया, जबकि 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में होगी।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि बिग बैश लीग 2026-27 का उद्घाटन मुकाबला भारत के चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और इससे दोनों देशों के खेल संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी खेलों के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और युवा विकास जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश खेल भावना के साथ आगे बढ़ेंगे और “हम साथ खेलेंगे, हम साथ जीतेंगे” की भावना को और मजबूत करेंगे।