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  • पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात

    पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने शुक्रवार को एसआईआर (SIR) के बाद राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सेंट्रल कोलकाता में धरना शुरू कर दिया. जिससे विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से कुछ सप्ताह पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है. उन्होंने नाटकीय रूप से सड़क की राजनीति में वापसी की है, इस स्ट्रीट पॉलिटिक्स के दम पर ही ममता ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी।

    धरना शुरू करते हुए, बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’ की साजिश रचने का आरोप लगाया। टीएमसी सुप्रीमो ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में कहा, ‘मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के बीजेपी-चुनाव आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी।

    पहले दिन का धरना दोपहर करीब 2.15 बजे शुरू हुआ था. शुक्रवार रात को भी ममता बनर्जी टेंट में ही रहीं. उन्होंने बाकी नेताओं को घर भेज दिया था. प्रोटेस्ट शनिवार को दोबारा शुरू होगा। ममता के इस धरने की अपडेट्स देते हुए डेरेक ओ ब्रायन (TMC के राज्यसभा सांसद) ने लिखा, ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे धरने का पहला दिन (शुक्रवार) खत्म हो गया है. हमारी नेता ने हम सभी को घर पर जाकर आराम करने के लिए कहा है. रात में, वह सेंट्रल कोलकाता में धरना स्थल पर सड़क पर एक टेंट में रहेंगी. दीदी तो दीदी हैं.’


    बंगाल SIR में कितने नाम कटे

    28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम, यानी मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है. इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता का फैसला किया जाएगा.

    टीएमसी ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे 1.2 करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, इस आरोप को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. धरने के दौरान बनर्जी ने दावा किया, ‘कई लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, लेकिन वे जिंदा हैं. मैं उन्हें मंच पर लाऊंगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विरोध प्रदर्शन कब तक चलेगा, जबकि यह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के राज्य के प्रस्तावित दौरे से ठीक दो दिन पहले हो रहा है।


    ममता की जन-योद्धा वाली छवि

    कोलकाता के मेट्रो चैनल एरिया में हो रहा ये धरना ममता बनर्जी की आंदोलनकारी राजनीति के लिए गहरा राजनीतिक प्रतीक है. मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले, सेंट्रल कोलकाता के फुटपाथ वे मंच थे जहां उन्होंने तत्कालीन प्रभावशाली वाम मोर्चे के खिलाफ एक जन-योद्धा के रूप में अपनी छवि बनाई थी।

    फिर 4 दिसंबर, 2006 को उन्होंने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए सिंगूर में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में उसी स्थान पर 26 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन एक राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया जिसने आखिरकार टीएमसी को 2011 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल करने में मदद की, जिससे उसका 34 साल का शासन समाप्त हो गया।

    मुख्यमंत्री बनने के बाद भी, बनर्जी समय-समय पर आंदोलन की राजनीति में लौटती रही हैं, विशेष रूप से फरवरी 2019 में, जब उन्होंने केंद्र पर संघवाद को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया था, जब सीबीआई ने शारदा चिट फंड जांच में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।

  • तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा

    तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा



    भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर तेज होता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर प्रदेश में 15 मार्च के बाद तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है और महीने के शुरुआती दिनों में ही पारा चढ़ने लगा है। सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग के बाद अब इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में भी गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है।

    इंदौर में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा धार, दमोह, सागर, शाजापुर, गुना, छतरपुर, रतलाम और टीकमगढ़ में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रहा। रात का तापमान भी 18 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ गुजर रही है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है, लेकिन इसका प्रदेश के मौसम पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। आसमान साफ होने के कारण सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं, जिससे गर्मी का असर बढ़ गया है।

    मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अप्रैल और मई में हीट वेव यानी लू चलने की संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है। हालांकि मार्च में फिलहाल लू चलने का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    तेज धूप को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय करीब तीन घंटे तक धूप से बचकर छांव में रहने की कोशिश करें।

  • भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत

    भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत


    जैसलमेर ।
    राजस्थान के जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैन और सनातन परंपरा के संतों सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों का संगम हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम पूर्णतः समरसता और सामाजिक एकता के भाव पर आधारित था, जिसमें गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सागर के नेतृत्व में धर्म, तीर्थ एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

    इस अवसर पर डॉ. भागवत ने समाज से केवल उपदेशों तक सीमित न रहकर आचरण में परिवर्तन लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मित्रों और परिचितों के दायरे में विभिन्न जातियों, पंथों, भाषाओं और प्रदेशों के लोगों को शामिल करें। जब हम सुख-दुख, खान-पान और सामाजिक जीवन साझा करेंगे, तभी वास्तविक सामाजिक शक्ति प्रकट होगी।

    डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति की चिरंतनता, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा गुरुदेव आचार्य जिन दत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी चादर को भारत की सनातन संस्कृति की जीवटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह चादर उस सत्य का प्रतीक है जिसे न अग्नि जला सकती है, न शस्त्र काट सकते हैं और न ही जल भिगो सकता है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा पहचाने गए उस शाश्वत सत्य का प्रमाण है जो सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि यदि हम आपसी भेदभाव और स्वार्थ को त्यागकर देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो भारत न केवल परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनेगा बल्कि एक विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण मानवता को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।

    डॉ. भागवत ने जैन दर्शन के अनेकांतवाद सिद्धांत की सराहना करते हुए कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण।

    अपने भाषण में उन्होंने एक रेल यात्रा की मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज में झगड़े और संघर्ष इसलिए होते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते और अपने एकत्व के भाव को भूल जाते हैं। जब मनुष्य यह समझ जाता है कि हम सब एक ही चेतना के अंश हैं, तब स्वार्थ और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि लीग ऑफ नेशंस और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाएं युद्धों को नहीं रोक सकतीं। इसके लिए मानव के भीतर करुणा और एकात्मता का भाव होना आवश्यक है।

    इस अवसर पर गच्छाधिपति जिन मणिप्रभसागर महाराज ने कहा कि समरसता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। भारत का ध्वज पूरे विश्व में सम्मानपूर्वक लहराने के लिए सभी संप्रदायों के संतों को एकता और अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में जातिवाद और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर संघ और समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चादर महोत्सव की स्मृति में डाक टिकट, विशेष सिक्के और दादा गुरुदेव पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गुलेचा तथा पद्म भूषण डॉ. डीआर मेहता सहित अनेक समाजसेवियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट के बीच स्वर्ण भंडार में तेज उछाल से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि इससे पिछले हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले इस वर्ष 13 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 725.72 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

    आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.12 अरब डॉलर हो गईं। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

  • जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस

    जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस


    नई दिल्ली/नोएडा ।
    उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है। जेवर एयरपोर्ट को इसका लंबे समय से इंतजार था।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को एयरोड्रोम लाइसेंस दे दिया है। इससे पहले जेवर एयरपोर्ट को सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी वाईआईएपीएल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया है। इसका कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर, 2021 को 40 साल के लिए शुरू हुआ।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को हर मौसम में ऑपरेशन के लिए पब्लिक यूज़ कैटेगरी के तहत लाइसेंस मिला है। इसमें 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है। इसका डाइमेंशन 3,900 m×45 m है, जिसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सपोर्ट मिलता है, जिससे इसका 24×7 ऑपरेशन हो सकता हैं। एयरोड्रम में 24 कोड C और 02 कोड D/F एयरक्राफ्ट के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह एआरएफएफ कैटेगरी 9 सुविधाओं से पूरी तरह लैस है, जो बोइंग 777-300ER जैसे वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकती हैं।

    उल्लेखनीय है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) को जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य इसको देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। इस एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ 4 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल डेवलप होगा। इससे एयरपोर्ट की कैपेसिटी हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की होगी। इसके सभी फेज पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट पर हर साल 7 करोड़ यात्री आ सकेंगे, जो दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़ा एविएशन हब बन जाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जल्द ही एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके उद्घाटन करने का अनुरोध कर उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यहां से एयर इंडिया, आकाशा और इंडिगो ने अपने विमानों को उड़ान भरने के लिए समझौता किया है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद इन एयरलाइंस कंपनियां यहां पर अपना स्टाफ की नियुक्तियां और अन्य तकनीकी सुविधाओं को लगाना शुरू कर देंगे। एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए पहले से ही सीआईएसएफ और यूपी पुलिस तैनात है। एयरपोर्ट से अच्छी कनेक्टिविटी देने के लिए विभिन्न मार्गों और साधनों पर कार्य हो रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति

    तकनीकी खराबी के कारण ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ को कोच्चि में दी गई डॉकिंग की अनुमति


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार ने श्रीलंका के दक्षिण में हुए ‘आईआरआईएस डेना’ से जुड़े घटनाक्रम से कुछ दिन पहले ईरान ने अपने एक अन्य युद्धपोत आईआरआईएस लावान को भारत में शरण देने का अनुरोध किया था।

    भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी। भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है।

    सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।सूत्रों ने बताया कि ईरान ने 28 फरवरी 2026 को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक पोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति देने का आग्रह किया था। उस समय यह पोत अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आ जाने के कारण तत्काल डॉकिंग की आवश्यकता बताई गई थी।

    भारत सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद ईरानी युद्धपोत 4 मार्च को केरल के कोच्चि स्थित बंदरगाह पर पहुंचकर सुरक्षित रूप से डॉक हो गया।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज के तकनीकी मुद्दों के समाधान तक उसके चालक दल के 183 सदस्यों को कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। वहां उन्हें आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि यह कदम मानवीय आधार और समुद्री परंपराओं के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या आपात स्थिति में सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का हिस्सा माना जाता है।

    गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कोच्चि में आईआरआईएस लावान की डॉकिंग केवल तकनीकी समस्या के कारण की गई है और यह नियमित समुद्री सहायता की प्रक्रिया के तहत हुई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जहाज की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद उसके आगे के कार्यक्रम के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

  • यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक

    यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक


    भोपाल।
    संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में मध्य प्रदेश के दो युवाओं ने परचम लहराते हुए टॉप 10 में जगह बनाई है। भोपाल के ईशान भटनागर ने ऑल इंडिया 5वीं और धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल कर अपने क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

    यूपीएससी द्वारा शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। इसमें 958 अभ्यर्थियों ने अलग-अलग सेवाओं के लिए क्वालिफाई किया। टॉप 5 रैंक भोपाल के ईशान भटनागर को मिली, जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूपीएससी में सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि भोपाल के ईशान भटनागर और धार के पक्षल जैन का टॉप-10 में आना प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    सिविल सेवा परीक्षा में टॉप-5 रैंक हासिल करने वाले भोपाल के ईशान भटनागर अभी नागपुर में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। ईशान के पिता मध्य प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल एडवाइजर के तौर पर काम कर चुके हैं। अभी रिटायर हो चुके हैं। उनकी मां इंग्लिश की प्रोफेसर हैं।

    वहीं, धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाइयां बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं।

    पक्षाल का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया।

    पक्षाल ने बताया कि उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। वे वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की।

    उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की।


    अशोकनगर के चितवन जैन को ऑल इंडिया रैंक-17

    अशोकनगर के चितवन जैन ने 17वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था। चितवन के अनुसार, उन्होंने पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं लिया और जरूरत के अनुसार रोज पढ़ाई की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग को दिया।


    खंडवा की रूपल जायसवाल को ऑल इंडिया रैंक-43

    खंडवा की रूपल जायसवाल ने 43वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि पिछले प्रयास में उन्हें 512वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने उस रैंक पर सेवा जॉइन नहीं की और दोबारा तैयारी की। इस बार टॉप-50 में जगह बनाकर उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की। सफलता के बाद घर के बाहर लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।


    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी को ऑल इंडिया रैंक-56

    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी ने 56वीं रैंक हासिल कर टॉप-100 में जगह बनाई। उन्होंने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। समीक्षा का कहना है कि अगर लक्ष्य तय हो और लगातार मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य से पीछे न हटने की अपील की।


    नरसिंहपुर की दीक्षा पाटकर को ऑल इंडिया रैंक-88

    नरसिंहपुर जिले के करकबेल गांव की दीक्षा पाटकर ने 88वीं रैंक हासिल की। वह हेमराज पाटकर और अर्चना पाटकर की बेटी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।


    ग्वालियर की सृष्टि गोयल को ऑल इंडिया रैंक-160

    ग्वालियर के मुरार क्षेत्र की सृष्टि गोयल ने 160वीं रैंक हासिल की। यह उनका पांचवां प्रयास था। उनके पिता सुनील गोयल का सोने-चांदी का व्यवसाय है। सृष्टि ने बताया कि वह पहले आईआईटी में नहीं जा सकीं। सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। प्लान की गई स्ट्रेटेजी आपको सफलता दिलाएगी। सोशल मीडिया जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहना जरूरी है।


    गुना की देवांगी मीणा को ऑल इंडिया रैंक-236

    गुना जिले के कुंभराज की देवांगी मीणा ने 236वीं रैंक हासिल की। पिछले साल उन्हें 764वीं रैंक मिली थी। वह आईआरएस में चयनित हुई थीं। उनके पिता नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में कार्यरत हैं।


    नरसिंहपुर की पूजा सोनी को ऑल इंडिया रैंक-249

    नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में पदस्थ सब-डिविजनल रेवेन्यू ऑफिसर पूजा सोनी ने 249वीं रैंक हासिल की है। रेवेन्यू ऑफिसर की कामयाबी के लिए परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर है। हर कोई पूजा सोनी को बधाई भेज रहा है।


    सतना की भूमिका जैन को ऑल इंडिया रैंक-331

    सतना की भूमिका जैन ने 331वीं रैंक हासिल कर आईआरएस सेवा के लिए चयन प्राप्त किया है। वह कृष्णानगर के कपड़ा व्यवसायी मनोज जैन की बेटी हैं। भूमिका ने बताया कि यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था। उन्होंने तीन साल दिल्ली में रहकर तैयारी करने में बहुत मेहनत की। भूमिका ने बताया कि अपने पहले अटेम्प्ट में बेसिक समझ हासिल करने के लिए सिर्फ़ कोचिंग ली। उसके बाद, उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। दस किताबों के बजाय एक किताब को कॉन्सन्ट्रेशन के साथ पढ़ना ज्यादा फायदेमंद है।

  • किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। किसानों की फसलों का उचित दाम मिले, इसके लिए उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की गई है। प्रदेश के किसान उड़द लगाएं, ताकि उन्हें इस बोनस का भरपूर लाभ मिल सके और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, नीरज मंडलोई सहित कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी गत वर्षों के तरह बोनस की सौगात दी है। इस वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान प्राप्त होगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। आगामी वर्षों में हम इस लक्ष्य को पूरा कर उससे भी आगे निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर गेहूँ उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, इससे रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

  • इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया में शामिल होगा बड़नगर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया में शामिल होगा बड़नगर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन जिले का बड़नगर भी विकास में अग्रणी रहेगा। बड़नगर अब इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया का भाग बनेगा। बड़नगर पर बाबा महाकाल सहित चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों का भी आशीर्वाद है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग की स्वीकृति प्रदान करने के लिए उनका आभार प्रकट करने मुख्यमंत्री निवास पहुंचे बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़नगरवासियों ने साफा और गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर नई ऊंचाइयां को छू रहा है। देश में मध्य प्रदेश का विशेष महत्व है। विकास के इस कारवां को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार समाज के हर वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया है। टेक्सटाइल सेक्टर के इस मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का लाभ भी बड़नगरवासियों को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बड़नगर क्षेत्र में संचालित गौशालाओं को नरवाई प्रबंधन के लिए मशीनें लेने में सहायता के उद्देश्य से स्वेच्छानुदान से अंश राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे नरवाई के निराकरण के साथ ही गौशालाओं को पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बड़नगर क्षेत्र के व्यायाम शालाओं को प्रोत्साहन स्वरूप एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से उज्जैन और बड़नगर अब 3 प्रमुख मार्गों के माध्यम से रतलाम से जुड़ गया है। तीसरा नया 2 लेन रास्ता गंभीर डैम के पास से नागदा होकर निकलने वाला है। लगभग 150 करोड़ रुपये का नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी सौगात है। इससे रतलाम की दूरी 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। नई सड़क से सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में भी सुविधा होगी। उज्जैन में विमानतल भी बनाया जा रहा है, इसका लाभ भी बड़नगर को मिलेगा। आगामी वर्षों में रतलाम सहित राजस्थान और गुजरात से भी बड़नगर का संपर्क सुगम और सशक्त होगा। सड़कें विकास का आधार हैं, इन सड़कों से बड़नगर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास के द्वार खुलेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ : 2028 को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में रतलाम से उज्जैन आने वाले श्रद्धालु मुख्यत: बदनावर-बड़नगर मार्ग से आवागमन करते हैं, जिसकी कुल लंबाई लगभग 115 कि.मी. है। प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की कुल लंबाई लगभग 74 कि.मी. है, जो वर्तमान प्रचलित मार्ग की तुलना में लगभग 40 कि.मी. कम है। इस मार्ग के विकसित होने से यात्रा की दूरी एवं समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें मित्र की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी हमारे लिए भगवान श्री हनुमान की तरह हैं, जिन्हें केवल जनभागीदारी की शक्ति का भान कराना होता है। सरकार के कार्य अपने आप होते चले जाते हैं। अभिनंदन समारोह में बड़नगर विधायक जितेंद्र पंड्या, अंतर सिंह देवड़ा, उमराव सिंह, विजय चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।