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  • बरसात और सोल्जर से स्टारडम पाने के बाद जब बड़े पर्दे से गायब हो गए बॉबी देओल, तब रेस 3 की खौफनाक परफॉर्मेंस ने इंडस्ट्री में दोबारा कायम किया सिक्का

    बरसात और सोल्जर से स्टारडम पाने के बाद जब बड़े पर्दे से गायब हो गए बॉबी देओल, तब रेस 3 की खौफनाक परफॉर्मेंस ने इंडस्ट्री में दोबारा कायम किया सिक्का

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा जगत में स्टारडम और संघर्ष का चोली-दामन का साथ रहा है, जहाँ चमकते सितारों को भी एक वक्त के बाद गुमनामी का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ दौर बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता बॉबी देओल ने भी देखा, जिन्होंने हाल ही में अपने करियर के सबसे मुश्किल दिनों और बड़े पर्दे पर अपनी वापसी की दास्तां को खुलकर साझा किया है। नब्बे के दशक में सुपरहिट फिल्मों से अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत करने वाले अभिनेता का ग्राफ एक समय के बाद बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफलता मिलने के कारण काफी धीमा पड़ गया था। हालात इस कदर बदल चुके थे कि सिनेमा हॉल से दूरी बनने की वजह से देश की युवा और नई पीढ़ी उन्हें लगभग पूरी तरह से भूलने लगी थी, जिससे उनके भीतर अपनी पहचान खोने का एक गहरा डर पैदा हो गया था।

    करियर के इसी अंधकार भरे और हताशा से भरे दौर में उनके जीवन में एक ऐसा टर्निंग पॉइंट आया जिसने सब कुछ पूरी तरह से बदलकर रख दिया। अभिनेता ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि जब वह काम की तलाश और पहचान के संकट से जूझ रहे थे, तब अचानक फिल्म इंडस्ट्री के दबंग खान ने उन्हें फोन किया। बातचीत के दौरान सुपरस्टार ने बेहद दोस्ताना और मजाकिया लहजे में उनसे पूछा कि क्या वह फिल्म के लिए अपनी शर्ट उतारने को तैयार हैं। इस पर बिना एक पल की भी देरी किए अभिनेता ने भावुक होकर जवाब दिया कि वह अपने काम और वापसी के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बस इसी एक छोटे से संवाद ने उनकी किस्मत का बंद दरवाजा खोल दिया और उन्हें एक बड़ी मल्टीस्टारर एक्शन फिल्म का हिस्सा बनने का सुनहरा मौका मिल गया।

    साल दो हजार अठारह में आई इस बड़ी कमर्शियल फिल्म ने भले ही समीक्षकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया पाई हो, लेकिन इसने अभिनेता को दोबारा लाइमलाइट में लाने का सबसे बड़ा जरिया ढूंढ निकाला। बड़े पर्दे पर उनके बदले हुए लुक, शानदार फिजीक और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने खूब सराहा, जिससे इंडस्ट्री के मेकर्स का ध्यान एक बार फिर उनकी तरफ आकर्षित हुआ। नब्बे के दशक में चॉकलेट बॉय और रोमांटिक हीरो के रूप में पहचान बनाने वाले इस कलाकार को अब एक नए और परिपक्व अवतार में देखा जाने लगा था, जिसने उनके अभिनय की दूसरी पारी की एक मजबूत नींव रख दी।

    इस शानदार कमबैक के बाद अभिनेता के करियर की गाड़ी ने जो रफ्तार पकड़ी, वह आज तक थमने का नाम नहीं ले रही है। इसके बाद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बेहद लोकप्रिय वेब सीरीज में एक ढोंगी बाबा का मुख्य नकारात्मक किरदार निभाने का मौका मिला, जिसने उनकी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। इसके तुरंत बाद एक बेहद चर्चित और ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म में उनके छोटे लेकिन बेहद खूंखार और मूक खलनायक के किरदार ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। आज यह अभिनेता न केवल बड़े निर्देशकों की पहली पसंद बन चुके हैं बल्कि अपनी आगामी फिल्मों के जरिए एक बार फिर भारतीय सिनेमा में अपना पुराना और मजबूत मुकाम हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • देवास हादसा: ट्रांसफार्मर ब्लास्ट और राम मंदिर कार्यक्रम के बीच बना संयोग चर्चा में

    देवास हादसा: ट्रांसफार्मर ब्लास्ट और राम मंदिर कार्यक्रम के बीच बना संयोग चर्चा में

     
    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में हुए दर्दनाक पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। लेकिन इस हादसे के बीच एक ऐसा संयोग सामने आया है, जिसने ग्रामीणों को हैरान और भावुक दोनों कर दिया है। गांव की लगभग 150 महिलाएं रोजाना इस फैक्ट्री में काम करने जाती थीं, लेकिन जिस दिन यह भीषण हादसा हुआ, उसी दिन अधिकांश महिलाओं ने पहले से ही छुट्टी ले रखी थी।

    ग्रामीणों के अनुसार, उस दिन गांव के राम मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित था। इसी धार्मिक आयोजन के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं ने काम पर न जाने का निर्णय लिया था। ठीक उसी दिन सुबह करीब 11:30 बजे फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए।

    घटना के बाद गांव में मातम और सदमे का माहौल है, लेकिन साथ ही कई महिलाएं इसे ईश्वर की कृपा और भगवान राम का आशीर्वाद मान रही हैं। उनका कहना है कि अगर वे उस दिन फैक्ट्री गई होतीं, तो शायद वे भी इस हादसे का शिकार हो सकती थीं।

    गांव की एक महिला सरिता मालवीय ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही कंपनी को सूचित कर दिया था कि गांव में धार्मिक कार्यक्रम होने के कारण वह काम पर नहीं आ पाएंगी। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद जो दृश्य सामने आए, उन्हें देखकर दिल दहल गया। जिस जगह वे रोज काम करती थीं, वह पूरी तरह तबाह हो चुकी थी।

    अन्य महिलाओं ने भी बताया कि हादसे के बाद से वे मानसिक रूप से काफी प्रभावित हैं। एक तरफ उन्हें इस बात की राहत है कि वे उस दिन फैक्ट्री में मौजूद नहीं थीं, वहीं दूसरी ओर अपने साथ काम करने वाले मजदूरों की मौत का गहरा दुख भी उन्हें परेशान कर रहा है।

    ग्रामीणों ने बताया कि रोजाना सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं फैक्ट्री के लिए निकलती थीं, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के कारण उस दिन अधिकांश लोग गांव में ही रुक गए। अब गांव में यह हादसा चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और लोग इसे एक अनहोनी संयोग के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल प्रशासन हादसे की जांच में जुटा हुआ है और फैक्ट्री सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

  • बिजली सप्लाई शुरू होते ही हादसा: देवास में ट्रांसफार्मर फटा, मचा हड़कंप

    बिजली सप्लाई शुरू होते ही हादसा: देवास में ट्रांसफार्मर फटा, मचा हड़कंप


    मध्यप्रदेश । देवास के मेढ़की रोड स्थित चाणक्यपुरी क्षेत्र में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब राम मंदिर के पास लगे ट्रांसफार्मर में अचानक आग भड़क उठी। घटना इतनी तेज थी कि कुछ ही पलों में पूरा ट्रांसफार्मर आग की लपटों में घिर गया और लगातार जोरदार धमाकों की आवाजें आने लगीं। करीब 30 सेकंड तक एक के बाद एक ब्लास्ट होते रहे, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए और लोग घरों व दुकानों से बाहर निकल आए।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब कुछ देर पहले ही इलाके में बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस का काम पूरा किया गया था। मेंटेनेंस के बाद जैसे ही बिजली आपूर्ति बहाल हुई, लगभग 10 मिनट के भीतर ही ट्रांसफार्मर (डीपी) में अचानक चिंगारी उठी और आग फैल गई। आग ने तेजी से नीचे लगे केबलों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग की शुरुआत ट्रांसफार्मर के निचले हिस्से से हुई और कुछ ही सेकंड में पूरे सिस्टम में फैल गई। लगातार धमाकों के कारण लोग सुरक्षित दूरी पर हट गए और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने बिजली कंपनी को अलर्ट किया, जिसके बाद तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। इसके कुछ ही समय बाद नगर निगम की फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का कार्य शुरू किया।

    करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन ट्रांसफार्मर और बिजली के केबल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

  • गर्मी में प्रदर्शन के बीच बिगड़ी तबीयत, सीएमएचओ के बयान से बढ़ा मामला

    गर्मी में प्रदर्शन के बीच बिगड़ी तबीयत, सीएमएचओ के बयान से बढ़ा मामला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब आशा और उषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान एक महिला कार्यकर्ता अचानक बेहोश होकर गिर गई। प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने आई महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भेजा गया।

    यह प्रदर्शन आशा और उषा कार्यकर्ता महिला संगठन के बैनर तले अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किया जा रहा था। बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से बातचीत की कोशिश की। प्रशासन की ओर से एडीएम और जिला पंचायत सीईओ ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन कार्यकर्ता कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ी रहीं।

    संगठन की जिला अध्यक्ष शशि राय ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेश स्तरीय निर्देशों के तहत किया गया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा घोषित बढ़ी हुई राशि का एरियर सहित भुगतान और हर महीने समय पर भुगतान की मांग भी प्रमुख है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग रखी है कि उन्हें हर महीने 5 तारीख तक नियमित भुगतान की गारंटी दी जाए और भुगतान की स्पष्ट स्लिप उपलब्ध कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    इसके अलावा कार्यकर्ताओं ने बीमा और सेवानिवृत्ति लाभ को लेकर भी मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में घायल होने पर कम से कम 1 लाख रुपये और मृत्यु की स्थिति में परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने की मांग भी उठाई गई है।

    इसी बीच प्रदर्शन के दौरान एक महिला कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ गई और वह जमीन पर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत उसे संभाला और अस्पताल भेजा।

    इस घटना पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ओपी अनुरागी ने बयान देते हुए कहा कि भीषण गर्मी और अधिक देर तक शोर-शराबे के कारण महिला को चक्कर आया होगा। हालांकि इस बयान के बाद संगठन के बीच असंतोष और बहस की स्थिति भी देखी जा रही है।

    फिलहाल महिला का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और प्रशासन पूरे मामले की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

  • पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर

    पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में दिल्ली के सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक शुरू हो गई है। यह इस साल की पहली बड़ी कैबिनेट बैठक मानी जा रही है, जो ऐसे समय पर हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक हालात को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए हैं। सरकार ने पहले ही सभी मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई और इसमें शासन के प्रदर्शन, नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है।

    किन मुद्दों पर चर्चा संभव
    बैठक में सरकार की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, उनके प्रभाव और जनता तक पहुंच को लेकर विस्तृत समीक्षा होने की संभावना है। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन और अब तक लिए गए नीतिगत फैसलों के नतीजों पर भी चर्चा की जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात खासकर तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर भी सरकार की नजर बनी हुई है। इसी वजह से आर्थिक स्थिरता और ईंधन आपूर्ति जैसे मुद्दे बैठक के एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

    विदेश यात्रा के बाद अहम बैठक
    यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब प्रधानमंत्री हाल ही में अपनी पांच देशों की कूटनीतिक यात्रा पूरी कर लौटे हैं। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना बताया गया है।

  • उज्जैन में डॉग बाइट का बढ़ता खतरा: 4 महीने में 2439 लोग शिकार

    उज्जैन में डॉग बाइट का बढ़ता खतरा: 4 महीने में 2439 लोग शिकार


    मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामले में सभा मंडप के पास काम कर रही एक महिला कर्मचारी पर कुत्ते ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला कर्मचारी मंदिर परिसर में अपने कार्य में लगी हुई थी, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता वहां पहुंचा और उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद महिला दर्द से तड़पने लगी और आसपास मौजूद लोग उसकी मदद के लिए दौड़े। घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

    महाकाल मंदिर ही नहीं, पूरे उज्जैन शहर में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर होती जा रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम और कई कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड लगातार लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक दोनों ही इन हमलों से परेशान हैं।

    आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच उज्जैन में 2439 लोगों को कुत्तों ने काटा है। इसके अलावा 192 लोग बिल्ली, बंदर और घोड़े के हमलों में घायल हुए हैं। यह स्थिति शहर में पशु नियंत्रण व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाती है।

    मंदिर परिसर में पिछले दो वर्षों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में दिल्ली से आई एक महिला श्रद्धालु भी कुत्तों के हमले में घायल हुई थी, जिसे तुरंत मंदिर अस्पताल में उपचार दिया गया था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्ते लगातार घूमते रहते हैं और कई बार श्रद्धालुओं पर हमला कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

    इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं।

    फिलहाल प्रशासन और नगर निकाय पर सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद स्थायी नियंत्रण व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।

  • बांग्लादेश पासपोर्ट विवाद: “Except Israel” शर्त की वापसी, राजनीतिक प्रतीकों को हटाने की तैयारी

    बांग्लादेश पासपोर्ट विवाद: “Except Israel” शर्त की वापसी, राजनीतिक प्रतीकों को हटाने की तैयारी




    नई दिल्ली। बांग्लादेश एक बार फिर अपने पासपोर्ट नीति में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। ढाका से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार देश के पासपोर्ट में “Except Israel” यानी “इजरायल को छोड़कर” वाला वाक्यांश फिर से शामिल किया जाएगा। यह वही प्रावधान है जिसे 2020 में शेख हसीना सरकार के दौरान हटाया गया था, हालांकि उस समय भी इजरायल में पासपोर्ट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू था।

    रिपोर्टों के मुताबिक अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली सरकार इस वाक्यांश को दोबारा शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। कहा जा रहा है कि यह कदम देश की विदेश नीति और फिलिस्तीन मुद्दे पर लंबे समय से चले आ रहे रुख को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

    इसी के साथ पासपोर्ट डिज़ाइन और वॉटरमार्क में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, बांग्लादेश के ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रतीकों से जुड़े कई चिन्ह हटाए जा सकते हैं, जिनमें बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े स्थल और स्मारक भी शामिल हैं। इसमें धनमंडी 32 स्थित उनका आवास, तुंगीपारा स्थित मकबरा और अन्य राष्ट्रीय पहचान से जुड़े प्रतीक शामिल बताए जा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार यह बदलाव पहले चरण में नए जारी होने वाले पासपोर्ट पर लागू होगा, जबकि पुराने पासपोर्ट को तुरंत बदलने की कोई योजना नहीं है। जैसे-जैसे पुराने पासपोर्ट की अवधि समाप्त होगी, नए नियमों के अनुसार ही दस्तावेज जारी किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक और वैचारिक दिशा में भी बड़ा संकेत है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार अपनी विदेश नीति और घरेलू राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रही है, जिसमें फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल विरोधी रुख को दोबारा मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।

  • पाकिस्तान के पूर्व NSA की भारत को खुली धमकी: चीन के साथ मिलकर “बर्बाद करने” की बात, कश्मीर-सिंधु जल पर जहर

    पाकिस्तान के पूर्व NSA की भारत को खुली धमकी: चीन के साथ मिलकर “बर्बाद करने” की बात, कश्मीर-सिंधु जल पर जहर



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नासिर खान जंजुआ ने एक टीवी इंटरव्यू में भारत के खिलाफ बेहद भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के साथ बातचीत के दौरान पाकिस्तान और चीन को भविष्य की “सुपरपावर” बताते हुए दावा किया कि दोनों देश मिलकर भारत को कड़ी चुनौती देंगे। उनके इस बयान को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इंटरव्यू में जंजुआ ने कहा कि मौजूदा समय में भारत की नीतियों के कारण उसके खिलाफ माहौल बन रहा है और उसके “दुश्मन” बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने चीन की तेजी से बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल देंगे।

    जंजुआ ने आगे दावा किया कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान “ताकत के आधार पर” किया जाएगा। उनके इस बयान को भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में अत्यंत संवेदनशील और विवादित माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और पाकिस्तान का सहयोग भविष्य में और मजबूत होगा और यह गठजोड़ भारत के लिए चुनौती साबित हो सकता है। इंटरव्यू में दिए गए इन बयानों को भारत के खिलाफ उकसाने वाली भाषा के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इन दावों पर किसी आधिकारिक स्तर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) नासिर खान जंजुआ पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने अपने करियर में कई अहम सैन्य पदों पर काम किया है। वे क्वेटा कोर कमांडर भी रहे हैं और 2015 से 2018 तक पाकिस्तान के 7वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली है। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • एमपी सरकार की नई पहल: स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई

    एमपी सरकार की नई पहल: स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘शिक्षा घर योजना’ को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना है, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।

    यह निर्णय हाल ही में मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया, जहां मौजूदा योजनाओं की प्रगति और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत खासतौर पर कक्षा 8 या उससे ऊपर पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि प्रदेश में अब भी कई क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर चिंता का विषय बनी हुई है। आर्थिक कठिनाइयों, सामाजिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से कई छात्र स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है। ‘शिक्षा घर योजना’ के जरिए ऐसे छात्रों की पहचान कर उन्हें फिर से स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    योजना के तहत शिक्षा विभाग गांव-गांव और शहरों में ऐसे बच्चों का सर्वे करेगा जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इसके बाद उन्हें नजदीकी स्कूलों, ओपन स्कूलिंग सिस्टम या अन्य वैकल्पिक शिक्षा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों को अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिलेगा और वे आगे बेहतर करियर की ओर बढ़ सकेंगे।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। उनका कहना है कि इससे छात्रों को भारतीय इतिहास और संस्कृति की बेहतर समझ मिलेगी और उनमें राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

    इसके अलावा बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग की 14 प्रमुख योजनाओं को जारी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और प्रभावी ढंग से किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    साथ ही, स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आंशिक रूप से जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का फोकस सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

    फिलहाल, शिक्षा विभाग ‘शिक्षा घर योजना’ के मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि इसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

  • सड़क पर नमाज विवाद: योगी सरकार के आदेश पर सियासत गरम, इकरा हसन का पलटवार

    सड़क पर नमाज विवाद: योगी सरकार के आदेश पर सियासत गरम, इकरा हसन का पलटवार



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बयान के बाद जहां प्रशासनिक स्तर पर सख्ती देखी जा रही है, वहीं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

    बीजेपी नेता Nazia Ilahi Khan ने सीएम योगी के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक इबादत दूसरों को असुविधा में डालकर नहीं होनी चाहिए और इसे उचित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने सड़क पर नमाज को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की।

    वहीं समाजवादी पार्टी सांसद Iqra Hasan ने सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क पर नमाज का मुद्दा जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करने की कोशिश है और सभी को संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है।

    सीएम योगी ने स्पष्ट कहा है कि सड़कें सार्वजनिक आवागमन के लिए हैं, धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं, और ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।