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  • युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तनाव चरम पर!

    युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तनाव चरम पर!



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को एक संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया, जिसे कोड‑नेम “Operation Epic Fury / Lion’s Roar” कहा जा रहा है। इस बड़े ऑपरेशन में दोनों देशों ने ईरान के कई शहरों और सैन्य‑रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें तेहरान, इस्फ़हान, नतांज़ और फ़ोर्डो सहित कई प्रमुख लक्ष्य शामिल थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी जनता से अपील की कि वे “अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें” और **1979 से शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करें।” इस हमले को उन्होंने “आगामी खतरों को ख़त्म करने” और ईरान की सैन्य क्षमता को क्षतिग्रस्थ बनाने का लक्ष्य बताया।

    हमले की मौजूदा स्थिति
    संयुक्त हमले में 200 से अधिक लक्ष्य पर हमला किया गया, और ईरानी सुरक्षा नेतृत्व के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए या प्रभावित हुए हैं।

    ईरान की ओर से जवाबी मिसाइलें दागी गईं, जिसमें मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल हैं और कई देशों में (जैसे अरब अमीरात, कुवैत, बहरैन और कतर) सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय कर दी गई है।

    ईरानी नागरिकों में भय और पैनिक फैल चुका है; लोगों ने राजधानी से बाहर भागने और पेट्रोल आदि सामान जमा करने जैसे हालात देखे जा रहे हैं।
    नागरिक असर और क्षेत्रीय तनाव

    बड़े पैमाने पर विस्फोटों और हमलों के कारण ईरान में भारी जनहानि और जन‑जीवन प्रभावित हुआ है, और कई देशों ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। इस तनाव के चलते कई देशों का एयरस्पेस भी अस्थायी रूप से बंद हुआ है और यात्रियों की उड़ानों में व्यवधान आया है।
    ये हमला एक मध्य पूर्व में सबसे बड़े सैन्य संघर्षों में से एक माना जा रहा है, जो पहले की 12‑दिन की जंग के बाद क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।

  • खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    नई दिल्ली । ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की पुष्टि के बाद देश की सत्ता और सैन्य ढांचे में गहरा संकट उभर आया है। ईरानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार खामेनेई के 47 साल लंबे प्रभावशाली नेतृत्व का अंत होते ही इस्लामिक गणतंत्र की चेन ऑफ कमांड में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अब सत्ता के शीर्ष पद पर नए नेतृत्व की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि IRGC कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द से जल्द नए नेता को तख्त पर बैठाने के पक्ष में है। सामान्यतः सुप्रीम लीडर का चुनाव संवैधानिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है लेकिन जारी हवाई हमलों और अस्थिर सुरक्षा हालात के कारण उसका सत्र बुलाना मुश्किल बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि IRGC का बचा हुआ कमांड ढांचा 1 मार्च की सुबह तक नए नेतृत्व पर अंतिम निर्णय चाहता है। सूत्रों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा और सैन्य तंत्र में तालमेल की कमी साफ दिख रही है। आदेशों के प्रवाह में बाधा आ रही है और कुछ हिस्सों में कमांड संरचना लगभग बिखर गई है। इससे संकट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ सैन्य कमांडर और निचले रैंक के कर्मी अपने बेस पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति ने IRGC की चिंता और बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार सुबह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता और संभावित जन असंतोष ने हालात को और जटिल बना दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हालिया हमले विफल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम थे। अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान को स्थायी रूप से मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी लेकिन तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता छोड़ने से इनकार कर दिया। अमेरिका इसे परमाणु हथियार विकसित करने की संभावित कोशिश के रूप में देखता रहा है। साथ ही ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन जैसे मुद्दों पर भी बातचीत से दूरी बनाए रखी।

    खामेनेई की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक असंतोष का सामना कर रहा है। नेतृत्व का यह खालीपन न केवल राजनीतिक बल्कि सैन्य और वैचारिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया सुप्रीम लीडर चुनेगा या IRGC के दबाव में कोई त्वरित और असाधारण फैसला लिया जाएगा।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ताला: ईरान के फैसले से तेल सप्लाई पर संकट, दुनिया में बढ़ी युद्ध की आशंका

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ताला: ईरान के फैसले से तेल सप्लाई पर संकट, दुनिया में बढ़ी युद्ध की आशंका


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार अब इस जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही। यह फैसला अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हालिया हमलों के जवाब में लिया गया बताया जा रहा है। हालांकि तेहरान ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को मिले संदेशों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है।

    यूरोपीय संघ की नौसैनिक मिशन ऑपरेशन एस्पाइड्स के एक अधिकारी के मुताबिक शनिवार को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को वीएचएफ रेडियो पर चेतावनी संदेश मिला कि जलडमरूमध्य से कोई भी पोत पार नहीं हो सकता। ये संदेश कथित तौर पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की ओर से प्रसारित किए गए। इसी बीच यूके मारिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अमेरिका ने अपने व्यावसायिक जहाजों को खाड़ी क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी जारी की है ताकि किसी संभावित हमले से बचा जा सके।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। सऊदी अरब ईरान इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी मार्ग से होकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक पहुंचता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में अगर यह मार्ग बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है जिसका असर ईंधन परिवहन और महंगाई दर पर पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही अस्थिरता से जूझ रही है ऐसे में यह घटनाक्रम नई चुनौती बनकर उभरा है।

    तनाव की जड़ हालिया सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। अमेरिका और इजरायल ने कथित तौर पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर बड़े हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास हमलों की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन कार्रवाइयों को मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस बताया। जवाब में ईरान ने ट्रुथफुल प्रॉमिस 4 अभियान चलाते हुए इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। कतर यूएई सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को भी निशाना बनाए जाने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। तेहरान में धमाके और तेल अवीव में सायरन इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लंबे समय तक जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं रख पाएगा क्योंकि इससे उसके अपने तेल निर्यात और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। फिर भी यह कदम एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो सकता है जिससे महंगाई और व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ेगा। कुल मिलाकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा यह तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।

  • जलालाबाद में पाकिस्तानी फाइटर जेट क्रैश, पायलट जिंदा पकड़ा गया अफगानिस्तान-पाक संघर्ष ने लिया खतरनाक मोड़

    जलालाबाद में पाकिस्तानी फाइटर जेट क्रैश, पायलट जिंदा पकड़ा गया अफगानिस्तान-पाक संघर्ष ने लिया खतरनाक मोड़


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य टकराव शनिवार सुबह उस समय और भड़क उठा जब पूर्वी अफगानिस्तान के शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अफगान सैन्य और पुलिस सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी AFP ने दावा किया है कि विमान का पायलट जिंदा पकड़ा गया है और उसे अफगान सेना ने बंदी बना लिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है।

    प्रत्यक्षदर्शियों और एएफपी के पत्रकारों के मुताबिक शनिवार सुबह शहर खासकर हवाई अड्डे के आसपास दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी। धमाकों से ठीक पहले आसमान में तेज रफ्तार से उड़ते जेट की गड़गड़ाहट सुनाई दी थी। कुछ ही मिनटों में विमान के क्रैश होने की खबर फैल गई। रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम जलालाबाद जो नंगरहार प्रांत की राजधानी है और काबुल से पाकिस्तानी सीमा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है अब इस संघर्ष का नया केंद्र बनता दिख रहा है। यहां हुआ यह घटनाक्रम सीधे तौर पर पाकिस्तान की सैन्य सक्रियता और अफगानिस्तान के कड़े प्रतिरोध का संकेत माना जा रहा है।

    इस बीच पाकिस्तान सरकार ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। पाकिस्तान के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने एक टीवी कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि जब तक तालिबान अपनी गुरिल्ला मानसिकता नहीं छोड़ता पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा यह युद्ध हम जीतेंगे और इसका अंत तय है। अगर यह सीधे रास्ते से हल नहीं हुआ तो हम कठोर दृष्टिकोण अपनाकर इसे पूरी तरह समाप्त करेंगे। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

    एक ओर सीमा पर तोपों और विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय हो गया है। अफगान विदेश मंत्रालय के दूसरे राजनीतिक निदेशक जाकिर जलाली के अनुसार अफगानिस्तान वैध और जिम्मेदार सैन्य अभियान के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी स्थिति से अवगत करा रहा है। अफगान अधिकारियों ने तुर्किये कतर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से विस्तृत परामर्श किया है। तालिबान प्रशासन इन देशों के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल पाकिस्तानी घुसपैठ के जवाब में की जा रही रक्षात्मक कार्रवाई है।

    शुक्रवार को तालिबान वायुसेना द्वारा इस्लामाबाद के नजदीक किए गए हमलों के बाद शनिवार को जलालाबाद में पाकिस्तानी विमान का गिरना और पायलट का पकड़ा जाना पाकिस्तान के लिए बड़ा सैन्य और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद लगभग टूट चुका है और हालात सीमाई झड़प से आगे बढ़कर व्यापक युद्ध की शक्ल लेते दिख रहे हैं। जलालाबाद और आसपास के इलाकों में आम नागरिकों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल है। लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन को मजबूर हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस तेजी से बिगड़ते घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

  • आखिरी ओवर में टूटा सपना: कप्तान दसुन शनाका ने फैंस से मांगी माफी, बताई बाहर होने की वजह

    आखिरी ओवर में टूटा सपना: कप्तान दसुन शनाका ने फैंस से मांगी माफी, बताई बाहर होने की वजह


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंका का सफर बेहद नाटकीय लेकिन निराशाजनक अंदाज में खत्म हुआ। सुपर 8 के अपने आखिरी मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ मिली रोमांचक हार ने टीम को सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया। मैच इतना करीबी था कि आखिरी दो गेंदों तक श्रीलंका जीत की दहलीज पर खड़ा था लेकिन बाज़ी पाकिस्तान के पक्ष में पलट गई। इस हार के बाद श्रीलंकाई कप्तान दसुन शनाका ने न सिर्फ अपनी निराशा जाहिर की बल्कि देश के फैंस से माफी भी मांगी।

    पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में शनाका ने स्वीकार किया कि वे मैच को फिनिश कर सकते थे लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद करीबी मुकाबला था और वे जिम्मेदारी लेते हैं कि आखिरी क्षणों में टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी। उन्होंने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव के क्षणों में शानदार गेंदबाजी की जिसने मैच का रुख बदल दिया।

    पूरे टूर्नामेंट पर नजर डालें तो यह श्रीलंका के लिए कठिन अभियान रहा। टीम ने अपने सात में से चार मैच गंवाए जिनमें सुपर 8 के तीन मुकाबले शामिल थे। अपनी सरजमीं पर खेलने के बावजूद टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। शनाका ने साफ कहा कि चोटों ने टीम का संतुलन बिगाड़ दिया। प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने संयोजन और रणनीति दोनों को प्रभावित किया जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा।

    खास तौर पर वानिंदु हसरंगा और मथीशा पथिराना के टूर्नामेंट से बाहर होने को कप्तान ने बड़ा झटका बताया। शनाका ने कहा कि ये दोनों सिर्फ खास गेंदबाज नहीं बल्कि टीम की रणनीतिक ताकत थे। वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर ऐसे खिलाड़ियों की कमी साफ महसूस होती है। उनके अनुसार अगर टीम पूरी तरह फिट होती तो सेमीफाइनल तक पहुंचना असंभव नहीं था।

    आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शनाका ने आत्ममंथन का संकेत दिया। उन्होंने माना कि एक खिलाड़ी होने के नाते दबाव महसूस होता है और कभी कभी प्रतिक्रिया भावनात्मक हो सकती है। उन्होंने फैंस से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था और वे भविष्य में इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे। उनका यह भावुक संदेश साफ करता है कि हार ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है।

    हालांकि निराशा के बीच उन्होंने भविष्य की उम्मीद भी दिखाई। युवा बल्लेबाज पवन रथनायके की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और क्रीज का शानदार उपयोग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने वेलालगे जैसे उभरते खिलाड़ियों को श्रीलंकाई क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य बताया। शनाका ने भरोसा जताया कि चोटिल खिलाड़ी जल्द वापसी करेंगे और टीम नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरेगी।

    अंत में सिंहली भाषा में फैंस को संबोधित करते हुए शनाका ने दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि दर्शकों का समर्थन देखकर उन्हें जीत की उम्मीद थी। उन्होंने स्वीकार किया कि हार से वे बेहद निराश हैं लेकिन एक टीम के रूप में वे मजबूत वापसी का वादा करते हैं। श्रीलंका का यह विश्व कप अभियान भले ही अधूरा रह गया हो लेकिन कप्तान का आत्मस्वीकृति और जिम्मेदारी लेना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण

    युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और इजरायल पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों का मुकाबला कर सके।

    अमेरिका के तीन प्रमुख लक्ष्य
    सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर हमले के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकना। अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा न बन सके।

    वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल उन हमलों का प्रतिकार है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ताकत इतनी नहीं कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। उसे अपने मिसाइल और सीमित संसाधनों के सहारे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करना कठिन होगा, इसलिए अंततः बातचीत की मेज पर आने की नौबत आएगी।

    ईरान की सीमित ताकत

    पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, ईरान की एयरफोर्स कमजोर है और हिज़बुल्ला तथा कुछ शिया संगठनों का समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। जबकि रूस फिलहाल हथियारों की मदद नहीं दे सकता, चीन कुछ हथियारों से सहायता कर सकता है, लेकिन यह भी अमेरिका और इजरायल के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान के लिए लंबा युद्ध संभव नहीं और उसकी संभावित तबाही तय है।

    तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से मध्य-पूर्व में तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत इन देशों से तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों और आपूर्ति में बाधा देश के लिए चुनौती बनेगी। अमेरिका के पास वेनेजुएला से तेल का विकल्प मौजूद है, जबकि भारत रूस से तेल खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।

    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती
    लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि ईरान, इजरायल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि ईरान के हमले ज्यादातर अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मिसाइलों के भटकने का खतरा भी पूरी तरह टला नहीं जा सकता।
  • कूनो नदी में 10 घड़ियाल और कछुए करेंगे आज सुबह प्राकृतिक आवास में प्रवेश, CM मोहन यादव करेंगे उद्धार अभियान का शुभारंभ

    कूनो नदी में 10 घड़ियाल और कछुए करेंगे आज सुबह प्राकृतिक आवास में प्रवेश, CM मोहन यादव करेंगे उद्धार अभियान का शुभारंभ


    मध्यप्रदेश के मोहन यादव आज 1 मार्च 2026 को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में वन्यजीव संरक्षण अभियान के तहत घड़ियाल और कछुए छोड़ने के कार्यक्रम में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर करीब एक बजे हेलीकॉप्टर से कूनो पहुंचेंगे। यहां कूनो नदी में 10 घड़ियालों और कुछ कछुओं को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह पहल राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य कूनो नेशनल पार्क में जैव विविधता को मजबूत करना तथा नदी पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखना है।

    बताया गया है कि यह कार्यक्रम पहले 28 फरवरी को प्रस्तावित था, लेकिन उस दिन मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं हो सके थे। उस समय बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों को कूनो में छोड़ने की योजना थी, जिसमें केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने भाग लिया। आज का कार्यक्रम पुनर्निर्धारित रूप से घड़ियाल और कछुए संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया है।

    सीएम के आगमन को देखते हुए कूनो क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में कोई चूक न हो।

    विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियाल और कछुए नदी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। इनकी उपस्थिति से जलाशयों का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। इस तरह के संरक्षण प्रयास लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा में मदद करते हैं और क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में पहचान दिलाने में भी सहायक होते हैं।

    कूनो में लगभग एक घंटे का प्रवास पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव हेलीकॉप्टर से अशोकनगर के लिए रवाना होंगे। यह कार्यक्रम न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राज्य में जैव विविधता और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रतीक भी माना जा रहा है।

  • MP Morning News: सीएम ग्वालियर-श्योपुर दौरे पर, बसों की हड़ताल रद्द, कूनो पहुंचे 9 नए चीते और मार्च में खुलेंगे सभी बिजली बिल केंद्र

    MP Morning News: सीएम ग्वालियर-श्योपुर दौरे पर, बसों की हड़ताल रद्द, कूनो पहुंचे 9 नए चीते और मार्च में खुलेंगे सभी बिजली बिल केंद्र


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सुबह की ताज़ा खबरों में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दौरे से लेकर बसों की हड़ताल रद्द होने और कूनो नेशनल पार्क में नए चीते के आगमन तक की जानकारी शामिल है। साथ ही मार्च में सभी छुट्टियों में बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे।

    सीएम डॉ मोहन यादव का दौरा

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आज रविवार को कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वे सुबह 11:00 बजे भोपाल से ग्वालियर के लिए रवाना होंगे। ग्वालियर में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद दोपहर 12:50 बजे श्योपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। श्योपुर में घड़ियाल और कछुओं का रिलीज कार्यक्रम होगा। इसके बाद दोपहर 2:40 बजे अशोकनगर में स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे और शाम 4:25 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।

    2 मार्च को बसों की हड़ताल रद्द
    मध्य प्रदेश में 2 मार्च को बसों की हड़ताल नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बैठक के बाद बस ऑपरेटरों ने हड़ताल रद्द करने का फैसला लिया। परिवहन विभाग से जुड़े विवादित राजपत्र फिलहाल होल्ड पर रहेंगे। इस फैसले के बाद राज्य में बसों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

    चार साल में 56,128 आत्महत्या के मामले

    मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2022 से अब तक 56,128 लोगों ने खुदकुशी की है। डिप्रेशन से जुड़े मामलों में 7,000 से अधिक मौतें हुई हैं। पारिवारिक कलह, नशे की लत, आर्थिक तंगी और कर्ज जैसे कारणों से यह संख्या बढ़ी है। आंकड़े इस प्रकार हैं:

    14% डिप्रेशन से

    11% लंबी बीमारियों से

    9% नशे की लत से

    7% कर्ज/आर्थिक तंगी से

    5% अकेलेपन के कारण

    4% प्रेम प्रसंग में असफलता

    कूनो नेशनल पार्क में 9 नए चीते

    बोत्सवाना से 6 मादा और 3 नर चीते शनिवार को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। अब देश में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है, जिसमें 45 कूनो में और 3 गांधीसागर में हैं।

    मार्च में सभी छुट्टियों में खुलेंगे बिजली बिल केंद्र

    मार्च में राज्य के सभी अवकाशों पर भी बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे। इसमें शनिवार, रविवार और त्योहार जैसे होली 3 मार्च गुड़ी पड़वां 19 मार्च जमात उल विदा ईद उल-फितर 20 मार्च रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, रामनवमीं 27 मार्च और महावीर जयंती 31 मार्च शामिल हैं।मध्य प्रदेश में ये फैसले और कार्यक्रम नागरिकों के लिए राहत और सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिए गए हैं।

  • ईरान-इजरायल जंग का असर: अबू धाबी के हिंदू मंदिर पर लटके ताले, आसमानी हमलों से दहला रेगिस्तान

    ईरान-इजरायल जंग का असर: अबू धाबी के हिंदू मंदिर पर लटके ताले, आसमानी हमलों से दहला रेगिस्तान


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में छिड़ा भीषण युद्ध अब आस्था के केंद्रों तक पहुँच गया है। ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगियों पर किए जा रहे विनाशकारी पलटवार का सीधा असर अब अबू धाबी स्थित भव्य हिंदू मंदिर पर भी देखने को मिला है। ताजा सुरक्षा हालातों और आसमान से बरसती मिसाइलों के खतरे को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मंदिर को दर्शनार्थियों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की तरफ से संयुक्त अरब अमीरात UAE को निशाना बनाकर लगातार दागी जा रही मिसाइलों और ‘शाहेद’ ड्रोन्स की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा व्यवस्था को डिलीट कर नई चुनौतियाँ पेश कर दी हैं। मंदिर प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं और इस कठिन समय में शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, युद्ध की विभीषिका थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान की तरफ से आ रही मिसाइलों की दूसरी बड़ी खेप की पुष्टि खुद संयुक्त अरब अमीरात की रक्षा प्रणालियों ने की है। अमीरात के सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने कई ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है, लेकिन मलबे के गिरने और संभावित खतरों को देखते हुए यूएई ने अपना हवाई क्षेत्र भी अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। मंदिर बंद होने से वहां पहुँचने वाले श्रद्धालुओं में भारी निराशा है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि होने के कारण प्रशासन ने किसी भी प्रकार की ढील देने से मना कर दिया है।

    अबू धाबी का यह मंदिर न केवल वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है बल्कि वैश्विक शांति का प्रतीक भी माना जाता है, लेकिन वर्तमान में युद्ध के बादलों ने इसकी रौनक को अस्थाई रूप से ढक दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूएई सरकार पल-पल की निगरानी कर रही है और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है। मंदिर के द्वार फिर कब खुलेंगे, यह पूरी तरह से आगामी सैन्य घटनाक्रमों और क्षेत्र की शांति बहाली पर निर्भर करेगा।

  • ईरान का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' पर पलटवार: बुर्ज खलीफा के पास गिरे ड्रोन, यूएई में हाई अलर्ट और दहशत का माहौल

    ईरान का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' पर पलटवार: बुर्ज खलीफा के पास गिरे ड्रोन, यूएई में हाई अलर्ट और दहशत का माहौल


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ खाड़ी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर दुबई में भी अब युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जवाब में ईरान ने भीषण पलटवार किया है, जिसका सीधा असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख शहरों पर देखने को मिला है। सबसे चौंकाने वाली खबर दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा से जुड़ी है, जहाँ सुरक्षा कारणों और आसपास हुए विस्फोटों के चलते पूरी इमारत को खाली करा लिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बुर्ज खलीफा को अभी तक सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया है और न ही इसे कोई भौतिक नुकसान पहुँचा है, लेकिन एहतियातन इसे खाली कराना शहर में व्याप्त गहरी चिंता और डर का प्रतीक बन गया है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बुर्ज खलीफा के आसपास के क्षेत्र में भारी विस्फोट और काला धुआं उठता हुआ साफ़ देखा जा सकता है। कुछ वीडियो में ईरानी ‘शाहेद’ ड्रोन दो बड़ी इमारतों के बीच गिरते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे वहां भी जोरदार धमाका हुआ। ईरान ने इस जवाबी कार्रवाई के तहत खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना लक्ष्य बनाया है, लेकिन इसकी चपेट में दुबई और अबू धाबी जैसे नागरिक इलाके भी आ गए हैं। अबू धाबी में मिसाइल का मलबा गिरने से एक नागरिक की मौत की खबर है, जबकि दुबई के मशहूर ‘पाम जुमेराह’ इलाके में एक होटल के पास हुए विस्फोट में चार लोग घायल हुए हैं। यूएई की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को बीच हवा में ही नष्ट करने में सफलता पाई है, लेकिन गिरते हुए मलबे ने शहर की शांति को डिलीट कर दहशत फैला दी है।

    ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस हमले को जायज ठहराते हुए कहा है कि वे आक्रामकों के खिलाफ निर्णायक जवाब देना जारी रखेंगे। इस हमले के बाद दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह रोक दिया गया है और पूरे शहर में लोग डर के मारे अपने घरों में दुबक गए हैं। दुबई मीडिया ऑफिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अफवाहें न फैलाएं और शांति बनाए रखें। यह घटना न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है, बल्कि कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देशों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। फिलहाल, बुर्ज खलीफा को खाली कराने और शहर में हुए इन विस्फोटों ने दुबई की वैश्विक छवि और सुरक्षा दावों को भी प्रभावित किया है। आने वाले समय में यह संघर्ष कितना और फैलता है, यह पूरी तरह से वैश्विक शक्तियों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।