द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार की शाम शनि देव की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय मानी जाती है। इस दौरान पीपल के वृक्ष के पास दीप प्रज्वलन कर परिक्रमा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। पीपल को ब्रह्मा विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है और शनि देव का भी इससे विशेष संबंध बताया गया है।
शनि दोष से बचाव के लिए हनुमान जी की उपासना को भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी की भक्ति से शनि देव के कष्टकारी प्रभाव शांत हो जाते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से भय बाधा और मानसिक तनाव में कमी आने की मान्यता है। यह उपाय उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है जो लंबे समय से कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
दान को शनि दोष निवारण का अहम हिस्सा माना गया है। शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से कर्म सुधारने का अवसर मिलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि शनि देव दान और सेवा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही शनि मंत्र का नियमित जाप भी लाभकारी माना जाता है। मंत्र जाप से आत्मसंयम धैर्य और सहनशीलता बढ़ती है जो शनि ग्रह के मूल गुण माने जाते हैं।हालांकि शनिवार के दिन कुछ बातों में सावधानी बरतने की सलाह भी दी जाती है। इस दिन जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए। क्रोध अहंकार और दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाले व्यवहार से दूर रहना शुभ माना गया है। सरल जीवनशैली संयमित दिनचर्या और जिम्मेदारीपूर्ण आचरण शनि देव को प्रसन्न करने का आधार माने जाते हैं।
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार के उपाय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये उपाय व्यक्ति के जीवन में अनुशासन धैर्य और जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। नियमित रूप से इन परंपराओं को अपनाने से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

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करीना, आलिया, परिणीति और इलियाना ने दी श्रद्धांजलि
हॉलीवुड से लेकर वैश्विक पॉप कल्चर तक अमिट छाप

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली दौरे के दौरान कहा कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर विधानसभा हर कॉलोनी और हर घर तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि महरौली अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ अब आधुनिक सुविधाओं की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विकास योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि महरौली की ऐतिहासिक भव्यता को सुरक्षित रखते हुए उसे इक्कीसवीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और भविष्य का निर्माण दोनों साथ साथ किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुव्यवस्थित महरौली मिल सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली को केवल विज्ञापनों में चमकाने का काम किया। महरौली की विरासत स्थानीय जरूरतें और नागरिकों की अपेक्षाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की राजनीति सत्ता केंद्रित नहीं बल्कि सेवा सुशासन और विकास पर आधारित है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है उनका उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्राचीन सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में दर्शन कर पूजा की। उन्होंने कहा कि माता योगमाया शक्ति संरक्षण और धर्म की दिव्य चेतना हैं जिनकी कृपा से यह क्षेत्र सदियों से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने माता से प्रार्थना की कि हर परिवार के जीवन में सुख स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पहुंचकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की कृपा से समाज में सेवा समर्पण और समानता की भावना निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने इस अवसर पर सप्तम पातशाह गुरु हर राय साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की सभी को शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री के इस दौरे को महरौली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।

घटना शुक्रवार रात करीब एक बजकर पचास मिनट की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार जब घर में बच्चे की मौजूदगी नजर नहीं आई तो उसकी तलाश की गई। इसी दौरान वह घर की बालकनी में बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। घबराए परिजन बिना समय गंवाए उसे कमला नेहरू अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने गंभीर हालत में उसका इलाज शुरू किया लेकिन शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।
गौतम नगर थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मृतक की पहचान इब्राहिम पिता रिजवान लाला के रूप में हुई है। इब्राहिम अपने परिवार के साथ जेपी नगर क्षेत्र में रहता था और पास के स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र था। उसके पिता बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का काम करते हैं। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई।
शनिवार सुबह फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। बालकनी और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि बच्चे के सिर में गोली लगी थी। हालांकि गोली किस दिशा से आई और किस हथियार से चलाई गई इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।
जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि बच्चे के घर में देर रात तक बाहरी युवकों का आना जाना होता था। स्थानीय लोगों और शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पिता के मेलजोल के चलते कुछ बाहरी युवक अक्सर घर आते थे। पुलिस इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हर संभावित एंगल से जांच कर रही है।थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामला किसी दुर्घटना से जुड़ा है लापरवाही का परिणाम है या किसी आपराधिक साजिश से संबंधित है। घर के सभी सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि घर में कोई हथियार मौजूद था या गोली बाहर से आई।
बच्चे की मौत के बाद पड़ोसियों और परिचितों में गहरा शोक है। लोगों का कहना है कि इब्राहिम शांत स्वभाव का बच्चा था और नियमित रूप से स्कूल जाता था। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि यदि किसी भी तरह की लापरवाही या अपराध सामने आता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पिछले वर्ष जुलाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्विट्जरलैंड के लुजान स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति आईओसी मुख्यालय का दौरा किया और गुजरात के अहमदाबाद को संभावित मेजबान शहर के रूप में प्रस्तुत किया। अहमदाबाद और गांधीनगर को मिलाकर तैयार की गई योजना में करीब 4.1 से 7.5 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईओसी ने बातचीत के दौरान तीन प्रमुख चिंताएं जताईं भारतीय ओलंपिक संघ के भीतर प्रशासनिक खामियां, डोपिंग के बढ़ते मामले और ओलंपिक खेलों में भारत का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन।
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। स्पोर्ट्स मेडिसिन और एंटी-डोपिंग विशेषज्ञ पी.एस.एम. चंद्रन का मानना है कि इन चुनौतियों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार डोपिंग के आंकड़े इसलिए अधिक दिखते हैं क्योंकि भारत अन्य देशों की तुलना में ज्यादा परीक्षण करता है। उनका यह भी कहना है कि बोली प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका पैसे और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की होती है, न कि केवल पदकों की संख्या की।
दूसरी ओर, खेल प्रशासक शाजी प्रभाकरन का मानना है कि भारत को अब स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के जरिए अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखना चाहिए। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इंडोनेशिया, तुर्की, चिली, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देशों से मुकाबला कड़ा होगा। उनके अनुसार, यदि भारत 2036 की रेस में सफल नहीं होता, तो 2040 का दशक ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।
पूर्व ओलंपियन और लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की दावेदारी की प्रबल समर्थक हैं। उनका कहना है कि ग्रासरूट टैलेंट प्रोग्राम और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल जैसे कदम भारत को ओलंपिक मेजबानी के लिए तैयार कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ खेल पत्रकार शारदा उग्रा आगाह करती हैं कि प्रदूषण, शहरी बुनियादी ढांचा और वैश्विक छवि जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक अहमदाबाद को एक पूर्ण वैश्विक शहर के रूप में खुद को साबित करने के लिए अभी समय चाहिए। कुल मिलाकर, 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश खेल प्रशासन, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर ठोस और विश्वसनीय प्रगति दिखा सके।

सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने हनुमान अखाड़ा में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कुश्ती के दाव पेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहने वाले सतपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता 19 साल की उम्र में 1974 में क्राइस्टचर्च कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ मिली। इसके बाद 1978 एलबर्टा और 1982 ब्रिसबेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता। एशियन गेम्स में 1974 तेहरान में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और 1982 नई दिल्ली में हैवीवेट स्वर्ण पदक उनके करियर की विशेष उपलब्धियां हैं। 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुष फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।
सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी माहिर रहे। भारत कुमार, रुस्तम-ए-हिंद, भारत केसरी, महाभारत केसरी, रुस्तम-ए-जमान और हिंद केसरी सहित कई राष्ट्रीय खिताब उन्होंने अपने नाम किए। उन्हें महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।खिलाड़ी जीवन से संन्यास के बाद सतपाल सिंह 1988 से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग कर रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती का हब माना जाता है। उन्होंने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया।भारतीय कुश्ती में योगदान के लिए सतपाल सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान और 2015 में पद्मभूषण उनकी असाधारण उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं।
70 साल की उम्र में भी सतपाल सिंह सक्रिय हैं और लगातार नए पहलवानों को प्रशिक्षित कर देश का नाम रोशन करने में जुटे हैं। उनके अनुशासन, मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण ने उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रेरक बना दिया है।

हलवा सेरेमनी का और भी महत्व