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  • Sankashti Chaturthi 2026: फरवरी में कब है संकष्टी चतुर्थी व्रत? नोट करें सही डेट और जानें गणपति की पूजा का शुभ मुहूर्त

    Sankashti Chaturthi 2026: फरवरी में कब है संकष्टी चतुर्थी व्रत? नोट करें सही डेट और जानें गणपति की पूजा का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व माना गया है जो कि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है. इस दिन भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया जाता है और कहते हैं कि गणपति जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से सभी संकटों को दूर करते हैं. फाल्गुन माह और फरवरी का महीना शुरू होने वाला है, ऐसे में आइए जानते हैं फाल्गुन में कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त.

    द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट

    बता दें कि फाल्गुन में आने वाले संकष्टी चतुर्थी व्रत को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और 6 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयाति​थि के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा.क्या आपको छोटी-छोटी बात पर आता है गुस्सा! तो कुंडली का ये ग्रह कर रहा है परेशान, जानिए इससे बचने के उपाय

    द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
    द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह 5 बजकर 22 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इसके अलावा शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. यदि इन मुहूर्त में पूजा न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त को भी शुभ जाता है और 5 फरवरी को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा.

    द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि
    संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और मंदिर को स्वच्छ करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें. फिर गणेश जी को सिंदूर, चंदन, अक्षत, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मोदक का भोग लगाएं. फिर संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़े व गणेश जी की आरती करें. इसके बाद दिनभर फलाहार करें और रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें. इस व्रत को रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

  • आर्थिक तनाव और मानसिक चिंता से राहत, शनिवार के उपायों से शनि का अशुभ प्रभाव होगा शांत

    आर्थिक तनाव और मानसिक चिंता से राहत, शनिवार के उपायों से शनि का अशुभ प्रभाव होगा शांत


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना गया है। शनि ग्रह को कर्म न्याय और अनुशासन का प्रतीक कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार जब कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ होती है या साढ़ेसाती अथवा ढैया का प्रभाव चलता है तब व्यक्ति को आर्थिक मानसिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में शनिवार को किए गए पारंपरिक उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार की शाम शनि देव की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय मानी जाती है। इस दौरान पीपल के वृक्ष के पास दीप प्रज्वलन कर परिक्रमा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। पीपल को ब्रह्मा विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है और शनि देव का भी इससे विशेष संबंध बताया गया है।

    शनि दोष से बचाव के लिए हनुमान जी की उपासना को भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी की भक्ति से शनि देव के कष्टकारी प्रभाव शांत हो जाते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से भय बाधा और मानसिक तनाव में कमी आने की मान्यता है। यह उपाय उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है जो लंबे समय से कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

    दान को शनि दोष निवारण का अहम हिस्सा माना गया है। शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से कर्म सुधारने का अवसर मिलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि शनि देव दान और सेवा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही शनि मंत्र का नियमित जाप भी लाभकारी माना जाता है। मंत्र जाप से आत्मसंयम धैर्य और सहनशीलता बढ़ती है जो शनि ग्रह के मूल गुण माने जाते हैं।हालांकि शनिवार के दिन कुछ बातों में सावधानी बरतने की सलाह भी दी जाती है। इस दिन जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए। क्रोध अहंकार और दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाले व्यवहार से दूर रहना शुभ माना गया है। सरल जीवनशैली संयमित दिनचर्या और जिम्मेदारीपूर्ण आचरण शनि देव को प्रसन्न करने का आधार माने जाते हैं।

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार के उपाय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। ये उपाय व्यक्ति के जीवन में अनुशासन धैर्य और जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। नियमित रूप से इन परंपराओं को अपनाने से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

  • IND vs PAK Live Telecast: भारत बनाम पाकिस्तान महामुकाबले के लिए हो जाएं तैयार, जानें कब और कितने बजे शुरू होगा मैच

    IND vs PAK Live Telecast: भारत बनाम पाकिस्तान महामुकाबले के लिए हो जाएं तैयार, जानें कब और कितने बजे शुरू होगा मैच

    नई दिल्ली । IND बनाम PAK अंडर-19 वर्ल्ड कप मैच का लाइव टेलीकास्ट: इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप का बहुप्रतीक्षित मैच रविवार, 1 फरवरी को खेला जाना है। आमतौर पर आईसीसी इवेंट में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक ही ग्रुप में होती है और शुरुआती चरण में ही फैंस को भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला देखने को मिल जाता है। मगर अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान की टीमों को अलग-अलग ग्रुप में रखा गया था, अब सुपर-6 में इन दो चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह ‘महामुकाबला’ खेला जाना है। इंडिया वर्सेस पाकिस्तान का यह मैच रोमांच से भरा होगा, क्योंकि इन दोनों में से ही एक टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेगी।
    अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए अभी तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टीमें क्वालीफाई कर चुकी है। चौथी टीम का फैसला इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच से होगा। अगर भारत जीतता है तो उसे सीधा-सीधा सेमीफाइनल का टिकट मिल जाएगा, वहीं अगर पाकिस्तान जीतता है तो मामला नेट रन रेट पर फंसेगा। आईए इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप मुकाबले से जुड़ी अहम जानकारियों पर एक नजर डलते हैं- India vs Pakistan अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच कब खेला जाएगा इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच रविवार, 1 फरवरी को खेला जाएगा।

    IND vs PAK U19 World Cup 2026 सुपर-6 का 12वां मैच कहां खेला जाएगा?

    India vs Pakistan अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, बुलावेयो में खेला जाएगा। इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच कितने बजे शुरू होगा IND vs PAK U19 World Cup 2026 सुपर-6 का 12वां मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे।

    India vs Pakistan अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच टीवी पर कैसे देखें लाइव?

    इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच टीवी पर आप लाइव स्टार स्पोर्ट्स पर देख सकते हैं। IND vs PAK U19 World Cup 2026 सुपर-6 के 12वें मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कैसे देखें? इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 के 12वें मैच की लाइव स्ट्रीमिंग का लुत्फ आप जियोहॉटस्टार पर उठा सकते हैं।

    इंडिया वर्सेस पाकिस्तान स्क्वॉड
    भारतीय अंडर-19 वर्ल्ड कप स्क्वॉड आयुष म्हात्रे कप्तान आरएस अंबरीश, कनिष्क चौहान, दीपेश देवेन्द्रन, मोहम्मद एनान, आरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलान पटेल, हरवंश पंगालिया, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप स्क्वॉड- उमर ज़ैब, समीर मिन्हास, नकाब शफीक, मोहम्मद शायान, मोहम्मद सय्याम, मोमिन कमर, हुजैफा अहसन, हमजा जहूर, दानियाल अली खान, अली रजा, अली हसन बलूच, अहमद हुसैन, अब्दुल सुभान, उस्मान खान, फरहान यूसुफ कप्तान
  • Catherine O’Hara Death: हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री को बॉलीवुड सितारों ने दी श्रद्धांजलि, करीना-आलिया समेत कई सेलेब्स भावुक

    Catherine O’Hara Death: हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री को बॉलीवुड सितारों ने दी श्रद्धांजलि, करीना-आलिया समेत कई सेलेब्स भावुक


    नई दिल्ली । दुनियाभर में शोक की लहर, बॉलीवुड ने भी जताया दुख हॉलीवुड की दिग्गज और एमी अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री कैथरीन ओहारा के निधन से दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों में शोक की लहर है। होम अलोन और शिट्स क्रीक जैसी आइकॉनिक फिल्मों और सीरीज से पहचान बनाने वाली कैथरीन ओ’हारा का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया श्रद्धांजलियों से भर गया। भारत में भी कई बॉलीवुड सितारों ने उन्हें याद करते हुए भावुक पोस्ट साझा कि।

    करीना, आलिया, परिणीति और इलियाना ने दी श्रद्धांजलि

    कैथरीन ओ’हारा के निधन पर बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिवंगत अभिनेत्री की तस्वीर साझा करते हुए टूटे दिल वाला इमोजी लगाया। वहीं करीना कपूर खान ने ‘शिट्स क्रीक’ में कैथरीन के लोकप्रिय किरदार मोइरा रोज के मशहूर डायलॉग्स को शेयर करते हुए लिखा, 
    परिणीति चोपड़ा ने उन्हें श्रीमती रोज़ कहकर याद किया और लिखा स्वर्ग को अपनी नई लीडिंग लेडी मिल गई है। बिपाशा बसु ने एक भावुक वीडियो शेयर कर अपना दुख जाहिर किया। इलियाना डिक्रूज ने कैथरीन को अद्वितीय कलाकार बताते हुए इस नुकसान को बेहद निजी और दिल तोड़ने वाला बताया। वहीं इसाबेल कैफ ने भी उन्हें लीजेंड कहते हुए श्रद्धांजलि दी।

    हॉलीवुड से लेकर वैश्विक पॉप कल्चर तक अमिट छाप

    कैथरीन ओ’हारा का प्रभाव सिर्फ हॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा। उनके किरदारों ने सीमाओं, भाषाओं और पीढ़ियों को पार करते हुए दुनियाभर के दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। सोशल मीडिया पर उनके मशहूर डायलॉग्स, सीन और किरदारों को याद करते हुए फैंस और कलाकारों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।

    पांच दशकों का शानदार अभिनय सफर
    कनाडा में जन्मीं कैथरीन ओ’हारा ने अपने करियर की शुरुआत स्केच कॉमेडी से की थी। इसके बाद उन्होंने फिल्म और टेलीविजन में कई यादगार किरदार निभाए। ‘होम अलोन’ में मां के किरदार से लेकर ‘बीटलजूस’ और शिट्स क्रीक तक उन्होंने हर रोल में अपनी अलग छाप छोड़ी। शिट्स क्रीक में मोइरा रोज के किरदार के लिए उन्हें 2020 में एमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जिससे वह नई पीढ़ी की पसंदीदा स्टार बन गईं।

    लॉस एंजिलिस में ली अंतिम सांस
    कैथरीन ओ’हारा का निधन 30 जनवरी को लॉस एंजिलिस स्थित उनके आवास पर एक संक्षिप्त बीमारी के बाद हुआ। उनके प्रतिनिधि ने उनके निधन की पुष्टि की। उनके जाने से फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री को अपूरणीय क्षति हुई है।

  • योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता

    योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता


    नई दिल्ली में शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए 135 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हुए सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में पूजा अर्चना की और गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली दौरे के दौरान कहा कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर विधानसभा हर कॉलोनी और हर घर तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि महरौली अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ अब आधुनिक सुविधाओं की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विकास योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि महरौली की ऐतिहासिक भव्यता को सुरक्षित रखते हुए उसे इक्कीसवीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और भविष्य का निर्माण दोनों साथ साथ किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुव्यवस्थित महरौली मिल सके।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली को केवल विज्ञापनों में चमकाने का काम किया। महरौली की विरासत स्थानीय जरूरतें और नागरिकों की अपेक्षाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की राजनीति सत्ता केंद्रित नहीं बल्कि सेवा सुशासन और विकास पर आधारित है।

    रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है उनका उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्राचीन सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में दर्शन कर पूजा की। उन्होंने कहा कि माता योगमाया शक्ति संरक्षण और धर्म की दिव्य चेतना हैं जिनकी कृपा से यह क्षेत्र सदियों से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने माता से प्रार्थना की कि हर परिवार के जीवन में सुख स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पहुंचकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की कृपा से समाज में सेवा समर्पण और समानता की भावना निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने इस अवसर पर सप्तम पातशाह गुरु हर राय साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की सभी को शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री के इस दौरे को महरौली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।

  • राजधानी में दिल दहला देने वाली घटना बालकनी में खून से लथपथ मिला बच्चा

    राजधानी में दिल दहला देने वाली घटना बालकनी में खून से लथपथ मिला बच्चा


    भोपाल ।राजधानी भोपाल के गौतम नगर इलाके में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 12 वर्षीय छात्र की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। बच्चा अपने ही घर की बालकनी में खून से लथपथ और अचेत अवस्था में मिला था। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन इलाज के दौरान शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

    घटना शुक्रवार रात करीब एक बजकर पचास मिनट की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार जब घर में बच्चे की मौजूदगी नजर नहीं आई तो उसकी तलाश की गई। इसी दौरान वह घर की बालकनी में बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। घबराए परिजन बिना समय गंवाए उसे कमला नेहरू अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने गंभीर हालत में उसका इलाज शुरू किया लेकिन शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    गौतम नगर थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मृतक की पहचान इब्राहिम पिता रिजवान लाला के रूप में हुई है। इब्राहिम अपने परिवार के साथ जेपी नगर क्षेत्र में रहता था और पास के स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र था। उसके पिता बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का काम करते हैं। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई।

    शनिवार सुबह फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। बालकनी और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि बच्चे के सिर में गोली लगी थी। हालांकि गोली किस दिशा से आई और किस हथियार से चलाई गई इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

    जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि बच्चे के घर में देर रात तक बाहरी युवकों का आना जाना होता था। स्थानीय लोगों और शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पिता के मेलजोल के चलते कुछ बाहरी युवक अक्सर घर आते थे। पुलिस इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हर संभावित एंगल से जांच कर रही है।थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामला किसी दुर्घटना से जुड़ा है लापरवाही का परिणाम है या किसी आपराधिक साजिश से संबंधित है। घर के सभी सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि घर में कोई हथियार मौजूद था या गोली बाहर से आई।

    बच्चे की मौत के बाद पड़ोसियों और परिचितों में गहरा शोक है। लोगों का कहना है कि इब्राहिम शांत स्वभाव का बच्चा था और नियमित रूप से स्कूल जाता था। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि यदि किसी भी तरह की लापरवाही या अपराध सामने आता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा

    2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा


    नई दिल्ली । भारत ने 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए औपचारिक रूप से दावेदारी पेश कर दी है। यह कदम देश की खेल महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासनिक कमजोरियां, बुनियादी ढांचे की सीमाएं, पर्यावरणीय चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट जैसे सुधारों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स बल्कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी गंभीर प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के अवसर देना है।

    पिछले वर्ष जुलाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्विट्जरलैंड के लुजान स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति आईओसी मुख्यालय का दौरा किया और गुजरात के अहमदाबाद को संभावित मेजबान शहर के रूप में प्रस्तुत किया। अहमदाबाद और गांधीनगर को मिलाकर तैयार की गई योजना में करीब 4.1 से 7.5 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईओसी ने बातचीत के दौरान तीन प्रमुख चिंताएं जताईं भारतीय ओलंपिक संघ के भीतर प्रशासनिक खामियां, डोपिंग के बढ़ते मामले और ओलंपिक खेलों में भारत का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन।

    विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। स्पोर्ट्स मेडिसिन और एंटी-डोपिंग विशेषज्ञ पी.एस.एम. चंद्रन का मानना है कि इन चुनौतियों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार डोपिंग के आंकड़े इसलिए अधिक दिखते हैं क्योंकि भारत अन्य देशों की तुलना में ज्यादा परीक्षण करता है। उनका यह भी कहना है कि बोली प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका पैसे और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की होती है, न कि केवल पदकों की संख्या की।

    दूसरी ओर, खेल प्रशासक शाजी प्रभाकरन का मानना है कि भारत को अब स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के जरिए अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखना चाहिए। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इंडोनेशिया, तुर्की, चिली, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देशों से मुकाबला कड़ा होगा। उनके अनुसार, यदि भारत 2036 की रेस में सफल नहीं होता, तो 2040 का दशक ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

    पूर्व ओलंपियन और लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की दावेदारी की प्रबल समर्थक हैं। उनका कहना है कि ग्रासरूट टैलेंट प्रोग्राम और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल जैसे कदम भारत को ओलंपिक मेजबानी के लिए तैयार कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ खेल पत्रकार शारदा उग्रा आगाह करती हैं कि प्रदूषण, शहरी बुनियादी ढांचा और वैश्विक छवि जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक अहमदाबाद को एक पूर्ण वैश्विक शहर के रूप में खुद को साबित करने के लिए अभी समय चाहिए। कुल मिलाकर, 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश खेल प्रशासन, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर ठोस और विश्वसनीय प्रगति दिखा सके।

  • आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट

    आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट


    नई दिल्ली। टीवी शो अनुपमा इस समय दर्शकों की फेवरेट बन चुका है और टीआरपी चार्ट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रुपाली गांगुली का किरदार और उनके चर्चित डायलॉग सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका फेमस डायलॉग “इतना मारूंगी” फिर से वायरल हो गया है इस बार के कारण है बिग बॉस 19 के फेमस कंटेस्टेंट आवेज दरबार का रील वीडियो।

    वीडियो में आवेज इस डायलॉग पर अपने स्टाइलिश और मजेदार मूव्स के साथ डांस करते नजर आए, जिसे देखकर फैंस खूब एंटरटेन हो रहे हैं। वीडियो में अनुपमा के डायलॉग की लंबाई और मजाकिया अंदाज का पूरा मज़ा देखने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं कि “गिरा गिरा कर, दौड़ा दौड़ा कर, भगा भगा कर, जूता भिगो के, सैंडल तोड़ के, हाथ थक गए तो लातों से और पैर थक गए तो बातों से” मारेंगी।

    अनुज कपाड़िया और अन्य सितारों ने दिया रिएक्शन
    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो पर कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया दी। अनुपमा के अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) ने लिखा, “भाई ये तुम्हारा बेस्ट वाला है।” इसके अलावा अभिषेक बजाज मृदुल तिवारी, आकांक्षा खन्ना और किम शर्मा समेत कई अन्य सितारों ने भी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की।

    अनुपमा बनी टीआरपी टॉप पर
    अनुपमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इस हफ्ते शो ने 2.2 की टीआरपी हासिल की है, जो इसे टीआरपी चार्ट में टॉप पर रखती है। वहीं स्मृति ईरानी के शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी ने भी इसी 2.2 की टीआरपी के साथ कड़ी टक्कर दी। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अनुपमा के डायलॉग्स और वीडियोज़ का मज़ा ले रहे हैं, और इस बार आवेज दरबार की मस्ती भरी रील ने इसे और भी वायरल बना दिया है।

  • महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए

    महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए


    नई दिल्ली। में भारतीय कुश्ती के दिग्गज सतपाल सिंह का नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है। सतपाल सिंह ने न केवल एक पहलवान के रूप में अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए देश का प्रतिनिधित्व किया बल्कि पेशेवर खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद अपने कोचिंग करियर में सुशील कुमार योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे विश्वस्तरीय पहलवान तैयार किए।

    सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने हनुमान अखाड़ा में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कुश्ती के दाव पेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहने वाले सतपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता 19 साल की उम्र में 1974 में क्राइस्टचर्च कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ मिली। इसके बाद 1978 एलबर्टा और 1982 ब्रिसबेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता। एशियन गेम्स में 1974 तेहरान में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और 1982 नई दिल्ली में हैवीवेट स्वर्ण पदक उनके करियर की विशेष उपलब्धियां हैं। 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुष फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।

    सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी माहिर रहे। भारत कुमार, रुस्तम-ए-हिंद, भारत केसरी, महाभारत केसरी, रुस्तम-ए-जमान और हिंद केसरी सहित कई राष्ट्रीय खिताब उन्होंने अपने नाम किए। उन्हें महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।खिलाड़ी जीवन से संन्यास के बाद सतपाल सिंह 1988 से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग कर रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती का हब माना जाता है। उन्होंने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया।भारतीय कुश्ती में योगदान के लिए सतपाल सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान और 2015 में पद्मभूषण उनकी असाधारण उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं।

    70 साल की उम्र में भी सतपाल सिंह सक्रिय हैं और लगातार नए पहलवानों को प्रशिक्षित कर देश का नाम रोशन करने में जुटे हैं। उनके अनुशासन, मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण ने उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रेरक बना दिया है।

  • Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?

    Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?


    नई दिल्ली। देश का आम बजट 2026 कल यानी 1 फरवरी, रविवार को संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए पेश करेंगी। हर साल बजट से पहले हलवा सेरेमनी की खास परंपरा निभाई जाती है, लेकिन इतिहास में ऐसा एक साल भी आया जब यह रस्म नहीं हो सकी।

    हलवा सेरेमनी क्या होती है?
    हर साल बजट के ड्राफ्ट तैयार होने के बाद, नॉर्थ ब्लॉक में हलवा सेरेमनी का आयोजन होता है। इस दौरान बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्री इसे मंत्रालय के कर्मचारियों और अधिकारियों में बांटती हैं। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बजट प्रक्रिया की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी है।

    इतिहास और लंबी परंपरा
    आजादी के बाद से यह रस्म लगातार निभाई जाती रही है। हर सरकार ने इसे बनाए रखा है। यही वजह है कि जब किसी साल यह परंपरा टूटी, तो वह घटना इतिहास में यादगार बन गई।

    कब और क्यों टूटी यह परंपरा?
    साल 2022 में दशकों पुरानी हलवा सेरेमनी पहली बार नहीं हुई। इसका कारण कोरोना महामारी की तीसरी लहर थी। संक्रमण तेजी से फैल रहा था और बड़े समूह में इकट्ठा होना खतरनाक माना गया। इसलिए वित्त मंत्रालय ने फैसला किया कि नॉर्थ ब्लॉक में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को इकट्ठा करना सुरक्षित नहीं होगा, और हलवा सेरेमनी रद्द करनी पड़ी। हालांकि सीधे हलवा नहीं परोसा गया, लेकिन परंपरा की भावना बनी रही। बजट से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को मिठाई उनके घर या ऑफिस पर भेजी गई। इस तरह सुरक्षा और परंपरा दोनों का संतुलन रखा गया।

    हलवा सेरेमनी का और भी महत्व

    हलवा सेरेमनी केवल मिठाई बांटने तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही बजट की गोपनीय प्रक्रिया की शुरुआत भी होती है। समारोह के बाद अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह अलग-थलग हो जाते हैं। मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग बंद हो जाता है। अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक में ही रहते हैं, उनके लिए खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि बजट की कोई जानकारी लीक न हो। इस प्रकार हलवा सेरेमनी मिठास का प्रतीक होने के साथ-साथ बजट की गंभीरता और गोपनीयता का संकेत भी बन जाती है।