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  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • श्रद्धा कपूर के आइकॉनिक एक्शन सीन के पीछे थीं नादिन थेरॉन, ‘स्त्री 2’ के बीटीएस वीडियो ने खोला बड़ा राज

    श्रद्धा कपूर के आइकॉनिक एक्शन सीन के पीछे थीं नादिन थेरॉन, ‘स्त्री 2’ के बीटीएस वीडियो ने खोला बड़ा राज

    नई दिल्ली । राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर स्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘स्त्री 2’ ने रिलीज के बाद दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी। फिल्म में कहानी, कॉमेडी और हॉरर के साथ कई ऐसे एक्शन सीक्वेंस भी देखने को मिले थे, जिनमें श्रद्धा कपूर का किरदार काफी प्रभावशाली नजर आया। अब फिल्म की रिलीज के करीब दो साल बाद इससे जुड़ा एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फिल्म में श्रद्धा कपूर के लिए कई मुश्किल स्टंट करने वाली प्रोफेशनल स्टंट आर्टिस्ट नादिन थेरॉन ने पर्दे के पीछे की झलकियां साझा की हैं।

    नादिन थेरॉन दक्षिण अफ्रीकी अभिनेत्री और प्रोफेशनल स्टंट परफॉर्मर हैं। उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों में मुख्य कलाकारों के बॉडी डबल के तौर पर काम किया है। ‘स्त्री 2’ में भी उन्होंने श्रद्धा कपूर के किरदार से जुड़े कई रोमांचक एक्शन दृश्यों को परफॉर्म किया था। नादिन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिल्म के सेट से जुड़े बिहाइंड द सीन वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। इन दृश्यों में वह श्रद्धा कपूर के किरदार के लिए स्टंट करती हुई दिखाई दे रही हैं।

    नादिन द्वारा साझा किए गए वीडियो में फिल्म के कुछ ऐसे एक्शन सीक्वेंस नजर आते हैं, जिन्हें दर्शकों ने सिनेमाघरों में श्रद्धा कपूर के किरदार के हिस्से के रूप में देखा था। खास तौर पर श्रद्धा के किरदार से जुड़ा चोटी लहराने वाला चर्चित स्टंट भी नादिन करती दिखाई देती हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स को यह जानकर हैरानी हुई कि पर्दे पर दिखाई देने वाले सभी मुश्किल एक्शन मूवमेंट श्रद्धा कपूर ने खुद नहीं किए थे।

    नादिन ने ‘स्त्री 2’ से जुड़े अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि यह उनके लिए बेहद मजेदार प्रोजेक्ट था। उन्होंने भारत में काम करने, अलग-अलग तरह के स्टंट और कैमरे के सामने प्रदर्शन करने के अनुभव को खास बताया। उन्होंने श्रद्धा कपूर के साथ काम करने का मौका मिलने पर भी खुशी जताई। उनके पोस्ट से यह स्पष्ट हुआ कि फिल्म के एक्शन दृश्यों को तैयार करने में पर्दे के पीछे स्टंट टीम की भी अहम भूमिका थी।

    नादिन थेरॉन का फिल्मी काम सिर्फ ‘स्त्री 2’ तक सीमित नहीं है। वह हालिया समय में आलिया भट्ट की फिल्म ‘अल्फा’ से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने इस फिल्म में आलिया भट्ट के बॉडी डबल के तौर पर एक्शन सीक्वेंस परफॉर्म किए हैं। नादिन ने ‘अल्फा’ के सेट से जुड़े बिहाइंड द सीन वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें उनके स्टंट काम की झलक दिखाई देती है।

    बॉलीवुड फिल्मों में बड़े एक्शन दृश्यों को पर्दे पर प्रभावशाली बनाने के लिए प्रोफेशनल स्टंट कलाकारों और बॉडी डबल्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कलाकार कैमरे के सामने किरदार और भावनाओं को जीवंत करते हैं, जबकि बेहद जोखिम वाले या तकनीकी रूप से कठिन दृश्यों में प्रशिक्षित स्टंट कलाकार उनकी मदद करते हैं। ‘स्त्री 2’ से सामने आया नादिन का वीडियो इसी पर्दे के पीछे की मेहनत को सामने लाता है।

    फिल्म की रिलीज के लंबे समय बाद नादिन थेरॉन का यह खुलासा अब प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। श्रद्धा कपूर के प्रशंसकों के लिए यह वीडियो फिल्म के चर्चित दृश्यों को एक नए नजरिए से देखने का मौका भी देता है। पर्दे पर कुछ सेकंड के लिए दिखाई देने वाले खतरनाक स्टंट के पीछे कितनी तैयारी और विशेषज्ञता होती है, नादिन के साझा किए गए बीटीएस वीडियो उसकी झलक दिखाते हैं।

  • कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन पर टिप्पणी करते हुए उसमें दिखाई गई ड्रेसिंग को लेकर सवाल उठाया है। कृति सेनन का यह विज्ञापन एक ज्वैलरी ब्रांड से जुड़ा है और इसमें रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हुए उन्हें दिखाया गया है।

    विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन की ड्रेस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने इसे विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा माना। इसी बीच कंगना रनौत ने भी इस विवाद पर अपनी राय सार्वजनिक की।

    कृति सेनन विज्ञापन में इंडो-वेस्टर्न अंदाज के परिधान में नजर आती हैं। विज्ञापन की थीम रक्षाबंधन से जुड़ी है और इसमें भाई-बहन के रिश्ते को त्योहार के संदर्भ में दिखाया गया है। हालांकि, कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और विज्ञापन का यह हिस्सा लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं वैश्विक फैशन को अपनाती हैं और उनके पास पारंपरिक भारतीय परिधानों से लेकर आधुनिक कपड़ों तक कई विकल्प मौजूद हैं।

    इसी संदर्भ में कंगना ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे पहनावे का इस्तेमाल क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल करते हुए पूछा कि जब महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो इस तरह के परिधान को ही क्यों चुना गया।

    कंगना ने अपनी टिप्पणी में यह भी संकेत दिया कि विज्ञापन को जानबूझकर असामान्य तरीके से तैयार किया गया हो सकता है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद कृति सेनन का विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कृति सेनन की ओर से कंगना की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

    रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा तथा सम्मान का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। त्योहार के इसी भाव को ध्यान में रखते हुए कंपनियां हर साल आभूषण, कपड़े, मिठाई और अन्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापन तैयार करती हैं।

    सेलिब्रिटी विज्ञापनों में पहनावे और प्रस्तुति को लेकर विवाद नया नहीं है। कई बार किसी विज्ञापन की थीम, ड्रेसिंग या विजुअल प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं और कुछ ही समय में विज्ञापन व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।

    कृति सेनन के मामले में भी यही देखने को मिला। एक तरफ विज्ञापन की रचनात्मकता और फैशन प्रस्तुति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। कंगना की टिप्पणी ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

    कंगना रनौत पहले भी फिल्म, फैशन, सामाजिक विषयों और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उनके बयानों पर अक्सर समर्थन और आलोचना दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस बार भी उनकी टिप्पणी के बाद कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र विज्ञापन में कृति सेनन की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना के बीच तालमेल का सवाल है। कृति की ओर से इस टिप्पणी पर कोई स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • तापसी पन्नू की ‘गांधारी’ पर कहानी चुराने का आरोप, 40 लाख के मुआवजे से ज्यादा राइटर को चाहिए अपना नाम और पहचान

    तापसी पन्नू की ‘गांधारी’ पर कहानी चुराने का आरोप, 40 लाख के मुआवजे से ज्यादा राइटर को चाहिए अपना नाम और पहचान

    नई दिल्ली । तापसी पन्नू की बहुप्रतीक्षित फिल्म गांधारी रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म की कहानी को लेकर लेखक कल्याण बांदी ने कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि गांधारी नाम से उन्होंने 2019 में एक कहानी लिखी थी और उसे बाकायदा रजिस्टर भी कराया था। अब उन्हें लगता है कि तापसी पन्नू की आने वाली फिल्म का कॉन्सेप्ट उनकी लिखी कहानी से काफी मिलता जुलता है। फिल्म की लेखिका और निर्माता कनिका ढिल्लों के प्रोडक्शन हाउस कत्था पिक्चर्स ने हालांकि इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए गांधारी को ओरिजिनल फिल्म बताया है।

    कल्याण बांदी के मुताबिक उन्होंने साल 2019 में गांधारी नाम से एक कहानी तैयार की थी। उनकी कहानी में एक मां की जिंदगी के इर्द गिर्द घटनाएं घूमती हैं और बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह से जुड़ने के बाद वह बेहद खतरनाक रूप धारण कर लेती है। इसी कहानी को लेकर उन्होंने उस समय की Voot अधिकारी मोनिका शेरगिल से संपर्क किया था। कल्याण का कहना है कि उन्होंने उन्हें करीब आठ पन्नों की कहानी और दो पन्नों का सार भेजा था। कहानी देखने के बाद उन्हें बताया गया कि यह उस समय कंपनी की योजनाओं के मुताबिक उपयुक्त नहीं है।

    कल्याण का दावा है कि उन्होंने अपनी कहानी और उसके सार को स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी रजिस्टर कराया था। इसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक अपनी कहानी पर काम जारी रखा। साल 2023 में उन्होंने हरमन बावेजा के स्टूडियो से भी संपर्क किया और कहानी तथा स्क्रीनप्ले को लेकर कई महीनों तक बातचीत चली। उन्होंने अपनी कहानी जियो हॉटस्टार को भी भेजी थी।

    मामला तब गंभीर हुआ जब साल 2025 में नेटफ्लिक्स पर तापसी पन्नू की गांधारी का ऐलान हुआ। कल्याण के मुताबिक फिल्म का नाम सामने आते ही उन्हें अपनी पुरानी कहानी याद आई। उन्होंने फिल्म से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की और जब दोनों कहानियों की तुलना की तो उन्हें कई समानताएं नजर आईं। इसके बाद उन्होंने इस मामले को उठाने का फैसला किया।

    कल्याण का कहना है कि उन्होंने सितंबर 2025 में कानूनी नोटिस भी भेजा था। नोटिस में उन्होंने कथित तौर पर कहानी के इस्तेमाल को लेकर मुआवजे और क्रेडिट की मांग की थी। करीब 40 लाख रुपये के मुआवजे की मांग किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि लेखक का कहना है कि उनका असली उद्देश्य पैसा हासिल करना नहीं है। वह चाहते हैं कि अगर उनकी कहानी का इस्तेमाल हुआ है तो उन्हें उसका उचित क्रेडिट दिया जाए।

    कल्याण के अनुसार नोटिस के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उनका दावा है कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल था इसलिए उन्होंने आगे कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए अपनी रचना की पहचान और उसका श्रेय पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    वहीं कनिका ढिल्लों के प्रोडक्शन हाउस कत्था पिक्चर्स ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रोडक्शन हाउस का कहना है कि गांधारी पूरी तरह ओरिजिनल फिल्म है और इसकी कहानी तथा स्क्रीनप्ले कनिका ढिल्लों की अपनी रचना है। कंपनी ने अपुष्ट आरोपों को सच मानकर प्रकाशित या साझा नहीं करने की अपील भी की है। इस पूरे विवाद पर नेटफ्लिक्स और मोनिका शेरगिल की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    फिलहाल तापसी पन्नू की गांधारी की रिलीज से पहले सामने आया यह विवाद फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा सकता है। एक तरफ लेखक अपनी कहानी के लिए पहचान और क्रेडिट की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ फिल्म की टीम कहानी चोरी के आरोपों को पूरी तरह गलत बता रही है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस विवाद को लेकर कोई कानूनी या आधिकारिक कदम उठाया जाता है या नहीं।

  • ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    नई दिल्ली ।भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने किसका साथ दिया था, इसे लेकर अब नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए टकराव के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समर्थन किस रूप में दिया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

    भारत ने इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर पेश किया था। अभियान के शुरुआती चरण में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चला।

    इसी घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का नया बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान और ईरान के संबंधों पर दिए गए लिखित जवाब में कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में पिछले दो वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान के समर्थन का उल्लेख किया।

    पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने उस समय पाकिस्तान को मजबूत राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। हालांकि, डार के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस समर्थन में सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग, हथियार या किसी अन्य प्रकार की प्रत्यक्ष मदद शामिल थी या नहीं। इसलिए केवल इस बयान के आधार पर ईरान की सैन्य भूमिका को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ईरान की भूमिका को समझने के लिए उस समय उसके सार्वजनिक रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों का उल्लेख भी सामने आया था।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मई 2025 में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान के प्रयासों का आभार जताया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी उस दौरान क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और कूटनीतिक प्रयास किए थे।

    यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा दावा और उस समय ईरान की सार्वजनिक कूटनीतिक भूमिका अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। पाकिस्तान इसे अपने पक्ष में मिले मजबूत समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साफ नहीं होता कि यह समर्थन सैन्य स्तर पर था या मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी स्पष्ट किया था कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। भारत का कहना रहा कि कार्रवाई पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ की गई और सैन्य कार्रवाई को लक्षित तथा नियंत्रित रखा गया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 का संघर्ष बाद में युद्धविराम के साथ थमा। इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए थे। अब ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान सामने आने के बाद उस समय के क्षेत्रीय समीकरणों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन समर्थन की प्रकृति और सीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता दी थी।

  • बंगाल में TMC की अंदरूनी कलह के बीच मुस्लिम विधायक की घर वापसी, ममता के नेतृत्व में फिर जताया भरोसा

    बंगाल में TMC की अंदरूनी कलह के बीच मुस्लिम विधायक की घर वापसी, ममता के नेतृत्व में फिर जताया भरोसा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच पार्टी को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त मिली है। उत्तर 24 परगना जिले की आमडांगा विधानसभा सीट से विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट छोड़कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में वापस लौटने की घोषणा की है। वापसी के बाद सिद्दीकी ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा दोहराते हुए कहा कि उनके लिए दीदी ही सब कुछ हैं।

    कासेम सिद्दीकी की वापसी ऐसे समय हुई है जब विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। पार्टी के कई विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए अलग गुट का रुख किया था। इस गुट के साथ बड़ी संख्या में विधायक जुड़े थे और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने की कोशिश हुई थी।

    सिद्दीकी भी कुछ समय के लिए इसी बागी गुट के साथ थे। हालांकि अब उन्होंने वहां से अलग होकर ममता बनर्जी के साथ बने रहने का फैसला किया है। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें बागी गुट के उद्देश्य को लेकर अलग जानकारी दी गई थी।

    सिद्दीकी के अनुसार, उन्हें बताया गया था कि कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और ये दस्तावेज ममता बनर्जी तक पहुंचाए जाएंगे। उन्हें यह भी बताया गया था कि बागी गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा। लेकिन बाद में जब उन्होंने गुट की गतिविधियों को देखा तो उन्हें वहां तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के नेतृत्व या भूमिका का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं दिया।

    इसके बाद उन्होंने बागी गुट से अलग होने का फैसला किया। सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें ममता बनर्जी ने टिकट दिया और उनके नेतृत्व में ही वह विधानसभा तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ लोगों के बीच जाकर समर्थन मांगा था और मतदाताओं ने भी उनके नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें समर्थन दिया।

    कासेम सिद्दीकी का राजनीतिक प्रभाव केवल उनके विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जाता। उनका संबंध हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ से जुड़े धार्मिक और सामाजिक प्रभाव वाले समुदाय से है। मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए उनकी राजनीतिक स्थिति तृणमूल कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले साल पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में राज्य महासचिव की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

    इसके बाद विधानसभा चुनाव में उन्हें आमडांगा सीट से उम्मीदवार बनाया गया और उन्होंने जीत दर्ज की। अब उनका ममता बनर्जी के खेमे में लौटना पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    हालांकि कासेम सिद्दीकी की वापसी के बावजूद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पार्टी के दोनों पक्षों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस को लेकर भी दोनों गुटों की ओर से अलग-अलग तैयारियां की जा रही हैं।

    28 अगस्त को मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास छात्र परिषद का स्थापना दिवस मनाने को लेकर विवाद सामने आया है। दोनों पक्षों ने कार्यक्रम की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमे पारंपरिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति चाहता है।

    ऐसे समय में कासेम सिद्दीकी की वापसी को पार्टी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी वापसी यह संकेत देती है कि बागी खेमे के भीतर भी सभी विधायक एकजुट नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी किस दिशा में जाती है और कितने अन्य नेता या विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आते हैं।

  • Madhya Pradesh News: गुना में टैंकर हादसे के बाद सड़क पर फैला रिफाइंड ऑयल, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

    Madhya Pradesh News: गुना में टैंकर हादसे के बाद सड़क पर फैला रिफाइंड ऑयल, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

    मध्य प्रदेश। के गुना जिले में सोमवार को रिफाइंड ऑयल से भरा एक टैंकर पलटने के बाद सड़क पर तेल फैल गया। घटना चाचौड़ा थाना क्षेत्र में बीनागंज वेयरहाउस के पास हुई। टैंकर के पलटने और सड़क पर बड़ी मात्रा में तेल फैलने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते कई लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर सड़क पर फैला तेल भरने लगे।

    घटना के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई। टैंकर से तेल निकलकर सड़क पर फैल गया था। आसपास मौजूद लोगों ने इसे अपने बर्तनों में भरना शुरू कर दिया। कई लोग बाल्टी, डिब्बे और अन्य कंटेनर लेकर मौके पर पहुंचे। सड़क पर तेल जमा होने के कारण वहां से गुजरने वाले लोगों और वाहनों के लिए भी स्थिति असामान्य हो गई।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को नियंत्रित करने और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण दुर्घटनास्थल पर भीड़ बढ़ गई थी। पुलिस की मौजूदगी के बाद मौके की स्थिति को व्यवस्थित किया गया और दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के आसपास लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।

    रिफाइंड ऑयल से भरा टैंकर किस वजह से अनियंत्रित होकर पलटा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के समय सड़क की स्थिति, वाहन की गति और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा सकती है। दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती सड़क पर फैले तेल के कारण पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करना रही।

    सड़क पर तेल फैलने से फिसलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में दुर्घटनास्थल से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। तेल को बर्तनों में भरने के लिए लोगों के बड़ी संख्या में सड़क पर पहुंचने से जोखिम और बढ़ सकता था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को नियंत्रित किया और स्थिति को संभाला।

    बीनागंज क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद दुर्घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटने का वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में हैं। इनमें लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर सड़क पर फैले तेल को इकट्ठा करते नजर आए। टैंकर के पलटने के बाद सड़क पर फैले तेल को लेकर लोगों में उत्सुकता देखी गई और कुछ लोग अपने साथ बर्तन लेकर वहां पहुंच गए।

    घटना ने सड़क दुर्घटनाओं के बाद भीड़ के व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी वाहन से खाद्य तेल या अन्य सामग्री सड़क पर गिरने की स्थिति में लोगों का मौके पर पहुंचना दुर्घटना स्थल को और असुरक्षित बना सकता है। खासकर जब सड़क पर तेल जैसा फिसलन पैदा करने वाला पदार्थ फैला हो, तब वहां मौजूद लोगों और गुजरने वाले वाहनों दोनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

    पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के आसपास लोगों की भीड़ को व्यवस्थित करने के साथ सड़क पर यातायात की स्थिति संभालने की कोशिश की गई। प्रशासन के लिए ऐसे मामलों में दुर्घटना के बाद राहत व्यवस्था के साथ भीड़ नियंत्रण भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    गुना के चाचौड़ा थाना क्षेत्र में हुई यह घटना इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि टैंकर पलटने के बाद सड़क पर फैले रिफाइंड ऑयल को भरने के लिए बड़ी संख्या में लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर पहुंच गए। फिलहाल दुर्घटना के कारणों और टैंकर के पलटने की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दुर्घटनास्थल पर बढ़ती भीड़ को संभाला।

  • सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की बरसी से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। लेह में 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटना में मारे गए लोगों की याद में कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान वांगचुक ने कहा कि आने वाले दिनों में लद्दाख की लंबित मांगों और पिछले साल की घटना की जवाबदेही को लेकर कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    वांगचुक के मुताबिक 24 अगस्त से 24 सितंबर तक का समय पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए रखा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती कार्यक्रम को सीमित रखा गया है, क्योंकि इस समय दलाई लामा लद्दाख में हैं। उनके लद्दाख से जाने के बाद बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू करने का संकेत दिया गया है।

    24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने समेत कई मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया था। इस दौरान सरकारी और राजनीतिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, वाहनों में आगजनी हुई और सुरक्षा बलों के साथ झड़प की स्थिति बनी। हिंसा के दौरान कई लोगों की मौत हुई और सुरक्षा बलों के जवान भी घायल हुए थे।

    इस घटना से पहले वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में लद्दाख को राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र के प्रशासन में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाना शामिल रहा है।

    24 सितंबर की घटना के बाद केंद्र सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग का उद्देश्य हिंसा की परिस्थितियों, घटनाक्रम और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करना है। वांगचुक और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की प्रमुख मांग अब यह है कि आयोग की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाए।

    वांगचुक ने कहा है कि घटना को एक साल पूरा होने के करीब है, लेकिन जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 24 सितंबर को परिस्थितियां किस तरह बिगड़ीं और हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई के पीछे क्या घटनाक्रम रहा।

    लद्दाख की राजनीतिक मांगों को लेकर केंद्र और क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी जारी रही है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लंबे समय से राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची जैसी मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं। मई 2026 में भी केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

    मई की बातचीत में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर चर्चा हुई थी। बातचीत के दौरान कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार सामने आया, लेकिन राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग अब भी आंदोलनकारी पक्ष के प्रमुख मुद्दों में बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत को लेकर भी उम्मीद बनी हुई है।

    सोनम वांगचुक की भूमिका इस आंदोलन में महत्वपूर्ण रही है। सितंबर 2025 की घटनाओं के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत रद्द कर दी, जिसके बाद वह दोबारा सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय हुए। इसके बाद उन्होंने बातचीत और शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

    अब सितंबर की बरसी के दौरान लद्दाख में होने वाले कार्यक्रमों पर सबकी नजर रहेगी। वांगचुक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कैंडल मार्च केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप बड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने का रास्ता शांतिपूर्ण होना चाहिए। जांच रिपोर्ट, राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के केंद्र में रहेंगे।

  • सुनारिया जेल से कड़ी सुरक्षा में बाहर निकला राम रहीम, सिरसा डेरा मुख्यालय जाने की जानकारी, फरलो पर उठे फिर सवाल

    सुनारिया जेल से कड़ी सुरक्षा में बाहर निकला राम रहीम, सिरसा डेरा मुख्यालय जाने की जानकारी, फरलो पर उठे फिर सवाल

    नई दिल्ली ।डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा के रोहतक स्थित हाई सिक्योरिटी सुनारिया जेल से मंगलवार सुबह उसे 21 दिन की फरलो पर रिहा किया गया। वर्ष 2020 के बाद यह उसकी 17वीं अस्थायी रिहाई है। जेल से बाहर निकलने के बाद वह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ।

    राम रहीम मंगलवार सुबह करीब 6:05 बजे सुनारिया जेल से बाहर निकला। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। उसकी ताजा रिहाई ऐसे समय हुई है जब वह गंभीर आपराधिक मामलों में मिली सजा काट रहा है और उसकी पैरोल तथा फरलो को लेकर पहले भी सार्वजनिक स्तर पर चर्चा होती रही है।

    राम रहीम को अगस्त 2017 में दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उसे 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा उसे पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या समेत अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है। मौजूदा समय में वह सुनारिया जेल में सजा काट रहा है।

    ताजा फरलो से पहले राम रहीम 26 जून को 30 दिन की पैरोल पूरी करके जेल लौटा था। इसके बाद दो महीने से भी कम समय के भीतर उसे एक बार फिर अस्थायी रिहाई मिल गई। इस बार उसे 21 दिन की फरलो दी गई है। रिहाई की शर्तों के तहत उसे निर्धारित अवधि पूरी होने पर वापस जेल लौटना होगा।

    राम रहीम को वर्ष 2020 से लगातार अलग-अलग मौकों पर पैरोल और फरलो मिलती रही है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2020 में उसे पहली बार एक दिन की अस्थायी रिहाई मिली थी। इसके बाद 2021 में कुछ घंटों की रिहाई से लेकर 21, 30, 40 और 50 दिन तक की पैरोल या फरलो उसे अलग-अलग अवसरों पर मिलती रही।

    वर्ष 2022 में उसे 21 दिन और 30 दिन की रिहाई मिली, जबकि अक्टूबर में 40 दिन की पैरोल दी गई। वर्ष 2023 में भी उसे कई बार अस्थायी रिहाई मिली। जनवरी 2024 में 50 दिन की पैरोल सहित अलग-अलग अवधि की रिहाइयों के बाद 2025 में भी उसे कई बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली।

    वर्ष 2026 में जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद मई में 30 दिन की पैरोल दी गई। 26 जून को वह इस अवधि को पूरा करने के बाद जेल लौट आया था। अब अगस्त में 21 दिन की फरलो मिलने के साथ वर्ष 2026 में उसकी एक और अस्थायी रिहाई हुई है।

    राम रहीम की बार-बार होने वाली अस्थायी रिहाई लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। फरलो और पैरोल अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के तहत दी जाती हैं और इनके लिए निर्धारित नियमों तथा सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी जरूरी होती है। हरियाणा में अस्थायी रिहाई से जुड़े प्रावधानों के तहत पात्र कैदियों को निर्धारित शर्तों के साथ पैरोल और फरलो का लाभ मिल सकता है।

    ताजा रिहाई के बाद राम रहीम अब 21 दिनों तक जेल से बाहर रहेगा। इस दौरान उसकी गतिविधियों और निर्धारित शर्तों के पालन पर संबंधित प्रशासन की निगरानी रहेगी। फरलो की अवधि समाप्त होने के बाद उसे फिर सुनारिया जेल लौटना होगा। इस तरह गंभीर मामलों में सजा काट रहे डेरा प्रमुख की अस्थायी रिहाई का सिलसिला एक बार फिर सामने आया है।

  • इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार

    इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार


    नई दिल्ली ।आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने अपने संस्थान को 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। यह राशि आईआईटी कानपुर में विकसित किए जा रहे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के विस्तार और विकास में इस्तेमाल की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2022 में गंगवाल ने इसी संस्थान के लिए 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। इस तरह मेडिकल स्कूल के लिए उनका कुल योगदान 400 करोड़ रुपये हो जाएगा।

    राकेश गंगवाल का आईआईटी कानपुर से पुराना और मजबूत संबंध रहा है। उन्होंने वर्ष 1975 में संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया स्थित व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और कई बड़ी एयरलाइनों के साथ काम किया।

    गंगवाल ने US एयरवेज, एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वर्ष 2006 में उन्होंने राहुल भाटिया के साथ मिलकर इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत की। इसी कंपनी के जरिए इंडिगो एयरलाइन का संचालन हुआ और भारतीय विमानन क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई।

    आईआईटी कानपुर में मेडिकल शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। संस्थान ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में शोध, नवाचार और क्लिनिकल सुविधाओं को जोड़ने की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर विकसित किया है।

    गंगवाल स्कूल की विकास योजना में आईआईटी कानपुर परिसर में 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना शामिल है। इसके अलावा 200 बेड वाले कैंसर केयर एवं रिसर्च सेंटर का भी प्रस्ताव है। इन सुविधाओं के जरिए मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है।

    राकेश गंगवाल की ओर से दी जा रही 300 करोड़ रुपये की नई राशि मैचिंग ग्रांट के तौर पर दी गई है। इसका मतलब है कि संस्थान के विकास के लिए अन्य सहयोगियों की ओर से जुटाए गए योगदान के बराबर गंगवाल ने भी सहयोग दिया है। इससे मेडिकल स्कूल की विकास योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    आईआईटी कानपुर ने वर्ष 2021 में मेडिकल स्कूल स्थापित करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग, तकनीक और चिकित्सा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार करना था। वर्ष 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान के बाद इस योजना को महत्वपूर्ण आर्थिक आधार मिला।

    गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के लालवानी हैं। संस्थान का मानना है कि गंगवाल का योगदान मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राकेश गंगवाल का योगदान यह भी दर्शाता है कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व छात्र उसके भविष्य के विकास में किस तरह बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पांच दशक से अधिक समय पहले आईआईटी कानपुर से बीटेक करने वाले गंगवाल अब उसी संस्थान में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ी आर्थिक भागीदारी कर रहे हैं।