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  • दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा जांच और सरकारी निरीक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में इमारतों से जुड़े हादसों के बाद ऑडिट के आदेश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बाद निरीक्षण के नाम पर कथित वसूली का सिलसिला शुरू हो जाता है। उन्होंने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।

    भारद्वाज के मुताबिक, दिल्ली में जब भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तब इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच और ऑडिट कराने के निर्देश दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बाद कुछ विभागों के अधिकारी निरीक्षण प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच और ऑडिट के नाम पर कारोबारियों से अवैध रूप से पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    आप नेता ने कहा कि यह समस्या केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। उन्होंने नगर निगम दिल्ली और पुलिस पर पहले से लगते रहे भ्रष्टाचार तथा वसूली के आरोपों का उल्लेख करते हुए अग्निशमन विभाग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि होटल, रेस्टोरेंट, जिम, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निरीक्षण के दौरान कथित वसूली का सामना करना पड़ रहा है।

    भारद्वाज ने इस मुद्दे को कारोबारियों के सामने आने वाली गंभीर समस्या के रूप में पेश किया। उनके अनुसार, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। नियमित निरीक्षण और ऑडिट लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इन्हीं प्रक्रियाओं का इस्तेमाल रिश्वत लेने के लिए किया जाता है, तो कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और सरकारी व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा कमजोर होता है।

    उन्होंने व्यापारी समुदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वर्ग ऐतिहासिक रूप से जनसंघ और भाजपा का समर्थक रहा है। इसके बावजूद, उनके आरोप के अनुसार, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर व्यापारियों की परेशानियां बढ़ रही हैं। भारद्वाज ने दिल्ली की भाजपा सरकार को घेरते हुए ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर एक ही राजनीतिक दल के होने के बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत बनी हुई है।

    आप नेता ने यह सवाल भी उठाया कि जब हर बड़ी दुर्घटना के बाद इमारतों के ऑडिट और निरीक्षण के आदेश दिए जाते हैं, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देते। उन्होंने सरकारी विभागों की जवाबदेही और निरीक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया।

    दिल्ली में भवन सुरक्षा का मुद्दा सार्वजनिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, जिम और कोचिंग सेंटर जैसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए नियमित जांच के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई भी जरूरी है। वहीं, निरीक्षण प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    फिलहाल, सौरभ भारद्वाज के बयान में लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों के समर्थन में किसी जांच के निष्कर्ष या संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • असम में दोषसिद्धि दर में बड़ा सुधार, 2021 के 6.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 30.88 प्रतिशत पहुंची

    असम में दोषसिद्धि दर में बड़ा सुधार, 2021 के 6.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 30.88 प्रतिशत पहुंची

    नई दिल्ली ।असम में आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर पिछले पांच वर्षों के दौरान लगातार बढ़ी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, राज्य में यह दर 2021 में 6.1 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 30.88 प्रतिशत हो गई। राज्य सरकार ने इस प्रगति का श्रेय बेहतर पुलिस जांच, अभियोजन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने को दिया है। इस बदलाव को राज्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने इस संबंध में साझा किए गए आंकड़ों के जरिए बताया कि असम में दोषसिद्धि दर में हर साल वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 6.1 प्रतिशत था। इसके बाद 2022 में बढ़कर 13.5 प्रतिशत और 2023 में 16.4 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2024 में यह दर 22.6 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि 2025 में बढ़कर 25.80 प्रतिशत दर्ज की गई। सितंबर 2026 तक इसमें और वृद्धि हुई और यह 30.88 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई।

    इन आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से सितंबर 2026 के बीच दोषसिद्धि दर में 24.78 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है। यह अंतर राज्य में दर्ज की गई लगातार वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर न्याय व्यवस्था के समग्र प्रदर्शन का आकलन करते समय मामलों की प्रकृति और गणना की पद्धति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि दोषसिद्धि दर में सुधार के पीछे जांच की गुणवत्ता, प्रभावी अभियोजन और अधिक जवाबदेही की भूमिका है। उन्होंने राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने और अपराध से जुड़े मामलों में दोषियों को कानून के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। सरकार का जोर कानून के प्रभावी पालन और न्याय दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर है।

    दोषसिद्धि दर किसी आपराधिक मामले में आरोपी के दोषी ठहराए जाने से संबंधित आंकड़ा है। इसे अक्सर आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करने वाले संकेतकों में शामिल किया जाता है। हालांकि, इस दर की व्याख्या करते समय यह समझना जरूरी है कि किन मामलों को आंकड़ों में शामिल किया गया है, मामलों की गिनती किस चरण पर की गई है और संबंधित आंकड़े किस पद्धति से तैयार हुए हैं। अलग-अलग राज्यों या अवधियों के आंकड़ों की तुलना में ये अंतर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    असम में दोषसिद्धि दर में हुई वृद्धि के संदर्भ में पुलिस जांच और अभियोजन की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसी आपराधिक मामले में साक्ष्य जुटाने, जांच पूरी करने और अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने की प्रक्रिया न्यायिक परिणाम को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों और अभियोजन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़े 2021 से सितंबर 2026 तक दोषसिद्धि दर में बढ़ोतरी का क्रम दिखाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को कानून लागू करने और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जोड़ा है। आने वाले समय में इन आंकड़ों का व्यापक आकलन करने के लिए मामलों की श्रेणियों, निपटारे की स्थिति और गणना के आधार जैसी जानकारियां भी उपयोगी होंगी।

  • खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री मोदी विचलित नहीं होंगे और न ही जनसेवा के प्रति उनका संकल्प कमजोर पड़ेगा। राजनाथ सिंह ने इस बयान को सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अनुरूप नहीं बताते हुए राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    राजनाथ सिंह ने सोमवार को इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रविवार को पटना में खरगे की ओर से की गई टिप्पणी से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि ऐसी टिप्पणी किसी सामान्य कार्यकर्ता या युवा नेता की ओर से नहीं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से की गई है। उनके मुताबिक, इतने वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।

    रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि खरगे के बयान से देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टिप्पणी के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उसके शब्दों को उचित ठहराने की कोशिश की। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस मामले में गलती स्वीकार कर खेद व्यक्त करने के बजाय बयान का बचाव करना लोगों की भावनाओं को और ठेस पहुंचा सकता है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता, संयम और मर्यादा दिखाई देनी चाहिए। यदि किसी राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है, तो इससे उस पद की गरिमा और पार्टी की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल उठते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से सार्वजनिक बहस में जिम्मेदार आचरण बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है और सरकार की नीतियों की आलोचना भी की जा सकती है। विपक्ष को नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन असहमति को व्यक्तिगत अपमान में बदलना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाकर की जाने वाली टिप्पणियां राजनीतिक विमर्श की मर्यादा को प्रभावित करती हैं।

    रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणियां की जाती रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की मां के प्रति कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है और इससे राजनीतिक संवाद का स्तर प्रभावित हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। राजनीतिक दलों को सरकार के कामकाज की आलोचना करते समय शब्दों और व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। राजनाथ सिंह के अनुसार, किसी व्यक्ति या परिवार को अपमानित करने के बजाय नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करना लोकतंत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

    रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में जनता राजनीतिक दलों और नेताओं के व्यवहार पर नजर रखती है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में दिए गए बयानों और अपनाए गए आचरण का जवाब समय आने पर जनता देती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के दौरान भी भाषा की मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत टिप्पणी का रूप देने से बचें और लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखें।

  • खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 26 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन शुरू किए। पार्टी ने सभी राज्यों के मुख्यालयों पर विरोध जताने का ऐलान किया है। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे का पुतला जलाकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

    यह विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे के भाषण से जुड़ा है। कार्यक्रम में भीड़ की ओर से आई एक आवाज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर खड़गे की टिप्पणी का वीडियो सामने आया। इसके बाद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने इसे व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

    भाजपा ने इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की वैचारिक स्थिति और हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तब तक पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा का सवाल जुड़ा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर वैचारिक रूप से कमजोर होने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार का जवाब देगी।

    जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है और वे करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास ठोस राजनीतिक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पहले राजनीतिक मर्यादा का महत्व था, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कटुता और गाली-गलौज की संस्कृति बढ़ी है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक बातें कहना राजनीतिक बहादुरी नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर व्यक्तिगत हमले और दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

    खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए नेताओं की नाराजगी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा ने माफी की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

  • शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में गूंजी खुशखबरी, बांधवगढ़ की रानी MT-3 दूसरी बार बनी मां..

    शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में गूंजी खुशखबरी, बांधवगढ़ की रानी MT-3 दूसरी बार बनी मां..

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। बांधवगढ़ से लाई गई और ‘बांधवगढ़ की रानी’ के नाम से पहचानी जाने वाली बाघिन MT-3 ने दूसरी बार दो शावकों को जन्म दिया है। इससे रिजर्व में बाघों की नई पीढ़ी के विकास को लेकर उत्साह बढ़ा है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी MT-3 दो शावकों की मां बनी थी। अब उसके साथ दो नए शावक दिखाई दिए हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया पर नन्हे शावकों की तस्वीरें साझा कर इस खबर की जानकारी दी। माधव टाइगर रिजर्व में अब तक कुल छह शावकों का जन्म हो चुका है। MT-3 के दो नए शावकों के सामने आने के साथ यहां बाघों की कुल संख्या 11 पहुंच गई है। रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने का यह घटनाक्रम वन्यजीव संरक्षण और बाघों के प्राकृतिक प्रजनन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    भरकुली गेट की पूर्वी रेंज में मार्च 2023 के दौरान MT-1 मादा, MT-2 नर और MT-3 मादा बाघ को छोड़ा गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में MT-3 ने पहली बार दो शावकों को जन्म दिया। अब दूसरी बार उसके दो नए शावक सामने आए हैं। इन दोनों शावकों को मिलाकर पूर्वी रेंज में बाघों की संख्या छह हो गई है। इस क्षेत्र में बाघों की बढ़ती मौजूदगी रिजर्व में उनके कुनबे के विस्तार को दर्शाती है।

    रिजर्व की दक्षिणी रेंज में भी बाघों की मौजूदगी बनी हुई है। सेलिंग क्लब गेट के आसपास के क्षेत्र में MT-5 नर और MT-4 मादा बाघ मौजूद हैं। MT-4 के साथ पहले दिखाई दिए दो शावक अब बड़े हो रहे हैं और जंगल में घूमते नजर आने लगे हैं। इन दोनों शावकों को शामिल करने पर दक्षिणी रेंज में बाघों की संख्या चार बताई गई है। वहीं, MT-6 मादा बाघ को जुलाई में भोपाल के वन विहार भेज दिया गया था।

    रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच MT-1 की लंबे समय से निगरानी के दौरान मौजूदगी दर्ज नहीं होने का विषय भी वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर, MT-3 के दोबारा मां बनने से यहां बाघों के प्रजनन और उनके कुनबे के विस्तार की उम्मीद मजबूत हुई है।

    माधव नेशनल पार्क में बाघों को बसाने की शुरुआत 10 मार्च 2023 को हुई थी। उस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने MT-1 मादा और MT-2 नर बाघ को जंगल में छोड़ा था। इसके बाद 14 मार्च 2023 को MT-3 मादा बाघिन को भी यहां बसाया गया। वर्ष 2024 में उसके पहले दो शावकों का जन्म हुआ।

    इसके बाद 7 मार्च 2025 को माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह मध्य प्रदेश का नौवां और देश का 58वां टाइगर रिजर्व बना। 10 मार्च 2025 को MT-4 मादा बाघिन को यहां छोड़ा गया। बाद में MT-5 नर और MT-6 मादा बाघ को भी रिजर्व में बसाया गया। इस तरह अलग-अलग चरणों में बाघों को यहां लाकर उनकी आबादी विकसित करने का प्रयास किया गया।

    माधव टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम शर्मा ने MT-3 के दूसरी बार दो शावकों को जन्म देने की पुष्टि की है। वर्ष 2024 में भी वह दो शावकों को जन्म दे चुकी है। अब नए शावकों के आने से रिजर्व में बाघों की संख्या 11 हो गई है। आने वाले समय में इन शावकों की बढ़त और उनकी मौजूदगी पर वन विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट

    देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट


    नई दिल्ली । भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच लिंकन के बर्ट सटक्लिफ ओवल मैदान पर खेले जा रहे पहले अनौपचारिक टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दूसरी पारी में उन्होंने 199 रन की बेहतरीन पारी खेली लेकिन दोहरे शतक से महज एक रन दूर रह गए। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान धैर्य और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। हालांकि वह जिस तरह आउट हुए उससे भारतीय बल्लेबाज के चेहरे पर निराशा साफ नजर आई। उनकी इस पारी ने मुश्किल में फंसी भारत ए की टीम को मुकाबले में मजबूत वापसी का मौका दिया है।

    पडिक्कल ने 248 गेंदों का सामना करते हुए 199 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 24 चौके और तीन छक्के लगाए। वह दोहरा शतक पूरा करने के बेहद करीब थे लेकिन न्यूजीलैंड ए के तेज गेंदबाज जैक गिब्सन की गेंद उनके पैड पर लगी। गेंदबाज और विपक्षी खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की जिसके बाद अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया। भारतीय बल्लेबाज इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिखे और दोहरे शतक से चूकने की निराशा उनके चेहरे पर नजर आई। हालांकि उनकी पारी ने भारत ए के लिए दूसरी पारी में मजबूत आधार तैयार कर दिया।

    दूसरी पारी में भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल केवल पांच रन बनाकर आउट हो गए जबकि केएल राहुल भी चार रन ही बना सके। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से टीम पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे समय में पडिक्कल ने साई सुदर्शन के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ए के गेंदबाजों का सामना किया और तीसरे विकेट के लिए 340 गेंदों पर 215 रन की शानदार साझेदारी निभाई।

    साई सुदर्शन ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 184 गेंदों में 91 रन बनाए। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। पडिक्कल और सुदर्शन की साझेदारी ने भारत ए को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। सुदर्शन के आउट होने के बाद कप्तान ध्रुव जुरेल भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और केवल दो रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद पडिक्कल ने एक छोर संभाले रखा और रन बनाने का सिलसिला जारी रखा।

    इसके बाद पडिक्कल को यश राठौड़ का साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर उपयोगी साझेदारी की और स्कोर को आगे बढ़ाया। यश राठौड़ ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया। टी ब्रेक तक भारत ए ने दूसरी पारी में पांच विकेट के नुकसान पर 377 रन बना लिए थे। यश राठौड़ 66 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे जबकि वॉशिंगटन सुंदर दो रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। इस समय भारत ए की कुल बढ़त 173 रन तक पहुंच चुकी थी और उसके पांच विकेट शेष थे।

    मैच की पहली पारी में भारत ए की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई थी और पूरी टीम केवल 113 रन बना सकी थी। इसके जवाब में न्यूजीलैंड ए ने 317 रन बनाकर 204 रन की अहम बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में दूसरी पारी में पडिक्कल की शानदार बल्लेबाजी भारत ए के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। उनकी पारी ने न केवल टीम को संकट से बाहर निकालने में मदद की बल्कि मुकाबले में वापसी की उम्मीद भी जगा दी।

    हालांकि पडिक्कल अपने दोहरे शतक से चूक गए लेकिन 199 रन की उनकी पारी इस मुकाबले की सबसे अहम पारियों में शामिल हो गई। अब भारत ए की कोशिश अपनी बढ़त को और मजबूत करने की होगी ताकि न्यूजीलैंड ए के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा जा सके।

  • शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। शिवपुरी शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और यातायात व्यवस्था के पालन को लेकर एक हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं। शहर के फतेहपुर क्षेत्र में पुलिस सहायता केंद्र के सामने ईंटों से भरे एक ट्रक की चपेट में आने से रामकिशन आदिवासी के दोनों पैर कुचल गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाने के बाद उनकी हालत को देखते हुए शासकीय मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में भर्ती कराया गया।

    जानकारी के अनुसार, शिवपुरी निवासी 35 वर्षीय रामकिशन आदिवासी रविवार सुबह करीब 10:30 बजे फतेहपुर में पुलिस सहायता केंद्र के सामने स्थित तिराहे पर खड़े थे। इसी दौरान बड़ौदी की ओर से ईंटों से भरा एक ट्रक वहां पहुंचा। ट्रक का पंजीकरण नंबर यूपी 78 डीएन 1927 बताया गया है। तिराहे पर मुड़ते समय रामकिशन ट्रक के पहियों की चपेट में आ गए।

    इस हादसे में उनके दोनों पैर ट्रक के पहियों के नीचे आ गए, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। एक पैर में गंभीर चोट आने की जानकारी भी सामने आई है। घटनास्थल से उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए बाद में उन्हें शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। घटना के बाद क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और नो एंट्री के नियमों के पालन को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    हादसे की जगह को लेकर भी यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दुर्घटना फतेहपुर पुलिस सहायता केंद्र के सामने हुई, जबकि थीम रोड पर बड़ौदी स्थित चिंकारा प्लांटेशन के पास वन नाका मौजूद है। इसी स्थान के सामने से फतेहपुर की ओर जाने वाली पक्की सड़क जुड़ती है। इस मार्ग से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने हाइट लिमिट पोल लगाया था।

    हालांकि, कुछ समय बाद किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से यह पोल टूट गया। इसके बाद इसे दोबारा लगाने की दिशा में कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में भारी वाहनों को निर्धारित सीमा के भीतर रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लंबे समय से प्रभावी नहीं है। स्थानीय यातायात व्यवस्था में इस कमी को हादसे के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यातायात पुलिस के अनुसार, नो एंट्री के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई जारी है। यातायात थाना शिवपुरी के प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि जनवरी से अब तक 78 वाहनों के चालान काटे गए हैं और उनसे 3.90 लाख रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका हाइट लिमिट पोल दोबारा लगा देती है, तो भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने में मदद मिलेगी।

    वहीं, संबंधित व्यवस्था को लेकर दिन के समय नो एंट्री में ट्रक और डंपरों का प्रवेश रोकने के लिए कदम उठाने की बात कही गई है। बड़ौदी वन नाके पर पहले लगे हाइट लिमिट पोल के बारे में जानकारी जुटाने और निर्धारित स्थान पर इसे फिर से लगवाने की बात भी कही गई है।

    रामकिशन के साथ हुए हादसे ने शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और नो एंट्री के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अब इस मामले में हाइट लिमिट पोल दोबारा लगाने और प्रतिबंधित समय में भारी वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

  • भारत की जीत की तैयारी के बीच झटका, ईशान किशन तीसरे टी20 से बाहर, प्लेइंग इलेवन में किसे मिलेगा मौका?

    भारत की जीत की तैयारी के बीच झटका, ईशान किशन तीसरे टी20 से बाहर, प्लेइंग इलेवन में किसे मिलेगा मौका?


    नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम को तीसरे मुकाबले से पहले झटका लगा है। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन चोट के कारण 27 अक्टूबर को वेलिंगटन में होने वाले तीसरे टी20 मैच में भी नहीं खेल पाएंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने उनकी फिटनेस को लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ईशान चोट से उबर रहे हैं लेकिन अभी मैच खेलने के लिए पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं। उनकी गैरमौजूदगी में टीम प्रबंधन को प्लेइंग इलेवन के संयोजन पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

    बीसीसीआई के मुताबिक ईशान किशन को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान दाहिनी जांघ में हल्की चोट लगी थी। मेडिकल भाषा में इसे लो ग्रेड एडडक्टर स्ट्रेन बताया गया है। चोट के बाद से उनकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ईशान की स्थिति में सुधार हो रहा है लेकिन तीसरे मुकाबले तक उनके पूरी तरह फिट होने की संभावना नहीं है। बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी प्रगति पर नजर बनाए हुए है। विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को भी तीसरे टी20 के लिए टीम के साथ बनाए रखा गया है।

    ईशान किशन की चोट के कारण दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाजी का मौका मिला लेकिन वह इस अवसर को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। वैभव आठ गेंदों पर चार रन बनाकर आउट हो गए थे। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा और आक्रामक बल्लेबाजी को देखते हुए टीम प्रबंधन उन्हें एक और मौका दे सकता है। यदि ईशान तीसरे मैच में उपलब्ध नहीं रहते हैं तो वैभव के पास अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर होगा। हालांकि अंतिम प्लेइंग इलेवन का फैसला टीम प्रबंधन ही करेगा।

    दूसरे टी20 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड के 181 रन के लक्ष्य को छह विकेट खोकर हासिल कर लिया था। भारत ने यह लक्ष्य मैच की आखिरी से पहले वाली गेंद पर पूरा किया। इस जीत में बल्लेबाजों ने अहम भूमिका निभाई और दबाव के बीच टीम को मुकाबले में बनाए रखा। तिलक वर्मा ने सिर्फ 26 गेंदों पर 51 रन की आक्रामक पारी खेलकर भारतीय पारी को मजबूती दी। उनकी बल्लेबाजी ने रन गति बढ़ाने के साथ टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाने में मदद की।

    नमन धीर ने भी 17 गेंदों पर 31 रन बनाकर उपयोगी योगदान दिया। वहीं नीतीश कुमार रेड्डी ने 13 गेंदों पर नाबाद 26 रन बनाते हुए टीम को जीत तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय बल्लेबाजों के इस प्रदर्शन से टीम ने पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। अब तीसरे मुकाबले में भारत की कोशिश जीत हासिल कर सीरीज पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की होगी।

    ईशान किशन की गैरमौजूदगी टीम के लिए चुनौती जरूर है लेकिन भारतीय टीम के पास बल्लेबाजी में कई विकल्प मौजूद हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह खुद को साबित करने का मौका भी है। दूसरी ओर न्यूजीलैंड की टीम वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। ऐसे में तीसरा टी20 मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम रहने वाला है। भारतीय प्रशंसकों की नजरें ईशान की रिकवरी के साथ इस बात पर भी रहेंगी कि टीम प्रबंधन उनकी जगह किस खिलाड़ी को अंतिम एकादश में शामिल करता है।

  • WPL 2027 मिनी ऑक्शन में इन 5 खिलाड़ियों पर बरस सकता है करोड़ों का खजाना, दो भारतीय सितारों पर भी रहेंगी नजरें

    WPL 2027 मिनी ऑक्शन में इन 5 खिलाड़ियों पर बरस सकता है करोड़ों का खजाना, दो भारतीय सितारों पर भी रहेंगी नजरें


    नई दिल्ली । महिला प्रीमियर लीग यानी WPL 2027 के मिनी ऑक्शन को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों और फ्रेंचाइजियों की नजरें पांच खिलाड़ियों पर टिक सकती हैं। 28 अक्टूबर को कोच्चि में होने वाली नीलामी में कई ऐसी खिलाड़ी शामिल हैं जो अपनी बल्लेबाजी गेंदबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर टीमों की जरूरत पूरी कर सकती हैं। इस बार नीलामी के लिए कुल 146 खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं जिनमें 119 भारतीय और 27 विदेशी खिलाड़ी हैं। ऐसे में टीमों के पास अपनी कमजोरियों को दूर करने और मजबूत संयोजन तैयार करने का मौका होगा। पांच खिलाड़ियों में इंग्लैंड की सोफिया डंकले ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिनक्स श्रीलंका की चमारी अटापट्टू और भारत की स्नेह राणा तथा जी कमलिनी के नाम चर्चा में हैं।

    इंग्लैंड की विस्फोटक बल्लेबाज सोफिया डंकले नीलामी में आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकती हैं। वह आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं और तेजी से रन बनाकर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 81 मैचों में 123 के स्ट्राइक रेट से 1463 रन बनाए हैं। उनके खाते में सात अर्धशतक भी दर्ज हैं। डंकले ने अपना बेस प्राइस 50 लाख रुपये रखा है। उनकी बल्लेबाजी शैली को देखते हुए ऐसी फ्रेंचाइजियां उन्हें निशाना बना सकती हैं जिन्हें शीर्ष क्रम में तेज शुरुआत देने वाली बल्लेबाज की जरूरत है।

    ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिनक्स भी नीलामी में बड़ी बोली हासिल करने की दावेदार मानी जा रही हैं। वह बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर निचले क्रम में उपयोगी रन बनाने का हुनर भी उनमें है। मोलिनक्स का बेस प्राइस 50 लाख रुपये है। टी20 प्रारूप में गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने वाली खिलाड़ी टीम के संतुलन को बेहतर बना सकती हैं। इसी वजह से उनकी सेवाएं हासिल करने के लिए फ्रेंचाइजियों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू भी इस सूची में अहम नाम हैं। वह आक्रामक सलामी बल्लेबाज होने के साथ उपयोगी गेंदबाजी भी कर सकती हैं। पावरप्ले में तेजी से रन बनाना और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव डालना उनकी बल्लेबाजी की खासियत है। उनके अनुभव और ऑलराउंड क्षमता को देखते हुए कई टीमें उन्हें अपने दल में शामिल करने में रुचि दिखा सकती हैं। हालांकि अंतिम बोली का स्तर फ्रेंचाइजियों की जरूरत और नीलामी के दौरान प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा।

    भारतीय खिलाड़ियों में स्नेह राणा पर खास नजरें रहेंगी। दिल्ली कैपिटल्स द्वारा रिलीज किए जाने के बाद वह इस बार नीलामी में उतरेंगी। भारतीय परिस्थितियों में उनकी स्पिन गेंदबाजी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। वह निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखती हैं। स्नेह राणा का बेस प्राइस 30 लाख रुपये है। गेंदबाजी में विकल्प और निचले क्रम में मजबूती तलाश रही टीमें उन्हें खरीदने की कोशिश कर सकती हैं।

    भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज जी कमलिनी भी फ्रेंचाइजियों की पसंद बन सकती हैं। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से ध्यान खींचा है। मुंबई इंडियंस द्वारा रिलीज किए जाने के बाद वह मिनी ऑक्शन में उपलब्ध होंगी। कमलिनी विकेटकीपिंग की जरूरत पूरी करने के साथ बल्लेबाजी क्रम में भी योगदान दे सकती हैं। युवा उम्र और आक्रामक अंदाज उन्हें भविष्य को ध्यान में रखकर टीम तैयार करने वाली फ्रेंचाइजियों के लिए आकर्षक विकल्प बना सकते हैं।

    कुल मिलाकर WPL 2027 का मिनी ऑक्शन टीमों के लिए अपनी रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने का मौका होगा। सोफिया डंकले की आक्रामक बल्लेबाजी सोफी मोलिनक्स और चमारी अटापट्टू की ऑलराउंड क्षमता तथा स्नेह राणा और जी कमलिनी की उपयोगिता नीलामी को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि इन खिलाड़ियों पर कितनी बड़ी बोली लगेगी यह नीलामी के दिन ही साफ होगा।

  • करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात

    करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात


    शिवपुरी जिले: 
    के करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कलयुग में राक्षसी प्रवृत्तियों के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी। उन्होंने त्रेतायुग के राक्षसों और वर्तमान समय के नकारात्मक व्यवहार की तुलना करते हुए श्रद्धालुओं से सवाल किया कि पहले राक्षस किस तरह के काम करते थे और आज उनके व्यवहार तथा गतिविधियों में क्या बदलाव आया है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन, कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

    पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में राक्षस यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में हड्डियां डालकर बाधा उत्पन्न करते थे। वहीं, आज के दौर में राक्षसी प्रवृत्तियां अलग रूप में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और नकारात्मक पोस्ट के जरिए लोगों के बीच गलत संदेश फैलाना भी ऐसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

    कथा के दौरान उन्होंने परमात्मा की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर को पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध और पाप रूपी तृष्णा का त्याग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में सुधार के लिए रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों से सीख लेने की बात कही। उनके मुताबिक, रामायण व्यक्ति को सामान्य अवस्था से महान बनने की प्रेरणा देती है, जबकि केवट और शबरी जैसे पात्र विनम्रता और विशिष्टता का संदेश देते हैं।

    उन्होंने सुग्रीव और विभीषण के प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की शरण में जाने के महत्व को समझाया। साथ ही हनुमानजी के जीवन और समर्पण का उदाहरण देते हुए साधारण जीवात्मा से आध्यात्मिक रूप से ऊंचे स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार के लिए रामकथा, कर्मों को बेहतर बनाने के लिए गीता और मृत्यु के विषय को समझने के लिए भागवत का श्रवण महत्वपूर्ण है।

    पंडित शास्त्री ने कथा में एक पौराणिक प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने हनुमानजी को रामचरितमानस का वास्तविक रचयिता बताते हुए कहा कि हनुमानजी ने अपने नाखूनों से पत्थरों पर रामकथा लिखी थी। उनके अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के मन में द्वेष उत्पन्न होने की आशंका से हनुमानजी ने उस रचना को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानजी के वचन के कारण वाल्मीकि ने कलयुग में गोस्वामी तुलसीदास के रूप में अवतार लेकर रामचरितमानस को जनभाषा में लोगों तक पहुंचाया। यह प्रसंग उन्होंने रामकथा के महत्व को समझाने के लिए सुनाया।

    कथा में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है, जबकि कथा में सच्चे भक्त पहुंचते हैं। उन्होंने अपने प्रति आकर्षण का श्रेय हनुमानजी को देते हुए कहा कि उनका क्रेज नहीं, बल्कि हनुमानजी का प्रभाव है, जो कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने अधिक भीड़ देखने के इच्छुक लोगों को 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार में आने के लिए कहा।

    करैरा में रामकथा के साथ दिव्य दरबार को लेकर भी लोगों की रुचि बनी हुई है। 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले आयोजन का उल्लेख करते हुए पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। कथा के दौरान उनके प्रवचनों में धार्मिक आस्था, जीवन सुधार, कर्म और आधुनिक समय में नकारात्मकता जैसे विषय प्रमुख रहे।