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  • किराये के बहाने जुटाई संपत्ति की जानकारी, फर्जी पहचान से 18 करोड़ का लोन; दिल्ली का चौंकाने वाला बैंक फ्रॉड उजागर

    किराये के बहाने जुटाई संपत्ति की जानकारी, फर्जी पहचान से 18 करोड़ का लोन; दिल्ली का चौंकाने वाला बैंक फ्रॉड उजागर

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के विवेक विहार इलाके से सामने आए कथित बैंक ऋण घोटाले ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और किरायेदारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आरोप है कि किराए पर रहने आए दो व्यक्तियों ने मकान मालकिन की संपत्ति और पहचान से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 18 करोड़ रुपये का ऋण हासिल कर लिया। वर्षों बाद जब बैंक से जुड़े कानूनी नोटिस पहुंचे, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ और जांच एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर पड़ताल शुरू की।

    पुलिस के अनुसार यह मामला वर्ष 2012 से जुड़ा है। विवेक विहार निवासी ऊषा रानी ने अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से अपने दो फ्लैट किराए पर दिए थे। किराएदारों ने स्वयं को कारोबारी बताकर विधिवत किरायेदारी समझौता किया और कुछ समय तक सामान्य रूप से वहां रहे। इसके बाद दोनों फ्लैट खाली कर चले गए। मकान मालकिन ने भी इसे सामान्य घटना मानते हुए आगे कोई संदेह नहीं जताया।

    करीब एक वर्ष बाद स्थिति तब बदली जब बैंक ऋण से जुड़े मामले में कानूनी प्रतिनिधि उनके घर पहुंचे और बकाया ऋण के संबंध में जानकारी मांगी। इस सूचना से हैरान मकान मालकिन ने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उनके नाम पर केवल एक नहीं, बल्कि लगभग 18 करोड़ रुपये के कई ऋण दर्ज हैं, जिनके लिए उनकी संपत्तियों को आधार बनाया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि ऋण प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर उन्हें बैंक में प्रस्तुत किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार मकान मालकिन के परिवार से संबंधित पहचान दस्तावेजों की प्रतियां इस्तेमाल की गईं, जबकि हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे। इसके अलावा एक महिला द्वारा स्वयं को संपत्ति की वास्तविक मालिक बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की भी जानकारी सामने आई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई।

    जांच में यह भी आरोप सामने आया कि ऋण के माध्यम से प्राप्त धनराशि को कई अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए स्थानांतरित किया गया, ताकि लेनदेन की वास्तविक श्रृंखला को छिपाया जा सके। वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद विभिन्न एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल शुरू की। मामले में पुलिस के साथ अन्य जांच एजेंसियां भी शामिल हुईं और वित्तीय लेनदेन के कई पहलुओं की जांच की गई।

    जांच के दौरान एक आरोपी की गिरफ्तारी भी की गई। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा और उसके खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में और किन लोगों की भूमिका रही तथा बैंकिंग और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में कहां-कहां चूक हुई।

    यह मामला संपत्ति मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण सीख माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किरायेदारी के दौरान पहचान और संपत्ति संबंधी दस्तावेज साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है। किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने से पहले उनकी आवश्यकता, उपयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर संपत्ति के रिकॉर्ड, बैंकिंग गतिविधियों और आधिकारिक दस्तावेजों की निगरानी करते रहना ऐसे मामलों से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय माना

  • धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा

    धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा


    नई दिल्ली ।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेता है, तो वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का प्रभाव भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत दर्ज आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा और ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

    यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें महिला ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। शिकायत में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं भी शामिल की गई थीं। विवाद की पृष्ठभूमि में परिवार के भीतर साथ रहने के दौरान स्वच्छता, पानी के उपयोग और घरेलू व्यवस्थाओं को लेकर मतभेद सामने आए थे।

    सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि विवाह के समय महिला ने अपने पति के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। उसने अपना नाम भी बदल लिया था और लंबे समय से मुस्लिम धर्म का पालन कर रही थी। इसी आधार पर अदालत के समक्ष यह कानूनी प्रश्न उठा कि क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षण की पात्र मानी जा सकती है।

    आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि यह मूल रूप से पारिवारिक और संपत्ति से जुड़ा विवाद है तथा अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। वहीं सरकारी पक्ष ने भी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मिलने वाला संरक्षण उपलब्ध नहीं रहता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।

    न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकल पीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों को इस विशेष अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से राहत प्रदान की। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शिकायत में भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए अन्य आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनकी सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी।

    अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विशेष कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार और संरक्षण संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा न्यायालयों की स्थापित व्याख्याओं के अनुरूप ही निर्धारित किए जाते हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि यदि किसी मामले में अन्य आपराधिक आरोप बनते हैं, तो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर उन मामलों की सुनवाई समाप्त नहीं हो जाती।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दायरे और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनी प्रभावों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनों की व्याख्या और न्यायिक दृष्टिकोण को समझने में सहायता मिलेगी, जबकि प्रत्येक मामले का अंतिम निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

  • इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती

    इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी थाने से अवैध शराब मामले में गिरफ्तार आरोपी साबिर उर्फ गज्जू हथकड़ी से हाथ निकालकर फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश में कई टीमें रवाना कर दी गईं।

    इंदौर के द्वारकापुरी थाना परिसर से मंगलवार को पुलिस की हिरासत में मौजूद एक आरोपी के फरार होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार साबिर उर्फ गज्जू संतरी को चकमा देकर हथकड़ी से अपना हाथ निकालने में सफल रहा और मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल अलग अलग टीमों का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार साबिर उर्फ गज्जू निवासी अहीरखेड़ी को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया था। वह अवैध शराब के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे द्वारकापुरी थाने लाया गया जहां सुरक्षा के तहत हथकड़ी लगाकर बैठाया गया था। मंगलवार को मौका मिलते ही उसने धीरे धीरे हथकड़ी से अपना हाथ निकाल लिया और पुलिसकर्मियों को भनक लगे बिना वहां से भाग निकला।

    जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर साबिर को बैठाया गया था वहीं पास में पुलिस की गिरफ्त में मौजूद ड्रग्स तस्कर चेतन नाथ भी बैठा हुआ था। चेतन नाथ को सोमवार को ही आठ किलो गांजा लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन और 22 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का फायदा उठाकर साबिर फरार हो गया।

    घटना सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी ली और आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमों को रवाना किया। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही है और आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साबिर कोई नया अपराधी नहीं है। करीब दो महीने पहले उसके साथी अरुण को अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय भी साबिर उसके साथ मौजूद था लेकिन पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी और सोमवार रात उसे पकड़ने में सफलता मिली थी लेकिन अगले ही दिन वह फिर पुलिस हिरासत से भाग निकला।

    सूत्रों के मुताबिक साबिर के खिलाफ अवैध शराब की तस्करी मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों सहित तीन से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के साथ साथ यह भी जांच कर रही है कि थाने से फरार होने में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

  • सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क

    सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क


    इंदौर । इंदौर में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार आरोपी चेतन नाथ से पूछताछ में सामने आया है कि नशे का पूरा कारोबार सोशल मीडिया कॉलिंग के जरिए संचालित किया जाता था। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में एक भी सेव संपर्क नंबर नहीं मिला जिससे पुलिस को अंदेशा है कि गिरोह पहचान छिपाने के लिए आधुनिक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। फिलहाल अदालत ने आरोपी को दो जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

    द्वारकापुरी थाना पुलिस के अनुसार चेतन नाथ की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि ड्रग्स की खरीद और सप्लाई के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेज की बजाय सोशल मीडिया कॉलिंग का उपयोग किया जाता था ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल का तकनीकी विश्लेषण कर उसके डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस ने बताया कि जब टीम चेतन नाथ को पकड़ने उसके ठिकाने पर पहुंची थी तब वहां उसका एक साथी भी मौजूद था। पुलिस को देखते ही वह मौके से फरार हो गया। पूछताछ में पता चला कि दोनों पहले जेल में साथ रह चुके हैं और लंबे समय से संपर्क में थे। अब पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और उसके संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।

    पूछताछ के दौरान चेतन नाथ ने यह भी दावा किया कि उसके पास से बरामद 19 लाख रुपये नकद उसके एक साथी की जमानत के लिए जुटाए गए थे। हालांकि पुलिस इस दावे को पूरी तरह सत्यापित करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी नकदी नशे के कारोबार से अर्जित की गई हो सकती है और इसके वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 8 किलो गांजा और पिस्टल के 22 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद कारतूसों के स्रोत और उनके संभावित इस्तेमाल को लेकर भी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी के पास हथियारों से जुड़ा कोई नेटवर्क भी था या नहीं।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ दिन पहले पुलिस ने लकी नाथ नामक आरोपी को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया था। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बैक ट्रैकिंग करते हुए चेतन नाथ तक पहुंच बनाई। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकता और इसके तार दूसरे शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से डिजिटल साक्ष्यों बैंकिंग लेनदेन और कॉलिंग पैटर्न की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

  • आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    नई दिल्ली । घर में ताजा और हरा-भरा पुदीना उगाना आजकल गार्डनिंग के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी ट्रिक तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि गमले की मिट्टी में आलू का टुकड़ा दबाने से पुदीने की ग्रोथ तेजी से होती है और पौधा अधिक घना बनता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इसे केवल एक घरेलू प्रयोग के रूप में देखा जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी पौधे की अच्छी वृद्धि का आधार उसकी मिट्टी, पोषण, नमी और नियमित देखभाल होती है। पुदीना विशेष रूप से ऐसी मिट्टी में बेहतर बढ़ता है जो भुरभुरी, उपजाऊ और जैविक पदार्थों से भरपूर हो। साथ ही मिट्टी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना भी आवश्यक है ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो और जड़ों को नुकसान न पहुंचे।

    वायरल वीडियो में यह दावा किया जाता है कि मिट्टी में रखा गया आलू धीरे-धीरे गलकर स्टार्च और कुछ जैविक तत्व छोड़ता है, जिससे पौधे को अतिरिक्त पोषण मिलता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया का पुदीने की वृद्धि पर कितना प्रभाव पड़ता है, इसे लेकर कोई प्रमाणित अध्ययन उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग मौसम, मिट्टी और वातावरण के अनुसार इसके परिणाम भी भिन्न हो सकते हैं। इसलिए केवल इस उपाय पर निर्भर रहना उचित नहीं माना जाता।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि पुदीने को घना और स्वस्थ बनाना है तो नियमित सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। अत्यधिक पानी से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है, जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। इसी प्रकार हर 20 से 25 दिनों के अंतराल पर वर्मी कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद देने से पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं।

    पुदीने की नियमित कटाई भी उसकी अच्छी बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि समय-समय पर ऊपरी टहनियों और पत्तियों की छंटाई करने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और पौधा अधिक घना दिखाई देता है। यदि पौधा पुराना हो जाए तो उसकी स्वस्थ कटिंग लेकर नया पौधा तैयार करना भी एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

    धूप का संतुलन भी पुदीने की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधे को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां सुबह की हल्की धूप मिले, जबकि दोपहर की तेज धूप से बचाव हो। इससे पत्तियां ताजा बनी रहती हैं और पौधे की वृद्धि लगातार होती रहती है। उचित प्रकाश और संतुलित नमी के साथ पुदीना लंबे समय तक स्वस्थ बना रह सकता है।

    बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली कई गार्डनिंग ट्रिक्स रोचक जरूर होती हैं, लेकिन सभी उपाय हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं होते। इसलिए किसी भी वायरल दावे को अपनाने से पहले उसकी विश्वसनीयता और व्यावहारिक उपयोगिता को समझना आवश्यक है। यदि उद्देश्य लंबे समय तक हरा-भरा और घना पुदीना उगाना है, तो सही मिट्टी, जैविक खाद, संतुलित सिंचाई, नियमित छंटाई और उचित धूप जैसी बुनियादी बागवानी तकनीकों पर ध्यान देना सबसे अधिक लाभकारी और भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • G7 विवाद के बाद ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने, इटली की प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा- राष्ट्रीय सम्मान किसी भी रिश्ते से ऊपर

    G7 विवाद के बाद ट्रंप और मेलोनी आमने-सामने, इटली की प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा- राष्ट्रीय सम्मान किसी भी रिश्ते से ऊपर

    नई दिल्ली । अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सम्मान और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। दोनों नेताओं के बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विवाद पर नजर रखी जा रही है।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए कई बार आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता घट रही है और वह अमेरिका के साथ अपनी नजदीकी दिखाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती हैं। ट्रंप के इन बयानों के बाद इटली की राजनीति और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    एक मीडिया साक्षात्कार में जॉर्जिया मेलोनी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार अमेरिका विरोधी नहीं है, लेकिन इटली के राष्ट्रीय हित और संप्रभुता सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी नेता के सामने झुकना उनकी कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। उनके अनुसार मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंध बराबरी, आपसी सम्मान और स्पष्ट संवाद पर आधारित होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत दावों या सार्वजनिक टिप्पणियों पर।

    मेलोनी ने अपनी लोकप्रियता को लेकर भी ट्रंप की टिप्पणी का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता ही सरकार का मूल्यांकन करती है और उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इटली के हितों की कितनी प्रभावी ढंग से रक्षा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी दूसरे देश के नेता को इटली की आंतरिक राजनीति पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

    इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा स्थगित कर दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले को रोम की ओर से एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से अपने रणनीतिक सहयोग को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दोनों पक्षों के संबंधों पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    मेलोनी ने दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली ने अमेरिका के साथ हुए सभी रक्षा समझौतों का सम्मान किया है, लेकिन किसी भी समझौते में एकतरफा बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति का निर्धारण राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल दो नेताओं के व्यक्तिगत बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप और अमेरिका के बीच बदलते कूटनीतिक समीकरणों का भी संकेत देता है। हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों ने अपनी स्वतंत्र भूमिका को अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखना शुरू किया है। ऐसे में मेलोनी का रुख इस व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।

    फिलहाल दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंध सामान्य बने हुए हैं, लेकिन इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सार्वजनिक बयानों की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों सरकारें इस विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाती हैं या यह मुद्दा भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय मंचों पर भी प्रभाव डालता है।

  • शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा

    शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा


    मध्य प्रदेश। आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला का भरोसा जीता और बीमारी का बहाना बनाकर उससे करीब 28 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से फरार था और गिरफ्तारी से पहले यूरोप भागने की तैयारी कर रहा था।

    क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राकेश छोनकर के रूप में हुई है। वह नोएडा क्षेत्र का रहने वाला है और रूस के मॉस्को में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम करता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और उसने अपनी शैक्षणिक एवं पेशेवर जानकारी का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया।

    जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। उसने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला से संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और शादी की चर्चा शुरू हो गई। विश्वास कायम होने के बाद आरोपी ने महिला को अपनी गंभीर बीमारी की झूठी कहानी सुनाई और इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी।
    पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान आरोपी ने अलग अलग किस्तों में महिला से करीब 28 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब पूरी रकम मिल गई तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और महिला से संपर्क भी कम कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

    क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकतर समय विदेश में रह रहा था जिससे उसकी गिरफ्तारी आसान नहीं थी। हाल ही में वह अपने परिवार से मिलने दिल्ली आया था। पुलिस को जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी दिल्ली से यूरोप जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उसने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। जांच एजेंसियां उसके ऑनलाइन नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की ठगी के और कितने मामले उससे जुड़े हुए हैं।

    क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले रिश्तों में आर्थिक लेनदेन करने से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल करें। किसी भी व्यक्ति की पहचान और दावों की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम भेजना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की जानकारी दी है।
  • बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा

    बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा


    इंदौर इंदौर में बारिश के मौसम से पहले नगर निगम ने अतिक्रमण और जर्जर भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को निगम की टीम ने शहर के दो अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए एक ओर नगर निगम की बगीचे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया तो दूसरी ओर लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक जर्जर मकान के खतरनाक हिस्से को हटाया। दोनों स्थानों पर पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

    पहली कार्रवाई जोन क्रमांक 16 के छोटा बांगड़दा क्षेत्र में की गई। नगर निगम को शिकायत मिली थी कि उद्यान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया है। शिकायत की जांच के बाद निगम ने कार्रवाई का निर्णय लिया। मंगलवार सुबह नगर निगम की टीम जेसीबी मशीनों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण को हटाकर जमीन को कब्जामुक्त कराया।

    रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरिया ने बताया कि नगर निगम की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई और सरकारी जमीन को मुक्त कराया गया।

    इसके बाद नगर निगम का अमला छोटी ग्वालटोली इलाके में पहुंचा जहां एक मकान का ऊपरी हिस्सा काफी जर्जर हो चुका था। भवन की स्थिति को देखते हुए उसके गिरने का खतरा बना हुआ था जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा था। इसी कारण निगम ने एहतियात के तौर पर भवन के ऊपरी हिस्से में बने दो कमरों और छज्जे को हटाने की कार्रवाई की।

    अधिकारियों ने बताया कि इस स्थान पर मशीनों की बजाय मैन्युअल तरीके से तोड़फोड़ की गई ताकि आसपास की इमारतों और दुकानों को कोई नुकसान न पहुंचे। कार्रवाई शुरू करने से पहले सुरक्षा के मद्देनजर नीचे संचालित दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया गया।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार दोनों स्थानों पर कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई। निगम का कहना है कि मानसून के दौरान जर्जर भवनों के गिरने और अतिक्रमण से होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए शहरभर में लगातार सर्वे किया जा रहा है। जहां भी अवैध कब्जे या खतरनाक भवन चिन्हित किए जा रहे हैं वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई जर्जर भवन या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा दिखाई दे तो इसकी सूचना प्रशासन को दें ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर जनहानि और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

  • यूरोप झुलसा रिकॉर्ड गर्मी से, WHO ने दी गंभीर चेतावनी; कई देशों में जनजीवन प्रभावित, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा संकट

    यूरोप झुलसा रिकॉर्ड गर्मी से, WHO ने दी गंभीर चेतावनी; कई देशों में जनजीवन प्रभावित, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा संकट

    नई दिल्ली । यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है, जहां कई देशों में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी ने स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर गंभीर दबाव पैदा कर दिया है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जबकि कई स्थानों पर अत्यधिक तापमान के कारण सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का स्पष्ट संकेत है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। संगठन के अनुसार महाद्वीप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है। वर्तमान हीटवेव से लगभग 15 करोड़ लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई देशों में स्कूलों के संचालन पर असर पड़ा है और बिजली की मांग अचानक बढ़ने से ऊर्जा प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।

    जर्मनी में अत्यधिक गर्मी का असर परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। लीपज़िग में तेज तापमान के कारण ट्राम की पटरियों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं, जिससे सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं राजधानी बर्लिन में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पानी का छिड़काव किया गया। कई शहरों में प्रशासन ने लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    फ्रांस में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह के दौरान सामान्य से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। अंतिम संस्कार से जुड़े संस्थानों पर भी काम का दबाव बढ़ा है। पेरिस सहित कई क्षेत्रों में श्मशान और कब्रिस्तानों की क्षमता पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की बात सामने आई है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    युद्धग्रस्त यूक्रेन में यह हीटवेव नई चुनौती बनकर उभरी है। पहले से क्षतिग्रस्त ऊर्जा ढांचे पर बढ़ती बिजली मांग का दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए आपातकालीन कटौती लागू की गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और भीषण गर्मी का संयुक्त प्रभाव देश की बिजली व्यवस्था के लिए गंभीर परीक्षा साबित हो रहा है।

    यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। कई स्थानों पर सड़कें, रेल ढांचा और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भीषण गर्मी से प्रभावित हुई हैं। सोशल मीडिया पर अत्यधिक तापमान से जुड़ी अनेक तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती हीटवेव केवल मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलती जलवायु का गंभीर संकेत है। अत्यधिक गर्मी का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कृषि, ऊर्जा, परिवहन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए दीर्घकालिक स्तर पर जलवायु अनुकूल नीतियों, हरित ऊर्जा के विस्तार और शहरी ढांचे को अत्यधिक तापमान के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। वर्तमान हालात यह संकेत देते हैं कि यदि वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।