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  • कपूर खानदान का वो 'गुमनाम' सितारा, जिसके 30 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड रणबीर-ऋषि भी नहीं तोड़ पाए!

    कपूर खानदान का वो 'गुमनाम' सितारा, जिसके 30 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड रणबीर-ऋषि भी नहीं तोड़ पाए!

    नई दिल्ली ।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी दिग्गज परिवार का नाम लिया जाता है, तो ‘कपूर खानदान’ का जिक्र सबसे पहले आता है। पेशावर की गलियों से निकलकर मायानगरी मुंबई के सिंहासन पर बैठने वाले इस परिवार की कई पीढ़ियों ने दर्शकों का मनोरंजन किया है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर और आज के दौर के चॉकलेट बॉय रणबीर कपूर तक, हर किसी ने अपनी चमक बिखेरी है। लेकिन, इस चकाचौंध के बीच एक ऐसा नाम कहीं ओझल हो गया, जिसने वास्तव में कपूर परिवार की कामयाबी की पहली ईंट रखी थी। हम बात कर रहे हैं राज कपूर के चाचा और पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई त्रिलोक कपूर की।

    त्रिलोक कपूर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह अपने दौर के एक ऐसे ‘पावरहाउस’ थे, जिनका रिकॉर्ड आज तक अटूट है। दीवान बशेश्वरनाथ के बेटे त्रिलोक ने जब अभिनय की दुनिया में कदम रखा, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह सफलता का एक ऐसा शिखर छुएंगे, जहाँ पहुँचने के लिए उनके भतीजे राज कपूर और पोते रणबीर कपूर को भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। त्रिलोक कपूर ने अपने करियर में 30 सुपरहिट फिल्में दीं। यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसे कपूर परिवार का कोई भी दूसरा सदस्य आज तक पार नहीं कर पाया है।

    त्रिलोक कपूर का फिल्मी सफर 1928 में शुरू हुआ, जब वे पढ़ाई पूरी कर कोलकाता पहुंचे। वह दौर स्वतंत्रता आंदोलन का था और त्रिलोक भी इससे अछूते नहीं रहे। उन्होंने 1933 में फिल्म ‘चार दरवेश’ से डेब्यू किया। इसके बाद आई फिल्म ‘सीता’, जिसमें उनके बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर ‘राम’ बने थे और त्रिलोक ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने इंडस्ट्री पर राज करना शुरू किया, लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली सैलाब 1950 के दशक में आया।

    उस दौर में त्रिलोक कपूर ‘पौराणिक फिल्मों’ Mythological Films के बेताज बादशाह बन गए थे। उन्होंने पर्दे पर भगवान के इतने जीवंत किरदार निभाए कि लोग उन्हें असलियत में पूजने लगे थे। खास तौर पर ‘शिव’ के रूप में उनकी छवि घर-घर में लोकप्रिय हो गई थी। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि अगर उस समय सोशल मीडिया होता, तो शायद उनके फॉलोअर्स की संख्या आज के दिग्गजों को मात दे देती।

    जैसे-जैसे वक्त बदला, त्रिलोक कपूर ने खुद को बदला और करैक्टर आर्टिस्ट के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया था। इसके अलावा उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ और ‘अल्लाह रखा’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

    त्रिलोक कपूर भले ही आज की पीढ़ी के लिए एक अनसुना नाम हों, लेकिन भारतीय सिनेमा के पन्नों में उनकी कामयाबी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनके बेटे विजय कपूर ने भी निर्देशन के क्षेत्र में हाथ आजमाया, लेकिन जो जादू त्रिलोक कपूर ने पर्दे पर पैदा किया, वह बेमिसाल था। 1988 में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपनी 30 हिट फिल्मों की विरासत को वह पीछे छोड़ गए, जो आज भी कपूर खानदान के गौरवशाली इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है।

  • स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट

    स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट


    नई दिल्ली ।साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास होने जा रही है। नए साल के पहले तीन महीनों में नेवी में दो नई स्वदेशी वॉरशिप शामिल होने वाली हैं। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने और 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    इस क्रम में 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ नेवी का हिस्सा बनेगा। यह शिप एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है और 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अंजदीप की एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की क्षमता इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।

    इसी के साथ 14 मार्च को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होगा। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वारफेयर में सक्षम है। इसके अलावा एयर डिफेंस के लिए लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं। एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं।

    आईएनएस तारागिरि लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें दो हेलिकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा भी मौजूद है। 6,700 टन वजनी इस फ्रिगेट की रफ्तार 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे है।

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से अब तक चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा चुके हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी, हिमगिरि और उदयगिरि को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं। इनकी नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और अत्याधुनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

    नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है और इनके नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं जैसे शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

    चीन और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता से निपटने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे भारतीय नौसेना को तेज रफ्तार, मजबूती और रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साल 2026 के पहले तीन महीनों में इन दो वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की तैयारी और शक्ति में और मजबूती आएगी।
  • Beechcraft C90A King Air एयर एंबुलेंस हादसा: 39 साल पुराना विमान, 6600 घंटे की उड़ान के बाद झारखंड में क्रैश

    Beechcraft C90A King Air एयर एंबुलेंस हादसा: 39 साल पुराना विमान, 6600 घंटे की उड़ान के बाद झारखंड में क्रैश


    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए किंग एयर विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई।

    यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।

    विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।

    तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।

    गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

    झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए (किंग एयर) विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई।

    यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।

    विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।

    तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।

    गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

  • रवि शास्त्री की राय: दक्षिण अफ्रीका से मिली हार टीम इंडिया के लिए रणनीति सुधार का मौका

    रवि शास्त्री की राय: दक्षिण अफ्रीका से मिली हार टीम इंडिया के लिए रणनीति सुधार का मौका


    नई दिल्ली ।
    टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका के हाथों 76 रनों की भारी हार का सामना करना पड़ा जो कि भारतीय टीम के टी20 विश्व कप इतिहास में रनों के लिहाज से अब तक की सबसे बड़ी हार है। इस हार के बाद टीम इंडिया की सेमीफाइनल की राह काफी मुश्किल हो गई है और अब टीम को अपनी रणनीति पर गंभीर रूप से विचार करना होगा।

    पूर्व कप्तान और कोच रवि शास्त्री ने इस हार को समय पर मिली वेकअप कॉल बताया। शास्त्री ने कहा कि लगातार जीतते रहने के बाद एक दिन खराब प्रदर्शन होना सामान्य है और उन्हें खुशी है कि यह झटका जल्दी ही मिल गया ताकि टीम को अपनी कमजोरी का एहसास हो सके। उन्होंने कहा कि यह हार कैंप के अंदर रणनीति में बदलाव लाने और टीम कॉम्बिनेशन पर पुनर्विचार करने का मौका देगी। सुपर-8 में एक और हार टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

    शास्त्री ने सुझाव दिया कि टीम को अक्षर पटेल को वापस लाना चाहिए क्योंकि उनके अनुभव की इस समय बेहद जरूरत है। उन्होंने कहा कि पटेल और वाशिंगटन सुंदर दोनों को खेलने का मौका दिया जाना चाहिए ताकि टीम के पास हर स्थिति के लिए विकल्प मौजूद हों। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी मैच में किसी गेंदबाज का दिन खराब हो सकता है जैसे रविवार को वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन था। ऐसे में टीम को अतिरिक्त विकल्प रखने की जरूरत है।

    बल्लेबाजी क्रम पर चर्चा करते हुए शास्त्री ने कहा कि नंबर 5 पर हार्दिक पांड्या, नंबर 6 पर शिवम दुबे और नंबर 7 पर वाशिंगटन सुंदर खेल सकते हैं। अक्षर पटेल को नंबर 5 या नंबर 8 पर खेलने का विकल्प दिया जा सकता है। शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टी20 में अगर आठ बल्लेबाज सही तरीके से योगदान नहीं दे सकते तो टीम में गड़बड़ है। इसलिए टीम को एक अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज का विकल्प रखना चाहिए। उन्होंने रिंकू सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम में शामिल किया जा सकता है।

    शास्त्री का मानना है कि इस हार से टीम को अपनी कमजोरियों का एहसास हुआ है और अब समय है रणनीति सुधार करने का। उन्होंने जोर दिया कि टीम कॉम्बिनेशन, गेंदबाजी विकल्प और बल्लेबाजी क्रम पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह हार टीम को जरूरी चेतावनी दे रही है कि टूर्नामेंट के आगे के दौर में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।

    टी20 विश्व कप के इस प्रारंभिक मुकाबले ने साबित कर दिया है कि भारत को अपनी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा। शास्त्री का संदेश साफ है कि टीम को अनुभव और विकल्पों के साथ संतुलित प्रदर्शन करने की जरूरत है। यह हार टीम के लिए वेकअप कॉल है जो उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करेगी।

  • सहारा समूह पर बड़ा निवेशक घोटाला: मध्य प्रदेश में लगभग 6,689 करोड़ रुपए की राशि के गबन के 9 लाख से अधिक शिकायत आवेदन मिले

    सहारा समूह पर बड़ा निवेशक घोटाला: मध्य प्रदेश में लगभग 6,689 करोड़ रुपए की राशि के गबन के 9 लाख से अधिक शिकायत आवेदन मिले

    भोपाल । मध्य प्रदेश सहारा समूह से जुड़े निवेशकों की रकम के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार को कुल लगभग 9 लाख से अधिक शिकायती आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमेंकुल 6 689 करोड़ रुपए की राशि के निवेशकों के साथ गबन होने का दावा किया गया है। यह जानकारी आज विधानसभा में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने गृह विभाग की ओर से दी।

    मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सहारा समूह को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदेश में सहारा के निवेशकों की राशि के संबंध में कुल कितनी शिकायतें मिली हैं और कितना पैसा निवेशकों को वापस मिला है। इसके उत्तर में राज्य मंत्री पटेल ने बताया कि सरकार को 9 06 661 शिकायत आवेदन मिले हैं और इनमें कुल राशि करीब 6 689 करोड़ रुपये के निवेशकों की है।

    सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा रिफंड पोर्टल बनाया गया है जिसके माध्यम से निवेशकों को उनकी राशि वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पोर्टल के तहत अब तक लगभग 355 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस किये जा चुके हैं लेकिन कुल राशि की तुलना में यह राशि केवल एक छोटा हिस्सा है।

    इस घोटाले को लेकर सदन में स्पष्ट किया गया कि सहारा समूह की कई संपत्तियाँ न्यायालय के आदेश के अनुरूप अटैच की गई हैं और सुप्रीम कोर्ट के तहत निवेशकों की राशि वापस करने का काम जारी है। हालांकि शिवपुरी में दर्ज एफआईआर की संख्या के बारे में सरकार ने कहा कि 1 जनवरी 2024 के बाद समूह के खिलाफ लगभग 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं और अन्य मामलों को मुरैना कोतवाली में मर्ज किया जा रहा है।

    विपक्ष ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या राज्य सरकार के पास निवेशकों की राशि की वसूली या संपत्तियों के नीलामी के कोई ठोस कार्यक्रम हैं ताकि निवेशकों को उनका धन लौटाया जा सके। मंत्री ने जवाब दिया कि यह मामला न्यायिक प्रकृति का है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह विषय राज्य पुलिस की सीमा से बाहर है और उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में ही निवेशकों की राशि वापस की जाएगी।

    विशेषज्ञों और निवेशकों की मांग है कि सहारा मामले में पारदर्शिता और तेजी लाने की जरूरत है ताकि लंबे समय से अपना पैसा वापस पाने के लिए प्रतीक्षा कर रहे लाखों निवेशकों को न्याय मिल सके। निवेशकों की शिकायतें कई वर्षों से लंबित हैं और न्यायपालिका के आदेशों के बावजूद वापस प्राप्त राशि बहुत कम है। इस घोटाले की व्यापक प्रकृति के कारण देश भर में सहारा समूह के खिलाफ मामले दर्ज हैं और जांच एजेंसियाँ सक्रिय हैं।

  • भारतीय शेयर बाजार में 700 अंकों की छलांग, IT और एफआईआई ने बढ़ाया रुख

    भारतीय शेयर बाजार में 700 अंकों की छलांग, IT और एफआईआई ने बढ़ाया रुख


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी के साथ खुला और दिन के दौरान सेंसेक्स ने 82,957.91 अंक का उच्चतम स्तर छुआ। यह कल की क्लोजिंग 82,225.92 से करीब 732 अंक अधिक है।

    बाजार में तेजी के पीछे पांच मुख्य कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

    1. IT शेयरों में मजबूत खरीदारी:
    निफ्टी आईटी इंडेक्स खबर लिखे जाने तक 2.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों के काम करने के तरीके में बदलाव लाएगा और नए अवसर पैदा करेगा। हाल ही में एंथ्रोपिक और इंफोसिस के साथ साझेदारी ने इसका सकारात्मक असर दिखाया है। टीसीएस भी ओपनएआई के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

    2. वैश्विक संकेतों का सकारात्मक होना:
    अमेरिकी बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुए थे। इससे एशियाई बाजारों के साथ भारतीय बाजारों में भी तेजी का रुझान बना रहा।

    3. डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत:
    डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 6 पैसे मजबूत होकर 90.89 पर पहुंचा। रुपया मजबूती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार और अधिक आकर्षक बन गया।

    4. विदेशी निवेशकों की खरीदारी:
    कल की बड़ी गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सिर्फ 102.53 करोड़ रुपए की बिकवाली की। इससे पहले सोमवार को एफआईआई ने कैश मार्केट में 3,483.70 करोड़ रुपए की खरीदारी की थी। यह संकेत है कि विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार के पक्ष में है।

    5. सकारात्मक बाजार धारणा और निवेशकों का भरोसा:
    एफआईआई की खरीदारी और वैश्विक संकेतों से बाजार में निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली।इन पांच कारणों के चलते भारतीय शेयर बाजार बुधवार को मजबूती के साथ हरे निशान में खुला और कारोबार कर रहा है। निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है कि बाजार में लम्बे समय तक रुझान मजबूत बने रहने की संभावना है।

  • नरसिंहपुर में बड़ी कार्रवाई: अंतर्राज्यीय तस्कर से 152 किलो गांजा जब्त, ग्वालियर निवासी चालक गिरफ्तार

    नरसिंहपुर में बड़ी कार्रवाई: अंतर्राज्यीय तस्कर से 152 किलो गांजा जब्त, ग्वालियर निवासी चालक गिरफ्तार


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले में पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 152 किलो गांजा जब्त किया है। अंतर्राज्यीय स्तर पर गांजा की खेप ले जा रहे एक तस्कर को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया है।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से उत्तर प्रदेश के झांसी की ओर एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने जिले में सघन चेकिंग अभियान शुरू किया और संदिग्ध वाहन की तलाश की गई।

    रणनीति के तहत पुलिस टीम ने संभावित मार्गों पर घेराबंदी की। इसी दौरान एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहन से 152 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से चालक रोहित सिंह, निवासी ग्वालियर को गिरफ्तार कर लिया।

    प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि गांजा की यह खेप अंतर्राज्यीय स्तर पर सप्लाई की जानी थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा गांजा कहां से लाया गया और किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जब्त किए गए गांजा की बाजार कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    एसपी डॉ. ऋषिकेश मीना ने कहा कि अंतर्राज्यीय तस्करी के मामलों में पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है। सीमावर्ती जिलों और प्रमुख मार्गों पर नियमित चेकिंग की जा रही है जिससे मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही पर रोक लगाई जा सके।

    इस कार्रवाई को जिले में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास कर रही है ताकि तस्करी की जड़ तक पहुंचा जा सके।

  • वायासैट और बीएसएनएल ने भारत में पहला सैटेलाइट कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किया

    वायासैट और बीएसएनएल ने भारत में पहला सैटेलाइट कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किया

    जबलपुर। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और वायासैट इंडिया (Viasat India) ने ‘सैटेलाइट और सैटेलाइट तकनीक के अनुप्रयोग’ पर अपना पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। यह कार्यक्रम भारत रत्न भीम राव अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम ट्रेनिंग (BRBRAITT), जबलपुर में प्रस्तावित दूरसंचार नवाचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (TIRTC) के तत्वावधान में शुरू किया गया है।
    सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में कौशल विकास एवं उद्योग की तैयारी को बढ़ावा देने के लिए बीएसएनएल और वायासैट इंडिया ने पिछले वर्ष गठबंधन की घोषणा की थी। प्रशिक्षण के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता बीएसएनएल के सीएमडी रॉबर्ट रवि ने की। इस अवसर पर वायासैट के अध्यक्ष – कॉमर्शियल बेन पामर, वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा, वायासैट के उपाध्यक्ष- एडवांस्ड NTN सॉल्यूशंस संदीप मूर्ति और दूरसंचार विभाग के अन्य अधिकारी भी संचार भवन में मौजूद थे। वहीं, इस समारोह के दौरान जबलपुर स्थित बीआरबीआरएआईटीटी में विद्यार्थी मौजूद थे।
    इस गठबंधन के तहत सैटेलाइट एवं सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के उपयोग पर यह प्रारंभिक पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और करियर के शुरुआती दौर में काम कर रहे पेशेवरों के लिए 22 घंटे का एक वर्चुअल प्रोग्राम है। इन प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एक्सपर्ट ट्रेनर द्वारा ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कॉलेज के विद्यार्थियों, आईटी व इंजीनियरिंग के पेशेवरों और सैटेलाइट संचार एवं सैटेलाइट युक्त एप्लीकेशंस में बुनियादी ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक नए स्नातकों को लाभ प्रदान करना है। यह पाठ्यक्रम जबलपुर में बीएसएनएल के तत्वावधान में स्थापित विशेषज्ञ प्रशिक्षण संस्थान बीआरबीआरएआईटीटी में एक व्यापक कौशल विकास की रूपरेखा पेश करने में पहला कदम है। यह संस्थान टेक्नोलॉजी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आधारभूत ढांचा और लॉजिस्टिक संबंधी सहयोग उपलब्ध कराता है।

    बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने और देशज क्षमताओं का निर्माण करने के हमारे लक्ष्य के अनुरूप वायासैट के साथ गठबंधन के तहत हमारा प्रारंभिक पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हमें वास्तव में बहुत प्रसन्नता है। भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कौशलों में पेशेवरों की अगली पीढ़ी को दक्ष करने में बीआरबीआरएआईटीटी की बढ़ती भूमिका देखकर भी हम उत्साहित हैं। हम भविष्य में इस गठबंधन का विस्तार कर विद्यार्थियों के लिए और पाठ्यक्रम एवं सुविधाएं लाने को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं।”

    अनिल कुमार भारद्वाज, डीडीजी, दूरसंचार विभाग ने कहा, “सैटेलाइट कम्युनिकेशंस (उपग्रह संचार) मॉड्यूल, संचार प्रौद्योगिकियों और उनके उपयोग के मामलों में वैश्विक तकनीकी दिग्गजों द्वारा पहले से ही संचालित किए जा रहे प्रशिक्षणों के अतिरिक्त है। TIRTC (टी.आई.आर.टी.सी.) माननीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया का एक विज़न रहा है, जिसका उद्देश्य संचार के उन्नत क्षेत्र में अत्यधिक कुशल जनशक्ति तैयार करना और भारत को दूरसंचार डिजाइन, विकास, विनिर्माण और सेवाओं में अग्रणी बनने में मदद करना है। हम सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और एप्लिकेशन प्रशिक्षण को सक्षम बनाने के लिए वायासैट इंडिया को धन्यवाद देते हैं।”
    वायासैट कॉमर्शियल के अध्यक्ष – कॉमर्शियल बेन पामर ने कहा, “भविष्य के लिए तैयार सैटेलाइट संबंधी प्रतिभा की पाइपलाइन का निर्माण करना महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी डिजिटल एवं उभरती टेक्नोलॉजी की महत्वाकांक्षा को लेकर आगे बढ़ रहा है। बीआरबीआरएआईटीटी में इस प्रथम पाठ्यक्रम के साथ हमारा लक्ष्य उच्च गुणवत्ता का बुनियादी सैटेलाइट ज्ञान विद्यार्थियों और पेशेवरों की पहुंच में लाना और आगे चलकर मिश्रित वर्चुअल और क्लासरूम प्रोग्राम शुरू करना है। हमारी इच्छा भविष्य में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ भी स्थापित करने की है जहां विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव मिल सकेगा और वे उपकरण के सजीव प्रदर्शन के जरिए अपनी समझ बढ़ा सकेंगे।”
    बीआरबीआरएआईटीटी जबलपुर के आईटीएस, सीजीएम, डाक्टर मनीष शुक्ला ने कहा, “प्रतिष्ठित परियोजना टीआईआरटीसी (टेलीकॉम इन्नोवेशन, रिसर्च ट्रेनिंग सेंटर) के तहत वायासैट द्वारा शुरू किया गया यह सैटेलाइट कम्युनिकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम, उभरती एवं रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच गठबंधन को बढ़ावा देने की बीआरबीआरएआईटीटी की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूरसंचार विभाग और वायासैट की साझीदारी में इस प्रोग्राम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह विद्यार्थियों को सैटेलाइट की बारीकियों, संचार लिंक डिजाइन, एडवांस्ड सैटेलाइट आर्किटेक्चर्स, ग्राउंड सेगमेंट ऑपरेशंस और वास्तविक दुनिया के एप्लीकेशंस के बारे में व्यापक अनुभव उपलब्ध करा सके। हमारा उद्देश्य तेजी से उभर रहे सैटेलाइट संचार क्षेत्र में विद्यार्थियों को व्यवहारिक कौशल एवं वैश्विक दृष्टिकोण के साथ सशक्त करते हुए अकादमिक सीख और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच अंतर पाटना है।”
  • अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बुधवार को भारतीय सोलर आयात पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय सोलर शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। यह टैरिफ उन देशों पर लगाया गया है जो अनुचित रूप से सब्सिडी देते हैं और अमेरिका के घरेलू सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं।

    इस फैसले के बाद वारी एनर्जीज के शेयर में कारोबार के दौरान 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक हल्की रिकवरी के बाद यह 10.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,697 रुपए पर कारोबार कर रहा था।

    प्रीमियर एनर्जीज का शेयर भी दबाव में रहा और फिलहाल यह 6.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 728.95 रुपए पर था। कारोबार के दौरान इस शेयर में करीब 14 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा विक्रम सोलर का शेयर 5.67 प्रतिशत कमजोर होकर 174 रुपए पर था, जबकि कारोबार के दौरान 7.76 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    ट्रंप प्रशासन ने भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस के सोलर उत्पादों पर भी क्रमश: 143 प्रतिशत और 81 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। 2025 की पहली छमाही में अमेरिका के सोलर मॉड्यूल आयात में इन तीन देशों की हिस्सेदारी कुल 57 प्रतिशत रही है। 2024 में अमेरिका को भारतीय सोलर निर्यात की वैल्यू 792.6 मिलियन डॉलर थी, जो 2022 की तुलना में नौ गुना अधिक है।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई यूएस सोलर ग्रुप की याचिका के आधार पर की है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ देशों की सब्सिडी अमेरिकी सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचा रही है।

    निवेशकों के लिए यह टैरिफ भारतीय सोलर कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि आगामी कारोबारी सत्र में बिकवाली और दबाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • कमलागंज पुलिया पर युवती का हंगामा: शिवपुरी में युवक को थप्पड़ और चप्पलों से पीटा, वीडियो वायरल

    कमलागंज पुलिया पर युवती का हंगामा: शिवपुरी में युवक को थप्पड़ और चप्पलों से पीटा, वीडियो वायरल


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर के फिजिकल थाना क्षेत्र अंतर्गत कमलागंज पुलिया के पास मंगलवार शाम बीच सड़क एक युवक की पिटाई का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक युवती युवक को पहले थप्पड़ मारते और फिर चप्पलों से पीटते हुए दिखाई दे रही है। घटना के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार युवती पुरानी शिवपुरी क्षेत्र की निवासी बताई जा रही है जबकि पीड़ित युवक इमामबाड़ा इलाके का रहने वाला है। बताया गया है कि युवती अपने एक साथी युवक के साथ कमलागंज पुलिया पर पहुंची थी। वहां उन्होंने एक अन्य युवक को रोका। आरोप है कि युवती के साथ आए युवक ने पीड़ित के हाथ पीछे से पकड़ लिए जिसके बाद युवती ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।

    वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवती ने युवक को कई थप्पड़ मारे। इसके बाद उसने अपनी चप्पल उतारी और युवक पर बरसाना शुरू कर दिया। युवक हाथ छुड़ाने की कोशिश करता रहा लेकिन उसके हाथ पकड़े होने के कारण वह खुद का बचाव नहीं कर सका। पूरी घटना कुछ देर तक चलती रही और आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे।

    घटना के बाद युवती अपने साथी के साथ मौके से चली गई। बाद में युवती की पहचान ज्योति बेड़ियां के रूप में हुई। ज्योति ने स्वीकार किया कि युवक के साथ मारपीट उसी ने की है। उसने आरोप लगाया कि कुछ युवक उसके भाई अभिषेक बेड़ियां को नशे का आदी बना चुके हैं।

    ज्योति का कहना है कि नशे की लत के चलते उसका भाई घर में चोरी करनेलगा था और घरेलू सामान बेचकर नशे की सामग्री खरीदता था। परिवार लगातार इस स्थिति से परेशान था। उसने आरोप लगाया कि जिस युवक के साथ मारपीट हुई उसका नाम शिवम है और वही उसके भाई को नशे की सामग्री उपलब्ध कराता था।

    ज्योति ने बताया कि उसने कई बार संबंधित युवकों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। आखिरकार आक्रोश में आकर उसने यह कदम उठाया। उसने यह भी कहा कि उसने अपने भाई के संबंध में पहले ही देहात थाना में शिकायत दर्ज कराई है।

    हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वीडियो वायरल होने के बाद शहर में घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। सार्वजनिक स्थान पर हुई इस मारपीट और लोगों के मूकदर्शक बने रहने की घटना ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।