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  • अलसी से बनाएं घर पर आसान फेस पैक और जेल, त्वचा को रखें मुलायम और हाइड्रेटेड; जानें इस्तेमाल का सही तरीका

    अलसी से बनाएं घर पर आसान फेस पैक और जेल, त्वचा को रखें मुलायम और हाइड्रेटेड; जानें इस्तेमाल का सही तरीका


    नई दिल्ली। स्किन केयर के लिए लोग अक्सर महंगे प्रोडक्ट्स और अलग अलग तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। लेकिन रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजें भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी हो सकती हैं। अलसी उन्हीं चीजों में शामिल है। अलसी को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद बीज माना जाता है लेकिन इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड और अन्य पोषक तत्वों के कारण इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। खासकर रूखी और बेजान त्वचा वाले लोग अलसी से बने जेल या फेस पैक को अपने स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

    अलसी से जेल बनाना काफी आसान है। इसके लिए एक से दो चम्मच अलसी को पानी में डालकर धीमी आंच पर कुछ देर उबालें। जब पानी थोड़ा गाढ़ा होकर जेल जैसा दिखाई देने लगे तो इसे ठंडा करके छान लें। तैयार जेल को साफ चेहरे पर थोड़ी मात्रा में लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय तक त्वचा पर रहने देने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। अलसी का जेल त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है और रूखी त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए उपयोगी हो सकता है।

    अलसी का फेस पैक भी बनाया जा सकता है। इसके लिए अलसी को पीसकर उसमें थोड़ा दही या एलोवेरा जेल मिलाया जा सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर पतली परत के रूप में लगाएं और सूखने के बाद धीरे से साफ कर लें। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    स्किन केयर में अलसी का इस्तेमाल करते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि केवल घरेलू नुस्खे ही त्वचा की सभी समस्याओं का समाधान नहीं होते। अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी है तो नियमित मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल भी जरूरी है। दिन के समय घर से बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना भी त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और चेहरे की नियमित सफाई करना भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है।

    अलसी का इस्तेमाल करते समय साफ और ताजा जेल तैयार करना बेहतर होता है। घर पर बनाए गए जेल को लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें प्रिजर्वेटिव नहीं होते। अगर इस्तेमाल के बाद त्वचा पर जलन लालिमा खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो तुरंत इसे धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। किसी गंभीर त्वचा समस्या या लगातार बने रहने वाली परेशानी में त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    कुल मिलाकर अलसी को स्किन केयर रूटीन में एक सरल घरेलू विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है। इससे बना जेल त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद कर सकता है। हालांकि बेहतर त्वचा के लिए नियमित देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी है। घरेलू उपायों के साथ त्वचा की जरूरत के अनुसार सही मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना अधिक प्रभावी रूटीन बना सकता है।

  • हॉरर से साइंस फिक्शन तक सिनेमाघरों में मचेगा रोमांच, अगस्त के आखिरी दो वीकेंड की ये फिल्में रहेंगी खास

    हॉरर से साइंस फिक्शन तक सिनेमाघरों में मचेगा रोमांच, अगस्त के आखिरी दो वीकेंड की ये फिल्में रहेंगी खास


    नई दिल्ली। अगस्त का आखिरी दौर फिल्म प्रेमियों के लिए काफी दिलचस्प होने वाला है। खासकर अगर आपको हॉरर सस्पेंस थ्रिलर और साइंस फिक्शन जैसी फिल्मों में दिलचस्पी है तो आने वाले दो वीकेंड सिनेमाघरों में कई अलग तरह की कहानियां लेकर आ रहे हैं। हॉलीवुड की इन फिल्मों में कुछ बड़े नाम जुड़े हैं और इनकी कहानियां भी पारंपरिक फॉर्मूले से अलग नजर आ रही हैं। इनमें एक तरफ डर और रहस्य है तो दूसरी तरफ ऐसी दुनिया दिखाई जाएगी जहां इंसान के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती होगी। अगस्त की रिलीज लिस्ट में हॉरर और साइंस फिक्शन फिल्मों की अच्छी मौजूदगी भी नजर आ रही है।

    सबसे पहले बात इन्सीडियस: आउट ऑफ द फर्दर की करें तो हॉरर प्रेमियों के लिए यह फिल्म सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन सकती है। यह फिल्म 21 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। Sony Pictures के मुताबिक कहानी जेम्मा नाम की एक मां के इर्दगिर्द घूमती है जो अपनी बेटी के साथ उसी घर में रहती है जहां वह बड़ी हुई थी। उसे पता चलता है कि वह रहस्यमयी दुनिया The Further में प्रवेश कर सकती है। लेकिन कहानी तब और खतरनाक हो जाती है जब वह वहां मौजूद बुरी शक्तियों को वास्तविक दुनिया में आने का रास्ता भी दे देती है। इस बार डर सिर्फ दूसरी दुनिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि असली दुनिया भी उसके प्रभाव में आ सकती है। फिल्म में अमेलिया ईव और ब्रैंडन पेरेया के साथ लिन शाय भी नजर आएंगी।

    इसके बाद 28 अगस्त को द डॉग स्टार्स दर्शकों के सामने होगी। रिडली स्कॉट के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक विनाशकारी महामारी के बाद की दुनिया की कहानी दिखाती है। फिल्म में जैकब एलोर्डी का किरदार हिग एक ऐसे समय में जी रहा है जब लगभग पूरी मानव आबादी खत्म हो चुकी है। वह अपने कुत्ते और पूर्व मरीन बैंगली के साथ खतरों से घिरी दुनिया में जीवन बिताता है। एक दूर से मिलने वाला रेडियो सिग्नल उसके भीतर उम्मीद जगाता है और वह यह पता लगाने की कोशिश करता है कि दुनिया में कहीं बेहतर जिंदगी अभी भी मौजूद है या नहीं। फिल्म में सर्वाइवल के साथ रहस्य और एडवेंचर का भी मजबूत मेल देखने को मिलेगा।

    28 अगस्त को ही टोनी भी दर्शकों के बीच पहुंचेगी। यह फिल्म मशहूर शेफ और लेखक एंथनी बॉर्डेन के युवा दिनों से प्रेरित कहानी पेश करती है। फिल्म में डोमिनिक सेसा युवा बॉर्डेन की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी 19 साल के एंथनी की है जो प्रोविंसटाउन पहुंचने के बाद एक रेस्टोरेंट की बेहद अराजक किचन की दुनिया में प्रवेश करता है। यहीं से उसके जीवन का वह दौर शुरू होता है जो आगे चलकर उसकी पहचान को आकार देता है। यह फिल्म पारंपरिक जन्म से मृत्यु तक की बायोपिक के बजाय उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण दौर पर केंद्रित है।

    वहीं द एंड ऑफ ओक स्ट्रीट पहले ही 14 अगस्त से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिनेमाघरों में आ चुकी है और भारत में 21 अगस्त से रिलीज हो रही है। फिल्म में ऐनी हैथवे और इवान मैकग्रेगर मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी एक रहस्यमयी खगोलीय घटना के बाद पूरी ओक स्ट्रीट के अचानक अपनी जगह से गायब होकर एक अनजान दुनिया में पहुंच जाने पर आधारित है। इसके बाद परिवार के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती आती है और उन्हें अजीबोगरीब खतरों के बीच एकजुट रहना पड़ता है। Warner Bros India के मुताबिक भारत में फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी तमिल और तेलुगु में भी सिनेमाघरों में रिलीज की जा रही है।

    कुल मिलाकर अगस्त के आखिरी दो वीकेंड हॉरर और थ्रिलर के साथ साइंस फिक्शन और बायोग्राफिकल ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाले हैं। इन फिल्मों की कहानियां एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं इसलिए दर्शकों के पास अपनी पसंद के हिसाब से फिल्म चुनने के कई विकल्प मौजूद रहेंगे।

  • Bigg Boss 20 को लेकर बड़ा अपडेट, मौनी रॉय का नाम चर्चा में; मेकर्स ने दिया भारी भरकम फीस का ऑफर

    Bigg Boss 20 को लेकर बड़ा अपडेट, मौनी रॉय का नाम चर्चा में; मेकर्स ने दिया भारी भरकम फीस का ऑफर


    नई दिल्ली। टीवी के सबसे चर्चित रियलिटी शो में शामिल Bigg Boss का नया सीजन शुरू होने से पहले ही कंटेस्टेंट्स को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। Bigg Boss 20 में सलमान खान एक बार फिर होस्ट की भूमिका में नजर आने वाले हैं और शो को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। इसी बीच टीवी और फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री मौनी रॉय का नाम संभावित कंटेस्टेंट के तौर पर सामने आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शो के मेकर्स ने मौनी रॉय से संपर्क किया है और उन्हें शो में शामिल करने के लिए बड़ी रकम की पेशकश करने को तैयार हैं। हालांकि अभी तक न तो मौनी रॉय ने इस खबर की पुष्टि की है और न ही शो के मेकर्स की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की गई है।

    मौनी रॉय का नाम सामने आते ही Bigg Boss 20 को लेकर चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मेकर्स मौनी को शो का हिस्सा बनाने में खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि फीस को लेकर बातचीत हो सकती है और अभिनेत्री को आकर्षित करने के लिए मेकर्स बड़े भुगतान की पेशकश कर सकते हैं। हालांकि जब तक अभिनेत्री या प्रोडक्शन टीम की तरफ से आधिकारिक जानकारी नहीं आती तब तक इसे केवल संभावित कास्टिंग की खबर के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    Bigg Boss के हर सीजन में कई चर्चित चेहरों के नाम शो से जुड़ते हैं लेकिन अंतिम सूची लॉन्च के करीब ही स्पष्ट होती है। इस बार भी कई टीवी कलाकारों और दूसरे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के नाम चर्चा में हैं। मौनी रॉय के अलावा माही विज गीता बसरा सुनील पाल और शोविक चक्रवर्ती जैसे नामों को लेकर भी रिपोर्ट्स सामने आई हैं। वहीं मैरी कॉम का नाम भी संभावित कंटेस्टेंट्स की चर्चाओं में शामिल है। हालांकि इन सभी नामों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

    मौनी रॉय की बात करें तो उन्होंने टीवी की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। Naagin जैसे लोकप्रिय शो ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। मौनी को Brahmastra Part One जैसी फिल्मों में देखा जा चुका है। हाल के वर्षों में उन्होंने टेलीविजन के साथ फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी है।

    मौनी की प्रोफेशनल लाइफ भी इस समय काफी व्यस्त बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार वह The Wives और Teesri Manzil जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं। इसके अलावा Vishwambhara में भी उनका विशेष अपीयरेंस बताया जा रहा है। ऐसे में अगर वह Bigg Boss 20 में शामिल होती हैं तो यह उनके करियर का एक अलग तरह का टीवी एक्सपोजर होगा।

    Bigg Boss में किसी लोकप्रिय अभिनेत्री की एंट्री दर्शकों के लिए इसलिए भी खास होती है क्योंकि शो में सितारों की निजी राय उनकी रणनीति और घर के भीतर उनके रिश्ते लगातार चर्चा का विषय बनते हैं। मौनी के नाम की खबर के बाद सोशल मीडिया पर भी संभावित एंट्री को लेकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि फिलहाल यह साफ नहीं है कि वह बतौर फुल टाइम कंटेस्टेंट शो में आएंगी या नहीं।

    Bigg Boss 20 के प्रीमियर को लेकर भी तैयारियां जारी हैं और रिपोर्ट्स में सितंबर के पहले सप्ताह की शुरुआत की बात कही जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में 6 सितंबर की तारीख बताई गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में मेकर्स की ओर से कंटेस्टेंट्स की आधिकारिक सूची सामने आने के साथ मौनी रॉय को लेकर चल रही अटकलों पर भी तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल मौनी रॉय का नाम Bigg Boss 20 की चर्चित संभावित एंट्री में जरूर शामिल हो गया है लेकिन उनकी भागीदारी की पुष्टि होना अभी बाकी है।

  • ममता की पार्टी का कानूनी मोर्चे पर दबदबा कायम, TMC ने जीतीं 15 सीटें; BJP और लेफ्ट को 3-3 सीट

    ममता की पार्टी का कानूनी मोर्चे पर दबदबा कायम, TMC ने जीतीं 15 सीटें; BJP और लेफ्ट को 3-3 सीट


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार तृणमूल कांग्रेस के लिए राहत देने वाला बड़ा नतीजा सामने आया है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के चुनाव में TMC ने 23 में से 15 निर्वाचित सीटों पर जीत हासिल कर अपना दबदबा बरकरार रखा है। बीजेपी के सत्ता में आने के बावजूद बार काउंसिल चुनाव में पार्टी महज तीन सीटों पर सिमट गई। लेफ्ट फ्रंट को भी तीन सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी पिछली संख्या बरकरार रखी। नतीजों को TMC के लिए संगठनात्मक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा था।

    पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की कुल 23 निर्वाचित सीटों के लिए चुनाव हुआ था और बुधवार को इसके नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में TMC समर्थित उम्मीदवारों ने स्पष्ट बढ़त बनाई। रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी की सिफारिश पर कई TMC उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था। पार्टी के लीगल सेल से जुड़े कई प्रमुख चेहरे भी चुनाव जीतने में सफल रहे। शुभाशीष चक्रवर्ती सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों में रहे। उनके अलावा बैश्वानर चटर्जी अंसार मंडल अशोक देब इंद्रनील बसु और सिद्धार्थ मुखर्जी जैसे TMC समर्थित उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की।

    इस चुनाव की एक खास बात महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का परिणाम भी रहा। कुल 23 निर्वाचित सीटों में पांच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। इनमें से चार सीटों पर TMC समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया दो अतिरिक्त महिला सदस्यों को मनोनीत करेगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की कुल सदस्य संख्या 25 हो जाएगी।

    बीजेपी के लिए यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की थी। इसके बावजूद बार काउंसिल के चुनाव में बीजेपी अपनी पिछली तीन सीटों की संख्या से आगे नहीं बढ़ सकी। यानी विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बावजूद वकीलों की इस प्रतिनिधि संस्था में पार्टी का प्रदर्शन पिछली बार के बराबर रहा। दूसरी ओर TMC ने 15 सीटों के साथ अपना नियंत्रण कायम रखा है। लेफ्ट फ्रंट की सीटें पिछली बार के चार से घटकर तीन हो गईं जबकि कांग्रेस अपनी दो सीटों को बचाने में सफल रही।

    इस चुनाव में कुल 75 उम्मीदवार मैदान में थे। TMC ने 23 उम्मीदवार उतारे थे जबकि बीजेपी की ओर से 22 उम्मीदवार चुनाव लड़े। लेफ्ट फ्रंट ने 12 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और 18 निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले में थे। मतदान प्रक्रिया में राज्य के अलग अलग जिला अदालतों से जुड़े वकीलों ने हिस्सा लिया था। अब नतीजे आने के बाद TMC समर्थित खेमे में नए बोर्ड के गठन की तैयारी शुरू होने की उम्मीद है।

    राजनीतिक नजरिए से देखें तो बार काउंसिल का चुनाव विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग प्रकृति का है और इसके नतीजों को सीधे राज्य की राजनीतिक लोकप्रियता का पैमाना नहीं माना जा सकता। फिर भी विधानसभा चुनाव के बाद TMC के लिए यह जीत मनोबल बढ़ाने वाली जरूर है। पार्टी इसे ऐसे समय में हासिल करने में सफल रही है जब उसे चुनावी हार के बाद संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बीजेपी के लिए यह नतीजा संकेत देता है कि राज्य के कानूनी समुदाय के बीच उसका संगठनात्मक प्रभाव अभी TMC से काफी पीछे है।

  • कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा

    कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा


    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। बुधवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में खरगे ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कई सदस्य खुलकर उनके समर्थन में सामने नहीं आए और उन्होंने इस घटना की निंदा नहीं की। खास तौर पर उन्होंने उन नेताओं का जिक्र किया जो लगातार मीडिया में सक्रिय रहते हैं। हालांकि खरगे ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी बैठक में मौजूद नेताओं के हवाले से सामने आई है और कांग्रेस की ओर से खरगे की निजी प्रतिक्रिया को लेकर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    दरअसल यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। 8 अगस्त को खरगे ने यहां एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की और आरोप लगाया कि आयोजन से जुड़े लोगों का बीजेपी से संबंध है। दूसरी तरफ बीजेपी ने इस आयोजन से दूरी बनाई और पार्टी के स्तर पर किसी तरह की भूमिका से इनकार किया। मामले ने धीरे धीरे राजनीतिक रंग ले लिया और अब यह मुद्दा संसद से लेकर कांग्रेस की CWC बैठक तक पहुंच गया है।

    खरगे पहले ही राज्यसभा में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने सदन में कहा था कि रैली के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह दलित समुदाय से आते हैं लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने लिए विशेष संरक्षण की मांग नहीं की। उनके मुताबिक इस घटना ने उन्हें छुआछूत के दर्द का एहसास कराया। खरगे ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई थी।

    CWC की बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस घटना का मुद्दा उठाया था और इसकी निंदा भी की थी। उनके मुताबिक कार्य समिति ने इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय माना है। हालांकि बैठक में खरगे ने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेता ऐसे हैं जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान देते हैं और लेख भी लिखते हैं। इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर चल रही असहजता से जोड़कर देखा जा रहा है।

    विवाद के दूसरे पक्ष में बीजेपी ने भी मामले की जांच का भरोसा दिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यानी एक तरफ कांग्रेस इस घटना को सामाजिक और जातिगत सम्मान से जोड़कर देख रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे पार्टी से जोड़ने के आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कर रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अब खरगे की अपनी पार्टी के नेताओं से अपेक्षा को लेकर हो रही है। CWC जैसी शीर्ष बैठक में उन्होंने जिस तरह अपनी नाराजगी और दुख जाहिर किया है उससे साफ है कि हल्द्वानी का विवाद कांग्रेस के लिए केवल बीजेपी पर हमला करने का मुद्दा नहीं रहा बल्कि पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि खरगे की टिप्पणी से किन नेताओं की ओर संकेत था। इसलिए बिना नाम सामने आए किसी नेता को उनकी नाराजगी का जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल हल्द्वानी का यह विवाद जाति सम्मान राजनीतिक बयानबाजी और दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East tensions) के बाद तेल कंपनियों ने मई में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे. जून के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में जब कमी आई तो फ्यूल प्राइस कम होने का भरोसा बढ़ गया था. लेकिन खाड़ी में तनाव फिर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद टूटने लगी है. दरअसल, इस वक्त दुनियाभर में चल रहे तनाव का असर भारत के ईंधन और खाने-पीने के सामानों पर सबसे ज्यादा नजर आ रहा है.


    कच्चा तेल में फिर तेजी
    अमेरिका-ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ने से कच्चे तेल में तेजी आ रही है. इससे ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब और WTI क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. आशंका है कि क्रूड जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच सकता है. तेल की कीमतों में ये तेजी ऐसे समय आई है, जब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद लगाई जा रही थी. लेकिन हालात फिलहाल राहत वाले नहीं दिख रहे क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी दूरी ने एनर्जी मार्केट की बेचैनी बढ़ा दी है।


    भारत पर ज्यादा असर

    भारत के लिए हालात ज्यादा गंभीर हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है. लंबे समय तक ऊंचे दाम रहने पर ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    तेल के साथ-साथ खाने की थाली से जुड़ी एक और चिंता भी सिर उठाने लगी है. गेहूं की कीमतों में तेजी ने आटा और ब्रेड जैसे जरूरी सामान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव ने काला सागर क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मंडियों तक दिखाई देने लगा है. वैश्विक बाजार में गेहूं करीब 6.7 डॉलर प्रति बुशेल के स्तर पर पहुंच गया है. देश की प्रमुख मंडियों में एक महीने में गेहूं के भाव करीब 4 फीसदी तक बढ़ गए हैं. जाहिर है कि गेहूं की बढ़ती कीमतें आटा, ब्रेड और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ा सकती हैं।


    प्याज भी महंगा
    रसोई की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, प्याज भी लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगा है. प्याज का औसत खुदरा भाव 37 रुपये 20 पैसे प्रति किलो पर पहुंच गया है जबकि एक महीने पहले कीमत 34 रुपये 53 पैसे प्रति किलो थी. एक साल पहले प्याज का भाव 26 रुपये 86 पैसे प्रति किलो था. इस तेजी की वजह खरीफ प्याज की आवक में देरी है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

    तेल से लेकर गेहूं और प्याज तक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पैदा हुआ तनाव भारतीय ग्राहकों की जेब तक पहुंच रहा है. ऐसे में सबकी नजर दो मोर्चों पर टिकी हैं. पहला है कि मिडिल ईस्ट में तेल की दिशा क्या रहती है और दूसरा ये कि काला सागर क्षेत्र में सप्लाई का संकट कितना गहराता है क्योंकि इन दोनों का असर सीधे आपकी गाड़ी के खर्च और रसोई के बजट पर पड़ सकता है।

  • US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम

    US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड (Green Card Applications) पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक बोझ से जुड़े नियमों का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत सरकारी आर्थिक मदद लेने वाले कुछ प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन (Green Card Applications) पर सवाल उठ सकते हैं और आवेदन खारिज भी किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (U.S. Citizenship and Immigration Services) का यह नियम 18 सितंबर से लागू होगा। इसका असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।


    क्या सरकारी मदद लेने से ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा?

    पहले सार्वजनिक बोझ का आकलन मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी मदद के आधार पर किया जाता था। नए नियम में अधिकारियों को ज्यादा पहलुओं को देखने का अधिकार दिया गया है। अब आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक हालत और शिक्षा को भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा आवेदक पर निर्भर लोगों की ओर से ली गई कुछ सरकारी मदद को भी आवेदन पर फैसला करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।


    भारतीयों पर कितना पड़ सकता है असर?
    वर्ष 2023 में 78,100 भारतीयों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें करीब 60 प्रतिशत भारतीयों ने परिवार के किसी सदस्य या अमेरिकी नागरिक रिश्तेदार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया था। नए नियम के कारण ऐसे परिवारों में सरकारी सहायता लेने की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करता है तो अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए आवेदन पर फैसला कर सकते हैं।


    क्या अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की ज्यादा ताकत मिलेगी?

    आव्रजन मामलों के जानकारों के अनुसार नए नियम से अधिकारियों के पास आवेदन को लेकर फैसला करने की गुंजाइश बढ़ जाएगी। यानी केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने सरकारी मदद ली है या नहीं। अधिकारी उसकी पूरी परिस्थिति को देखकर यह आकलन कर सकते हैं कि वह भविष्य में सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। इससे ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है।


    किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

    नए नियम का असर सभी प्रवासियों पर एक जैसा नहीं होगा। शरणार्थियों, उत्पीड़न के पीड़ितों और कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को इससे छूट दी गई है। यानी इन लोगों के आवेदन पर सार्वजनिक बोझ से जुड़े नए नियम उसी तरह लागू नहीं होंगे। हालांकि सामान्य ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार की परिस्थितियां अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


    18 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
    यह नया नियम 2022 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए नियम को रद्द करने के बाद आया है। 18 सितंबर से इसके लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच में सरकारी सहायता के साथ आवेदक की व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाएगा। भारतीयों की बड़ी संख्या परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी नागरिकता हासिल करती है। ऐसे में नए नियम के बाद भारतीय आवेदकों को अपनी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

  • चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी

    चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी (Sugar Stock Limit) इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती (Rising Sugar Demand) है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं।


    चीनी स्टॉक पर किस कारण लिया गया फैसला?

    सरकार के मुताबिक रिकॉर्ड चीनी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए नया आदेश जारी किया गयाहै। इस आदेश के तहत, 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख पाएंगे। यह सरकारी आदेश बुधवार को सामने आया। नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।


    कीमतों में उछाल से चिंता, जुलाई में चीनी को लेकर क्या फैसला हुआ?

    दरअसल, पिछले महीने, भारत ने डीलरों को 30 दिन से अधिक स्टॉक न रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, भारतीय चीनी की कीमतें पिछले महीने 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है। इससे पहले मंगलवार को आई रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत चीनी आपूर्ति बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहा है। खबर के मुताबिक सरकार सीमित शुल्क-मुक्त आयात और थोक व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक सीमा जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।


    चीनी की मांग और आपूर्ति की स्थिति कैसी?

    गौरतलब है कि भारत में अगस्त से नवंबर तक चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। बिस्किट और कन्फेक्शनरी निर्माता जैसे थोक उपभोक्ता त्योहारों से पहले स्टॉक बनाते हैं। अनियमित बारिश और शुष्क मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। चीनी भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह कई गरीब परिवारों के लिए कैलोरी का एक सस्ता स्रोत है।


    भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?

    इससे पहले मई में चीनी निर्यात पर रोक लगाई गई थी। सरकार ने कहा था कि निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • भारत का 'जैसे को तैसे' वाला जवाब…. पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहरी अतिक्रमण पर चलाया बुलडोजर

    भारत का 'जैसे को तैसे' वाला जवाब…. पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहरी अतिक्रमण पर चलाया बुलडोजर


    नई दिल्ली।
    भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते हैं। इस बीच पाकिस्तान (Pakistan) ने फिर कुछ ऐसा कर दिया जिससे भारत (India) को ‘जैस को तैसे’ वाला जवाब देने पड़ा। नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन (Pakistan High Commission) के बाहर बनी कुछ अनधिकृत संरचनाओं और अतिक्रमण को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि ये ढांचे पाकिस्तानी मिशन के वीजा सेक्शन के पास थे और हाई कमीशन के तय परिसर की सीमा के बाहर बने हुए थे। संबंधित एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए इन्हें साफ कर दिया।

    WION की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस कार्रवाई को पाकिस्तान की ओर से इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर की गई हालिया कार्रवाई के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पार्किंग पोल हटा दिए थे। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तनातनी के बीच दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई पहले भी होती रही है।


    पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर क्या हुआ?

    नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर, खास तौर पर उसके वीजा सेक्शन के आसपास कुछ ऐसी संरचनाएं थीं जो निर्धारित परिसर की सीमा के बाहर थीं। इनको अनधिकृत माना गया और संबंधित एजेंसियों ने इन्हें हटा दिया।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक रिश्ते बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि कार्रवाई का सीधा कारण अतिक्रमण और निर्धारित सीमा से बाहर बनी संरचनाएं होना बताया गया है, लेकिन इसका समय इसे दोनों देशों के बीच चल रही पारस्परिक कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।


    इस्लामाबाद में भारत के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई थी?

    नई दिल्ली की कार्रवाई से कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पार्किंग पोल हटा दिए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में जब भी तनाव बढ़ा है, दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे के खिलाफ समान या जवाबी प्रशासनिक कदम उठाए हैं। इनमें राजनयिक कर्मचारियों की संख्या घटाना, आवाजाही और पहुंच पर पाबंदियां लगाना तथा मिशन से जुड़ी सुविधाओं को सीमित करना जैसे कदम शामिल रहे हैं। इसलिए पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर दिल्ली में हुई ताजा कार्रवाई को भी इसी व्यापक सिलसिले की कड़ी माना जा रहा है।


    भारत-पाकिस्तान के रिश्ते इतने खराब क्यों हैं?

    भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव की सबसे बड़ी वजह सीमा पार आतंकवाद है। पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलता है। पिछले साल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा खराब हो गए। अप्रैल 2025 में हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया।

    इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक गंभीर सैन्य तनाव रहा। यह संघर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक माना गया। आखिरकार पाकिस्तान की ओर से संपर्क किए जाने के बाद संघर्ष विराम की स्थिति बनी।


    ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या बदला?

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सामान्य स्थिति वापस नहीं आ सकी है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग ठप हैं और प्रमुख जमीनी सीमा मार्ग भी बंद है। वीजा व्यवस्था भी पहले की तुलना में काफी सीमित कर दी गई है। दोनों देशों में स्थित हाई कमीशन पहले की तुलना में कम कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। यानी दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संपर्क पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन रिश्तों में सामान्य गर्मजोशी फिलहाल दिखाई नहीं देती।


    सिंधु जल संधि भी बनी बड़ा मुद्दा

    भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को भी फिलहाल स्थगित रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और पूरी तरह समाप्त करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण जल समझौता है। ऐसे में इसका स्थगन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की गंभीरता को दिखाता है।