Blog

  • मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

    जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला
    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था।

    प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील
    की

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे।

    सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।

    2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

  • मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब

    मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब


    नई दिल्ली।
    मेघालय विधानसभा में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने ही पति और मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से विकास योजनाओं की प्रगति पर सीधे सवाल कर दिए।

    सदन में नीतिगत मुद्दे पर हुई यह औपचारिक बहस चर्चा का विषय बन गई और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का अनोखा उदाहरण माना जा रहा है।


    पशुपालन और मत्स्य शिक्षा परियोजनाओं पर उठाए सवाल

    गांबेग्रे क्षेत्र की विधायक ने वर्ष 2022 में स्वीकृत पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति पर जानकारी मांगी।



    उन्होंने पूछा कि प्रस्तावित एक वेटरनरी कॉलेज, दो फिशरीज कॉलेज और एक डेयरी कॉलेज की स्थापना में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सा प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पशुधन आधारित आजीविका प्रभावित हो रही है।


    मुख्यमंत्री ने बताई देरी की वजह

    मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजनाएं राज्य के पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मानव संसाधन योजना जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगा।

    उन्होंने बताया कि:

    • वेटरनरी कॉलेज की स्थापना पर लगभग 334 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।

    • इसके लिए किर्डेमकुलाई (री-भोई जिला) में करीब 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

    • संस्थान में 19 विभाग प्रस्तावित किए गए हैं।


    सरकार का भरोसा—अब तेज होगी प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 2022 में स्वीकृत इन संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया को अब गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है।

    मानव संसाधन की कमी को लेकर भी उन्होंने रिक्त पदों को शीघ्र भरने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का भरोसा दिलाया।


    जवाबदेही की मिसाल बना घटनाक्रम

    सदन में यह मामला इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि एक विधायक ने निजी संबंधों से अलग हटकर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत जवाबदेही का सकारात्मक संकेत बताया है।

  • पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?

    पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?


    लाहौर।
    हमदर्द यूनिवर्सिटी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बनी हुई है। वजह बना रमजान के दौरान जारी बताया जा रहा एक कथित नोटिस, जिसमें कैंपस में लड़के और लड़की के साथ खड़े होने पर आपत्ति जताने और यहां तक कि उनका “निकाह” कराए जाने जैसी बात लिखी होने का दावा किया जा रहा है।


    वायरल नोटिस में क्या कहा गया?

    सोशल मीडिया पर फैल रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, छात्रों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पवित्र महीने के दौरान किसी भी “कपल” का कैंपस में साथ खड़ा होना सख्त मना है।

    कथित तौर पर इसमें चेतावनी दी गई कि यदि कोई लड़का-लड़की साथ पाया गया तो उनका “तुरंत निकाह” करवा दिया जाएगा।

    इसके साथ ही छात्रों को संस्थान की “पवित्रता बनाए रखने” और अनावश्यक नजदीकी से बचने की सलाह देने की बात भी कही गई है।



    वायरल सामग्री में मजाकिया अंदाज में यह दावा भी किया जा रहा है कि नियम तोड़ने वालों को वलीमा (रिसेप्शन) का खर्च खुद उठाना होगा।


    असली या फर्जी? प्रामाणिकता पर सवाल

    इस कथित नोटिस की सत्यता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    कई लोग इसे फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।


    सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे

    नोटिस वायरल होते ही इंटरनेट पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—

    • “रिश्ता कराने का तरीका थोड़ा कैज़ुअल है।”

    • “जिनके घर वाले नहीं मान रहे, उनके लिए सुनहरा मौका!”

    • “अब तो क्रश के पास जाकर खड़े होना पड़ेगा।”

    • “ऐसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे लें?”

    छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने रील्स बनाकर इस कथित आदेश का हास्यपूर्ण अंदाज में मजाक उड़ाया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।


    बहस का मुद्दा क्या बना?

    चाहे नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इस घटना ने कैंपस अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार को लेकर नई बहस छेड़ दी है—कि बिना पुष्टि के वायरल सामग्री किस तरह सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।

  • वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका

    वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक नागरिकों का मतदान केंद्र तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वोटिंग को अनिवार्य बनाने जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोग अपने मताधिकार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई है कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार ही मैदान में हो, तब भी उसे निर्विरोध विजयी घोषित करने के बजाय चुनाव कराया जाए, ताकि मतदाता “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) का विकल्प चुन सकें।


    अदालत ने पूछा—क्या NOTA से बदली है स्थिति?

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि NOTA लागू होने के बाद क्या वास्तव में:

    • मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है?

    • उम्मीदवारों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है?

    अदालत ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कोई प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए—बहुत कठोर नहीं, लेकिन ऐसी कि नागरिक मतदान के लिए प्रेरित हों।


    ग्रामीण बनाम शहरी मतदान पर भी चर्चा

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को अक्सर एक उत्सव की तरह देखा जाता है। लोग समूह में मतदान करने जाते हैं, जबकि अनुभव बताता है कि शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग कई बार मतदान में अपेक्षाकृत कम भागीदारी करता है।


    किस प्रावधान को दी गई है चुनौती?

    याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की उस धारा को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि चुनाव मैदान में केवल एक उम्मीदवार रह जाता है, तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थिति में मतदाताओं को NOTA का विकल्प प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिलता, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति सीमित हो जाती है।


    याचिकाकर्ताओं का पक्ष

    याचिका में कहा गया कि यदि NOTA के परिणामों को वास्तविक प्रभाव दिया जाए, तो अधिक मतदाता मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान व्यवस्था में NOTA चुनने का कोई प्रत्यक्ष परिणाम नहीं निकलता, जिससे मतदाताओं का उत्साह कम होता है।


    व्यापक बहस की शुरुआत

    अदालत की इन टिप्पणियों ने अनिवार्य मतदान, मतदाता सहभागिता और NOTA की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में इस पर विस्तृत कानूनी विमर्श होने की संभावना है।

  • सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'

    सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोड एक्सीडेंट्स में तुरंत मदद देने और पीड़ितों की जान बचाने के मकसद से ‘राह-वीर योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत, जो भी नागरिक किसी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करेगा और उसे अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार ₹25,000 कैश प्राइज के साथ एक सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्कीम का ऐलान करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य समाज में अच्छे काम करने वालों का मनोबल बढ़ाना और लोगों को तुरंत मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

    गोल्डन आवर में जान बचाने का मकसद
    ‘राह-वीर योजना’ का सबसे बड़ा लक्ष्य एक्सीडेंट के तुरंत बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ का सही इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घायल व्यक्ति को एक्सीडेंट के तुरंत बाद मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी झंझटों के डर को भूलकर मानवीय आधार पर मदद के लिए आगे आएं और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाएं।

    ईनाम की धनराशि और राष्ट्रीय सम्मान
    स्कीम के नियमों के अनुसार, एक ही एक्सीडेंट में अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक पीड़ितों की सहायता करता है, तो भी उसे अधिकतम ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि ही दी जाएगी। इसके अलावा, साल भर में चुने गए 10 सबसे बेहतरीन ‘राह-वीरों’ को केंद्र सरकार की ओर से1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्रमाण पत्र देकर विशेष सम्मानित किया जाएगा।
    कानूनी डर को खत्म करने की पहल
    ‘राह-वीर योजना’ केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि एक्सीडेंट पीड़ितों की मदद करना अब किसी कानूनी जोखिम का कारण नहीं बनेगा। अक्सर लोग पूछताछ और अदालती प्रक्रिया के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन इस स्कीम के तहत मददगारों को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें समाज के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
  • आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ

    आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ


    नई दिल्ली । आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने का आसान उपाय बताया है। उनका सुझाव है कि प्रतिदिन पपीता खाने से शरीर में जमा बुरा कोलेस्ट्रॉल LDL नियंत्रित होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

    पपीता क्यों खाएं?

    पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विटामिन C फाइबर और कई पोषक तत्व होते हैं। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार नियमित रूप से पपीता खाने से कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी कम होता है। पपीता आयुर्वेद में पाचन सुधारने वाला फल माना जाता है। यह शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकालने में मदद करता है और कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है। इसके अलावा पपीते में मौजूद फाइबर गुड कोलेस्ट्रॉल HDL बढ़ाने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है।

    प्रतिदिन कितना पपीता खाएं?

    आचार्य बालकृष्ण के अनुसार: रोजाना 1 कटोरी पपीता सुबह या शाम खाया जा सकता है। इसे बिना नमक के खाना चाहिए। सर्दी-जुकाम में पपीते पर थोड़ा काली मिर्च पाउडर छिड़ककर खाया जा सकता है। पपीता तले-भुने भोजन के साथ न मिलाएं।

    आसान और किफायती उपाय

    पपीता घर में आसानी से उपलब्ध होता है और इसका सेवन सरल प्राकृतिक और किफायती तरीका है कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने का। यह न केवल दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि पाचन तंत्र और कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत देता है।

  • आज से बुध कुंभ राशि में चलेंगे वक्री की चाल, इन राशियों को रहना होगा सतर्क, ये होंगी मालामाल

    आज से बुध कुंभ राशि में चलेंगे वक्री की चाल, इन राशियों को रहना होगा सतर्क, ये होंगी मालामाल


    नई दिल्‍ली । ज्योतिष के अनुसार, बुध ग्रह बुद्धि, तर्क और बातचीत का कारक माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, 26 फरवरी 2026 से बुध कुंभ राशि में वक्री चाल चलेंगे, जो लगभग 21 मार्च 2026 तक बनी रहेगी। इस दौरान लोगों की सोच, निर्णय लेने की क्षमता और संवाद पर असर दिख सकता है। पुराने अधूरे काम सामने आ सकते हैं, गलतफहमियां बढ़ सकती हैं, इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा।

    इन राशियों को मिलेगा फायदा या सामान्य परिणाम
    मेष: आमदनी बढ़ सकती है, पुराने पैसे वापस मिल सकते हैं। दोस्तों से मुलाकात खुशियाँ लाएगी। निवेश सोच-समझकर करें।

    वृषभ: करियर में मेहनत रंग लाएगी। अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर रहेंगे, लेकिन जल्दबाजी से बचें।

    मिथुन: रुके काम धीरे-धीरे पूरे होंगे। धार्मिक यात्रा का योग बन सकता है। कागजी काम में सावधानी रखें।

    सिंह: पार्टनरशिप में लाभ, जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। अहंकार से बचें।

    तुला: लव और क्रिएटिव फील्ड में समय अच्छा। अचानक धन लाभ और नए मौके मिल सकते हैं।

    वृश्चिक: घर-परिवार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, प्रॉपर्टी या वाहन मामलों में राहत मिल सकती है।

    इन राशियों को रहना होगा ज्यादा सतर्क
    कर्क: काम में लापरवाही नुकसान दे सकती है। बड़े फैसले से पहले सलाह लें। थकान और नींद की कमी से परेशानी बढ़ सकती है।

    कन्या: जॉब बदलाव या ट्रांसफर का संकेत। विदेश से जुड़े काम में देरी हो सकती है। धैर्य बनाए रखें।

    धनु: यात्रा में रुकावट और भाई-बहनों से विवाद की स्थिति। बोलते समय संयम रखें।

    मकर: बातों को गलत समझा जा सकता है, विवाद बढ़ सकता है। गले या आवाज की समस्या संभव।

    कुंभ: बुध आपकी राशि में वक्री हैं, मन में उलझन और फैसले में दुविधा रह सकती है। शांत रहें।

    मीन: पैसों के मामलों में सावधानी। वाहन चलाते समय सतर्क रहें और परिवार की सेहत का ध्यान रखें।

  • पूरे शरीर के लिए योग का वरदान: सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे और अभ्यास

    पूरे शरीर के लिए योग का वरदान: सर्वांगपुष्टि आसन के फायदे और अभ्यास


    नई दिल्ली ।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां अनियमित दिनचर्या, तनाव और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत आम हो गई है, वहीं शरीर कमजोर और सुस्त महसूस करना भी आम बात हो गई है। ऐसे समय में रोजाना 10 से 15 मिनट का योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक ऊर्जा बढ़ाने में भी कारगर साबित होता है ।

    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, सर्वांगपुष्टि आसन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासान है। यह पूरे शरीर को सक्रिय कर मांसपेशियों की ताकत, रक्त संचार और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, जिससे कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है।

    सर्वांगपुष्टि आसन पूरे शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर पेट, कमर और पैरों की चर्बी घटाने में मदद करता है। बेहतर रक्त संचार के कारण शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसके अलावा, मोटापा, कब्ज और शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याओं में सुधार आता है।

    बच्चों और युवाओं में हाइट और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने में भी यह आसन सहायक है। जोड़ों की जकड़न दूर होती है, लचीलापन बढ़ता है और थकान एवं तनाव कम होकर ऊर्जा का स्तर बनाए रहता है।

    हालांकि, इसे करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। गर्दन, पीठ या कंधे में चोट, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएं और पीरियड्स के दौरान भी इसे टालें। शुरुआत में अभ्यास को ज्यादा लंबा न रखें, सांस पर ध्यान दें और खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद ही करें। असुविधा या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।

    सर्वांगपुष्टि आसन शरीर को मजबूत बनाता है, सुस्ती दूर करता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है। रोजाना 10 मिनट का नियमित अभ्यास आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने का सरल और प्रभावी तरीका है।

  • हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना

    हार्ट हेल्थ और उम्र कम करने के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट रिच डाइट: कैसे लें रोजाना


    नई दिल्ली एक मशहूर कहावत है ‘ईट द रेनबो’। इसका मतलब है अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करें। यह सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंस-बेस्ड सलाह भी है। रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पॉलीफेनॉल्स जैसे पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज की हालिया स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है।

    डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के अनुसार, एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। फ्री रेडिकल्स अनस्टेबल मॉलिक्यूल होते हैं जो सेल्स को डैमेज करते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स इन्हें न्यूट्रलाइज कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। विटामिन A, C, E, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन, सेलेनियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व इन फूड्स में होते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं, ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं। जब शरीर में स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी प्रभावी ढंग से काम करता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए यह बेहद जरूरी है क्योंकि हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जब ऑक्सिडाइज्ड होता है तो आर्टरीज की वॉल्स पर जमाव बनता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। एंटीऑक्सिडेंट्स इस प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं, ब्लड फ्लो बेहतर रखते हैं और दिल पर दबाव कम करते हैं।

    एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, एजिंग स्पीड कम करने में भी यह सहायक होते हैं। ऑक्सिडेटिव डैमेज की वजह से सेल्स, डीएनए, प्रोटीन और बॉडी फैट डैमेज होते हैं जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड यह डैमेज कम कर सेल्स की उम्र बढ़ाते हैं।

    सप्लीमेंट की जरूरत आमतौर पर तब होती है जब डाइट संतुलित न हो, या व्यक्ति प्रदूषण, स्मोकिंग, क्रॉनिक स्ट्रेस या कमजोर इम्यून सिस्टम से प्रभावित हो। रोजाना पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए 4-5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त माना जाता है। हाई-डोज सप्लीमेंट्स लेने से नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

    एंटीऑक्सिडेंट फूड को डाइट में शामिल करने के लिए किसी महंगे प्लान की जरूरत नहीं। कोशिश करें कि थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें।एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं बल्कि हेल्थ स्ट्रैटेजी है। यह हार्ट हेल्थ बेहतर रखता है, इम्यूनिटी मजबूत करता है और उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित करता है। रंगीन और नेचुरल डाइट लंबे समय तक सेहतमंद रहने में अहम भूमिका निभाती है।

  • Holi 2026: रंगों से पहले स्किन को करें प्रोटेक्ट, अपनाएं ये आसान Pre-Holi स्किन केयर रूटीन

    Holi 2026: रंगों से पहले स्किन को करें प्रोटेक्ट, अपनाएं ये आसान Pre-Holi स्किन केयर रूटीन


    नई दिल्ली । Holi का त्योहार खुशियों उमंग और रंगों से भरा होता है लेकिन बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी जबकि मथुरा-वृंदावन में उत्सव की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि आप त्योहार से 5-7 दिन पहले अपनी स्किन को तैयार करें ताकि रंगों का असर कम से कम हो और त्वचा हेल्दी बनी रहेनई दिल्ली

    होली से 5-7 दिन पहले क्या करें?

    डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार होली से एक हफ्ता पहले से ही स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।
    रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। फेस और बॉडी पर नियमित मॉइश्चराइजर लगाएं। किसी नए ब्यूटी प्रोडक्ट केमिकल पील या हार्श ट्रीटमेंट को ट्राई न करें।अगर पहले से एक्ने एलर्जी या रैश की समस्या है तो पहले उसका इलाज कराएं क्योंकि सेंसिटिव स्किन पर रंग ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    रंग खेलने से पहले ये 3 चीजें जरूर लगाएं

    तेल की पतली परत: होली खेलने से 20-30 मिनट पहले चेहरे गर्दन हाथ-पैरों पर नारियल या बादाम का तेल लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है और रंग सीधे त्वचा में नहीं चिपकते।

    मॉइश्चराइजर: तेल के बाद वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं।

    सनस्क्रीन: धूप में खेलने से पहले कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा का सनस्क्रीन 15-20 मिनट पहले अप्लाई करें। जरूरत हो तो दोबारा लगाएं।अलग-अलग स्किन टाइप के लिए खास टिप्स 

    ड्राई स्किन
    हेवी मॉइश्चराइजर और क्रीम-बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। रात में स्किन रिपेयर क्रीम लगाएं ताकि नमी बरकरार रहे।

    ऑयली स्किन

    हल्का नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर चुनें। ज्यादा ऑयलिंग से बचें लेकिन एक पतली प्रोटेक्टिव लेयर जरूर रखें।

    सेंसिटिव स्किन
    खुशबूदार या केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचें। पहले पैच टेस्ट करें और जहां तक संभव हो हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का ही उपयोग करें।

    केमिकल रंगों से बचाव क्यों जरूरी?

    विशेषज्ञों के अनुसार कई रंगों में लेड मरकरी और अन्य हानिकारक केमिकल मिलाए जाते हैं जो स्किन एलर्जी रैश और पिगमेंटेशन का कारण बन सकते हैं। अगर रंग लगाने के बाद जलन या खुजली हो तो त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय सादे पानी से धोएं और जरूरत पड़ने पर स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें।

    क्या बिल्कुल न करें?

    रंग छुड़ाने के लिए स्किन को जोर से न रगड़ें।हार्श स्क्रब या केरोसिन जैसे घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें।बहुत गर्म पानी से चेहरा न धोएं।सही तैयारी के साथ आप होली के रंगों का आनंद भी ले सकते हैं और अपनी त्वचा को सुरक्षित भी रख सकते हैं।