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  • PM मोदी का इंडोनेशिया दौरा: मुस्लिम देश के ऐतिहासिक प्रम्बानान मंदिर से दुनिया को मिलेगा सांस्कृतिक एकता का संदेश

    PM मोदी का इंडोनेशिया दौरा: मुस्लिम देश के ऐतिहासिक प्रम्बानान मंदिर से दुनिया को मिलेगा सांस्कृतिक एकता का संदेश



    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से इंडोनेशिया ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के छह दिवसीय विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव इंडोनेशिया होगा जहां वह 6 से 8 जुलाई तक विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरे की सबसे खास बात योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानान मंदिर की यात्रा मानी जा रही है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती देने के साथ वैश्विक स्तर पर साझा विरासत का संदेश भी देगी।

    इंडोनेशिया भले ही दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश हो लेकिन यहां प्राचीन हिंदू और बौद्ध विरासत को आज भी पूरे सम्मान के साथ संरक्षित किया गया है। योग्याकार्ता में स्थित प्रम्बानान मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। हर वर्ष लाखों पर्यटक और श्रद्धालु इस अद्भुत धरोहर को देखने यहां पहुंचते हैं।

    प्रम्बानान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्रिमूर्ति आधारित वास्तुकला है। मंदिर परिसर में भगवान शिव भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित तीन प्रमुख मंदिर बनाए गए हैं। इनमें भगवान शिव का मंदिर सबसे विशाल और भव्य है जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराती है। इसके अलावा नंदी गरुड़ और हंस जैसे त्रिमूर्ति के वाहनों के लिए भी अलग मंदिर बनाए गए हैं जो इस परिसर की धार्मिक और स्थापत्य भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    प्रम्बानान मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और शिल्पकला के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पुराण की कथाओं को पत्थरों पर बेहद बारीकी से उकेरा गया है। इन कलाकृतियों से स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का प्रभाव सदियों पहले इंडोनेशिया तक पहुंच चुका था। मंदिर परिसर में प्रतिदिन आयोजित होने वाला रामायण बैले नृत्य कार्यक्रम भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उनकी वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग व्यापार निवेश समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।

    प्रम्बानान मंदिर की यात्रा इस बात का भी संदेश देती है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनकी जड़ें साझा इतिहास संस्कृति और सभ्यता में गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसे समय में जब दुनिया सांस्कृतिक संवाद और सहयोग की जरूरत महसूस कर रही है तब यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक एकता और विरासत संरक्षण का मजबूत संदेश भी देगी।

  • 127 कट्स के विवाद के बाद रिलीज हुई 'सतलुज', 48 घंटों में लगा बैन, खालड़ा की पत्नी बोलीं- यही वो असली फिल्म

    127 कट्स के विवाद के बाद रिलीज हुई 'सतलुज', 48 घंटों में लगा बैन, खालड़ा की पत्नी बोलीं- यही वो असली फिल्म


    नई दिल्ली। लंबे समय से विवादों में रही दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’, जिसे बाद में ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया गया, आखिरकार दर्शकों तक पहुंची। कई वर्षों की देरी और सेंसर संबंधी विवादों के बाद फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन स्ट्रीमिंग शुरू होने के करीब 48 घंटे के भीतर ही इसे भारत में हटा दिया गया और फिल्म पर रोक लगा दी गई।

    फिल्म की खास बात यह रही कि इसे बिना किसी कट के मूल संस्करण में रिलीज किया गया था। इसकी जानकारी निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने साझा की थी। फिल्म को जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार का भी समर्थन मिला। उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने कहा कि ओटीटी पर रिलीज हुई ‘सतलुज’ वही मूल फिल्म है, जो सबसे पहले उनके परिवार को दिखाई गई थी और जिसे उन्होंने मंजूरी दी थी। हालांकि, उनका यह बयान फिल्म पर रोक लगाए जाने से पहले का है।

    परमजीत कौर खालड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खुशी जताई कि वर्षों की मुश्किलों के बाद उनके पति के जीवन, संघर्ष और न्याय की लड़ाई पर आधारित फिल्म दर्शकों तक पहुंच सकी। उन्होंने लिखा कि यह वही मूल संस्करण है, जिसे सबसे पहले उनके परिवार ने देखा था। उनके मुताबिक, तमाम दबाव और बदलाव की कोशिशों के बावजूद फिल्म की सच्चाई और मूल भावना को बरकरार रखा गया।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह था कि जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को बिना किसी समझौते और तथ्यों से छेड़छाड़ किए ईमानदारी से प्रस्तुत किया जाए।

    अपने पोस्ट में परमजीत कौर खालड़ा ने दावा किया कि फिल्म में 25 हजार से अधिक लावारिस शवों के मामले और जसवंत सिंह खालड़ा की कानूनी लड़ाई को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया गया है। उन्होंने निर्देशक हनी त्रेहान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारी दबाव के बावजूद फिल्म की ऐतिहासिक और कलात्मक सत्यता से समझौता नहीं किया। साथ ही उम्मीद जताई कि यह फिल्म लोगों को सच, न्याय, जवाबदेही और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित करेगी।

    यह फिल्म वर्षों तक सेंसर प्रक्रिया में अटकी रही। निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, इसे वर्ष 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास भेजा गया था, लेकिन करीब तीन साल तक प्रमाणपत्र नहीं मिला। मेकर्स का दावा था कि बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था। इसके अलावा 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रस्तावित प्रीमियर भी भारतीय अधिकारियों की आपत्तियों के बाद रद्द कर दिया गया था।

    <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”en” dir=”ltr”>On the release of <a href=”https://x.com/hashtag/Punjab95?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw”>#Punjab95</a> under the name of <a href=”https://x.com/hashtag/Satluj?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw”>#Satluj</a> <a href=”https://t.co/QASNh6Y9Fm”>pic.twitter.com/QASNh6Y9Fm</a></p>&mdash; Paramjit Kaur Khalra (@KaurKhalra) <a href=”https://x.com/KaurKhalra/status/2073120269271785885?ref_src=twsrc%5Etfw”>July 3, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.x.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>

    हनी त्रेहान ने बताया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के पहले शीर्षक ‘गल्लूघारा’ पर भी आपत्ति जताई थी और शुरुआती क्रेडिट्स से ‘Inspired by True Events’ हटाने के लिए कहा था। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया।

    फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है। उनके अलावा कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं।

    कई वर्षों के विवाद, सेंसर विवाद और लंबी प्रतीक्षा के बाद रिलीज हुई ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हालांकि, भारत में रिलीज के कुछ ही समय बाद फिल्म पर लगी रोक ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है।

  • बुध का राशि परिवर्तन कल, बनेगा दुर्लभ द्विद्वादश योग, इन 4 राशियों को होगा लाभ

    बुध का राशि परिवर्तन कल, बनेगा दुर्लभ द्विद्वादश योग, इन 4 राशियों को होगा लाभ


    नई दिल्‍ली । ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजकुमार माने जाने वाले बुध देव कल यानी 7 जुलाई को अपनी चाल बदलने जा रहे हैं. बुध ग्रह कर्क राशि से उल्टी चाल (वक्री) चलते हुए अपने स्वामित्व वाली राशि मिथुन में गोचर कर जाएंगे. बुध के इस राशि परिवर्तन से अंतरिक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ योग का निर्माण होने जा रहा है, जिसे ज्योतिष में द्विद्वादश योग कहा जाता है.

    दरअसल, इस समय देवगुरु बृहस्पति वृषभ राशि में विराजमान हैं. बुध के मिथुन राशि में आने से गुरु, बुध से दूसरे (द्वितीय) भाव में होंगे, वहीं बुध ग्रह गुरु से बारहवें (द्वादश) भाव में चले जाएंगे. ग्रहों की यह जुगलबंदी कई राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाली साबित होगी. आइए जानते हैं बुध के इस गोचर और द्विद्वादश योग से किन राशियों को सबसे ज्यादा लाभ होने वाला है.

    मिथुन राशि (Gemini)
    बुध का गोचर आपकी ही राशि में होने जा रहा है, इसलिए सबसे अधिक प्रभाव आप पर ही देखने को मिलेगा. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आपके प्रभाव में वृद्धि होगी. व्यापार में अटके हुए सौदे अचानक पूरे हो सकते हैं. आय के नए स्रोत बनेंगे. अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था, तो वह इस अवधि में वापस मिल सकता है.

    कन्या राशि (Virgo)
    चूंकि बुध आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस गोचर का आपको सीधा फायदा मिलेगा. जो लोग लंबे समय से नौकरी बदलने या प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे, उनकी इच्छा पूरी हो सकती है. कारोबारियों के लिए यह समय कोई नया स्टार्टअप या काम शुरू करने के लिए बेहतरीन है. विदेश से जुड़े व्यापार में बड़ा लाभ होने के संकेत हैं.

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि के जातकों के लिए गुरु और बुध की यह स्थिति बेहद शुभ फलदायी रहने वाली है. आपको पैतृक संपत्ति या किसी पुराने निवेश से बड़ा मुनाफा हो सकता है. आपकी वाणी और संचार कौशल (Communication Skills) में गजब का निखार आएगा, जिससे कार्यक्षेत्र और समाज में आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी. उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा.

    धनु राशि (Sagittarius)
    धनु राशि वालों के लिए द्विद्वादश योग तरक्की के नए रास्ते खोलेगा. जीवनसाथी के साथ चल रहे वैचारिक मतभेद समाप्त होंगे और आपसी प्रेम बढ़ेगा. यदि आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो उसमें अप्रत्याशित मुनाफा देखने को मिल सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आने की पूरी संभावना है.

  • कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट

    कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, HPCL और भारत पेट्रोलियम ने 6 जुलाई की सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए, जिनमें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह सीएनजी के दाम भी स्थिर बने हुए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.55% की गिरावट के साथ 71.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट संभव है। सिटीग्रुप इंक ने अनुमान जताया है कि साल के अंत तक कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

    वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओपेक देशों ने अगले महीने के लिए उत्पादन कोटे में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सात देशों ने मिलकर उत्पादन में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की वृद्धि पर सहमति जताई है।

    दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में दूसरी तिमाही के दौरान लगभग 30% की गिरावट दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल परिवहन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

    पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट (6 जुलाई)
    सरकारी पंपों पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
    दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
    लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05, डीजल ₹99.28
    अयोध्या: पेट्रोल ₹102.04, डीजल ₹99.27
    भोपाल: पेट्रोल ₹114.65, डीजल ₹99.74
    इंदौर: पेट्रोल ₹114.61, डीजल ₹99.70
    कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51, डीजल ₹99.82
    पटना: पेट्रोल ₹112.70, डीजल ₹99.87

    CNG के रेट भी स्थिर
    CNG की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। IGL के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में CNG ₹83.09 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। गुरुग्राम में यह ₹88.12, नोएडा और गाजियाबाद में ₹91.70 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

    अन्य शहरों में भी रेट लगभग स्थिर रहे—
    मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली: ₹91.58
    रेवाड़ी: ₹87.70
    करनाल: ₹87.43
    कैथल: ₹88.43
    कानपुर, हमीरपुर, फतेहपुर: ₹94.42
    अजमेर, पाली, राजसमंद: ₹92.44
    महोबा, बांदा, चित्रकूट: ₹89.42
    हापुड़: ₹92.70
    ग्रेटर नोएडा: ₹91.70

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है।

  • इजरायल में संवैधानिक संकट: नेतन्याहू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश ठुकराया, विपक्ष ने बताया ‘लोकतंत्र पर खतरा’

    इजरायल में संवैधानिक संकट: नेतन्याहू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश ठुकराया, विपक्ष ने बताया ‘लोकतंत्र पर खतरा’


    नई दिल्ली। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और देश की सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव अब गंभीर संवैधानिक संकट का रूप लेता दिख रहा है। रविवार को इजरायली कैबिनेट ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें कमर्शियल मीडिया रेगुलेटर सेकेंड अथॉरिटी फॉर टेलीविजन एंड रेडियो को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने इस घटनाक्रम को ‘जंगल राज की आहट’ बताया है।

    पहली बार सरकार ने कोर्ट आदेश को नकारा
    इजरायल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को औपचारिक रूप से अस्वीकार किया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उन फैसलों पर रोक लगा दी थी, जिनके तहत मीडिया रेगुलेटर की नई परिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

    अदालत ने निर्देश दिया था कि मौजूदा परिषद ही अपना काम जारी रखे, क्योंकि कुछ सदस्यों के इस्तीफे पर राजनीतिक दबाव की आशंका जताई गई थी।

    सरकार का कड़ा रुख
    प्रधानमंत्री नेतन्याहू सरकार ने अदालत के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि उसे कानून को बदलने या रद्द करने का अधिकार नहीं है। संचार मंत्री श्लोमो कारही और न्याय मंत्री यारिव लेविन ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार उन आदेशों को स्वीकार नहीं करेगी जो उनके अनुसार कानून के विरुद्ध हैं, और ऐसे आदेशों के आधार पर लिए गए निर्णय अमान्य माने जाएंगे।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया रेगुलेटर परिषद के भविष्य के किसी भी फैसले को वह मान्यता नहीं देगी, क्योंकि उसके अनुसार परिषद के पास आवश्यक कानूनी सदस्य संख्या नहीं है।

    विपक्ष और विशेषज्ञों की चेतावनी
    सरकार के इस कदम की विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल गिल लिमोन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार चयनात्मक रूप से अदालत के आदेशों का पालन करेगी तो यह कानून के शासन को कमजोर करने की दिशा में गंभीर कदम होगा।

    पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने कहा कि अदालत के आदेशों की अवहेलना से देश में अराजकता फैल सकती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी।

    डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव से पहले न्यायपालिका की शक्ति को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में राजनीतिक फैसलों को प्रभावित किया जा सके।

    मीडिया और लोकतंत्र पर बहस तेज
    पत्रकार संगठनों और लोकतंत्र समर्थक समूहों ने भी सरकार के फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक मीडिया रेगुलेटर का नहीं, बल्कि इजरायल में प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और कानून के शासन पर सीधा प्रभाव डालने वाला मुद्दा बन चुका है।

  • सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ

    सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का भारतीयों ने बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज की प्रति व्यक्ति औसत राशि में 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 1.96 लाख रुपये तक पहुंच गई है। तीन साल पहले यानी वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 98,000 रुपये था। इस तरह लोगों द्वारा लिए जा रहे गोल्ड लोन की औसत राशि लगभग दोगुनी हो गई है।

    क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों के सूचकांक में 144 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों के पास मौजूद सोने का मूल्य काफी बढ़ गया, जिसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान उसी सोने के बदले 200 प्रतिशत तक अधिक लोन राशि स्वीकृत कर रहे हैं।

    गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में तेज उछाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें पर्सनल लोन और कार लोन जैसे अन्य खुदरा ऋण भी शामिल हैं। यह वृद्धि बताती है कि लोग अब अपनी पारंपरिक संपत्ति सोने को नकदी में बदलने के लिए अधिक सक्रिय हो गए हैं।

    कारोबार तीन गुना तक पहुंचा
    देश में गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेज गति से बढ़ा है। यह मार्च 2023 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 19.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

    देशभर में बढ़ी मांग
    गोल्ड लोन अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    बार-बार गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब इसे एक नियमित वित्तीय विकल्प की तरह उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही अब लोग लंबी अवधि की बजाय कम समय के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने की प्रवृत्ति अपना रहे हैं।

    चुकौती में सुधार, डिफॉल्ट में कमी
    तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार के बावजूद ऋण चुकौती की स्थिति में सुधार देखा गया है। 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट के मामले मार्च 2023 में 0.4 प्रतिशत थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 0.2 प्रतिशत रह गए हैं। यह संकेत देता है कि लोन बाजार का विस्तार सुरक्षित और अनुशासित तरीके से हो रहा है।

    खुदरा ऋण में बढ़ती हिस्सेदारी
    वित्त वर्ष 2023-24: 20%
    वित्त वर्ष 2024-25: 30%
    वित्त वर्ष 2025-26: 41%

  • मध्य प्रदेश बना पहला राज्य जहां वक्फ बोर्ड में शामिल हुए 2 हिंदू सदस्य, जानिए किन्हें मिली जिम्मेदारी?

    मध्य प्रदेश बना पहला राज्य जहां वक्फ बोर्ड में शामिल हुए 2 हिंदू सदस्य, जानिए किन्हें मिली जिम्मेदारी?


    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस नए गठन में दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम यानी हिंदू प्रतिनिधियों को जगह दी गई है। इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

    बोर्ड में दो हिंदू सदस्य शामिल
    अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने रविवार को 10 सदस्यीय मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया। इसमें मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को हिंदू सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। बोर्ड का अध्यक्ष सनवर पटेल को नियुक्त किया गया है। नए प्रावधानों के तहत गठित यह वक्फ बोर्ड देश का पहला राज्य स्तरीय बोर्ड बन गया है जिसमें हिंदू सदस्यों को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

    अधिनियम के तहत हुआ पुनर्गठन
    यह पुनर्गठन वक्फ अधिनियम-1995 (संशोधित 2025) की धारा 13(1) में दिए गए प्रावधानों के तहत किया गया है। सरकार ने धारा 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह नई संरचना लागू की है।

    क्या होता है वक्फ बोर्ड?
    वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है, जो राज्य में मौजूद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण का कार्य करती है। इसका मुख्य उद्देश्य इन संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना, उनकी निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि उनका उपयोग धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण के कार्यों में हो। साथ ही यह संस्था वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जों से बचाने का भी काम करती है।

    शिवपुरी में रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा
    इसी बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिवपुरी में एक रक्षा निर्माण इकाई का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि अब मध्य प्रदेश में बनी मिसाइलें दुश्मनों को जवाब देने में सक्षम होंगी। यह परियोजना अडाणी समूह की सहायक कंपनी अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा विकसित की जा रही है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस यूनिट से लगभग 5,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उपस्थित रहे।

  • 6 जुलाई 2026 राशिफल: सोमवार को सौभाग्य योग देगा सफलता और धन लाभ के संकेत तीन राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क

    6 जुलाई 2026 राशिफल: सोमवार को सौभाग्य योग देगा सफलता और धन लाभ के संकेत तीन राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क


    नई दिल्ली। सावन का पावन सोमवार 6 जुलाई 2026 कई राशियों के लिए नई उम्मीद और सफलता लेकर आया है। आज बनने वाला सौभाग्य योग नौकरी व्यापार और आर्थिक मामलों में कई लोगों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। वहीं चंद्रमा और शनि की स्थिति से बनने वाला विष दोष कुछ राशियों के लिए मानसिक तनाव अनावश्यक खर्च और निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में आज धैर्य और विवेक के साथ आगे बढ़ना सबसे बेहतर रहेगा। भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से दिन की चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मेष राशि के लोगों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास से भरा रहेगा। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने के संकेत हैं और नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वृषभ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। परिवार का सहयोग मिलेगा और पुराने निवेश से भी फायदा हो सकता है।

    मिथुन राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है। कर्क राशि के जातकों को भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। परिवार में तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।

    सिंह राशि वालों के लिए सोमवार उन्नति का संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर सम्मान मिलेगा और अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। कन्या राशि के लोगों को मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

    तुला राशि के जातकों के लिए रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी और व्यापार में लाभ के योग बन रहे हैं। वृश्चिक राशि वालों को आज चंद्रमा और शनि के प्रभाव के कारण मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। किसी भी विवाद से दूरी बनाए रखें और जल्दबाजी में आर्थिक निर्णय लेने से बचें।

    धनु राशि वालों के लिए यात्रा और नए अवसरों के योग बन रहे हैं। व्यापार में लाभ मिलने की संभावना है और परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। मकर राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। नए कार्य शुरू करने से पहले अच्छी तरह विचार करें। निवेश के मामलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। मीन राशि के लोगों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। करियर में प्रगति के साथ परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा।

    ज्योतिष के अनुसार आज विशेष रूप से कर्क वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को चंद्रमा और शनि के विष दोष के कारण मानसिक तनाव और उलझनों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मेष सिंह धनु वृषभ और मीन राशि के लोगों के लिए सौभाग्य योग उन्नति धन लाभ और शुभ समाचार लेकर आ सकता है। सोमवार होने के कारण भगवान शिव का जलाभिषेक करना बेलपत्र अर्पित करना और गरीबों की सहायता करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • MP में जुलाई में मानसून मेहरबान, आज 23 जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    MP में जुलाई में मानसून मेहरबान, आज 23 जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार में है। जुलाई की शुरुआत से ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। अब तक राज्य में औसतन 163.1 मिमी (6.4 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। रविवार को 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि सोमवार के लिए मौसम विभाग ने 23 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार सोमवार को सागर, दमोह, बैतूल, देवास, आलीराजपुर, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और अनूपपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रतलाम, उज्जैन, धार, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, आगर-मालवा, राजगढ़ और भोपाल में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    रविवार को भी कई जिलों में जमकर बरसे बादल
    रविवार को प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सीहोर में दिन के समय घने बादलों के कारण अंधेरा छा गया, जबकि मंदसौर में इस मानसून सीजन में अब तक 6.04 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। शाजापुर में सर्वाधिक 28 मिमी वर्षा हुई, जिससे कालीसिंध नदी उफान पर पहुंच गई।

    मौसम विभाग के मुताबिक, छिंदवाड़ा में ढाई इंच से अधिक बारिश हुई। सिवनी, उज्जैन और श्योपुर में करीब पौन इंच, जबकि टीकमगढ़ और ग्वालियर में लगभग आधा इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा दतिया, गुना, इंदौर, राजगढ़, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सीधी, बालाघाट, शाजापुर, भिंड, विदिशा, सीहोर, मंदसौर और पांढुर्णा में भी बारिश और आंधी का असर देखने को मिला।

    तापमान में आई गिरावट
    लगातार हो रही बारिश के चलते प्रदेशभर में तापमान में भी कमी दर्ज की गई। इंदौर का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस, भोपाल 32.2 डिग्री, उज्जैन 32.7 डिग्री, जबलपुर 34 डिग्री और ग्वालियर 37.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि बैतूल में सबसे कम 27 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश
    इस वर्ष जून महीने से ही प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। 5 जुलाई तक मध्य प्रदेश में कुल 163.1 मिमी यानी 6.4 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह सामान्य औसत 172.8 मिमी (6.8 इंच) की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

  • केतन हत्याकांड ने ली एक और जान! पोते की मौत का सदमा नहीं सह सके दादा देवचंद अग्रवाल, कार्डियक अरेस्ट से निधन के बाद परिवार में शोक की लहर

    केतन हत्याकांड ने ली एक और जान! पोते की मौत का सदमा नहीं सह सके दादा देवचंद अग्रवाल, कार्डियक अरेस्ट से निधन के बाद परिवार में शोक की लहर

    पुणे । चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक और भावुक कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। केतन की हत्या के महज 16 दिन बाद उनके 71 वर्षीय दादा देवचंद अग्रवाल का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। परिवार के लिए यह दूसरी बड़ी त्रासदी है, जिसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। परिजनों का कहना है कि पोते की असामयिक मौत का गहरा मानसिक आघात उन्हें लगातार भीतर से तोड़ रहा था और इसी कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।

    देवचंद अग्रवाल पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में उपचाराधीन थे। चिकित्सकीय निगरानी के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और अंततः कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, केतन की मौत के बाद वह लगातार मानसिक तनाव में थे और न्याय की मांग को लेकर बेहद व्यथित रहते थे।

    केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को लोहगढ़ किले के समीप हुई थी। शुरुआती स्तर पर इसे दुर्घटना माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामला हत्या की साजिश का निकला। इसके बाद पुलिस ने जांच के आधार पर केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित करीबी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों पर हत्या और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

    जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों आरोपियों ने पहले से पूरी योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल की पहले रेकी की गई थी और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत तैयारी के बाद हत्या की साजिश को अमल में लाया गया। मामले की जांच के दौरान डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

    पुलिस को जांच के दौरान दोनों आरोपियों के बीच बड़ी संख्या में हुई फोन बातचीत का रिकॉर्ड मिला है। इसके अलावा मोबाइल फोन से हटाए गए डिजिटल डेटा और संदेशों को भी पुनः प्राप्त किया गया है। जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों को भी अपने रिकॉर्ड में शामिल किया है, जिन्हें मामले की कड़ियों को जोड़ने में अहम माना जा रहा है।

    घटनास्थल पर अपराध के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां और वस्तुएं सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर, आरोपियों की ओर से सभी आरोपों से इनकार किया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष सुनवाई अदालत में होगी और वहीं सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    इस बीच देवचंद अग्रवाल के निधन से परिवार गहरे शोक में डूब गया है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अंतिम समय तक अपने पोते के लिए न्याय मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी। अब परिवार की अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच पूरी हो तथा दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।