Blog

  • केतन हत्याकांड ने ली एक और जान! पोते की मौत का सदमा नहीं सह सके दादा देवचंद अग्रवाल, कार्डियक अरेस्ट से निधन के बाद परिवार में शोक की लहर

    केतन हत्याकांड ने ली एक और जान! पोते की मौत का सदमा नहीं सह सके दादा देवचंद अग्रवाल, कार्डियक अरेस्ट से निधन के बाद परिवार में शोक की लहर

    पुणे । चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक और भावुक कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। केतन की हत्या के महज 16 दिन बाद उनके 71 वर्षीय दादा देवचंद अग्रवाल का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। परिवार के लिए यह दूसरी बड़ी त्रासदी है, जिसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। परिजनों का कहना है कि पोते की असामयिक मौत का गहरा मानसिक आघात उन्हें लगातार भीतर से तोड़ रहा था और इसी कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।

    देवचंद अग्रवाल पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में उपचाराधीन थे। चिकित्सकीय निगरानी के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और अंततः कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, केतन की मौत के बाद वह लगातार मानसिक तनाव में थे और न्याय की मांग को लेकर बेहद व्यथित रहते थे।

    केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को लोहगढ़ किले के समीप हुई थी। शुरुआती स्तर पर इसे दुर्घटना माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामला हत्या की साजिश का निकला। इसके बाद पुलिस ने जांच के आधार पर केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित करीबी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों पर हत्या और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

    जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों आरोपियों ने पहले से पूरी योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल की पहले रेकी की गई थी और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत तैयारी के बाद हत्या की साजिश को अमल में लाया गया। मामले की जांच के दौरान डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

    पुलिस को जांच के दौरान दोनों आरोपियों के बीच बड़ी संख्या में हुई फोन बातचीत का रिकॉर्ड मिला है। इसके अलावा मोबाइल फोन से हटाए गए डिजिटल डेटा और संदेशों को भी पुनः प्राप्त किया गया है। जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों को भी अपने रिकॉर्ड में शामिल किया है, जिन्हें मामले की कड़ियों को जोड़ने में अहम माना जा रहा है।

    घटनास्थल पर अपराध के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां और वस्तुएं सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर, आरोपियों की ओर से सभी आरोपों से इनकार किया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष सुनवाई अदालत में होगी और वहीं सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    इस बीच देवचंद अग्रवाल के निधन से परिवार गहरे शोक में डूब गया है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अंतिम समय तक अपने पोते के लिए न्याय मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी। अब परिवार की अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच पूरी हो तथा दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  • 'अल्फा' ने बॉक्स ऑफिस पर दिखाई रफ्तार, दो दिन में 37.90 करोड़ रुपये की वैश्विक कमाई, आलिया भट्ट की पिछली फिल्म का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा

    'अल्फा' ने बॉक्स ऑफिस पर दिखाई रफ्तार, दो दिन में 37.90 करोड़ रुपये की वैश्विक कमाई, आलिया भट्ट की पिछली फिल्म का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा

    मुंबई । आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत स्पाई-एक्शन फिल्म ‘अल्फा’ ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में बॉक्स ऑफिस पर संतोषजनक प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर 37.90 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की है। दूसरे दिन फिल्म की कमाई में पहले दिन की तुलना में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे इसके शुरुआती कारोबार को मजबूती मिली है। अब फिल्म से जुड़े सभी पक्षों की नजरें वीकेंड के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जहां इसके कारोबार में और इजाफे की उम्मीद की जा रही है।

    घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने पहले दिन अच्छी शुरुआत की थी। दूसरे दिन भी दर्शकों की मौजूदगी बनी रही, जिसके चलते कुल दो दिनों का नेट कलेक्शन 28 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। वहीं, ग्रॉस कलेक्शन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक कारोबार ने फिल्म के कुल वैश्विक संग्रह को 37.90 करोड़ रुपये तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    दूसरे दिन फिल्म की कमाई में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि शुरुआती दर्शकों की प्रतिक्रिया का सकारात्मक असर टिकट खिड़की पर दिखाई दिया। यदि रविवार को भी यही रुझान बना रहता है तो शुरुआती सप्ताहांत में फिल्म का कारोबार और मजबूत हो सकता है।

    ‘अल्फा’ ने आलिया भट्ट की पिछली फिल्म ‘जिगरा’ की शुरुआती दो दिनों की वैश्विक कमाई को पीछे छोड़ दिया है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि नई फिल्म को दर्शकों से अपेक्षाकृत बेहतर शुरुआती प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि, बड़े बजट की स्पाई फिल्मों की श्रेणी में यह अब भी कुछ अन्य फिल्मों के शुरुआती कारोबार से पीछे है।

    फिल्म यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-केंद्रित कहानी है, जिसमें एक प्रशिक्षित महिला एजेंट के संघर्ष, मिशन और अतीत से जुड़े रहस्यों को प्रमुखता से दिखाया गया है। एक्शन, भावनात्मक घटनाक्रम और थ्रिलर तत्वों के मिश्रण ने इसे दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाने की कोशिश की है।

    फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी के साथ अनिल कपूर और बॉबी देओल भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। कलाकारों के अभिनय और एक्शन सीक्वेंस को लेकर दर्शकों की मिश्रित लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। यही कारण है कि शुरुआती दिनों में फिल्म बॉक्स ऑफिस पर स्थिर प्रदर्शन बनाए रखने में सफल रही है।

    व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी फिल्म के लिए शुरुआती सप्ताहांत बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि अगले कुछ दिनों तक दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो ‘अल्फा’ अपने पहले सप्ताह में मजबूत कारोबार दर्ज कर सकती है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में यह भी स्पष्ट होगा कि फिल्म लंबी दौड़ में बॉक्स ऑफिस पर कितनी मजबूती से टिक पाती है।

  • उत्तर प्रदेश फतह के मिशन पर भाजपा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं, एनडीए सहयोगियों, साहित्यकारों और कलाकारों से किया व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश फतह के मिशन पर भाजपा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं, एनडीए सहयोगियों, साहित्यकारों और कलाकारों से किया व्यापक मंथन


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ में एक दिन के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में भाग लेकर संगठन, सहयोगी दलों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा की। इस दौरे को आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और एनडीए सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकों में संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी तैयारियों और जनसंपर्क अभियान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार के कार्यों के आधार पर पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में भी मजबूत जनसमर्थन हासिल करेगी।

    उन्होंने कहा कि भाजपा का संगठन लगातार बूथ स्तर तक सक्रिय रहकर जनता के बीच कार्य करता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उनके अनुसार विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार के कार्यों को लेकर जनता में सकारात्मक माहौल है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी आगामी चुनाव में पहले से बेहतर प्रदर्शन के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

    अपने कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं के साथ भी अनौपचारिक मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संगठनात्मक एकजुटता पर भी चर्चा हुई। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आगामी चुनावों से पहले नेतृत्व के बीच तालमेल को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साहित्य, संस्कृति और कला जगत से जुड़े प्रमुख लोगों से भी मुलाकात कर संवाद स्थापित किया। इस दौरान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपरा, लोककला और स्थानीय खानपान जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सहभागिता जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। बैठक का माहौल पूरी तरह अनौपचारिक रहा और इसमें राजनीतिक विषयों पर चर्चा नहीं की गई।

    दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा की वरिष्ठ नेता अपर्णा यादव से भी मुलाकात की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके अलावा पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ आयोजित बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, राजनीतिक परिस्थितियों और सामाजिक समीकरणों पर विस्तृत मंथन किया गया। इन चर्चाओं के आधार पर भविष्य की रणनीति और संगठन विस्तार की दिशा में सुझावों पर भी विचार हुआ।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाने, सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। लखनऊ में आयोजित बैठकों और संवाद कार्यक्रमों को इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

    आने वाले महीनों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रदेशभर में लगातार दौरे और संगठनात्मक कार्यक्रमों की संभावना है। इन गतिविधियों का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, जनसंपर्क बढ़ाना और चुनावी तैयारियों को समय रहते मजबूत आधार प्रदान करना माना जा रहा है।

  • पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, निर्यात में गिरावट से व्यापार घाटा 39.5 अरब डॉलर पहुंचा, आयात निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, निर्यात में गिरावट से व्यापार घाटा 39.5 अरब डॉलर पहुंचा, आयात निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बाहरी क्षेत्र का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का व्यापार घाटा बढ़कर 39.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 22 प्रतिशत अधिक है। आयात में तेज वृद्धि और निर्यात में गिरावट ने आर्थिक संतुलन को प्रभावित किया है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन और बाहरी वित्तीय स्थिरता को लेकर नई चुनौतियां सामने आई हैं।

    आंकड़ों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष के दौरान पाकिस्तान का कुल आयात बढ़कर 69.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात घटकर 30.1 अरब डॉलर पर सिमट गया। आयात में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निर्यात में करीब 6 प्रतिशत की कमी आई। दोनों के बीच बढ़ते अंतर ने व्यापार घाटे को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    केवल जून महीने के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले रहे। महीने-दर-महीने आधार पर व्यापार घाटा लगभग 57 प्रतिशत बढ़कर 4.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आयात में 26 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि घरेलू मांग बढ़ने के साथ आयात का दबाव लगातार मजबूत हो रहा है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का व्यापार घाटा केवल अल्पकालिक समस्या नहीं बल्कि संरचनात्मक चुनौती बन चुका है। देश की अर्थव्यवस्था ऊर्जा, मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल जैसे आवश्यक उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। दूसरी ओर निर्यात का आधार अभी भी सीमित है और उच्च मूल्य वाले उत्पादों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

    कपड़ा उद्योग अब भी पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बना हुआ है। हालांकि इस क्षेत्र से होने वाली आय में बहुत सीमित वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्यात क्षेत्र अपेक्षित गति से विस्तार नहीं कर पा रहा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उत्पादन लागत और मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों का असर भी निर्यात प्रदर्शन पर दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ आयात की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन निर्यात उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहा। यही असंतुलन व्यापार घाटे को लगातार बढ़ा रहा है। यदि निर्यात क्षमता में सुधार नहीं हुआ तो बाहरी भुगतान संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी निर्यात में लगातार कमजोरी को अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकेत बताया है। उनका मानना है कि निर्यात आधारित उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने, उत्पादन लागत कम करने और नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है।

    आर्थिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात आधारित विकास मॉडल को मजबूत बनाना होगी। यदि व्यापार असंतुलन इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर आर्थिक वृद्धि, विदेशी निवेश, मुद्रा विनिमय दर और समग्र वित्तीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

  • बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री, भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले ने बढ़ाया बिहार की राजनीति का तापमान

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में उपचुनाव को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है और सभी प्रमुख दलों की रणनीतियों पर नजरें टिक गई हैं।

    बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यह सीट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। राजधानी पटना के प्रमुख शहरी क्षेत्र में स्थित इस सीट पर वर्षों से भाजपा का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प माना जा रहा है।

    जन सुराज की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की राय और संगठन की सहमति के आधार पर प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि वह इस चुनाव को केवल एक सीट का मुकाबला नहीं बल्कि बेहतर राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के अवसर के रूप में देख रही है।

    उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है तो वह विधानसभा में लोगों की आवाज को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

    प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन अब यह पहला अवसर है जब उन्होंने स्वयं चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। इससे पहले भी उनके चुनाव लड़ने को लेकर कई बार चर्चाएं हुई थीं, लेकिन उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति में कदम नहीं रखा था। इस बार उन्होंने औपचारिक रूप से चुनावी मुकाबले में उतरकर अपनी राजनीतिक भूमिका को नया आयाम दिया है।

    राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि उपचुनाव में विपक्षी दल किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे। कुछ राजनीतिक संकेत ऐसे भी मिल रहे हैं कि कुछ विपक्षी दल अपने उम्मीदवार उतारने के बजाय साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान 30 जुलाई को प्रस्तावित है। भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, जिसके कारण राजनीतिक उत्सुकता और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, चुनाव प्रचार और स्थानीय मुद्दों के साथ यह उपचुनाव बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना रखता है। सभी दलों की नजरें अब इस प्रतिष्ठित सीट पर होने वाले मुकाबले और उसके संभावित राजनीतिक संदेश पर टिकी हुई हैं।

  • अमित शाह के कोलकाता दौरे से पहले बढ़ा सियासी तनाव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ से गरमाया माहौल

    अमित शाह के कोलकाता दौरे से पहले बढ़ा सियासी तनाव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ से गरमाया माहौल


    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी में एक संवेदनशील घटना सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मध्य कोलकाता के सुखिया स्ट्रीट क्षेत्र में हाल ही में स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के चबूतरे में तोड़फोड़ पाए जाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पूरे मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर इस प्रतिमा की स्थापना हाल ही में की गई थी। प्रतिमा के चबूतरे पर नाम पट्टिका भी लगाई जा चुकी थी और स्थापना से जुड़ा कार्य शनिवार रात तक पूरा हो गया था। रविवार सुबह स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जब स्थल का निरीक्षण किया तो चबूतरे का निचला हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि घटना आधी रात के बाद हुई हो सकती है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है ताकि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए हैं और विभिन्न तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    घटना के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीर बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से संबंधित थाने में शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक स्मारकों के साथ इस प्रकार की तोड़फोड़ लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को कोलकाता पहुंचने वाले हैं। उनका दौरा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए निर्धारित है। कार्यक्रम के दौरान वह उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और बाद में न्यू टाउन स्थित इको पार्क में प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इसके बाद उनका जयंती समारोह में भाग लेने का कार्यक्रम तय है।

    भाजपा नेताओं ने इस दौरे को संगठन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए व्यापक तैयारियां की हैं। पार्टी का कहना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रतिमा का अनावरण और अन्य आयोजन भी प्रस्तावित हैं।

    फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और घटना की निष्पक्ष जांच पर केंद्रित है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान के लिए उपलब्ध सभी तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, अमित शाह के प्रस्तावित दौरे और उससे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक सख्त कर दी गई है।

  • फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपनी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। लंबे समय तक विवादों और इंतजार के बाद ओटीटी पर रिलीज हुई यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1990 के दशक की घटनाओं पर आधारित है। फिल्म के सामने आने के साथ ही पंजाब में फिल्मों और राजनीति के पुराने रिश्ते पर नई बहस शुरू हो गई है। साथ ही, दिलजीत के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलों का दौर तेज हो गया है।

    फिल्म में पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है जब राज्य उग्रवाद और सुरक्षा अभियानों के कारण लगातार सुर्खियों में था। कहानी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और उन मामलों की पड़ताल पर केंद्रित है, जिन्होंने वर्षों तक सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया। इसी संवेदनशील विषय के कारण फिल्म लंबे समय तक विवादों में रही और इसके शीर्षक तथा अन्य पहलुओं को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई।

    पंजाब में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों की चर्चा चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस बात पर राय अलग-अलग है कि फिल्म का सीधा चुनावी असर कितना होगा। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्रभाव सीमित रहेगा, जबकि अन्य इसे जनभावनाओं और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने वाला मान रहे हैं।

    पंजाब में फिल्मों और राजनीतिक विवादों का इतिहास नया नहीं है। राज्य के इतिहास, धार्मिक भावनाओं, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक घटनाओं पर आधारित कई फिल्मों को पहले भी विरोध और विवाद का सामना करना पड़ा है। विभिन्न अवसरों पर सेंसर प्रक्रिया, प्रदर्शन और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने इन फिल्मों को चर्चा का विषय बनाया है। ऐसे मामलों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर भी सवाल खड़े किए हैं।

    दिलजीत दोसांझ भी पिछले कुछ वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के कारण चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी थी। हालांकि उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं है।

    बीते समय में देश और विदेश में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान भी दिलजीत कई बार सुर्खियों में रहे। उन्होंने विभिन्न मंचों पर पंजाबी संस्कृति और प्रवासी समुदाय की उपलब्धियों का उल्लेख किया, वहीं विवादित राजनीतिक प्रतीकों और अलगाववादी विचारों से दूरी बनाए रखने की भी कोशिश की। उनके इन बयानों को कई लोगों ने संतुलित सार्वजनिक रुख के रूप में देखा।

    राजनीतिक गलियारों में समय-समय पर यह चर्चा होती रही है कि लोकप्रिय कलाकार भविष्य में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं। दिलजीत के मामले में भी ऐसी अटकलें लगती रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या चुनाव लड़ने का संकेत नहीं दिया है। उनके हालिया बयान भी यही दर्शाते हैं कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अभिनय, संगीत और सामाजिक विषयों पर आधारित रचनात्मक कार्यों पर है।

    फिलहाल ‘सतलुज’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास, सामाजिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई चर्चा का माध्यम बन गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म को दर्शकों का कितना व्यापक समर्थन मिलता है और क्या इससे जुड़ी राजनीतिक चर्चाएं चुनावी माहौल तक कोई प्रभाव छोड़ पाती हैं।

  • पति की हत्या के बाद रची गई साजिश की परतें खुलीं, बाथरूम का फर्श बनवाने बुलाया राजमिस्त्री, पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

    पति की हत्या के बाद रची गई साजिश की परतें खुलीं, बाथरूम का फर्श बनवाने बुलाया राजमिस्त्री, पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए चर्चित बाथरूम हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ ही नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में अब उस राजमिस्त्री का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसने कथित तौर पर आरोपी महिला के घर पहुंचकर बाथरूम का फर्श तैयार किया था। उसके बयान ने पूरे घटनाक्रम की कई नई परतों को उजागर कर दिया है।

    जांच के अनुसार, आरोपी महिला पर अपने पति की हत्या करने के बाद शव को घर के बाथरूम में खोदे गए गड्ढे में छिपाकर उसके ऊपर फर्श बनवाने का आरोप है। मामले में गिरफ्तार महिला से पूछताछ के बाद पुलिस ने बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद किया गया। इसके बाद जांच एजेंसियां हत्या की पूरी साजिश और उससे जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल में जुटी हैं।

    राजमिस्त्री ने पुलिस को बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उसे एक महिला का फोन आया था, जिसने घर के बाथरूम का फर्श तत्काल बनवाने की बात कही थी। जब वह मौके पर पहुंचा तो देखा कि बाथरूम का फर्श पूरी तरह टूटा हुआ था। महिला ने उसे बताया कि उसके पति घर से बाहर गए हैं और उनके लौटने से पहले फर्श तैयार कर देना जरूरी है।

    राजमिस्त्री के अनुसार, उस समय उसे सबसे अधिक हैरानी इस बात पर हुई कि महिला खुद बाल्टी से गड्ढे में कंक्रीट और मलबा डाल रही थी। उसने उसी दिन काम करने से इनकार करते हुए अगले दिन आने की बात कही। अगले दिन महिला ने उसे सीमेंट खरीदने के लिए पैसे दिए, जिसके बाद उसने बाथरूम का फर्श तैयार कर दिया। उस दौरान उसे इस बात का कोई अंदेशा नहीं था कि जिस जगह पर फर्श बनाया जा रहा है, उसके नीचे किसी का शव दबा हो सकता है।

    राजमिस्त्री ने यह भी बताया कि काम के दौरान महिला की बेटी से उसकी बातचीत हुई थी। बच्ची ने घर में माता-पिता के बीच अक्सर होने वाले विवाद और पैसों को लेकर होने वाले झगड़ों का जिक्र किया था। हालांकि उस समय इन बातों को उसने सामान्य पारिवारिक विवाद मानकर अधिक महत्व नहीं दिया।

    पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने पति के लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो। लेकिन पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच का रुख बदला। इसके बाद पुलिस ने घर के बाथरूम की खुदाई कराई, जहां से शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में हत्या के बाद शव को छिपाने की योजना सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है ताकि हत्या की पूरी साजिश, उसका कारण और इसमें यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही हो तो उसे भी स्पष्ट किया जा सके।

  • संजू सैमसन की वापसी पर अंबाती रायुडू का भरोसा, बोले- तीन मैच खराब होने से नहीं भूल सकते उनका योगदान

    संजू सैमसन की वापसी पर अंबाती रायुडू का भरोसा, बोले- तीन मैच खराब होने से नहीं भूल सकते उनका योगदान


    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। उनके डेब्यू को लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिला, लेकिन इस मुकाबले में संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। इस फैसले के बाद भारत के पूर्व बल्लेबाज अंबाती रायुडू ने संजू के समर्थन में बयान देते हुए उनके हालिया योगदान को याद रखने की अपील की है।

    रायुडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वैभव सूर्यवंशी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण भारतीय क्रिकेट के लिए खुशी का पल है और इसका जश्न मनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि इस उत्साह के बीच यह नहीं भूलना चाहिए कि महज तीन टी20 मैच पहले संजू सैमसन टी20 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे और भारत को खिताब दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका थी।

    पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि संजू सैमसन एक बार फिर मजबूत वापसी करेंगे। साथ ही उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के उज्ज्वल भविष्य की भी कामना करते हुए कहा कि युवा बल्लेबाज लंबा और रिकॉर्ड बनाने वाला करियर बनाए।

    दरअसल टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले संजू सैमसन का बल्ला पिछले कुछ मुकाबलों में खामोश रहा। आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में भी वह केवल एक रन बनाकर आउट हो गए। लगातार तीन मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के कारण टीम प्रबंधन ने दूसरे टी20 में उनकी जगह आईपीएल 2026 के ऑरेंज कैप विजेता वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया।

    वैभव सूर्यवंशी ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में 10 गेंदों पर 14 रन बनाए और दो आकर्षक छक्के लगाए। हालांकि उनकी पारी छोटी रही, लेकिन उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की झलक जरूर दिखाई। अब तीसरे टी20 मुकाबले में एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी पर सभी की नजरें रहेंगी।

    संजू सैमसन के करियर में टीम से बाहर होना और फिर दमदार वापसी करना नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार वापसी कर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें फिर कब मौका देता है और वह उस अवसर को किस तरह भुनाते हैं।

  • पाकिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव, बाबर आजम की टेस्ट कप्तानी में वापसी, चार नए खिलाड़ियों को मिला मौका

    पाकिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव, बाबर आजम की टेस्ट कप्तानी में वापसी, चार नए खिलाड़ियों को मिला मौका


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए टीम का ऐलान करते हुए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने एक बार फिर बाबर आजम को टेस्ट टीम की कप्तानी सौंप दी है। लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद शान मसूद को कप्तानी से हटा दिया गया है। इस फैसले के साथ पाकिस्तान टीम नए नेतृत्व में विदेशी दौरों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लेकर मैदान में उतरेगी।

    शान मसूद के नेतृत्व में पाकिस्तान का टेस्ट प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उनकी कप्तानी में टीम ने 16 टेस्ट मुकाबले खेले जिनमें से 12 में हार का सामना करना पड़ा। हाल ही में पाकिस्तान को बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी टीम एक भी टेस्ट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। लगातार खराब नतीजों के बाद चयनकर्ताओं ने कप्तानी में बदलाव का फैसला लिया।

    चयन समिति ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित की है। वहीं इंग्लैंड दौरे के लिए सऊद शकील को अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि उन्हें टीम से जुड़ने से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। इस बार चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए चार नए खिलाड़ियों को पहली बार टेस्ट टीम में मौका दिया है। इनमें बाएं हाथ के स्पिनर अली उस्मान बल्लेबाज मोहम्मद अवैस जफर तेज गेंदबाज उबैद शाह और विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद गाजी गोरी शामिल हैं।

    पाकिस्तान टीम सबसे पहले वेस्टइंडीज का दौरा करेगी जहां दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला मुकाबला 25 से 29 जुलाई तक खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 2 से 6 अगस्त के बीच पोर्ट ऑफ स्पेन में होगा। इसके बाद टीम इंग्लैंड रवाना होगी जहां तीन टेस्ट मैचों की सीरीज 19 अगस्त से 13 सितंबर के बीच लीड्स लॉर्ड्स और बर्मिंघम में खेली जाएगी।

    टीम में बाबर आजम के अलावा मोहम्मद रिजवान सलमान अली आगा इमाम उल हक आमिर जमाल मोहम्मद अब्बास मोहम्मद अली खुर्रम शहजाद साजिद खान और शान मसूद जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को भी जगह दी गई है। चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों का यह संतुलन पाकिस्तान को विदेशी दौरों पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।

    अब सभी की नजरें बाबर आजम की कप्तानी पर होंगी। एक बार फिर टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने वाले बाबर के सामने पाकिस्तान को जीत की राह पर लौटाने और विदेशी सरजमीं पर मजबूत प्रदर्शन करने की बड़ी चुनौती होगी।