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  • रश्मिका मंदाना की ट्रोलिंग पर भड़के जावेद अख्तर, बोले- भाषा और उच्चारण के आधार पर किसी को आंकना गलत

    रश्मिका मंदाना की ट्रोलिंग पर भड़के जावेद अख्तर, बोले- भाषा और उच्चारण के आधार पर किसी को आंकना गलत

    नई दिल्ली । अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के उच्चारण और बोलने के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग के बीच गीतकार जावेद अख्तर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाया जो रश्मिका के एक्सेंट का मजाक उड़ाते हैं। जावेद अख्तर ने ऐसे लोगों को तमिल भाषा में कुछ पंक्तियां बोलने की चुनौती देने की बात कही और कहा कि किसी भाषा को दूसरी भाषा से बेहतर समझने की सोच सही नहीं है।

    रश्मिका मंदाना हाल ही में अपने पति विजय देवरकोंडा के साथ टेलीविजन कार्यक्रम कॉफी विद करण में पहुंची थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से लेकर अब तक ट्रोलिंग का सामना करने के अनुभव साझा किए। अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें कभी अपने अभिनय, कभी प्रदर्शन और कभी भाषा या उच्चारण के कारण निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, वह इस तरह की आलोचना के डर से खुद को सीमित नहीं रखना चाहती थीं।

    रश्मिका ने कहा कि उनकी इच्छा किसी एक फिल्म उद्योग या भाषा तक सीमित रहने की नहीं थी। वह अलग-अलग फिल्म उद्योगों में काम करना और कई भाषाएं बोलना चाहती थीं। इसी वजह से उन्होंने अपने ऊपर किसी तरह की रोक लगाने के बजाय अलग-अलग भाषाओं में काम करने का रास्ता चुना। उनके इस अनुभव के बाद जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में अपनी बात रखी।

    जावेद अख्तर ने अपने पोस्ट में कहा कि रश्मिका के उच्चारण से परेशान लोगों को तमिल भाषा में कुछ पंक्तियां बोलने के लिए दी जानी चाहिए। इसके बाद देखा जा सकता है कि वे इस भाषा को कितनी अच्छी तरह बोल पाते हैं। उन्होंने तमिल को दुनिया की सबसे पुरानी बोली जाने वाली भाषाओं में से एक बताया। साथ ही, उन्होंने भाषा के आधार पर दूसरों को कमतर समझने की सोच का विरोध किया।

    हालांकि, जावेद अख्तर की पोस्ट पर एक यूजर ने अभिनेत्री की भाषाई पृष्ठभूमि को लेकर सुधार भी किया। यूजर ने बताया कि रश्मिका कूर्ग से हैं और तेलुगु परिवार की बहू हैं। इसके साथ ही यूजर ने अभिनेत्री के समर्थन में जावेद अख्तर की पहल की सराहना की। जवाब में जावेद अख्तर ने अपनी बात को सुधारने की बात कही।

    उनकी पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सहमति जताई। एक यूजर ने कहा कि दक्षिण भारतीय कलाकारों को हिंदी बोलते समय उनके उच्चारण के आधार पर नहीं परखना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि हर क्षेत्र की अपनी भाषाई विशेषताएं और बोलने का अलग तरीका होता है। ऐसे में किसी के उच्चारण को लेकर उसका मजाक उड़ाना उचित नहीं है।

    कॉफी विद करण का यह एपिसोड रश्मिका और विजय देवरकोंडा की निजी जिंदगी से जुड़ी बातचीत के कारण भी चर्चा में रहा। दोनों ने कार्यक्रम में अपनी प्रेम कहानी के बारे में बात की। इस दौरान विजय ने बताया कि जब रश्मिका ने उनसे शादी के लिए पूछा था, तब उन्होंने तुरंत हामी नहीं भरी थी और मजाकिया अंदाज में कहा था कि उन्हें यह सवाल 100 बार पूछना होगा। रश्मिका ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने तक हर दिन विजय से शादी के बारे में पूछा था।

    इस बातचीत के बाद विजय देवरकोंडा को भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। कुछ यूजर्स ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए और उन्हें रेड फ्लैग तक कहा। इस तरह कार्यक्रम में हुई बातचीत के बाद रश्मिका की ट्रोलिंग और विजय के बयान, दोनों ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • अशोक कुमार की बेटियों ने भी फिल्मों में बनाई पहचान, नातिन अनुराधा पटेल बनीं सलमान खान की मां

    अशोक कुमार की बेटियों ने भी फिल्मों में बनाई पहचान, नातिन अनुराधा पटेल बनीं सलमान खान की मां

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार को फिल्म जगत में दादामुनि के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कई दशकों तक फिल्मों में काम किया और नायक के साथ खलनायक की भूमिकाओं में भी अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, अशोक कुमार की पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं थी। उनका परिवार भी सिनेमा से जुड़ा रहा। उनकी तीनों बेटियों ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा, दामाद देवेन वर्मा ने अपनी कॉमेडी और सहायक भूमिकाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया, जबकि उनकी नातिन अनुराधा पटेल ने सलमान खान की फिल्म में उनकी मां का किरदार निभाया।

    अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता कुंजल गांगुली पेशे से वकील थे, जबकि मां गौरी देवी गृहिणी थीं। अशोक कुमार अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी बहन सती देवी का रिश्ता भी फिल्मी परिवार से जुड़ा था। वह अभिनेत्री काजोल की दादी थीं। उनके भाइयों में अनूप कुमार और किशोर कुमार शामिल थे। किशोर कुमार हिंदी फिल्म संगीत के चर्चित गायकों में गिने जाते हैं।

    अशोक कुमार ने वर्ष 1938 में शोभा से शादी की थी। उनके चार बच्चे हुए, जिनमें एक बेटा और तीन बेटियां थीं। बेटे अरूप कुमार ने 1962 में रिलीज हुई फिल्म बेजुबान में अभिनय किया, लेकिन फिल्म के सफल नहीं होने के बाद उन्होंने फिल्मी करियर को आगे नहीं बढ़ाया और कारोबार की दुनिया में चले गए। दूसरी ओर, उनकी बेटियों भारती पटेल, रूपा वर्मा और प्रीति गांगुली ने फिल्मों में काम किया।

    अशोक कुमार की बड़ी बेटी भारती पटेल ने मुंबई के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र पटेल से शादी की थी। उनके दो बच्चे हुए, बेटा राहुल और बेटी अनुराधा पटेल। अनुराधा ने अभिनय के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और कई हिंदी फिल्मों में नजर आईं। उन्होंने 1983 में रिलीज हुई फिल्म लव इन गोवा से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह रेखा और नसीरुद्दीन शाह की फिल्म इजाजत में भी दिखाई दीं। इस फिल्म में उन्होंने माया नाम की युवती का किरदार निभाया था। फिल्म का चर्चित गीत ‘मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है’ भी उनके किरदार से जुड़ा था।

    अनुराधा पटेल को सलमान खान की फिल्म रेडी में उनकी मां की भूमिका निभाने के लिए भी जाना जाता है। इस तरह अशोक कुमार की नातिन ने भी हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई और दर्शकों के बीच पहचान हासिल की।

    अशोक कुमार की दूसरी बेटी रूपा वर्मा ने भी कुछ फिल्मों में अभिनय किया। उनकी शादी अभिनेता देवेन वर्मा से हुई थी। देवेन वर्मा ने कई फिल्मों में हास्य और सहायक भूमिकाएं निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। अंगूर और गोलमाल जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को याद किया जाता है। देवेन वर्मा का निधन वर्ष 2014 में हुआ था।

    अशोक कुमार की सबसे छोटी बेटी प्रीति गांगुली ने भी पिता की तरह फिल्मों में काम किया। उन्होंने 1974 में आई फिल्म धुएं की लकीर से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद वह खेल खेल में, दिल्लगी, खट्टा मीठा और चोर के घर चोर जैसी फिल्मों में नजर आईं। प्रीति गांगुली को खास तौर पर उनके हास्य किरदारों के लिए याद किया जाता है। इस तरह अशोक कुमार की अगली पीढ़ी ने भी अभिनय और मनोरंजन की दुनिया में अपना योगदान दिया।

  • रामायण में भगवान राम बनने से पहले घबराए थे रणबीर कपूर, बोले- प्रभु राम जैसा बनना संभव नहीं, उनसे सीखना बड़ी बात

    रामायण में भगवान राम बनने से पहले घबराए थे रणबीर कपूर, बोले- प्रभु राम जैसा बनना संभव नहीं, उनसे सीखना बड़ी बात

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म रामायण को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। हाल ही में उन्होंने इस किरदार को निभाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। रणबीर ने बताया कि जब उन्हें भगवान राम का किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला, तो उनके मन में खुशी से पहले डर और जिम्मेदारी का एहसास आया। उन्हें मालूम था कि भगवान राम के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए इस भूमिका को निभाना उनके लिए किसी सामान्य फिल्मी किरदार जैसा नहीं था।

    अमिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में बातचीत के दौरान रणबीर ने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि क्या वह इस जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा पाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवान राम का किरदार केवल अभिनय का अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए इस भूमिका को प्रस्तुत करना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    रणबीर के मुताबिक, शुरुआत में महसूस हुआ डर धीरे-धीरे आभार में बदल गया। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव और इस उम्र में उन्हें ऐसा महत्वपूर्ण किरदार निभाने का अवसर मिला, इसके लिए वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उनके अनुसार, इस भूमिका ने उन्हें केवल एक बेहतर अभिनेता बनने का ही नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी सोचने का अवसर दिया।

    बेटी राहा के जन्म को बताया खास अनुभव

    रणबीर कपूर ने बातचीत में अपनी बेटी राहा के जन्म का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान वह पहली बार पिता बने थे। उनके जीवन में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव था। रणबीर ने कहा कि वह रामायण का हिस्सा बनने के अवसर को भगवान का तोहफा मानते हैं। उनके लिए यह अनुभव व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर सफर, दोनों लिहाज से खास है।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि भगवान राम जैसा बन पाना संभव नहीं है, लेकिन उनके दृष्टिकोण से जीवन को समझना और उनसे सीखने की कोशिश करना अपने आप में बड़ी बात है। उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह इस भूमिका को केवल पर्दे पर निभाए जाने वाले चरित्र के रूप में नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ी सीख के अवसर के रूप में भी देखते हैं।

    रवि दुबे ने भी साझा किया अपना अनुभव

    कार्यक्रम के दौरान अभिनेता रवि दुबे से भी लक्ष्मण की भूमिका निभाने को लेकर सवाल किया गया। फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे रवि ने कहा कि वह इस अवसर को लेकर हैरान हैं और उन्हें अब भी इस बात पर विश्वास करना मुश्किल लगता है। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी सरगुन मेहता मानते हैं कि जीवन में होने वाली कुछ घटनाओं के पीछे दैवीय भूमिका होती है। रवि का यह बयान भी फिल्म से जुड़े कलाकारों के भावनात्मक अनुभव को सामने लाता है।

    रामायण में नजर आएंगे कई बड़े कलाकार

    निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, रवि दुबे लक्ष्मण, यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में अरुण गोविल, रकुल प्रीत सिंह, काजल अग्रवाल, लारा दत्ता और कुणाल कपूर सहित कई अन्य कलाकार भी शामिल हैं।

    फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं। इसे दो भागों में बनाने की योजना है। दोनों भागों का कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दिवाली के अवसर पर रिलीज होने वाला है। बड़े बजट, चर्चित कलाकारों और रामायण जैसे महाकाव्य पर आधारित कहानी के कारण इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

  • शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री

    शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26 अक्टूबर को कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दबाव में नजर आए। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ खरीदारी लौटी और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रही। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही।

    दोपहर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 73 हजार 179 अंक के आसपास पहुंच गया जबकि एनएसई निफ्टी 22 हजार 610 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी आने से निवेशकों को कुछ राहत मिली लेकिन बाजार में पूरी तरह मजबूती लौटने के संकेत नहीं मिले। कारोबार के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर शेयरों की चाल पर दिखाई दिया।

    बाजार की चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था की विकास गति पर भी पड़ सकता है।

    शेयरों की बात करें तो सोमवार को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहने के बाद शेयर में तेजी दर्ज की गई। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बढ़त रही। इसके विपरीत इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना रहा। कंपनी की ओर से सालाना राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। उत्तर अमेरिकी बाजार में कमजोरी भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

    श्रीराम फाइनेंस का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी की ओर से कर्ज वृद्धि के अनुमान में कमी और संभावित क्रेडिट लागत को लेकर संकेत दिए जाने के बाद शेयर में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल वैश्विक घटनाक्रम ही नहीं बल्कि कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अनुमान भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। तिमाही नतीजों के इस दौर में अलग अलग कंपनियों के शेयरों में अलग रुख देखने को मिल सकता है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला न लें और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति तथा अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें।

  • दलेर मेहंदी से विवाद पर मंत्री सुबोध उनियाल ने फोन पर मांगी माफी, मीका सिंह की टीम ने कलाकारों के सम्मान पर दिया जोर

    दलेर मेहंदी से विवाद पर मंत्री सुबोध उनियाल ने फोन पर मांगी माफी, मीका सिंह की टीम ने कलाकारों के सम्मान पर दिया जोर

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल ने गायक दलेर मेहंदी से कुंजापुरी देवी मेले में हुए विवाद को लेकर फोन पर माफी मांगी है। इस घटनाक्रम के बाद मामले के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी दलेर मेहंदी के परिवार से बातचीत कर मंत्री की ओर से माफी मांगी थी। अब सुबोध उनियाल की ओर से सीधे माफी मांगे जाने के बाद गायक मीका सिंह की टीम ने इस कदम का स्वागत किया है।

    मीका सिंह की टीम ने बयान जारी कर कहा कि वह मंत्री सुबोध उनियाल की ओर से माफी मांगे जाने की सराहना करती है। बयान में कलाकारों की गरिमा और उनके सम्मान को महत्वपूर्ण बताया गया। टीम के मुताबिक, दलेर मेहंदी संगीत जगत के वरिष्ठ कलाकार हैं और उन्होंने संगीत उद्योग में बड़ा योगदान दिया है। ऐसे में प्रत्येक कलाकार के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।

    बयान में कहा गया कि सुबोध उनियाल ने दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर टेलीफोन पर बातचीत के दौरान दलेर मेहंदी से माफी मांगी है। टीम ने उम्मीद जताई कि इस घटनाक्रम के बाद विवाद समाप्त हो जाएगा और सभी पक्ष आपसी सम्मान तथा समझ के साथ आगे बढ़ेंगे। इस प्रतिक्रिया के जरिए कलाकारों के सम्मान और सार्वजनिक मंच पर उनके साथ उचित व्यवहार किए जाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    माफी से पहले बयान पर कायम थे मंत्री

    माफी मांगने से पहले सुबोध उनियाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवाद को लेकर अपना पक्ष रखा था। उस दौरान उन्होंने अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा था कि यदि कलाकार की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्हें आयोजकों या दर्शकों को पहले ही इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। उनके इस रुख के बाद विवाद चर्चा में बना हुआ था। अब मंत्री की ओर से फोन पर माफी मांगे जाने के बाद स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।

    18 अक्टूबर को शुरू हुआ था विवाद

    यह मामला 18 अक्टूबर को नवरात्रि के अवसर पर टिहरी गढ़वाल में आयोजित कुंजापुरी देवी मेले का है। कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी मंच पर लाइव प्रस्तुति दे रहे थे। इसी बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और उनकी प्रस्तुति बीच में रुकवा दी। मंत्री ने आरोप लगाया था कि गायक शराब के नशे में हैं और लिप-सिंक कर रहे हैं। इस घटना के बाद कलाकार और मंत्री के बीच विवाद सामने आया।

    घटना के बाद दलेर मेहंदी के छोटे भाई और गायक मीका सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी। मीका सिंह ने कहा था कि उनके भाई ने कभी शराब नहीं पी और कार्यक्रम के समय उनकी तबीयत खराब थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि किसी वरिष्ठ कलाकार के बारे में सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणी कैसे की जा सकती है।

    दलेर मेहंदी की ओर से अब तक विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, मुख्यमंत्री और मंत्री की ओर से माफी मांगे जाने तथा मीका सिंह की टीम की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इस मामले के आगे बढ़ने की संभावना कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना होगा कि संबंधित पक्ष इस विवाद को यहीं समाप्त मानते हैं या आगे भी इस पर कोई बयान सामने आता है।

  • शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच 25 अक्टूबर को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए वनडे ट्राई सीरीज के मुकाबले में रोमांचक नतीजा देखने को मिला। एक समय पाकिस्तान की टीम हार के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट के लिए शानदार साझेदारी कर मैच का रुख बदल दिया। पाकिस्तान ने नौ विकेट गंवाने के बाद भी लक्ष्य हासिल करते हुए इंग्लैंड को एक विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तानी टीम ने ट्राई सीरीज के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पारी लड़खड़ा गई थी। टीम ने 154 रन तक अपने नौ विकेट गंवा दिए थे और जीत के लिए अभी 88 रन बनाने बाकी थे। इंग्लैंड को मुकाबला जीतने के लिए केवल एक विकेट की जरूरत थी। ऐसे मुश्किल समय में शादाब खान ने जिम्मेदारी संभाली और दूसरे छोर पर मौजूद हारिस रऊफ के साथ मिलकर इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को झटका दिया।

    शादाब खान ने 96 गेंदों पर नाबाद 113 रन की पारी खेली। उनकी इस पारी में 13 चौके और पांच छक्के शामिल रहे। यह शादाब का पहला वनडे शतक था। उन्होंने दबाव के बीच आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। दूसरी ओर, 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे हारिस रऊफ ने सात रन बनाकर उनका साथ दिया। रऊफ ने विकेट बचाए रखा, जिससे शादाब को अपना स्वाभाविक खेल जारी रखने का मौका मिला।

    दोनों बल्लेबाजों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 89 रन जोड़े। उनकी साझेदारी ने पाकिस्तान को 17 गेंद शेष रहते जीत दिला दी। आखिरी समय तक इंग्लैंड की टीम विकेट हासिल करने की कोशिश करती रही, लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा। अंत में हारिस रऊफ ने चौका लगाकर टीम को यादगार जीत दिलाई।

    दसवें विकेट की साझेदारी में बनाया रिकॉर्ड

    शादाब खान और हारिस रऊफ की नाबाद 89 रन की साझेदारी सफल वनडे रनचेज में दसवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड डेरिक मरे और एंडी रॉबर्ट्स के नाम था। दोनों ने 1975 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 64 रन जोड़े थे। शादाब और रऊफ ने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए वनडे क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया।

    शाहीन आफरीदी की गेंदबाजी ने भी निभाई अहम भूमिका

    इससे पहले पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह आफरीदी ने गेंदबाजी में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने 46 रन देकर चार विकेट हासिल किए और इंग्लैंड की पारी को 241 रन पर समेटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वनडे क्रिकेट में पदार्पण करने वाले रजाउल्लाह ने भी दो विकेट लिए।

    इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने केवल 19 रन के स्कोर तक तीन विकेट गंवा दिए। इसके बाद बेन डकेट ने 111 गेंदों पर 105 रन बनाकर पारी को संभाला। सैम करन ने 42 रन बनाए। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई, जिसने इंग्लैंड को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। अंत में गस एटकिंसन ने नाबाद 36 रन बनाकर टीम का स्कोर 241 रन तक पहुंचाया।

    हालांकि, इंग्लैंड का यह स्कोर जीत के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। पाकिस्तान ने शुरुआती विकेट गंवाने के बावजूद आखिरी जोड़ी के दम पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। शादाब खान के शतक और हारिस रऊफ के सहयोग ने न केवल पाकिस्तान को जीत दिलाई, बल्कि टीम को ट्राई सीरीज के फाइनल में पहुंचाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।

  • रामायण में सीता का किरदार मिलने पर साई पल्लवी ने की खास प्रार्थना, बोलीं- मां सीता मेरे जरिए निभाइए यह भूमिका

    रामायण में सीता का किरदार मिलने पर साई पल्लवी ने की खास प्रार्थना, बोलीं- मां सीता मेरे जरिए निभाइए यह भूमिका

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री साई पल्लवी जल्द ही फिल्म रामायण में माता सीता की भूमिका निभाती नजर आएंगी। इस किरदार को लेकर उन्होंने अपने विचार साझा किए हैं। साई पल्लवी के मुताबिक, जब उन्हें माता सीता का किरदार निभाने का अवसर मिला, तो उन्होंने इसे सामान्य फिल्मी भूमिका की तरह लेने के बजाय प्रार्थना और समर्पण के भाव से स्वीकार करने का फैसला किया। उनके लिए यह भूमिका केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी है।

    साई पल्लवी ने हाल ही में अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में हिस्सा लिया। शो के एक विशेष प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा कि जब उन्हें पता चला कि वह फिल्म रामायण में माता सीता की भूमिका निभाने वाली हैं, तो उनके मन में सबसे पहले क्या विचार आया था। इस सवाल के जवाब में अभिनेत्री ने अपने अनुभव के बारे में बताया।

    उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी भी किरदार को निभाने से पहले वह इस बारे में सोचती हैं कि उस भूमिका में अपनी ओर से क्या नया कर सकती हैं। कलाकार के तौर पर वह किरदार को समझने और उसे अपने तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करती हैं। हालांकि, माता सीता की भूमिका मिलने के बाद उनका नजरिया बदल गया। इस बार उन्होंने अपने दिमाग से अधिक सोचने के बजाय खुद को उस भूमिका के प्रति समर्पित करने पर ध्यान दिया।

    साई पल्लवी ने बताया कि वह इस किरदार को लेकर बहुत अधिक विचार नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने अपने मन को शांत रखते हुए प्रार्थना की। अभिनेत्री के अनुसार, उन्होंने माता सीता से कहा कि वह उनके माध्यम से इस किरदार को निभाएं। उन्होंने अपनी प्रार्थना में खुद को पूरी तरह इस अनुभव के लिए समर्पित करने की भावना व्यक्त की। उनके इस बयान से पता चलता है कि वह इस भूमिका को कितनी गंभीरता और श्रद्धा के साथ देख रही हैं।

    रामायण में अहम भूमिका निभाएंगी साई पल्लवी

    निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में भारतीय महाकाव्य की कहानी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है।

    फिल्म की कहानी भगवान राम के जीवन, माता सीता से उनके विवाह और इसके बाद शुरू होने वाले 14 वर्ष के वनवास के घटनाक्रम पर आधारित होगी। वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण भी भगवान राम के साथ जाते हैं। आगे चलकर रावण का प्रवेश कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। पहले भाग में माता सीता के अपहरण तक की घटनाओं को दिखाए जाने की उम्मीद है, जबकि दूसरे भाग में इसके बाद की कहानी और संघर्ष को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    फिल्म को दो भागों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। पहले भाग की निर्धारित रिलीज तारीख 5 नवंबर 2026 बताई गई है। फिल्म में पौराणिक पात्रों को निभाने वाले कलाकारों की तैयारी और उनके किरदारों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।

    केबीसी के विशेष एपिसोड में भी नजर आएंगी अभिनेत्री

    साई पल्लवी फिल्म रामायण के सह-कलाकार रणबीर कपूर और रवि दुबे के साथ कौन बनेगा करोड़पति 18 के विशेष दिवाली एपिसोड में भी दिखाई देंगी। इन एपिसोड का प्रसारण 29 और 30 अक्टूबर को रात 9 बजे निर्धारित है। अमिताभ बच्चन के साथ कलाकारों की मौजूदगी से जुड़े प्रोमो में फिल्म और उसके किरदारों को लेकर बातचीत की झलक देखने को मिलेगी।

    साई पल्लवी की प्रार्थना ने माता सीता की भूमिका के प्रति उनके दृष्टिकोण को सामने रखा है। अभिनेत्री ने इस किरदार को निभाने के लिए अपनी व्यक्तिगत सोच से अधिक समर्पण और श्रद्धा को महत्व देने की बात कही है।

  • नवंबर में पांच राशियों की चमक सकती है किस्मत, नौकरी में तरक्की और धन लाभ के बन सकते हैं योग

    नवंबर में पांच राशियों की चमक सकती है किस्मत, नौकरी में तरक्की और धन लाभ के बन सकते हैं योग

    नई दिल्ली ।नवंबर 2026 का महीना कुछ राशियों के जातकों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव का असर नौकरी, कारोबार, पदोन्नति और धन से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। कुछ राशियों के लोगों को कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने, नई जिम्मेदारियां संभालने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन संभावनाओं को निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।

    ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, नवंबर में मेष, सिंह, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से समय महत्वपूर्ण हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम में सुधार करने और बेहतर अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, कारोबार से जुड़े लोगों के लिए योजनाओं की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना उपयोगी हो सकता है।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए नवंबर में अपनी क्षमता और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने या उनके काम की सराहना होने की संभावना हो सकती है। नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे लोगों को अपने अनुभव और योग्यता के अनुसार अवसर तलाशने चाहिए। कारोबारियों के लिए नई योजनाओं पर काम करने और मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण रहेगा।

    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों के लिए कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर मिल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल और जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। पदोन्नति की उम्मीद कर रहे लोगों को अपने प्रदर्शन और कार्यकुशलता पर ध्यान देना चाहिए। कारोबार से जुड़े जातक भी अपनी योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए नौकरी और करियर से जुड़े नए विकल्प सामने आने की संभावना जताई जा रही है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। पहले से नौकरी कर रहे लोगों के लिए नई जिम्मेदारियां संभालने और अपने काम में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी भी नए प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तों और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी करियर में आगे बढ़ने के प्रमुख आधार हो सकते हैं। लंबे समय से किसी लक्ष्य के लिए प्रयास कर रहे लोगों को अपने काम की समीक्षा करने और आगे की योजना बनाने का अवसर मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नए कौशल सीखने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। कारोबारियों के लिए कामकाज को व्यवस्थित रखना और आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेना महत्वपूर्ण रहेगा।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए नवंबर में करियर के नए विकल्पों पर विचार करने का समय हो सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोग अपनी योग्यता, अनुभव और उपलब्ध अवसरों का आकलन कर सकते हैं। वर्तमान कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना के बीच काम की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी रहेगा। कारोबारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपनी योजनाओं में बदलाव करने और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करने पर ध्यान देना चाहिए।

    ग्रहों के गोचर का महत्व

    ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध को बुद्धि, संवाद और व्यापार से, शुक्र को सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों से तथा सूर्य को आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से जोड़ा जाता है। मंगल को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है, जबकि गुरु को ज्ञान, विस्तार और अवसरों से संबंधित माना जाता है। नवंबर में इन ग्रहों की स्थिति और गोचर के आधार पर विभिन्न राशियों के लिए संभावनाओं का आकलन किया जाता है।

    हालांकि, केवल राशिफल के आधार पर नौकरी, निवेश या कारोबार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेना उचित नहीं है। करियर में प्रगति के लिए योग्यता, मेहनत, सही योजना और परिस्थितियों का आकलन भी जरूरी है। इसी तरह, धन लाभ की संभावना को निश्चित आमदनी नहीं माना जा सकता।

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    नवंबर 2026 राशिफल में पांच राशियों के लिए करियर में तरक्की, नई नौकरी और धन लाभ की संभावनाओं पर ज्योतिषीय आकलन

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    नवंबर में ग्रहों के गोचर से पांच राशियों को मिल सकते हैं नए अवसर, जानें नौकरी, प्रमोशन और आर्थिक मामलों के संकेत

  • कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव

    कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली ।
    वश्विक बाजारों में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण निवेशकों की चिंता बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि भारत के लिए महत्वपूर्ण इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। महंगे तेल का असर भारत के आयात खर्च, महंगाई और तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने की आशंका है।

    ब्रेंट क्रूड का भाव पिछले कारोबारी सत्र में बढ़कर 117.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में यह 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सोमवार सुबह इसमें पिछले बंद स्तर के मुकाबले करीब 1.55 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 114.91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। इसके बावजूद कच्चे तेल का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान भी तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची थीं।

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड का भाव अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने की स्थिति में रहा है। सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भी कीमतों को समर्थन दिया। सोमवार को भाव में नरमी आने के बावजूद आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की वास्तविक लागत भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर को इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। अक्टूबर का औसत भाव भी लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल बताया गया है। इस स्तर पर कच्चे तेल की खरीद भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है और रुपये तथा महंगाई पर दबाव डाल सकती है।

    महंगे तेल का असर तेल विपणन कंपनियों की कमाई पर भी पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनियों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान बताया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर पर लगभग 300 रुपये की अंडर रिकवरी होने की जानकारी सामने आई है।

    त्योहारी मौसम में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम बताई जा रही है। हालांकि, यदि त्योहारों के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने पर विचार कर सकती हैं। फिलहाल, खुदरा कीमतों में बदलाव को लेकर कोई निश्चित फैसला सामने नहीं आया है।

    अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 652.82 अंक यानी करीब 1.23 प्रतिशत गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 0.52 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सोमवार सुबह अमेरिकी वायदा बाजार में कुछ सुधार दिखाई दिया। डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 52,341.69 पर कारोबार कर रहा था।

    एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। जापान के निक्केई 225 में करीब 0.26 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.92 प्रतिशत, चीन के शंघाई कंपोजिट में 0.36 प्रतिशत और सिंगापुर के स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा।

    भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत लगभग सपाट रहे। सुबह 7:36 बजे गिफ्ट निफ्टी 22,599.50 पर था, जो पिछले बंद स्तर से 8.50 अंक यानी 0.04 प्रतिशत नीचे था। इस सप्ताह 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक भी निवेशकों के लिए अहम है। ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच ब्याज दरों और महंगाई पर फेड के रुख से वैश्विक बाजारों की आगे की दिशा प्रभावित हो सकती है।

  • लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । लगातार कई दिनों तक गिरावट का सामना करने के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी लौटी। पिछले सप्ताह सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। हालांकि, बाजार में आई इस तेजी को फिलहाल गिरावट के बाद की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने के दिसंबर अनुबंध का भाव लगभग 0.50 प्रतिशत यानी 761 रुपये बढ़कर 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने पिछले बंद भाव 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम से 864 रुपये की बढ़त हासिल करते हुए 1,42,888 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। यह तेजी लगभग 0.60 प्रतिशत रही।

    चांदी के दिसंबर वायदा अनुबंध में भी मजबूती दर्ज की गई। इसका भाव करीब 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपये बढ़कर 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने पिछले बंद स्तर 1,95,719 रुपये से 1,467 रुपये की छलांग लगाई और 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान चांदी में 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद दोनों धातुओं में आई खरीदारी को बाजार की अहम गतिविधि माना जा रहा है। उस दौरान सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत और चांदी की कीमत 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर दिखाई दिया था। स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया था।

    अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स में सोमवार सुबह सोना लगभग 0.48 प्रतिशत बढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। सत्र के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी लगभग 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 54.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची और कारोबार के दौरान 54.47 डॉलर प्रति औंस का स्तर दर्ज किया।

    बाजार में सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया गिरावट के बाद इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटने से कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ब्याज दरों को लेकर संकेत सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई महंगाई आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है।

    चांदी ने हालिया कारोबार में सोने की तुलना में बेहतर रिकवरी दिखाई है, लेकिन तकनीकी संकेतों के अनुसार इसमें अभी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है। घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये का स्तर समर्थन दे सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा था। तेल महंगा रहने से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती टलने का जोखिम रहता है। ऐसे में निवेशकों की नजर डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा बाजार की चाल पर भी बनी हुई है।