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  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में कांग्रेस नेता पंकज संघवी से पुलिस पूछताछ डायमंड पैलेस जमीन मामले में जांच तेज


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की 17 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे चर्चित विवाद में पुलिस जांच तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कनाड़िया थाना पुलिस ने संयम इंफ्रा से जुड़े कारोबारी और कांग्रेस नेता पंकज संघवी से पूछताछ की। उनके भतीजे तथा कंपनी के पार्टनर प्रतीक संघवी को भी नोटिस देकर थाने बुलाया गया जहां उनसे लंबे समय तक पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि जांच के तहत सभी संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    यह मामला कनाड़िया क्षेत्र स्थित डायमंड पैलेस कॉलोनी की लगभग 17 एकड़ जमीन से जुड़ा है जिसकी अनुमानित कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पिछले सप्ताह इस जमीन को लेकर संयम इंफ्रा से जुड़े लोगों और स्थानीय रहवासियों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी जहां कथित रूप से कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी विवाद किया था।

    पुलिस के अनुसार मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी विजय सिकरवार और आशीष शर्मा के साथ मोहसीन और उसके साथियों की कहासुनी हुई थी। घटना के दो दिन बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इसके बाद सात दिन के भीतर नामजद आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि जांच के क्रम में पंकज संघवी और प्रतीक संघवी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पंकज संघवी से पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया जबकि प्रतीक संघवी से देर तक पूछताछ जारी रही। पुलिस का कहना है कि अभी यह केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक संयम इंफ्रा कंपनी में पंकज संघवी प्रतीक संघवी दीपक और आशीष साझेदार हैं। कंपनी के कई आधिकारिक दस्तावेजों पर प्रतीक संघवी के हस्ताक्षर होने के कारण उनसे भी विस्तृत जानकारी ली जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि विवाद वाले दिन मौके पर पहुंचे लोगों को किसने बुलाया था और पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका क्या थी।

    बताया जा रहा है कि डायमंड पैलेस कॉलोनी की यह जमीन लंबे समय से विवादों में रही है। संघवी परिवार इस जमीन पर अपना दावा करता है जबकि कथित अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर कई वर्षों से स्थानीय रहवासियों और परिवार के बीच विवाद चलता आ रहा है। यह मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है और अब तक इसका अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।

    फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए जवानों की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की और संसद में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और शहीदों को पूरा सम्मान पहले ही दिया जा चुका था।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राष्ट्रीय समर स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि जुलाई 2025 में संसद के भीतर रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि अब सामने आए तथ्यों से उस बयान पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि सैन्य अभियान के दौरान जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, तो इसकी जानकारी संसद और देश के सामने समय पर रखी जानी चाहिए थी। पार्टी ने रक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करने के साथ उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की भी बात कही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और सरकार से शहीदों के परिवारों के प्रति सार्वजनिक रूप से संवेदना और स्पष्टीकरण देने की मांग भी दोहराई है।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है। सरकार का कहना है कि संसद में दिया गया बयान विशेष संदर्भ में था और उसका संबंध उन दावों से था जिनमें भारतीय लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही थी। सरकार के अनुसार रक्षा मंत्री का आशय यह था कि अभियान के दौरान किसी भी पायलट की जान नहीं गई और किसी विमान को दुश्मन के कब्जे में नहीं जाने दिया गया। इसलिए बयान की गलत व्याख्या कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी कई जानकारियां राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से तत्काल सार्वजनिक नहीं की जातीं। उसके अनुसार ऑपरेशन से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं का समय से पहले खुलासा करना सुरक्षा हितों के विपरीत हो सकता है। सरकार का कहना है कि शहीद सैनिकों का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया और संबंधित परिवारों को सभी औपचारिक सम्मान प्रदान किए गए थे।

    इस पूरे विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य गोपनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि सैन्य रणनीति और परिचालन संबंधी गोपनीयता अलग विषय है, लेकिन शहीदों की जानकारी और संसद को दी जाने वाली सूचना में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं सरकार का तर्क है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का सार्वजनिक समय और स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाता है।

    फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस्तीफे की मांग पर कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल रक्षा मंत्री के बयान तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों की सूचना नीति और संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर राजनीतिक और संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।

  • एक पल की चूक बनी जिंदगी भर का दर्द मां के वॉशरूम जाते ही बेड से गिरा 44 दिन का मासूम

    एक पल की चूक बनी जिंदगी भर का दर्द मां के वॉशरूम जाते ही बेड से गिरा 44 दिन का मासूम


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां महज 44 दिन के एक मासूम की बेड से गिरने के बाद मौत हो गई। यह घटना एरोड्रम थाना क्षेत्र के रुक्मणी नगर छोटा बांगड़दा इलाके की है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय बच्चे की मां कुछ देर के लिए वॉशरूम गई थीं। इसी दौरान मासूम करवट लेते हुए करीब तीन फीट ऊंचे बेड से नीचे गिर गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    जानकारी के अनुसार रात के समय परिवार घर में सो रहा था। मां थोड़ी देर के लिए वॉशरूम गई थीं जबकि पिता गहरी नींद में थे। इसी बीच 44 दिन का मासूम प्रियांशु करवट बदलते हुए बेड के किनारे तक पहुंच गया और नीचे गिर पड़ा। गिरते ही बच्चा जोर जोर से रोने लगा। उसकी आवाज सुनकर पिता की नींद खुली। उन्होंने देखा कि बच्चे के चेहरे और मुंह पर गंभीर चोट लगी है जिसके बाद परिवार में अफरा तफरी मच गई।

    परिजन बिना देर किए बच्चे को नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे तुरंत एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की लेकिन मंगलवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    एरोड्रम थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक बच्चे का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। शुरुआती जांच में मामला हादसा माना जा रहा है हालांकि सभी पहलुओं की जांच जारी है।

    मृतक बच्चे की पहचान प्रियांशु पुत्र चंद्रशेखर कुमार के रूप में हुई है। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और रोजी रोजगार के लिए इंदौर में किराए के मकान में रहता है। बच्चे के पिता सिलाई का काम करते हैं। परिवार में दो साल की एक बेटी भी है। 44 दिन पहले ही घर में बेटे के जन्म से खुशियां आई थीं लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात और छोटे बच्चों को कभी भी ऊंचे बेड पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि जन्म के कुछ सप्ताह बाद ही बच्चे अनजाने में करवट लेने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बच्चों को हमेशा सुरक्षित पालने में सुलाना या बेड के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था रखना जरूरी माना जाता है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • 25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

    25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


    महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

    स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

    बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।

  • जीएसटीएटी पोर्टल पर भारी दबाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख एक माह बढ़ाई

    जीएसटीएटी पोर्टल पर भारी दबाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख एक माह बढ़ाई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) में अपील दाखिल करने वाले करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए अंतिम तारीख एक माह बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि अब करदाता और अन्य पात्र पक्ष 31 जुलाई 2026 तक जीएसटीएटी में अपील दाखिल कर सकेंगे। पहले यह समय-सीमा 30 जून 2026 तक निर्धारित थी।

    वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय जीएसटीएटी पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और उससे उत्पन्न तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, बड़ी संख्या में करदाताओं और हितधारकों ने शिकायत की थी कि पोर्टल पर भारी दबाव के कारण समय पर अपील दाखिल करने में कठिनाई हो रही है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विस्तार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 112(1) और धारा 112(3) के तहत दायर की जाने वाली अपीलों पर लागू होगा। यानी जिन मामलों में करदाता जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त समय उपलब्ध रहेगा।

    मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में अचानक तेजी आई। केवल अंतिम 15 दिनों में करीब 30 हजार अपीलें पोर्टल पर दर्ज की गईं। कुछ दिनों में प्रतिदिन लगभग 5,500 अपीलें दाखिल होने से सिस्टम पर दबाव काफी बढ़ गया, जिसके कारण तकनीकी बाधाएं सामने आईं।

    वित्त मंत्रालय ने बताया कि बढ़ती शिकायतों और पोर्टल की क्षमता पर पड़ रहे दबाव का आकलन करने के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी करदाता को तकनीकी कारणों से अपील दाखिल करने के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

    गौरतलब है कि सरकार ने सितंबर 2025 में जारी अधिसूचना के माध्यम से 30 जून 2026 को अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख तय की थी। हालांकि, अंतिम चरण में अपीलों की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक बढ़ने के कारण यह समय-सीमा बढ़ानी पड़ी।

    सरकार ने करदाताओं से यह भी आग्रह किया है कि वे अंतिम दिनों तक प्रतीक्षा न करें और समय रहते अपनी अपील दाखिल कर दें। मंत्रालय का कहना है कि इससे पोर्टल पर अचानक भीड़ नहीं बढ़ेगी और तकनीकी व्यवधानों की संभावना भी कम होगी।

    इस बीच सरकार के कर संग्रह के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    इसी अवधि में जीएसटी रिफंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 27,281 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़े भी मजबूत वृद्धि दर्शाते हैं। आयकर विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.46 प्रतिशत बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अपील की समय-सीमा बढ़ाने से हजारों करदाताओं को राहत मिलेगी और वे बिना तकनीकी दबाव के अपने मामलों को जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही यह कदम सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें कर प्रशासन को अधिक सुगम और करदाता-अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    पश्चिम एशिया तनाव, महंगाई की आशंका और ब्याज दरों का दबाव, सोना-चांदी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, बाजार की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों पर

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर वैश्विक बुलियन बाजार तक दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार का समग्र रुख कमजोर बना रहा।

    घरेलू वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत पिछले बंद स्तर की तुलना में एक प्रतिशत से अधिक टूटकर खुली। दिन के दौरान बिकवाली और तेज हुई, जिससे सोना करीब 1.37 प्रतिशत तक फिसलकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में सीमित खरीदारी लौटने से इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बाजार की धारणा पूरी तरह सकारात्मक नहीं बन सकी।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह कमजोरी देखने को मिली। सितंबर डिलीवरी वाला चांदी वायदा शुरुआती कारोबार में करीब एक प्रतिशत गिरावट के साथ खुला और दिन के शुरुआती सत्र में ही निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद के कारोबार में मामूली सुधार हुआ, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा और बड़े निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड में लगभग डेढ़ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्पॉट सिल्वर दो प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो सोना कई वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मजबूत हुई हैं। ऐसी स्थिति में निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए आगे भी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या उनमें बढ़ोतरी कर सकता है।

    ऊंची ब्याज दरों की संभावना से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे निवेशकों का आकर्षण कम होता है और बिकवाली का दबाव बढ़ने लगता है। यही वजह रही कि सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में भी इस बार कमजोरी देखने को मिली।

    इस बीच कच्चे तेल के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीदों के बावजूद हालिया मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इसके चलते निवेशक फिलहाल किसी बड़े जोखिम वाले निवेश से बचते हुए आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं। तेल बाजार में आई नरमी ने भी वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से गैर-कृषि रोजगार, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े तथा यूरोजोन की मुद्रास्फीति रिपोर्ट निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत संकेत देती है और फेड की सख्त नीति बरकरार रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। वहीं किसी भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम या आर्थिक संकेत में बदलाव से बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने की संभावना बनी रहेगी।

  • मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

    मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंदिर के पुजारी और संत सच्चिदानंद महाराज की हत्या के बाद नामदेव समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के विरोध में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यकर्ताओं ने महोबा में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि इस जघन्य वारदात ने पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

    बताया गया कि बांदा जिले के तिंदवारा गांव स्थित त्रिदेव शनि मंदिर में रहने वाले 68 वर्षीय संत बाल ब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की छत पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान देर रात कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और लाठी डंडों तथा धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

    घटना ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के दौरे पर थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नामदेव समाज के लोगों का कहना है कि प्रदेश में संत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है।

    महोबा में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अखिलेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र हुए। उन्होंने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई कि यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा नहीं कर सकी है और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना जांच की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल में एक संत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि समाज की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष और तेज जांच कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

  • ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को वैश्विक स्तर पर लगातार मिल रही स्वीकार्यता के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की सेवाएं अब ग्रीस में भी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की डिजिटल नवाचार क्षमता और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से योग्य उपभोक्ताओं को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, वहीं सीमा पार लेनदेन की लागत भी पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में कम होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में यूपीआई को मिल रही बढ़ती स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि भारत द्वारा विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली पर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार तकनीक आधारित समाधान केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संपर्क और साझा विकास के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं।

    ग्रीस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोकियन करावियास से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में ग्रीस की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य में आर्थिक भागीदारी को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    एथेंस स्थित यूरोबैंक मुख्यालय में मंत्री ने यूरोबैंक और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की साझेदारी के तहत शुरू हुई यूपीआई सेवा का लाइव प्रदर्शन भी देखा। इस अवसर पर बैंकिंग और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली और इसके संभावित लाभों की जानकारी दी। इसे भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत-ग्रीस बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर व्यापक आर्थिक स्थिति और तेजी से विकसित होता औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने ग्रीस के उद्योग जगत से भारत में दीर्घकालिक निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो भारतीय और यूरोपीय उद्योगों के बीच सहयोग का दायरा और अधिक व्यापक होगा तथा दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए बाजार और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे।

    उन्होंने ग्रीस के उद्योगपतियों और निवेशकों से सह-निर्माण, सह-निवेश और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीक, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। इससे रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीस में यूपीआई सेवा की शुरुआत भारत की डिजिटल वित्तीय प्रणाली के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत है। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था अधिक सरल और किफायती बनने के साथ-साथ भारत और ग्रीस के बीच व्यापारिक संपर्क, निवेश सहयोग तथा आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी यूपीआई के विस्तार से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहुंच और मजबूत हो सकती है।

  • एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच मंगलवार को शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया। बैंक द्वारा पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के लिए नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद शुरुआती कारोबार में बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की निगाह अब बैंक की शीर्ष प्रबंधन टीम से जुड़े अगले महत्वपूर्ण फैसलों, विशेष रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

    मंगलवार के शुरुआती कारोबार में एचडीएफसी बैंक का शेयर गिरावट के साथ खुला और कारोबार के दौरान यह 794 रुपये के इंट्रा-डे स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन शेयर पूरे कारोबार के दौरान दबाव में बना रहा। निवेशकों ने नए नेतृत्व की घोषणा का स्वागत करने के साथ-साथ बैंक की भविष्य की प्रबंधन रणनीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

    बैंक ने हाल ही में शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्षों के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ बैंक को स्थायी नेतृत्व मिल गया है, जिससे बोर्ड स्तर पर लंबे समय से बनी अस्थायी व्यवस्था समाप्त हो गई है। राजीव कुमार ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब बैंक कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और रणनीतिक निर्णयों की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

    राजीव कुमार ने पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का स्थान लिया है। चक्रवर्ती ने इस वर्ष अपने पद से इस्तीफा देते समय बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बताया था। उनके इस्तीफे के बाद बैंक ने संचालन में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया था। अब स्थायी नियुक्ति होने से बैंक के निदेशक मंडल को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस बीच बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की हालिया बैठक में इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। माना जा रहा है कि बैंक पहले नए चेयरमैन को पूरी तरह कार्यभार संभालने का अवसर देगा, जिसके बाद सीईओ की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यही कारण है कि बाजार फिलहाल नेतृत्व से जुड़े अगले फैसलों पर विशेष नजर बनाए हुए है।

    शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह के दौरान एचडीएफसी बैंक के शेयर ने 1,020.35 रुपये का उच्चतम और 726.75 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया है। पिछले एक वर्ष में बैंक के शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि बीते छह महीनों में भी इसमें लगभग 20 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बैंक का शेयर हाल के महीनों में लगातार दबाव का सामना कर रहा है।

    पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से जुड़ी कानूनी समीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समीक्षा के दौरान मुख्य रूप से नियामकीय अनुपालन पर ध्यान दिया गया, जबकि बैंक की कारोबारी कार्यप्रणालियों को लेकर उनकी व्यापक चिंताओं पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि नया नेतृत्व बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था, प्रबंधन निर्णयों और भविष्य की रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई


    अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध दर्ज कराया है और प्रदेश नेतृत्व के साथ कई सांसद और वरिष्ठ नेता अयोध्या पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को देर रात एक होटल में नजरबंद कर दिया और बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। इसके साथ ही कई अन्य कांग्रेस नेताओं को भी उनके आवास या ठहरने के स्थान पर ही रोक दिया गया जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

    कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राम जन्मभूमि मंदिर जाकर कथित चढ़ावा प्रबंधन और चोरी के आरोपों की जांच और विरोध दर्ज कराना चाहता था। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। टेढ़ी बाजार क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कुछ नेताओं को बस में बैठाकर हटाया गया जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।

    कांग्रेस सांसदों और नेताओं का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं दिया गया है और बिना आधिकारिक सूचना के इस तरह हाउस अरेस्ट करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए यह कदम आवश्यक था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से पूछताछ भी हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही हैं।

    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

    अयोध्या में बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन तेज हुआ, कई नेता हाउस अरेस्ट किए गए, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा

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