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  • E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज

    E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज


    नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रहा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी बीच पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए तेल कंपनियों और भारत सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

    भूटानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान सरकार ने भारत से अनुरोध किया है कि उसे पहले की तरह सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखी जाए। भूटान का कहना है कि उसके भौगोलिक हालात और परिवहन जरूरतों को देखते हुए उसे अधिक माइलेज देने वाले पारंपरिक ईंधन की आवश्यकता है।

    भूटान का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां ऊंची चढ़ाइयां और कठिन रास्ते हैं। ऐसे में वाहनों के लिए बेहतर माइलेज बेहद जरूरी माना जाता है। इसी आधार पर भूटान ने चिंता जताई है कि यदि E20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याएं सही साबित होती हैं, तो पहाड़ी देश की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    भूमिगत भंडारण को लेकर भी जताई चिंता
    भूटान के लिए E20 पेट्रोल को लेकर केवल माइलेज ही नहीं, बल्कि भंडारण भी एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूटान भारत से आयातित ईंधन को भूमिगत टैंकों में संग्रहित करता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि इन टैंकों में E20 मिश्रित पेट्रोल रखने से पानी के रिसाव का खतरा बढ़ सकता है।

    स्थानीय मीडिया के अनुसार, भूमिगत भंडारण संरचना की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिक दृष्टि से भी बताया गया है कि E20 पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल नमी को तेजी से सोख सकता है, जिससे टैंकों में पानी जमा होने की आशंका रहती है।

    भूटान ने E20 पेट्रोल खरीदने से किया इनकार
    भूटान, जो अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन भारत से खरीदता है, ने स्पष्ट रूप से ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेने से इनकार कर दिया है। साथ ही उसने भारत सरकार से आग्रह किया है कि यदि भविष्य में E20 पेट्रोल की आपूर्ति बढ़ाई जाती है, तो उसे पहले से इसकी जानकारी दी जाए।

    भूटानी अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत सरकार को उनके लिए नए और सुरक्षित ईंधन भंडारण टैंकों की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    क्या है E20 विवाद?
    भारत में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से E20 पेट्रोल के समर्थन में रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह नीति कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    हालांकि, कई वाहन मालिकों का दावा है कि 2023 से पहले बने वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में गिरावट और इंजन की खराबी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसी कारण देश में इस ईंधन को लेकर बहस तेज हो गई है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां सरकार ने इसे एक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में बताया। सरकार के अनुसार इसके परिणाम अगले वर्ष तक स्पष्ट होंगे। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस नीति के चलते आम उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

  • सूर्य और बुध की युति से बनेगा बुधादित्य योग, 7 जुलाई से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्‍मत

    सूर्य और बुध की युति से बनेगा बुधादित्य योग, 7 जुलाई से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्‍मत


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का राशि परिवर्तन व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है। जुलाई 2026 में भी एक महत्वपूर्ण ग्रह योग बनने जा रहा है। 7 जुलाई 2026 को बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक ग्रह बुध वक्री अवस्था में कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में पहले से ही सूर्य देव विराजमान हैं। ऐसे में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ और प्रभावशाली राजयोग माना जाता है।

    इस योग का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से करियर, आर्थिक उन्नति और सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है।

    वृषभ राशि: धन लाभ और कारोबार में तरक्की के संकेत
    बुधादित्य योग वृषभ राशि के दूसरे भाव यानी धन भाव में बनेगा। इसके प्रभाव से लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। पैतृक व्यवसाय से जुड़े लोगों को लाभदायक सौदे मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर अनुकूल बदलाव देखने को मिलेंगे। वाणी का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे सामाजिक और पेशेवर जीवन में लाभ मिलेगा। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

    सिंह राशि: करियर और निवेश में मिल सकता है बड़ा फायदा
    सिंह राशि के लिए यह योग लाभ भाव यानी 11वें भाव में बनेगा। करियर के क्षेत्र में नई संभावनाएं बन सकती हैं। मनचाही नौकरी या इच्छित स्थान पर ट्रांसफर के योग हैं। कुछ लोगों को विदेश में काम करने का अवसर भी मिल सकता है। पुराने निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। बेहतर संवाद क्षमता का फायदा मार्केटिंग, सेल्स और पब्लिक डीलिंग से जुड़े लोगों को विशेष रूप से मिलेगा।

    कन्या राशि: प्रमोशन और सफलता के खुल सकते हैं रास्ते
    कन्या राशि के जातकों के लिए बुधादित्य योग कर्म भाव यानी दसवें भाव में बनेगा। इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी और कार्यस्थल पर आपके प्रदर्शन की सराहना होगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रमोशन की संभावनाएं मजबूत होंगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। व्यापारियों को लाभ होगा और स्वास्थ्य में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    बुधादित्य योग का लाभ बढ़ाने के उपाय
    इस शुभ योग का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ सरल ज्योतिषीय उपाय किए जा सकते हैं—
    – प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे में जल, रोली और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
    – बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।
    – नियमित रूप से “ॐ बुं बुधाय नमः” तथा “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र की एक-एक माला का जाप करें। मान्यता है कि इससे कुंडली में सूर्य और बुध की स्थिति मजबूत होती है।

  • स्किन को रखना है हेल्दी और ग्लोइंग तो अपनाएं ये आसान आदतें त्वचा रहेगी लंबे समय तक जवान

    स्किन को रखना है हेल्दी और ग्लोइंग तो अपनाएं ये आसान आदतें त्वचा रहेगी लंबे समय तक जवान


    नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन इसके लिए केवल महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट ही जरूरी नहीं होते। त्वचा की असली खूबसूरती अंदर से शुरू होती है। संतुलित खानपान पर्याप्त पानी नियमित देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली मिलकर त्वचा को लंबे समय तक जवां और निखरी हुई बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए तो त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं से बचा जा सकता है।

    त्वचा की देखभाल का पहला नियम है उसकी नियमित सफाई। दिनभर धूल मिट्टी प्रदूषण और पसीना त्वचा पर जमा होकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं। इसलिए सुबह और रात अपने स्किन टाइप के अनुसार हल्के फेस क्लेंजर से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे त्वचा साफ रहती है और मुंहासों का खतरा भी कम होता है।

    सफाई के बाद त्वचा को मॉइस्चराइज करना भी उतना ही जरूरी है। कई लोग मानते हैं कि केवल रूखी त्वचा वालों को ही मॉइस्चराइजर की जरूरत होती है लेकिन तैलीय त्वचा को भी उचित नमी की आवश्यकता होती है। सही मॉइस्चराइजर त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखता है और उसे मुलायम तथा स्वस्थ बनाता है।

    धूप से बचाव भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा को समय से पहले बूढ़ा बना सकती हैं और झाइयों तथा सनबर्न जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना और तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना त्वचा की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहरी देखभाल से नहीं आती बल्कि खानपान का भी इसमें बड़ा योगदान होता है। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और प्रोटीन से भरपूर भोजन त्वचा को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। विटामिन सी विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार त्वचा की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर और त्वचा दोनों हाइड्रेट रहते हैं जिससे प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    अच्छी नींद और तनाव पर नियंत्रण भी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। पर्याप्त नींद न मिलने और लगातार तनाव रहने से त्वचा बेजान दिखने लगती है तथा मुंहासे और समय से पहले झुर्रियां आने का खतरा बढ़ सकता है। नियमित व्यायाम और योग से रक्त संचार बेहतर होता है जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण आसानी से पहुंचता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बिना जरूरत बार बार नए ब्यूटी प्रोडक्ट बदलने से बचना चाहिए। किसी भी नए उत्पाद का उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता और अपनी त्वचा के अनुसार उसकी उपयुक्तता जरूर जांच लें। यदि त्वचा पर लगातार खुजली लालिमा दाने या अन्य गंभीर समस्या दिखाई दे तो स्वयं उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

    स्वस्थ त्वचा किसी एक दिन में नहीं बनती बल्कि यह नियमित देखभाल और अच्छी आदतों का परिणाम होती है। यदि सही स्किन केयर रूटीन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ चमकदार और आकर्षक बनाए रखा जा सकता है।

  • धरती की सबसे अनोखी बस्ती: सूरज के सबसे करीब बसे चिम्बोराजो के लोग, जानिए कैसे जीते हैं यहां के लोग

    धरती की सबसे अनोखी बस्ती: सूरज के सबसे करीब बसे चिम्बोराजो के लोग, जानिए कैसे जीते हैं यहां के लोग


    नई दिल्ली। अगर आप सोचते हैं कि धरती पर सूरज और अंतरिक्ष के सबसे करीब पहुंचने वाली जगह माउंट एवरेस्ट है, तो यह पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से यह गौरव दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर स्थित माउंट चिम्बोराजो को हासिल है।

    हालांकि समुद्र तल से सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट है, लेकिन पृथ्वी भूमध्य रेखा के आसपास उभरी हुई है। इसी वजह से भूमध्य रेखा के निकट स्थित चिम्बोराजो की चोटी, पृथ्वी के केंद्र से मापने पर अंतरिक्ष और सूरज के सबसे करीब पहुंचती है। इस बर्फीले और दुर्गम पर्वत की ढलानों पर आज भी हजारों लोग अपना जीवन बिता रहे हैं।

    समुद्र तल से 6,268 मीटर ऊंचे चिम्बोराजो की चोटी पर विशाल ग्लेशियर फैले हुए हैं। वहीं 3,500 से 4,200 मीटर की ऊंचाई के बीच फैले घास के मैदानों में छोटे-छोटे गांव बसे हैं। यहां मुख्य रूप से ‘क्वेशुआ’ और ‘पुरुहा’ आदिवासी समुदाय के कुछ हजार लोग रहते हैं, जिनके पूर्वजों ने सदियों पहले इस कठिन पर्वतीय क्षेत्र को अपना घर बनाया था।

    कम ऑक्सीजन में भी सामान्य जीवन
    इतनी अधिक ऊंचाई पर पहुंचने वाले अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द और चक्कर जैसी दिक्कतें होती हैं, लेकिन पीढ़ियों से यहां रहने वाले लोगों का शरीर कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुरूप ढल चुका है। यहां रात के समय तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है और तेज ठंडी हवाएं लगातार चलती रहती हैं।

    कड़ाके की ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग मिट्टी की मोटी दीवारों वाले घर बनाते हैं, जिन्हें ‘चोजा’ कहा जाता है। इन घरों की छतों पर सूखी घास की मोटी परत बिछाई जाती है, जो दिन में गर्मी सोखकर रात में घर को गर्म बनाए रखती है। भोजन में गर्म जड़ी-बूटियों की चाय, आलू, चीज और एवोकाडो से बने सूप प्रमुख हैं, जबकि मांस भी उनके खानपान का अहम हिस्सा है। यहां की आजीविका खेती से अधिक पशुपालन पर आधारित है।

    ऊन देने वाले जानवरों पर टिकी आजीविका
    चिम्बोराजो क्षेत्र लामा, अल्पाका और विकुना जैसे ऊन देने वाले जानवरों का प्राकृतिक आवास है। इन्हीं की ऊन से स्थानीय लोग पारंपरिक मोटे कपड़े और पोंचो तैयार करते हैं, जो उन्हें कड़ाके की ठंड से बचाते हैं। पुरुष पोंचो पहनते हैं, जबकि महिलाएं लंबी ऊनी स्कर्ट और शॉल धारण करती हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच उनके लाल, नीले और हरे रंग के पारंपरिक वस्त्र अलग ही आकर्षण पैदा करते हैं। खड़ी पहाड़ी ढलानों पर सामान ढोने में लामा आज भी उनके सबसे भरोसेमंद साथी हैं।

    पहाड़ नहीं, परिवार का संरक्षक
    स्थानीय लोगों के लिए चिम्बोराजो केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि ‘पिता चिम्बोराजो’ है। उनका विश्वास है कि यह पर्वत उनकी रक्षा करता है। किसी भी खेती या शुभ कार्य से पहले वे पर्वत का आशीर्वाद लेते हैं। उनका मानना है कि पहाड़ के नाराज होने पर तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं।

    इस पर्वत से जुड़ी ‘हिएलेरोस’ नाम की एक सदियों पुरानी परंपरा भी प्रसिद्ध रही है। ‘हिएलेरोस’ यानी बर्फ निकालने वाले लोग ग्लेशियरों तक पहुंचकर बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियां काटते थे, उन्हें घास में लपेटकर नीचे के शहरों में बेचते थे। आधुनिक समय में यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन यह आज भी यहां के लोगों के संघर्ष और मेहनत की मिसाल मानी जाती है।

    बदलते मौसम के साथ बदल रही जिंदगी
    ग्लोबल वार्मिंग का असर अब चिम्बोराजो पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर भविष्य में इन बस्तियों के लिए पानी का संकट पैदा कर सकते हैं। बेहतर रोजगार और सुविधाओं की तलाश में कई युवा शहरों की ओर जा रहे हैं। वहीं, पहाड़ पर रहने वाले लोगों ने कम्युनिटी टूरिज्म को आजीविका का नया माध्यम बना लिया है। वे दुनिया भर से आने वाले ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों के लिए गाइड का काम करते हैं, जबकि महिलाएं अपने हाथों से बुने ऊनी वस्त्र बेचकर आय अर्जित कर रही हैं।

    चिम्बोराजो के निवासी यह साबित करते हैं कि सीमित संसाधनों और कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे जीवन को सफल बनाया जा सकता है। यही वजह है कि उन्हें पूरी दुनिया में ‘सूरज का सबसे करीबी पड़ोसी’ होने का अनूठा गौरव प्राप्त है।

  • गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके

    गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके


    अहमदाबाद। गुजरात के साणंद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलग अंदाज देखने को मिला। सेमीकंडक्टर उद्योग पर अपने संबोधन के बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके संवाद “सुन रहे हो न, विनोद” का जिक्र किया, जिसे सुनते ही कार्यक्रम स्थल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

    प्रधानमंत्री साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट सुविधा के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

    गुजराती कहावतों से शुरू हुई चर्चा
    कार्यक्रम में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के चेयरमैन सुबैया ने अपने संबोधन में गुजराती की दो प्रसिद्ध कहावतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास के लिए स्पष्ट दिशा तय की है और अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह उसी सोच के साथ आगे बढ़े।

    उन्होंने गुजराती कहावत “निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान” का जिक्र करते हुए कहा कि ऊंचा लक्ष्य रखना जरूरी है। यदि लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंचा जाए तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन छोटा लक्ष्य तय करना उचित नहीं है।

    सुबैया ने यह भी बताया कि उनकी कंपनी की पहली सेमीकंडक्टर चिप्स की खेप जापान स्थित साझेदारों को भेजी जा रही है। उनके मुताबिक, यह भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दूसरी गुजराती कहावत “काम बोले छे” का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनी का काम ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा।

    पीएम मोदी ने ऐसे जोड़ा वायरल डायलॉग
    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों कहावतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कभी छोटे लक्ष्य या छोटी सोच में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा, “अगर मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा।” इसे सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर संकेत माना गया।

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “और सुबैया जी ने ‘काम बोले छे’ भी कहा… सुन रहे हो न, विनोद… काम बोले छे।” यह सुनते ही सभागार में मौजूद लोगों और मंच पर बैठे अतिथियों के बीच हंसी और तालियों का दौर शुरू हो गया।

    सोशल मीडिया पर लोकप्रिय है यह संवाद
    “सुन रहे हो न, विनोद” और “देख रहे हो न, विनोद” जैसे संवाद एक वेब शो के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। बाद में कंटेंट क्रिएटर्स और मीम पेजों ने इनका व्यापक इस्तेमाल किया, जिससे यह इंटरनेट पर चर्चित संवाद बन गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक मंच से इसका उल्लेख किए जाने के बाद यह प्रसंग भी चर्चा का विषय बन गया।

  • ट्रंप का खामेनेई के जनाजे पर पहुंचे ईरानी नेताओं पर बड़ा दावा, कहा- “चाहते तो एक ही वार में सबको मार सकते थे”

    ट्रंप का खामेनेई के जनाजे पर पहुंचे ईरानी नेताओं पर बड़ा दावा, कहा- “चाहते तो एक ही वार में सबको मार सकते थे”


    नई दिल्‍ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. ट्रंप का कहना है कि ‘अमेरिका चाहता तो एक ही वार में ईरान के सभी बड़े नेताओं को हमेशा के लिए खत्म कर सकता था, जो अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने पहुंचे थे’. हालांकि, उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वो ईरान के साथ परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं. यह हैरान करने वाली बात ट्रंप ने अपने एक इंटरव्यू कही.

    दरअसल, ट्रंप ने शनिवार को एक्सिओस (Axios) के साथ एक संक्षिप्त फोन इंटरव्यू में यह बयान दिया. इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते थे, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि फिर हमारे पास बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा’. उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान इस समय समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह बातचीत शुरू करना चाहता है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका की प्राथमिकता सिर्फ सैन्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावना को भी बनाए रखना है.

    फिलहाल दोनों पक्षों ने कुछ दिनों के लिए बातचीत को रोकने पर सहमति जताई है. इसकी वजह यह है कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे की रस्में अभी पूरी होनी बाकी हैं. इसी बातचीत में उन्होंने अपने उस पुराने दावे को फिर से दोहराया कि खामेनेई तो युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका और इजरायल के एक साझा मिलिट्री ऑपरेशन में मारे गए थे.

    भीड़ देखकर हैरान हुए ट्रंप
    ईरान के इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह अली खामेनेई के जनाजे में जुटी भीड़ को देखकर हैरान रह गए. उनके मुताबिक उन्हें लगता था कि वहां के लोग खामेनेई से नफरत करते हैं, इसलिए इतनी बड़ी भीड़ देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ. ट्रंप ने यह भी कहा कि हो सकता है कि वहां मौजूद लोगों के आंसू सच्चे न हों.

  • एमपी में आज इंदौर समेत 20 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, 9 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी में आज इंदौर समेत 20 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, 9 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और लगातार हो रही बारिश से प्रदेश का अधिकांश हिस्सा तरबतर हो गया है। शनिवार को 20 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने रविवार के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में सबसे अधिक असर रहने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, रविवार को रतलाम, धार, बड़वानी, शाजापुर, बैतूल, पांढुर्णा, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, उज्जैन, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, सिवनी, अनूपपुर, कटनी, पन्ना, झाबुआ और अलीराजपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक वर्षा होने का अनुमान है।

    वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, भोपाल, सागर, नरसिंहपुर, जबलपुर, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।

    लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित
    शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हुई तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। कई नदियां और नाले उफान पर आ गए, जिससे अनेक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया। कई स्थानों पर घरों और खेतों में पानी भर गया, जबकि पुल-पुलियों और सड़कों पर पानी बहने से यातायात बाधित हुआ।

    हरदा जिले में भारी बारिश के कारण कई गांवों का संपर्क कट गया। ग्राम मांदला के पास कालीमाचक नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी पुल से करीब तीन फीट ऊपर बहने लगा, जिसके चलते नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर आवागमन रोकना पड़ा।

    20 से अधिक जिलों में बरसे बादल, तापमान में आई गिरावट
    शनिवार को बैतूल, धार, इंदौर, खरगोन, पचमढ़ी, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, हरदा, सीहोर, पन्ना, बड़वानी, देवास और रतलाम सहित 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    बारिश के चलते दिन के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। धार प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बैतूल में 26 डिग्री, मलाजखंड में 26.5 डिग्री, खंडवा में 28.1 डिग्री और सिवनी में 29.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री, भोपाल का 30.8 डिग्री, उज्जैन का 31.8 डिग्री, जबलपुर का 33.8 डिग्री और ग्वालियर का 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

  • रविवार का वास्तु नियम इन गलतियों से रूठ सकते हैं सूर्य देव सुख समृद्धि और मान सम्मान पर पड़ सकता है असर

    रविवार का वास्तु नियम इन गलतियों से रूठ सकते हैं सूर्य देव सुख समृद्धि और मान सम्मान पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्य देव को ऊर्जा आत्मविश्वास सफलता स्वास्थ्य और मान सम्मान का कारक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि यदि रविवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाए और वास्तु से जुड़ी गलतियों से बचा जाए तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं इस दिन की गई कुछ लापरवाहियां घर में नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष का कारण भी बन सकती हैं। इसलिए रविवार के दिन पूजा पाठ के साथ साथ घर की व्यवस्था और दैनिक कार्यों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

    रविवार की शुरुआत सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करने से करनी चाहिए। जल अर्पित करते समय सूर्य मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति के साथ आत्मबल बढ़ने की मान्यता है। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार रविवार के दिन घर के पूर्व दिशा को साफ सुथरा रखना चाहिए क्योंकि यह दिशा सूर्य देव की मानी जाती है। इस दिशा में कूड़ा कबाड़ टूटे हुए सामान या गंदगी जमा होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। यदि घर के पूर्व भाग में पर्याप्त रोशनी आती है तो उसे बाधित नहीं करना चाहिए।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन नमक का अत्यधिक सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और बिना नमक का भोजन ग्रहण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।

    रविवार को लोहे से बनी नई वस्तुओं की खरीदारी या अनावश्यक लोहे का दान करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन तांबे और गेहूं से जुड़े दान अधिक शुभ फल प्रदान करते हैं। जरूरतमंद लोगों को गुड़ गेहूं लाल वस्त्र या तांबे के पात्र का दान करना पुण्यदायी माना जाता है।

    घर में यदि लंबे समय से वास्तु दोष महसूस हो रहा हो तो रविवार के दिन मुख्य द्वार और पूजा स्थल की विशेष सफाई करें। सुबह के समय घी का दीपक जलाकर सूर्य देव का ध्यान करने से वातावरण में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। घर में नियमित रूप से सूर्य का प्रकाश आने देना भी शुभ माना जाता है।

    रविवार के दिन अनावश्यक क्रोध विवाद और कटु वचन से बचना चाहिए। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रह नेतृत्व और सम्मान का प्रतीक है इसलिए इस दिन बड़ों का सम्मान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना विशेष फलदायी माना गया है।

    हालांकि वास्तु और ज्योतिष से जुड़े ये उपाय धार्मिक आस्थाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार अपनाया जा सकता है। यदि इन नियमों के साथ सकारात्मक सोच स्वच्छता अनुशासित जीवनशैली और नियमित पूजा को जोड़ा जाए तो घर का वातावरण अधिक शांत और सुखद बनाया जा सकता है। रविवार का दिन केवल पूजा का अवसर नहीं बल्कि आत्मचिंतन सकारात्मक ऊर्जा और नए संकल्प के साथ जीवन को बेहतर बनाने का भी श्रेष्ठ समय माना जाता है।

  • CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

    CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की लोक संस्कृति (Folk Culture) को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी गायिका (Pandvani singer) पद्म विभूषण तीजन बाई (Padma Vibhushan Teejan Bai) का रविवार सुबह 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    दुर्ग जिले की निवासी तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली, दमदार प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के माध्यम से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता।

    तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और गाने का शौक था। सामाजिक विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को नहीं छोड़ा। महिलाओं के लिए उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ में प्रस्तुति देना वर्जित माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई। तीजन बाई ने 13 साल की उम्र में सबसे चंद्रखुरी में अपनी प्रस्तुति दी।

    तीजन बाई ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला का डंका बजाया। उनकी कला की सराहना देश-विदेश में हुई। तीजन बाई को कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं- पद्मश्री (1988) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995) पद्मभूषण (2003), पद्म विभूषण (2019)।

    तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थीं। उन्होंने अपने जीवन के छह दशक लोककला को समर्पित किए और नई पीढ़ी को पंडवानी की समृद्ध परंपरा से जोड़ा।

  • सिर्फ सिगरेट नहीं ये आदतें भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर डालती हैं बुरा असर जानिए लो स्पर्म काउंट के बड़े कारण

    सिर्फ सिगरेट नहीं ये आदतें भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर डालती हैं बुरा असर जानिए लो स्पर्म काउंट के बड़े कारण


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों की प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें लो स्पर्म काउंट यानी वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होना एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। अधिकांश लोग मानते हैं कि केवल सिगरेट तंबाकू या शराब का सेवन ही इसका कारण है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई अन्य शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। समय रहते इन कारणों की पहचान और सही उपचार से पिता बनने की संभावना को बेहतर बनाया जा सकता है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार जब एक मिलीलीटर वीर्य में लगभग डेढ़ करोड़ से कम शुक्राणु पाए जाते हैं तो इसे लो स्पर्म काउंट या ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है। यदि वीर्य में शुक्राणु बिल्कुल नहीं होते तो इसे एजूस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है लेकिन आधुनिक चिकित्सा के जरिए कई मामलों में इसका सफल उपचार संभव है।

    लो स्पर्म काउंट का सबसे बड़ा संकेत यह है कि लंबे समय तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। कई पुरुषों में इसके अलावा कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ मामलों में यौन इच्छा में कमी इरेक्शन की समस्या अंडकोष में दर्द सूजन या गांठ जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि धूम्रपान और तंबाकू के अलावा मोटापा लगातार मानसिक तनाव अत्यधिक शराब का सेवन नशीले पदार्थों का उपयोग हार्मोन असंतुलन और अनियमित जीवनशैली भी शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा वैरिकोसील थायरॉयड विकार कुछ संक्रमण और लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    यदि कोई दंपती बिना गर्भनिरोधक के एक वर्ष तक नियमित संबंध बनाने के बाद भी संतान प्राप्ति में सफल नहीं हो पाता तो पुरुष और महिला दोनों की जांच कराना आवश्यक माना जाता है। जिन पुरुषों को पहले से अंडकोष प्रोस्टेट या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या रही हो उन्हें बिना देरी चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच से समस्या का कारण पता लगाया जा सकता है और उसके अनुसार इलाज शुरू किया जा सकता है।

    अच्छी बात यह है कि हर लो स्पर्म काउंट का मामला स्थायी बांझपन नहीं होता। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और स्वस्थ वजन बनाए रखने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। धूम्रपान तंबाकू और शराब से दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं हार्मोन थेरेपी या आधुनिक फर्टिलिटी तकनीकों की मदद से इलाज की सलाह दे सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों को अपनी प्रजनन क्षमता को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए और किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए। सही जीवनशैली नियमित स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ की सलाह से अधिकांश मामलों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। जागरूकता और समय पर उपचार ही स्वस्थ पितृत्व की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।