

जानकारी के अनुसार, कल्ला खटीक का 17 वर्षीय बेटा कुछ समय के लिए पड़ोस में रहने वाली नेहा के घर चला गया था। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर उसके माता-पिता उसे वापस लेने नेहा के घर पहुंचे। इसी दौरान नाबालिग के घर लौटने को लेकर असहमति हो गई और विवाद शुरू हो गया।
बताया जा रहा है कि नाबालिग घर जाने को तैयार नहीं था, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसी बीच कहासुनी बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गई। विवाद के दौरान पड़ोसी महिला ने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जिसमें झगड़ा और कथित मारपीट दिखाई दे रही है।
वीडियो बनाने के बाद महिला नेहा सीधे इंदरगंज थाने पहुंची और कल्ला खटीक व उनकी पत्नी के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को घटना का वीडियो भी सौंपा गया है। वहीं, दूसरी तरफ से भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
इंदरगंज पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। मामले में सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फाइनल मुकाबले में सिनर का सामना नॉर्वे के अनुभवी खिलाड़ी कैस्पर रूड से हुआ। शुरुआत में रूड ने आक्रामक खेल दिखाते हुए दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन सिनर ने संयम और रणनीति के साथ मैच में वापसी की। पहले सेट में बढ़त हासिल करने के बाद उन्होंने अपने खेल को और अधिक सटीक और आक्रामक बनाया। लगातार बेसलाइन से लगाए गए गहरे और नियंत्रित शॉट्स ने उन्हें मैच में मजबूत पकड़ दिलाई और धीरे-धीरे उन्होंने मुकाबले का पूरा रुख अपने पक्ष में कर लिया।
दोनों सेटों में समान स्कोर के साथ समाप्त हुए इस फाइनल में सिनर ने मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस का बेहतरीन प्रदर्शन किया। लंबे समय तक चले इस मुकाबले में उन्होंने न केवल तकनीकी श्रेष्ठता दिखाई, बल्कि दबाव के क्षणों में भी खुद को संतुलित रखा। यही वजह रही कि वे निर्णायक पलों में बढ़त बनाए रखने में सफल रहे और खिताब जीतने में कामयाब हुए।
इस जीत के साथ सिनर ने अपने करियर का एक और बड़ा अध्याय जोड़ा है। लगातार कई बड़े टूर्नामेंट जीतते हुए उन्होंने विश्व टेनिस में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। इस सफलता के साथ वे उस चुनिंदा सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने एटीपी मास्टर्स स्तर पर सभी प्रमुख खिताब अपने नाम किए हैं, जो उनके निरंतर प्रदर्शन और उच्च स्तर की क्षमता को दर्शाता है।
मैच के बाद भावुक होते हुए सिनर ने अपने प्रदर्शन और टीम के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके लिए केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अपनी टीम के समर्थन को इस सफलता की नींव बताया, जिसने पूरे सीजन उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
वहीं, फाइनल में हार के बावजूद कैस्पर रूड ने सिनर के प्रदर्शन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने माना कि घरेलू दर्शकों के सामने इस तरह का प्रदर्शन करना असाधारण उपलब्धि है और यह मैच उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण मुकाबलों में से एक रहा। उन्होंने सिनर को इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनका खेल वर्तमान टेनिस युग में एक नई ऊंचाई स्थापित कर रहा है।
रोम के दर्शकों के लिए यह मुकाबला यादगार बन गया, जहां घरेलू खिलाड़ी की जीत ने पूरे स्टेडियम को उत्साह से भर दिया। इस जीत ने न केवल सिनर के करियर को नई दिशा दी, बल्कि इटली में टेनिस के प्रति बढ़ते जुनून को भी और मजबूत कर दिया है।

देर से घर आने पर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, रविवार रात करीब 11 बजे रामचंद्र आदिवासी घर पहुंचे थे। देर से आने पर पत्नी सोनम ने उनसे सवाल किए, जिसके बाद दोनों के बीच बच्चों के सामने बहस हो गई।
विवाद इतना बढ़ गया कि रामचंद्र गुस्से में घर से बाहर चले गए। इसी दौरान पत्नी सोनम कमरे में गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
बच्चों ने दी दर्दनाक सूचना
कुछ देर बाद बड़ा बेटा ओम रोते हुए बाहर आया और पिता को बताया कि मां पंखे से लटकी हुई है। यह सुनकर पिता तुरंत घर की ओर दौड़े।दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से दीवार तोड़ी और अंदर दाखिल हुए।
अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
परिजन सोनम को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने करीब 26 मिनट के इलाज के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद बच्चों और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने पर थाटीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया।थाना प्रभारी विपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला घरेलू विवाद का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
घरेलू विवाद बना जानलेवा
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि छोटे-छोटे घरेलू विवाद भी कई बार गंभीर और दुखद परिणाम दे सकते हैं। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी और स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं के दौरान उनके खेल में निखार साफ दिखाई देने लगा। इसी दौरान उन्हें प्रसिद्ध कोचिंग सिस्टम और प्रशिक्षण सुविधाओं से जुड़ने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। मिट्टी पर पारंपरिक कुश्ती से निकलकर मैट पर मुकाबला करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगातार अभ्यास से खुद को ढाल लिया। यह बदलाव उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी यात्रा शुरू हुई।
साल 2016 उनके करियर का शुरुआती सुनहरा दौर रहा, जब उन्होंने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप और अन्य जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। 2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद वह वैश्विक स्तर पर सबसे चर्चित युवा पहलवानों में शामिल हो गए।
ओलंपिक मंच पर पहुंचकर उन्होंने भारत की उम्मीदों को नई ऊंचाई दी। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों के 86 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक मुकाबले तक पहुंचकर मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि अंतिम मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ा संकेत था कि देश के युवा खिलाड़ी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।
इसके बाद भी उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां कभी चोट तो कभी तकनीकी कारणों ने उनकी राह मुश्किल की। कई महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग इवेंट्स में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार वापसी की कोशिश करते रहे। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंचों पर उन्होंने भारत के लिए कई पदक जीतकर अपनी जगह मजबूत की।
आज दीपक पूनिया को उन खिलाड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। युवा खिलाड़ियों के लिए वे आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो यह दिखाते हैं कि संघर्ष से ही सफलता की असली कहानी लिखी जाती है।

CM बोले- सोशल मीडिया की ‘तीसरी आंख’ सब देख रही
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया हर गतिविधि पर नजर रखता है। नेताओं को समझदारी और संयम के साथ काम करना होगा।उन्होंने कहा, “अगर कोई आपको उलझाए या भड़काए तो उससे बचना आपको ही है। कोई दूसरा आपका मददगार नहीं होगा। आप खुद जवाबदार हैं।”
मुख्यमंत्री ने नेताओं को सलाह दी कि शुरुआत के एक-दो महीने काम को समझने और सीखने में लगाएं। नियम-कानून के दायरे में रहकर काम करें और अपने संस्थानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करें।
उन्होंने यह भी कहा कि अहंकार से केवल नुकसान होगा। सरकार जब चाहे जिम्मेदारी बदल सकती है, इसलिए पद को सेवा का माध्यम मानकर काम करें।
हेमंत खंडेलवाल बोले- दुखी मन से करनी पड़ी कार्रवाई
Hemant Khandelwal ने हालिया विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ घटनाओं की वजह से संगठन को दुखी मन से कार्रवाई करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपेक्षा है कि पार्टी के लोग ताकतवर बनें, लेकिन उस ताकत का इस्तेमाल जनता और कार्यकर्ताओं की सेवा के लिए होना चाहिए।
खंडेलवाल ने कहा कि निगम-मंडलों में नियुक्त सभी लोगों का चयन मेरिट के आधार पर हुआ है और संगठन उनसे अनुशासन तथा जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है।
प्रदेश प्रभारी की चेतावनी- रोज जाएगी रिपोर्ट
बीजेपी प्रदेश प्रभारी Mahendra Singh ने नेताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी कि अब उनके कामकाज और व्यवहार की नियमित मॉनिटरिंग होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक रोज रिपोर्ट पहुंचेगी कि कौन क्या कर रहा है, उसका व्यवहार कैसा है और परिवार की भूमिका कितनी है। सरकार और संगठन दोनों मिलकर परफॉर्मेंस का मूल्यांकन करेंगे।साथ ही नेताओं को सोशल मीडिया सक्रिय रखने, अनुशासन बनाए रखने और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की सलाह भी दी गई।
18 विभागों के अधिकारियों ने दी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। नेताओं को वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक प्रक्रिया, अधिकार, जिम्मेदारियां और विभागीय समन्वय को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने समझाया कि निगम-मंडलों में काम करते समय सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन कैसे करना है ताकि शासन व्यवस्था प्रभावित न हो।
काफिला और शक्ति प्रदर्शन बना था विवाद की वजह
हाल ही में कई निगम-मंडल अध्यक्षों द्वारा पदभार ग्रहण करने के दौरान बड़े-बड़े काफिले और वाहन रैलियां निकाली गई थीं। इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी संगठन को दिल्ली स्तर तक नाराजगी झेलनी पड़ी थी।
इसके बाद पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को पद से हटा दिया। वहीं पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस जारी कर उनके अधिकार फिलहाल फ्रीज कर दिए गए।
मंत्रियों और अफसरों से टकराव रोकने की तैयारी
सरकार नहीं चाहती कि निगम-मंडलों में नियुक्त नेताओं और विभागीय मंत्रियों या अफसरों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति बने। इसी वजह से प्रशिक्षण में अधिकारों की सीमा और प्रशासनिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

पार्टी में हुई थी पहचान
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता पुणे के एक होटल में आयोजित पार्टी में शामिल होने पहुंची थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई। पार्टी खत्म होने के बाद युवक ने महिला को सुरक्षित घर छोड़ने की बात कही। महिला ने उस पर भरोसा किया और उसके साथ कार में बैठ गई।
आरोप है कि रास्ते में आरोपी ने चलती कार में महिला के साथ जबरदस्ती की और उसका यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद पीड़िता किसी तरह पुलिस तक पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।
कोरेगांव पार्क थाने में मामला दर्ज
पीड़िता की शिकायत के आधार पर कोरेगांव पार्क पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपी की तलाश जारी है।
CCTV और तकनीकी साक्ष्यों की जांच
घटना के बाद पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है। साथ ही तकनीकी सबूतों और मोबाइल लोकेशन की मदद से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच टीम होटल, पार्टी में मौजूद लोगों और कार की जानकारी भी जुटा रही है।
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पुणे में हाल के दिनों में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध के कई मामले सामने आए हैं। नसरापुर में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद अब कोरेगांव पार्क की इस वारदात ने शहर में लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया है।

फिल्म 14 मई को रिलीज हुई थी और शुरुआती दिनों से ही इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कई जगहों पर हाउसफुल शो देखने को मिल रहे हैं और दर्शक फिल्म के किरदारों और कहानी से गहराई से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बढ़ते उत्साह और भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए निर्देशक ने थिएटर अनुभव को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया।
आरजे बालाजी ने अपने संदेश में कहा कि ‘करुप्पु’ को जिस तरह का प्यार दर्शकों से मिल रहा है, वह उनके और पूरी टीम के लिए बेहद भावुक करने वाला अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि जब फिल्म की शुरुआत की गई थी, तब इस तरह के व्यापक और भावनात्मक रिस्पॉन्स की कल्पना नहीं की गई थी। निर्देशक के अनुसार, कई जगहों से ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं जहां दर्शक फिल्म देखते समय अत्यधिक भावुक हो रहे हैं, रो रहे हैं और कुछ लोग इस अनुभव को गहराई से महसूस कर रहे हैं।
इसी संदर्भ में आरजे बालाजी ने दर्शकों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि थिएटर में कोई व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया दे रहा हो या उसकी तबीयत या स्थिति असामान्य लग रही हो, तो उसके प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति दिखाना जरूरी है। उन्होंने दर्शकों से अनुरोध किया कि ऐसे समय में उस व्यक्ति को अकेला महसूस न होने दें, बल्कि उसे पानी उपलब्ध कराएं, उसे स्थान दें और जरूरत पड़ने पर थिएटर स्टाफ को सूचित करें ताकि उचित सहायता मिल सके।
निर्देशक ने यह भी कहा कि थिएटर का माहौल सिर्फ मनोरंजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक साझा भावनात्मक अनुभव भी बन चुका है। ऐसे में हर दर्शक की जिम्मेदारी है कि वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करे और किसी भी स्थिति में किसी को असहज महसूस न होने दे। उन्होंने थिएटर मालिकों और स्टाफ से भी आग्रह किया कि वे ऐसे संवेदनशील पलों के लिए पहले से तैयार रहें और दर्शकों के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करें।
फिल्म ‘करुप्पु’ में सूर्या के साथ तृषा कृष्णन मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं, जबकि फिल्म का संगीत साई अभ्यंकर ने तैयार किया है। फिल्म को न केवल इसकी कहानी और अभिनय के लिए सराहा जा रहा है, बल्कि इसके भावनात्मक प्रभाव को भी दर्शकों द्वारा खास तौर पर महसूस किया जा रहा है।
बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत करने वाली यह फिल्म अब धीरे-धीरे सुपरहिट की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है। दर्शकों की भीड़ और सोशल मीडिया पर मिल रहे सकारात्मक रिएक्शन यह संकेत दे रहे हैं कि ‘करुप्पु’ लंबे समय तक चर्चा में बनी रह सकती है।

इस मुकाबले में बांग्लादेश की शुरुआत पहली पारी में उतनी मजबूत नहीं रही और टीम महज 278 रनों पर सिमट गई थी। इस पारी में सबसे शानदार प्रदर्शन लिटन दास ने किया, जिन्होंने 126 रनों की जिम्मेदार और आक्रामक पारी खेली। उनकी पारी में 16 चौके और 2 छक्के शामिल रहे, जिसने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। कप्तान नजमुल हुसैन शान्तो ने भी 29 रन बनाकर कुछ देर तक संघर्ष किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां बनाने में असफल रहे।
पाकिस्तान की गेंदबाजी इस पारी में काफी प्रभावी रही, जहां खुर्रम शहजाद ने चार विकेट लेकर बांग्लादेश की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। मोहम्मद अब्बास ने भी तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, जबकि हसन अली को दो सफलताएं मिलीं। साजिद खान ने एक विकेट लेकर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई।
इसके जवाब में पाकिस्तान की पहली पारी पूरी तरह लड़खड़ा गई और टीम सिर्फ 232 रन पर सिमट गई। इस पारी में बाबर आजम ने 68 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। कप्तान शान मसूद और सलमान आगा ने 21-21 रन बनाए, जबकि साजिद खान ने 38 रनों की उपयोगी पारी खेली। बांग्लादेश की गेंदबाजी यहां बेहद प्रभावी रही, जहां नाहिद राणा और तैजुल इस्लाम ने तीन-तीन विकेट हासिल किए। तस्कीन अहमद और मेहदी हसन ने दो-दो विकेट लेकर पाकिस्तान की पारी को जल्द समाप्त कर दिया।
पहली पारी के आधार पर बांग्लादेश को 46 रनों की बढ़त मिली, जिसने टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी। दूसरी पारी में बांग्लादेश ने बेहद आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 390 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस पारी में अनुभवी बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने शतक लगाते हुए 137 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 13 चौके शामिल रहे। वहीं लिटन दास ने एक बार फिर उपयोगी योगदान देते हुए 69 रन बनाए। महमूदुल हसन जॉय ने 52 रनों की अहम पारी खेली, जिसने टीम की स्थिति को और मजबूत किया।
पाकिस्तान की गेंदबाजी दूसरी पारी में भी कुछ हद तक प्रभावी रही, जहां खुर्रम शहजाद ने चार विकेट झटके। साजिद खान ने तीन विकेट लिए, जबकि हसन अली और मोहम्मद अब्बास ने भी विकेट निकालने में सफलता पाई। इसके बावजूद बांग्लादेश ने बड़ा लक्ष्य खड़ा कर पाकिस्तान को दबाव में डाल दिया।
अब पाकिस्तान के सामने चौथी पारी में 437 रनों का कठिन लक्ष्य है, जो टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। तीसरे दिन के अंतिम क्षणों में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज क्रीज पर उतरे, लेकिन कोई रन बनाए बिना दिन का खेल समाप्त करना पड़ा। अंतिम दिन का खेल इस मैच और संभवतः पूरी सीरीज का फैसला तय कर सकता है।