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  • कोचिंग सेंटरों में मिली बड़ी लापरवाही: बंद मिले एग्जिट, फायर ऑडिट नहीं; नगर निगम का 2 दिन का अल्टीमेटम

    कोचिंग सेंटरों में मिली बड़ी लापरवाही: बंद मिले एग्जिट, फायर ऑडिट नहीं; नगर निगम का 2 दिन का अल्टीमेटम


    मध्यप्रदेश । देशभर में कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद देवास नगर निगम ने शहर के कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर नगर निगम ने संचालकों को दो दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। तय समय सीमा में सुधार नहीं होने पर संबंधित संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

    शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शहर के विद्या कोचिंग, पार्थ कोचिंग और वर्मा कोचिंग क्लासेस का निरीक्षण किया। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। कई संस्थानों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट नहीं कराया गया था, जबकि आपातकालीन निकासी की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर लापरवाही आपातकालीन निकासी मार्गों को लेकर सामने आई। कई स्थानों पर एग्जिट के रास्ते बंद पाए गए और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में यह छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

    जांच में यह भी पाया गया कि कुछ कोचिंग संस्थानों में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे। इसके अलावा भवन की क्षमता और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में अग्निशमन उपकरण भी पर्याप्त नहीं थे।

    विद्या कोचिंग के संचालक ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान में अभी कक्षाएं शुरू नहीं हुई हैं और जल्द ही एग्जिट व्यवस्था, फायर सेफ्टी सहित सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा कर लिया जाएगा।

    वहीं पार्थ कोचिंग में केवल एक निकासी मार्ग चालू मिला, जबकि दो अन्य रास्ते बंद थे और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। यहां फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी नहीं कराया गया था। नगर निगम की टीम ने तत्काल सुधार करने, बंद एग्जिट खोलने और अग्निशमन उपकरणों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।

    नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि दो दिन के भीतर सभी सुरक्षा संबंधी कमियां दूर की जाएं। यदि निर्धारित समय में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ सीलिंग सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर निगम के फायर अधिकारी जितेंद्र सिसोदिया, प्रतीक शर्मा, उमेश चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

  • एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल

    एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश के एटा जिले में गुरुवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में पांच यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हो गए। हादसा बागवाला थाना क्षेत्र में उस समय हुआ, जब खराब हुई रोडवेज बस सड़क किनारे खड़ी थी और कई यात्री गर्मी के कारण बस से उतरकर बाहर खड़े थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और यात्रियों को कुचलते हुए बस में टक्कर मार दी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 यात्रियों से भरी रोडवेज बस एटा से दिल्ली जा रही थी। रास्ते में बस खराब होने पर चालक उसे सड़क किनारे खड़ा कर आवश्यक पार्ट्स लेने चला गया। इसी दौरान कई यात्री बस से उतरकर बाहर खड़े थे। अचानक तेज रफ्तार कंटेनर ने नियंत्रण खो दिया और बाहर खड़े लोगों को रौंदते हुए बस के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर सड़क पार दूसरी ओर जा पहुंचा और कई शव सड़क पर बिखर गए।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने पांच लोगों को मृत घोषित कर दिया।

    घायल यात्री अंसार ने बताया कि बस खराब होने के कारण चालक मरम्मत के लिए गया था। अधिक गर्मी होने के कारण कई यात्री नीचे उतर आए थे, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बस के भीतर ही बैठे रहे। इसी वजह से वे इस हादसे की चपेट में आने से बच गए।

    घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अरविंद सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और कंटेनर को हटवाकर करीब एक घंटे बाद यातायात बहाल कराया।

    हादसे में बुलंदशहर निवासी सतेंद्र शर्मा (38), फर्रुखाबाद के राजेश (34), सुखराम (30), शैलेश (29) और आशीष सक्सेना (22) की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश लोग दिल्ली में नौकरी या कारोबार करते थे और काम पर लौट रहे थे या परीक्षा देने जा रहे थे।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा


    नई दिल्ली ।
    सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़े भरोसे के बीच घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 650 अंकों की तेजी के साथ 78 हजार के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 24 हजार के ऊपर पहुंचकर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए हालिया आर्थिक संकेत रहे। जून महीने के रोजगार आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बच सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को भी इसका सकारात्मक लाभ मिला।

    बाजार खुलते ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, पूंजीगत वस्तुओं और चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। निवेशकों का रुझान मजबूत कंपनियों और बड़े बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य में सीमित बढ़त रही। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण मजबूती दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार भी बाजार की तेजी को समर्थन दे रहा है।

    अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। प्रमुख औद्योगिक सूचकांक ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव रहा। इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि आगे चलकर ब्याज दरों को लेकर राहत मिल सकती है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहने से आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को भी बाजार के लिए अनुकूल कारक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, विदेशी निवेश प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख


    नई दिल्ली ।
    देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं भविष्य में कीमतों में संभावित राहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

    केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कच्चे तेल की खरीद, परिवहन, भंडारण और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसकी खरीद लगभग दो महीने पहले हुई थी।

    सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं या उनमें और गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक होने पर खुदरा कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जा सकता है।

    हाल के दिनों में देश की एक निजी ईंधन विपणन कंपनी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में राहत दे सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का निर्णय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के रुख को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी रही। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैट के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और कर संरचना जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में गिरावट आने के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल कमी होना हमेशा संभव नहीं होता।

    सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो उपभोक्ताओं को भविष्य में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान

    रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान


    नई दिल्ली।
    रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता है कि फाटक बंद होने पर धैर्य रखें और ट्रेन गुजरने तक इंतजार करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    रेलवे फाटक तभी बंद किया जाता है जब किसी ट्रेन के आने का निर्धारित समय होता है। इस दौरान फाटक के नीचे से बाइक, कार या अन्य वाहन निकालने की कोशिश न केवल अपनी जान बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कुछ सेकंड की लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि रेलवे ने इस तरह की हरकत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है।

    रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बंद फाटक के नीचे से ट्रैक पार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की वजह से फाटक पर तैनात कर्मचारी के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

    ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड या जेल ही नहीं, बल्कि वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग गंभीर मामलों में लाइसेंस को निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। सड़क सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब कई लेवल क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर नहीं पकड़ा जाता, तब भी वाहन के नंबर के आधार पर बाद में चालान जारी किया जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में रेलवे सुरक्षा बल वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मिनट बचाने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दबाजी केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी समान रूप से खतरनाक है। ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान लगाना अक्सर संभव नहीं होता, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

    रेलवे प्रशासन लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि बंद फाटक को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें। फाटक खुलने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार विकल्प है। थोड़ी सी सावधानी न केवल जीवन की रक्षा करती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानियों से भी बचाती है। रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका भी।

  • सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार

    सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग अटल टनल के समीप शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सभी घायल जवानों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए निकटवर्ती सीआरपीएफ कैंप भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ का वाहन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित आवाजाही के दौरान सोनमर्ग सुरंग के पास सड़क से फिसलकर पलट गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा सड़क की स्थिति, मौसम अथवा किसी तकनीकी कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।

    हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों की निगरानी में सभी जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी जवान को गंभीर जीवन-घातक चोट नहीं आई है, हालांकि सभी का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है।

    श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग के जरिए लद्दाख क्षेत्र तक सैन्य और नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। सोनमर्ग अटल टनल के आसपास का इलाका भी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही बनी रहती है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सीआरपीएफ ने वर्ष 2026 की पहली छमाही में अभियानों के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बल को किसी भी अभियान के दौरान जवानों की शहादत का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार चल रहे आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के बीच यह उपलब्धि सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार के बाद अभियान संबंधी हताहतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

    देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बलों में शामिल सीआरपीएफ के जिम्मे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान तथा विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं। ऐसे में जवानों की सुरक्षित आवाजाही और परिचालन क्षमता बनाए रखना बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। सोनमर्ग के निकट हुई यह दुर्घटना सुरक्षा संचालन के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहन संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है। फिलहाल घायल सभी जवानों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

  • लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके ताबूत पर रखा गया विशेष लाल झंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह झंडा सबसे प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं, बल्कि शिया परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संदेश का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खामेनेई के ताबूत पर रखा गया यह लाल झंडा उनके पैतृक शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। शिया परंपरा में इस प्रकार के लाल ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, शहादत की स्मृति और न्याय की मांग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी कारण अंतिम विदाई समारोह में इस झंडे की मौजूदगी ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की शहादत के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। सातवीं शताब्दी में कर्बला के युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत शिया समुदाय की आस्था का केंद्रीय आधार मानी जाती है। उनके बलिदान को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, नैतिक साहस और सत्य के पक्ष में अडिग रहने का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।

    शिया धार्मिक परंपराओं में लाल झंडा अक्सर अधूरे न्याय, शहादत और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला झंडा शोक और मातम का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार स्थल पर लाल और काले दोनों रंगों के झंडे तथा बैनरों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से श्रद्धांजलि के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

    तेहरान में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। परिसर को धार्मिक प्रतीकों, शोक संदेशों और खामेनेई के चित्रों से सजाया गया। पूरे आयोजन में शिया धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया गया, जिससे समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्वरूप मिला।

    जानकारों का मानना है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिया समुदाय के बीच वैचारिक एकजुटता और ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करने का प्रयास है। इसी क्रम में अंतिम यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि शिया समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरा आयोजन केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिया धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और ईरान की वैचारिक निरंतरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार

    स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार

    नई दिल्ली । देशभर में स्पीड पोस्ट और निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से गांजा सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 21 राज्यों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था और ऑनलाइन ऑर्डर मिलने के बाद पार्सल के माध्यम से ग्राहकों के घरों तक मादक पदार्थ पहुंचाए जाते थे। मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े कई अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार और सुनियोजित तस्करी तंत्र के संचालन के संकेत मिले हैं।

    पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब डाक के माध्यम से भेजे जा रहे एक संदिग्ध पार्सल की जांच की गई। इसके बाद दूसरे पार्सलों की पड़ताल शुरू हुई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे पैकेटों के जरिए गांजे की आपूर्ति कर रहा था। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया तो सामने आया कि पार्सलों में मादक पदार्थों को सामान्य घरेलू सामान या दवाइयों के रूप में दर्शाकर भेजा जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहकों के ऑर्डर पूरा करता था। रोजाना कई स्पीड पोस्ट और कूरियर पार्सलों के जरिए 50 से 250 ग्राम तक गांजा विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। प्रत्येक पार्सल की कीमत उसकी मात्रा के अनुसार तय होती थी और पूरे कारोबार से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होने का अनुमान है। मासिक और वार्षिक स्तर पर यह अवैध कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका था।

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करता था। ऑर्डर प्राप्त होने के बाद डिजिटल भुगतान के जरिए रकम ली जाती थी और फिर पैकेज तैयार कर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिए जाते थे। नेटवर्क में शामिल प्रत्येक सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई पैकेजिंग करता था, कोई पार्सल बुक कराता था, जबकि अन्य सदस्य मादक पदार्थों की खरीद, भंडारण और वितरण का काम संभालते थे। इससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।

    पुलिस के अनुसार गिरोह अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कोड वर्ड का भी इस्तेमाल करता था। मादक पदार्थ की मात्रा और गुणवत्ता बताने के लिए सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिससे बातचीत के दौरान संदेह की संभावना कम रहे। अवैध कमाई को छिपाने के लिए विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि अवैध आय का एक हिस्सा सोने, महंगी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो स्थानीय खरीदारों को भी गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और इसके माध्यम से लंबे समय से मादक पदार्थों की आपूर्ति की जा रही थी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड तथा पार्सल बुकिंग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक तस्करी गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे व्यापक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। ऐसे में वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठित ड्रग्स तस्करी के ऐसे तरीकों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और भविष्य में इस तरह के नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

  • TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए

    TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए


    लखनऊ । UP-TET 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रदेशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की गई। सुबह 7:15 बजे से अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें एडमिट कार्ड की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और रेटिना स्कैन के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा इतनी सख्त रही कि महिला अभ्यर्थियों के हेयरपिन, क्लचर, चूड़ियां और अन्य धातु के आभूषण उतरवाए गए। कई केंद्रों पर जूड़े खुलवाकर जांच की गई, जबकि पुरुष अभ्यर्थियों की बेल्ट उतरवाकर और जूतों की जांच के बाद ही प्रवेश मिला। ललितपुर में एक नवविवाहिता महिला घूंघट में परीक्षा देने पहुंची। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने जेठ के साथ आई है, इसलिए घूंघट कर रखा है। वहीं लखनऊ में एक महिला सिपाही ने समय पर परीक्षा केंद्र न पहुंच पाने वाली अभ्यर्थी को अपनी स्कूटी से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाकर मानवता की मिसाल पेश की।

    इस बीच बस्ती जिले से दुखद खबर सामने आई। टीईटी परीक्षा ड्यूटी पर जा रहे 51 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल राजेंद्र यादव की शुक्रवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। बताया गया कि ड्यूटी के लिए बाइक से जा रहे हेड कॉन्स्टेबल को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में कार सवार एक ही परिवार के तीन लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    महाराष्ट्र में हाल ही में हुए टीईटी पेपर लीक मामले के बाद उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है। पहली बार शिक्षा चयन आयोग एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम के माध्यम से परीक्षा की लाइव निगरानी कर रहा है। प्रदेशभर के 60 जिलों में 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हैं।

    पहले दिन आयोजित परीक्षा में फर्जीवाड़े की कई कोशिशें भी सामने आईं। दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 15 सॉल्वर गिरफ्तार किए गए। पहले दिन दोनों पालियों में 8 लाख 7 हजार 636 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6 लाख 84 हजार 614 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिससे उपस्थिति 84.76 प्रतिशत रही।

    प्रदेश में चार दिनों तक चलने वाली इस परीक्षा में कुल 19.94 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें 17.67 लाख उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि 2.27 लाख अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक भी शामिल हैं।

    उधर बदायूं में भाजपा नेता के स्वागत के दौरान लगे जाम के कारण कई परीक्षार्थियों की परीक्षा छूट गई। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी सांसद आदित्य यादव ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने की मांग करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया।

  • चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। अब इस पत्र को सार्वजनिक किए जाने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने दावा किया है कि देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अनिवार्य हैं तथा इस व्यवस्था की रक्षा करना न्यायपालिका का महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व है। विपक्ष का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तब न्यायपालिका से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप आवश्यक हस्तक्षेप करे।

    पत्र में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान आयोग का रवैया कई अवसरों पर पक्षपातपूर्ण प्रतीत हुआ है। विपक्ष का यह भी कहना है कि आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघनों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है।

    विपक्षी दलों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्र अपेक्षित स्तर पर प्रभावी दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहना आवश्यक है और यदि किसी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका समाधान संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विपक्ष न्यायपालिका की भूमिका और स्वतंत्रता का सम्मान करता है तथा उसका उद्देश्य किसी संस्था की गरिमा पर प्रश्न उठाना नहीं है। इसके विपरीत, विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब विभिन्न स्तरों पर मतभेद या विवाद उत्पन्न होते हैं, तब न्यायपालिका अंतिम संवैधानिक मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी आधार पर मुख्य न्यायाधीश से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

    विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार यदि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर संदेह बढ़ता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    इस घटनाक्रम के बाद चुनावी सुधार, निर्वाचन आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाएगी। फिलहाल विपक्ष का यह संयुक्त पत्र देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जारी बहस का एक अहम राजनीतिक दस्तावेज बनकर सामने आया है।