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  • आईआईएम इंदौर IPM में शहर के 6 छात्रों का चयन, आरव माले ने हासिल की देशभर में दूसरी रैंक

    आईआईएम इंदौर IPM में शहर के 6 छात्रों का चयन, आरव माले ने हासिल की देशभर में दूसरी रैंक


    इंदौर । भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर के प्रतिष्ठित इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) की अंतिम चयन सूची में इंदौर के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। देशभर के करीब 28 हजार अभ्यर्थियों के बीच हुई कड़ी प्रतिस्पर्धा में शहर के छह छात्रों ने अंतिम चयन सूची में जगह बनाई। इनमें आरव माले ने ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है।

    आईपीमैट देश की सबसे कठिन मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस वर्ष करीब 28 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से लगभग 830 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया और अंततः केवल 150 विद्यार्थियों का चयन हुआ। चयनित छात्रों में इंदौर के आरव माले के अलावा अथर्व हार्डिया (एआईआर-8), अकमल बंगलोवाला (एआईआर-33), देवांश अग्रवाल (एआईआर-42), दिव्य लुणावत (एआईआर-51) सहित कुल छह छात्रों ने सफलता हासिल की।

    ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त करने वाले आरव माले ने अपनी सफलता का श्रेय समयबद्ध तैयारी और लगातार अभ्यास को दिया। उन्होंने 11वीं कक्षा से ही आईपीमैट की तैयारी शुरू कर दी थी। बोर्ड परीक्षाओं के बाद उन्होंने रोजाना कई घंटे पढ़ाई की और 40 से अधिक मॉक टेस्ट देकर अपनी रणनीति को मजबूत बनाया। इंटरव्यू में बिजनेस स्टडीज और गणित से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। यही निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना।

    अथर्व हार्डिया ने भी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ की। उनका कहना है कि नियमित अभ्यास और मॉक इंटरव्यू ने आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अकमल बंगलोवाला पिछले दो वर्षों से आईपीमैट की तैयारी कर रहे थे। उनका लक्ष्य भविष्य में अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना है। देवांश अग्रवाल ने बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने के साथ कई मॉक टेस्ट दिए और अब वे वित्तीय परामर्श के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।

    दिव्य लुणावत ने भी लगातार दो वर्षों तक योजनाबद्ध तैयारी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने समसामयिक घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया और नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़कर सामान्य ज्ञान मजबूत किया। इंटरव्यू में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े सवालों का उन्होंने प्रभावी ढंग से जवाब दिया।

    आईपीमैट विशेषज्ञ अजय बंसल और मन गोयल का कहना है कि अब इस परीक्षा में केवल कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र ही नहीं, बल्कि साइंस और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। आईआईएम से सीधे पांच वर्षीय मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश का अवसर युवाओं को आकर्षित कर रहा है। उनका मानना है कि जो छात्र 11वीं कक्षा से ही व्यवस्थित तैयारी शुरू करते हैं, नियमित मॉक टेस्ट देते हैं और इंटरव्यू की तैयारी पर बराबर ध्यान देते हैं, उनके चयन की संभावना काफी अधिक रहती है।

    इंदौर के इन विद्यार्थियों की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है। इन छात्रों की उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

  • बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

    बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट


    इंदौर । इंदौर में मानसून ने जुलाई की शुरुआत से ही जोरदार दस्तक दी है। पिछले दो दिनों में शहर में करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। बुधवार को करीब ढाई इंच बारिश के बाद गुरुवार रात फिर तेज बारिश हुई और शुक्रवार सुबह तक शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भरा रहा। लगातार हो रही बारिश के बीच अधूरे सड़क और ड्रेनेज निर्माण कार्यों ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

    बारिश के बाद एमबी रोड, रिंग रोड, नेहरू नगर, अटल द्वार, निपानिया, स्टार चौराहा और द्वारकापुरी समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई स्थानों पर ड्रेनेज लाइन, स्टॉर्म वॉटर लाइन और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद सड़कें समय पर दुरुस्त नहीं की गईं। कहीं केवल मिट्टी और गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया, जो बारिश में दलदल में बदल गई। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सत्यसांई चौराहे के पास तेज बारिश के दौरान एक बड़ा पेड़ का हिस्सा सड़क पर गिर गया। हालांकि इस हादसे में एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। वहीं कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर घायल हो गए। बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

    एमआर-11 मार्ग पर निर्माण कार्य के चलते बनाए गए डायवर्शन मार्ग भी बारिश में खतरनाक साबित हो रहे हैं। देवास नाका और निपानिया चौराहे के आसपास खुदाई के बाद सड़क की ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। मानसरोवर क्षेत्र में हाल ही में बनी सड़क पहली ही बारिश में उखड़ने लगी है, जबकि महालक्ष्मी नगर से निपानिया तक की सीमेंटेड सड़क भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क किनारे पक्के फुटपाथ नहीं होने से पूरा इलाका कीचड़ और दलदल में बदल गया है।

    हाल ही में बनाई गई स्टॉर्म वॉटर लाइन भी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। स्टार चौराहे पर घंटों तक पानी जमा रहा। वहीं जंजीरवाला चौराहे और रॉयल पार्क क्षेत्र में अधूरे निर्माण कार्यों के कारण हर बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं।

    मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रेडिसन चौराहे से रोबोट चौराहे तक चल रहे निर्माण कार्य ने भी ट्रैफिक और सड़क व्यवस्था को प्रभावित किया है। मुख्य सड़क संकरी होने और सर्विस रोड की खराब स्थिति के कारण बारिश के दौरान आवागमन और मुश्किल हो गया है। वहीं द्वारकापुरी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। कई परिवारों ने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजों के सामने सीमेंट की छोटी दीवारें तक बना ली हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर शहर की अधूरी परियोजनाओं और कमजोर आधारभूत ढांचे की पोल खोल दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी सोनम रघुवंशी की जमानत, कहा- रिहा न हुई होती तो बेल पर रोक लगा देते

    सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी सोनम रघुवंशी की जमानत, कहा- रिहा न हुई होती तो बेल पर रोक लगा देते


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के आधार पर उसे गंभीर आपत्ति है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सोनम जेल से रिहा नहीं हुई होती तो उसकी जमानत पर रोक लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती। साथ ही मेघालय सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया गया जिसमें हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह सुनियोजित हत्या का मामला है। उनके अनुसार सोनम ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई।

    सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गई थी। यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसी तकनीकी आधार को जमानत का कारण मान लिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी आधार बताए गए थे और मजिस्ट्रेट के रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख है। पहले भी सोनम की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी, इसलिए केवल लिपिकीय गलती के आधार पर राहत देना उचित नहीं था।

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे और शुरुआती जमानत याचिकाओं में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया गया था तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने को आधार बनाकर जमानत कैसे मिल गई। सोनम की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण उसे बताए ही नहीं गए थे, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर उसे कुछ आपत्तियां हैं, लेकिन चूंकि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी है इसलिए इस स्तर पर उसकी जमानत पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के अनुसार आगे कोई कार्रवाई आवश्यक हो तो राज्य सरकार ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है।

    यह मामला मई 2025 में सामने आया था। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए, जहां 23 मई को दोनों लापता हो गए। 3 जून को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ और पुलिस ने कई आरोपियों के साथ सोनम रघुवंशी को भी मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर है, जबकि मामले की सुनवाई जारी है।

  • 5 जुलाई से बदलेगी मंगल की चाल, ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन चार राशियों पर मंडराएगा आर्थिक और मानसिक संकट, रहें बेहद सतर्क

    5 जुलाई से बदलेगी मंगल की चाल, ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन चार राशियों पर मंडराएगा आर्थिक और मानसिक संकट, रहें बेहद सतर्क

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि और नक्षत्र परिवर्तन को मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। इसी कड़ी में शौर्य, साहस, पराक्रम और शारीरिक शक्ति के कारक माने जाने वाले उग्र ग्रह मंगल का एक बड़ा नक्षत्र गोचर होने जा रहा है। आगामी 5 जुलाई 2026, रविवार की आधी रात 12 बजकर 01 मिनट पर मंगल ग्रह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और वे 24 जुलाई 2026 तक इसी स्थिति में गतिमान रहेंगे। यद्यपि मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन कई राशियों के लिए शुभ और प्रगतिशील परिणाम लेकर आएगा, परंतु ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार चार ऐसी विशेष राशियां भी हैं जिनके जातकों के लिए यह गोचर अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और कष्टदायी साबित हो सकता है। इस अवधि में प्रभावित जातकों को विशेष रूप से बड़े फैसले लेने से बचने, अनियंत्रित क्रोध पर काबू रखने और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इस खगोलीय गोचर से प्रभावित होने वाली पहली मुख्य राशि वृष है। वृष राशि के जातकों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन जीवन में कई तरह की विपरीत परिस्थितियां और चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान इन्हें अपने आर्थिक मामलों में विशेष रूप से सतर्कता बनाए रखनी होगी। खर्चों की अधिकता के कारण संचित धन पानी की तरह बह सकता है, जिससे बजटीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसके अतिरिक्त, कार्यस्थल या ऑफिस में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करते समय अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहकर धैर्यपूर्वक समस्याओं का समाधान खोजना ही इस समय हितकर रहेगा।

    द्वितीय प्रभावित राशि तुला है, जिसके जातकों के लिए मंगल का रोहिणी नक्षत्र में जाना प्रतिकूल समय की शुरुआत का संकेत है। इस अवधि में जातक अपनी ऊर्जा, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में एक अप्रत्याशित कमी महसूस कर सकते हैं। इसके साथ ही, स्वभाव में अकारण ही आक्रामकता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान किसी भी तरह का महत्वपूर्ण अथवा रणनीतिक निर्णय जल्दबाजी में लेने से भारी नुकसान हो सकता है। पारिवारिक जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए अपने रिश्तों में अहंकार या ‘इगो’ को बिल्कुल भी आड़े न आने दें और अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहें।

    इस सूची में तीसरी प्रभावित राशि मकर है, जिसके जातकों के लिए मंगल का यह नक्षत्र गोचर बड़ी आर्थिक क्षति का मुख्य कारक बन सकता है। मकर राशि वाले लोगों को इस समय सीमा के भीतर किसी भी तरह के नए निवेश या बड़े वित्तीय लेन-देन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अनापेक्षित और अनावश्यक खर्चों में भारी वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र या व्यापार में किसी भी बाहरी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें, अन्यथा विश्वासघात या बड़ा धोखा मिलने की पूरी संभावना है। इस कठिन दौर में मानसिक तनाव को स्वयं पर हावी न होने दें और अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें।

    चौथी और अंतिम प्रभावित राशि मीन है, जिसके जातकों के लिए मंगल का यह गोचर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियां उत्पन्न करने वाला साबित होगा। इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के जोखिम भरे कार्यों, सट्टेबाजी या लॉटरी जैसे निवेशों से पूरी तरह दूर रहना ही समझदारी होगी। पारिवारिक संबंधों में वैचारिक मतभेद के कारण तनाव और कड़वाहट बढ़ने के प्रबल संकेत हैं। यह संपूर्ण समय मीन राशि के जातकों के लिए अत्यंत धैर्य, संयम और विवेक से काम लेने का है। लापरवाही बरतने पर गंभीर धन हानि और मान-प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है।

  • महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर

    महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर


    इंदौर  लगातार हो रही बारिश के बीच इंदौर नगर निगम की एक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के परदेशीपुरा क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंची निगम की टीम को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन कार्रवाई के दौरान जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी को भावुक कर दिया। परिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नगर निगम के रिमूवल प्रभारी ने एक महिला के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर मकान खाली करने की अपील की। आखिरकार समझाइश सफल रही और परिवार के बाहर आने के बाद जर्जर मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

    नगर निगम की टीम वर्मा नर्सिंग होम के पास स्थित रतिराम खटके के पुराने और जर्जर मकान को हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार इस भवन को वर्ष 2021 से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। हाल ही में हुए निरीक्षण में भवन की नींव कमजोर और पूरी संरचना अत्यंत खतरनाक पाई गई थी। लगातार बारिश के कारण मकान कभी भी गिर सकता था जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी।

    कार्रवाई के दौरान मकान में रहने वाली महिला ने घर खाली करने से इनकार करते हुए अपने घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उसने कहा कि सामान रखने की व्यवस्था होने के बाद ही वह मकान खाली करेगी। इसके बाद रिमूवल प्रभारी बबलू कल्याणे स्वयं मकान के अंदर गए और पूरा सामान देखा। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनका सामान पास की सुरक्षित जगह पर रखवा दिया जाएगा और किसी भी वस्तु को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    काफी देर तक समझाने के बावजूद जब महिला तैयार नहीं हुई तो स्थिति भावुक हो गई। परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बबलू कल्याणे ने महिला के पैर पकड़ लिए और आग्रह किया कि वह अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए मकान खाली कर दे। अधिकारी का यह मानवीय व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। अंततः महिला और उसके परिवार ने अधिकारियों की बात मान ली और सुरक्षित बाहर आ गए।

    परिवार के बाहर निकलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम ने करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने जर्जर मकान को बुलडोजर की मदद से गिरा दिया। इस भवन में अलग अलग परिवार रह रहे थे जिन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सख्ती दिखाने के लिए नहीं बल्कि संभावित जनहानि को रोकने के उद्देश्य से की गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के सभी चिन्हित जर्जर भवनों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों से लोगों की जान को खतरा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे से पहले ऐसे भवनों को हटाना जरूरी है।

    इंदौर की यह घटना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण भी बन गई है। एक अधिकारी ने नियमों के साथ इंसानियत को भी प्राथमिकता दी और समय रहते एक संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।

  • ब्रिटिश महिला के दिमाग में मिले 38 परजीवी सिस्ट; 19 साल पुराने भारत दौरे पर मढ़ा आरोप, तो सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय यूजर्स

    ब्रिटिश महिला के दिमाग में मिले 38 परजीवी सिस्ट; 19 साल पुराने भारत दौरे पर मढ़ा आरोप, तो सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय यूजर्स

    नई दिल्ली । पश्चिमी मीडिया में हाल ही में सुर्खियां बटोरने वाली एक खबर को लेकर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स और इंटरनेट जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। दरअसल, एक 42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन के मस्तिष्क में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला और कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का दावा है कि साल 2007 में अपनी दो महीने की भारत यात्रा के दौरान वे सूअर के फीताकृमि से होने वाले एक दुर्लभ संक्रमण ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ का शिकार हुई थीं। इस दावे के सामने आते ही भारतीय नेटिजन्स ने इसे पूरी तरह से एक ‘भारत विरोधी एजेंडा’ और देश की वैश्विक छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास करार दिया है।

    भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स इस बात को लेकर बेहद हैरान और क्रोधित हैं कि करीब 19 वर्ष पहले की गई एक संक्षिप्त यात्रा को बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक और प्रयोगशाला साक्ष्यों के इस तरह वैश्विक मंचों पर उछाला जा रहा है। इंटरनेट पर लोगों का आरोप है कि विदेशी मीडिया संस्थान अक्सर भारत को एक अस्वच्छ और असुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में चित्रित करने की फिराक में रहते हैं। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने लंबे अंतराल के बाद अचानक इस मामले को तूल देकर वैश्विक पर्यटकों के मन में भारत के प्रति भय पैदा करने का एक प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है, जो पूरी तरह से तर्कहीन है।

    इस गंभीर विवाद के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखे तंज और मीम्स की भी बाढ़ आ गई है। भारतीय यूजर्स ब्रिटिश महिला के इस दावे के वैज्ञानिक तर्क पर सवाल उठाते हुए ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का उदाहरण दे रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि महारानी एलिजाबेथ भी वर्ष 1997 में भारत दौरे पर आई थीं और उनका निधन वर्ष 2022 में हुआ, तो क्या अब उनके निधन का उत्तरदायित्व भी उनके दशकों पुराने भारत दौरे पर मढ़ दिया जाएगा। यूजर्स का कहना है कि 2007 से लेकर अब तक के लंबे समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने, खाने-पीने और यात्रा करने के बाद किसी भी बीमारी के लिए केवल भारत को दोष देना पूरी तरह से हास्यास्पद और बेतुका है।

    चिकित्सीय इतिहास के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत से लौटने के चार वर्ष बाद यानी 2011 में लोरी डेनमैन को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं का अहसास हुआ। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उनके शरीर से एक मीटर लंबा टेपवर्म प्राप्त हुआ, जिसके बाद कराए गए एमआरआई स्कैन में उनके मस्तिष्क के भीतर 38 परजीवी सिस्ट होने की पुष्टि हुई। ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ नामक यह दुर्लभ बीमारी सूअर के फीताकृमि ‘टीनिया सोलियम’ के कारण होती है, जो मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और दुनिया भर में मिर्गी के दौरों का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। इस संक्रमण के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए महिला को अब जीवन भर चिकित्सीय दवाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षा मानकों के अनुसार, यह संक्रमण केवल दूषित या अधपके सूअर का मांस खाने से ही नहीं, बल्कि दूषित पानी और संक्रमित व्यक्ति द्वारा बिना स्वच्छता के छुए गए कच्चे फलों तथा सब्जियों के सेवन से भी इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकता है। पेट में जाने के बाद ये सूक्ष्म अंडे लार्वा का रूप ले लेते हैं और रक्त प्रवाह के माध्यम से मस्तिष्क की मांसपेशियों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, ब्रिटेन के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ब्रिटेन में सख्त खाद्य सुरक्षा कानूनों के कारण इसके मामले अत्यंत दुर्लभ हैं और भारत में इसके मरीजों की संख्या अधिक है, इसलिए मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री को आधार बनाकर ही इस तरह की चिकित्सकीय संभावना व्यक्त की गई है, क्योंकि यह परजीवी बिना कोई लक्षण दिखाए वर्षों तक मस्तिष्क में निष्क्रिय पड़ा रह सकता है।

  • ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत

    ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत


    मध्यप्रदेश । कर्नाटक के बेंगलुरु के निकट स्थित मदापट्टना की एक ग्रेनाइट खदान में गुरुवार को हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। करीब 40 फीट ऊंचाई से विशाल चट्टान गिरने से मध्य प्रदेश के पांच मजदूरों समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि चट्टान की चपेट में आने से ट्रैक्टर और लोडिंग वाहन पूरी तरह टूटकर कई हिस्सों में बिखर गए। खदान में काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा तफरी मच गई और हर तरफ चीख पुकार सुनाई देने लगी।

    हादसे के समय खदान में करीब 16 मजदूर पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का कार्य चल रहा था तभी अचानक विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे आ गिरी। नीचे काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई लोग भारी मलबे के नीचे दब गए। राहत एवं बचाव दल ने कई घंटे तक अभियान चलाकर घायलों और मृतकों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान भुवनेश्वर सिंह गौंड राजपाल सिंह रामअवतार सिंह और राजेश प्रसाद चौधरी के रूप में हुई है जबकि एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं गुलाब सिंह राजपाल सिंह और छोटू लाल सहित कई मजदूर घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश मजदूर बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कर्नाटक में काम करने गए थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चट्टान का वजन इतना अधिक था कि उसकी चपेट में आते ही ट्रैक्टर और अन्य मशीनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई मजदूरों के सिर हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। अस्पताल और खदान परिसर में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। एक मृतक के परिवार ने बताया कि वह बेटियों की शादी के बाद हुए कर्ज को चुकाने के लिए मजदूरी करने गया था लेकिन अब परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य भी नहीं रहा।

    हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में ब्लास्टिंग की बजाय चट्टान खिसकने या मिट्टी धंसने की आशंका सामने आई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक कारण स्पष्ट होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने खदान की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि राज्य सरकार लगातार कर्नाटक प्रशासन के संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। खदान मालिक ने मृतकों के परिजनों को दस दस लाख रुपए तथा घायलों को पांच पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • आषाढ़ मास की योगिनी एकादशी पर बन रहा विशेष संयोग; गृहस्थों और वैष्णव संप्रदाय के लिए पंचांग ने जारी किए अलग-अलग शुभ मुहूर्त

    आषाढ़ मास की योगिनी एकादशी पर बन रहा विशेष संयोग; गृहस्थों और वैष्णव संप्रदाय के लिए पंचांग ने जारी किए अलग-अलग शुभ मुहूर्त

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और आत्मशुद्धि के लिए सबसे उत्तम और पवित्र दिनों में गिना जाता है। इसी कड़ी में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी का स्थान बेहद विशिष्ट माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में इसे समस्त कष्टों और अनजाने में हुए पापों को दूर करने वाला एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत बताया गया है। इस वर्ष वर्ष 2026 में एक खास ज्योतिषीय और खगोलीय स्थिति बन रही है, क्योंकि एकादशी तिथि 10 जुलाई और 11 जुलाई, दोनों ही तारीखों को स्पर्श कर रही है। इसी तिथि विस्तार के कारण देश भर के श्रद्धालुओं और व्रत रखने वाले परिवारों के मन में सही तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वैदिक पंचांग की गणना और शास्त्रों के नियमों के आधार पर ज्योतिषाचार्यों ने इस भ्रम को दूर करते हुए सही तिथि और शुभ मुहूर्त का निर्धारण किया है।

    वैदिक पंचांग की गणितीय गणना के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर होने जा रहा है। यह तिथि अगले दिन यानी 11 जुलाई 2026, शनिवार की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी बनी रहेगी, जिसके तत्काल बाद द्वादशी तिथि का आगमन हो जाएगा। इस बार एक अनोखा ज्योतिषीय संयोग यह देखने को मिल रहा है कि दोनों ही दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पूर्ण रूप से उपस्थित नहीं रहेगी। 11 जुलाई को सूर्योदय होने से पूर्व ही एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी और द्वादशी का आरंभ हो जाएगा। शास्त्रों में इस तरह की स्थिति को तकनीकी रूप से एकादशी क्षय की संज्ञा दी जाती है।

    शास्त्रों और पुराणों में वर्णित नियमों के अनुसार, जब ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जहां किसी भी दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पूर्ण रूप से उपलब्ध न हो, तब पहले दिन ही व्रत रखने का विधान सबसे श्रेष्ठ और उत्तम माना गया है। इस शास्त्रीय मान्यता और पंचांगीय गणना के आधार पर गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले सामान्य श्रद्धालुओं के लिए 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखना पूरी तरह से शास्त्र-सम्मत और उचित रहेगा। वहीं दूसरी ओर, वैष्णव संप्रदाय और सन्यासी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई 2026, शनिवार को इस पावन व्रत का संपादन करेंगे।

    धार्मिक नियमों के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत के कड़े आचरण और संयम की शुरुआत एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाती है। दशमी के दिन व्रती को पूरी तरह से सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और हर प्रकार के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इस दौरान मूंग, मसूर, गेहूं, जौ और बैंगन जैसी चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। एकादशी के मुख्य दिन श्रद्धालुओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थल पर कलश की स्थापना कर भगवान विष्णु के स्वरूप की विधिवत आराधना की जाती है, जिसमें पीले पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

    इस व्रत के दौरान कुछ विशेष और कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है, जिसमें सबसे प्रमुख चावल का त्याग है। एकादशी के दिन व्रती के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी चावल का सेवन वर्जित रहता है। इसके अतिरिक्त, एकादशी और द्वादशी दोनों ही दिनों में तुलसी दल यानी तुलसी के पत्ते तोड़ना पूरी तरह निषेध माना गया है, इसलिए पूजा के लिए आवश्यक पत्तों को एक दिन पूर्व ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए। व्रत का समापन अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण करके किया जाता है। पारण से पूर्व अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान देना पद्म पुराण के अनुसार अत्यंत कल्याणकारी माना गया है, जो मानव जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी

    बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही तेज बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। उज्जैन से लेकर पांढुर्णा खरगोन बालाघाट और ग्वालियर तक बारिश ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। नदियां उफान पर हैं सड़कें जलमग्न हो गई हैं खेतों में पानी भर गया है और कई इलाकों में लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटे को बेहद संवेदनशील बताते हुए कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    उज्जैन में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। नदी किनारे बने कई मंदिर पानी में डूब गए जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसी दौरान गांवड़ी लोढ़ा क्षेत्र में एक सहायक सचिव बाइक सहित तेज बहाव में बह गए जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है। एक अन्य घटना में पुलिया पार करते समय एक युवक मोटरसाइकिल सहित तेज धारा में बह गया लेकिन उसने पेड़ की टहनियों का सहारा लेकर अपनी जान बचा ली। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसने लोगों को झकझोर दिया।

    इंदौर में भी बारिश का असर गंभीर रहा जहां दो दिन पहले पानी में बहे एक व्यक्ति का शव काफी तलाश के बाद बरामद किया गया। पांढुर्णा जिले में नदी के किनारे बने कई कच्चे मकान तेज बहाव में ढह गए जबकि घरेलू सामान और पशु भी पानी में बह गए। खरगोन के कसरावद क्षेत्र में कुछ घंटों की तेज बारिश ने खेतों और सड़कों को जलमग्न कर दिया। बालाघाट के कई वार्डों में जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ग्वालियर रतलाम और अन्य जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी है।

    मौसम विभाग के अनुसार खंडवा और हरदा में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। धार बड़वानी खरगोन देवास बुरहानपुर और बैतूल सहित कई जिलों में भी अत्यधिक वर्षा होने का अनुमान है। वहीं उज्जैन रतलाम राजगढ़ रायसेन नर्मदापुरम सागर छिंदवाड़ा बालाघाट डिंडौरी और अनूपपुर सहित अनेक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विभाग का कहना है कि कुछ स्थानों पर चार से आठ इंच तक बारिश दर्ज हो सकती है जिससे नदियों और जलाशयों का जलस्तर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी नालों और पुलियाओं को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

    मानसून की यह सक्रियता कृषि के लिए राहत लेकर आई है लेकिन कई क्षेत्रों में यह बारिश अब संकट का रूप ले चुकी है। यदि अगले कुछ दिनों तक वर्षा का यही सिलसिला जारी रहा तो बाढ़ और जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता ही संभावित नुकसान को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।