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  • रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज

    रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज


    नई दिल्ली । रक्तदान को जीवन बचाने वाला सबसे बड़ा सामाजिक योगदान माना जाता है। एक यूनिट रक्त को अलग अलग घटकों में इस्तेमाल किया जाए तो इससे एक से अधिक मरीजों की मदद हो सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों की ओर से लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि रक्तदान करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर व्यक्ति ब्लड डोनेट करने के लिए योग्य नहीं होता। शरीर की सामान्य स्थिति उम्र वजन और स्वास्थ्य से जुड़े कई मानकों की जांच के बाद ही रक्तदान की अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के e-RaktKosh के अनुसार सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना चाहिए।

    रक्तदान से पहले ब्लड बैंक में व्यक्ति की सामान्य स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें मेडिकल हिस्ट्री के साथ ब्लड प्रेशर पल्स और शरीर का तापमान देखा जाता है। इसके अलावा उंगली से लिए गए रक्त के नमूने से हीमोग्लोबिन या आयरन की पर्याप्तता की जांच की जाती है। यदि जांच में कोई ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें रक्तदान करना सुरक्षित नहीं है तो व्यक्ति को उस समय रक्तदान से रोक दिया जाता है। इसलिए केवल उम्र और वजन सही होना ही पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

    आम तौर पर स्वस्थ वयस्क रक्तदान कर सकते हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति को गंभीर एनीमिया है या वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो उसे रक्तदान से बचना चाहिए। हाल ही में हुई सर्जरी या कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद भी कुछ समय तक रक्तदान टाला जा सकता है। इसी तरह कुछ संक्रमणों और स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर या ब्लड बैंक की मेडिकल टीम रक्तदान को अस्थायी या स्थायी रूप से रोक सकती है। इसलिए यदि आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो रक्तदान से पहले इसकी जानकारी ब्लड बैंक के चिकित्सकीय स्टाफ को देना जरूरी है।

    गर्भावस्था के दौरान रक्तदान नहीं किया जाता। डिलीवरी के बाद भी महिला को तुरंत रक्तदान नहीं करना चाहिए और उचित समय तथा स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार ही दोबारा रक्तदान किया जाना चाहिए। इसी तरह हाल में टीकाकरण या टैटू जैसी कुछ परिस्थितियों में भी रक्तदान कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इन मामलों में प्रतीक्षा की अवधि हर स्थिति के लिए एक जैसी नहीं होती इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित ब्लड सेंटर की मेडिकल स्क्रीनिंग के आधार पर लिया जाना चाहिए।

    रक्तदान से पहले कुछ सामान्य सावधानियां भी मददगार होती हैं। खाली पेट रक्तदान करने से बचना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए। अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। रक्तदान से पहले हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर माना जाता है। शराब का सेवन करके रक्तदान करने से बचना चाहिए। रक्तदान के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना चाहिए। e-RaktKosh के अनुसार रक्तदान के बाद अगले 24 से 48 घंटे तक तरल पदार्थ बढ़ाने और कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत तथा वजन उठाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    रक्तदान के दौरान किसी तरह की कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए। रक्तदान के बाद कुछ देर आराम करना और उपलब्ध कराए गए हल्के जलपान का सेवन करना उपयोगी होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्तदान नेक काम जरूर है लेकिन इसे केवल उत्साह में आकर नहीं करना चाहिए। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सही जानकारी देकर ही रक्तदान करें। अंतिम पात्रता का निर्णय ब्लड बैंक की मेडिकल स्क्रीनिंग और लागू रक्तदान दिशानिर्देशों के अनुसार होता है।

  • ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान

    ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान


    नई दिल्ली । वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की शुरुआत की तारीख में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC अब 2 अक्टूबर 2027 को टूर्नामेंट शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। हालांकि अभी ICC की ओर से नई शुरुआत की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    शुरुआती कार्यक्रम के मुताबिक 2027 वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद होनी थी। पहले 8 अक्टूबर को मुख्य टूर्नामेंट शुरू करने की योजना सामने आई थी और उससे पहले वार्म अप मुकाबले खेले जाने थे। अब अगर ICC की नई योजना पर सहमति बनती है तो मुख्य टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। फाइनल फिलहाल 21 नवंबर को होने की उम्मीद है। इस स्थिति में प्रतियोगिता करीब 50 दिनों तक चल सकती है।

    गांधी जयंती को टूर्नामेंट के आगाज से जोड़ने के पीछे महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा ऐतिहासिक संबंध भी एक अहम वजह माना जा रहा है। गांधी ने अपने जीवन के करीब 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे। वहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया था। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत गांधी जयंती से करना एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    2027 का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस बार प्रतियोगिता में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे तथा नामीबिया में खेले जाएंगे। ICC ने टूर्नामेंट के लिए 12 वेन्यू की जानकारी भी साझा की है। दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में मुकाबले होंगे जबकि जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक वेन्यू को शामिल किया गया है।

    टूर्नामेंट के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है। ICC ने 2027 वर्ल्ड कप को 14 टीमों का करने के साथ क्वालिफिकेशन चरण में नई सुपर सीरीज व्यवस्था जोड़ी है। सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाइड टीमों को सुपर सीरीज में आपस में मुकाबले करने होंगे और इस चरण से एक टीम मुख्य प्रतियोगिता के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटकर मुकाबले कराए जाएंगे। ग्रुप चरण के बाद सुपर सिक्स चरण और फिर सेमीफाइनल तथा फाइनल का रास्ता होगा।

    वर्ल्ड कप के लिए भारत समेत कई बड़ी टीमों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका बांग्लादेश अफगानिस्तान और मेजबान दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे भी क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया समेत बाकी टीमों की स्थिति क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से तय होगी।

    फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा गांधी जयंती के दिन वर्ल्ड कप शुरू होने को लेकर है। अगर ICC इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप का आगाज सिर्फ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद खास बन जाएगा। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि ICC के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।

  • जेठालाल और भिड़े पहुंचे न्यूयॉर्क, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग पर ‘तारक मेहता’ की टीम का दिखा खास अंदाज

    जेठालाल और भिड़े पहुंचे न्यूयॉर्क, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग पर ‘तारक मेहता’ की टीम का दिखा खास अंदाज


    नई दिल्ली । भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न इस बार न्यूयॉर्क में भी बेहद खास अंदाज में देखने को मिला। अमेरिका की प्रतिष्ठित एम्पायर स्टेट बिल्डिंग 15 अगस्त को भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन नजर आई। हरे सफेद और केसरिया रंगों से जगमगाती इस ऐतिहासिक इमारत ने न्यूयॉर्क के आसमान में भारत की संस्कृति और देशभक्ति की खास झलक पेश की। इस खास इंडिया डे सेलिब्रेशन में लोकप्रिय टीवी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा की स्टारकास्ट और मेकर्स भी शामिल हुए।

    इस खास समारोह में शो के निर्माता असित कुमार मोदी के साथ जेठालाल का किरदार निभाने वाले दिलीप जोशी मंदार चंदवाडकर और सोनालिका जोशी नजर आए। मंदार चंदवाडकर शो में आत्माराम तुकाराम भिड़े का किरदार निभाते हैं जबकि सोनालिका जोशी माधवी भिड़े के रोल में दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता अदिवि शेष भी इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बने। समारोह के दौरान कलाकारों ने एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की खास लाइटिंग सेरेमनी में हिस्सा लिया और आइकॉनिक लाइट स्विच ऑन करने के यादगार पल का हिस्सा बने।

    इस साल न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया डे का थीम हार्मनी इन हेरिटेज यानी विरासत में सद्भाव रखा गया था। इस थीम के जरिए भारतीय अमेरिकी समुदाय की परंपराओं संस्कृति मूल्यों और अमेरिका में उसके योगदान को सामने रखा गया। फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशंस के सहयोग से आयोजित इस खास कार्यक्रम में भारत की विरासत और देशभक्ति का रंग साफ दिखाई दिया। एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की रोशनी ने इस पूरे आयोजन को और भी खास बना दिया।

    लाइटिंग सेरेमनी के बाद तारक मेहता का उल्टा चश्मा की टीम और अन्य मेहमानों ने एम्पायर स्टेट बिल्डिंग के मशहूर ऑब्जर्वेशन डेक का भी दौरा किया। कलाकारों ने यहां से न्यूयॉर्क शहर के शानदार नजारों का आनंद लिया और कई यादगार तस्वीरें खिंचवाईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम 86वीं मंजिल के ऑब्जर्वेशन डेक पर भी नजर आई।

    तारक मेहता का उल्टा चश्मा लंबे समय से भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले कॉमेडी शोज में शामिल रहा है। ऐसे में शो के कलाकारों का अमेरिका में भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनना उनके प्रशंसकों के लिए भी खास पल रहा। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कलाकारों का उत्साह साफ दिखाई दिया। खासकर दिलीप जोशी को जेठालाल के रूप में पसंद करने वाले दर्शकों के लिए न्यूयॉर्क से सामने आई ये झलक चर्चा का विषय बनी।

    इस पूरे आयोजन ने मनोरंजन और देशभक्ति को एक साथ जोड़ दिया। न्यूयॉर्क की पहचान बन चुकी एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जब भारतीय रंगों में चमकी तो वहां मौजूद कलाकारों के साथ भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व और भावनाओं से भरा पल बन गया। भारत से हजारों किलोमीटर दूर भी तिरंगे की रोशनी ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को खास बना दिया।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान

    Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली ।16 अगस्त 2026 रविवार का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज चंद्रमा कन्या राशि में रहने से कामकाज में व्यावहारिक सोच और बारीकियों पर ध्यान देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। वहीं अलग-अलग ग्रहों की स्थिति का असर करियर धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए आज रुके हुए काम आगे बढ़ने और आर्थिक अवसर मिलने के संकेत हैं जबकि कुछ लोगों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि वालों के लिए आज मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। पुराने काम में सफलता मिल सकती है और परिवार तथा मित्रों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। हालांकि दांपत्य जीवन में छोटी बात को बड़ा बनाने से बचना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लें और अनावश्यक खर्च से बचें।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन रचनात्मकता और पारिवारिक सामंजस्य लेकर आ सकता है। कला और रचनात्मक काम से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं लेकिन धन से जुड़े फैसलों में सावधानी रखना जरूरी होगा। किसी बड़े निवेश में जल्दबाजी न करें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में नई दिशा मिलने और किसी पुराने प्रयास का लाभ मिलने की संभावना है। कारोबार करने वालों को संपर्कों से फायदा हो सकता है। हालांकि खर्च और निवेश के मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। संवाद करते समय शब्दों का चयन सोच समझकर करें।

    कर्क राशि के लिए आज धन कमाने के नए अवसर सामने आ सकते हैं। परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ेगा। कामकाज में मेहनत का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    सिंह राशि वालों के लिए आज आत्ममंथन का दिन हो सकता है। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा। नौकरी और कारोबार में काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

    कन्या राशि वालों के लिए चंद्रमा की स्थिति कौशल और दक्षता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। हाथ के हुनर और रचनात्मक काम से तुरंत लाभ मिल सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि काम के दबाव के बीच आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। रुके हुए काम को गति मिलने के संकेत हैं। कारोबारियों को भी नए संपर्कों से लाभ हो सकता है लेकिन लापरवाही से बचना होगा।

    वृश्चिक राशि वालों की नेतृत्व क्षमता आज मजबूत हो सकती है। सामाजिक स्तर पर मान सम्मान मिलने के संकेत हैं और किसी महत्वपूर्ण काम के पूरा होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। व्यापार में लाभ मिल सकता है लेकिन निवेश के मामलों में सावधानी रखना जरूरी है।

    धनु राशि के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। करियर में प्रभावशाली प्रदर्शन का अवसर मिलेगा और परिवार में सहयोग बना रहेगा। कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    मकर राशि वालों के लिए आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सकारात्मक संकेत हैं। मेहनत का परिणाम मिल सकता है और अपेक्षा से बेहतर आर्थिक लाभ की संभावना बन सकती है। फिर भी किसी भी निर्णय से पहले दूसरे पक्ष की सलाह पर विचार करना उपयोगी रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को आज नए अवसर मिल सकते हैं। कामकाज में तरक्की और आर्थिक लाभ के संकेत हैं। पुराने संपर्कों से फायदा हो सकता है। परिवार के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा और किसी विवाद को बढ़ाने से बचें।

    मीन राशि वालों के लिए साझेदारी और सहयोग का दिन है। जीवनसाथी या किसी करीबी व्यक्ति का पूरा साथ मिल सकता है। करियर में नए अवसर सामने आ सकते हैं और पढ़ाई तथा रचनात्मक काम में भी अच्छी ऊर्जा बनी रहेगी। हालांकि पैसों के मामले में सावधानी बरतना बेहतर होगा।

    ज्योतिषीय राशिफल आस्था और पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लेना बेहतर है।

  • एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके

    एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाए जाने वाले UDID यानी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान कार्ड की प्रक्रिया की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बन गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में दिव्यांग व्यक्ति को UDID कार्ड या दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रही है जिन्हें पेंशन शिक्षा रोजगार या दूसरी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत होती है। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी बताते हैं कि UDID कार्ड के प्रसंस्करण का समय राज्यों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध मानव संसाधन और दिव्यांग आबादी के आधार पर अलग-अलग रहता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 12 हजार 213 आवेदन ऐसे हैं जो छह महीने से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं तीन महीने से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या 14 हजार 288 बताई गई है। कुल मिलाकर पोर्टल पर 18 हजार 510 आवेदन अलग-अलग चरणों में लंबित बताए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दिव्यांग हितों से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण पहचान व्यवस्था में आवेदन निपटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।

    वर्ष 2021 से 5 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश से कुल 4 लाख 58 हजार 156 UDID कार्ड के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 4 लाख 2 हजार 819 कार्ड बनाए जा चुके हैं जबकि 16 हजार 396 आवेदनों को खारिज किया गया। इसके बावजूद हजारों आवेदन लंबे समय से प्रक्रिया में अटके हुए हैं। UDID कार्ड का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को एक ऐसी डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना है जिसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किया जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया में जिला मेडिकल बोर्ड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। दिव्यांगता का आकलन और प्रमाणन मेडिकल जांच के बाद किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल बोर्ड की बैठकें सीधे तौर पर आवेदन के निपटारे की गति को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि जिला चिकित्सा बोर्ड की बैठकों का समय और उनकी आवृत्ति राज्यों तथा संबंधित अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। पूरे देश के लिए बोर्ड बैठकों की कोई एक समान अनिवार्य आवृत्ति तय नहीं की गई है।

    मध्य प्रदेश में यह समस्या इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार के अपने रिकॉर्ड में भी UDID व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन और मैपिंग से जुड़ा काम सामने आया है। अगस्त 2025 के राज्य स्तरीय रिकॉर्ड में 9 लाख 56 हजार से अधिक दिव्यांगों की पहचान और 9 लाख 61 हजार से ज्यादा UDID जनरेशन दर्ज था जबकि UDID मैपिंग का आंकड़ा करीब 5 लाख 71 हजार था। इससे पता चलता है कि कार्ड बनने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट और मैप करने की चुनौती बनी हुई है।

    केंद्र सरकार की ओर से UDID पोर्टल को अपग्रेड करने डेटाबेस को आधार से जोड़ने और मेडिकल बोर्ड में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देने जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबित आवेदनों की संख्या बड़ी है। आधिकारिक दस्तावेज में मार्च 2026 तक देश का औसत UDID प्रसंस्करण समय 214 दिन बताया गया था।

    दिव्यांगों के लिए UDID कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं बल्कि कई सरकारी सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में मध्य प्रदेश में आवेदन निपटाने की गति बढ़ाना जरूरी है ताकि पात्र लोगों को महीनों तक अपनी पहचान और अधिकारों से जुड़े दस्तावेज के लिए इंतजार न करना पड़े। अब जरूरत इस बात की है कि लंबित आवेदनों की जिला स्तर पर समीक्षा हो और मेडिकल बोर्ड तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।

  • भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार

    भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में टीबी मरीजों के इलाज और फॉलोअप की जिम्मेदारी निभाने वाले DOTS प्रोवाइडर्स इन दिनों खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने से लेकर उनके घर जाकर फॉलोअप करने और परिवार के सदस्यों की जांच कराने तक की जिम्मेदारी संभालने वाले इन प्रोवाइडर्स का लंबे समय से मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। कुछ प्रोवाइडर्स का कहना है कि उन्हें करीब 10 महीने से भुगतान नहीं मिला है जबकि कुछ मार्च 2025 से अपनी राशि का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार बार अधिकारियों से संपर्क करने पर बजट उपलब्ध नहीं होने का हवाला दिया जाता है और जल्द भुगतान का भरोसा दिया जाता है।

    DOTS प्रोवाइडर्स टीबी नियंत्रण व्यवस्था में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों के घर पहुंचकर उन्हें निर्धारित समय पर दवा लेने में मदद करते हैं और इलाज के दौरान फॉलोअप बनाए रखते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों की जांच से जुड़े नमूने भी अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। इसके अलावा मरीज के परिवार के सदस्यों की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जरूरी जानकारी अपडेट करने जैसे काम भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं। केंद्र सरकार के टीबी कार्यक्रम में भी DOTS प्रोवाइडर्स को उपचार के दौरान मरीजों को सहयोग देने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रहा है।

    कोलार सीएससी से जुड़ी पुष्पा सिंह बघेल के अनुसार वह वर्ष 2023 से DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया था लेकिन मार्च 2025 से उन्हें भुगतान नहीं मिला है। पुष्पा का कहना है कि जब भी लंबित भुगतान को लेकर जानकारी ली जाती है तो बजट की कमी बताकर जल्द राशि जारी होने की बात कही जाती है। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण अब घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।

    एक अन्य महिला DOTS प्रोवाइडर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि बच्चों की फीस भरने में भी परेशानी हो रही है। घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा में किसी तरह की कमी नहीं की गई है लेकिन भुगतान नहीं मिलने से परिवार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    अशोका गार्डन क्षेत्र की पंजाबी बाग डिस्पेंसरी से जुड़ी दिव्या भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वह पढ़ाई के साथ DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक करीब एक साल से भुगतान नहीं मिला है। भोपाल जैसे शहर में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई करना और रोजमर्रा के खर्च संभालना पहले ही चुनौतीपूर्ण है। इसके साथ मरीजों के घर जाकर लगातार सेवा देने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से स्थिति और कठिन हो गई है।

    DOTS प्रोवाइडर्स का कहना है कि गर्मी हो या बारिश उन्होंने मरीजों की सेवा बंद नहीं की। वे घर घर जाकर दवाएं पहुंचाते रहे और मरीजों के इलाज का फॉलोअप करते रहे। उनका कहना है कि यदि कोई मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता है तो उसके घर से जरूरी नमूना लेकर जांच के लिए जमा कराने जैसे काम भी किए जाते हैं।

    लंबित भुगतान को लेकर DOTS प्रोवाइडर्स ने 3 अगस्त 2026 को राज्य क्षय अधिकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश को पत्र देकर प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की है। पत्र में करीब 10 से 11 महीने की राशि लंबित होने का उल्लेख किया गया है। प्रोवाइडर्स का कहना है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं।

    मध्यप्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और केंद्रीय टीबी डिवीजन के माध्यम से कार्यक्रम संचालित है। केंद्रीय टीबी डिवीजन की मध्यप्रदेश संबंधी आधिकारिक वेबसाइट पर भी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े दिशा निर्देश और संसाधन उपलब्ध हैं। अब DOTS प्रोवाइडर्स को उम्मीद है कि सरकार उनकी लंबित राशि का जल्द भुगतान करेगी ताकि मरीजों की सेवा करने वाले इन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी आर्थिक राहत मिल सके।

  • ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर हुई डील….अब अमेरिका पर सबकी नजर!

    ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर हुई डील….अब अमेरिका पर सबकी नजर!


    तेजरान।
    अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) द्वारा मिलकर ईरान (Iran) पर हमला किए जाने के बाद पश्चिम एशिया (West Asia) की राजनीति तेजी के साथ बदली है। कभी सभी के लिए खुला रहने वाला होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) आज केवल कुछ ही देशों के लिए चालू है। अब इस मामले पर एक अहम परिवर्तन हुआ है। होर्मुज के दोनों किनारों पर स्थित ईरान और ओमान ने इस समुद्री रास्ते को लेकर एक नया समझौता किया है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन ईरानी मीडिया के मुताबिक इस समझौते के तहत कुछ हद तक जानकारियां सामने आई हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों खाड़ी देशों के बीच हुए इस समझौते होर्मुज से निकलने वाले जहाजों की स्थिति के बारे में तय किया गया है। इसमें होर्मुज में बाहर से आने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान संभालेगा। वही, इनको नियंत्रित करेगा। दूसरी तरफ, ओमान होर्मुज से बाहर की तरफ जाने वाले जहाजों की देख रेख करेगा और उनकी नेविगेशन को संभालेगा।


    होर्मुज पर फीस लेंगे ओमान और ईरान?

    क्या अब यहां पर यह दोनों देश किसी तरह की फीस भी लेंगे? इसको लेकर खुले तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, ईरान, अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बाद लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि वह होर्मुज पर फीस लगाने वाला है। वह इसे फीस नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए दिया जाने वाला ‘सर्विस टैक्स’ करार देता है।


    शिपिंग लाइन बनाएंगे ओमान और ईरान

    आने-जाने वाले जहाजों को और अधिक सुविधा देने और टक्कर से बचाने के लिए ईरान और ओमान इस रास्ते पर शिपिंग लाइन का निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य जहाजों के बीच की टक्कर को रोकना होगा। दोनों देशों की तरफ से बताया गया कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य महीनों से उलझे होर्मुज स्ट्रेट के विवाद को शांत करना और ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई चैन को दोबारा से शुरू करना है। इस मामले पर अभी दोनों देश काम कर रहे हैं। तकनीकी चीजें साफ होने के बाद इस पर एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया जाएगा।


    अमेरिका पर निगाहें

    ओमान और ईरान किसी भी समझौते पर पहुंच जाएं। लेकिन फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट काम करेगा या नहीं यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका क्या ऐक्शन लेता है। वर्तमान में अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के बाहर नाकेबंदी करके बैठा हुआ है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति का एक बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि वह जल्दी ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी संपत्ति घोषित करने वाले हैं। इससे क्षेत्र में और भी ज्यादा तनाव बढ़ गया है।

    दरअसल, अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर युद्ध पूर्व की स्थिति बरकरार रहे और किसी भी देश के ऊपर कोई टैक्स न लगाया जाए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। क्योंकि तेहरान को इस समय लग रहा है कि वह जो भी शर्तें मनवाना चाहें, मनवा सकता है। दोनों तरफ से युद्ध में जीत के दावे की वजह से होर्मुज की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है।


    दुनिया के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट

    पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट शुरुआत से ही चर्चा का विषय रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि यह समुद्री रास्ता वैश्विक अनवीकरणीय ऊर्जा का करीब 20 फीसदी हिस्से की सप्लाई के लिए जिम्मेदार माना जाता है। खाड़ी देश इसी रास्ते से दुनिया भर को तेल और गैस की सप्लाई करते हैं। अब चूंकि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसी स्थिति में मामला बिगड़ गया है।

    जहाजों का बीमा महंगा हो गया है और अब कंपनियां हमलों के डर से इस रास्ते पर जाने से भी कतरा रही हैं। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा के दाम बढ़ रहे हैं।

  • सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम

    सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सुल्तानपुर, जौनपुर सहित अन्य आस-पास के जिलों में सरसों का दाम (Mustard price) प्रति क्विंटल 7000 रुपये से 7500 रुपये तक बिक रहा है। किसानों का उम्मीद है कि दाम 8000 रुपये तक भी जाएगा। वहीं, सरसों के तेल (Mustard oil) के फुटकर विक्रेता इस समय 220 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेच रहे हैं। महज एक महीने के अंदर ही कीमतों में यह तेजी देखने को मिली है।

    केंद्र सरकार (Central Government) के कंज्यूमर डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए रेट के अनुसार देशभर में औसतन आज सरसों का तेल 197.25 रुपये में बिक रहा है। एक महीना पहले यह 194.15 रुपये में बिक रहा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल यानी 15 अगस्त 2025 को सरसों के तेल का दाम 188.20 रुपये था। यानी कीमतों में उछाल साफ देखने को मिल रही है।


    देश के प्रमुख शहरों में क्या है सरसों का रेट

    – दिल्ली में 209 रुपये प्रति किलोग्राम
    – मुंबई में 231 रुपये प्रति किलोग्राम
    – चेन्नई में 247 रुपये प्रति किलोग्राम


    मूंगफली, पाम ऑयल की कीमतों में भी लगी आग

    सिर्फ सरसों ही नहीं, पाम ऑयल के दाम भी पिछले साल की तुलना में इस बार काफी बढ़ गया है। 15 अगस्त को पाम ऑयल का रेट 149.57 रुपये है। एक साल पहले दाम 130.24 रुपये था। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार कीमतों में 20 रुपये का इजाफा हुआ है। करीब 14% दाम बढ़ा है।

    सूरजमुखी के तेल का दाम पिछले साल की तुलना में इस बार 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बीते साल 15 अगस्त को दाम 159 रुपये था। आज यह 191.16 रुपये के स्तर पर है। मूंगफली की बात करें तो यहां भी कीमतों में तेज इजाफा देखने को मिल रहा है। इसका लेटेस्ट रेट 205.39 रुपये है। पिछले साल आज के दिन ही 185.62 रुपये दाम था। कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।


    दिल्ली में सब्जियों का क्या है रेट

    – आलू का दाम – 23 रुपये प्रति किलोग्राम
    – प्याज का दाम – 45 रुपये प्रति किलोग्राम
    – टमाटर का रेट – 45 रुपये प्रति किलोग्राम

  • भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता

    भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता


    भोपाल । भोपाल की पहचान बड़े तालाब और उसकी खूबसूरत लहरों से भी जुड़ी है और अब यही झील देश के उभरते हुए सेलिंग खिलाड़ियों के लिए बड़े मंच के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का समापन रविवार को भोपाल के बोट क्लब में होगा। सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल होंगे। प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

    11 से 16 अगस्त तक आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की रेस के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग तय की जाएगी। यह रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बेहतर रैंकिंग के आधार पर उन्हें आगे राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर मिल सकते हैं।

    चैंपियनशिप में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल यानी NSS ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। गोवा की टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला ने हिस्सा लिया। NSS भोपाल के खिलाड़ियों को मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा का मार्गदर्शन मिला।

    प्रतियोगिता के दौरान अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अलग-अलग वर्गों में नाविकों ने हवा की दिशा और गति के साथ तालमेल बैठाते हुए अपनी तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। सेलिंग में केवल गति ही निर्णायक नहीं होती बल्कि हवा को समझना नाव को सही दिशा में मोड़ना और बदलती परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी खिलाड़ी की सफलता में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह रही कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। भोपाल में राष्ट्रीय स्तर की सेलिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन पहले भी होता रहा है और बड़े तालाब को इस खेल के लिए अनुकूल माना जाता है।

    भोपाल धीरे-धीरे वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। शहर की प्राकृतिक झीलें सेलिंग के साथ रोइंग कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में की गई थी। यहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    अकादमी से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब तक अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक जीतने का दावा किया गया है। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। ऐसे में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आई है।

    समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों के सम्मान के साथ प्रतियोगिता की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। इसके साथ ही भोपाल की झीलों को वाटर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी नई मजबूती मिल सकती है। देशभर से आए खिलाड़ियों की भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भोपाल की झीलें सिर्फ शहर की खूबसूरती नहीं बल्कि खेल प्रतिभाओं को उड़ान देने वाला मजबूत मैदान भी बन सकती हैं।