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  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो का कमाल और गोंसालो रामोस का कहर; क्रोएशिया को रोमांचक मुकाबले में हराकर पुर्तगाल सेमीफाइनल में पहुंचा

    क्रिस्टियानो रोनाल्डो का कमाल और गोंसालो रामोस का कहर; क्रोएशिया को रोमांचक मुकाबले में हराकर पुर्तगाल सेमीफाइनल में पहुंचा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 से एक बेहद रोमांचक और दिल दहला देने वाला परिणाम सामने आया है, जहां पुर्तगाल ने एक कड़े मुकाबले में क्रोएशियाई टीम को शिकस्त देकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। पूरे मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन अंतिम क्षणों में पुर्तगाल के रणनीतिक खेल और आक्रामक रुख ने मैच का पासा पूरी तरह पलट दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पुर्तगाल ने क्रोएशिया का विश्व विजेता बनने का सपना आखिरी मिनटों में तोड़ दिया और अब खिताबी दौड़ के अगले चरण में उसका सामना मजबूत स्पेनिश टीम से होने जा रहा है।

    इस मुकाबले में पुर्तगाल के स्टार फॉरवर्ड क्रिस्टियानो रोनाल्डो और युवा सनसनी गोंसालो रामोस ने अपनी टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैच की शुरुआत से ही क्रोएशिया के मजबूत डिफेंस ने पुर्तगाली आक्रमण को रोकने की हरसंभव कोशिश की और ल्यूका मॉड्रिच के नेतृत्व में कुछ बेहतरीन काउंटर-अटैक भी किए। खेल के अधिकांश समय दोनों टीमें एक-दूसरे पर बढ़त बनाने के लिए संघर्ष करती रहीं और मुकाबला बराबरी पर चलता रहा। मैदान पर मौजूद दर्शकों को एक बेहद कड़ा और रक्षात्मक खेल देखने को मिल रहा था, जहां कोई भी टीम गलती करने को तैयार नहीं थी।

    मैच के अंतिम मिनटों में पुर्तगाल ने अपने आक्रमण को और तेज किया, जिसका नेतृत्व स्वयं क्रिस्टियानो रोनाल्डो कर रहे थे। रोनाल्डो के बेहतरीन पासिंग गेम और मैदान पर उनकी जादुई उपस्थिति ने क्रोएशियाई रक्षकों पर भारी दबाव बना दिया। इसी दबाव का फायदा उठाते हुए गोंसालो रामोस ने विपक्षी टीम के खेमे में तहलका मचा दिया और अंतिम सीटी बजने से ठीक पहले एक शानदार मैदानी गोल दागकर अपनी टीम को निर्णायक बढ़त दिला दी। क्रोएशिया की टीम इस अप्रत्याशित गोल के बाद संभलने का मौका भी नहीं पा सकी और निर्धारित समय समाप्त होने के साथ ही मुकाबला पुर्तगाल के पक्ष में चला गया।

    क्रोएशियाई टीम के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही, क्योंकि उनके अनुभवी खिलाड़ियों ने मैच को अतिरिक्त समय में खींचने और पेनल्टी शूटआउट तक ले जाने की पूरी रणनीति बना ली थी। अंतिम पलों में रक्षापंक्ति की एक छोटी सी चूक ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। इस जीत के साथ ही पुर्तगाल ने टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। अब फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें पुर्तगाल और स्पेन के बीच होने वाले महामुकाबले पर टिक गई हैं, जिसे इस विश्व कप का सबसे बड़ा और कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • गरुड़ पुराण के पन्नों में छिपा है आपके अगले जन्म का रहस्य; जीवित रहते किए गए कर्म ही तय करते हैं मनुष्य, पशु या पक्षी का शरीर

    गरुड़ पुराण के पन्नों में छिपा है आपके अगले जन्म का रहस्य; जीवित रहते किए गए कर्म ही तय करते हैं मनुष्य, पशु या पक्षी का शरीर

    नई दिल्ली । सनातन धर्म के अठारह पुराणों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण महाग्रंथ गरुड़ पुराण में मनुष्य के जीवन, मृत्यु और उसके पश्चात मिलने वाले अगले जन्म को लेकर कई गूढ़ और चौंकाने वाले तथ्यों का विश्लेषण किया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार, मृत्यु के बाद किसी जीव को कौन सा शरीर प्राप्त होगा, यह कोई आकस्मिक घटना या भाग्य का खेल नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से मनुष्य द्वारा अपने वर्तमान जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के लेखा-जोखा पर निर्भर करता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि मनुष्य अपने जीवित रहते ही अपने अगले जन्म की पृष्ठभूमि तैयार कर लेता है और उसके वर्तमान कर्म ही यह सुनिश्चित करते हैं कि वह पुनः मानव योनि में आएगा या किसी पशु-पक्षी के रूप में धरती पर जन्म लेगा।

    धार्मिक ग्रंथ के प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुसार, जो व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवनकाल में सदाचार का पालन करते हैं, निस्वार्थ भाव से दीन-दुखियों की सहायता करते हैं और धर्म के मार्ग से कभी विचलित नहीं होते, उन्हें मृत्यु के उपरांत पुनः मनुष्य जीवन का उपहार मिलता है। ऐसी पुण्यात्माओं को अगले जन्म में संस्कारी, समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवारों में जन्म लेने का सुअवसर प्राप्त होता है, जहां उन्हें समाज में उचित मान-सम्मान और तमाम भौतिक सुख-सुविधाएं सुलभ होती हैं। इसके विपरीत, जो लोग जीवन भर केवल लोभ, मोह, छल-कपट, चोरी और दूसरों को प्रताड़ित करने जैसे कृत्य में संलिप्त रहते हैं, उनका अगला जीवन अत्यंत कष्टदायी और दयनीय हो जाता है। ऐसे नकारात्मक आचरण वाले व्यक्तियों को मानव चोले से वंचित होकर विभिन्न पशु-पक्षियों की निकृष्ट योनियों में भटकना पड़ता है।

    गरुड़ पुराण में विभिन्न प्रकार के विशिष्ट अपराधों और पापों के आधार पर मिलने वाले विशिष्ट जन्मों और उनके दंड का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। ग्रंथ के अनुसार, जो मनुष्य जीवन भर दूसरों के अन्न की चोरी करता है अथवा छल से किसी के धन को हड़पता है, वह अपने अगले जन्म में चूहा या नेवला बनता है। इसी प्रकार, जो लोग समाज में पूजनीय अपने माता-पिता, गुरुजनों अथवा वयोवृद्ध बुजुर्गों का अनादर और अपमान करते हैं, उन्हें अगले जन्म में कौआ या कोई ऐसा अप्रिय पक्षी बनना पड़ता है जिसे मानव समाज सहज रूप से देखना पसंद नहीं करता। इसके अतिरिक्त, पराई महिलाओं पर कुदृष्टि रखने वाले और अपनों के साथ विश्वासघात करने वाले पुरुषों के लिए गरुड़ पुराण में कठोरतम दंड का प्रावधान है; ऐसे लोग अगले जन्म में भयानक अजगर या रेंगने वाले विषैले जीवों के रूप में धरती पर आते हैं।

    आलस्य और अकर्मण्यता को भी सनातन व्यवस्था में एक बड़ा दोष माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग पूर्णतः आलसी होते हैं और स्वयं पुरुषार्थ न करके केवल दूसरों की गाढ़ी कमाई पर ऐश करते हैं, वे अगले जन्म में गधा या बैल के रूप में जन्म लेते हैं ताकि वे प्रकृति के नियम के तहत कठिन शारीरिक श्रम का वास्तविक महत्व समझ सकें। इसी क्रम में, जो लोग समाज में अपने ऊंचे पद, सत्ता और बाहुबल के घमंड में चूर होकर असहाय एवं कमजोर वर्गों पर अत्याचार करते हैं, उन्हें अगले जन्म में हिंसक प्रवृत्ति के पशुओं जैसे शेर या भेड़िए का शरीर प्राप्त होता है, जहां उन्हें स्वयं के अस्तित्व की रक्षा और भोजन के लिए दर-दर भटकना पड़ता है और निरंतर संघर्ष करना पड़ता है।

    मूलतः, गरुड़ पुराण यह दार्शनिक संदेश देता है कि संपूर्ण प्रकृति हर जीव को उसके मूल स्वभाव और आचरण के अनुरूप ही अगला भौतिक शरीर प्रदान करती है। यदि किसी व्यक्ति का आंतरिक स्वभाव हिंसक, क्रूर और तामसी है, तो उसे स्वाभाविक रूप से जानवर का शरीर मिलता है, और यदि वह भीतर से शांत, करुणामयी तथा परोपकारी है, तो वह पुनः मनुष्य का श्रेष्ठ जीवन प्राप्त करता है। यह आध्यात्मिक व्यवस्था मानव को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि उसके वर्तमान आचरण में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रतिपादित की गई है। गरुड़ पुराण का परम संदेश यही है कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभता से मिलता है, इसलिए सांसारिक नफरत और लोभ को त्यागकर प्रेम, दया और धर्म का मार्ग अपनाना चाहिए क्योंकि मृत्यु के बाद केवल कर्म ही जीव के साथ जाते हैं।

  • जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    जब अजेय बजरंगबली की शक्ति भी पड़ गई थी कम; जानिए उन तीन महायोद्धाओं की गाथा जिनके सामने वीर हनुमान को स्वीकार करनी पड़ी थी हार

    नई दिल्ली । सनातन धर्म और पौराणिक ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान जी को असीम बल, बुद्धि और अजेय शक्ति का प्रतीक माना गया है। रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक उनके पराक्रम की अनगिनत गाथाएं प्रचलित हैं, जहां बड़े से बड़े मायावी राक्षस और योद्धा उनके सामने टिक नहीं सके। लेकिन धार्मिक इतिहास में कुछ ऐसे अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट प्रसंगों का भी वर्णन मिलता है, जब अप्रतिहत शक्तियों के स्वामी बजरंगबली को भी विशेष परिस्थितियों के कारण झुकना पड़ा या अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी। पौराणिक वृत्तांतों के अनुसार, ऐसे तीन प्रमुख अवसर आए जब हनुमान जी की शक्ति भी काम नहीं आई और उन्हें पराजय का वधु स्वीकार करना पड़ा।

    ऐसी ही पहली घटना महान संत और सिद्ध तपस्वी मच्छिंद्रनाथ जी से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार मच्छिंद्रनाथ जी भगवान श्रीराम की भक्ति में पूरी तरह लीन होकर रामेश्वरम के समीप समुद्र में स्नान कर रहे थे। उसी समय वहां मौजूद हनुमान जी ने एक साधारण वानर का रूप धारण कर उनकी परीक्षा लेने का विचार किया। हनुमान जी ने अपनी मायावी शक्ति से वहां मूसलाधार बारिश शुरू कर दी और स्वयं को बचाने के लिए एक कृत्रिम गुफा बनाने का उपक्रम करने लगे। जब मच्छिंद्रनाथ जी ने उन्हें इस कृत्य पर टोकते हुए ज्ञान दिया, तो हनुमान जी ने उनकी आध्यात्मिक क्षमता पर प्रश्न उठाते हुए उन्हें युद्ध की सीधी चुनौती दे दी। इसके बाद दोनों के मध्य एक भीषण युद्ध छिड़ गया, परंतु मच्छिंद्रनाथ जी की मंत्र शक्ति और योग बल के सामने हनुमान जी का प्रत्येक प्रहार निष्फल साबित हुआ। अंततः वायुदेव के हस्तक्षेप के बाद इस युद्ध को विराम दिया गया और हनुमान जी ने सहर्ष अपनी हार स्वीकार की।

    द्वितीय प्रसंग रामायण काल के सबसे विनाशकारी युद्ध के दौरान का है, जो रावण के परम पराक्रमी पुत्र मेघनाद यानी इंद्रजीत से संबद्ध है। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी ने जब अशोक वाटिका को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और रावण के छोटे पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया, तब लंकाधिपति ने क्रोधित होकर मेघनाद को रणभूमि में भेजा। युद्ध क्षेत्र में जब मेघनाद के सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्र हनुमान जी के सामने विफल हो गए, तब उसने अत्यंत विवश होकर पवनपुत्र पर सीधे ब्रह्मास्त्र का संधान कर दिया। यद्यपि हनुमान जी को स्वयं ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त था कि कोई भी अस्त्र उनका अनिष्ट नहीं कर सकता, परंतु सृष्टि के रचयिता और ब्रह्मास्त्र की मर्यादा एवं मान रखने के लिए हनुमान जी ने स्वेच्छा से स्वयं को उस बंधन में बंधने दिया। तकनीकी दृष्टिकोण से इस प्रसंग में मेघनाद हनुमान जी की गति को रोकने और उन्हें बंदी बनाने में सफल रहा था।

    तृतीय और सर्वाधिक भावुक कर देने वाला वृत्तांत भगवान श्रीराम के आत्मज लव और कुश से जुड़ा हुआ है। लंका विजय के पश्चात जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया, तो यज्ञ का अश्व देश के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण कर रहा था। इसी दौरान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास कर रहे बालक लव और कुश ने उस अश्व को बंदी बना लिया। अश्व को मुक्त कराने हेतु जब श्रीराम की चतुरंगिणी सेना वहां पहुंची, तो दोनों बालकों के अभूतपूर्व युद्ध कौशल के सम्मुख लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे महारथी भी परास्त हो गए। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख स्वयं हनुमान जी, भरत और सुग्रीव के साथ युद्ध के मैदान में उतरे।

    रणभूमि में जब हनुमान जी ने इन दो अत्यंत छोटे बालकों के अलौकिक शौर्य और पराक्रम को देखा, तो वे विस्मय में पड़ गए। वास्तविकता का पता लगाने के लिए जब उन्होंने नेत्र बंद कर ध्यान लगाया, तो उन्हें तुरंत यह बोध हो गया कि ये दोनों बालक कोई साधारण क्षत्रिय नहीं, बल्कि उनके आराध्य प्रभु श्रीराम और माता सीता के ही अंश हैं। इस सत्य से अवगत होने के पश्चात हनुमान जी के लिए अपने ही स्वामी की संतानों पर अस्त्र उठाना सर्वथा असंभव हो गया। उन्होंने तुरंत युद्ध न करने का नीतिगत निर्णय लिया और अस्त्र त्याग कर शांत खड़े हो गए। इसके बाद लव और कुश ने उन पर निरंतर कई तीखे प्रहार किए, किंतु हनुमान जी ने बिना किसी प्रतिरोध या पलटवार के सब कुछ अत्यंत शांत भाव से सहन किया और प्रेम पूर्वक अपनी पराजय स्वीकार कर ली।

  • 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त के जीवन में एक दौर ऐसा भी था, जब वे अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं और गंभीर कानूनी लड़ाइयों के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। साल 2003 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ की शूटिंग के दौरान सेट पर बने रहने के लिए उन्हें जिस मानसिक और शारीरिक संघर्ष से गुजरना पड़ा, उसका एक बेहद भावुक और अनसुना पहलू अब सामने आया है। फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सह-कलाकार और अनुभवी अभिनेता यतिन कार्येकर ने हाल ही में उस दौर की परिस्थितियों को याद करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

    यतिन कार्येकर ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान संजय दत्त आर्म्स एक्ट मामले और टाडा अदालत की सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे थे। स्थिति इतनी अनिश्चित थी कि सेट पर काम करते समय भी अभिनेता का पूरा ध्यान अपनी अदालती तारीखों और कानूनी मामलों पर लगा रहता था। सेट पर मौजूद हर व्यक्ति इस बात से वाकिफ था कि संजय दत्त किस भारी मानसिक दबाव और तनाव के साए में कैमरे के सामने अभिनय कर रहे थे।

    शूटिंग के दिनों के माहौल को साझा करते हुए कार्येकर ने बताया कि अक्सर सेट पर अचानक एक फोन कॉल आता था और उसे सुनते ही संजय दत्त बिना किसी से कुछ कहे या बिना कोई औपचारिकता निभाए चुपचाप सेट छोड़कर चले जाते थे। उन्हें अचानक अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए तुरंत रवाना होना पड़ता था। ऐसे अनपेक्षित घटनाक्रमों के कारण फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी को कई बार भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    संजय दत्त के अचानक चले जाने के बाद निर्देशक को पूरी स्थिति को संभालने के लिए तुरंत अपने पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल में बदलाव करने पड़ते थे। निर्देशक हिरानी को अक्सर उन दृश्यों या शॉट्स को पूरी तरह बदलना पड़ता था, जिनमें संजय दत्त की मौजूदगी अनिवार्य थी। अभिनेता की अनुपस्थिति के कारण सेट पर मौजूद अन्य कलाकारों के साथ अलग दृश्यों की योजना बनाई जाती थी ताकि शूटिंग का कीमती समय बर्बाद न हो और काम सुचारू रूप से चलता रहे।

    इस भारी व्यक्तिगत संकट और कानूनी दबाव के बावजूद संजय दत्त ने कभी भी अपने काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। जब भी वे अदालत की कार्यवाही से लौटकर वापस सेट पर आते थे, तो वे पूरी तरह से अपने किरदार ‘मुन्ना भाई’ में ढल जाते थे। कार्येकर के अनुसार, संजय दत्त की यह क्षमता अद्भुत थी कि वे इतनी बड़ी मानसिक उथल-पुथल के बीच भी कैमरे के सामने आते ही अपने सारे गम और तनाव भूलकर एक जीवंत प्रदर्शन देने में सफल रहते थे।

    फिल्म के क्रू और साथी कलाकारों ने भी उस कठिन समय में संजय दत्त का भरपूर सहयोग किया। सेट पर मौजूद सभी लोग अभिनेता की बेबसी और उनकी पारिवारिक परिस्थितियों को गहराई से समझते थे। उनके पिता सुनील दत्त भी उस समय बेटे को इस संकट से निकालने के लिए हर संभव कानूनी और नैतिक प्रयास कर रहे थे। यही कारण था कि पूरी टीम ने बिना किसी शिकायत के हर विपरीत परिस्थिति में निर्देशक और अभिनेता के साथ तालमेल बिठाया।

    ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ न केवल संजय दत्त के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई, बल्कि इसने उनके गिरते हुए करियर को एक नई संजीवनी भी प्रदान की थी। आज सालों बाद जब सेट के ये वाकये सामने आ रहे हैं, तो यह साफ होता है कि पर्दे पर दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने वाले ‘मुन्ना भाई’ के पीछे एक अभिनेता का कितना बड़ा व्यक्तिगत दर्द और अदालती संघर्ष छिपा हुआ था, जिसने भारतीय सिनेमा इतिहास की एक कालजयी फिल्म को आकार दिया।

  • मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी

    मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी


    मध्‍य प्रदेश आज के समय में शिक्षा केवल परीक्षा में अधिक अंक लाने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बदलते दौर में सफलता का असली आधार ज्ञान के साथ कौशल और व्यक्तित्व विकास बन चुका है। ऐसे समय में सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर और सेज ग्रुप के सीएमडी डॉ संजीव अग्रवाल ने अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा है कि बच्चों को केवल नंबरों की दौड़ में उलझाने के बजाय उनकी प्रतिभा और स्किल्स को विकसित करने पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में वही युवा सबसे आगे होंगे जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान नई सोच और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होगी।

    डॉ संजीव अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना होना चाहिए जो आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जहां छात्र सिर्फ नौकरी पाने की तैयारी न करें बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के विकास में योगदान दें।

    उन्होंने बताया कि सेज यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यदि कोई छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित नहीं होता तो केवल सूचना देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जाती बल्कि शिक्षक स्वयं उसके घर तक पहुंचते हैं और उसकी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। संस्थान का उद्देश्य हर छात्र को शिक्षा से जोड़कर रखना और उसकी क्षमता को सही दिशा देना है।

    डॉ अग्रवाल के अनुसार आज की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। इसलिए विश्वविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों को भी छात्रों से संवाद के लिए बुलाया जाता है। कैंपस में स्टार्टअप कॉन्क्लेव करियर डे और विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि विद्यार्थी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें और अपने करियर की बेहतर तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने व्यावहारिक सोच विकसित करने और नई परिस्थितियों में स्वयं निर्णय लेने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा का स्वरूप काफी अलग था। उस समय शिक्षक केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देते थे लेकिन अब समय बदल चुका है। आज सफल होने के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स लीडरशिप टीमवर्क और तकनीकी दक्षता जैसी क्षमताएं भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके समय में भी कम अंक आने का डर रहता था लेकिन आज कई अभिभावक बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल देते हैं जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है और वे अपनी वास्तविक प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते।

    युवाओं के लिए उनका संदेश भी स्पष्ट है कि सफलता मेहनत धैर्य और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से मिलती है। यदि किसी प्रयास में तुरंत सफलता न मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसे अनुभव मानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत करने वाले लोगों के लिए अवसर जरूर बनते हैं और ईमानदारी के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

    डॉ संजीव अग्रवाल का मानना है कि भारत का भविष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था में छिपा है जो बच्चों को केवल अच्छे अंक नहीं बल्कि बेहतर इंसान जिम्मेदार नागरिक और सफल पेशेवर बनने की प्रेरणा दे। जब शिक्षा में स्किल्स नवाचार और नैतिक मूल्यों को बराबर महत्व मिलेगा तभी देश की युवा शक्ति वास्तव में राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बन सकेगी।

  • सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी

    सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी यानी एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित की गई है जबकि भर्ती परीक्षा 2 अगस्त से आयोजित होगी। यह भर्ती समूह 2 उप समूह 1 के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना जरूरी होगा ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    भर्ती प्रक्रिया में राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू रहेगी। अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग को 16 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। कुल 73 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था के अनुसार परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि ओबीसी आरक्षण न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

    कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

    परीक्षा में आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा। पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कर्मचारी चयन मंडल ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

    परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन स्मार्ट वॉच कैलकुलेटर ब्लूटूथ डिवाइस या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    भर्ती के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है उन्हें भी आवेदन की अनुमति नहीं होगी। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष अभ्यर्थी भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती सुनहरा अवसर है। समय पर आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप देना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकता है।

  • दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर

    दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आधार जातीय समीकरण माना जा रहा है क्योंकि यहां किसी एक वर्ग के भरोसे जीत हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओबीसी ब्राह्मण अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही चुनावी परिणाम तय करेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का है। अनुमानित तौर पर करीब 95 हजार ओबीसी मतदाता हैं जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं। इस वर्ग में यादव कुशवाहा काछी लोधी बघेल पाल समेत कई प्रभावशाली समुदाय शामिल हैं। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर सबसे अधिक जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ओबीसी मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं तो मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।

    जातीय समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज भी सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं। दोनों समुदायों की अनुमानित संख्या करीब 33 33 हजार बताई जाती है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है जबकि अनुसूचित जाति विशेषकर अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुझान इस उपचुनाव का सबसे अहम फैक्टर बन सकता है।

    सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 60 हजार बताई जा रही है। इसमें ब्राह्मणों के अलावा बनिया राजपूत कायस्थ और सिंधी समाज की अच्छी भागीदारी है। यदि सामान्य वर्ग किसी एक दल के समर्थन में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खटीक वाल्मीकि कोरी और जाटव समाज कई बूथों पर जीत हार का अंतर तय करने की क्षमता रखते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भले लगभग आठ हजार है लेकिन करीबी मुकाबले में उनका समर्थन भी बेहद अहम साबित हो सकता है।

    कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी है और अब वह अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं। वहीं वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया था इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है जिससे कांग्रेस में मुकाबला और रोचक हो गया है।

    दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है जबकि आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 7742 मतों से हराया था इसलिए इस बार का उपचुनाव भी बेहद कांटे का माना जा रहा है। सभी दल जातीय संतुलन संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी जीत का समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।

  • ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर

    ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर


    भोपाल  भोपाल में ई रिक्शा चालकों के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शहर के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस से छेड़छाड़ की जा रही है जिसके कारण चलते वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। इससे न केवल चालकों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सवारियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा जबकि चालकों को वाहन धक्का देकर ले जाना पड़ा।

    बुधवारा निवासी ई रिक्शा चालक तनवीर मोहम्मद खान ने बताया कि वीआईपी रोड पर बच्चों को लेकर जा रहे थे तभी उनका वाहन अचानक बंद हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी रिक्शा चालू नहीं हुआ और आखिरकार उसे धक्का देकर ले जाना पड़ा। बाद में सिस्टम अनलॉक कराने के लिए उनसे 200 रुपए भी लिए गए। तनवीर का कहना है कि एक ही दिन में उनका ई रिक्शा चार बार बंद हुआ जिससे पूरे दिन की कमाई लगभग खत्म हो गई। उनका कहना है कि हर महीने लगभग आठ हजार रुपए की बैंक किस्त भरनी होती है लेकिन जब वाहन ही नहीं चलेगा तो किस्त कैसे चुकाई जाएगी।

    इसी तरह रेतघाट क्षेत्र के चालक फरान मोहम्मद खान ने भी बताया कि सवारी छोड़ने के बाद उनका ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने मुख्य एमसीबी बंद कर दोबारा चालू करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए वाहन चल पड़ा लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बंद हो गया। बाद में तकनीकी सहायता मिलने के बाद ही वाहन दोबारा चालू हो सका। फरान के अनुसार दिन में कई बार और रात के समय भी यह समस्या सामने आ रही है जिससे काम करना बेहद मुश्किल हो गया है।

    चालकों का दावा है कि यह समस्या केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा प्रभावित हुए हैं। मैकेनिकों की दुकानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी है वे किसी तरह सिस्टम को अनलॉक कर लेते हैं जबकि बाकी चालक घंटों तक परेशान होते रहते हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध BAT BMS नाम का एक ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से आसपास मौजूद कुछ ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोज सकता है। यदि किसी वाहन का सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा या पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े कुछ नियंत्रण विकल्प सामने आ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों में इसी ऐप का दुरुपयोग हुआ है या नहीं लेकिन इस संभावना को गंभीरता से जांचा जा रहा है।

    पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित ई रिक्शा मॉडलों में सुरक्षा संबंधी कौन सी तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं और उनका किस तरह गलत इस्तेमाल किया गया। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो यह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में ई रिक्शा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बीएमएस सिस्टम विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि चालकों की आजीविका और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

  • आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय

    आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी को लेकर चल रही सभी अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। अभिनेता ने खुद पुष्टि की है कि वह 5 जुलाई को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। 61 वर्ष की उम्र में आमिर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे हैं और इस खास मौके को उन्होंने पूरी तरह निजी रखने का फैसला किया है। शादी में केवल परिवार के सदस्य और कुछ बेहद करीबी दोस्त ही शामिल होंगे। अभिनेता ने इस मौके पर अपने प्रशंसकों से भी प्यार और आशीर्वाद की अपील की है ताकि उनके जीवन का नया सफर खुशियों से भरा रहे।

    आमिर खान हाल ही में अपने बेटे जुनैद खान के साथ एक कार्यक्रम में पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया से खुलकर अपनी शादी को लेकर बातचीत की। सबसे दिलचस्प पल तब देखने को मिला जब आमिर अपनी शादी की जानकारी साझा कर रहे थे और उनके बगल में बैठे जुनैद खान मुस्कुराते हुए नजर आए। पिता की बात सुनकर उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस दौरान आमिर ने बताया कि शादी किसी आलीशान होटल या बड़े वेडिंग वेन्यू पर नहीं बल्कि उनके घर पर ही होगी। उन्होंने कहा कि यह एक छोटा और पारिवारिक समारोह होगा जिसमें केवल अपने लोग शामिल होंगे।

    अभिनेता ने स्पष्ट किया कि वह किसी भव्य रिसेप्शन या करोड़ों रुपये के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता सादगी और पारिवारिक माहौल है। आमिर का कहना है कि जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर को वह शोर शराबे के बजाय अपनों के साथ शांत और यादगार तरीके से मनाना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सभी से दुआएं मांगते हुए कहा कि उनकी और गौरी की नई जिंदगी खुशियों और विश्वास से भरी रहे।

    आमिर खान की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा में रही है। उनकी पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी जिनसे उन्हें दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद आमिर ने फिल्म निर्माता किरण राव से दूसरी शादी की। इस रिश्ते से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ। हालांकि वर्ष 2021 में आमिर और किरण ने भी अलग होने का फैसला किया लेकिन दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं और बेटे की परवरिश मिलकर कर रहे हैं।

    अब आमिर खान गौरी स्प्रैट के साथ अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से दोनों के रिश्ते की चर्चा लगातार हो रही थी लेकिन अभिनेता ने हमेशा इस रिश्ते को निजी रखा। अब शादी की आधिकारिक पुष्टि के बाद उनके प्रशंसकों में उत्साह बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें लगातार शुभकामनाएं दे रहे हैं और नई जिंदगी के लिए ढेर सारी बधाइयां भेज रहे हैं।

    आमिर खान का यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि जीवन में नई शुरुआत के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। अपने परिवार के समर्थन और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में वह 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट का हाथ थामकर एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। अब सभी की नजरें इस निजी लेकिन बेहद चर्चित शादी पर टिकी हुई हैं।