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  • बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट

    बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सामाजिक, कृषि, सांस्कृतिक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक की शुरुआत वंदेमातरम गान के साथ हुई। कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप ने फैसलों की जानकारी मीडिया को दी।

    कैबिनेट में तय किया गया कि बालाघाट जिले में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही तारीख तय की जाएगी। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि बालाघाट के नक्सल मुक्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यहां होने वाली कृषि कैबिनेट में जिले के समग्र विकास, कृषि, किसानों और स्थानीय जरूरतों को लेकर अहम फैसले लिए जाएंगे।

    प्रदेश सरकार ने जू में रेस्क्यू सेंटर बनाने का भी बड़ा निर्णय लिया है। इस रेस्क्यू सेंटर में घायल और बीमार वन्य जीवों का इलाज किया जाएगा। इससे वन्य जीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। सामाजिक स्तर पर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डॉ. मोहन यादव सरकार ने तलाकशुदा पुत्री को भी पेंशन देने का निर्णय लिया है। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि यह प्रावधान पहली बार किया गया है। इसके तहत पारिवारिक पेंशन में विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही 2005 की नई पेंशन योजना को लेकर भी निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत 2026 में नए नियम बनाए गए हैं।

    संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 मार्च को गुड़ी पड़वा पर्व सरकारी स्तर पर मनाने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पहचान मिलेगी।विकास योजनाओं की बात करें तो धरती आवा कार्यक्रम के तहत 63 हजार आदिवासी घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 366 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।

    कैबिनेट ब्रीफिंग में यह भी जानकारी दी गई कि 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा। यह बजट संतुलित और विकासोन्मुख होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रदेश ने उपलब्धि हासिल की है। नेशनल हेल्थ इंडेक्स में मध्य प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 हो गई है, जिसे सरकार ने बड़ी सफलता बताया है।कुल मिलाकर डॉ. मोहन यादव सरकार के ये फैसले सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक सम्मान, विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

    ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

     
    ग्वालियर । में रेबीज ने हड़कंप मचा दिया है। महज पांच दिनों में तीन लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले के छह वर्षीय मासूम हंस प्रजापति का है। बच्चे को डॉग बाइट के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए गए थे लेकिन इसके बावजूद वह बीमारी की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि प्रशासन के आवारा कुत्तों को लेकर दावों की भी पोल खोलती है।

    मासूम हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने बताया कि जिस दिन उनके बेटे को कुत्ते ने काटा उसी दिन डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू करवा दिया गया। पहले इंजेक्शन 13 जनवरी को, दूसरा 16 जनवरी को और तीसरा 21 जनवरी को लगाया गया। चौथा डोज 10 फरवरी को लगना था लेकिन बीते शुक्रवार से बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चा अचानक चौंकने लगा, हवा और पानी से डरने लगा। परिजन उसे तत्काल कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे दतिया ले जाया गया जहां शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई।

    इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और वैक्सीन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यही है कि जब पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीखों पर सभी इंजेक्शन लगाए गए, तो फिर रेबीज कैसे हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज के बाद रेबीज होना बेहद दुर्लभ है। यह घटना rare to rarest category में आती है और इसकी जांच बहुस्तरीय होनी चाहिए।

    ग्वालियर में सामान्य रूप से सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने पहले ही लोगों को भयभीत किया हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी अब जानलेवा साबित हो रही है। न्यू जयारोग्य चिकित्सालय में बीते पांच दिनों में रेबीज से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें एक ग्वालियर का, दूसरा टीकमगढ़ का और सबसे गंभीर मामला दतिया जिले के छह वर्षीय हंस प्रजापति का है।

    जयारोग्य चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों में डॉग बाइट के शिकार तीन लोगों की मौत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चे की मौत को लेकर जांच बहुस्तरीय होगी जिसमें इलाज की प्रक्रिया, देखरेख और वैक्सीन की गुणवत्ता की भी समीक्षा शामिल होगी।

    इस घटना ने लोगों के बीच डर बढ़ा दिया है। हवा, पानी और कुत्तों से लगने वाले जोखिम को लेकर परिजन और आम जनता चिंतित हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को अब न केवल आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेना होगा बल्कि रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति, गुणवत्ता और समय पर इलाज सुनिश्चित करना होगा।

  • वेलेंटाइन डे पर पार्टनर के साथ रोड ट्रिप के लिए ये जगहें हैं परफेक्ट

    वेलेंटाइन डे पर पार्टनर के साथ रोड ट्रिप के लिए ये जगहें हैं परफेक्ट


    नई दिल्ली । वेलेंटाइन डे का नाम आते ही अक्सर हमारे मन में किसी महंगे होटल या कैंडल लाइट डिनर का ख्याल आता है, लेकिन प्यार का असली आनंद तो साथ बिताए गए उन लम्हों में है, जहां शोर कम और सुकून ज्यादा हो. इस 14 फरवरी अगर आप अपनी पार्टनर के साथ भीड़भाड़ से दूर कुछ अलग प्लान करना चाहते हैं, तो रोड ट्रिप से बेहतर कुछ नहीं हो सकता.भारत में कई ऐसे ड्राइविंग रूट्स हैं जहां खिड़की के बाहर बदलते नजारे, हल्का संगीत और पार्टनर का साथ आपके सफर को किसी फिल्म के रोमांटिक सीन जैसा बना देगा. तो चलिए जानते हैं उन खूबसूरत रास्तों के बारे में जहां मंजिल की जल्दबाजी नहीं, बल्कि रास्तों की खूबसूरती आपके प्यार को एक नया अहसास देगी.

    पहाड़ों की ठंडी हवाओं में घुलेगा रोमांस

    उत्तर भारत के जोड़ों के लिए हिमालय की गोद में बसी वादियां हमेशा से पहली पसंद रही हैं. दिल्ली से मनाली का सफर हो या मसूरी की धुंध भरी सुबह, इन रास्तों पर बर्फ से ढके पहाड़ और देवदार के पेड़ों के बीच से गुजरना एक जादुई अनुभव होता है. इसके अलावा, दिल्ली से कसौली की घुमावदार सड़कें शिवालिक पहाड़ियों के ऐसे नजारे पेश करती हैं जो आपके सफर को यादगार बना देते हैं. यही नहीं, मसूरी के लाल टिब्बा पर साथ में सूर्यास्त देखना हो या सोलंग वैली की बर्फीली वादियों में हाथ थामकर चलना, पहाड़ों की यह शांति आपके बीच की बातचीत को और भी गहरा और अर्थपूर्ण बना देती है.

    राजस्थान की सड़कों पर महसूस करें शाही अंदाज

    अगर आप अपने वेलेंटाइन को थोड़ा राजसी और ऐतिहासिक रंग देना चाहते हैं, तो राजस्थान की सड़कें आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. जयपुर से उदयपुर की ड्राइव आपको किलों और महलों के बीच से ले जाती है, जहां पहुंचकर पिछोला झील के किनारे शाही डिनर का लुत्फ उठाया जा सकता है. उदयपुर को ‘सिटी ऑफ लेक्स’ के साथ-साथ प्रेम का शहर भी कहा जाता है, जो जोड़ों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है. इसके अलावा, अगर आपको रेगिस्तान की खामोशी पसंद है, तो जैसलमेर के सुनहरे रेत के टीलों पर पार्टनर के साथ डूबते सूरज को देखना एक ऐसा अहसास है जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

    दक्षिण भारत के कॉफी बागानों और समंदर का साथ

    प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश करने वाले कपल्स के लिए दक्षिण भारत के रास्ते किसी जन्नत से कम नहीं हैं. बेंगलुरु से कूर्ग की ड्राइव आपको भारत के ‘स्कॉटलैंड’ तक ले जाती है, जहां कॉफी के बागानों की खुशबू और चारों तरफ फैली हरियाली आपके मन को तरोताजा कर देती है. इसके अलावा, कोच्चि से मुन्नार का रास्ता चाय के बागानों और खूबसूरत झरनों से होकर गुजरता है, जो सफर को बेहद रोमांटिक बना देता है. यही नहीं, चेन्नई से पांडिचेरी का ईस्ट कोस्ट रोड एक तरफ नीला समंदर और दूसरी तरफ खुली सड़क का ऐसा मेल कराता है, जहां गाड़ी चलाना अपने आप में एक उत्सव बन जाता है.

    बीच वाइब्स और लॉन्ग ड्राइव का बेजोड़ मेल

    एडवेंचर और मस्ती पसंद करने वाले जोड़ों के लिए पश्चिम भारत की सड़कें सबसे रोमांचक विकल्प पेश करती हैं. मुंबई से गोवा का सफर उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो आजादी और पार्टी वाइब्स को प्यार के साथ जोड़ना चाहते हैं. यहां के नारियल के पेड़ों से घिरी सड़कें और समंदर किनारे के कैफे आपके वेलेंटाइन को जोश से भर देते हैं. इसके अलावा, अगर आपके पास समय कम है, तो मुंबई से लोनावला की छोटी सी ड्राइव भी एक परफेक्ट रोमांटिक गेटअवे साबित हो सकती है. लोनावला की हरी-भरी वादियां और रास्ते में मिलने वाले छोटे-छोटे झरने आपके सफर में प्यार की मिठास घोलने के लिए काफी हैं.

  • ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    गुना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां स्थानीय और देशभर के हस्तशिल्पियों के लिए हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कारीगरों की आमदनी बढ़ाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाना है।

    कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित और विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी मौजूद रहे।

    प्रदर्शनी में हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने करीब 50 स्टॉल लगाए। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, कलमकारी, बनारसी साड़ी, मीनाकारी, ज्वेलरी, पेंटिंग, क्ले और क्रॉकरी, लेदर आर्ट, तोरण आर्ट, दरी-बेडशीट और लकड़ी के खिलौने सहित पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए।

    कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति के करीब जाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गुनावासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प को देखें, सराहें और पसंद आने पर खरीदारी करें।

    प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बताई। गुजरात से आए मोनू गुजराती ने कहा कि पहले उनकी स्थिति कठिन थी, लेकिन इस मंच के मिलने से आमदनी में सुधार हुआ। बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि अब उन्हें ग्राहक तक सीधी पहुंच मिल रही है और बीच का मार्जिन बच रहा है। राजस्थान के जयपुर से आए नीरज कुमार सैनी और नागपुर की शकुन ठाकुर ने भी अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की कहानी साझा की।

    पश्चिम बंगाल के बप्पा दास और सेवोसी दे ने बताया कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल था, लेकिन अब सीधे बाजार तक पहुंच बन गई है। गुना के स्थानीय लोग भी इस पहल से प्रभावित नजर आए। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने बताया कि कारीगरों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद।

    उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।

  • क्रिकेट की जीत…IND vs PAK मैच को लेकर राजीव शुक्ला ने ICC की जमकर की तारीफ

    क्रिकेट की जीत…IND vs PAK मैच को लेकर राजीव शुक्ला ने ICC की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली । टी-20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाला मैच अब तय है। बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है। पहले बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों से भारत में खेलने से इनकार किया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने भी बहिष्कार की धमकी दी थी। हालांकि, आईसीसी की मध्यस्थता और पाकिस्तान सरकार की मंजूरी के बाद यह विवाद सुलझ गया है। शुक्ला ने इसे ‘क्रिकेट की जीत’ बताया है।
    टी-20 विश्व कप में 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के साथ मैच खेलने के लिए पाकिस्तान तैयार हो गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा आज होगी। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला का रिएक्शन सामने आया है।उन्होंने आईसीसी के प्रयासों की सराहना की और ये पुष्टि की है कि टी20 विश्व कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला हाई-वोल्टेज मुकाबला अब तय कार्यक्रम के अनुसार कोलंबो में खेला जाएगा।

    Rajeev Shukla ने IND vs PAK मैच को लेकर क्या कहा?

    दरअसल, बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने 10 फरवरी को पत्रकारों से बात करते हुए इसे “क्रिकेट की जीत” करार दिया। उन्होंने कहा कि आईसीसी ने जिस तरह से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के साथ बातचीत कर बीच का रास्ता निकाला है, वह काबिले तारीफ है।
    पूरा विवाद समझेंये पूरा मामला बीसीसीआई के बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 के लिए टीम से रिलीज करने का केकेआर को आदेश दिया था, जिसके बाद बांग्लादेश की सरकार ने ये फैसला लिया कि उनकी नेशनल टीम टी-20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी।

    बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने मैच भारत से बाहर कराने की आईसीसी से मांग की थी। आईसीसी द्वारा इस मांग को ठुकराए जाने और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर करने के बाद, पाकिस्तान ने एकजुटता दिखाते हुए भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार की धमकी दी थी। हालांकि, अब ये मामला सुलझ गया है।

    पाकिस्तान सरकार ने दी हरी झंडी

    सोमवार को पाकिस्तान सरकार ने अपनी टीम को भारत के खिलाफ मैदान में उतरने का औपचारिक निर्देश दिया। पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आईसीसी और अन्य हितधारकों के साथ हुई चर्चा की जानकारी दी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति से भी बातचीत की।

    पाकिस्तान के अपने फैसले से यू-टर्न के बाद राजीव शुक्ला ने ये विश्वास भी जताया कि यह विश्व कप एक बड़ी सफलता साबित होगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की चिंताओं को भी सुना गया है और उनके बोर्ड को कुछ राहत दी गई है, जिससे वे भी अब संतुष्ट हैं।अब सबकी निगाहें 15 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोलंबो में डिफेंडिंग चैंपियन भारत का सामना अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा।

  • मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव

    मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव


    मैहर स्थित मां शारदा मंदिर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि बाहुबली नेता और उत्तर प्रदेश के विधायक राजा भैया ने मंदिर के गर्भगृह में शस्त्र पूजा की। यह घटना मंदिर प्रशासन के नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाली मानी जा रही है। मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है और इसे धार्मिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से संवेदनशील माना जाता है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गर्भगृह में विधिपूर्वक पूजा के दौरान राजा भैया ने शस्त्रों के साथ आराधना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र ले जाने पर सख्त प्रतिबंध है। बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की गई। यह मामला प्रशासन, सुरक्षा और धार्मिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

    स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि सामान्य भक्तों के लिए जहां सख्त नियम लागू होते हैं वहीं प्रभावशाली नेताओं के लिए अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। राजा भैया की बाहुबली छवि के कारण उन्हें विशेष अनुमति दी गई और इससे नियमों में भेदभाव का आरोप लग रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी आम भक्त ने ऐसा किया होता तो क्या प्रशासन की कार्रवाई इतनी ढीली होती।

    मां शारदा मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और नवरात्र जैसे पर्वों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में गर्भगृह तक शस्त्र ले जाने की घटना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। श्रद्धालुओं ने चिंता जताई है कि नियमों का इस तरह उल्लंघन होने पर किसी बड़ी अनहोनी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    बताया जा रहा है कि पूजा पूरी तरह से विधिपूर्वक मंदिर के पुजारी द्वारा कराई गई। हालांकि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताया है और मामले की जांच की मांग की है।

    मंदिर प्रशासक दिव्या सिंह पटेल और एसडीएम मैहर से संपर्क किया गया लेकिन वे इस मामले पर कोई टिप्पणी देने के लिए तैयार नहीं हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और लोग प्रशासन की भूमिका और मंदिर सुरक्षा के स्तर पर सवाल उठा रहे हैं। इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों के पालन की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है।

  • लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी

    लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी


    नई दिल्ली । मणिपुर के उखरुल जिला में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। सोमवार दोपहर लिटान सारेइखोंग गांव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक,पहाड़ी इलाकों के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई राउंड गोलियां भी चलाईं जिससे इलाके में दहशत फैल गई।स्थिति बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिला के सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। तंगखुल समुदाय से जुड़े कई ग्रामीणों के भी अपने घर छोड़ने की सूचना है।

    शनिवार रात से हुई थी हिंसा की शुरुआत

    अधिकारियों के अनुसार,हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में हुई,जब तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित हमला किया गया। शुरुआत में पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और पारंपरिक तरीकों से समाधान पर सहमति बनी थी। रविवार को इस संबंध में बैठक प्रस्तावित थी,लेकिन वह नहीं हो सकी।इसके बजाय,पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए फायरिंग भी की।

    रविवार को लागू की गई निषेधाज्ञा

    रविवार शाम को दो आदिवासी समूहों के बीच पथराव की घटना के बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। इसके बाद मध्यरात्रि के आसपास तंगखुल नागा समुदाय के कई घरों में कथित तौर पर आग लगा दी गई जबकि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

    हालात अभी भी तनावपूर्ण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात

    जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महादेव लंबुई शांगकाई और लिटान की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।

    सीएम खेमचंद सिंह ने की शांति की अपील

    इस बीच वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे आरआईएमएस अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

    कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू

    उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग मकानों और वाहनों को आग लगाते तथा अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं,हालांकि इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  • PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ

    PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ


    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन EPFO अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक नया मोबाइल एप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे PF की निकासी अब और तेज, आसान और डिजिटल होगी। इस एप में सदस्य सीधे अपने बैंक खाते से लिंक होकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस UPI के माध्यम से पैसा निकाल सकेंगे। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म परीक्षण चरण में है और तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एप का संभावित लॉन्च मार्च–अप्रैल 2026 में किया जा सकता है।

    यह नया एप मौजूदा UMANG प्लेटफॉर्म से अलग होगा और सीधे सदस्य के बैंक खाते से जुड़ा रहेगा। एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने पात्र EPF बैलेंस की जानकारी देख पाएंगे और UPI पिन का इस्तेमाल करके राशि सीधे अपने आधार-सीडेड बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पासबुक बैलेंस की जांच और क्लेम स्टेटस देखने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    EPFO के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में लगभग 100 डमी खातों के माध्यम से परीक्षण चल रहा है। परीक्षण के दौरान लेनदेन की गति, सुरक्षा और डेटा समन्वय की जांच की जा रही है। प्रारंभिक चरण में PF का एक हिस्सा सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष पात्र राशि UPI के जरिए निकाली जा सकेगी।

    यह पहल EPFO 3.0 डिजिटल अपग्रेड कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मकसद क्लेम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के लिए सहज बनाना है। वर्तमान में सदस्य UAN पोर्टल या UMANG एप के माध्यम से क्लेम फाइल करते हैं, जिसमें सत्यापन और स्वीकृति में समय लगता है। महामारी के दौरान शुरू की गई ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली ने प्रक्रिया को तेज किया था, लेकिन प्रत्यक्ष त्वरित निकासी की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं थी।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि UPI इंटीग्रेशन से PF निकासी की प्रक्रिया बैंकिंग सेवाओं के समान सुविधा प्रदान करेगी। सदस्य अब बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास जैसे जरूरी खर्चों के लिए कम समय में धन प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और सेवा वितरण की दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    EPFO के पास लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और हर वर्ष करोड़ों क्लेम सेटल किए जाते हैं। संगठन के मुताबिक, नई मोबाइल एप सुविधा से सेवा की गुणवत्ता और उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा। हालांकि, EPFO के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए निकासी प्रक्रिया सीधे बैंक खातों के माध्यम से ही पूरी की जाएगी।इस एप के आने से EPFO सदस्यों के लिए PF निकासी का समय घटेगा, प्रक्रिया पारदर्शी होगी और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में तेजी आएगी। आने वाले महीनों में यह एप PF के डिजिटल अनुभव को पूरी तरह बदलने की संभावना रखता है।

  • भारत का वैश्विक बढ़त का सफर 6.4% GDP वृद्धि के साथ जारी नीति और बैंकिंग स्थिरता दे रही सहारा

    भारत का वैश्विक बढ़त का सफर 6.4% GDP वृद्धि के साथ जारी नीति और बैंकिंग स्थिरता दे रही सहारा


    नई दिल्ली।भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगले वित्त वर्ष 2026-27 की तस्वीर मूडीज की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने अनुमान जताया है कि भारत का GDP 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है और यह वृद्धि दर G20 देशों में सबसे अधिक रहने की संभावना है रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत नीति आधारित प्रोत्साहन और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा देंगी

    मूडीज का यह अनुमान सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के आकलनों से थोड़ा कम है आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 से 7.4 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान रखा गया था वहीं RBI ने हाल ही में अपनी नीतिगत समीक्षा में करीब सात प्रतिशत वृद्धि की संभावना व्यक्त की थी इसके बावजूद वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत और अग्रणी मानी जा रही है

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कर ढांचे में किए गए हालिया बदलाव और उपभोक्ताओं की आय में संभावित वृद्धि से बाजार में मांग बढ़ेगी GST नियमों में संशोधन और आयकर में राहत से लोगों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है इससे घरेलू खपत को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियां गतिशील बनी रहेंगी

    बैंकिंग क्षेत्र के बारे में मूडीज ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में बैंकों की ऋण वृद्धि दर 11 से 13 प्रतिशत के बीच रहेगी साथ ही गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का स्तर 2 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में नियंत्रित रह सकता है हालांकि छोटे उद्योग और MSME क्षेत्र पर कुछ दबाव की संभावना जताई गई है लेकिन बैंकों की पूंजी क्षमता इस जोखिम को संभालने में सक्षम मानी गई है जिससे वित्तीय प्रणाली स्थिर बनी रहेगी

    रिपोर्ट में भारत अमेरिका व्यापार समझौते को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है फरवरी 2026 में हुए इस समझौते से निर्यात क्षेत्र में नई गति आने की संभावना है इससे छोटे उद्यमों को राहत मिलेगी और निवेश वातावरण बेहतर बनेगा जिससे आर्थिक वृद्धि में स्थिरता आएगी

    मूडीज ने यह भी संकेत दिया है कि अगर महंगाई नियंत्रित बनी रहती है तो RBI भविष्य में भी ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है वर्ष 2025 में केंद्रीय बैंक द्वारा की गई दर कटौती से वित्तीय परिस्थितियां पहले ही सहायक बनी हुई हैं कम ब्याज दरें निवेश और उपभोग दोनों को बढ़ावा दे सकती हैं जिससे आर्थिक वृद्धि की गति और मजबूत होगी

    कुल मिलाकर मूडीज की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है घरेलू खपत स्थिर बैंकिंग प्रणाली और नीतिगत प्रोत्साहन अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दिशा में सहारा बनेंगे भारत G20 में सबसे तेज़ विकास दर वाला देश बनकर उभर सकता है जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा और अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ेगी

  • हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

    हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत


    नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए।
    शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा।
    कुंवारे नेताओं पर कसा तंज
    जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
    सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार
    जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे।
    बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
    शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।