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  • US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार

    US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार


    मिशिगन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित दावेदारों के नाम बताए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Foreign Minister Marco Rubio) का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में कई मजबूत नेता हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की टीम को मजबूत बताते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा।

    मिशिगन में रैली से पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी किसी एक नेता को सबसे आगे बताना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी में कई अच्छे नाम मौजूद हैं।

    ट्रंप ने कहा “मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी नजर में कौन है, लेकिन अभी थोड़ा जल्दी है।” उन्होंने जेडी वेंस और मार्को रुबियो का नाम लेते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के पास मजबूत नेताओं की कमी नहीं है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास ऐसी टीम नहीं है।


    रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल को लेकर भी बोले ट्रंप

    मिशिगन रवाना होने से पहले ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेल उद्योग को मौजूदा संघर्ष के कारण बंधक नहीं बनने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनके विचार में यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था।


    3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव पर नजर

    अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसका असर ट्रंप के विधायी एजेंडे और वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर पड़ सकता है।


    ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा

    ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चिंताओं और घटती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां भी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सितंबर में प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत तक गिर गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 से उसके सर्वे रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनाव से पहले किसी राष्ट्रपति की रेटिंग का यह सबसे निचला स्तर था।

  • रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना

    रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना


    नई दिल्ली।
    भारत (India) रक्षा निर्यात (Defence Exports) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यूरोप (Europe) का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा सामान का निर्यात किया. यह उपलब्धि मुख्य रूप से यूरोप की बढ़ती मांग से जुड़ी है. रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सेनाओं को मजबूत करने की होड़ शुरू कर दी।

    गोला-बारूद, तोपखाने और विस्फोटक पदार्थों की जरूरत अचानक बहुत बढ़ गई. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और यूरोपीय खरीदारों को गोले, मोर्टार और विस्फोटक पदार्थों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति शुरू कर दी. इन वस्तुओं की खेप में 1,600 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी हुई है।

    यूरोपीय संघ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया है. कई यूरोपीय देशों के पास पुराने स्टॉक खत्म हो गए थे और नए उत्पादन में समय लग रहा था. ऐसे में भारत जैसे देश ने तेज आपूर्ति की क्षमता दिखाई. भारत के रक्षा उद्योग ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाई है.

    सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर गोला-बारूद और तोपखाने के सिस्टम बना रही हैं. इससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल में कहा कि आगे और ज्यादा संयुक्त उद्यम बनाए जाएंगे. इससे तकनीक साझा होगी और उत्पादन और बढ़ेगा।

    भारत अब सिर्फ छोटे हथियार नहीं बल्कि तोपखाने के सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण भी निर्यात कर रहा है. ये सामान 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं. यूरोप के अलावा अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में भी भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह बदलाव भारत की छवि को हथियार आयातक से निर्यातक देश के रूप में बदल रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है. पहले भारत ज्यादातर हथियार विदेश से खरीदता था, लेकिन अब घरेलू कंपनियां आधुनिक हथियार बनाने में सक्षम हो रही हैं. कई निजी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में निवेश किया है. इससे रोजगार बढ़े हैं और विदेशी मुद्रा भी कमाई जा रही है. यूरोप की मांग ने भारतीय कंपनियों को बड़े ऑर्डर दिए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और बेहतर हुई है।

    हालांकि चुनौतियां भी हैं. गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना, डिलीवरी समय पर करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना जरूरी है. अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे पारंपरिक हथियार निर्यातक देशों के मुकाबले भारत को अपनी जगह और मजबूत करनी होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत संयुक्त उद्यमों पर जोर देता रहा और नई तकनीक अपनाता रहा तो आने वाले सालों में निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।

    इस पूरे विकास से साफ है कि भू-राजनीतिक तनावों ने भारत के लिए नए मौके खोले हैं. यूक्रेन युद्ध ने यूरोप को हथियारों की जरूरत बढ़ा दी और भारत ने अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल किया. अब भारत रक्षा निर्यात में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह उपलब्धि न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

  • बद्रीनाथ धाम का अद्भुत रहस्य: क्यों कहते हैं इसे भू-वैकुंठ और शीतकाल में कहां होते हैं भगवान बद्री के दर्शन?

    बद्रीनाथ धाम का अद्भुत रहस्य: क्यों कहते हैं इसे भू-वैकुंठ और शीतकाल में कहां होते हैं भगवान बद्री के दर्शन?


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित बद्रीनाथ धाम देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर चार धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। अलकनंदा नदी के किनारे बसे इस दिव्य धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु बद्री विशाल के रूप में विराजमान हैं। इसी वजह से बद्रीनाथ धाम को भू-वैकुंठ यानी धरती पर भगवान विष्णु का धाम कहा जाता है। लेकिन इस मंदिर की खासियत केवल इसकी आस्था और पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं है। यहां की एक ऐसी परंपरा भी है जिसके तहत सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी भगवान की पूजा लगातार जारी रहती है।

    क्यों कहा जाता है बद्रीनाथ को भू-वैकुंठ?

    हिंदू धर्म में वैकुंठ को भगवान विष्णु का दिव्य निवास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहती है और यहां दर्शन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है। इसी धार्मिक विश्वास के कारण इस तीर्थ को भू-वैकुंठ की संज्ञा दी गई है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने बद्रीनाथ क्षेत्र में नर-नारायण के रूप में कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता लक्ष्मी ने उन्हें कठिन मौसम से बचाने के लिए बदरी यानी बेर के वृक्ष का रूप धारण किया था। इसी कथा को बद्रीनाथ नाम की उत्पत्ति से जोड़कर देखा जाता है। हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

    सर्दियों में क्यों बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट?

    बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है और तापमान काफी नीचे चला जाता है। ऐसे मौसम में मंदिर तक पहुंचना और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा करना कठिन हो जाता है। इसी कारण हर साल शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

    आमतौर पर बद्रीनाथ मंदिर के कपाट अप्रैल या मई में खुलते हैं और अक्टूबर या नवंबर में बंद होते हैं। हालांकि कपाट खुलने और बंद होने की तारीख धार्मिक पंचांग तथा परंपराओं के अनुसार निर्धारित की जाती है। कपाट बंद होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसके बाद शीतकालीन पूजा की परंपराएं शुरू होती हैं।

    छह महीने कहां होती है भगवान बद्री विशाल की पूजा?

    बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि भगवान की पूजा भी बंद हो जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार शीतकाल में भगवान बद्री विशाल की पूजा के लिए उनकी उत्सव मूर्ति को पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर ले जाया जाता है। वहीं जोशीमठ के नरसिंह मंदिर का भी बद्रीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा व्यवस्था में विशेष महत्व है।

    जोशीमठ को ज्योतिर्मठ के नाम से भी जाना जाता है। सर्दियों में बद्रीनाथ के कपाट बंद रहने के दौरान यहां भगवान की पूजा से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं। इस व्यवस्था के जरिए हिमालय में मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद धार्मिक अनुष्ठान जारी रहते हैं। यही परंपरा बद्रीनाथ धाम की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को खास बनाती है।

    कौन करते हैं बद्रीनाथ मंदिर में पूजा?

    बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को रावल कहा जाता है। परंपरागत रूप से रावल केरल के नंबूदरी ब्राह्मण समुदाय से होते हैं। मंदिर में वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ में भगवान विष्णु की मूर्ति को पुनः स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    बद्रीनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु आसपास के कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के दर्शन भी करते हैं। इनमें माणा गांव व्यास गुफा भीम पुल और सरस्वती नदी का क्षेत्र प्रमुख हैं। इस तरह बद्रीनाथ धाम केवल दर्शन का स्थान नहीं बल्कि पौराणिक मान्यताओं प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन परंपराओं का अनूठा संगम है।

    भू-वैकुंठ के रूप में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां मौसम के कारण मंदिर के कपाट भले ही कुछ महीनों के लिए बंद हो जाएं लेकिन भगवान के प्रति श्रद्धा और पूजा की परंपरा निरंतर बनी रहती है।

  • टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी

    टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी


    नई दिल्ली।
    सर्वाधिक बार टी20 विश्व कप (Most T20 World Cup Wins) अपने नाम कर चुकी भारतीय टीम (Indian Team) का खेल के सबसे छोटे प्रारूप में दबदबा है। भारत पाकिस्तान (Pakistan) के बाद महज दूसरी टीम है जिसने टी20 में 300 मैच खेले हैं। भारतीय टीम फिलहाल न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand tour) पर है जहां उसे तीनों प्रारूप की सीरीज खेलनी है। भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती दो मुकाबले जीतकर बढ़त बना ली है। क्राइस्टचर्च में खेला गया दूसरा टी20 तो भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा है। आइए जानते हैं न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जीत के साथ ही भारत ने टी20 में ऐसा कौन सा मुकाम हासिल कर लिया जो अब तक दुनिया की कोई अन्य टीम नहीं कर सकी है।


    भारत के लिए क्यों खास रही क्राइस्टचर्च की जीत

    भारत का यह टी20 में 300वां मुकाबला था और टीम ने इसमें रोमांचक जीत दर्ज की। मुकाबले में भारत ने 181 रन के लक्ष्य को 19.5 ओवर में छह विकेट खोकर हासिल कर लिया। तिलक वर्मा ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई, जबकि नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने भी उपयोगी पारियां खेलीं। इसके साथ ही टीम इंडिया ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी 200वीं जीत भी दर्ज कर ली। इस आंकड़े में केवल सामान्य जीत यानी निर्धारित खेल के आधार पर मिली जीत शामिल हैं। भारत इस प्रारूप में 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। भारत से पहले टी20 में अब तक कोई ऐसा नहीं कर सका है। भारत की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि टीम ने सामान्य जीत के अलावा सुपर ओवर में पांच मुकाबले जीते हैं। इसके अलावा 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ बॉल-आउट के जरिए भी भारत को जीत मिली थी। नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक मुकाबला बारिश के कारण टाई रहा था।

    भारत ने 2006 से 2026 के बीच अब तक 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें टीम को 200 मैचों में जीत मिली है। इस सूची में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने 304 मुकाबलों में 176 जीत दर्ज की हैं। न्यूजीलैंड 135 जीत के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड क्रमशः 129 और 128 जीत के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। पाकिस्तान ने भले ही भारत के मुकाबले ज्यादा टी20 मैच खेले हैं, लेकिन सर्वाधिक जीत भारत ने ही दर्ज की है।


    विरोधी टीमों के खिलाफ कैसा है भारत का रिकॉर्ड

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत का रिकॉर्ड लगभग हर टीम के खिलाफ मजबूत रहा है। ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम ने 22-22 मुकाबलों में जीत हासिल की है। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने 33 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, जिनमें 19 में जीत मिली है और 11 में हार का सामना करना पड़ा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने सुपर ओवर में भी दो जीत दर्ज की हैं। भारत दुनिया की ऐसी टीम है, जिसका टी20 अंतरराष्ट्रीय में अब तक सामना की गई हर टीम के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड सकारात्मक है। बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने 18 में से 17 मैच जीते हैं, जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ 12 मुकाबलों में उसे एक भी हार नहीं मिली है।


    इस साल टी20 में कैसा रहा प्रदर्शन?

    मौजूदा कैलेंडर वर्ष 2026 में भारतीय टीम ने अब तक 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें 25 मैचों में जीत हासिल की है। भारत के लिए मौजूदा साल यादगार रहा है क्योंकि इस साल की शुरुआत में ही भारत ने टी20 विश्व कप के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। साल के अंत तक भारतीय टीम को छह और टी20 मुकाबले खेलने हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी सरजमीं पर पांच मैचों की टी20 सीरीज के शेष तीन मैच और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर तीन मैच शामिल हैं। ऐसे में भारतीय टीम के पास अपनी जीत की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने के करीब पहुंची टीम इंडिया अब मंगलवार को होने वाले तीसरे मुकाबले में भी जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगी।


  • सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर वुसिक ने स्वीकार की हार रूस से करीबी संबंधों वाले नेता के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

    सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर वुसिक ने स्वीकार की हार रूस से करीबी संबंधों वाले नेता के लिए बड़ा राजनीतिक झटका


    नई दिल्ली । यूरोप के बाल्कन क्षेत्र के देश सर्बिया में छात्र आंदोलन ने राजनीति की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाले नेता अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को हुए संसदीय चुनाव के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली। चुनाव में उनके राजनीतिक गठबंधन के सामने विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन वाली स्टूडेंट्स लिस्ट ने मजबूत चुनौती पेश की। वुसिक के अपने अनुमान के मुताबिक छात्र समर्थित समूह को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने की संभावना है। इन अनुमानों के आधार पर छात्र आंदोलन से जुड़े समूह के बहुमत हासिल करने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि अंतिम आधिकारिक नतीजों की पुष्टि के बाद ही सीटों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

    करीब 14 साल से प्रभावशाली रहे वुसिक को झटका

    अलेक्जेंडर वुसिक सर्बिया की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी SNS ने लंबे समय तक देश की सत्ता पर प्रभाव बनाए रखा। वुसिक वर्ष 2014 से देश की सरकार के शीर्ष पदों पर रहे हैं और बाद में राष्ट्रपति बने। उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीबी संबंध रखने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में छात्र आंदोलन से जुड़े समूह का चुनाव में आगे निकलना सर्बिया की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    इस चुनाव में एक तरफ वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी थी तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों के छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन। छात्रों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए थे। आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों में समर्थन मिलने के बाद यह राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरा।

    रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध

    सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद हुई थी। स्टेशन की छतरी जैसी संरचना गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे। छात्रों ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने और सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

    धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन बड़े जन आंदोलन में बदल गए। विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ समाज के अन्य वर्गों ने भी सरकारी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भ्रष्टाचार और सत्ता के केंद्रीकरण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। सरकार और उसके समर्थकों ने आंदोलन को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए लेकिन विरोध लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रहा।

    वुसिक ने हार के लिए विदेशी हस्तक्षेप को ठहराया जिम्मेदार

    चुनावी कार्यक्रम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए वुसिक ने स्वीकार किया कि स्टूडेंट्स लिस्ट को जीत मिली है। हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी के प्रदर्शन के लिए सर्बिया के स्वतंत्र मीडिया और कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप के साथ अमेरिकी डीप स्टेट को जिम्मेदार ठहराया। ये आरोप वुसिक की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    चुनाव से पहले देश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ था। छात्र आंदोलन के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जवाबदेही और संस्थागत सुधार की मांग की जबकि वुसिक ने आंदोलन को विदेशी साजिश से जोड़ने की कोशिश की थी। चुनाव के शुरुआती अनुमान अब इस राजनीतिक संघर्ष को एक नए मोड़ पर ले आए हैं।

    नई सरकार के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

    यदि अंतिम नतीजों में स्टूडेंट्स लिस्ट को बहुमत मिलता है तो उसके सामने सरकार गठन और प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी होगी। भ्रष्टाचार की जांच सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और न्यायिक व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे नई राजनीतिक व्यवस्था की परीक्षा लेंगे। इसके अलावा सर्बिया के लिए रूस और चीन के साथ संबंधों तथा यूरोपीय संघ की सदस्यता से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

    छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सड़कों पर उठी मांगें अब सरकारी नीतियों में बदल पाएंगी। आने वाले दिनों में अंतिम चुनावी नतीजे और सरकार गठन की प्रक्रिया सर्बिया के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • हरभजन सिंह ने बताया जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बोले बच्चे को गोद में लेकर समझ आया असली खुशी का मतलब

    हरभजन सिंह ने बताया जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बोले बच्चे को गोद में लेकर समझ आया असली खुशी का मतलब


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े बदलाव को लेकर भावुक खुलासा किया है। मैदान पर आक्रामक तेवर और विरोधी बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में उलझाने के लिए मशहूर रहे भज्जी ने बताया कि पिता बनने के बाद उनकी सोच और स्वभाव में बड़ा बदलाव आया। प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पैसा शोहरत और कामयाबी से बढ़कर परिवार होता है। उनके मुताबिक जिंदगी में कई चीजें अस्थायी होती हैं लेकिन परिवार का प्यार और साथ ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है। बेटी के जन्म के बाद उन्हें इस बात का गहराई से एहसास हुआ कि जीवन की असली खुशी आखिर किसमें छिपी है।

    बेटी के जन्म ने बदल दिया भज्जी का स्वभाव

    हरभजन सिंह ने बातचीत में बताया कि क्रिकेट के मैदान पर उनका अंदाज हमेशा आक्रामक रहा। वह हर मुकाबले में जीत के लिए पूरी ताकत लगाते थे और बल्लेबाजों को आउट करने के लिए लगातार रणनीति बनाते रहते थे। मैदान के बाहर भी वह दोस्तों के साथ हंसी मजाक और मस्ती करने वाले इंसान रहे हैं। लेकिन पिता बनने के बाद उनकी जिंदगी में ऐसा बदलाव आया जिसने उन्हें भीतर से शांत कर दिया।

    भज्जी ने बताया कि जब उनकी बेटी का जन्म हुआ तो उनके सोचने का तरीका बदल गया। उन्हें महसूस हुआ कि अब जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका परिवार है। उनकी बेटी बेटा पत्नी मां और बहनें ही उनकी दुनिया हैं। इसके आगे उन्हें पैसा शोहरत और दूसरी उपलब्धियां छोटी लगने लगीं। उनके मुताबिक एक छोटे से बच्चे को अपनी बाहों में थामने का अनुभव इंसान को जिंदगी की असली अहमियत समझा देता है।

    पैसा और शोहरत नहीं परिवार है असली दौलत

    हरभजन सिंह ने कहा कि इंसान अपने जीवन में पैसा कमाने और पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत करता है। सफलता हासिल करना जरूरी है लेकिन इसके लिए परिवार और रिश्तों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि पैसा शोहरत और कामकाज जिंदगी के अस्थायी हिस्से हैं जबकि अपनों का साथ सबसे ज्यादा मायने रखता है।

    उनकी यह बात उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो करियर और काम की भागदौड़ में परिवार को समय नहीं दे पाते। भज्जी का मानना है कि जीवन की असली खुशी उन रिश्तों में होती है जो मुश्किल समय में भी इंसान के साथ खड़े रहते हैं। पिता बनने के बाद उनके भीतर आया बदलाव इस बात का उदाहरण है कि परिवार की जिम्मेदारी इंसान को जिंदगी के प्रति नया नजरिया दे सकती है।

    क्रिकेट के प्रति आज भी कायम है जुनून

    हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसे दौर में खेलने का मौका मिला जब बल्ले और गेंद के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उनकी आक्रामक गेंदबाजी ने कई मौकों पर टीम को सफलता दिलाई।

    उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स यानी WCL में दोबारा मैदान पर उतरने के अनुभव को भी साझा किया। भज्जी ने माना कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर पहले जैसा साथ नहीं देता। घुटनों में भी पहले जैसी ताकत नहीं रही और मैदान पर खेलना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है।

    शरीर की उम्र बढ़ी लेकिन दिमाग आज भी युवा

    हरभजन सिंह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब वह दोबारा मैदान पर उतरते हैं तो शरीर भले ही उम्र के अगले पड़ाव पर पहुंच चुका हो लेकिन उनका दिमाग आज भी 20 साल के युवा खिलाड़ी की तरह सोचता है। वह मैदान पर पहुंचते ही बल्लेबाज को आउट करने के तरीके तलाशने लगते हैं। उनका यह बयान बताता है कि क्रिकेट उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि जुनून भी है।

    हरभजन सिंह की इस बातचीत में जिंदगी के दो महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं। एक तरफ क्रिकेट के प्रति उनका अटूट प्रेम है तो दूसरी तरफ परिवार के प्रति उनकी गहरी भावनाएं हैं। बेटी के जन्म ने उन्हें यह एहसास कराया कि असली सफलता केवल मैदान पर जीत हासिल करने या शोहरत कमाने में नहीं बल्कि अपनों के साथ खुशहाल जिंदगी जीने में है।

  • Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार

    Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार


    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त चर्चा बटोरी है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग पर टिकी हुई है। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 की सुबह उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम 247 रुपये प्रति शेयर बताया जा रहा है। IPO का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये निर्धारित किया गया था जबकि ग्रे मार्केट में शेयर का अनुमानित भाव 1366 रुपये तक पहुंच गया है। इस आधार पर शेयर करीब 22.07 प्रतिशत के प्रीमियम पर कारोबार करते बताए जा रहे हैं।

    ग्रे मार्केट के मौजूदा संकेतों ने उन निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं जिन्होंने जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में पैसा लगाया है। हालांकि निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित लिस्टिंग प्रदर्शन का संकेत देता है। इसे वास्तविक लिस्टिंग प्राइस या निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं माना जा सकता है। शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय परिस्थितियों के अनुसार कीमत में बदलाव हो सकता है।

    एक लॉट पर 2964 रुपये के मुनाफे का अनुमान

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं। कंपनी के शेयरों का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये होने के कारण एक लॉट के लिए निवेशकों को 13428 रुपये लगाने होते हैं। वहीं ग्रे मार्केट में 1366 रुपये प्रति शेयर के अनुमानित भाव के आधार पर 12 शेयरों की कीमत 16392 रुपये बैठती है। इस तरह दोनों कीमतों के बीच प्रति शेयर 247 रुपये का अंतर है। एक लॉट के हिसाब से यह अंतर 2964 रुपये तक पहुंच जाता है।

    इस गणना के अनुसार यदि ग्रे मार्केट का प्रीमियम लिस्टिंग तक बना रहता है और शेयर इसी अनुमानित भाव पर सूचीबद्ध होते हैं तो एक लॉट पाने वाले निवेशक को करीब 2964 रुपये का संभावित फायदा हो सकता है। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग इस अनुमान से अलग हो सकती है। निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के आंकड़ों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    28 अक्टूबर को हो सकती है शेयरों की लिस्टिंग

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को NSE और BSE पर प्रस्तावित है। IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। जिन निवेशकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे उनके रिफंड 27 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। अलॉटमेंट की स्थिति सामने आने के बाद निवेशक यह जान सकेंगे कि उन्हें कंपनी के शेयर मिले हैं या नहीं। इसके बाद बाजार की निगाहें लिस्टिंग के दिन शेयर के प्रदर्शन पर रहेंगी।

    22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ने दिखाई निवेशकों की दिलचस्पी

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को निवेशकों का जोरदार समर्थन मिला। तीन दिन की बोली प्रक्रिया के दौरान इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने की जानकारी सामने आई। निवेशक श्रेणियों के आंकड़ों के मुताबिक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB श्रेणी में 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII श्रेणी में यह आंकड़ा करीब 14 गुना रहा जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इन आंकड़ों से पता चलता है कि IPO में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी काफी मजबूत रही।

    30213 करोड़ रुपये के IPO ने बनाया रिकॉर्ड

    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

    अब निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर है। ग्रे मार्केट में दिखाई दे रही तेजी ने बाजार की उम्मीदों को बढ़ाया है लेकिन वास्तविक प्रदर्शन का पता लिस्टिंग के समय ही चलेगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित

    MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी खरीद (Public Procurement) के दौरान वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के मामलों में कार्रवाई की गई है. नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे के मुताबिक, अलग-अलग स्तर के 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है. इनमें करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) भी शामिल हैं. अब तक सात अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

    विभाग ने गलत दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने के मामलों में 80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की है. संजय दुबे ने कहा कि अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर अलग-अलग कार्रवाई
    ACS संजय दुबे के अनुसार, कार्रवाई में अलग-अलग स्तर के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं. मामलों की गंभीरता के आधार पर संबंधित लोगों की वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति, बर्खास्तगी और सरकारी नुकसान की वसूली जैसे कदम उठाए गए हैं.

    उन्होंने कहा कि जिस मामले में जितनी बड़ी अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाती है. विभाग का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय करना प्राथमिकता है.


    80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स पर भी एक्शन

    कार्रवाई केवल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. विभाग के मुताबिक, गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने से जुड़े मामलों में 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं.

    नगरीय निकायों की खरीद प्रक्रिया में सामने आए मूल्य अंतर और वित्तीय अनियमितताओं की पहचान के लिए विभाग डिजिटल रिकॉर्ड और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहा है. विभागीय निगरानी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी सहारा लिया जा रहा है.


    सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर जोर

    ACS संजय दुबे के मुताबिक, उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नगरीय निकायों के पास उपलब्ध सरकारी धन और उनकी आय का इस्तेमाल नागरिकों के हित में हो. खरीद और भुगतान की प्रक्रिया में अनियमितता मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है. तकनीक और AI से निगरानी जारी है. सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग और नागरिकों तक उसका पूरा लाभ पहुंचे.

  • ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं


    नई दिल्ली। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में उन्होंने दक्षिणपंथी नेता और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हरा दिया। ब्राजील के चुनावी न्यायालय के मुताबिक, लूला को 51.79% और फ्लेवियो को 48.21% वोट मिले। लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी राजनीति का प्रभाव बढ़ रहा है। जीत के बाद लूला ने स्पष्ट कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है।

    करीब 44 लाख वोटों से जीते लूला

    ब्राजील के चुनावी न्यायालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 100% मतगणना पूरी होने के बाद लूला को 6 करोड़ 42 लाख 56 हजार 232 वोट मिले, जबकि फ्लेवियो बोल्सोनारो के खाते में 5 करोड़ 98 लाख 26 हजार 41 वोट आए। दोनों के बीच करीब 44.3 लाख वोटों का अंतर रहा।

    80 वर्षीय लूला ने पहले दौर के चुनाव में फ्लेवियो से पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में जीत दर्ज की। पहले चरण में फ्लेवियो को 47.03% और लूला को 45.16% वोट मिले थे। इसके बाद दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

    लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा और वह 2030 तक राष्ट्रपति पद पर रहेंगे। इससे पहले वह 2003 से 2010 तक दो कार्यकाल राष्ट्रपति रह चुके हैं और 2023 में तीसरी बार सत्ता में लौटे थे।

    बोले- ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    जीत के बाद लूला ने ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है। उनका संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और टैरिफ दबाव को लेकर ब्राजील-अमेरिका संबंध चर्चा में हैं।

    लूला ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेशी हस्तक्षेप की कोशिशों को नाकाम किया। लूला ने यह भी कहा कि वह शासन के तरीके में बदलाव करेंगे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाएंगे।

    उनके मुताबिक, चुनाव के बाद अब प्राथमिकता देश को चलाने के तरीके में बदलाव लाने और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की होगी।

    ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी राजनीति के बीच लूला की जीत

    लूला की जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। क्षेत्र के कई देशों में दक्षिणपंथी नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में ब्राजील में वामपंथी नेता की जीत क्षेत्रीय राजनीतिक रुझानों से अलग तस्वीर पेश करती है।

    ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में लूला की सरकार के सामने घरेलू आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने की चुनौती भी रहेगी। अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच ब्राजील अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और स्वतंत्र व्यापार नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

    लैटिन अमेरिका के दो बड़े देशों ब्राजील और मैक्सिको में वाम-मध्य विचारधारा के नेता सत्ता में हैं। लूला की जीत से क्षेत्रीय राजनीति में इन सरकारों की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।

    फ्लेवियो बोल्सोनारो ने नतीजे को चुनौती देने की बात कही

    चुनाव में हार के बाद फ्लेवियो बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार करने से इनकार करते हुए चुनाव रद्द कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई। यह फैसला मतदान के दिन आखिरी समय में लिया गया था, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    हालांकि, ब्राजील के चुनावी न्यायालय ने लूला की जीत की आधिकारिक घोषणा कर दी है। चुनाव परिणाम को चुनौती देने की फ्लेवियो की घोषणा के बाद अब इस मामले में संभावित कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

    लूला की जीत के साथ ब्राजील में अगले चार साल के लिए राजनीतिक दिशा तय हो गई है। उनकी सरकार के सामने आर्थिक विकास, सामाजिक नीतियों, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे।

  • MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान

    MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान


    रायसेन।
    बीते दिनों मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीलगढ़ में कई आदिवासी परिवारों (Tribal Families) को विस्थापित कर दिया गया था, जिसपर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को लेकर अब शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। चौहान विस्थापित हुए सभी परिवारों के लिए 15 लाख रुपए राहत कोष से देने का ऐलान किया है। शिवराज सिंह ने 15 लाख रुपए के साथ आदिवासी परिवारों को 5 एकड़ खेती की जमीन भी देने का ऐलान किया है।


    क्या बोले शिवराज सिंह चौहान

    नीलगढ़ के विस्थापित आदिवासी परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये आदिवासी परिवार नीलगढ़ में सालों से रहते आ रहे हैं और जंगल बचाने के लिए अपनी जमीन, अपनी घर और अपना गांव छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं, इसके लिए मैं उनके लिए सम्मान प्रकट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा आदिवासी परिवारों का ये त्याग जंगल को बचाने के लिए है।

    इस मामले पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री थे, तभी उनके लिए राहत पैकेज का ऐलान किया गया था। चौहान ने कहा कि अब इन परिवारों को नया नीलगढ़ में विस्थापित किया जा रहा है, जहां उन्हें 15 लाख रुपए और खेती करने के लिए हाईवे से लगी हुई 5 एकड़ जमीन दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सभी ऐलान विस्थापित परिवारों की राहत के लिए किए जा रहे हैं।


    विस्थापित परिवारों ने दिया न्योता

    विस्थापित परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इन आदिवासी परिवार के लोगों ने उन्हें नया नीलगढ़ में विस्थापित होने से पहले उन्हें और स्थानीय विधायक को अपने प्रोग्राम में आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि आदिवासी परिवार ये प्रोग्राम सालों से करते आ रहे हैं।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन परिवारों के बीच प्रोग्राम में जाना बहुत ही भावुक पल होगा। उन्होंने कहा कि जंगल बचाने के लिए गांव के लोग अपना घर, अपना गांव सब छोड़कर दूसरी जगह जा रहे होंगे। ऐसे में उनके साथ रहना एक भावुक पल होगा। चौहान ने कहा कि वो इन परिवारों के साथ बैठेंगे और उनकी विस्थापन के लिए हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं।