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  • दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों और रहवासी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई और सर्वे से परेशान व्यापारियों ने अब विरोध का अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी बुधवार सुबह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर यानी मिंटो हॉल परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा करेंगे। इस दौरान व्यापारी सामूहिक रूप से रामधुन का गायन करेंगे और कारोबारियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रार्थना करेंगे। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाली इस सभा को व्यापारियों की ओर से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में सर्वे के साथ भवनों में किए गए अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। निगम की सख्ती के बाद ऐसे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से रहवासी भवनों में दुकान या अन्य कारोबार संचालित कर रहे हैं। अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों के बीच नोटिस मिलने के बाद वैकल्पिक कमर्शियल स्थान तलाशने की चर्चा तेज हो गई है।

    व्यापारियों का कहना है कि अचानक सख्ती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका तर्क है कि यदि शहर का मास्टर प्लान समय पर स्पष्ट तरीके से लागू होता और रहवासी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का पहले से व्यवस्थित निर्धारण किया जाता तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं दूसरी ओर रहवासी संगठनों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है और किसी भी स्थिति में रहवासी इलाकों का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए।

    इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने चक्काजाम किया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर में भी प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर रहवासी संघ की ओर से गुलमोहर कॉलोनी में टॉर्च लाइट रैली निकाली गई थी। इससे पहले सात नंबर मार्केट में भी रहवासी संगठनों ने रैली के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    नगर निगम ने अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर के क्षेत्रों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू कर दिया है। नदी और तालाब के किनारे बने भवनों के अलावा ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माण की भी प्राथमिकता से जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

    व्यापारियों की प्रार्थना सभा के जरिए अब इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग सामने रखी जाएगी। सवाल यह है कि प्रशासन व्यापारियों की चिंता और रहवासियों की आपत्तियों के बीच ऐसा रास्ता कैसे निकालेगा जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की रोजी-रोटी पर भी अचानक संकट न आए। भोपाल में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की बड़ी प्रशासनिक और कारोबारी चुनौती बनता जा रहा है।

  • आर्द्रा नक्षत्र में मंगल का प्रवेश, मेष से मकर तक इन 5 राशियों के लिए मुश्किल समय

    आर्द्रा नक्षत्र में मंगल का प्रवेश, मेष से मकर तक इन 5 राशियों के लिए मुश्किल समय


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है, जबकि राहु को छाया ग्रह कहा गया है। अब मंगल राहु के स्वामित्व वाले आर्द्रा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र बदलाव, उथल-पुथल और मानसिक तनाव से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में मंगल की उग्र ऊर्जा के कारण कुछ राशियों के लिए यह अवधि चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    मंगल 2 सितंबर तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियों को आर्थिक, करियर, पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। आइए जानते हैं किन 5 राशियों को सतर्क रहना होगा।

    मेष राशि
    मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। ऐसे में इस अवधि में गुस्सा और जल्दबाजी बढ़ सकती है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों से विवाद से बचें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। जल्दबाजी में लिया गया आर्थिक फैसला नुकसान करा सकता है।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि वालों को वाणी और धन से जुड़े मामलों में संयम रखना होगा। गुस्से में कही गई बात रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है। अचानक होने वाले खर्च से बजट प्रभावित हो सकता है। इस दौरान किसी को उधार देने में सावधानी बरतें।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों को मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस की राजनीति से दूर रहें और अपने काम पर ध्यान दें। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लोगों को इस दौरान गुप्त विरोधियों और विवादों से सावधान रहने की जरूरत है। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। कानूनी और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में पूरी जांच के बाद ही कदम उठाएं। जोखिम वाले निवेश से दूरी रखना बेहतर होगा।

    मकर राशि
    मकर राशि वालों को पारिवारिक और आर्थिक मामलों में संयम रखना होगा। जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं। अचानक होने वाला बड़ा खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है, इसलिए लेन-देन में सावधानी बरतें।

    अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल की उग्रता को शांत रखने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को लाल मसूर की दाल, गुड़ या तांबे के बर्तन का दान करने की भी परंपरा है। बड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचें और जरूरी मामलों में अनुभवी लोगों की सलाह लें।

  • मंगल दोष का असर: शादी से करियर तक पड़ सकता है प्रभाव, जानें लक्षण और ज्योतिषीय उपाय

    मंगल दोष का असर: शादी से करियर तक पड़ सकता है प्रभाव, जानें लक्षण और ज्योतिषीय उपाय


    नई दिल्ली। भारतीय ज्योतिष परंपरा में मंगल दोष को लेकर लोगों के बीच काफी जिज्ञासा रहती है। खासतौर पर विवाह, प्रेम संबंध और करियर से जुड़े मामलों में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार मंगल ऊर्जा, साहस, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और क्रियाशीलता का प्रतीक है। ऐसे में कुंडली में मंगल की स्थिति अनुकूल न होने पर व्यक्ति के व्यवहार और निर्णयों पर इसका असर पड़ने की मान्यता है।

    हालांकि मंगल दोष को केवल अशुभ योग मानना पूरी तरह सही नहीं माना जाता। ज्योतिषीय दृष्टि से यह व्यक्ति के भीतर मौजूद तीव्र ऊर्जा का संकेत भी हो सकता है। सही दिशा मिलने पर यही ऊर्जा साहस, नेतृत्व क्षमता और लक्ष्य हासिल करने की ताकत में बदल सकती है।

    किन स्थितियों में माना जाता है मंगल दोष?

    वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के कुछ विशेष भावों में मंगल की स्थिति को मंगल दोष से जोड़ा जाता है। इनमें प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव प्रमुख माने जाते हैं। हालांकि मंगल दोष का वास्तविक प्रभाव केवल भाव देखकर तय नहीं किया जाता। कुंडली में मंगल की राशि, अन्य ग्रहों की स्थिति और विभिन्न ज्योतिषीय योगों को भी देखा जाता है।

    शादी में आ सकती हैं अड़चनें

    मंगल दोष की सबसे ज्यादा चर्चा विवाह के संदर्भ में होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसके प्रभाव से विवाह में देरी, रिश्ते तय होने के बाद टूटना या दांपत्य जीवन में तनाव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

    विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच क्रोध, अहंकार, मतभेद और संवाद की कमी जैसी समस्याओं को भी मंगल दोष से जोड़ा जाता है। हालांकि हर मांगलिक व्यक्ति का वैवाहिक जीवन खराब हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुंडली के दूसरे योग और ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    प्रेम और पारिवारिक रिश्तों पर असर

    मंगल की तीव्र ऊर्जा का असर प्रेम संबंधों और पारिवारिक रिश्तों से भी जोड़कर देखा जाता है। व्यक्ति भावनात्मक रूप से संवेदनशील होने के बावजूद अपनी बात कठोर या सीधे तरीके से रख सकता है। जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देना और छोटी बात पर गुस्सा करना रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है।

    कई बार व्यक्ति को लगता है कि उसकी बात सही है, लेकिन सामने वाला उसे गलत समझ रहा है। लगातार ऐसी स्थिति बने रहने पर रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है।

    करियर में उतार-चढ़ाव की वजह?

    ज्योतिष में मंगल को कर्म और ऊर्जा से जुड़ा ग्रह माना गया है। मंगल की ऊर्जा असंतुलित होने पर व्यक्ति में जल्दी परिणाम हासिल करने की इच्छा बढ़ सकती है। अपेक्षित परिणाम न मिलने पर अधीरता और निर्णय बदलने की प्रवृत्ति सामने आ सकती है।

    ऐसे में नौकरी बदलने की जल्दबाजी, अधिकारियों से मतभेद या कारोबार में साझेदारी को लेकर विवाद जैसी स्थितियों को मंगल दोष से जोड़ा जाता है। हालांकि करियर की सफलता या असफलता को केवल मंगल दोष के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

    मंगल दोष के लिए बताए गए ज्योतिषीय उपाय

    भारतीय धार्मिक परंपरा में मंगल की शांति के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इनमें मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, मंगल मंत्र का जाप, सेवा-दान और संयम जैसे उपाय शामिल हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन उपायों का उद्देश्य मंगल की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना और व्यक्ति के भीतर धैर्य एवं आत्म-संयम बढ़ाना है।

    व्यवहार में बदलाव भी जरूरी

    मंगल दोष को लेकर ज्योतिषीय उपायों के साथ व्यवहारिक स्तर पर बदलाव भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। गुस्से में तुरंत प्रतिक्रिया न देना, बातचीत के जरिए विवाद सुलझाना, आत्मविश्लेषण करना और धैर्य रखना रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    योग, ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधियों को भी तनाव और अतिरिक्त ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के तरीके के तौर पर अपनाया जा सकता है।

  • MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार को प्रदेश के करीब आधे हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक टीकमगढ़, दमोह, नरसिंहपुर, बैतूल और राजगढ़ में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में ढाई इंच से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा गुना, आगर-मालवा, शाजापुर, सीहोर, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, कटनी, शहडोल, छतरपुर, पन्ना, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    30 जिलों में भी बारिश का दौर
    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, डिंडौरी, रीवा, सतना, मऊगंज, मैहर, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    भोपाल में तेज बारिश, विदिशा के बाजार में भरा पानी
    सोमवार को भोपाल समेत कई जिलों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल के कई इलाकों में तेज बारिश के चलते यातायात प्रभावित हुआ। वहीं विदिशा के बाजार में पानी भरने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रायसेन और शाजापुर में भी बारिश का असर देखने को मिला।

    पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम में औसतन 3.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिवपुरी के करैरा में 5.4 इंच, निवाड़ी के ओरछा में 3.3 इंच, सागर के रहली में 3 इंच, भोपाल के कोलार में 3.2 इंच, नवीबाग में 3.1 इंच और भोपाल शहर में करीब 3 इंच बारिश हुई।

    लो प्रेशर और ट्रफ से बदला मौसम
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में लो प्रेशर एरिया और ट्रफ सक्रिय हैं। इन मौसमी सिस्टम की वजह से कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों तक भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 6% से 51% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के भी कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, खंडवा, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 49% तक कम पानी गिरा है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के अनुसार अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। सोमवार को मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका अहम रही है। उन्होंने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी तक अपना गर्मजोशी भरा अभिवादन पहुंचाने को भी कहा।

    मुलाकात के दौरान पुतिन ने भारत के कृषि क्षेत्र को लेकर भी अहम भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक यानी खाद उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। इससे भारतीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ी है।

    भारत-रूस व्यापार में फिर दिख रही तेजी

    पुतिन ने कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने व्यापारिक रिश्तों में दोबारा तेजी आने के पीछे कई वजहों का जिक्र किया और प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को खास तौर पर रेखांकित किया।

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पीएम मोदी भारत-रूस संबंधों के विकास में व्यक्तिगत रुचि लेते हैं और यही दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद

    पुतिन ने जयशंकर के सामने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हो सकती है। इसके अलावा कार्यक्रम और समय-सारिणी के अनुसार साल के अंत में भी दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना जताई गई।

    भारतीय किसानों के लिए रूस का बड़ा भरोसा

    बैठक में उर्वरक आपूर्ति का मुद्दा भी अहम रहा। पुतिन ने कहा कि रूस भारत की कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि उर्वरकों की उपलब्धता सीधे खेती की लागत और उत्पादन से जुड़ी है। खासकर बुवाई के मौसम में खाद की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम होती है।

    सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है सहयोग

    पुतिन ने भारत और रूस के बीच सहयोग को केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं बताया। दोनों देश परमाणु ऊर्जा, हाईटेक, रक्षा और रणनीतिक तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है। अब दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

    मोदी की तारीफ का क्या है मतलब?

    जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान पुतिन की ओर से पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका का उल्लेख ऐसे समय हुआ है, जब भारत और रूस अपने पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

    ऐसे में एक तरफ पुतिन का मोदी की नेतृत्वकारी भूमिका की तारीफ करना और दूसरी तरफ भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा देना, दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

  • झुर्रियों के लिए घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले जानें अलसी और एलोवेरा मिश्रण बनाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    झुर्रियों के लिए घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले जानें अलसी और एलोवेरा मिश्रण बनाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में प्राकृतिक बदलाव दिखाई देना सामान्य है। समय के साथ त्वचा की लोच कम हो सकती है और चेहरे पर फाइन लाइन्स तथा झुर्रियां नजर आने लगती हैं। इन्हें कम करने के लिए लोग अलग-अलग एंटी-एजिंग उत्पादों और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। अलसी, एलोवेरा जेल और बादाम तेल से तैयार किया जाने वाला मिश्रण भी इसी तरह के घरेलू स्किन केयर उपायों में शामिल है।

    इस मिश्रण को तैयार करने के लिए सबसे पहले अलसी के बीजों से जेल बनाया जाता है। इसके लिए दो बड़े चम्मच अलसी के बीज लेकर उन्हें एक कप पानी में डालें और मध्यम आंच पर करीब पांच से सात मिनट तक पकाएं। जब पानी गाढ़ा और कुछ चिपचिपा दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें।

    अलसी और पानी के इस मिश्रण को गर्म रहते हुए बारीक छलनी या साफ सूती कपड़े से छान लें। इससे बीज अलग हो जाएंगे और जेल जैसा पदार्थ बच जाएगा। इसके बाद इस जेल को पूरी तरह ठंडा करना जरूरी है, ताकि आगे इसमें मिलाए जाने वाले दूसरे पदार्थों का टेक्सचर प्रभावित न हो।

    ठंडे अलसी जेल में दो बड़े चम्मच एलोवेरा जेल मिलाया जा सकता है। इसके बाद इसमें एक छोटा चम्मच बादाम तेल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। चम्मच या छोटे व्हिस्कर की सहायता से मिश्रण को कुछ मिनट तक फेंटने पर इसका टेक्सचर अपेक्षाकृत चिकना और क्रीमी हो सकता है।

    तैयार मिश्रण को साफ और सूखे कांच के छोटे कंटेनर में रखना चाहिए। इसमें पानी और पौधों से प्राप्त ताजा सामग्री होती है तथा इसमें सामान्य कॉस्मेटिक प्रिजर्वेटिव मौजूद नहीं होते। इसलिए इसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना उचित नहीं है। फ्रिज में रखने के बावजूद खराब होने के संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    रंग, गंध या टेक्सचर में बदलाव नजर आए तो मिश्रण का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। घरेलू मिश्रण के लिए एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इसकी स्वच्छता, सामग्री और भंडारण की स्थिति के आधार पर इसकी गुणवत्ता बदल सकती है।

    अगर त्वचा इस मिश्रण को सहन करती है तो रात में चेहरा साफ करने के बाद थोड़ी मात्रा लगाई जा सकती है। हल्के हाथों से चेहरे और गर्दन पर इसे लगाया जा सकता है। हालांकि इसे लगाने से झुर्रियां खत्म होने या त्वचा में कोलेजन उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं है।

    दरअसल, अलसी, एलोवेरा और बादाम तेल से बने इस घरेलू मिश्रण को सीधे तौर पर कोलेजन बढ़ाने वाली प्रमाणित क्रीम कहना सही नहीं होगा। इनके त्वचा को मॉइश्चराइज करने या मुलायम बनाए रखने से जुड़े संभावित फायदे हो सकते हैं, लेकिन एंटी-एजिंग और कोलेजन उत्पादन पर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

    इस मिश्रण का इस्तेमाल शुरू करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। थोड़ी मात्रा हाथ या कान के पीछे की त्वचा पर लगाकर देखें। लालिमा, खुजली, जलन या किसी अन्य प्रतिक्रिया की स्थिति में इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। संवेदनशील त्वचा, एलर्जी या पहले से त्वचा संबंधी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

    त्वचा की देखभाल में पर्याप्त मॉइश्चराइजिंग के साथ धूप से बचाव और नियमित स्किन केयर अधिक महत्वपूर्ण हैं। झुर्रियों या उम्र से जुड़े त्वचा परिवर्तन को लेकर किसी खास उपचार की जरूरत हो तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक सुरक्षित विकल्प है।

  • महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से

    महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से


    उज्जैन  महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। खास तौर पर एक नियुक्ति को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि पिछड़े वर्ग से जुड़े एक पद पर नियुक्ति का पत्र जारी होने के बाद ही विरोध के स्वर उठने लगे। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर नई सूची सामने आई और उसमें संबंधित नाम दिखाई नहीं दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे प्रभावशाली नेताओं की आपत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग अलग दावे सामने आने की चर्चा है।

    उधर हिम्मतगढ़ की पहाड़ी से जुड़ा एक मामला भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि हाल में हुई लाखों रुपये की लूट के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने में तेजी दिखाई। चर्चा तो यहां तक है कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर उसी इलाके में फिर एकत्र हो गए जहां पुलिस को उनकी मौजूदगी का सुराग मिल गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपियों की कथित लापरवाही दोनों पर तरह तरह की बातें कही जा रही हैं।

    नागपंचमी के दौरान शिवाजी भवन से जुड़ा एक प्रसंग भी चर्चा में रहा। धार्मिक आयोजन के बीच एक श्रद्धालु को रोके जाने की बात सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान को ही आधार माना जाना चाहिए।

    प्रशासनिक गलियारों में नामांतरण से जुड़े कथित लेनदेन की चर्चाओं ने भी माहौल गर्म किया हुआ है। एक अधिकारी पर प्रति बीघा रकम मांगने के आरोपों की चर्चा है। यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है। दूसरी ओर एक अधिकारी द्वारा कथित सिफारिश पर सख्त प्रतिक्रिया दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। बताया जाता है कि सिफारिश के जवाब में नोटिस जारी करने तक की बात कही गई। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक कामकाज में दबाव और सिफारिश को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है।

    नागपंचमी की भीड़ और आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की सक्रियता चर्चा में रही। रात तक व्यवस्थाओं की निगरानी किए जाने और संभावित भीड़ वाले क्षेत्रों में पहले से इंतजाम करने की कोशिश को प्रशासनिक तैयारी के तौर पर देखा गया।

    इसी बीच एक बड़े राजनीतिक चेहरे के अचानक उज्जैन दौरे और वीआईपी गेस्ट हाउस में बैठकों की खबर ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दे दी। कार्यक्रम की सूचना को लेकर कुछ नेताओं के नाराज होने की बात कही गई लेकिन बाद में दौरा अचानक तय होने की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति सामान्य होने की चर्चा है। हेलीपैड से लेकर बैठकों तक नेताओं के बीच हल्के फुल्के तंज और राजनीतिक बातचीत का दौर भी चलता रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में उज्जैन का सियासी माहौल आने वाले दिनों में और गर्म रहने की संभावना है। बाबा की नगरी में फिलहाल राजनीति प्रशासन और सिंहस्थ की तैयारियां एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं और यही वजह है कि यहां हर छोटा बड़ा घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में नई कहानी को जन्म दे रहा है।

  • चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल

    चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    रसोई और घर में चींटियों का दिखाई देना आम समस्या है। खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में खाने-पीने की चीजों के आसपास इनकी संख्या बढ़ सकती है। चीनी, मिठाई और अन्य मीठी चीजें चींटियों को जल्दी आकर्षित करती हैं। कई बार खाने के छोटे कण या चिपचिपे अवशेष अच्छी तरह सफाई करने के बाद भी रह जाते हैं, जिनकी गंध चींटियों को उस स्थान तक पहुंचा देती है।

    एक बार चींटियां किसी जगह पर लगातार आने लगें तो उन्हें रोकना आसान नहीं होता। ऐसे में केवल उन्हें हटाने के बजाय उस जगह की नियमित सफाई करना और उनके आने के रास्ते को बाधित करना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है। कुछ घरेलू चीजों की तेज गंध भी चींटियों की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकती है।

    लौंग को चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज खुशबू उन स्थानों पर रखी जा सकती है जहां चींटियां बार-बार दिखाई देती हैं। खासतौर पर चीनी या अन्य मीठी चीजों के डिब्बों के आसपास लौंग रखने से चींटियों की आवाजाही को रोकने में मदद मिल सकती है।

    तेजपत्ता भी रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प है। तेजपत्ते को हल्का तोड़कर उन जगहों पर रखा जा सकता है जहां से चींटियां आती हैं। इसकी गंध चींटियों के लिए अप्रिय मानी जाती है और यह उनके आने वाले रास्ते को बदलने में मदद कर सकती है।

    दालचीनी का इस्तेमाल भी इसी तरह किया जा सकता है। इसे पाउडर के रूप में रसोई के दरवाजे, खिड़की या उन दरारों के पास रखा जा सकता है जहां से चींटियां अंदर आती हैं। इसकी तेज खुशबू चींटियों को उस रास्ते से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हल्दी भी एक घरेलू उपाय है। इसे उन जगहों पर हल्की रेखा के रूप में रखा जा सकता है जहां से चींटियों के घर के अंदर आने की संभावना होती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल साफ और सूखी सतह पर करना बेहतर रहता है, ताकि रसोई में गंदगी न फैले।

    नींबू का रस भी चींटियों की गंध आधारित राह को प्रभावित करने में मदद कर सकता है। इसके लिए नींबू के रस को पानी में मिलाकर उन स्थानों पर छिड़का जा सकता है जहां चींटियां दिखाई देती हैं। रसोई के फर्श, खिड़की और दरवाजे के आसपास सफाई के बाद इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सफेद सिरके और पानी का घोल भी चींटियों की आवाजाही वाले स्थानों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे फर्श, खिड़की, दरवाजे और डस्टबिन के आसपास छिड़कने से चींटियों के छोड़े हुए गंध संकेत कम करने में मदद मिल सकती है।

    पुदीने या पेपरमिंट की तेज खुशबू भी चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है। पानी में थोड़ी मात्रा में पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल मिलाकर चींटियों के आने वाले रास्तों पर हल्का स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, इसे खाने की चीजों, बर्तनों और बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।

    इन उपायों के साथ रसोई में मीठी और खाने की वस्तुओं को अच्छी तरह बंद डिब्बों में रखना, गिरे हुए खाद्य पदार्थों को तुरंत साफ करना और पानी या नमी जमा न होने देना जरूरी है। अगर चींटियों का प्रकोप लगातार बना रहे या बड़ी संख्या में चींटियां घर में फैल जाएं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उचित कीट नियंत्रण उपाय अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।

  • गोविंदा और सुनीता आहूजा ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को किया अनफॉलो, तलाक की पुरानी चर्चाओं ने फिर पकड़ा जोर

    गोविंदा और सुनीता आहूजा ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को किया अनफॉलो, तलाक की पुरानी चर्चाओं ने फिर पकड़ा जोर

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा एक बार फिर अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो न करने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने हाल में एक-दूसरे को अनफॉलो किया है या वे पहले से ही सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करते थे।

    सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुनीता आहूजा की फॉलोइंग लिस्ट में गोविंदा का नाम दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं गोविंदा की फॉलोइंग लिस्ट में भी सुनीता का नाम नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। हालांकि, सुनीता गोविंदा से जुड़े एक फैन पेज को फॉलो करती हैं। इसी सोशल मीडिया गतिविधि को लेकर दोनों के रिश्ते में कथित दूरी की चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं।

    गोविंदा और सुनीता के रिश्ते को लेकर पहले भी कई बार खबरें सामने आती रही हैं। पिछले कुछ समय में दोनों के बीच कथित अनबन और तलाक की चर्चाओं ने खासा ध्यान खींचा था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सुनीता ने दिसंबर 2024 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसमें बेवफाई, मानसिक प्रताड़ना और साथ छोड़ने जैसे आरोपों का उल्लेख होने की बात कही गई थी।

    बाद में गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा की ओर से कहा गया था कि सुनीता ने तलाक का मामला वापस ले लिया है। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं में कुछ समय के लिए कमी आई थी। हालांकि, अब इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करने की बात सामने आने के बाद पुरानी अटकलें फिर चर्चा में आ गई हैं।

    सुनीता ने एक बातचीत के दौरान तलाक का मामला वापस लेने की वजह को लेकर भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने गोविंदा के दोबारा शादी करने की योजना से जुड़ी बात कही थी और इस मामले में राखी सावंत से समर्थन मांगा था। हालांकि, गोविंदा के मैनेजर की ओर से दूसरी शादी से जुड़ी खबरों को लेकर अलग रुख सामने आया था। ऐसे में इस मामले में दोनों पक्षों की बातें अलग-अलग रही हैं।

    हाल ही में गोविंदा अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ नजर आए थे। दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सुनीता ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने गोविंदा और कोमल की साथ में मौजूदगी पर टिप्पणी करते हुए अपने पति से जुड़े इस मामले पर सवाल उठाए थे। सुनीता की प्रतिक्रिया के बाद भी दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हुआ था।

    गोविंदा और सुनीता ने वर्ष 1987 में गुपचुप शादी की थी। बताया जाता है कि अभिनेता ने अपने फिल्मी करियर को देखते हुए लंबे समय तक अपनी शादी को सार्वजनिक नहीं किया था। बाद में दोनों की शादी और पारिवारिक जीवन बॉलीवुड में चर्चा का विषय बना रहा।

    फिलहाल इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करने की खबर को लेकर दोनों की ओर से रिश्ते में किसी नई परेशानी या तलाक की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आई इस जानकारी के आधार पर उनके रिश्ते को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि इस घटना ने गोविंदा और सुनीता की शादी से जुड़ी पुरानी चर्चाओं को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति

    भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति


    नई दिल्ली ।
    भारत और भूटान के बीच लंबे समय से कायम मित्रता अब विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच पिछले एक वर्ष के दौरान आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है।

    भारत और भूटान के संबंध 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना पर आधारित हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है और भारत की विकास भागीदारी अब केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। इसे भूटान की दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

    हाल में हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के लिए भारत की ओर से घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई। इस सहयोग पैकेज का बड़ा हिस्सा प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है।

    इसमें 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत-भूटान सहयोग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विकास परियोजनाओं को भूटान की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्वामित्व मजबूत होने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। भारत की जेएसडब्ल्यू एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है। इसमें भूटानी कंपनी की 51 प्रतिशत और भारतीय कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा सक्रिय हुई है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाना है। इससे भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता विस्तार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देश सीमा क्षेत्र को केवल भौगोलिक संपर्क के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले के बीच नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है।

    इस मार्ग से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उपलब्ध होंगे।

    भारत-भूटान सहयोग का विस्तार डिजिटल और डाक सेवाओं तक भी हुआ है। गुवाहाटी में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पॉसट्रांसफर व्यवस्था को भारत की यूपीआई प्रणाली से जोड़ने की पहल शामिल है।

    रेल संपर्क भी भविष्य के सहयोग का अहम हिस्सा है। भूटान के पास अभी घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में भूटानी माल ढुलाई को तेज, कम लागत वाला और अधिक कुशल परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।

    इस तरह भारत और भूटान के रिश्ते अब पारंपरिक विकास सहायता से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क के साझा हितों पर आधारित व्यापक साझेदारी में बदल रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।