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  • Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार

    Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार


    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त चर्चा बटोरी है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग पर टिकी हुई है। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 की सुबह उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम 247 रुपये प्रति शेयर बताया जा रहा है। IPO का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये निर्धारित किया गया था जबकि ग्रे मार्केट में शेयर का अनुमानित भाव 1366 रुपये तक पहुंच गया है। इस आधार पर शेयर करीब 22.07 प्रतिशत के प्रीमियम पर कारोबार करते बताए जा रहे हैं।

    ग्रे मार्केट के मौजूदा संकेतों ने उन निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं जिन्होंने जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में पैसा लगाया है। हालांकि निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित लिस्टिंग प्रदर्शन का संकेत देता है। इसे वास्तविक लिस्टिंग प्राइस या निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं माना जा सकता है। शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय परिस्थितियों के अनुसार कीमत में बदलाव हो सकता है।

    एक लॉट पर 2964 रुपये के मुनाफे का अनुमान

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं। कंपनी के शेयरों का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये होने के कारण एक लॉट के लिए निवेशकों को 13428 रुपये लगाने होते हैं। वहीं ग्रे मार्केट में 1366 रुपये प्रति शेयर के अनुमानित भाव के आधार पर 12 शेयरों की कीमत 16392 रुपये बैठती है। इस तरह दोनों कीमतों के बीच प्रति शेयर 247 रुपये का अंतर है। एक लॉट के हिसाब से यह अंतर 2964 रुपये तक पहुंच जाता है।

    इस गणना के अनुसार यदि ग्रे मार्केट का प्रीमियम लिस्टिंग तक बना रहता है और शेयर इसी अनुमानित भाव पर सूचीबद्ध होते हैं तो एक लॉट पाने वाले निवेशक को करीब 2964 रुपये का संभावित फायदा हो सकता है। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग इस अनुमान से अलग हो सकती है। निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के आंकड़ों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    28 अक्टूबर को हो सकती है शेयरों की लिस्टिंग

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को NSE और BSE पर प्रस्तावित है। IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। जिन निवेशकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे उनके रिफंड 27 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। अलॉटमेंट की स्थिति सामने आने के बाद निवेशक यह जान सकेंगे कि उन्हें कंपनी के शेयर मिले हैं या नहीं। इसके बाद बाजार की निगाहें लिस्टिंग के दिन शेयर के प्रदर्शन पर रहेंगी।

    22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ने दिखाई निवेशकों की दिलचस्पी

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को निवेशकों का जोरदार समर्थन मिला। तीन दिन की बोली प्रक्रिया के दौरान इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने की जानकारी सामने आई। निवेशक श्रेणियों के आंकड़ों के मुताबिक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB श्रेणी में 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII श्रेणी में यह आंकड़ा करीब 14 गुना रहा जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इन आंकड़ों से पता चलता है कि IPO में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी काफी मजबूत रही।

    30213 करोड़ रुपये के IPO ने बनाया रिकॉर्ड

    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

    अब निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर है। ग्रे मार्केट में दिखाई दे रही तेजी ने बाजार की उम्मीदों को बढ़ाया है लेकिन वास्तविक प्रदर्शन का पता लिस्टिंग के समय ही चलेगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित

    MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी खरीद (Public Procurement) के दौरान वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के मामलों में कार्रवाई की गई है. नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे के मुताबिक, अलग-अलग स्तर के 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है. इनमें करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) भी शामिल हैं. अब तक सात अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

    विभाग ने गलत दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने के मामलों में 80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की है. संजय दुबे ने कहा कि अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर अलग-अलग कार्रवाई
    ACS संजय दुबे के अनुसार, कार्रवाई में अलग-अलग स्तर के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं. मामलों की गंभीरता के आधार पर संबंधित लोगों की वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति, बर्खास्तगी और सरकारी नुकसान की वसूली जैसे कदम उठाए गए हैं.

    उन्होंने कहा कि जिस मामले में जितनी बड़ी अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाती है. विभाग का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय करना प्राथमिकता है.


    80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स पर भी एक्शन

    कार्रवाई केवल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. विभाग के मुताबिक, गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने से जुड़े मामलों में 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं.

    नगरीय निकायों की खरीद प्रक्रिया में सामने आए मूल्य अंतर और वित्तीय अनियमितताओं की पहचान के लिए विभाग डिजिटल रिकॉर्ड और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहा है. विभागीय निगरानी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी सहारा लिया जा रहा है.


    सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर जोर

    ACS संजय दुबे के मुताबिक, उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नगरीय निकायों के पास उपलब्ध सरकारी धन और उनकी आय का इस्तेमाल नागरिकों के हित में हो. खरीद और भुगतान की प्रक्रिया में अनियमितता मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है. तकनीक और AI से निगरानी जारी है. सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग और नागरिकों तक उसका पूरा लाभ पहुंचे.

  • ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं


    नई दिल्ली। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में उन्होंने दक्षिणपंथी नेता और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हरा दिया। ब्राजील के चुनावी न्यायालय के मुताबिक, लूला को 51.79% और फ्लेवियो को 48.21% वोट मिले। लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी राजनीति का प्रभाव बढ़ रहा है। जीत के बाद लूला ने स्पष्ट कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है।

    करीब 44 लाख वोटों से जीते लूला

    ब्राजील के चुनावी न्यायालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 100% मतगणना पूरी होने के बाद लूला को 6 करोड़ 42 लाख 56 हजार 232 वोट मिले, जबकि फ्लेवियो बोल्सोनारो के खाते में 5 करोड़ 98 लाख 26 हजार 41 वोट आए। दोनों के बीच करीब 44.3 लाख वोटों का अंतर रहा।

    80 वर्षीय लूला ने पहले दौर के चुनाव में फ्लेवियो से पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में जीत दर्ज की। पहले चरण में फ्लेवियो को 47.03% और लूला को 45.16% वोट मिले थे। इसके बाद दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

    लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा और वह 2030 तक राष्ट्रपति पद पर रहेंगे। इससे पहले वह 2003 से 2010 तक दो कार्यकाल राष्ट्रपति रह चुके हैं और 2023 में तीसरी बार सत्ता में लौटे थे।

    बोले- ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    जीत के बाद लूला ने ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है। उनका संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और टैरिफ दबाव को लेकर ब्राजील-अमेरिका संबंध चर्चा में हैं।

    लूला ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेशी हस्तक्षेप की कोशिशों को नाकाम किया। लूला ने यह भी कहा कि वह शासन के तरीके में बदलाव करेंगे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाएंगे।

    उनके मुताबिक, चुनाव के बाद अब प्राथमिकता देश को चलाने के तरीके में बदलाव लाने और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की होगी।

    ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी राजनीति के बीच लूला की जीत

    लूला की जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। क्षेत्र के कई देशों में दक्षिणपंथी नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में ब्राजील में वामपंथी नेता की जीत क्षेत्रीय राजनीतिक रुझानों से अलग तस्वीर पेश करती है।

    ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में लूला की सरकार के सामने घरेलू आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने की चुनौती भी रहेगी। अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच ब्राजील अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और स्वतंत्र व्यापार नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

    लैटिन अमेरिका के दो बड़े देशों ब्राजील और मैक्सिको में वाम-मध्य विचारधारा के नेता सत्ता में हैं। लूला की जीत से क्षेत्रीय राजनीति में इन सरकारों की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।

    फ्लेवियो बोल्सोनारो ने नतीजे को चुनौती देने की बात कही

    चुनाव में हार के बाद फ्लेवियो बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार करने से इनकार करते हुए चुनाव रद्द कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई। यह फैसला मतदान के दिन आखिरी समय में लिया गया था, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    हालांकि, ब्राजील के चुनावी न्यायालय ने लूला की जीत की आधिकारिक घोषणा कर दी है। चुनाव परिणाम को चुनौती देने की फ्लेवियो की घोषणा के बाद अब इस मामले में संभावित कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

    लूला की जीत के साथ ब्राजील में अगले चार साल के लिए राजनीतिक दिशा तय हो गई है। उनकी सरकार के सामने आर्थिक विकास, सामाजिक नीतियों, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे।

  • MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान

    MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान


    रायसेन।
    बीते दिनों मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीलगढ़ में कई आदिवासी परिवारों (Tribal Families) को विस्थापित कर दिया गया था, जिसपर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को लेकर अब शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। चौहान विस्थापित हुए सभी परिवारों के लिए 15 लाख रुपए राहत कोष से देने का ऐलान किया है। शिवराज सिंह ने 15 लाख रुपए के साथ आदिवासी परिवारों को 5 एकड़ खेती की जमीन भी देने का ऐलान किया है।


    क्या बोले शिवराज सिंह चौहान

    नीलगढ़ के विस्थापित आदिवासी परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये आदिवासी परिवार नीलगढ़ में सालों से रहते आ रहे हैं और जंगल बचाने के लिए अपनी जमीन, अपनी घर और अपना गांव छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं, इसके लिए मैं उनके लिए सम्मान प्रकट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा आदिवासी परिवारों का ये त्याग जंगल को बचाने के लिए है।

    इस मामले पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री थे, तभी उनके लिए राहत पैकेज का ऐलान किया गया था। चौहान ने कहा कि अब इन परिवारों को नया नीलगढ़ में विस्थापित किया जा रहा है, जहां उन्हें 15 लाख रुपए और खेती करने के लिए हाईवे से लगी हुई 5 एकड़ जमीन दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सभी ऐलान विस्थापित परिवारों की राहत के लिए किए जा रहे हैं।


    विस्थापित परिवारों ने दिया न्योता

    विस्थापित परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इन आदिवासी परिवार के लोगों ने उन्हें नया नीलगढ़ में विस्थापित होने से पहले उन्हें और स्थानीय विधायक को अपने प्रोग्राम में आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि आदिवासी परिवार ये प्रोग्राम सालों से करते आ रहे हैं।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन परिवारों के बीच प्रोग्राम में जाना बहुत ही भावुक पल होगा। उन्होंने कहा कि जंगल बचाने के लिए गांव के लोग अपना घर, अपना गांव सब छोड़कर दूसरी जगह जा रहे होंगे। ऐसे में उनके साथ रहना एक भावुक पल होगा। चौहान ने कहा कि वो इन परिवारों के साथ बैठेंगे और उनकी विस्थापन के लिए हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं।

  • MP: हाथियों से टूटे घरों को पक्का बनाकर देगी सरकार… CM मोहन यादव ने किया ऐलान

    MP: हाथियों से टूटे घरों को पक्का बनाकर देगी सरकार… CM मोहन यादव ने किया ऐलान


    शहडोल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने 2024 के संग्रह वर्ष के लिए तेंदू पत्ता (Tendu leaves) इकट्ठा करने वाले 9.77 लाख लोगों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 22.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जिन परिवारों के घर हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ‘पक्के’ घर दिए जाएंगे. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऐसी खबरें हैं कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से 37 और जंगली हाथी शहडोल में आ गए हैं, जिससे हाथियों की कुल संख्या 62 हो गई है।

    शहडोल में तेंदू पत्ता बोनस वितरण और विकास कार्यों से जुड़े एक कार्यक्रम में यादव ने कहा, “हमारी सरकार फाइलों से नहीं, बल्कि फैसलों से चलती है. यह जन कल्याण, विकास और समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रही है. विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और हर परिवार को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

    अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने शहडोल जिले में 461.73 करोड़ रुपये की लागत वाले 134 विकास कार्यों की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया. उन्होंने 22.14 करोड़ रुपये की लागत से बनी वन विभाग की एक कार्यालय इमारत का भी उद्घाटन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बोनस का वितरण इस बात को दर्शाता है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि तेंदू पत्ता इकट्ठा करने वालों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले।


    शहडोल में तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण

    उन्होंने उन लोगों के लिए ‘पक्के’ घरों की घोषणा की, जिनके घर जंगली हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे। यादव ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास ‘रेस्क्यू ज़ू सेंटर’ (बचाव चिड़ियाघर केंद्र) स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ‘होमस्टे’ (पर्यटकों के ठहरने की जगह) बनाने के लिए 2 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी देगी।

    यादव ने कहा, “सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और वन उत्पादों पर निर्भर परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रही है.” शहडोल संभाग में फुटबॉल के प्रति लोगों की रुचि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में युवा खेल प्रतिभाओं को निखारने की काफी संभावनाएं हैं. उन्होंने बताया कि 5.10 करोड़ रुपये की लागत से खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. यादव ने शहडोल में एक इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इससे बच्चों और युवाओं को अलग-अलग खेलों का अभ्यास करने और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने के बेहतर अवसर मिलेंगे.

    शहडोल में प्रस्तावित स्टील प्लांट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके शुरू होने पर लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा। विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से कांग्रेस नेता असहज हैं. अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का भी जिक्र किया।

    इस बीच, शहडोल दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी के नेतृत्व में आए इन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कार्यक्रम स्थल से कुछ दूरी पर ही रोक दिया। हाथापाई के बाद, पुलिस ने कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. अवस्थी ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।

  • दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा

    दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा


    शाजापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंदुत्व का नहीं। सिंह ने दावा किया कि ‘हिंदुत्व’ शब्द विनायक दामोदर सावरकर ने दिया था। अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के सिलसिले में शाजापुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने कहा कि सनातन धर्म का संदेश प्रेम, स्नेह और करुणा है। उन्होंने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सभी धर्मों के लोगों से इससे जुड़ने की अपील भी की।

    बोले- मां ने सनातन धर्म की सीख दी

    शाजापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सनातन धर्म के बारे में सिखाया था। उनके अनुसार, सनातन धर्म प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है।

    सिंह ने कहा, “मैं सनातन धर्म का समर्थन करता हूं, हिंदुत्व का नहीं।” उन्होंने दावा किया कि हिंदुत्व शब्द सावरकर ने दिया था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि हिंदुत्व का समानता से कोई लेना-देना नहीं है।

    कुरान का भी किया जिक्र

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुरान का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुरान पढ़ी है। कांग्रेस नेता ने ‘काफिर’ शब्द का अर्थ बताते हुए दावा किया कि इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होता है, जो किसी धर्म का पालन नहीं करता और ‘अधर्म’ यानी गलत रास्ते पर चलता है।

    उज्जैन से शुरू हुई यात्रा अयोध्या में होगी समाप्त

    दिग्विजय सिंह इन दिनों ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर हैं। यह यात्रा इसी सप्ताह उज्जैन से शुरू हुई थी और अयोध्या में समाप्त होगी। शाजापुर के बाद यात्रा राजगढ़ जिले की ओर बढ़ेगी।

    सिंह ने इस यात्रा को गैर-राजनीतिक पहल बताया। उन्होंने कहा, “अगर यह राजनीतिक होती, तो इसमें केवल कांग्रेस कार्यकर्ता ही शामिल होते।” उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सभी धर्मों के लोग यात्रा से जुड़ें।

    यात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह सनातन धर्म से जुड़े अपने विचार रख रहे हैं। शाजापुर में उनके बयान के बाद सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई है।

  • खरगोन के नर्मदा किनारे मिले हजारों वोटर ID कार्ड, ज्यादातर राऊ विधानसभा के, कांग्रेस ने की FIR की मांग

    खरगोन के नर्मदा किनारे मिले हजारों वोटर ID कार्ड, ज्यादातर राऊ विधानसभा के, कांग्रेस ने की FIR की मांग


    खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इनमें ज्यादातर कार्ड इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडलेश्वर थाने के सामने प्रदर्शन कर एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासन ने कार्ड जब्त कर लिए हैं और पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। हालांकि, ये कार्ड नदी किनारे कैसे और कब पहुंचे, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।

    सफाई अभियान के दौरान मिले वोटर ID कार्ड

    मामला रविवार सुबह का है। मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर निस्वार्थ सेवा समिति की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान नदी किनारे लावारिस हालत में बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड दिखाई दिए। इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी गई।

    जानकारी मिलते ही राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्ड एकत्रित किए। अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा भी तैयार किया। शुरुआती जानकारी में इन मतदाता पहचान पत्रों का संबंध इंदौर की राऊ विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। हालांकि, कार्डों की कुल संख्या और उनके वहां पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इतने सारे मतदाता पहचान पत्र नर्मदा किनारे किसने और किस वजह से छोड़े। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि कार्ड वहां कब पहुंचे और इस मामले में किसी की लापरवाही की भूमिका रही है या नहीं।

    कांग्रेस ने थाने के सामने किया प्रदर्शन

    वोटर ID कार्ड मिलने की जानकारी सामने आने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नायक के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता मंडलेश्वर थाने पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन किया और पुलिस को आवेदन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

    रवि नायक ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र नदी किनारे कैसे पहुंचे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    कांग्रेस ने नर्मदा नदी के आसपास तलाशी अभियान चलाने की मांग भी की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां और मतदाता पहचान पत्र तो नहीं पड़े हैं। पार्टी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

    हालांकि, कार्डों के नदी किनारे मिलने के पीछे क्या कारण है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।

    प्रशासन ने कार्ड जब्त किए, अधिकारियों को सौंपी जांच

    महेश्वर की एसडीएम पूर्वा मंडलोई ने बताया कि मामले की जांच के लिए तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा गया था। वहां पंचनामा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कार्डों की संख्या के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    मंडलेश्वर की एसडीओपी श्वेता शुक्ला के मुताबिक, नर्मदा घाट पर सफाई के दौरान मतदाता पहचान पत्र मिलने की सूचना मिली थी। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने कार्ड जब्त किए। पुलिस को कांग्रेस की ओर से भी आवेदन मिला है और मामले की जांच थाना प्रभारी को सौंपी गई है। जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मतदाता पहचान पत्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल

    नर्मदा किनारे बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड मिलने के मामले ने मतदाता पहचान पत्रों के रखरखाव और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर शुरुआती जानकारी में कार्डों का संबंध इंदौर की राऊ विधानसभा क्षेत्र से बताए जाने के बाद मामले पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये कार्ड किसके हैं, नदी किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें वहां छोड़ने के पीछे क्या वजह थी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • करवा चौथ पर MP में बिगड़ेगा मौसम, 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    करवा चौथ पर MP में बिगड़ेगा मौसम, 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में करवा चौथ के दिन बारिश और बादलों के कारण चांद के दीदार में परेशानी हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर रहने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश के 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम में बदलाव का असर मंगलवार से ही दिखाई देने लगेगा, जबकि अन्य जिलों में भी बादल छाने और बारिश होने की संभावना है।

    11 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    मौसम विभाग के अनुसार, 29 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं, छतरपुर, कटनी, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा और सिवनी में भारी बारिश हो सकती है।

    इन जिलों में 24 घंटे के दौरान करीब ढाई से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ होने के कारण बादलों की मौजूदगी और बारिश से व्रत रखने वाली महिलाओं को चांद निकलने का इंतजार करना पड़ सकता है।

    बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली सक्रिय

    मौसम में इस बदलाव की वजह बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली है। पूर्व-मध्य और उससे लगे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर अवदाब यानी डिप्रेशन सक्रिय हुआ है। इसके आने वाले दिनों में और मजबूत होकर गहरे अवदाब में बदलने की संभावना है।

    इसके अलावा 26 अक्टूबर को चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से मौसम प्रणाली के और तीव्र होने तथा चक्रवाती तूफान में बदलने का अनुमान जताया गया है। 27 और 28 अक्टूबर तक इसके भीषण चक्रवाती तूफान का रूप लेने की संभावना बताई गई है। इस प्रणाली का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में देखने को मिल सकता है।

    मानसून की वापसी के बाद प्रदेश में एक बार फिर भारी बारिश की स्थिति बनने की आशंका है। इसी वजह से मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है।

    रात में बढ़ी ठंडक, करौंदी में पारा 13.7 डिग्री

    बारिश की चेतावनी के बीच प्रदेश में रात के तापमान में ठंडक महसूस की जा रही है। बीती रात कटनी जिले के करौंदी में न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।

    छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री, इंदौर और मलाजखंड में 14.6 डिग्री, दमोह में 15 डिग्री तथा शाजापुर में 15.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    दिन के तापमान में दो डिग्री तक बढ़ोतरी

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान करीब दो डिग्री तक बढ़ा है। खजुराहो, भोपाल और उज्जैन में अधिकतम तापमान 35.5 से 36.1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

    वहीं, अमरकंटक में दिन के समय भी अपेक्षाकृत ठंडक बनी हुई है। यहां अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनी के बीच अब प्रदेश के लोगों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर रहेगी।

  • मुंबई में बीच में रोका गया शिल्पा राव का परफॉर्मेंस, माइक बंद होने पर भावुक हुईं सिंगर….

    मुंबई में बीच में रोका गया शिल्पा राव का परफॉर्मेंस, माइक बंद होने पर भावुक हुईं सिंगर….

    नई दिल्ली । मुंबई में 24 अक्टूबर को आयोजित एक बॉलीवुड म्यूजिक प्रोजेक्ट की 10वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में सिंगर शिल्पा राव की परफॉर्मेंस बीच में रोक दिए जाने का मामला चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान उनका माइक बंद कर दिया गया और स्टेज की लाइटें भी बुझा दी गईं। बताया गया कि इस घटनाक्रम के कारण शिल्पा को अपनी प्रस्तुति पूरी करने और दर्शकों से ठीक से विदा लेने का मौका नहीं मिला। करीब 15 मिनट तक चले इस घटनाक्रम से सिंगर के साथ वहां मौजूद दर्शक भी हैरान रह गए।

    कार्यक्रम में कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। हालांकि, शिल्पा राव की परफॉर्मेंस बीच में रोके जाने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इवेंट का निर्धारित शेड्यूल देरी से चल रहा था। इसी वजह से उनकी प्रस्तुति को बीच में रोकने का फैसला लिया गया। उस समय दर्शक शिल्पा को सुनने के लिए उत्साहित थे और लगातार उनका नाम लेकर आवाज लगा रहे थे।

    बताया गया कि माइक बंद होने के बाद शिल्पा को अपने प्रशंसकों से ठीक से विदा लेने का अवसर भी नहीं मिला। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, कार्यक्रम में परफॉर्मेंस रोकने के फैसले को लेकर आयोजकों की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटनाक्रम के बाद शिल्पा राव ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि मुंबई में उस रात उनके दिल का एक हिस्सा टूट गया। सिंगर ने कहा कि जब किसी खूबसूरत मंच पर चल रही प्रस्तुति को इस तरह बीच में रोक दिया जाता है, तो दुख होता है। उनकी पोस्ट से कार्यक्रम के दौरान हुए अनुभव और दर्शकों के साथ उनके जुड़ाव का पता चला।

    शिल्पा ने अपनी पोस्ट में उन प्रशंसकों का भी आभार जताया, जो संगीत बंद होने के बाद भी उनका समर्थन करते रहे। उन्होंने बताया कि परफॉर्मेंस रुकने के बावजूद दर्शक उनका नाम पुकारते रहे। उनके मुताबिक, प्रशंसकों की आवाज में मौजूद प्यार ने उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया। इस घटना के दौरान संगीत भले ही रुक गया, लेकिन दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ।

    सिंगर ने अपनी पोस्ट में कहा कि उस रात उनकी और दर्शकों की कहानी अधूरी रह गई। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई लौटकर दोबारा परफॉर्म करने का वादा भी किया। शिल्पा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मुंबई से बहुत प्यार करती हैं और आगे भी करती रहेंगी। उनकी इस बात से संकेत मिला कि कार्यक्रम में हुए अनुभव के बावजूद शहर और वहां के प्रशंसकों के प्रति उनका लगाव बना हुआ है।

    शिल्पा राव की पोस्ट सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों का समर्थन भी चर्चा का हिस्सा बन गया। कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति रोके जाने की वजह से जहां निराशा की बात सामने आई, वहीं संगीत बंद होने के बाद भी दर्शकों द्वारा उनका नाम पुकारते रहने को उन्होंने खास महत्व दिया। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रम के शेड्यूल में देरी को परफॉर्मेंस रोकने की वजह बताया गया है। आयोजकों की ओर से इस मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा


    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि शहर की पिछली विकास योजना वर्ष 2005 में समाप्त हो गई थी और इसके बाद से भोपाल में नई विकास योजना लागू नहीं हो सकी है। कांग्रेस ने प्रस्तावित प्रारूप में कानूनी प्रक्रियाओं, भूमि उपयोग, सार्वजनिक परिवहन, सस्ते आवास, हरित क्षेत्रों और जल प्रबंधन से जुड़ी कई कमियां होने का दावा किया है।
    कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल के दौरान भोपाल विकास योजना 2031 का प्रारूप प्रकाशित किया गया था। उनके अनुसार, उस प्रक्रिया में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई थी और 3,000 से अधिक आपत्तियों पर सुनवाई भी हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि केवल अंतिम अधिसूचना जारी होना बाकी था, लेकिन बाद में भाजपा सरकार ने उस योजना को निरस्त कर दिया। कांग्रेस ने इस फैसले की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस ने प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में पांच प्रमुख कानूनी खामियां होने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, प्रारूप में वर्ष 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का राजपत्र में उल्लेख तो किया गया, लेकिन उसका विधिवत प्रकाशन और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कांग्रेस ने नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं दिखाने से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं होने का भी दावा किया है।

    पार्टी ने आरक्षित भूमि के मालिकों के लिए मुआवजे या क्षतिपूर्ति की व्यवस्था, शहर के जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और वर्ष 2005 की योजना के हरित क्षेत्रों में किए गए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस के मुताबिक, भोपाल के 18 जल निकायों में से केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को शामिल किया गया है, जबकि सभी जल निकायों के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    प्रस्तावित योजना की परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि विकास का प्रारूप लोगों की जरूरतों के बजाय वाहनों की आवाजाही पर अधिक केंद्रित है। अभय दुबे के अनुसार, शहर में लगभग 54 प्रतिशत यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं, लेकिन मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन के लिए स्पष्ट लक्ष्य, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित क्षेत्रों का पर्याप्त प्रावधान नहीं है।

    कांग्रेस ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में करीब 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास के लिए प्रस्तावित किया गया है, लेकिन घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो और किफायती आवास जैसे जरूरी प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। इसी तरह, 51 किलोमीटर लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में 2,449 हेक्टेयर भूमि पर सघन विकास प्रस्तावित होने पर भी आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इस क्षेत्र में मेट्रो या बस लेन जैसी परिवहन सुविधाएं नहीं हैं।

    भूमि उपयोग और आवास के संबंध में भी पार्टी ने प्रारूप की आलोचना की है। कांग्रेस के दावे के अनुसार, आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत कम है। इसी वजह से योजना का क्षेत्रफल 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने करीब 4.8 लाख झुग्गीवासियों वाले शहर में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।

    हरित क्षेत्र और जल आपूर्ति को लेकर कांग्रेस ने कहा कि प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र के लिए 10 से 12 वर्ग मीटर के मानक के मुकाबले प्रस्तावित योजना में लगभग 7 वर्ग मीटर का प्रावधान है। पार्टी ने पानी की उपलब्धता के अनुमान पर भी सवाल उठाए हैं। उसके अनुसार, योजना में जल जरूरतों का आकलन वर्ष 2031 तक किया गया है और 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी बताई गई है, लेकिन इसके स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि चिन्हित नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।

    कांग्रेस ने शहर के विस्तार पर अनुमानित 59 हजार करोड़ रुपये के खर्च के लिए स्पष्ट वित्तीय योजना की मांग की है। पार्टी ने भूमि उपयोग मानचित्र की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने, संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने और सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, हरित क्षेत्रों तथा जल प्रबंधन को लेकर ठोस प्रावधान शामिल करने की मांग की है। ये सभी आपत्तियां कांग्रेस की ओर से उठाई गई हैं; प्रस्तावित मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय और संबंधित विभागों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।