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  • इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव

    इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में एक निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने सब्जी व्यापारी नरेंद्र साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। युवती का आरोप है कि व्यापारी पिछले करीब 20 दिनों से उसे देखकर अश्लील इशारे करता था और आपत्तिजनक हरकतों के जरिए परेशान कर रहा था। शनिवार रात हुई घटना के बाद युवती ने पुलिस से शिकायत की जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

    द्वारकापुरी पुलिस के मुताबिक युवती फूटी कोठी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती है। अस्पताल के बाहर सब्जियों की दुकानें लगती हैं जिनमें से एक दुकान नरेंद्र साहू की बताई गई है। युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी उसे देखकर अश्लील हरकतें करता था और इस वजह से वह कई दिनों से परेशान थी। मामले में पुलिस ने युवती के आरोपों के आधार पर प्रकरण दर्ज किया है।

    शिकायत के मुताबिक शनिवार रात अस्पताल से निकलने के दौरान युवती के साथ यह घटना हुई। अस्पताल का गार्ड उसे गेट तक छोड़ने आया था। युवती उस समय अपने भाई का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोप है कि नरेंद्र साहू ने जानबूझकर अश्लील हरकत करते हुए अपना निजी अंग दिखाया। युवती ने इसका विरोध करते हुए आरोपी को ललकारा तो अस्पताल का स्टाफ भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद आरोपी वहां से चला गया।

    घटना के बाद युवती अपनी बहन के साथ द्वारकापुरी थाने पहुंची और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।

    इसी बीच इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में भी छेड़छाड़ और परेशान करने का एक अलग मामला सामने आया है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने संजय नाम के युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। छात्रा का आरोप है कि उसके साथ पहले पढ़ने वाला संजय उसे लगातार मोबाइल फोन पर कॉल करता था और मिलने के लिए दबाव बनाता था।

    शिकायत के अनुसार एक दिन पहले युवक छात्रा के घर के बाहर पहुंच गया और फोन कर उससे जबरन मिलने की जिद करने लगा। लगातार परेशान किए जाने से छात्रा ने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। शनिवार को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

    इंदौर में सामने आए इन दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। एक मामले में निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने सब्जी व्यापारी पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है जबकि दूसरे मामले में नाबालिग छात्रा ने परिचित युवक पर मिलने के लिए दबाव बनाने की शिकायत की है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।

  • अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    नई दिल्ली ।अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी परेशानियों के बीच ईरान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार जारी रखने और उसे विस्तार देने की अपील की है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारतीय कारोबारियों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन ऊर्जा, कृषि और जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं।

    ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी समस्याओं ने दोनों देशों के व्यापार को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद ईरान भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर जोर दे रहा है। फतहली के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है और व्यापार को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

    बासमती चावल की आपूर्ति पर भी ईरान ने भरोसा दिलाया है। ईरान भारत से बासमती चावल और चाय खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में प्रतिबंधों और भुगतान में आ रही दिक्कतों के बीच इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फतहली ने भारतीय बासमती चावल समेत जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की आशंका को खारिज किया।

    ईरानी राजदूत के अनुसार, उनका देश संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने की तैयारी कर चुका है और आयात के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके पीछे केवल आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यापक आर्थिक दबाव भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है।

    फतहली ने कहा कि ईरान लगभग 47 वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इस दौरान उसने उनके प्रभाव को कम करने के तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके 15 पड़ोसी देश व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी के लिए नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। ईरान दूसरे देशों के साथ पारस्परिक लाभ वाले संबंध बनाए रखने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।

    भारत और ईरान के कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हुई है। फतहली ने बताया कि भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी अंतिम समझौते या नई व्यवस्था की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे उपायों को तय करने और लागू करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत तथा संबंधित पक्षों के बीच समन्वय जरूरी होगा।

    चाबहार बंदरगाह को लेकर भी ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। भारत के संचालन से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।

    फतहली ने कहा कि ईरान चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विकास में योगदान देने के इच्छुक किसी भी देश के निवेश और भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। हालांकि, बंदरगाह से संबंधित आगे की व्यवस्था और भारत-ईरान व्यापार को प्रभावित करने वाली बाधाओं के समाधान के लिए बातचीत तथा समन्वय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

  • बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत

    बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत


    नई दिल्ली ।
    भारत में औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ बुजुर्गों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही हैं। कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों पर व्यापक चर्चा होती है, लेकिन डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश के बढ़ते खतरे और उससे प्रभावित लोगों की देखभाल पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। यह बीमारी केवल याददाश्त को प्रभावित नहीं करती, बल्कि व्यक्ति की पहचान, निर्णय लेने की क्षमता, स्वतंत्रता और रोजमर्रा के जीवन को भी मुश्किल बना सकती है। ऐसे में भारत में एक समर्पित राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।

    डिमेंशिया ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। अल्जाइमर रोग इसके प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन डिमेंशिया केवल अल्जाइमर तक सीमित नहीं है। गंभीर अवस्था में मरीज परिचित लोगों को पहचानने, दैनिक गतिविधियां करने और अपने आसपास हो रही घटनाओं को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इससे उसकी सुरक्षा के साथ गरिमा और स्वायत्तता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

    भारत में इस समस्या का वास्तविक आकार समझने के लिए उपलब्ध आंकड़े महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। वर्ष 2017 से 2020 के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित एक राष्ट्रीय अध्ययन में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में डिमेंशिया की व्यापकता 7.4 प्रतिशत आंकी गई थी। इस दर को जनसंख्या अनुमानों पर लागू करते हुए शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में देश में लगभग 88 लाख मामले होने का अनुमान लगाया था। यदि यह दर अपरिवर्तित रहती है, तो वर्ष 2036 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 1.69 करोड़ तक पहुंच सकती है।

    दुनिया के अन्य देशों में भी डिमेंशिया गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंग्लैंड और वेल्स में वर्ष 2025 के दौरान यह सभी मौतों के 12.7 प्रतिशत मामलों से जुड़ा था। महिलाओं की मौतों में इसका हिस्सा 16.5 प्रतिशत बताया गया। अमेरिका में वर्ष 2024 के दौरान लगभग 10 प्रतिशत मौतों के लिए डिमेंशिया जिम्मेदार था। भारत में मृत्यु संबंधी आंकड़ों की विश्वसनीयता सीमित होने के कारण इस बीमारी के प्रभाव का सटीक आकलन करना कठिन है।

    चिकित्सा विज्ञान में प्रगति ने लोगों की उम्र बढ़ाने में मदद की है, लेकिन लंबा जीवन हमेशा बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी नहीं देता। अल्जाइमर की कुछ नई दवाएं शुरुआती चरण में पहचाने गए चुनिंदा मरीजों में संज्ञानात्मक गिरावट की गति को कुछ हद तक धीमा कर सकती हैं। हालांकि, ये दवाएं डिमेंशिया का पूर्ण इलाज नहीं हैं और न ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मस्तिष्क को पहले जैसी स्थिति में ला सकती हैं। इसलिए शुरुआती पहचान, नियमित देखभाल और परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

    डिमेंशिया का प्रभाव मरीज तक सीमित नहीं रहता। गंभीर अवस्था में व्यक्ति को भोजन करने, नहाने, शौचालय जाने और सुरक्षित रहने के लिए लगातार मदद की जरूरत पड़ सकती है। भारत में यह जिम्मेदारी अक्सर पत्नी, बेटी या बहू पर आती है। लंबे समय तक देखभाल करने के कारण परिवार के सदस्यों के रोजगार, आर्थिक स्थिति और अपने स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

    शहरीकरण, रोजगार के लिए दूसरे शहरों या देशों में पलायन और छोटे होते परिवारों ने पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था की देखभाल संबंधी क्षमता को भी प्रभावित किया है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार पेशेवर देखभाल और आवासीय सुविधाएं ले सकते हैं, लेकिन वहां भी मरीज की स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। सुरक्षा के नाम पर उसकी गतिविधियों पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाना नई समस्याएं पैदा कर सकता है।

    भारत सरकार ने वर्ष 2010 में बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन इसमें डिमेंशिया के लिए अलग समर्पित व्यवस्था नहीं है। केरल में डिमेंशिया से संबंधित विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं, जबकि कर्नाटक में जिला स्तर पर 32 मस्तिष्क स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 की एक समीक्षा में राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना, समर्पित वित्तपोषण और मापने योग्य लक्ष्यों की कमी सामने आई।

    बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच डिमेंशिया की चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं, परिवारों और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है। समय पर पहचान, प्रशिक्षित देखभालकर्मियों की उपलब्धता, परिवारों को आर्थिक और मानसिक सहयोग तथा मरीजों की गरिमा की रक्षा पर केंद्रित राष्ट्रीय योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए

    वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल खुद ही इस रैली का प्रचार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि सत्तारूढ़ दल अगले सात दिनों तक भी इसी उत्साह और लगन के साथ प्रचार जारी रखे।

    राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से इस रैली और मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी दलों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देश इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।

    उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से रैली में पहुंचने की अपील की। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। विपक्ष इस अभियान के जरिए मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठा रहा है।

    रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसकी तारीख पर भी विवाद सामने आया है। कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से इस तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है और इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

    बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर इस तारीख के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा। इस तरह रैली का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ तारीख को लेकर राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है।

    राहुल गांधी ने बीजेपी की आपत्ति के बीच अपने बयान में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे रैली का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बीजेपी अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार करती रहे, ताकि कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

    ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। रैली में भागीदारी और दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

  • भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए

    भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए


    इंदौर । इंदौर जिले में भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की जा रही है। वृंदावन ग्राम योजना के तहत जिले के चार गांवों में गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना आयोजित होगी। यह कार्यक्रम 27 से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के पालकों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। योजना के तहत प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल की गायों के पालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. दिनकर राव पाटील के मुताबिक जिले के रंगवासा दतोदा शिवनी और बनेड़िया गांवों में योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गांवों में पात्र पशुपालकों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद गायों के दुग्ध उत्पादन के आधार पर विजेताओं का चयन होगा। प्रतियोगिता में उन्हीं पशुपालकों को शामिल होने का अवसर मिलेगा जिनकी भारतीय नस्ल की उन्नत गाय प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देती है।

    योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गाय के पालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए मिलेंगे। दूसरे स्थान पर आने वाले पशुपालक को 50 हजार रुपए और तीसरा स्थान हासिल करने वाले पालक को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन के आधार पर तीन विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार राशि के जरिए पशुपालकों को बेहतर पशुपालन पद्धतियां अपनाने और अपनी गायों की देखभाल पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के संरक्षण और पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही दूध उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन देना भी योजना का अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आमदनी में सुधार की संभावना बन सकती है। योजना के माध्यम से बेहतर नस्लों के पालन और दुग्ध उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

    प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गाय का भारतीय उन्नत नस्ल का होना और प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देना जरूरी है। पात्र पशुपालकों को पंजीयन कराना होगा और गाय के दूध उत्पादन से संबंधित जानकारी देनी होगी। पंजीयन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में संबंधित ग्राम या पशु चिकित्सा विभाग से जानकारी ली जा सकती है।

    27 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस योजना के जरिए इंदौर जिले के चार गांवों में दुग्ध उत्पादन के आधार पर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। अब यह देखना होगा कि इस पहल में कितने पशुपालक भाग लेते हैं और पुरस्कार योजना से भारतीय नस्ल की गायों के पालन तथा दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में कितनी मदद मिलती है।

  • जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर निवेशकों की नजरें अब शेयर बाजार में होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशक शेयरों के अलॉटमेंट, ग्रे मार्केट प्रीमियम और बाजार में संभावित शुरुआती कीमत को लेकर उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    24 अक्टूबर को शाम पांच बजे उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी करीब 248 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। ऊपरी प्राइस बैंड में 248 रुपये का प्रीमियम जोड़ने पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,367 रुपये बनती है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 22.16 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत देता है।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। यह अनौपचारिक बाजार में चल रही खरीद-बिक्री से मिलने वाला संकेत है। इसमें लिस्टिंग से पहले बदलाव हो सकता है। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर किस भाव पर कारोबार शुरू करेंगे, यह वास्तविक मांग, निवेशकों के व्यवहार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए मौजूदा जीएमपी को संभावित संकेत के रूप में ही देखना जरूरी है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है। कारोबार शुरू होने से पहले सुबह नौ बजे से 9:45 बजे तक विशेष प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में निवेशक अपने ऑर्डर दे सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द भी कर सकेंगे। इसके बाद शेयर का शुरुआती भाव निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह दस बजे कारोबार शुरू होना है।

    आईपीओ के अलॉटमेंट की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की उम्मीद है। जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके रिफंड की प्रक्रिया 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। इसी दिन सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाने की भी उम्मीद है। अलॉटमेंट पूरा होने के बाद निवेशक बीएसई, एनएसई या आईपीओ रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। इसके लिए पैन नंबर या आवेदन से संबंधित विवरण की जरूरत पड़ सकती है।

    इस आईपीओ का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश जरूरी था।

    सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार, योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में आईपीओ 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में यह आंकड़ा 14 गुना रहा, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल मिलाकर इश्यू को 22.19 गुना आवेदन प्राप्त हुए।

    लिस्टिंग से पहले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट की स्थिति और बाजार में बन रहे संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, केवल जीएमपी के आधार पर मुनाफे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। वास्तविक लिस्टिंग कीमत अनुमान से कम या अधिक हो सकती है। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, आईपीओ से जुड़ी जानकारी और अपनी जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है।

  • ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दुश्मन के इलाके के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक हमले करने की क्षमता ने वायुसेना की परिचालन ताकत को प्रदर्शित किया। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की सैन्य क्षमता के स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की। इस रणनीति में किसी एक विमान या हथियार प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विमानों, सेंसर, हथियारों और संचार नेटवर्क को एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाता है। इससे परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना संभव होता है।

    वायुसेना प्रमुख के अनुसार, इस अभियान ने संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने वाली शक्ति के रूप में वायुसेना की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों में कई विकल्प उपलब्ध रखना और दुश्मन की रणनीति में बदलाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, क्षमता-केंद्रित व्यवस्था ने भारतीय वायुसेना को परिस्थितियों के अनुरूप जवाबी कार्रवाई करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद की।

    पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। एपी सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को भी प्रभावी बताया।

    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता किसी एक हथियार या विमान के कारण नहीं थी। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दूर से हमला करने वाले हथियार, सटीक निशाना लगाने वाली प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का संयुक्त योगदान था। इसके साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था और मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने की क्षमता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला करने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस तरह की क्षमताओं ने भारतीय पक्ष को प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के दौरान नागरिकों और असैन्य संपत्ति को नुकसान से बचाने की प्रतिबद्धता का पालन किया गया।

    एपी सिंह ने आगाह किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बावजूद वायुसेना को अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा। इसके लिए खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक, मजबूत नेटवर्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने रसद, रखरखाव और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार जरूरी है। यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की व्यापक राष्ट्रीय परिकल्पना से भी जुड़ा है। एपी सिंह के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का उद्देश्य ऐसी बहु-क्षेत्रीय सैन्य शक्ति बनना है, जो भारत के आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। वर्ष 2047 तक दुनिया की सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल होना इस दिशा में उसका प्रमुख लक्ष्य है।

  • इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन

    इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन


    इंदौर । इंदौर और महू क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन आयोजित किए जा रहे हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रम की तैयारियों के बीच स्वयंसेवक अलग-अलग बस्तियों और मंडलों में कदमताल करते नजर आ रहे हैं। इंदौर के नंदा नगर से निकले पथ संचलन में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। इस आयोजन के तहत इंदौर विभाग के चार महानगरीय जिलों के 34 नगरों की करीब 345 बस्तियों में पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। वहीं महू ग्रामीण क्षेत्र के छह खंडों के 65 मंडलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    संघ की ओर से इन आयोजनों की तैयारी पिछले एक महीने से की जा रही थी। शाखाओं में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से पहले समता का अभ्यास किया। इन कार्यक्रमों के जरिए स्वयंसेवक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ निर्धारित मार्गों पर संचलन कर रहे हैं। इंदौर और महू में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों को संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से पहले की महत्वपूर्ण गतिविधि माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर 28 अक्टूबर को इंदौर विभाग का वृहत एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में शाम 4 बजकर 30 मिनट से होगा। इसमें इंदौर विभाग के पांचों जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। पथ संचलन को इस बड़े आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से स्वयंसेवक आगामी एकत्रीकरण के लिए जुट रहे हैं।

    इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य चरैवेति-चरैवेति रखा गया है। इस संस्कृत वाक्य का आशय निरंतर आगे बढ़ते रहने से है। संघ के अनुसार इसका संदेश है कि स्वयंसेवक राष्ट्रकार्य को लगातार और समर्पण के साथ आगे बढ़ाते रहें। शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए कार्य जारी रखने का संकल्प इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

    संघ की विचारधारा के मुताबिक राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन पर जोर दिया जाता है। एकत्रीकरण में इसी विचार को आगे बढ़ाने और स्वयंसेवकों को भविष्य के कार्यों के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जाएगा। संघ का कहना है कि भारत को परम वैभव पर प्रतिष्ठित करने के लक्ष्य के साथ स्वयंसेवक ऊर्जा और समर्पण से कार्य करते रहेंगे।

    इंदौर और महू क्षेत्र में हो रहे पथ संचलन के साथ अब 28 अक्टूबर को होने वाले वृहत एकत्रीकरण पर भी ध्यान केंद्रित है। पांच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम के जरिए संघ अपने शताब्दी वर्ष के समापन को चिह्नित करेगा। फिलहाल विभिन्न बस्तियों और मंडलों में संचलन के आयोजन जारी हैं और स्वयंसेवक निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार इसमें भाग ले रहे हैं।

  • इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी

    इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी


    इंदौर । इंदौर में अक्टूबर का महीना खत्म होने से पहले ही जलसंकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर के कई प्रमुख तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और कुछ तालाब लगभग सूख चुके हैं। इसका असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवारों को निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कुछ लोग पानी के लिए हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि एक टैंकर के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।

    सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।

    क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।

    शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

    सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।

  • टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में इंदौर से पकड़ा गया प्रांजल, गिरफ्तारी से 15 घंटे पहले शेयर की थी दबंगई वाली स्टोरी

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में इंदौर से पकड़ा गया प्रांजल, गिरफ्तारी से 15 घंटे पहले शेयर की थी दबंगई वाली स्टोरी


    इंदौर । बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार हरियाणा के सोनीपत निवासी 22 वर्षीय प्रांजल ठाकरान की सोशल मीडिया गतिविधियां अब जांच के लिहाज से चर्चा में हैं। इंदौर में पकड़े गए प्रांजल के इंस्टाग्राम अकाउंट पर बंदूक और पिस्टल के साथ वीडियो तथा कारतूस की माला पहने क्लिप सहित कई पोस्ट सामने आई हैं। बताया गया है कि गिरफ्तारी से करीब 15 घंटे पहले भी उसने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की थी जिसमें वह लाल टी शर्ट पहनकर फोन पर बात करता दिखाई दे रहा है। इन पोस्ट के सामने आने के बाद पुलिस उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक प्रांजल को शनिवार शाम करीब चार बजे इंदौर के मालवा मील चौराहे के पास स्थित अंकुर स्टेप डाउन सेंटर से गिरफ्तार किया गया। यहां उसका भाई हितेश इलाज करा रहा है। बताया गया है कि हितेश को पैरालिसिस है और पिछले करीब पांच महीने से उसकी फिजियोथेरेपी सहित अन्य उपचार चल रहा है। प्रांजल पिछले पांच दिनों से इंदौर में रुका हुआ था और रोज अपने भाई से मिलने सेंटर जा रहा था। पुलिस ने इसी दौरान उसकी मौजूदगी का पता लगाकर कार्रवाई की।

    प्रांजल के इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की गई सामग्री में हथियारों के साथ वीडियो के अलावा मारपीट और शराब पार्टी से जुड़ी क्लिप भी शामिल बताई गई हैं। एक वीडियो में वह कारतूस की माला पहने दिखाई देता है जबकि दूसरी पोस्ट में हुक्का पीते हुए नजर आता है। उसके अकाउंट पर जेल के बाहर का वीडियो और पानीपत जेल से जुड़ी क्लिप साझा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उसने खुद को हिंदू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का अध्यक्ष भी बताया है। हालांकि इन पोस्ट और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    प्रांजल का नाम हरियाणा के पानीपत में मार्च 2026 में मनी एक्सचेंज कार्यालय पर हुई फायरिंग के मामले में भी सामने आया था। उस प्रकरण की जांच के दौरान आरोप लगे थे कि उसने सोशल मीडिया के जरिए विदेश में बैठे कथित गैंगस्टरों से संपर्क और कॉल मैनेज करने में भूमिका निभाई थी। आरोप यह भी था कि विदेश में बैठे लोगों ने पैसे का लालच देकर कार्यालय पर फायरिंग करवाने के लिए कहा था। इन आरोपों की वास्तविकता और उस मामले में प्रांजल की भूमिका को लेकर संबंधित जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    इंदौर क्राइम ब्रांच के एडीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक मुंबई में हुई फायरिंग की घटना में संदिग्ध भूमिका को लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच ने इंदौर पुलिस से संपर्क किया था। मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और करीब चार घंटे की सर्चिंग के बाद उसे पकड़ लिया। अब उससे हथियारों की सप्लाई कथित साजिश और अन्य लोगों के साथ संपर्कों को लेकर पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच उसे मुंबई ले जाएगी।

    गौरतलब है कि 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर पांच से छह राउंड फायरिंग की गई थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित रहे जबकि उनके ड्राइवर और एक व्लॉगर के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस इस मामले में अब तक दस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। घटना के बाद अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध होने का दावा करते हुए फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी।

    प्रांजल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पुराने मामलों और कथित संपर्कों की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि दोनों घटनाओं में उसकी भूमिका किस स्तर तक थी और हथियारों की सप्लाई या कथित नेटवर्क से उसका क्या संबंध था यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।