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  • मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान

    मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान


    ग्वालियर । ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने कथित प्रताड़ना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें 18 बालक और 8 बालिकाएं शामिल हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई के बाद बच्चों के बयान दर्ज किए गए। अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते समय कई बच्चे भावुक हो गए। बच्चों ने बताया कि वे अब मदरसे में नहीं रहना चाहते और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करना चाहते हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने मदरसे की इमारत सील कर दी है और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है।

    बच्चों के आरोपों के मुताबिक मामूली गलती होने पर उन्हें लोहे की रॉड पर लटकाकर पीटा जाता था। कुछ बच्चों ने घंटों मुर्गा बनाकर रखने की बात भी कही है। उनका कहना है कि इस तरह की सजा से उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि वे वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी लेकिन बच्चों के बयान के आधार पर प्रशासन और बाल अधिकार से जुड़ी एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    बच्चों ने भोजन को लेकर भी शिकायत की है। उनके मुताबिक सुबह और शाम उन्हें दो-दो रोटियां दी जाती थीं और अधिक खाना मांगने पर मना कर दिया जाता था। बालिकाओं ने आरोप लगाया कि मदरसे में आने वाली एक महिला जिन्हें वे बाजी कहती थीं उनसे घरेलू काम करवाती थीं। उनके अनुसार उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने बर्तन और कपड़े धोने तथा टॉयलेट साफ करने के लिए कहा जाता था। छत से कपड़े उतारने में देरी होने पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

    बालिकाओं ने कपड़े पहनने को लेकर दबाव बनाने की बात भी कही है। उनके आरोपों के मुताबिक उन पर हिजाब पहनने के लिए जोर दिया जाता था और विरोध करने पर डराने वाली बातें कही जाती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित महिला के बेटे की ओर से रात में खिड़की से ताक-झांक की जाती थी। बच्चों का कहना है कि शिकायत के बावजूद उनकी बात पर कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।

    प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मदरसे से इस्लामिक किताबें और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने इमारत को सील करते हुए संचालक से मदरसा चलाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। झांसी रोड के एसडीएम अतुल सिंह के मुताबिक मदरसे को सील कर नोटिस जारी किया गया है। बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। रेस्क्यू किए गए बच्चों ने अधिकारियों के सामने मदरसे में वापस नहीं जाने की इच्छा जताई है। अब संबंधित विभागों के सामने उनकी सुरक्षित देखभाल शिक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा। फिलहाल मदरसे की इमारत सील है और प्रशासन दस्तावेजों तथा बच्चों के बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया कर रहा है।

  • पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए

    पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए


    ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर एक शादीशुदा महिला से करीब 2 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले मोबाइल नंबर से महिला को फोन किया और खुद को विदेशी नागरिक बताकर बातचीत शुरू की। कुछ समय तक दोस्ती का भरोसा जीतने के बाद उसने महिला को भारी मात्रा में सोना गिफ्ट करने का लालच दिया। इसके बाद आरोपी ने कहानी बनाई कि वह सोना लेकर भारत आ रहा था लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने खुद को छुड़ाने के लिए 2 लाख रुपए की जरूरत बताई। उसकी बातों में आकर महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 12 बार में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू किए तो महिला को ठगी का शक हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना बताई। शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार गेरू वाले बंगले के पास त्यागी नगर मुरार निवासी 25 वर्षीय गजल बाथम सोशल मीडिया पर एक अनजान व्यक्ति के संपर्क में आई थी। आरोपी पिछले कुछ दिनों से उसकी पोस्ट पर कमेंट कर रहा था। इसी दौरान 3 अक्टूबर 2026 को महिला के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले एक अनजान नंबर से कॉल आया। महिला को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि नंबर पाकिस्तान के कंट्री कोड से जुड़ा है। फोन करने वाले ने खुद को विदेशी नागरिक बताया और मीठी बातें करके उससे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की।

    अगले दिन 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने दोबारा फोन किया। उसने महिला से आधार कार्ड मांगा लेकिन महिला ने अपना आधार कार्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने दोस्ती का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसे बड़ी मात्रा में सोना गिफ्ट करना चाहता है और खुद लेकर भारत आ रहा है। सोना मिलने की उम्मीद में महिला उसकी बातों पर भरोसा करने लगी।

    कुछ देर बाद आरोपी ने घबराए हुए अंदाज में फोन किया और दावा किया कि वह सोना लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन एयरपोर्ट पर एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने महिला को बताया कि अधिकारियों ने उसे छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए मांगे हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके पास करीब 20 लाख रुपए का सोना है और यदि वह रकम भेज देगी तो वह इस परेशानी से बाहर निकल जाएगा। पुलिस के मुताबिक इसी कहानी के जरिए आरोपी ने महिला को पैसे भेजने के लिए तैयार किया।

    इसके बाद आरोपी ने महिला को अलग-अलग दुकानों के ऑनलाइन क्यूआर कोड भेजे। महिला ने उन कोड पर कुल 12 ट्रांजेक्शन में 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम कई हिस्सों में भेजी गई जिसमें 19 हजार रुपए से लेकर 36 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन शामिल थे। पैसे मिलने के बाद भी आरोपी नहीं रुका और उसने महिला से और रकम की मांग शुरू कर दी।

    जब महिला ने बताया कि उसके पास अब पैसे नहीं हैं तो आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी। ठगी का अहसास होने पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुरार थाना प्रभारी गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है उनकी बैंकिंग और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार

    ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार


    ग्वालियर। ग्वालियर में लापता और अपहृत बालक-बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा को हरियाणा से बरामद कर लिया है। छात्रा करीब डेढ़ महीने पहले कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान छात्रा के मोबाइल की लोकेशन हरियाणा के कैथल में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और 23 अक्टूबर को आजाद कॉलोनी स्थित एक कमरे से उसे बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक एक युवक छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह मौके से फरार हो गया। अब पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस के अनुसार ग्वालियर के उपनगर मुरार निवासी एक व्यक्ति ने 7 सितंबर 2026 को थाने में अपनी 21 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजन ने बताया था कि छात्रा सुबह करीब 9 बजे मुरार स्थित गर्ल्स कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कॉलेज से लौट आएगी लेकिन देर रात तक उसके घर नहीं पहुंचने पर चिंता बढ़ गई। परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।

    शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देश पर और सीएसपी मुरार संदीप बांगरे के मार्गदर्शन में छात्रा की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व मुरार थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद बल्लभ बगोली ने किया। पुलिस ने संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाने के साथ ही मुखबिर तंत्र और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    तलाश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्रा का मोबाइल हरियाणा के कैथल में सक्रिय हुआ है। इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम तत्काल कैथल के लिए रवाना हुई। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को शुगर मिल के पास स्थित आजाद कॉलोनी में एक कमरे पर दबिश दी। इसी दौरान छात्रा को बरामद कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक छात्रा को सुरक्षित ग्वालियर लाया गया है। उसे 24 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे ग्वालियर पहुंचाया गया।

    पुलिस का कहना है कि छात्रा को अपने साथ ले जाने वाला युवक कार्रवाई के दौरान मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। फिलहाल पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आ सके और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

    एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार से लापता कॉलेज छात्रा को हरियाणा के कैथल से बरामद किया गया है। पुलिस अब छात्रा के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अगला कदम उठाएगी।

  • इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव

    इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में एक निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने सब्जी व्यापारी नरेंद्र साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। युवती का आरोप है कि व्यापारी पिछले करीब 20 दिनों से उसे देखकर अश्लील इशारे करता था और आपत्तिजनक हरकतों के जरिए परेशान कर रहा था। शनिवार रात हुई घटना के बाद युवती ने पुलिस से शिकायत की जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

    द्वारकापुरी पुलिस के मुताबिक युवती फूटी कोठी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती है। अस्पताल के बाहर सब्जियों की दुकानें लगती हैं जिनमें से एक दुकान नरेंद्र साहू की बताई गई है। युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी उसे देखकर अश्लील हरकतें करता था और इस वजह से वह कई दिनों से परेशान थी। मामले में पुलिस ने युवती के आरोपों के आधार पर प्रकरण दर्ज किया है।

    शिकायत के मुताबिक शनिवार रात अस्पताल से निकलने के दौरान युवती के साथ यह घटना हुई। अस्पताल का गार्ड उसे गेट तक छोड़ने आया था। युवती उस समय अपने भाई का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोप है कि नरेंद्र साहू ने जानबूझकर अश्लील हरकत करते हुए अपना निजी अंग दिखाया। युवती ने इसका विरोध करते हुए आरोपी को ललकारा तो अस्पताल का स्टाफ भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद आरोपी वहां से चला गया।

    घटना के बाद युवती अपनी बहन के साथ द्वारकापुरी थाने पहुंची और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।

    इसी बीच इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में भी छेड़छाड़ और परेशान करने का एक अलग मामला सामने आया है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने संजय नाम के युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। छात्रा का आरोप है कि उसके साथ पहले पढ़ने वाला संजय उसे लगातार मोबाइल फोन पर कॉल करता था और मिलने के लिए दबाव बनाता था।

    शिकायत के अनुसार एक दिन पहले युवक छात्रा के घर के बाहर पहुंच गया और फोन कर उससे जबरन मिलने की जिद करने लगा। लगातार परेशान किए जाने से छात्रा ने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। शनिवार को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

    इंदौर में सामने आए इन दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। एक मामले में निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने सब्जी व्यापारी पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है जबकि दूसरे मामले में नाबालिग छात्रा ने परिचित युवक पर मिलने के लिए दबाव बनाने की शिकायत की है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।

  • अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    नई दिल्ली ।अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी परेशानियों के बीच ईरान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार जारी रखने और उसे विस्तार देने की अपील की है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारतीय कारोबारियों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन ऊर्जा, कृषि और जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं।

    ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी समस्याओं ने दोनों देशों के व्यापार को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद ईरान भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर जोर दे रहा है। फतहली के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है और व्यापार को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

    बासमती चावल की आपूर्ति पर भी ईरान ने भरोसा दिलाया है। ईरान भारत से बासमती चावल और चाय खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में प्रतिबंधों और भुगतान में आ रही दिक्कतों के बीच इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फतहली ने भारतीय बासमती चावल समेत जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की आशंका को खारिज किया।

    ईरानी राजदूत के अनुसार, उनका देश संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने की तैयारी कर चुका है और आयात के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके पीछे केवल आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यापक आर्थिक दबाव भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है।

    फतहली ने कहा कि ईरान लगभग 47 वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इस दौरान उसने उनके प्रभाव को कम करने के तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके 15 पड़ोसी देश व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी के लिए नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। ईरान दूसरे देशों के साथ पारस्परिक लाभ वाले संबंध बनाए रखने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।

    भारत और ईरान के कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हुई है। फतहली ने बताया कि भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी अंतिम समझौते या नई व्यवस्था की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे उपायों को तय करने और लागू करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत तथा संबंधित पक्षों के बीच समन्वय जरूरी होगा।

    चाबहार बंदरगाह को लेकर भी ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। भारत के संचालन से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।

    फतहली ने कहा कि ईरान चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विकास में योगदान देने के इच्छुक किसी भी देश के निवेश और भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। हालांकि, बंदरगाह से संबंधित आगे की व्यवस्था और भारत-ईरान व्यापार को प्रभावित करने वाली बाधाओं के समाधान के लिए बातचीत तथा समन्वय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

  • बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत

    बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत


    नई दिल्ली ।
    भारत में औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ बुजुर्गों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही हैं। कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों पर व्यापक चर्चा होती है, लेकिन डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश के बढ़ते खतरे और उससे प्रभावित लोगों की देखभाल पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। यह बीमारी केवल याददाश्त को प्रभावित नहीं करती, बल्कि व्यक्ति की पहचान, निर्णय लेने की क्षमता, स्वतंत्रता और रोजमर्रा के जीवन को भी मुश्किल बना सकती है। ऐसे में भारत में एक समर्पित राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।

    डिमेंशिया ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। अल्जाइमर रोग इसके प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन डिमेंशिया केवल अल्जाइमर तक सीमित नहीं है। गंभीर अवस्था में मरीज परिचित लोगों को पहचानने, दैनिक गतिविधियां करने और अपने आसपास हो रही घटनाओं को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इससे उसकी सुरक्षा के साथ गरिमा और स्वायत्तता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

    भारत में इस समस्या का वास्तविक आकार समझने के लिए उपलब्ध आंकड़े महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। वर्ष 2017 से 2020 के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित एक राष्ट्रीय अध्ययन में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में डिमेंशिया की व्यापकता 7.4 प्रतिशत आंकी गई थी। इस दर को जनसंख्या अनुमानों पर लागू करते हुए शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में देश में लगभग 88 लाख मामले होने का अनुमान लगाया था। यदि यह दर अपरिवर्तित रहती है, तो वर्ष 2036 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 1.69 करोड़ तक पहुंच सकती है।

    दुनिया के अन्य देशों में भी डिमेंशिया गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंग्लैंड और वेल्स में वर्ष 2025 के दौरान यह सभी मौतों के 12.7 प्रतिशत मामलों से जुड़ा था। महिलाओं की मौतों में इसका हिस्सा 16.5 प्रतिशत बताया गया। अमेरिका में वर्ष 2024 के दौरान लगभग 10 प्रतिशत मौतों के लिए डिमेंशिया जिम्मेदार था। भारत में मृत्यु संबंधी आंकड़ों की विश्वसनीयता सीमित होने के कारण इस बीमारी के प्रभाव का सटीक आकलन करना कठिन है।

    चिकित्सा विज्ञान में प्रगति ने लोगों की उम्र बढ़ाने में मदद की है, लेकिन लंबा जीवन हमेशा बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी नहीं देता। अल्जाइमर की कुछ नई दवाएं शुरुआती चरण में पहचाने गए चुनिंदा मरीजों में संज्ञानात्मक गिरावट की गति को कुछ हद तक धीमा कर सकती हैं। हालांकि, ये दवाएं डिमेंशिया का पूर्ण इलाज नहीं हैं और न ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मस्तिष्क को पहले जैसी स्थिति में ला सकती हैं। इसलिए शुरुआती पहचान, नियमित देखभाल और परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

    डिमेंशिया का प्रभाव मरीज तक सीमित नहीं रहता। गंभीर अवस्था में व्यक्ति को भोजन करने, नहाने, शौचालय जाने और सुरक्षित रहने के लिए लगातार मदद की जरूरत पड़ सकती है। भारत में यह जिम्मेदारी अक्सर पत्नी, बेटी या बहू पर आती है। लंबे समय तक देखभाल करने के कारण परिवार के सदस्यों के रोजगार, आर्थिक स्थिति और अपने स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

    शहरीकरण, रोजगार के लिए दूसरे शहरों या देशों में पलायन और छोटे होते परिवारों ने पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था की देखभाल संबंधी क्षमता को भी प्रभावित किया है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार पेशेवर देखभाल और आवासीय सुविधाएं ले सकते हैं, लेकिन वहां भी मरीज की स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। सुरक्षा के नाम पर उसकी गतिविधियों पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाना नई समस्याएं पैदा कर सकता है।

    भारत सरकार ने वर्ष 2010 में बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन इसमें डिमेंशिया के लिए अलग समर्पित व्यवस्था नहीं है। केरल में डिमेंशिया से संबंधित विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं, जबकि कर्नाटक में जिला स्तर पर 32 मस्तिष्क स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 की एक समीक्षा में राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना, समर्पित वित्तपोषण और मापने योग्य लक्ष्यों की कमी सामने आई।

    बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच डिमेंशिया की चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं, परिवारों और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है। समय पर पहचान, प्रशिक्षित देखभालकर्मियों की उपलब्धता, परिवारों को आर्थिक और मानसिक सहयोग तथा मरीजों की गरिमा की रक्षा पर केंद्रित राष्ट्रीय योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए

    वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल खुद ही इस रैली का प्रचार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि सत्तारूढ़ दल अगले सात दिनों तक भी इसी उत्साह और लगन के साथ प्रचार जारी रखे।

    राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से इस रैली और मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी दलों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देश इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।

    उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से रैली में पहुंचने की अपील की। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। विपक्ष इस अभियान के जरिए मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठा रहा है।

    रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसकी तारीख पर भी विवाद सामने आया है। कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से इस तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है और इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

    बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर इस तारीख के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा। इस तरह रैली का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ तारीख को लेकर राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है।

    राहुल गांधी ने बीजेपी की आपत्ति के बीच अपने बयान में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे रैली का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बीजेपी अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार करती रहे, ताकि कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

    ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। रैली में भागीदारी और दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

  • भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए

    भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए


    इंदौर । इंदौर जिले में भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की जा रही है। वृंदावन ग्राम योजना के तहत जिले के चार गांवों में गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना आयोजित होगी। यह कार्यक्रम 27 से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के पालकों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। योजना के तहत प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल की गायों के पालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. दिनकर राव पाटील के मुताबिक जिले के रंगवासा दतोदा शिवनी और बनेड़िया गांवों में योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गांवों में पात्र पशुपालकों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद गायों के दुग्ध उत्पादन के आधार पर विजेताओं का चयन होगा। प्रतियोगिता में उन्हीं पशुपालकों को शामिल होने का अवसर मिलेगा जिनकी भारतीय नस्ल की उन्नत गाय प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देती है।

    योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गाय के पालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए मिलेंगे। दूसरे स्थान पर आने वाले पशुपालक को 50 हजार रुपए और तीसरा स्थान हासिल करने वाले पालक को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन के आधार पर तीन विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार राशि के जरिए पशुपालकों को बेहतर पशुपालन पद्धतियां अपनाने और अपनी गायों की देखभाल पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के संरक्षण और पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही दूध उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन देना भी योजना का अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आमदनी में सुधार की संभावना बन सकती है। योजना के माध्यम से बेहतर नस्लों के पालन और दुग्ध उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

    प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गाय का भारतीय उन्नत नस्ल का होना और प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देना जरूरी है। पात्र पशुपालकों को पंजीयन कराना होगा और गाय के दूध उत्पादन से संबंधित जानकारी देनी होगी। पंजीयन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में संबंधित ग्राम या पशु चिकित्सा विभाग से जानकारी ली जा सकती है।

    27 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस योजना के जरिए इंदौर जिले के चार गांवों में दुग्ध उत्पादन के आधार पर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। अब यह देखना होगा कि इस पहल में कितने पशुपालक भाग लेते हैं और पुरस्कार योजना से भारतीय नस्ल की गायों के पालन तथा दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में कितनी मदद मिलती है।

  • जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर निवेशकों की नजरें अब शेयर बाजार में होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशक शेयरों के अलॉटमेंट, ग्रे मार्केट प्रीमियम और बाजार में संभावित शुरुआती कीमत को लेकर उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    24 अक्टूबर को शाम पांच बजे उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी करीब 248 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। ऊपरी प्राइस बैंड में 248 रुपये का प्रीमियम जोड़ने पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,367 रुपये बनती है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 22.16 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत देता है।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। यह अनौपचारिक बाजार में चल रही खरीद-बिक्री से मिलने वाला संकेत है। इसमें लिस्टिंग से पहले बदलाव हो सकता है। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर किस भाव पर कारोबार शुरू करेंगे, यह वास्तविक मांग, निवेशकों के व्यवहार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए मौजूदा जीएमपी को संभावित संकेत के रूप में ही देखना जरूरी है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है। कारोबार शुरू होने से पहले सुबह नौ बजे से 9:45 बजे तक विशेष प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में निवेशक अपने ऑर्डर दे सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द भी कर सकेंगे। इसके बाद शेयर का शुरुआती भाव निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह दस बजे कारोबार शुरू होना है।

    आईपीओ के अलॉटमेंट की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की उम्मीद है। जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके रिफंड की प्रक्रिया 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। इसी दिन सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाने की भी उम्मीद है। अलॉटमेंट पूरा होने के बाद निवेशक बीएसई, एनएसई या आईपीओ रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। इसके लिए पैन नंबर या आवेदन से संबंधित विवरण की जरूरत पड़ सकती है।

    इस आईपीओ का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश जरूरी था।

    सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार, योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में आईपीओ 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में यह आंकड़ा 14 गुना रहा, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल मिलाकर इश्यू को 22.19 गुना आवेदन प्राप्त हुए।

    लिस्टिंग से पहले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट की स्थिति और बाजार में बन रहे संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, केवल जीएमपी के आधार पर मुनाफे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। वास्तविक लिस्टिंग कीमत अनुमान से कम या अधिक हो सकती है। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, आईपीओ से जुड़ी जानकारी और अपनी जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है।

  • ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दुश्मन के इलाके के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक हमले करने की क्षमता ने वायुसेना की परिचालन ताकत को प्रदर्शित किया। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की सैन्य क्षमता के स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की। इस रणनीति में किसी एक विमान या हथियार प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विमानों, सेंसर, हथियारों और संचार नेटवर्क को एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाता है। इससे परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना संभव होता है।

    वायुसेना प्रमुख के अनुसार, इस अभियान ने संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने वाली शक्ति के रूप में वायुसेना की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों में कई विकल्प उपलब्ध रखना और दुश्मन की रणनीति में बदलाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, क्षमता-केंद्रित व्यवस्था ने भारतीय वायुसेना को परिस्थितियों के अनुरूप जवाबी कार्रवाई करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद की।

    पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। एपी सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को भी प्रभावी बताया।

    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता किसी एक हथियार या विमान के कारण नहीं थी। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दूर से हमला करने वाले हथियार, सटीक निशाना लगाने वाली प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का संयुक्त योगदान था। इसके साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था और मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने की क्षमता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला करने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस तरह की क्षमताओं ने भारतीय पक्ष को प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के दौरान नागरिकों और असैन्य संपत्ति को नुकसान से बचाने की प्रतिबद्धता का पालन किया गया।

    एपी सिंह ने आगाह किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बावजूद वायुसेना को अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा। इसके लिए खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक, मजबूत नेटवर्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने रसद, रखरखाव और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार जरूरी है। यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की व्यापक राष्ट्रीय परिकल्पना से भी जुड़ा है। एपी सिंह के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का उद्देश्य ऐसी बहु-क्षेत्रीय सैन्य शक्ति बनना है, जो भारत के आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। वर्ष 2047 तक दुनिया की सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल होना इस दिशा में उसका प्रमुख लक्ष्य है।