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  • ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दुश्मन के इलाके के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक हमले करने की क्षमता ने वायुसेना की परिचालन ताकत को प्रदर्शित किया। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की सैन्य क्षमता के स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की। इस रणनीति में किसी एक विमान या हथियार प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विमानों, सेंसर, हथियारों और संचार नेटवर्क को एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाता है। इससे परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना संभव होता है।

    वायुसेना प्रमुख के अनुसार, इस अभियान ने संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने वाली शक्ति के रूप में वायुसेना की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों में कई विकल्प उपलब्ध रखना और दुश्मन की रणनीति में बदलाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, क्षमता-केंद्रित व्यवस्था ने भारतीय वायुसेना को परिस्थितियों के अनुरूप जवाबी कार्रवाई करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद की।

    पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। एपी सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को भी प्रभावी बताया।

    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता किसी एक हथियार या विमान के कारण नहीं थी। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दूर से हमला करने वाले हथियार, सटीक निशाना लगाने वाली प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का संयुक्त योगदान था। इसके साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था और मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने की क्षमता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला करने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस तरह की क्षमताओं ने भारतीय पक्ष को प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के दौरान नागरिकों और असैन्य संपत्ति को नुकसान से बचाने की प्रतिबद्धता का पालन किया गया।

    एपी सिंह ने आगाह किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बावजूद वायुसेना को अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा। इसके लिए खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक, मजबूत नेटवर्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने रसद, रखरखाव और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार जरूरी है। यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की व्यापक राष्ट्रीय परिकल्पना से भी जुड़ा है। एपी सिंह के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का उद्देश्य ऐसी बहु-क्षेत्रीय सैन्य शक्ति बनना है, जो भारत के आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। वर्ष 2047 तक दुनिया की सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल होना इस दिशा में उसका प्रमुख लक्ष्य है।

  • इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन

    इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन


    इंदौर । इंदौर और महू क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन आयोजित किए जा रहे हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रम की तैयारियों के बीच स्वयंसेवक अलग-अलग बस्तियों और मंडलों में कदमताल करते नजर आ रहे हैं। इंदौर के नंदा नगर से निकले पथ संचलन में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। इस आयोजन के तहत इंदौर विभाग के चार महानगरीय जिलों के 34 नगरों की करीब 345 बस्तियों में पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। वहीं महू ग्रामीण क्षेत्र के छह खंडों के 65 मंडलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    संघ की ओर से इन आयोजनों की तैयारी पिछले एक महीने से की जा रही थी। शाखाओं में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से पहले समता का अभ्यास किया। इन कार्यक्रमों के जरिए स्वयंसेवक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ निर्धारित मार्गों पर संचलन कर रहे हैं। इंदौर और महू में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों को संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से पहले की महत्वपूर्ण गतिविधि माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर 28 अक्टूबर को इंदौर विभाग का वृहत एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में शाम 4 बजकर 30 मिनट से होगा। इसमें इंदौर विभाग के पांचों जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। पथ संचलन को इस बड़े आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से स्वयंसेवक आगामी एकत्रीकरण के लिए जुट रहे हैं।

    इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य चरैवेति-चरैवेति रखा गया है। इस संस्कृत वाक्य का आशय निरंतर आगे बढ़ते रहने से है। संघ के अनुसार इसका संदेश है कि स्वयंसेवक राष्ट्रकार्य को लगातार और समर्पण के साथ आगे बढ़ाते रहें। शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए कार्य जारी रखने का संकल्प इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

    संघ की विचारधारा के मुताबिक राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन पर जोर दिया जाता है। एकत्रीकरण में इसी विचार को आगे बढ़ाने और स्वयंसेवकों को भविष्य के कार्यों के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जाएगा। संघ का कहना है कि भारत को परम वैभव पर प्रतिष्ठित करने के लक्ष्य के साथ स्वयंसेवक ऊर्जा और समर्पण से कार्य करते रहेंगे।

    इंदौर और महू क्षेत्र में हो रहे पथ संचलन के साथ अब 28 अक्टूबर को होने वाले वृहत एकत्रीकरण पर भी ध्यान केंद्रित है। पांच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम के जरिए संघ अपने शताब्दी वर्ष के समापन को चिह्नित करेगा। फिलहाल विभिन्न बस्तियों और मंडलों में संचलन के आयोजन जारी हैं और स्वयंसेवक निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार इसमें भाग ले रहे हैं।

  • इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी

    इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी


    इंदौर । इंदौर में अक्टूबर का महीना खत्म होने से पहले ही जलसंकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर के कई प्रमुख तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और कुछ तालाब लगभग सूख चुके हैं। इसका असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवारों को निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कुछ लोग पानी के लिए हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि एक टैंकर के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।

    सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।

    क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।

    शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

    सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।

  • टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में इंदौर से पकड़ा गया प्रांजल, गिरफ्तारी से 15 घंटे पहले शेयर की थी दबंगई वाली स्टोरी

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में इंदौर से पकड़ा गया प्रांजल, गिरफ्तारी से 15 घंटे पहले शेयर की थी दबंगई वाली स्टोरी


    इंदौर । बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार हरियाणा के सोनीपत निवासी 22 वर्षीय प्रांजल ठाकरान की सोशल मीडिया गतिविधियां अब जांच के लिहाज से चर्चा में हैं। इंदौर में पकड़े गए प्रांजल के इंस्टाग्राम अकाउंट पर बंदूक और पिस्टल के साथ वीडियो तथा कारतूस की माला पहने क्लिप सहित कई पोस्ट सामने आई हैं। बताया गया है कि गिरफ्तारी से करीब 15 घंटे पहले भी उसने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की थी जिसमें वह लाल टी शर्ट पहनकर फोन पर बात करता दिखाई दे रहा है। इन पोस्ट के सामने आने के बाद पुलिस उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक प्रांजल को शनिवार शाम करीब चार बजे इंदौर के मालवा मील चौराहे के पास स्थित अंकुर स्टेप डाउन सेंटर से गिरफ्तार किया गया। यहां उसका भाई हितेश इलाज करा रहा है। बताया गया है कि हितेश को पैरालिसिस है और पिछले करीब पांच महीने से उसकी फिजियोथेरेपी सहित अन्य उपचार चल रहा है। प्रांजल पिछले पांच दिनों से इंदौर में रुका हुआ था और रोज अपने भाई से मिलने सेंटर जा रहा था। पुलिस ने इसी दौरान उसकी मौजूदगी का पता लगाकर कार्रवाई की।

    प्रांजल के इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की गई सामग्री में हथियारों के साथ वीडियो के अलावा मारपीट और शराब पार्टी से जुड़ी क्लिप भी शामिल बताई गई हैं। एक वीडियो में वह कारतूस की माला पहने दिखाई देता है जबकि दूसरी पोस्ट में हुक्का पीते हुए नजर आता है। उसके अकाउंट पर जेल के बाहर का वीडियो और पानीपत जेल से जुड़ी क्लिप साझा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उसने खुद को हिंदू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का अध्यक्ष भी बताया है। हालांकि इन पोस्ट और दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    प्रांजल का नाम हरियाणा के पानीपत में मार्च 2026 में मनी एक्सचेंज कार्यालय पर हुई फायरिंग के मामले में भी सामने आया था। उस प्रकरण की जांच के दौरान आरोप लगे थे कि उसने सोशल मीडिया के जरिए विदेश में बैठे कथित गैंगस्टरों से संपर्क और कॉल मैनेज करने में भूमिका निभाई थी। आरोप यह भी था कि विदेश में बैठे लोगों ने पैसे का लालच देकर कार्यालय पर फायरिंग करवाने के लिए कहा था। इन आरोपों की वास्तविकता और उस मामले में प्रांजल की भूमिका को लेकर संबंधित जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    इंदौर क्राइम ब्रांच के एडीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक मुंबई में हुई फायरिंग की घटना में संदिग्ध भूमिका को लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच ने इंदौर पुलिस से संपर्क किया था। मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और करीब चार घंटे की सर्चिंग के बाद उसे पकड़ लिया। अब उससे हथियारों की सप्लाई कथित साजिश और अन्य लोगों के साथ संपर्कों को लेकर पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच उसे मुंबई ले जाएगी।

    गौरतलब है कि 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर पांच से छह राउंड फायरिंग की गई थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित रहे जबकि उनके ड्राइवर और एक व्लॉगर के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस इस मामले में अब तक दस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। घटना के बाद अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध होने का दावा करते हुए फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी।

    प्रांजल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पुराने मामलों और कथित संपर्कों की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि दोनों घटनाओं में उसकी भूमिका किस स्तर तक थी और हथियारों की सप्लाई या कथित नेटवर्क से उसका क्या संबंध था यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी

    दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    दिवाली और त्योहारी सीजन से पहले सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के वायदा और खुदरा बाजार तक सोने के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। महंगे कच्चे तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, कीमतों में आई इस नरमी को त्योहारों और शादी के सीजन के लिए खरीदारी के संभावित अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर इस सप्ताह सोने का वायदा भाव करीब 3.50 प्रतिशत गिर गया। खुदरा बाजार में भी कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव पहले 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 23 अक्टूबर तक घटकर 1,41,630 रुपये रह गया। इस तरह एक सप्ताह में इसकी कीमत 4,796 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गई।

    इसी अवधि में 22 कैरेट सोने के दाम भी नीचे आए। इसका भाव 1,34,207 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,29,566 रुपये रह गया। यानी 22 कैरेट सोना 4,641 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। कीमतों में इस गिरावट से उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है, जो दिवाली या आगामी शादी समारोहों के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    वैश्विक बाजार में भी सोने की स्थिति कमजोर बनी हुई है। शुक्रवार को इसकी कीमत करीब तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई। पूरे सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद इसका सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया गया है। इस गिरावट के बाद निवेशकों की नजर 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर पर टिकी है। यह स्थिति अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक से ठीक पहले बनी है।

    सोने की कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। सऊदी अरब में हूती हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी, जिससे ब्रेंट क्रूड पांच महीने से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। महंगा तेल महंगाई को बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    अमेरिका में उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़े भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। कारोबारियों को आगामी बैठक में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, लेकिन साल के अंत में मौद्रिक नीति सख्त रहने की आशंका बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में कुछ नरमी के बावजूद इसका स्तर करीब 101.5 बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के समय से सोने में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट का भी उल्लेख किया गया है।

    तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निकट अवधि में सोने पर दबाव बना रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिकती है, तो 3,950 डॉलर तक गिरावट की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, 3,950 से 4,000 डॉलर का दायरा संभावित खरीदारी और समर्थन का क्षेत्र माना जा रहा है। चांदी के लिए 50 से 55 डॉलर के स्तर को अहम समर्थन बताया गया है। कुछ विशेषज्ञों ने आने वाले हफ्तों में 10 से 15 प्रतिशत तक सुधार की संभावना जताई है, जबकि सोने में तेजी का रुझान मजबूत होने के लिए 4,200 डॉलर के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण माना गया है।

    दिवाली के दौरान सोने और आभूषणों की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। भारतीय खरीदार सोने को निवेश और पारंपरिक खरीदारी, दोनों के लिहाज से महत्व देते हैं। बाजार में हल्के वजन के आभूषणों और पुराने सोने के बदले नए आभूषण खरीदने की योजनाओं की मांग भी बढ़ रही है। ग्राहक अब डिजाइन के साथ शुद्धता, प्रामाणिकता और पारदर्शिता पर भी ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, दिवाली से पहले कीमतों में दोबारा उछाल आएगा या गिरावट जारी रहेगी, यह वैश्विक बाजार, डॉलर की चाल और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल

    हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल


    भोपाल । भोपाल की जिला अदालत के बाहर पुलिस अभिरक्षा में मौजूद हथकड़ी पहने एक आरोपी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में आरोपी पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सिगरेट पीते हुए और मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए दिखाई दे रहा है। घटना का वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है जो रविवार को सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो के प्रसारित होने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी को इस तरह की सुविधाएं कैसे मिल रही थीं।

    वायरल वीडियो में एक व्यक्ति के हाथों में हथकड़ी लगी दिखाई देती है। इसके बावजूद वह सामान्य अंदाज में सिगरेट पीता हुआ मोबाइल फोन पर बात करता नजर आ रहा है। वीडियो में आसपास पुलिसकर्मी भी मौजूद दिखाई देते हैं। ऐसे में यह मामला पुलिस अभिरक्षा के दौरान निगरानी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन से जुड़ा सवाल बन गया है।

    पुलिस अभिरक्षा में किसी आरोपी को अदालत में पेश करने या उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में हथकड़ी लगे व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन दिखाई देना और उसका सिगरेट पीना कई सवाल खड़े करता है। सबसे अहम सवाल यह है कि मोबाइल फोन उसे किसने उपलब्ध कराया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में वह कितनी देर तक इसका इस्तेमाल करता रहा। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता कि घटना से पहले और बाद में क्या परिस्थितियां थीं या मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी क्या थी।

    इस मामले में आरोपी की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किस समय बनाया गया और उस दौरान आरोपी को अदालत परिसर के बाहर किस मामले में लाया गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी किस थाने या पुलिस इकाई से संबंधित थे इसकी जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मामले को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और जवाबदेही का है। यदि वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियां सही हैं तो यह जांच का विषय होगा कि आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया या नहीं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की प्रामाणिकता और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की आधिकारिक जांच जरूरी होगी।

    फिलहाल भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो की जांच की जाती है या नहीं और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्टीकरण जारी होता है या नहीं। वीडियो ने अदालत परिसर के बाहर पुलिस अभिरक्षा में निगरानी की व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के बावजूद भारत का चावल निर्यात मजबूत, वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बढ़ रही अहमियत

    लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के बावजूद भारत का चावल निर्यात मजबूत, वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बढ़ रही अहमियत

    नई दिल्ली ।वैश्विक बाजार में भारत की चावल निर्यात संबंधी स्थिति मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है। हालांकि, समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव, शिपिंग समय में वृद्धि, बीमा खर्च और परिवहन शुल्क में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियां निर्यात उद्योग को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार और उद्योग जगत निर्यात को सुचारू बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

    नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 में कृषि क्षेत्र, निर्यात कारोबार, व्यापार नीति और खाद्य गुणवत्ता से जुड़े विशेषज्ञों ने उद्योग की स्थिति पर चर्चा की। सम्मेलन में किसानों से लेकर निर्यातकों, खरीदारों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और अन्य सेवा प्रदाताओं तक पूरी आपूर्ति शृंखला से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका, निर्यात लागत और भविष्य में कारोबार की संभावनाएं रहीं।

    वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक तरुण बजाज के अनुसार, भारत का चावल निर्यात वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी को देखते हुए ऐसा मंच जरूरी है, जहां किसान, व्यापारी, निर्यातक और उपभोक्ता से जुड़ी पूरी मूल्य शृंखला के प्रतिनिधि एक साथ आकर समस्याओं और उनके समाधान पर विचार कर सकें।

    उन्होंने समुद्री परिवहन को मौजूदा समय की प्रमुख चुनौती बताया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी जैसे क्षेत्रों में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे माल पहुंचने में अधिक समय लग रहा है और बीमा तथा शिपिंग की लागत भी बढ़ रही है। इन परिस्थितियों में केंद्र और राज्य सरकारों तथा उद्योग जगत के समन्वय से निर्यात व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजीव कुमार ने भी भारतीय निर्यातकों की मजबूत स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, भारत की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी लंबे समय से लगभग 35 से 40 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। उन्होंने कहा कि थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत में सड़क परिवहन पर अधिक निर्भरता होने से लागत बढ़ती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग वाले चावल के उत्पादन को प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि निर्यातकों को बेहतर मूल्य मिल सके।

    सम्मेलन में चावल उद्योग से जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। ईवाई के पार्टनर प्रशांत रायजादा ने इसे क्षेत्र के विशेषज्ञों, निर्यातकों और नीति निर्माताओं के बीच विचार-विमर्श का उपयोगी अवसर बताया। कृभको एग्री के मुख्य प्रबंधक राजेश पहारिया जैन के अनुसार, इस बार सम्मेलन में भागीदारी और गतिविधियों का दायरा बढ़ा है। इसमें पैकेजिंग सामग्री बनाने वाली कंपनियों से लेकर सर्वेयर, कस्टम हाउस एजेंट, किसान और निर्यातक शामिल हुए।

    राजेश पहारिया जैन ने बताया कि मौसम संबंधी चुनौतियों और उत्पादन में संभावित कमी की आशंकाओं के बावजूद भारतीय खाद्य निगम के पास लगभग 5.5 से 6 करोड़ टन का बफर स्टॉक मौजूद है। उन्होंने निर्यात उद्योग को सहायता देने के लिए ब्याज संबंधी समर्थन और अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।

    तकनीक और बाजार संबंधी जानकारी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। एग्रीगुरु ऑनलाइन की संस्थापक हंसा सिंह राक्या ने बताया कि उनकी कंपनी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बाजार सूचना मंच विकसित किया है। इसके माध्यम से खरीदारों और विक्रेताओं को कीमतों, माल ढुलाई खर्च, व्यापार नियमों और वैश्विक घटनाक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    यूरोफिन्स एनालिटिकल सर्विसेज इंडिया और एसजीएस फूड टेस्टिंग सर्विसेज के प्रतिनिधियों ने भी गुणवत्ता परीक्षण, शोध संस्थानों के सहयोग और खरीदार-विक्रेता संवाद के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानकों और नई व्यापारिक आवश्यकताओं की जानकारी साझा करने से गुणवत्ता संबंधी अस्वीकृतियों और सीमा शुल्क से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    विशेषज्ञों की चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि भारत के सामने वैश्विक चावल बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के साथ निर्यात लागत घटाने, परिवहन व्यवस्था सुधारने और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कारोबार बढ़ाने की चुनौती है। इन क्षेत्रों में बेहतर समन्वय से भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भूमिका को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

  • Netflix की सस्पेंस फिल्म ‘गजब रात’ में भोपाल का जलवा, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक शूट हुए अहम सीन

    Netflix की सस्पेंस फिल्म ‘गजब रात’ में भोपाल का जलवा, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक शूट हुए अहम सीन


    भोपाल। बॉलीवुड की क्राइम थ्रिलर फिल्म गजब रात में भोपाल की लोकेशंस ने खास जगह बनाई है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की इस फिल्म के कई महत्वपूर्ण और रहस्य से भरे दृश्य शहर के मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल परिसर में फिल्माए गए हैं। फिल्म की आधी से ज्यादा शूटिंग इन्हीं परिसरों में पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल के गलियारों से लेकर इमरजेंसी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर तक कई जगहों को फिल्म की कहानी के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। इससे भोपाल के स्थानीय लोगों और संस्थान से जुड़े विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म में अस्पताल का माहौल कहानी के सस्पेंस और जांच-पड़ताल वाले हिस्सों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। अभिनेता मनोज बाजपेयी के किरदार को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और कॉरिडोर में तेजी से भागते हुए तथा मामले की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। इन दृश्यों में अस्पताल का वास्तविक परिसर कहानी को प्रभावशाली पृष्ठभूमि देता है। फिल्म में इस्तेमाल की गई इन लोकेशंस के कारण भोपाल के दर्शकों के लिए पर्दे पर अपने शहर की जगहों को पहचानना भी खास अनुभव बन गया है।

    मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजीनियर गौरव तिवारी के मुताबिक फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्य एमजीयू हॉस्पिटल और मानसरोवर मेडिकल कॉलेज परिसर में शूट किए गए हैं। शूटिंग के दौरान संस्थान के विभिन्न हिस्सों को फिल्म की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया गया। इससे परिसर को बड़े पर्दे पर देखने की उत्सुकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर भी फिल्म की शूटिंग को लेकर चर्चा हो रही है क्योंकि शहर की इमारतें और आसपास के क्षेत्र फिल्म के दृश्यों में नजर आते हैं।

    फिल्म के लिए अस्पताल के कई अलग-अलग हिस्सों में कैमरा लगाया गया। इनमें ऑपरेशन थिएटर मरीजों के वार्ड अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस क्षेत्र फार्मेसी पैरामेडिकल लैब और अस्पताल का रिसेप्शन शामिल हैं। इसके अलावा लंबे कॉरिडोर और परिसर के गार्डन में भी दृश्य फिल्माए गए। इन जगहों को कहानी के हिसाब से इस्तेमाल कर फिल्म के माहौल को रहस्यमयी और वास्तविक बनाने की कोशिश की गई। अस्पताल जैसी लोकेशन क्राइम थ्रिलर में कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किरदारों की गतिविधियों को विश्वसनीय रूप देने में भी मदद करती है।

    भोपाल में फिल्मों की शूटिंग होने से शहर की लोकेशंस को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलता है। जब किसी फिल्म में स्थानीय संस्थानों और परिचित जगहों को दिखाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ जाती है। गजब रात में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल की मौजूदगी इसी वजह से चर्चा में है। संस्थान से जुड़े लोगों के लिए भी यह अनुभव खास है कि उनके परिसर में फिल्माए गए दृश्य अब दर्शकों तक पहुंच रहे हैं।

    मनोज बाजपेयी अपनी गंभीर अभिनय शैली और जटिल किरदारों के लिए पहचाने जाते हैं। क्राइम और इनवेस्टिगेशन पर आधारित इस फिल्म में अस्पताल के भीतर फिल्माए गए सस्पेंस से भरे दृश्य कहानी की रहस्यमय परतों को सामने लाते हैं। भोपाल की लोकेशंस ने फिल्म को वास्तविक परिवेश देने में योगदान दिया है। आधे से ज्यादा शूटिंग शहर के इन संस्थानों में होने की जानकारी के बाद फिल्म और भोपाल के बीच जुड़ाव भी चर्चा का विषय बन गया है। अब स्थानीय दर्शकों की दिलचस्पी इस बात में है कि फिल्म में उनके शहर की कौन-कौन सी जगहें दिखाई देती हैं और कहानी में इन लोकेशंस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

  • दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी ने बनाया इतिहास, 16.514 किलो के सोने के झुमकों से दो विश्व रिकॉर्ड कायम

    दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी ने बनाया इतिहास, 16.514 किलो के सोने के झुमकों से दो विश्व रिकॉर्ड कायम

    नई दिल्ली ।दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी जॉयअलुक्कास ने सोने के विशाल झुमकों की एक जोड़ी तैयार करके दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। 22 कैरेट सोने से बने इन झुमकों का कुल वजन 16.514 किलोग्राम है। इन्हें दुनिया की सबसे भारी और सबसे बड़ी सोने की बालियों की जोड़ी के रूप में मान्यता मिली है। इस विशेष रचना को तैयार करने में दर्जनों कारीगरों ने कई महीनों तक मेहनत की और पारंपरिक आभूषण कला को बड़े आकार में पेश किया।

    इन झुमकों को ‘मयूर सहस्र’ नाम दिया गया है। इस नाम का अर्थ ‘एक हजार मोर’ बताया गया है। इनका डिजाइन मोर से प्रेरित है, जिसे भारतीय संस्कृति में सुंदरता और शालीनता का प्रतीक माना जाता है। आभूषणों की बनावट में दक्षिण एशिया की शादियों में पहने जाने वाले पारंपरिक घंटीनुमा झुमकों की झलक भी दिखाई देती है। इस तरह डिजाइन में सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक आभूषण निर्माण का मेल देखने को मिलता है।

    इन विशाल झुमकों को बनाने में 55 कुशल कारीगरों ने कुल 5,840 घंटे काम किया। इनकी लंबाई 1.215 मीटर और व्यास 0.682 मीटर है। वजन, आकार और निर्माण में लगे समय के कारण यह परियोजना कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गई है। इतने बड़े आभूषण को तैयार करने के लिए डिजाइन से लेकर अंतिम रूप देने तक कारीगरों को लंबे समय तक काम करना पड़ा।

    24 अक्टूबर को इन झुमकों को दुबई के गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ज्वेल ऑफ जॉय शोरूम में प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री भी मौजूद थे। अब इन रिकॉर्डधारी झुमकों को इसी क्षेत्र में स्थित ज्वेल ऑफ जॉय बाय जॉयअलुक्कास शोरूम में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग इस विशाल स्वर्ण आभूषण को देख सकते हैं।

    जॉयअलुक्कास ज्वेलरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन पॉल अलुक्कास के अनुसार, इस रचना के पीछे दुबई के साथ कंपनी का लंबा जुड़ाव और शहर के विकास से जुड़ी प्रेरणा रही है। दुबई को लंबे समय से सोने के कारोबार के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। कंपनी का मानना है कि यह रचना शहर की इसी पहचान को दर्शाती है और उसके साथ उसके व्यावसायिक संबंधों का प्रतीक है।

    समूह के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने इस उपलब्धि को दुबई और इसे बनाने वाले कारीगरों के प्रति सम्मान बताया। उनके मुताबिक, कंपनी करीब चार दशकों से दुबई के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस परियोजना को कारीगरों की मेहनत का परिणाम बताते हुए कहा कि एक ही रचना के लिए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलना कंपनी, कर्मचारियों और उसके ग्राहकों के लिए गर्व का विषय है।

    जॉय अलुक्कास केरल के कारोबारी हैं और जॉयअलुक्कास समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी की शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका कारोबार भारत सहित ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और ओमान जैसे देशों तक फैला है। परिवार ने केरल के त्रिशूर से आभूषण कारोबार शुरू किया था। बाद में जॉय अलुक्कास ने 2001 में अपने नाम से ज्वेलरी कारोबार को आगे बढ़ाया। दुबई में तैयार किए गए ये विशाल झुमके अब कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पारंपरिक आभूषण निर्माण कौशल की एक खास मिसाल बन गए हैं।

  • MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन

    MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बीना रेलवे स्टेशन पर चल रहे यार्ड रीमॉडलिंग के काम का असर रेल संचालन पर पड़ रहा है। रविवार 25 अक्टूबर को बीना और रूठियाई के बीच चलने वाली चार मेमू ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इसके अलावा भोपाल कटनी कोटा नागदा दमोह और ललितपुर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों के शुरुआती या अंतिम स्टेशन में बदलाव किया गया है। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक रूट से चलाने की व्यवस्था की गई है। इन बदलावों के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    रेलवे के अनुसार बीना स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक और प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के साथ परिचालन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी बदलाव किए गए हैं। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और बदले हुए स्टॉपेज की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। इसके लिए रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक पूछताछ माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

    रविवार को बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61611 और रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61612 के साथ बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61625 तथा रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61626 निरस्त रहेंगी। इन ट्रेनों के बंद रहने से इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

    भोपाल और बीना के बीच चलने वाली ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया गया है। भोपाल-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61631 और 11605 बीना के बजाय मंडी बामोरा स्टेशन पर अपनी यात्रा समाप्त करेंगी। वहीं बीना-भोपाल मेमू ट्रेन नंबर 11606 और 61632 मंडी बामोरा से रवाना होंगी। यह बदलाव 25 अक्टूबर तक निर्धारित है। ऐसे में भोपाल और बीना के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मंडी बामोरा से आगे जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    दमोह और ग्वालियर रूट पर भी ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। बीना-दमोह पैसेंजर ट्रेन नंबर 51885 मालखेड़ी स्टेशन से शाम 6 बजकर 10 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। वहीं दमोह-बीना पैसेंजर ट्रेन नंबर 51886 की यात्रा मालखेड़ी में समाप्त होने का समय सुबह 11 बजकर 45 मिनट तय किया गया था। बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन नंबर 51883 भी 24 अक्टूबर तक मालखेड़ी से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को तारीख के अनुसार परिचालन की पुष्टि करनी चाहिए।

    नागदा रूट पर नागदा-बीना एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19341 गुना स्टेशन पर यात्रा समाप्त करेगी जबकि बीना-नागदा एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19342 25 अक्टूबर तक गुना से रवाना होने के लिए निर्धारित है। ललितपुर रूट पर ललितपुर-बीना मेमू ट्रेन नंबर 64618 आगासोद स्टेशन पर समाप्त होगी और बीना-ललितपुर मेमू ट्रेन नंबर 64617 आगासोद से शुरू होगी।

    कटनी रूट पर कटनी-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11602 खुरई स्टेशन पर समाप्त होगी जबकि बीना-कटनी मेमू ट्रेन नंबर 11601 26 अक्टूबर तक खुरई से रवाना होगी। कोटा रूट पर कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11603 महादेवखेड़ी में समाप्त होगी और बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 61634 वहीं से शुरू होगी। कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61633 मुंगावली में समाप्त होगी जबकि बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 11604 26 अक्टूबर तक मुंगावली से रवाना होने के लिए निर्धारित है।

    बीना-कटनी मुड़वारा मेमू ट्रेन नंबर 61619 भी 26 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी से फ्लाईओवर मार्ग के जरिए सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर चलने के लिए निर्धारित है। वहीं कटनी मुड़वारा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61620 को 25 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी तक विस्तारित किया गया है। इसका निर्धारित आगमन समय रात 12 बजकर 50 मिनट है।

    रेलवे की सूचना के अनुसार कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी अलग-अलग तारीखों में वैकल्पिक मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई थी। इनमें बांद्रा टर्मिनस-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस अहमदाबाद-बनारस सिटी एक्सप्रेस और बनारस सिटी-अहमदाबाद एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के लिए बताई गई कई तारीखें 20 से 24 अक्टूबर के बीच की हैं। इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ताजा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के चलते हुए इन अस्थायी बदलावों के बीच सही जानकारी लेकर स्टेशन पहुंचना यात्रियों के लिए जरूरी है।