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  • भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम

    भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम


    भोपाल । भोपाल में देश की सैन्य ताकत और शौर्य का ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिलेगा जब सेना के भारी-भरकम टैंक शहर की सड़कों पर अपनी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन करते नजर आएंगे। 15 जनवरी 2027 को आर्मी डे के मौके पर होने वाली विशेष परेड के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को करीब 50 हजार दर्शकों के देखने की उम्मीद है। खास बात यह है कि भोपाल में पहली बार आर्मी डे परेड किसी सैन्य कैंटोनमेंट के भीतर नहीं बल्कि आम लोगों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी।

    आर्मी डे परेड 2027 के लिए भोपाल का चयन इसी साल मार्च में किया गया था। इसके बाद से ही प्रशासन और सेना के स्तर पर आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। शनिवार को सेना भोपाल पुलिस जिला प्रशासन बिजली कंपनी लोक निर्माण विभाग भेल और सीपीए के अधिकारियों ने प्रस्तावित परेड मार्ग और आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक जाने वाली सड़क का जायजा लिया और सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलावों पर चर्चा की।

    एडीएम महेंद्र कपचे के नेतृत्व में अधिकारियों ने पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबे मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। इस सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर करीब 15 मीटर की जाएगी। भारी सैन्य टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सड़क की मजबूती बढ़ाने का काम भी किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के मुताबिक सड़क को इस तरह मजबूत किया जाएगा कि भारी वजन वाले सैन्य टैंकों का दबाव आसानी से सह सके।

    परेड को देखने आने वाले लोगों के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। सड़क के दोनों ओर करीब 50 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बावजूद आयोजन स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। इसी वजह से पूरे मार्ग को पहले से चिन्हित कर आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

    आयोजन के दौरान सड़क पर स्पीड ब्रेकर नहीं होंगे ताकि टैंक और सैन्य वाहनों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा न आए। इसके अलावा मार्ग में आने वाले कुछ बिजली के पोल और पेड़ों को भी हटाया जाएगा। सैन्य वाहनों की पार्किंग के लिए नटराज-हेमा स्कूल मार्ग को निर्धारित किया गया है। इससे मुख्य परेड मार्ग पर भीड़ और वाहनों का दबाव कम रखने में मदद मिलेगी।

    भोपाल में होने वाला यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि आम नागरिकों को सेना के अत्याधुनिक टैंकों और सैन्य वाहनों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। आमतौर पर आर्मी डे परेड सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्रों में आयोजित होती रही है लेकिन 2027 में भोपाल में इसे सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित करने का फैसला किया गया है। इससे शहरवासियों के बीच सेना के प्रति जुड़ाव और गौरव की भावना को और मजबूत करने की उम्मीद है।

    आयोजन को सफल बनाने के लिए सेना और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। सड़क की मजबूती से लेकर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था यातायात प्रबंधन बिजली व्यवस्था और सुरक्षा तक हर पहलू पर तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में परेड मार्ग पर निर्माण और सुधार कार्य तेज होने की संभावना है। 15 जनवरी 2027 को भोपाल में होने वाला आर्मी डे समारोह शहर के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा जब राजधानी की सड़कों पर पहली बार सेना के टैंक अपनी ताकत का प्रदर्शन करते दिखाई देंगे और हजारों लोग इस भव्य सैन्य आयोजन के गवाह बनेंगे।

  • पत्नी से कहासुनी के बाद कमरे में गया था विनोद, कुछ देर बाद फंदे पर मिला शव; भोपाल के कृषक नगर में सनसनी

    पत्नी से कहासुनी के बाद कमरे में गया था विनोद, कुछ देर बाद फंदे पर मिला शव; भोपाल के कृषक नगर में सनसनी


    भोपाल । भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। कृषक नगर में रहने वाले 55 वर्षीय लोडिंग ऑटो चालक विनोद कुशवाहा ने घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से कुछ देर पहले ही विनोद शराब के नशे में घर पहुंचा था। पत्नी ने उसके शराब पीकर आने का विरोध किया तो दोनों के बीच विवाद हो गया। कहासुनी के बाद विनोद अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद जब परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो वह फंदे पर लटका मिला। घटना के बाद परिवार में चीख पुकार मच गई। सूचना मिलने पर निशातपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम किया। पुलिस अब आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजहों का पता लगाने में जुटी है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान विनोद कुशवाहा पिता लालूराम कुशवाहा के रूप में हुई है। वह निशातपुरा के कृषक नगर में अपने परिवार के साथ रहता था और लोडिंग ऑटो चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां संभालता था। उसके परिवार में पत्नी एक बेटा और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि विनोद लंबे समय से शराब का सेवन करता था। शराब पीने के बाद उसका व्यवहार कई बार बदल जाता था और घर में पत्नी तथा बच्चों के साथ विवाद की स्थिति बन जाती थी।

    परिजनों के मुताबिक परिवार के लोग विनोद को शराब छोड़ने के लिए लगातार समझाते थे। पत्नी और बच्चों की ओर से उसे शराब से दूर रहने की सलाह दी जाती थी लेकिन वह कई बार इस बात पर नाराज हो जाता था। शराब छोड़ने की बात को लेकर भी घर में कहासुनी होने की जानकारी पुलिस को दी गई है। रविवार देर रात भी विनोद शराब के नशे में घर पहुंचा। पत्नी ने जब शराब पीकर आने पर आपत्ति जताई तो दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद के बाद विनोद अपने कमरे में चला गया और परिवार के लोग भी कुछ देर बाद शांत हो गए।

    कुछ समय बीतने के बाद परिजनों को विनोद की कोई गतिविधि नजर नहीं आई। जब उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। विनोद फंदे पर लटका हुआ था। परिजनों ने उसे बचाने की कोशिश की और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी है।

    फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पत्नी से विवाद और शराब की लत को घटना से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस का कहना है कि वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस परिजनों के बयान दर्ज कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

    विनोद की मौत से परिवार सदमे में है। एक ओर घर के मुखिया की अचानक मौत से परिजन टूट गए हैं तो दूसरी ओर इस घटना ने शराब की लत से पैदा होने वाले पारिवारिक तनाव और उसके गंभीर परिणामों को भी सामने ला दिया है। फिलहाल निशातपुरा पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बाद MP में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, डेढ़ महीने में 35% ज्यादा पदों के विज्ञापन; अब 19 हजार नौकरियों की तैयारी

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद MP में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, डेढ़ महीने में 35% ज्यादा पदों के विज्ञापन; अब 19 हजार नौकरियों की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती के मोर्चे पर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। जनवरी से जून 2026 के मुकाबले जुलाई और अगस्त में सरकारी भर्तियों के विज्ञापन तेजी से जारी हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जून तक 7,723 पदों के लिए विज्ञापन निकाले गए थे जबकि 1 जुलाई से 21 अगस्त के बीच ही 10,399 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी हो चुके हैं। यानी करीब डेढ़ महीने में पहले छह महीनों की तुलना में 2,676 अधिक पदों पर भर्ती निकली और इसमें लगभग 34.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

    भर्तियों में यह तेजी उस दौर में आई जब बेरोजगारी और लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं का आंदोलन चल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के बैनर तले युवाओं ने 6 जून से 25 जुलाई तक जंतर-मंतर समेत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान युवाओं ने सरकारी भर्तियों की संख्या बढ़ाने लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी करने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग उठाई थी। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ भर्तियों की प्रक्रिया पहले धीमी गति से आगे बढ़ रही थी लेकिन आंदोलन के बाद कई विभागों ने रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी दिखाई।

    आंदोलन से पहले यानी जनवरी से जून के बीच MPESB MPPSC और अन्य विभागों के जरिए कुल 7,723 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी हुए थे। इनमें MPESB के 5,346 पद शामिल थे। इन पदों में आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर पुलिस एएसआई वनरक्षक जेल प्रहरी और नर्सिंग ऑफिसर जैसी भर्तियां शामिल रहीं। MPPSC के जरिए 1,391 पदों पर भर्ती निकली जबकि पुलिस बैंड आरक्षक के 679 पदों के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन MPSEDC MPPCB MPBDC और अन्य विभागों में भी पदों के विज्ञापन जारी हुए।

    भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव आंदोलन खत्म होने के आसपास देखने को मिला। 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ और इसके अगले ही दिन 26 जुलाई को 4,771 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी किए गए। इससे पहले 23 जुलाई को सरकार ने पुलिस विभाग में 9,662 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी थी। इनमें 8,500 आरक्षक GD और चालक के पद शामिल हैं। खास बात यह है कि पुलिस विभाग में इतनी बड़ी भर्ती करीब आठ साल बाद होने जा रही है।

    सिर्फ नए विज्ञापन ही नहीं बल्कि लंबित भर्ती परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की दिशा में भी तेजी दिखाई दी। 4,848 पदों के लिए हुई परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए। इनमें 2,873 पदों के परिणाम 26 जुलाई से 21 अगस्त के बीच जारी हुए। यानी आंदोलन खत्म होने के बाद नए विज्ञापनों के साथ पुराने भर्ती परिणामों को जारी करने का काम भी तेज हुआ।

    अब युवाओं की नजर सितंबर से दिसंबर 2026 के भर्ती कैलेंडर पर है। MPESB के संशोधित कैलेंडर के मुताबिक इस अवधि में 11 बड़ी भर्ती परीक्षाएं प्रस्तावित हैं जिनमें कुल 19,062 पद शामिल हैं। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अवसरों का दायरा और बढ़ सकता है।

    सरकार ने भी सरकारी नौकरियों को लेकर बड़ा लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त को वर्ष 2026 में एक लाख सरकारी नौकरियों की भर्ती का लक्ष्य घोषित किया। इसके साथ 2027-28 तक करीब दो लाख सरकारी पदों पर भर्ती अभियान की रूपरेखा तैयार करने की बात कही गई है। सरकार ने पांच साल में 2.5 लाख सरकारी पदों पर भर्ती का लक्ष्य भी रखा है।

    भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए आवेदन से लेकर रिजल्ट तक डिजिटल सिस्टम विकसित करने की तैयारी है। अभ्यर्थियों को भर्ती से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने के लिए विशेष ऐप लाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए विशेष कानून बनाने की तैयारी भी बताई गई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों की तस्वीर आने वाले महीनों में और बदल सकती है। जुलाई-अगस्त में बढ़ी भर्ती की रफ्तार और सितंबर से दिसंबर तक प्रस्तावित 19 हजार से ज्यादा पद युवाओं के लिए बड़ा अवसर हैं। हालांकि अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होगा कि वे आधिकारिक भर्ती कैलेंडर आवेदन की तारीख पात्रता और परीक्षा कार्यक्रम पर नजर रखें क्योंकि केवल विज्ञापन जारी होना नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है बल्कि चयन प्रक्रिया के हर चरण में सफलता हासिल करना जरूरी होगा।

  • SIP Tips: रोजाना, मंथली या सालाना निवेश में क्या है बेहतर विकल्प, जानिए किस कमाई के लिए कौन सी SIP सही

    SIP Tips: रोजाना, मंथली या सालाना निवेश में क्या है बेहतर विकल्प, जानिए किस कमाई के लिए कौन सी SIP सही

    नई दिल्ली ।म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के बीच सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP काफी लोकप्रिय विकल्प बन चुका है। इसमें निवेशक एक तय रकम को नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में लगाता है। आम तौर पर मासिक SIP सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है, लेकिन कई जगह रोजाना और सालाना निवेश के विकल्प भी उपलब्ध होते हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल रहता है कि इन तीनों में से कौन सा तरीका ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

    रोजाना SIP में निवेशक प्रत्येक कारोबारी दिन एक छोटी निर्धारित राशि निवेश करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज 100 रुपये निवेश करता है तो कारोबारी दिनों की संख्या के आधार पर महीने में लगभग दो हजार रुपये से अधिक निवेश हो सकता है। इस तरीके में रकम छोटी-छोटी किश्तों में निवेश होती है और बाजार के अलग-अलग स्तरों पर म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदने का अवसर मिलता है।

    रोजाना निवेश का एक फायदा यह हो सकता है कि निवेशक अपने छोटे-छोटे नियमित कैश फ्लो के अनुसार रकम अलग कर सके। यह तरीका उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिनकी आमदनी रोजाना या बार-बार प्राप्त होती है। हालांकि, केवल निवेश की आवृत्ति बढ़ाने से ज्यादा रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। रिटर्न पर बाजार की स्थिति, चुनी गई योजना और निवेश की अवधि जैसे कारकों का प्रभाव रहता है।

    मंथली SIP सबसे सामान्य और सुविधाजनक विकल्पों में शामिल है। इसमें निवेशक हर महीने एक निर्धारित तारीख को तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है। उदाहरण के लिए, पांच हजार रुपये की मासिक SIP करने पर एक साल में कुल 60 हजार रुपये का निवेश होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह तरीका सुविधाजनक हो सकता है, क्योंकि आम तौर पर वेतन हर महीने मिलता है और उसी के अनुरूप निवेश की राशि तय की जा सकती है।

    मासिक SIP का एक बड़ा फायदा निवेश में अनुशासन है। बैंक खाते से तय राशि निर्धारित तारीख पर अपने आप निवेश हो सकती है, जिससे हर महीने अलग से निवेश करने का फैसला लेने की जरूरत कम हो जाती है। बाजार में तेजी या गिरावट के बावजूद निवेश जारी रहने से अलग-अलग कीमतों पर यूनिट खरीदने का अवसर मिलता रहता है।

    सालाना SIP में निवेशक साल में एक बार बड़ी रकम निवेश करता है। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा सालाना बोनस, कारोबारी लाभ या किसी अन्य एकमुश्त भुगतान के रूप में आता है। ऐसे निवेशकों के लिए पूरे साल नियमित रकम अलग रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए सालाना निवेश उनके कैश फ्लो के अनुरूप बैठ सकता है।

    हालांकि, जिस व्यक्ति के पास हर महीने निवेश करने की क्षमता है, उसके लिए साल में केवल एक बार निवेश करना जरूरी नहीं कि बेहतर विकल्प हो। नियमित मासिक निवेश बाजार में अलग-अलग समय पर निवेश करने का अवसर देता है और एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के मुकाबले निवेश की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बना सकता है।

    यह समझना जरूरी है कि रोजाना, मासिक या सालाना SIP में से कोई भी तरीका अपने आप अधिक रिटर्न की गारंटी नहीं देता। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन होता है और पिछले प्रदर्शन को भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। इसलिए SIP की आवृत्ति चुनते समय निवेशक को अपनी आय, खर्च, उपलब्ध नकदी, वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को हर महीने नियमित वेतन मिलता है तो मासिक SIP एक सरल विकल्प हो सकती है। रोजाना आय वाले व्यक्ति के लिए दैनिक निवेश कैश फ्लो के अनुकूल हो सकता है, जबकि सालाना बोनस या अनियमित आय पाने वाले व्यक्ति के लिए सालाना निवेश सुविधाजनक हो सकता है। आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण बात निवेश की आवृत्ति नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार नियमित निवेश बनाए रखना और वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप लंबे समय तक निवेशित रहना है।

  • TET में फेल हुए तो जाएगी नौकरी? 2028 तक मिला मौका, जानिए किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी और प्रमोशन पर क्या होगा

    TET में फेल हुए तो जाएगी नौकरी? 2028 तक मिला मौका, जानिए किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी और प्रमोशन पर क्या होगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में लंबे समय से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के सामने अब TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा की नई चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए भी TET पास करना जरूरी किया गया है। यही वजह है कि 15 से 20 साल से नौकरी कर रहे शिक्षक भी अब परीक्षा की तैयारी को लेकर असमंजस में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किन शिक्षकों को TET देना होगा और अगर तय समय में परीक्षा पास नहीं की तो क्या नौकरी चली जाएगी।

    दरअसल TET की अनिवार्यता पहले मुख्य रूप से नई शिक्षक भर्ती से जुड़ी शर्त मानी जाती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद इसका दायरा पहले से सेवा में मौजूद शिक्षकों तक पहुंच गया। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग भी उठाई और तर्क दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति TET अनिवार्य होने से पहले हो चुकी थी उन्हें बाद में इस नियम के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून को बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जोड़ते हुए शिक्षक की योग्यता को महत्वपूर्ण माना।

    अब सबसे अहम बात यह है कि हर सेवारत शिक्षक को TET देना जरूरी नहीं है। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय बचा है उन्हें TET की अनिवार्यता से राहत दी गई है। वहीं जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है उन्हें TET पास करना होगा। इसके लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। हालांकि जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं उनके लिए TET की शर्त अलग है। सेवा में कितने भी साल बाकी हों प्रमोशन के लिए TET पास करना जरूरी होगा।

    यही वजह है कि 2028 तक समय मिलने के बावजूद शिक्षक अभी से चिंतित हैं। सबसे बड़ी परेशानी नियमों की स्पष्टता को लेकर है। अलग-अलग समय पर नियुक्त हुए शिक्षकों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार भी राहत की मांग कर रही है। इसके अलावा पुराने पात्रता परीक्षणों को TET के बराबर माना जाएगा या नहीं इस पर भी स्पष्टता का इंतजार है। इसी तरह पहले से TET या CTET पास कर चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देनी होगी या उनका पुराना प्रमाणपत्र मान्य होगा इसको लेकर भी शिक्षकों में असमंजस है।

    नौकरी जाने का सवाल भी शिक्षकों की चिंता बढ़ा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पात्र शिक्षकों को तय अवधि में TET पास करना होगा। निर्धारित समय तक योग्यता हासिल नहीं करने पर सेवा संबंधी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य रहेगा। कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करने का मौका दिया है और राज्यों को नियमित रूप से परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अतिरिक्त मोहलत नहीं दिए जाने की बात भी कही गई है।

    शिक्षकों की दूसरी बड़ी चिंता परीक्षा के सिलेबस और कठिनाई स्तर को लेकर है। लंबे समय से कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी और नियमित शिक्षण कार्य दोनों को साथ संभालना आसान नहीं होगा। कुछ विषयों का स्तर ग्रेजुएशन तक होने की बात सामने आने से भी शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। ऑनलाइन परीक्षा भी कई वरिष्ठ शिक्षकों के लिए चुनौती बन सकती है क्योंकि उन्हें कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने का पर्याप्त अभ्यास नहीं है।

    फीस और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी मांगें उठ रही हैं। शिक्षक संगठन फीस माफ करने ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने परीक्षा के दिन अवकाश देने और जरूरत पड़ने पर यात्रा भत्ता उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि शिक्षक अपनी नियुक्ति की तारीख सेवा अवधि पुराने TET या CTET प्रमाणपत्र और प्रमोशन की स्थिति के आधार पर अपनी पात्रता को स्पष्ट करें। 2028 तक मिला समय राहत जरूर है लेकिन नियमों की अस्पष्टता के बीच शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अब नौकरी और करियर दोनों से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है।

  • रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन के लुक पर यूजर्स ने उठाए सवाल, कुछ प्रशंसकों ने ट्रोलिंग को बताया अनावश्यक विवाद

    रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन के लुक पर यूजर्स ने उठाए सवाल, कुछ प्रशंसकों ने ट्रोलिंग को बताया अनावश्यक विवाद


    नई दिल्ली । 
    बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपने एक नए रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। एक ज्वेलरी ब्रांड के लिए बनाए गए इस विज्ञापन में कृति को रक्षाबंधन के मौके पर अपने छोटे भाई और पालतू डॉग के साथ नजर आते दिखाया गया है। विज्ञापन सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने अभिनेत्री के पहनावे और विज्ञापन की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं।

    विज्ञापन में कृति सेनन सफेद रंग के लहंगा-चोली में दिखाई देती हैं। उन्होंने अपने लुक को हल्के मेकअप और सीमित ज्वेलरी के साथ पूरा किया है। विज्ञापन की कहानी में वह सबसे पहले अपने पालतू डॉग को राखी बांधती नजर आती हैं और इसके बाद भाई के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाती दिखाई देती हैं।

    सोशल मीडिया पर विज्ञापन के सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने कृति के आउटफिट को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा अधिक पारंपरिक होना चाहिए था। कुछ टिप्पणियों में उनके कपड़ों को जरूरत से ज्यादा रिवीलिंग बताया गया और इसी आधार पर विज्ञापन की आलोचना की गई।

    कुछ यूजर्स ने कृति के लुक की तुलना ब्रा से करते हुए भी टिप्पणी की। एक वर्ग ने सवाल उठाया कि परिवार के साथ रक्षाबंधन मनाने के दृश्य में इस तरह का पहनावा क्यों चुना गया। वहीं कुछ लोगों ने विज्ञापन में भाई को राखी बांधने से पहले पालतू डॉग को राखी बांधने के दृश्य पर भी प्रतिक्रिया दी।

    हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाएं एकतरफा नहीं रहीं। कृति सेनन के कुछ प्रशंसकों ने अभिनेत्री का बचाव किया और कपड़ों को लेकर की जा रही टिप्पणियों को अनावश्यक ट्रोलिंग बताया। समर्थकों का कहना है कि विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा व्यक्तिगत शैली और ब्रांड की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा है तथा इसे लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करना उचित नहीं है।

    एक यूजर ने कृति का बचाव करते हुए कहा कि विज्ञापन में दिखाए गए परिधान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। वहीं कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में भी लोगों ने कहा कि त्योहार की भावना को केवल पहनावे के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। इस तरह विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग विचार सामने आए हैं।

    रक्षाबंधन भारत में भाई-बहन के रिश्ते और आपसी स्नेह से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इसी वजह से त्योहार आधारित विज्ञापनों में पारंपरिक प्रतीकों और पारिवारिक भावनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है। कृति के विज्ञापन को लेकर हुई बहस भी इसी सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से जुड़ती दिखाई दे रही है।

    काम की बात करें तो कृति सेनन हाल में शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना के साथ फिल्म कॉकटेल 2 में नजर आई थीं। फिल्म में उनकी भूमिका और अभिनय को दर्शकों से प्रतिक्रिया मिली। अब प्रशंसकों की नजर उनके आगामी प्रोजेक्ट्स पर है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा ने अभिनेत्री को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

  • जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा

    जापान की पहली पसंद भारत…. लेकिन कारखाने थाईलैंड में ज्यादा


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के लिए भारत (India) कागज पर पहली पसंद है, कारखाने के लिए थाईलैंड (Thailand)। जापानी कंपनियों (Japanese Companies) की पसंद में भारत भले 61.8% वोट के साथ पसंदीदा ठिकानों की सूची में लगातार चौथे साल शीर्ष पर है, पर जापानी कंपनियां (Japanese Companies) भारत में 1400 हैं जबकि थाईलैंड में छह हजार।

    11 साल में निवेश का लक्ष्य 3.5 लाख करोड़ येन (2.10 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 10 लाख करोड़ येन (6 लाख करोड़ रुपये) हो गया, कंपनियों की गिनती नहीं बढ़ी। रकम के वादे काम नहीं आए, इसलिए इस बार सरकार 220 भारतीय उद्योगपतियों को सीधे जापानी कारखानों के दरवाजे पर ले जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal Japan visit) के नेतृत्व वाला यह दल सोमवार से 27 अगस्त तक जापान में रहेगा। रणनीति दौरे के नक्शे से समझ आती है। पैसा टोक्यो में है, पर कारखाना लगाने वाली कंपनियां वहां नहीं हैं।

    जापान की असली विनिर्माण ताकत आइची और कंसाई की उन हजारों मझोली कंपनियों में है, जो बड़ी कंपनियों को कलपुर्जे देती हैं। कोई जापानी कंपनी जब कहीं जाती है, तो आपूर्तिकर्ताओं का पूरा झुंड साथ ले जाती है। इसीलिए भारत पहली बार इंतजार के बजाय खुद उनके पास गया है। भारतीय दल नागोया में चुकेइरेन व नागोया चैंबर के साथ रोड शो करेगा, ओसाका व क्योटो में क्षेत्रीय उद्योग से जुड़ेगा।

    सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स व एआई पर गोलमेज बैठक
    इस कार्यक्रम में मशीन को समझने या जानने पर जोर है। सेमीकंडक्टर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स पर एक गोलमेज बैठक है, पूंजीगत वस्तुओं, मशीनरी और वाहन उद्योग पर दूसरी। दौरे का मकसद दोतरफा निवेश बढ़ाना है। इसी क्रम में भारतीय कंपनियों का जापान जाना भी अहम है, जहां अभी सिर्फ 100 भारतीय कंपनियां हैं।


    भारत सिर्फ खरीदार नहीं…

    दल में रिलायंस के औद्योगिक नगर मेट सिटी के प्रमुख हैं, जो जापानी कंपनियों को जमीन बेचते हैं। मारुति सुजुकी है, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन है, बीमा व संपत्ति प्रबंधन कंपनियां हैं, जो जापान की सस्ती पेंशन पूंजी की तलाश में हैं, और स्टार्टअप का पूरा जत्था है, जिसके लिए टोक्यो में अलग बैठक होगी।

    दल में कौन-कौन?
    आरपीजी समूह के उपाध्यक्ष अनंत गोयनका, एसोचैम से निर्मल कुमार मिंडा, टीसीआई के विनीत अग्रवाल, रिन्यू पावर के सुमंत सिन्हा, किर्लोस्कर सिस्टम्स की गीतांजलि विक्रम किर्लोस्कर, एडवर्ब टेक के जलज दानी, कार्स24 के विक्रम चोपड़ा, गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन के राजेंद्र कुमार, मारुति सुजुकी के राहुल भारती, मोबिक्विक की उपासना टाकू, न्यूस्पेस रिसर्च के जूलियस अमृत, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट के संदीप सिक्का, रिलायंस मेट सिटी के श्रीवल्लभ गोयल, स्नैबिट के आयुष अग्रवाल, स्टार यूनियन दाई-इची लाइफ के अभय तिवारी और एसपीएफ की श्वेता राजपाल कोहली। वाहन, वाहन कलपुर्जे, अभियांत्रिकी, रसायन, पेट्रो रसायन, तकनीक और स्टार्टअप, यानी हर क्षेत्र से नाम हैं।

  • सभी को कराना PNG कनेक्शन …. मीडिल ईस्ट संकट के बीच केन्द्र ने राज्यों को दिए आदेश

    सभी को कराना PNG कनेक्शन …. मीडिल ईस्ट संकट के बीच केन्द्र ने राज्यों को दिए आदेश


    नई दिल्‍ली।
    भारत सरकार (Indian Government) ने देश में रसोई गैस (LPG – Liquefied Petroleum Gas) यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा निर्देश जारी किया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि LPG सिलेंडर की जगह पाइपलाइन वाली नेचुरल गैस (Piped Natural Gas- PNG) के इस्‍तेमाल को तेजी से बढ़ाव दें, ताकि एलपीजी की सप्‍लाई को कम किया जा सके।

    साथ में यह भी कहा गया है कि जिन इलाकों में पीएनजी कनेक्‍शन पहुंचा है और लोग फिर भी एलपीजी गैस का यूज कर रहे हैं तो उनका कनेक्‍शन अपने आप ही कैंसिल हो जाएगा, जिसका मतलब है कि उन्‍हें रसोई गैस की समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है।

    इसका मकसद गैस आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है. नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत नए निर्देश जारी किया गया है. इस निर्देश के तहत PNG और LPG दोनों तरह के कनेक्‍शन रखना प्रतिबंधित है. इसका मतलब है कि ऐसे लोगों को अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना होगा।


    कराना ही होगा पीएनजी कनेक्‍शन?

    पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने राज्‍यों के भेजे लेटर में कहा कि सरकार ने एलपीजी से पीएनजी शिफ्ट होने के नियमों को सख्‍त कर दिया है. उन्‍होंने कहा‍ कि जिन सोसायटीज या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क आ चुका है, वहां के यूजर्स को नोटिस दिया जाएगा. अगर नोटिस मिलने के बाद भी समय से कोई ग्राहक पीएनजी कनेक्‍शन नहीं लेता है, तो उसका एलपीजी सिलेंडर कनेक्‍शन अपने आप ही कैंसिल कर दिया जाएगा।


    मिडिल ईस्‍ट में संकट जारी

    अमेरिका-ईरान के बीच जंग को लेकर अनिश्‍चतता बनी हुई है. दोनों देश होर्मुज पर अपना-अपना दावा कर रहे है, जिस कारण मिडिल ईस्‍ट से एशिया क्षेत्र की ओर, होर्मुज से होकर आने वाली तेल-गैस से भरी जहाजें प्रभावित हो रही हैं. इसी कारण, गैस की सप्‍लाई को लेकर समस्‍या आ रही है. हालांकि, भारत कई देशों के साथ तेल-गैस की सप्‍लाई कर रहा है, लेकिन लागत में बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में भारत अब LPG से निर्भरता को कम करने के लिए PNG की ओर शिफ्ट कर रहा है. इस कारण पाइपलाइन गैस लगाने को प्रमुखता दे रहा है।


    हर जिले में PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी

    PNG कनेक्‍शन प्रॉसेस को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने खास इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर तैयार किया है. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपन‍ियों और सिटी गैस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन संस्‍थाओं को हर क्षेत्र में पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी में बनाने का निर्देश दिया गया है. राज्‍यो से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं।

  • ईरान का बड़ा फैसला, बोला- Hormuz से गुजरने वाले अधिकृत देशों के जहाजों से देना पड़ेगा सेवा शुल्क

    ईरान का बड़ा फैसला, बोला- Hormuz से गुजरने वाले अधिकृत देशों के जहाजों से देना पड़ेगा सेवा शुल्क


    तेहरान।
    ईरान (Iran) ने रविवार को कहा कि अधिकृत देशों के जो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरेंगे, उन्हें अब तेहरान को सेवा शुल्क (Service Fees ) देना होगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह शुल्क समुद्री, पर्यावरण और लॉजिस्टिक से जुड़ी कई तरह की सेवाओं के लिए लिया जाएगा।

    सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के मुताबिक, यह फैसला ‘होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कार्रवाई’ योजना के अनुच्छेद 3 को मंजूरी मिलने के बाद लिया गया है।

    रेजाई ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग ने इस योजना के अनुच्छेद 3 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति पाने वाले देशों के जहाजों को ईरान की ओर से दी जाने वाली सेवाओं का भुगतान करना होगा।


    जहाजों से किस वजहों से शुल्क लिया जाएगा?

    उन्होंने कहा कि इन सेवाओं में जहाजों की आवाजाही के लिए मदद, पर्यावरण से जुड़ी सेवाएं, कुछ परिस्थितियों में ईंधन, बीमा, सुरक्षा और दूसरी सेवाएं शामिल हैं। प्रवक्ता ने बताया कि भुगतान के लिए लचीली वित्तीय व्यवस्था तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि शुल्क ईरानी रियाल या इस्लामी गणराज्य ईरान की ओर से पसंद की जाने वाली किसी दूसरी मुद्रा में लिया जा सकता है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद है: रेजाई

    इससे पहले शनिवार को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है। उन्होंने कहा था कि जब तक अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता और अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक यह जलमार्ग दोबारा नहीं खोला जाएगा।

    आईआरआईबी को दिए इंटरव्यू में रेजाई ने कहा कि अमेरिकी दावों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और अमेरिका का रवैया ठीक होने तक यह नहीं खुलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार अमेरिका को पहले अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी।

    रेजाई ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका सैन्य विकल्पों से निराश हो चुका है और अब आर्थिक नाकाबंदी के जरिये ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा दिलाया है कि आर्थिक नाकाबंदी ईरान को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर देगी।

    दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा किया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताया गया है। ट्रंप ने इससे पहले 18 अगस्त को एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने यही तस्वीर साझा की थी।

  • Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत

    Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत


    भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मानसून ट्रफ चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र से बने मजबूत मौसम सिस्टम के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। अगले 24 घंटे में खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने डिंडौरी और बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 4 से 8 इंच तक बारिश की आशंका जताई है। इसके अलावा विदिशा सागर रायसेन नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा नरसिंहपुर दमोह सिवनी जबलपुर मंडला कटनी उमरिया शहडोल अनूपपुर रीवा मऊगंज सीधी और छतरपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    राजधानी भोपाल में रविवार रात तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद मुख्य बाजार में पानी भर गया। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अशोकनगर में बारिश ने एक परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया। ईसागढ़ के नरसूखेड़ी गांव के पास पुलिया पार करते समय करीब 30 वर्षीय अजय मराठा बाइक समेत तेज बहाव में बह गया। काफी तलाश के बाद सोमवार सुबह उसका शव झाड़ियों में फंसा मिला।

    सीधी में भी बारिश के दौरान हादसा सामने आया जहां प्रसिद्ध बढ़ौरा शिव मंदिर के पास एक महिला की पुल से गिरने के बाद मौत हो गई। दूसरी ओर रीवा के जवा जनपद की रौली गांव में बाढ़ ने अंतिम यात्रा का रास्ता भी रोक दिया। संजय गांधी अस्पताल रीवा में मोतीलाल तिवारी के निधन के बाद जब उनका शव गांव ले जाया जा रहा था तो रास्ते में तेज बहाव के कारण आगे जाना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने दो ड्रमों को आपस में बांधकर उनके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराया। इसके बाद शव गांव पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 27 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी हिस्से के साथ अब पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगह तेज बारिश होने की संभावना है। भोपाल सीहोर राजगढ़ इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर सतना सिंगरौली मैहर पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश की कमी के बाद जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी थी लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने से बारिश का आंकड़ा फिर पीछे चला गया। अब अगस्त के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम ने प्रदेश के कई हिस्सों में राहत दी है। हालांकि लगातार भारी बारिश के कारण नदी नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और तेज बहाव वाले रास्तों व पुलियाओं को पार करने से बचने की सलाह दी गई है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का असर देखने को मिलेगा।