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  • अमित मिश्रा का दावा, विराट कोहली ने वापसी का भरोसा देने के बाद फोन उठाना किया बंद, आईपीएल मुलाकात में भी नहीं मिला जवाब

    अमित मिश्रा का दावा, विराट कोहली ने वापसी का भरोसा देने के बाद फोन उठाना किया बंद, आईपीएल मुलाकात में भी नहीं मिला जवाब

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने विराट कोहली के साथ अपने संवाद और टीम में वापसी की उम्मीदों को लेकर कुछ अहम बातें साझा की हैं। मिश्रा के मुताबिक, गंभीर चोट से उबरने के बाद उन्हें भारतीय टीम में दोबारा जगह मिलने की उम्मीद थी। उस दौरान विराट कोहली ने उन्हें फिटनेस हासिल करने के बाद वापसी का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उनसे संपर्क करना मुश्किल हो गया। मिश्रा ने बताया कि उनके फोन कॉल और संदेशों का जवाब नहीं मिलने से वह निराश हुए और आखिरकार उन्हें क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला करना पड़ा।

    मिश्रा ने यह अनुभव आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान उनके पैर में गंभीर चोट लगी थी। इस चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा। चोट से उबरने और दोबारा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने के दौरान उनके सामने फिटनेस हासिल करने के साथ भारतीय टीम में जगह बनाने की चुनौती भी थी।

    मिश्रा के अनुसार, उस समय भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले थे। उन्होंने चोट से जूझ रहे स्पिनर का हौसला बढ़ाया था और कहा था कि पूरी तरह फिट होने के बाद उनकी वापसी हो सकती है। इस आश्वासन से मिश्रा को फिर से भारतीय टीम का हिस्सा बनने की उम्मीद मिली। बाद में विराट कोहली के कप्तान बनने पर उन्होंने उनसे भी अपनी वापसी को लेकर संपर्क किया।

    मिश्रा का कहना है कि कोहली ने उन्हें आश्वस्त किया था कि फिट होने के बाद टीम में उनकी जगह को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस बातचीत के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मेहनत और प्रदर्शन के आधार पर वह दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह बना सकेंगे। अपनी फिटनेस और खेल को साबित करने के लिए उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ इंडियन प्रीमियर लीग में भी प्रदर्शन जारी रखा।

    हालांकि, मिश्रा के मुताबिक, वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी। इसी सिलसिले में उन्होंने आईपीएल के दौरान विराट कोहली से आमने-सामने बातचीत करने की कोशिश की। यह मुलाकात दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबले के दौरान हुई थी। मिश्रा ने कोहली से अपने क्रिकेट भविष्य और भारतीय टीम में दोबारा मौका मिलने की संभावना पर स्पष्ट जवाब मांगा।

    मिश्रा के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान कोहली ने उन्हें एक सप्ताह से दस दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उन्हें उम्मीद थी कि तय समय में इस विषय पर बातचीत आगे बढ़ेगी और उन्हें अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता मिलेगी। लेकिन मिश्रा का दावा है कि इसके बाद उन्हें कोहली की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि कोहली ने उनके फोन कॉल उठाने बंद कर दिए थे।

    मिश्रा के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल थी, क्योंकि वह चोट से उबरने के बाद लगातार क्रिकेट खेलकर अपनी फिटनेस और क्षमता साबित करने की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, वापसी की उम्मीद मिलने के बावजूद संवाद नहीं होने से उन्हें निराशा हुई। इसी अनुभव को उन्होंने अपने क्रिकेट करियर के कठिन दौर से जोड़कर बताया।

    अमित मिश्रा के इस बयान ने विराट कोहली के साथ उनके संबंधों और भारतीय टीम में वापसी की कोशिशों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, सामने आई जानकारी में यह पक्ष अमित मिश्रा के बयान पर आधारित है। कोहली की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 125 किमी रूट का 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा

    ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, 125 किमी रूट का 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर काम किया जा रहा है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन गढ़वाल हिमालय के भीतर तक रेल नेटवर्क पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना पूरी होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक यात्रा करना आसान हो सकेगा। इससे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए भी यह रेल मार्ग उपयोगी साबित हो सकता है।

    इस परियोजना के तहत रेल लाइन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी और ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी। पहाड़ी इलाकों में रेल परिवहन का विस्तार होने से यात्रियों को सड़क मार्ग के अलावा एक अन्य विकल्प उपलब्ध होगा। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है। बेहतर परिवहन सुविधाएं स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी आवागमन को सुविधाजनक बना सकती हैं।

    परियोजना का प्रस्तावित अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह स्थान भारत-चीन सीमा से लगभग 123 किलोमीटर दूर है। हालांकि, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक नहीं जाती। इसका प्रमुख उद्देश्य गढ़वाल क्षेत्र के अंदरूनी हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ना और हिमालयी क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना है। इसके बावजूद सीमा के करीब स्थित क्षेत्रों तक पहुंच मजबूत करने के लिहाज से इस परियोजना का रणनीतिक महत्व भी है।

    इस रेल लाइन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका बड़ा सुरंग नेटवर्क है। पहाड़ी भूभाग और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परियोजना का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरने की योजना है। इसमें 28 मुख्य और एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं। इसके अलावा रेल मार्ग पर 57 बड़े और छोटे पुल भी शामिल हैं। सुरंगों और पुलों का निर्माण पहाड़ों के बीच रेल लाइन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि इस क्षेत्र में ऊंचाई, चट्टानों और जमीन की बनावट से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं।

    हिमालय में सुरंग निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कमजोर चट्टानों, भूजल और जमीन की स्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर पानी से भरी भूगर्भीय परतें खुदाई के काम को कठिन बना सकती हैं। कमजोर जमीन में खुदाई के दौरान बदलाव होने से सुरंग की दीवारों पर दबाव पड़ने का जोखिम भी रहता है। इसलिए निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियों का आकलन करना और जरूरत के मुताबिक सुरंग को मजबूती देना महत्वपूर्ण होता है।

    इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुरंग निर्माण से पहले भूगर्भीय जांच की गई। टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम के इस्तेमाल से जुड़े फैसलों में भी जमीन और चट्टानों की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग स्थानों पर मौजूद भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुसार निर्माण तकनीक चुनना जरूरी है, ताकि काम को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

    भारत और चीन के बीच हिमालयी क्षेत्र में संवेदनशील सीमा होने के कारण बेहतर परिवहन नेटवर्क का महत्व बढ़ जाता है। ऊंचे पहाड़, प्रतिकूल मौसम और सीमित परिवहन सुविधाएं कई इलाकों तक पहुंच को कठिन बनाती हैं। ऐसे में सड़क, पुल और रेल संपर्क को मजबूत करना क्षेत्रीय आवागमन के लिए उपयोगी हो सकता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से यात्रियों, श्रमिकों और सामान की आवाजाही को सहारा मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर, यह परियोजना धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास के साथ हिमालयी क्षेत्र में परिवहन संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम है। रेल नेटवर्क के विस्तार से गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान हो सकती है, जबकि सुरंगों और पुलों का व्यापक निर्माण इस परियोजना की तकनीकी जटिलता और महत्व को दर्शाता है।

  • KGF के रॉकी भाई अब क्यों बना रहे हैं बड़ी फिल्में साई पल्लवी के सवाल पर यश ने खोला अपना दिल और बताया खास मकसद

    KGF के रॉकी भाई अब क्यों बना रहे हैं बड़ी फिल्में साई पल्लवी के सवाल पर यश ने खोला अपना दिल और बताया खास मकसद


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर चर्चा में हैं। केजीएफ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से देशभर में पहचान बनाने वाले यश अब बड़े स्तर की फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच फिल्म रामायण में माता सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री साई पल्लवी ने उनसे उनकी रोमांटिक फिल्मों में वापसी को लेकर सवाल पूछ लिया। यश ने इसका जो जवाब दिया उसने उनके प्रशंसकों का दिल जीत लिया। अभिनेता ने साफ किया कि फिलहाल उनका ध्यान ऐसी बड़ी फिल्मों पर है जो भारतीय और खासकर कन्नड़ सिनेमा की ताकत को दुनिया के सामने पेश कर सकें।

    न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक एक प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान साई पल्लवी ने यश से उनकी पुरानी रोमांटिक फिल्मों को लेकर सवाल किया। अभिनेत्री ने जानना चाहा कि वह छोटे बजट की रोमांटिक लव स्टोरीज में दोबारा कब नजर आएंगे। यश ने जवाब देते हुए कहा कि वह बड़ी फिल्में बनाना चाहते हैं क्योंकि उनके पास ऐसा करने का अवसर है। उनके मुताबिक यह सही समय है जब कन्नड़ सिनेमा दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग और भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से पेश किया जा सकता है। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि वह अपने करियर को केवल एक सफल अभिनेता तक सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि भारतीय फिल्मों के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में भी काम करना चाहते हैं।

    यश ने अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्मों से की थी और रोमांटिक भूमिकाओं में भी दर्शकों का प्यार हासिल किया। उनकी फिल्म गूगली को काफी पसंद किया गया था। शुरुआती दौर में उन्होंने रोमांस और मनोरंजन से भरपूर कहानियों में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई लेकिन साल 2018 में आई केजीएफ चैप्टर 1 ने उनके करियर की दिशा बदल दी। फिल्म में रॉकी भाई के किरदार ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद साल 2022 में रिलीज हुई केजीएफ चैप्टर 2 ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया। इन फिल्मों की सफलता के बाद यश केवल कन्नड़ सिनेमा ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के चर्चित सितारों में शामिल हो गए।

    केजीएफ के बाद प्रशंसकों को यश की अगली बड़ी फिल्म का इंतजार था। अब वह गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी फिल्म टॉक्सिक को लेकर चर्चा में रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ कियारा आडवाणी नयनतारा और हुमा कुरैशी जैसे कलाकारों के नाम जुड़े हैं। यश इस परियोजना में अभिनय के साथ निर्माण से भी जुड़े हैं। फिल्म को लेकर बड़े स्तर पर उम्मीदें जताई गईं लेकिन इसकी व्यावसायिक सफलता से जुड़ी खबरों के दावों को आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही परखना जरूरी है।

    अब यश नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म रामायण में रावण की भूमिका निभाने जा रहे हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता है और यश के रावण वाले किरदार को लेकर भी चर्चा हो रही है।

    साई पल्लवी के सवाल पर यश का जवाब उनके करियर की प्राथमिकताओं को सामने लाता है। वह फिलहाल ऐसी फिल्मों पर ध्यान देना चाहते हैं जिनका प्रभाव भारतीय सिनेमा की सीमाओं से आगे तक पहुंचे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वह भविष्य में रोमांटिक फिल्मों में वापसी नहीं करेंगे। फिलहाल उनके प्रशंसकों की निगाहें रामायण और उनकी आगामी परियोजनाओं पर टिकी हैं।

  • वृंदावन के निधिवन में रात होते ही क्यों बंद हो जाते हैं दरवाजे? राधा-कृष्ण की रासलीला और रंग महल से जुड़ी मान्यता

    वृंदावन के निधिवन में रात होते ही क्यों बंद हो जाते हैं दरवाजे? राधा-कृष्ण की रासलीला और रंग महल से जुड़ी मान्यता

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के वृंदावन को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां के मंदिरों, गलियों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी अनेक मान्यताएं श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। इन्हीं प्रमुख स्थलों में निधिवन का विशेष स्थान है। अपनी अनोखी बनावट, झुकी हुई झाड़ियों और राधा-कृष्ण की रासलीला से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह स्थान लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दिन के समय यहां श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन शाम होने से पहले परिसर खाली करा दिया जाता है और इसके द्वार बंद कर दिए जाते हैं।

    निधिवन से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य रासलीला को लेकर है। स्थानीय धार्मिक विश्वास के अनुसार, रात के समय यहां श्रीकृष्ण राधा रानी और गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। इसी आस्था के चलते सूर्यास्त से पहले लोगों को परिसर से बाहर कर दिया जाता है। रात में यहां किसी व्यक्ति के रुकने की अनुमति नहीं होती। स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि रात के समय निधिवन में ठहरने वाले व्यक्ति के साथ अनहोनी हो सकती है। ये बातें धार्मिक विश्वासों और लंबे समय से चली आ रही स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं।

    निधिवन की एक और खास पहचान यहां मौजूद पेड़-पौधों की बनावट है। सामान्य पेड़ों की तरह सीधे और ऊंचे तनों के बजाय यहां छोटी-छोटी झाड़ियां दिखाई देती हैं। उनकी शाखाएं एक-दूसरे की ओर झुकी हुई नजर आती हैं, जिससे परिसर का दृश्य अलग दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं में इन झाड़ियों को भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और गोपियों की लीलाओं से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इनका संबंध निधिवन में होने वाली दिव्य गतिविधियों से है। यही अनोखी वनस्पति यहां आने वाले लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ाती है।

    निधिवन परिसर में स्थित रंग महल का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इससे जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह स्थान राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से संबंधित है। निधिवन और रंग महल से जुड़ी धार्मिक कथाओं के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु इन स्थलों के दर्शन करते हैं। कुछ लोग यहां की अनोखी झाड़ियों को देखने पहुंचते हैं, जबकि अन्य लोग इनसे जुड़ी परंपराओं और मान्यताओं को समझने में रुचि रखते हैं।

    निधिवन का संबंध वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बांके बिहारी जी का विग्रह निधिवन से प्रकट हुआ था। इसी वजह से दोनों स्थलों के बीच विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

    मंदिर में दर्शन की एक विशिष्ट परंपरा भी है। यहां ठाकुर जी के सामने कुछ-कुछ समय के अंतराल पर पर्दा लगाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक स्वरूप इतना आकर्षक है कि भक्त उन्हें लगातार निहारते हुए उनमें खो सकते हैं। इसी धार्मिक विश्वास से पर्दा लगाने की परंपरा को जोड़ा जाता है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बांके बिहारी नाम का भी धार्मिक अर्थ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, ‘बांके’ का अर्थ तीन स्थानों से मुड़ा हुआ और ‘बिहारी’ का अर्थ लीला करने वाला होता है। यह नाम उनकी त्रिभंग मुद्रा से जुड़ा है, जिसमें उनका शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ दिखाई देता है। इसी स्वरूप के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं।

    निधिवन की पहचान केवल उसकी अनोखी बनावट तक सीमित नहीं है। यहां की धार्मिक मान्यताएं, रंग महल और बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा संबंध इसे वृंदावन के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल करते हैं। रात में परिसर बंद करने की परंपरा भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई है, जो आज तक श्रद्धालुओं और आगंतुकों की जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।

  • जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी

    जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी


    नई दिल्ली ।
    प्रशांत महासागर में स्थित जापान का मियाके-जिमा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली जहरीली गैस के खतरे के लिए भी जाना जाता है। यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षा के विशेष उपाय अपनाने पड़ते हैं। गैस मास्क रखना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। बाजार में खरीदारी करने वाले लोग हों, सड़क पर घूमते बच्चे हों या समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरे, सभी को संभावित खतरे के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। हवा में जहरीली गैस का स्तर बढ़ने पर चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को सावधान किया जाता है।

    जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित मियाके-जिमा, टोक्यो महानगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। दूर से यह द्वीप हरी-भरी पहाड़ियों और नीले समुद्र से घिरा खूबसूरत स्थान दिखाई देता है। हालांकि, इसके बीचों-बीच स्थित माउंट ओयामा नामक सक्रिय ज्वालामुखी यहां के निवासियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस ज्वालामुखी से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

    मियाके-जिमा का इतिहास ज्वालामुखी विस्फोटों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2000 में माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिसके बाद वातावरण में बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड फैल गई। स्थिति गंभीर होने पर सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने पूरे द्वीप को खाली कराने का आदेश दिया। वहां रहने वाले लगभग 3,600 लोगों को जहाजों और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए टोक्यो के मुख्य भूभाग पर पहुंचाया गया। इसके बाद कई वर्षों तक द्वीप पर सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा और वैज्ञानिकों तथा अनुसंधान दलों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ वहां जाने की अनुमति दी गई।

    समय के साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली गैस के स्तर और परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद लोगों को धीरे-धीरे द्वीप पर लौटने की अनुमति मिली। हालांकि, वापसी के साथ सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना जरूरी बना रहा। गैस मास्क रखना और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना यहां के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

    द्वीप पर हवा में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा पर नजर रखने के लिए गैस निगरानी स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से गैस के स्तर में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को संभावित खतरे की सूचना दी जाती है, ताकि वे समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठा सकें। गैस का स्तर खतरनाक होने पर लोगों को मास्क पहनने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी जाती है।

    आज मियाके-जिमा में लगभग 2,200 लोग रहते हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को गैस के खतरे और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक रहना पड़ता है। घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों में हवा को साफ रखने के लिए विशेष फिल्टरिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोग सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते हैं।

    इस द्वीप की परिस्थितियां पर्यटकों, भूवैज्ञानिकों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का विषय हैं। यहां आने वाले लोगों को स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है। ज्वालामुखी से प्रभावित भूभाग और प्राकृतिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं।

    मियाके-जिमा की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम वाले क्षेत्रों में जीवन चलाने के लिए सतर्कता, तकनीक और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण हैं। यहां गैस मास्क केवल सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि उस खतरे की लगातार याद दिलाने वाला साधन है, जिसके बीच स्थानीय लोग अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।

  • बिग बॉस 20 में स्काउट ओपी और लव गिल की नजदीकियों पर भड़के रोहित शेट्टी, गर्लफ्रेंड काशवी ने लगाई जमकर क्लास

    बिग बॉस 20 में स्काउट ओपी और लव गिल की नजदीकियों पर भड़के रोहित शेट्टी, गर्लफ्रेंड काशवी ने लगाई जमकर क्लास


    नई दिल्ली ।  
    बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार एपिसोड में स्काउट ओपी और पंजाबी अभिनेत्री लव गिल की नजदीकियों को लेकर जमकर चर्चा हुई। शो के होस्ट रोहित शेट्टी ने दोनों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उन्हें समझाया कि भाई-बहन कहने के बावजूद उनका एक-दूसरे के साथ इस तरह करीब आना टेलीविजन पर ठीक नहीं दिखाई देता। वहीं, स्काउट की गर्लफ्रेंड काशवी हीरानंदानी ने भी शो में पहुंचकर उनके और लव गिल के बीच बढ़ती नजदीकियों पर नाराजगी जताई।

    रोहित शेट्टी ने स्काउट और लव गिल को उनके व्यवहार को लेकर स्पष्ट रूप से चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दोनों जिस तरह एक-दूसरे के करीब आते हैं, उससे बाहर गलत संदेश जा सकता है। रोहित के मुताबिक, स्काउट का लव के पैर या गर्दन दबाना और इस दौरान कंबल का इस्तेमाल करना उचित नहीं लग रहा है। उन्होंने लव से भी कहा कि इस तरह की नजदीकियों से उनकी छवि पर असर पड़ सकता है।

    शो के दौरान रोहित शेट्टी ने दोनों के बीच हुई कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कभी लव स्काउट को पकड़ लेती हैं, तो कभी उनकी गोद में बैठ जाती हैं। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार सार्वजनिक मंच पर ठीक नहीं दिखता। उन्होंने यह भी बताया कि एक मौके पर लव ने स्काउट से अपने कंधे दबाने के लिए कहा था। जब स्काउट ऐसा करने लगे, तो लव की प्रतिक्रियाओं ने भी उनका ध्यान खींचा। रोहित ने दोनों को अपने व्यवहार के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

    इस पूरे मामले में स्काउट की गर्लफ्रेंड काशवी हीरानंदानी की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी। शो में मेहमान के तौर पर पहुंचीं काशवी ने स्काउट से उनके व्यवहार को लेकर सीधे सवाल किए। उन्होंने कहा कि कैमरों के सामने उनके हर शब्द और हर स्पर्श को करीब से दिखाया जाता है, इसलिए उन्हें अपने आचरण के बारे में सोचने की जरूरत है।

    काशवी ने स्काउट से यह भी पूछा कि उन्होंने उनकी तुलना लव गिल से करने के बारे में सोचा कैसे और लव के प्रति उनके मन में किस तरह की भावनाएं हैं। उन्होंने स्काउट के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल किया कि वह आखिर किस तरह के रिश्ते को लेकर असमंजस में हैं। उनकी बातों से साफ था कि उन्हें स्काउट और लव की बढ़ती नजदीकियों से परेशानी है।

    स्काउट ने अपनी सफाई में कहा कि वह लव गिल का ख्याल एक बहन की तरह रखते हैं। हालांकि, उनकी इस दलील से काशवी संतुष्ट नजर नहीं आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्काउट शो में लव का ध्यान रखने के लिए आए हैं, तो उनके व्यवहार का उनके रिश्ते पर क्या असर पड़ रहा है। काशवी ने कहा कि यह सब देखकर उन्हें बहुत बुरा महसूस होता है और उनके परिवार को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

    काशवी ने स्काउट के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह किसी लड़की के पीछे इस तरह भागते दिखाई दे रहे हैं, जैसे उनकी अपनी कोई अलग भूमिका नहीं है। उनकी भावुक प्रतिक्रिया के बाद स्काउट और लव के रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई। दर्शकों की प्रतिक्रियाओं में भी काशवी के सवालों का समर्थन देखने को मिला और कुछ लोगों ने उन्हें स्काउट से रिश्ता खत्म करने की सलाह दी।

    फिलहाल, इस विवाद के बाद स्काउट और काशवी के रिश्ते का भविष्य क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है। शो में दोनों की नजदीकियों को लेकर रोहित शेट्टी की चेतावनी और काशवी की नाराजगी ने इस एपिसोड को चर्चा में ला दिया है।

  • तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी ने पलटा हारा हुआ मैच, पाकिस्तानी दिग्गज बासित अली ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ की

    तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी ने पलटा हारा हुआ मैच, पाकिस्तानी दिग्गज बासित अली ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ की

    नई दिल्ली ।भारत और न्यूजीलैंड के बीच क्राइस्टचर्च में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने मुश्किल परिस्थितियों से उबरते हुए जीत हासिल की। भारतीय बल्लेबाज तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने अहम योगदान देकर मुकाबले का रुख बदल दिया। इस प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ की। उन्होंने तिलक वर्मा को जीत का असली हीरो बताते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ भरी बल्लेबाजी ने भारत को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला।

    मैच के दौरान भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एक समय 70 रन के स्कोर पर पांच विकेट गिर चुके थे और टीम मुश्किल में दिखाई दे रही थी। ऐसे हालात में तिलक वर्मा ने जिम्मेदारी संभाली और पारी को आगे बढ़ाया। उनके साथ नीतीश कुमार रेड्डी ने भी अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने दबाव के बीच रन जुटाकर भारतीय टीम की जीत की उम्मीदों को बनाए रखा और अंततः मुकाबले का पासा पलट दिया।

    बासित अली ने मैच के विश्लेषण के दौरान तिलक की बल्लेबाजी की रणनीति की विशेष रूप से सराहना की। उनके मुताबिक, तिलक ने परिस्थितियों को समझते हुए गैरजरूरी जोखिम लेने से परहेज किया। उन्होंने बड़ी बाउंड्री की दिशा में हवा में शॉट खेलने के बजाय सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। साथ ही, उन्होंने छोटी बाउंड्री का भी समझदारी से इस्तेमाल किया। बासित के अनुसार, तिलक की इसी रणनीति ने भारतीय पारी को संभालने और टीम को जीत तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    उन्होंने भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों की भूमिका को भी सराहा। नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने निचले क्रम में आकर उपयोगी और तेज रन बनाए। इन खिलाड़ियों के योगदान से भारतीय टीम उस मुकाबले में वापसी करने में सफल रही, जहां शुरुआती विकेट गिरने के बाद स्थिति उसके पक्ष में नहीं दिख रही थी। बासित अली ने कहा कि भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों ने अपनी क्षमता साबित की है। उनके प्रदर्शन से टीम की बेंच स्ट्रेंथ का भी पता चलता है।

    भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के वैभव सूर्यवंशी को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजने के फैसले की भी बासित अली ने सराहना की। हालांकि, उन्होंने यह संभावना भी जताई कि ईशान किशन के फिट होकर उपलब्ध होने पर टीम के प्लेइंग इलेवन का समीकरण बदल सकता है। इससे आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों के चयन को लेकर नए विकल्प सामने आ सकते हैं।

    दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर की रणनीति पर भी बासित अली ने सवाल उठाए। सेंटनर ने गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए, लेकिन बासित के मुताबिक, कप्तानी के स्तर पर कुछ फैसले न्यूजीलैंड के पक्ष में परिणाम सुनिश्चित नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के पास मुकाबले में जीत हासिल करने का मौका था, लेकिन रणनीतिक चूक के कारण टीम इसे भुना नहीं पाई।

    बासित अली ने सीमित ओवरों के क्रिकेट की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा कि आखिरी गेंद फेंके जाने तक मुकाबले का परिणाम तय नहीं माना जा सकता। भारतीय टीम के युवा बल्लेबाजों ने दबाव में प्रदर्शन करके इस बात को फिर साबित किया। तिलक वर्मा की संयमित बल्लेबाजी और नीतीश कुमार रेड्डी समेत अन्य खिलाड़ियों के योगदान ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

  • नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दौरान धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। इसके अलावा देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी इसी महीने पड़ेंगे। व्रत और त्योहारों की तारीखों की जानकारी पहले से होने पर लोग अपनी धार्मिक तैयारियां और पूजा-पाठ की योजनाएं व्यवस्थित कर सकते हैं। नवंबर के कैलेंडर में महीने की शुरुआत से लेकर अंतिम सप्ताह तक कई महत्वपूर्ण तिथियां शामिल हैं।

    महीने की शुरुआत 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, राधा कुंड स्नान और कालाष्टमी के साथ होगी। इसके बाद 5 नवंबर को रमा एकादशी, कृष्ण पद्मनाभ द्वादशी और गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। 6 नवंबर को धनतेरस, धनत्रयोदशी, यम दीपम और शुक्र प्रदोष व्रत पड़ेंगे। धनतेरस को दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

    धनतेरस की तिथि को लेकर दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन 7 नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि के पर्व पड़ेंगे।

    8 नवंबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी। इस अवसर पर घरों में दीप जलाने और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी, काली पूजा, केदार गौरी व्रत और कमला जयंती भी सूची में शामिल हैं। 9 नवंबर को अन्वाधान और कार्तिक अमावस्या के पर्व बताए गए हैं।

    10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 11 नवंबर को भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा और चंद्र दर्शन होंगे। 13 नवंबर से छठ पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन नागुला चविथी और लाभ चतुर्थी भी पड़ेंगे। 14 नवंबर को लाभ पंचमी और 15 नवंबर को छठ पूजा का दूसरा दिन तथा स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।

    महीने के मध्य में 16 नवंबर को वृश्चिक संक्रांति और जैन अष्टाह्निका का प्रारंभ होगा। 17 नवंबर को गोपाष्टमी, मंडला पूजा प्रारंभ और मासिक दुर्गाष्टमी पड़ेंगे। 18 नवंबर को अक्षय नवमी, आंवला नवमी और जगद्धात्री पूजा मनाई जाएगी।

    20 नवंबर को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और भीष्म पंचक का प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। 21 नवंबर को तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी और वैष्णव देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। 22 नवंबर को विश्वेश्वर व्रत और रवि प्रदोष व्रत पड़ेंगे।

    23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी, मणिकर्णिका स्नान और कार्तिक चौमासी चौदस मनाई जाएगी। 24 नवंबर को देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और पुष्कर स्नान के पर्व पड़ेंगे। इसी दिन भीष्म पंचक का समापन भी होगा। 25 नवंबर को मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ, रोहिणी व्रत और इष्टि होंगे। महीने के अंतिम प्रमुख व्रतों में 27 नवंबर को गणाधिप संकष्टी और मार्गशीर्ष गणेश चतुर्थी शामिल हैं।

  • 4000 करोड़ की रामायण को लेकर बड़ा दावा रिलीज से पहले दर्शक ने बताया कैसा है रणबीर कपूर का राम अवतार संगीत की तारीफ कर कही ये बात

    4000 करोड़ की रामायण को लेकर बड़ा दावा रिलीज से पहले दर्शक ने बताया कैसा है रणबीर कपूर का राम अवतार संगीत की तारीफ कर कही ये बात


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिका की एक एक्स यूजर प्रिया मैथ्यू ने सोशल मीडिया पर फिल्म देखने का अनुभव साझा करते हुए इसका शुरुआती रिव्यू दिया है। उनके मुताबिक फिल्म की कहानी भावनात्मक और प्रभावशाली है और इसका संगीत भी उन्हें काफी पसंद आया। हालांकि उन्होंने फिल्म के अंग्रेजी डब वर्जन को लेकर कुछ कमियां भी बताई हैं। इस प्रतिक्रिया के सामने आने के बाद रणबीर कपूर की रामायण को लेकर फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

    प्रिया मैथ्यू ने दावा किया कि उन्होंने इसी सप्ताह आयोजित एक स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म का अंग्रेजी वर्जन देखा था। उनके अनुसार फिल्म देखने का अनुभव अच्छा रहा और कहानी ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि फिल्म उन्हें पसंद आई लेकिन अंग्रेजी डबिंग उतनी प्रभावशाली नहीं लगी। उन्होंने इस बारे में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट को भी अपनी प्रतिक्रिया देने की बात कही। प्रिया का कहना है कि वह फिल्म को उसकी मूल भाषा हिंदी में देखना पसंद करेंगी ताकि संवादों और भावनाओं का प्रभाव बेहतर तरीके से महसूस किया जा सके।

    फिल्म की कहानी से जुड़ाव के सवाल पर प्रिया ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि फिल्म काफी भावनात्मक और शक्तिशाली है। कहानी के साथ उनका जुड़ाव बना रहा और कई दृश्य उन्हें भीतर तक प्रभावित करने वाले लगे। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म देखने के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। इस प्रतिक्रिया ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक दर्शक की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है और इसे फिल्म की आधिकारिक या सर्वमान्य समीक्षा नहीं माना जा सकता।

    रामायण के संगीत को लेकर भी प्रिया ने अपनी राय रखी। उन्होंने एआर रहमान के संगीत की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय संगीत का प्रभाव अधिक पसंद आया। उन्होंने इसकी तुलना हॉलीवुड संगीतकार हंस जिमर के संगीत से भी की और रहमान के काम को बेहतर बताया। प्रिया ने यह आशंका भी जताई कि अंग्रेजी वर्जन में कुछ गाने हटाए गए हो सकते हैं। हालांकि फिल्म के अलग-अलग संस्करणों में गानों को लेकर उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा कि क्या फिल्म में भगवान हनुमान को दिखाया गया है। इस सवाल पर प्रिया ने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि वह फिल्म से जुड़ा कोई स्पॉइलर साझा नहीं करना चाहतीं। इससे फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्यों और किरदारों को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे। साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं जबकि यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह लारा दत्ता काजल अग्रवाल अरुण गोविल और कुणाल कपूर सहित कई कलाकार भी शामिल हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर को दिवाली के मौके पर रिलीज होने वाला है जबकि दूसरा भाग अगले साल दिवाली पर आने की योजना है। निर्माता नमित मल्होत्रा के मुताबिक दोनों भागों को मिलाकर इस महागाथा का कुल बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इतने बड़े बजट और शानदार कलाकारों की मौजूदगी के कारण फिल्म से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। अब दर्शकों को आधिकारिक ट्रेलर और फिल्म की रिलीज का इंतजार है ताकि वे खुद तय कर सकें कि बड़े पर्दे पर रामायण की यह नई प्रस्तुति उनकी उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा

    अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा


    बिहार । बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने तीखे तेवर दिखाते हुए जदयू नेतृत्व पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में पार्टी को अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा लग जाएगा और उसे 12 सीटें हासिल करना भी मुश्किल होगा। अनंत सिंह ने कहा कि जनता ही असली मालिक है और चुनाव के समय सबको अपनी औकात पता चल जाएगी। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।

    जदयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी है। निष्कासन के बाद एक इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बाहर कर दिया है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी जिसके हाथ में है वह अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। वह किसी के पास दोबारा पार्टी में शामिल रखने की गुहार लगाने नहीं जाएंगे। अनंत सिंह ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो किया वह उचित था और उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

    अनंत सिंह ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि आज ऐसे लोग पार्टी के मालिक बनकर बैठे हैं जिनका संगठन को खड़ा करने में कोई खास योगदान नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में मंत्री और दूसरे पदों पर बैठे कई लोगों ने संगठन के लिए कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई है। उनके मुताबिक चुनाव आने पर ऐसे नेताओं को अपनी वास्तविक राजनीतिक हैसियत का पता चल जाएगा। अनंत सिंह ने इसी दौरान केकड़ा और बिच्छू जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए नेतृत्व पर कटाक्ष किया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    नीतीश कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि उनके मन में नीतीश कुमार के प्रति सम्मान पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के रहते शायद उन्हें पार्टी से निकालने की हिम्मत कोई नहीं करता। अनंत सिंह ने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज पार्टी में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है जो पहले इस स्थिति में नहीं थे। हालांकि उन्होंने निशांत कुमार को लेकर कोई तीखी टिप्पणी करने से परहेज किया। अनंत सिंह ने कहा कि निशांत के बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते और पार्टी जो भी फैसला करेगी उसके लिए वह तैयार हैं।

    भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अनंत सिंह ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वह आगे किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे इसका फैसला अभी नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताने की बात कही। अनंत सिंह ने दोहराया कि जनता ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और चुनाव के समय जनता का फैसला सामने आ जाएगा। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता को लेकर संभावित कार्रवाई पर भी कहा कि पार्टी जो करना चाहती है कर सकती है और उन्हें इसकी चिंता नहीं है।

    दरअसल जदयू ने अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हालिया विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने के आरोप लगाए हैं। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की जानकारी दी गई। अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया और जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की बात कही। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक टकराव का बिहार की आगामी चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।