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  • Thailand के 3 प्रांतों में अलग शासन की मांग…. रातभर हुई हिंसा…. PM ने बुलाई आपात बैठक

    Thailand के 3 प्रांतों में अलग शासन की मांग…. रातभर हुई हिंसा…. PM ने बुलाई आपात बैठक


    बैंकाक।
    थाईलैंड (Thailand) के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल (Prime Minister Anutin Charnvirakul) ने रविवार को वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। देश के उत्तर में पहले से ही बाढ़ का संकट बना हुआ है। इसी बीच, दक्षिण के तीन प्रांतों में रातभर एक साथ हिंसा हुई। इन इलाकों में कुछ मुस्लिम विद्रोही संगठन (Muslim Insurgent Organization) सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं और अपने इलाके के लिए अलग शासन की मांग कर रहे हैं।


    पीएम अनुतिन ने क्यों बुलाई गई बैठक?

    अनुतिन के उत्तर की ओर रवाना होने से कुछ समय पहले यह बैठक हुई। उन्हें बुरी तरह बाढ़ प्रभावित नान प्रांत का जायजा लेना था। बैठक शनिवार रात दक्षिण के सबसे आखिरी तीन प्रांतों में हुई 51 घटनाओं के बाद बुलाई गई। इनमें नाराथिवाट, पट्टानी और याला शामिल हैं।

    हमलावरों का सेना या पुलिस से कोई सामना नहीं हुआ। अब तक सिर्फ तीन नागरिकों के घायल होने की जानकारी है। रविवार को बताया गया कि तीनों की हालत में सुधार हो रहा है।

    हिंसा में मुख्य रूप से छोटे बमों का इस्तेमाल हुआ। आगजनी की गई। संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। सबसे बड़ा निशाना पट्टानी का 7-इलेवन स्टोर था। सोशल मीडिया पर चल रहे एक वीडियो में हथियारबंद लोग स्टोर के बाहर घूमते दिखे। ग्राहक और कर्मचारी वहां से भागते नजर आए। इसके बाद स्टोर में आग लगा दी गई।

    नाराथिवाट में एक बम से रेल की पटरियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके कारण स्थानीय और लंबी दूरी की रेल सेवाएं रोकनी पड़ीं। सुरक्षा की स्थिति साफ नहीं होने के कारण यह पता नहीं चल पाया कि सेवाएं कब फिर शुरू होंगी। ऐसी घटनाओं में अक्सर तुरंत किसी संगठन पर सार्वजनिक रूप से आरोप नहीं लगाया जाता। इस बार भी किसी संगठन ने तुरंत हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली।


    हमलों के पीछे बीआरएन को क्यों माना जा रहा है?

    हालांकि, आमतौर पर माना जाता है कि ऐसे हमले बारिसान रिवोलुसी नेशनल मेलायु पटानी यानी बीआरएन करता है। यह दक्षिण का प्रमुख विद्रोही संगठन है। उसके पास ऐसी कार्रवाई करने के लिए संगठन और समर्थन दोनों हैं। यही वह संगठन है, जिसके साथ थाई सरकार समय-समय पर शांति वार्ता करती रही है।

    थाईलैंड में ज्यादातर लोग बौद्ध हैं। लेकिन इसके तीन सबसे दक्षिणी प्रांतों में मुस्लिम आबादी बहुमत में है। बीआरएन ने कहा है कि वह इन प्रांतों के लिए खुद शासन की व्यवस्था चाहता है। मुस्लिम लोग लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि थाईलैंड में उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार होता है। अलगाववादी आंदोलन भी कई दशकों से समय-समय पर सक्रिय रहे हैं।


    22 साल में 7,837 लोगों की मौत?

    2004 में विद्रोही हिंसा अचानक काफी बढ़ गई थी। इसके जवाब में सरकार ने सख्त कार्रवाई की। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया। पट्टानी में प्रिंस ऑफ सोंगकला यूनिवर्सिटी के परिसर से जुड़े थिंक टैंक डीप साउथ वॉच के मुताबिक, पिछले 22 साल में इस हिंसा में 7,837 लोगों की मौत हुई है।

    इस हिंसा में पिछली बड़ी घटना जुलाई में हुई थी। उस समय करीब 10 हमलावरों ने नाराथिवाट में एक सुरक्षा चौकी पर सैनिकों पर गोलियां चलाईं। उन्होंने सैनिकों पर पाइप बम भी फेंके। इस हमले में अर्धसैनिक बल के पांच सैनिक मारे गए। छह नागरिक घायल हुए। इनमें 10 साल का एक लड़का भी शामिल था।

  • पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल

    पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल


    नई दिल्ली । 
    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जापान दौरा सोमवार से शुरू हो गया है। चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने, निवेश के अवसर बढ़ाने और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर रहेगा।

    पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान में रहेंगे। इस दौरान वह टोक्यो, नागोया और ओसाका का दौरा करेंगे। उनके नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है, जिसमें 200 से अधिक बिजनेस प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और स्टील जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के अलावा ऑटोमोटिव, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े कारोबारी भी शामिल हैं। इससे दौरे के दौरान होने वाली चर्चाओं का दायरा व्यापक रहने की उम्मीद है।

    टोक्यो पहुंचने के बाद गोयल ने जापान की प्रमुख कंपनी सुमितोमो कॉरपोरेशन के प्रेसिडेंट और सीईओ शिंगो उएनो के साथ बैठक की। दोनों पक्षों ने एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन, मोबिलिटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ कंपनी के जुड़ाव को और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान भारत में निवेश आधारित आर्थिक विकास और तेजी से विस्तार कर रहे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर रेखांकित किया गया। भारत की औद्योगिक क्षमता और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहा।

    गोयल ने मेइजी सेइका फार्मा कंपनी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर तोशियाकी नागासातो से भी मुलाकात की। इस बैठक में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने और भारत में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों का विस्तार करने के अवसरों पर बातचीत हुई।

    भारत का फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम जापानी कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास के अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जापान भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

    इस दौरे के दौरान कारोबारी बैठकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। 200 से अधिक भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस यात्रा को व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। इससे भारतीय कंपनियों और जापानी उद्योग जगत के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है।

    दौरे का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आर्थिक स्तर पर और मजबूत करना है। निवेश, तकनीक, उत्पादन और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में आगे बढ़ने से भारत-जापान संबंधों को नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं।

  • भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी

    भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी


    भोपाल राजधानी भोपाल में 24 अगस्त सोमवार को मानसून का असर एक बार फिर देखने को मिल सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शहर में बारिश के दौर बने रहने की संभावना है और आसमान में बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। दिन का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम रहने के आसार हैं। ताजा पूर्वानुमान में भोपाल के लिए 24 अगस्त को अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
    रविवार को भी भोपाल में बारिश और बादलों का असर बना हुआ है। ऐसे में सोमवार को भी मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आने के बजाय मानसूनी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। दिन के समय बादल छाए रहने के साथ बीच बीच में बारिश या बौछारें देखने को मिल सकती हैं। बारिश होने की स्थिति में तापमान में और गिरावट आ सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम का यह मिजाज मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के बीच बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में पिछले दिनों बारिश का दौर जारी रहा है जबकि कुछ जिलों में भारी बारिश के कारण नदी नाले और जलस्रोत उफान पर भी रहे। भोपाल में हालांकि बारिश की तीव्रता कई अन्य जिलों की तुलना में कम रही है लेकिन मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

    24 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। दिन बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर बारिश के दौर बन सकते हैं। कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कुछ इलाकों में तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान शहर में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहता इसलिए एक इलाके में तेज बारिश होने के दौरान दूसरे इलाके में केवल बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

    बारिश के कारण शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात की परेशानी भी बढ़ सकती है। खासकर जिन इलाकों में पहले से सड़कें खराब हैं या गड्ढे बने हुए हैं वहां बारिश का पानी जमा होने से वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दोपहिया वाहन चलाने वालों को फिसलन वाली सड़कों पर विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। तेज बारिश के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचना बेहतर रहेगा।

    मौसम पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों तक भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। 25 अगस्त को बारिश की गतिविधि और बढ़ सकती है जबकि 26 और 27 अगस्त को भी बारिश के दौर बने रहने का अनुमान है। ऐसे में राजधानी में मानसून की सक्रियता अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है।

    कुल मिलाकर 24 अगस्त को भोपाल का मौसम बादलों और बारिश के बीच सुहावना रहने की उम्मीद है। तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने से गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि बाहर निकलने वाले लोगों को बारिश को ध्यान में रखते हुए जरूरी तैयारी के साथ घर से निकलना चाहिए। मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले मौसम अलर्ट पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

  • सोने की कीमत में तेजी जारी, एमसीएक्स पर भाव 1.63 लाख रुपए के पार पहुंचा, चांदी में मुनाफावसूली से गिरावट दर्ज

    सोने की कीमत में तेजी जारी, एमसीएक्स पर भाव 1.63 लाख रुपए के पार पहुंचा, चांदी में मुनाफावसूली से गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली ।भारतीय वायदा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत में तेजी जारी रही और कारोबार के दौरान इसका भाव 1.63 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया। दूसरी ओर चांदी की कीमत में गिरावट देखने को मिली। घरेलू बाजार में दोनों कीमती धातुओं के विपरीत रुख ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला सोने का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग के मुकाबले शुरुआती कारोबार में कमजोर स्तर पर खुला। पिछली क्लोजिंग 1,62,438 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, जबकि सोमवार को कारोबार की शुरुआत 1,62,052 रुपए प्रति 10 ग्राम से हुई।

    इसके बाद सोने की कीमत में तेजी आई और कारोबार के दौरान यह 0.53 प्रतिशत यानी 862 रुपए की बढ़त के साथ 1,63,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दिन के कारोबार में सोने ने 1,62,001 रुपए प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,63,590 रुपए प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर दर्ज किया।

    चांदी का प्रदर्शन इसके विपरीत रहा। एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाला चांदी का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,46,597 रुपए प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,45,597 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला। इसके बाद इसमें और कमजोरी आई।

    कारोबार के दौरान चांदी 1,098 रुपए यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,45,499 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी ने अब तक के कारोबार में 2,44,815 रुपए प्रति किलोग्राम का निचला स्तर और 2,46,475 रुपए प्रति किलोग्राम का ऊपरी स्तर छुआ।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की चाल एक जैसी नहीं रही। कॉमेक्स पर सोना 0.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,701 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 0.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 69 डॉलर प्रति औंस पर थी।

    सोने की कीमत में तेजी के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिकी सरकार की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड बायबैक की सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 4 अरब डॉलर किए जाने के बाद 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में करीब आधा प्रतिशत की कमी आई।

    बॉन्ड यील्ड में गिरावट आम तौर पर सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश साधनों के लिए समर्थनकारी मानी जाती है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को मजबूती मिली और इसका असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया।

    वहीं, चांदी में आई कमजोरी को हाल की तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से जोड़कर देखा जा रहा है। लगातार तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा ऊंचे स्तर पर सौदे कम करने से चांदी पर दबाव बना। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की दिशा आगे भी वैश्विक आर्थिक संकेतों और बॉन्ड यील्ड की चाल से प्रभावित हो सकती है।

    इसी बीच मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भी बढ़त के साथ हुई। दोनों प्रमुख घरेलू सूचकांकों में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 0.20 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे बाजार में व्यापक स्तर पर सकारात्मक रुख का संकेत मिला।

  • पल्स ऑक्सीमीटर से जानें ऑक्सीजन स्तर, लगातार कमजोरी और बेचैनी दिखे तो इन संकेतों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं

    पल्स ऑक्सीमीटर से जानें ऑक्सीजन स्तर, लगातार कमजोरी और बेचैनी दिखे तो इन संकेतों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं

    नई दिल्ली । शरीर के प्रत्येक अंग को सामान्य रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन रक्त में मिलती है और फिर रक्त के जरिए दिमाग, हृदय, मांसपेशियों तथा अन्य अंगों तक पहुंचती है। जब रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम होने लगता है, तो इस स्थिति को हाइपोक्सीमिया कहा जाता है। इसकी गंभीरता कारण और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकती है।

    ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर शरीर शुरुआत में इसकी भरपाई करने का प्रयास करता है। इस दौरान सांस लेने की गति बढ़ सकती है और दिल तेजी से धड़क सकता है। व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में थोड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद ही सांस फूलने लगती है, जबकि गंभीर स्थिति में आराम के समय भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

    हालांकि सांस फूलना केवल कम ऑक्सीजन का संकेत नहीं है। एनीमिया, चिंता, मोटापा, हृदय संबंधी समस्याओं और कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए अचानक शुरू हुई या लगातार बढ़ रही सांस की परेशानी को केवल थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है।

    ऑक्सीजन की गंभीर कमी होने पर होंठ, नाखून या त्वचा का रंग नीला या नीला-सा दिखाई दे सकता है। इस स्थिति को सायनोसिस कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति के होंठ या चेहरा नीला पड़ने लगे और साथ में सांस लेने में परेशानी हो, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

    ऑक्सीजन कम होने का असर मस्तिष्क पर भी पड़ सकता है। पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर चक्कर आना, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भ्रम, असामान्य व्यवहार और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में व्यक्ति को अत्यधिक नींद आने या बेहोशी जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है।

    शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति का आकलन करने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। स्वस्थ लोगों में SpO₂ आमतौर पर 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि फेफड़ों या हृदय की कुछ बीमारियों वाले लोगों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है। इसलिए ऑक्सीमीटर की रीडिंग को व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति के संदर्भ में समझना जरूरी है।

    यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ लोगों में ऑक्सीजन कम होने के बावजूद शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए केवल यह देखकर कि सांस सामान्य चल रही है, ऑक्सीजन स्तर को सामान्य मान लेना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह और उचित जांच से वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है।

    ऑक्सीजन कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी स्थितियां सांस के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हृदय की कुछ बीमारियां, सांस लेने में रुकावट, फेफड़ों में रक्त का थक्का और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना भी ऑक्सीजन स्तर को प्रभावित कर सकता है।

    यदि सांस लेने में अचानक गंभीर परेशानी हो, होंठ या त्वचा नीली पड़ने लगे, भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति बने या व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो इसे गंभीर संकेत मानकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लगातार कमजोरी, चक्कर, बेचैनी या सांस से जुड़ी समस्या होने पर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर कारण की पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप

    रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप


    भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने विशेषज्ञ संस्थानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 को लेकर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश में मौजूद 130 से ज्यादा केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का सबसे खास हिस्सा वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस होगा, जिसमें प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास में अपने स्तर पर एक ठोस योगदान का संकल्प देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे विशेषज्ञ संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल सिर्फ अकादमिक और शोध गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में इन संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की योजना है।

    कॉन्क्लेव में सरकार के अलग-अलग विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां विशेषज्ञ संस्थानों के सामने रखेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए इन समस्याओं के समाधान की दिशा सुझाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार, शिक्षा संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के बीच ऐसा तालमेल तैयार करना है, जिससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाएं विकसित की जा सकें और उनका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।

    इस कार्यक्रम में 59 केंद्रीय संस्थानों के अलावा 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थान और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल, MANIT भोपाल, AIIMS भोपाल, IIIT, NFSU भोपाल, RRCAT इंदौर, DRDO और ISRO जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। कृषि, चिकित्सा, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।

    कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, MSME, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समाधान और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

    इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच होने वाले एमओयू भी होंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, क्षमता निर्माण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए सहयोग का रास्ता तैयार किया जाएगा। यानी इसका तत्काल असर किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियों और शोध आधारित समाधानों के रूप में सामने आ सकता है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सरकार की कोशिश है कि 2047 के लक्ष्य को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर प्रदेश में मौजूद विशेषज्ञ संस्थानों को भी उसका सक्रिय साझेदार बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस के तहत संस्थानों की ओर से सामने आने वाले संकल्प कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका वास्तविक लाभ मध्यप्रदेश को किस रूप में मिलता है।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपालभोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • सोमवार के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा: इन नियमों का रखें ध्यान, महादेव की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम

    सोमवार के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा: इन नियमों का रखें ध्यान, महादेव की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने और व्रत रखने की विशेष धार्मिक मान्यता है। सावन के सोमवार के अलावा सामान्य सोमवार को भी भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और सुख शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि शिव पूजा के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि पूजा में विधि के साथ श्रद्धा और मन की शुद्धता का भी विशेष महत्व होता है। अगर आप सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं तो कुछ आसान नियमों को जरूर ध्यान में रखें।

    सोमवार की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। अगर घर में शिवलिंग है तो उसे साफ स्थान पर रखकर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दूध से भी अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर दोबारा जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय माना जाता है। सोमवार की पूजा में साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि वह गंदा या क्षतिग्रस्त न हो। इसके अलावा भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की भी धार्मिक परंपरा है। पूजा के दौरान चंदन अर्पित करें और धूप तथा दीप जलाएं। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

    सोमवार की पूजा में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त शांत मन से ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा शिव चालीसा और भगवान शिव की स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। पूजा के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय कुछ समय भगवान शिव के ध्यान में बिताना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    सोमवार के दिन कुछ चीजों से दूरी रखने की भी धार्मिक मान्यता है। पूजा के दौरान भगवान शिव को केतकी के फूल अर्पित नहीं किए जाते। इसी तरह शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर चढ़ाने की परंपरा सामान्य रूप से नहीं मानी जाती क्योंकि शिवलिंग की पूजा की अपनी विशिष्ट विधि है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

    अगर सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो भोजन को लेकर भी अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार नियम अपनाएं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना और व्रत में मान्य अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार की पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल भगवान शिव को प्रसन्न करना नहीं बल्कि मन को शांत और सकारात्मक बनाना भी है। इसलिए इस दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचने का प्रयास करें। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा है। इसलिए विधि के साथ सच्चे मन से महादेव का स्मरण करें और जीवन में सुख शांति तथा सकारात्मकता की कामना करें।

  • अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग

    अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग


    नई दिल्ली। भोपाल में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। जिला प्रशासन की पहल पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक बार फिर नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही हैं। इस बार नए बैच में 50 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए 24 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं और आवेदन की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी। विद्यार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

    निःशुल्क कोचिंग की शुरुआत 5 सितंबर से होगी। इस बार क्लासेस पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। प्रशासन की इस पहल से UPSC और MPPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बिना फीस के पढ़ाई और मार्गदर्शन हासिल करने का मौका मिलेगा।

    इस फ्री कोचिंग में केवल किताबों और सामान्य अध्ययन तक सीमित तैयारी नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों को अनुभवी लोगों और विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी मिलेगा। स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग और कॉलेज के प्रोफेसर्स भी विद्यार्थियों को पढ़ाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन से जुड़े ऐसे अधिकारी, जिनकी पढ़ाने में रुचि है, वे भी नियमित रूप से क्लास लेंगे। अधिकारियों की ओर से रोजाना करीब एक से दो घंटे की कक्षाएं लेने की योजना है।

    कोचिंग में अलग-अलग विषयों की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के सिलेबस को समझने, जरूरी विषयों पर फोकस करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, जहां वे आर्थिक दबाव के बिना अपनी तैयारी को मजबूत कर सकें।

    भोपाल जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले इस तरह की नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए यह पहल लगातार उपयोगी साबित हो रही है। इस बार भी नए बैच के जरिए अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर उन छात्रों को इससे फायदा हो सकता है, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद कोचिंग की महंगी फीस के कारण अच्छे संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।

    इस नि:शुल्क कोचिंग का संचालन जिला प्रशासन भोपाल के मार्गदर्शन में आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा की ओर से पं. रविशंकर शुक्ल न्यास के सहयोग से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी रजिस्ट्रेशन और प्रवेश से जुड़ी जानकारी के लिए 8357835433 और 9584732481 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और जरूरी जानकारी भी इन्हीं माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है।

    UPSC और MPPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि सीमित सीटों के कारण केवल 50 छात्रों को ही इस बैच में जगह मिलेगी। ऐसे में इच्छुक विद्यार्थियों को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। 5 सितंबर से हिंदी भवन में शुरू होने वाली यह पहल उन युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बन सकती है, जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।