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  • टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास

    टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर अपने बल्ले का दम दिखाते हुए लगातार दूसरा शतक जड़ दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शानदार धैर्य और बेहतरीन तकनीक का परिचय देते हुए 168 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। इससे पहले गाले में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में भी उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेली थी और अब कोलंबो में भी अपने प्रदर्शन को दोहराकर टीम इंडिया के लिए बड़ी पारी खेली है।

    पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में 193 गेंदों का सामना करते हुए 117 रन बनाए। उनकी पारी में 12 शानदार चौके शामिल रहे। उनकी बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना विकेट संभालकर रखा। इससे पहले गाले टेस्ट में पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली थी। उनकी उस पारी की बदौलत भारतीय टीम ने पहला टेस्ट 165 रन से अपने नाम किया था। अब दूसरे टेस्ट में भी शतक लगाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि उनका पिछला प्रदर्शन महज संयोग नहीं था।

    लगातार दो टेस्ट में शतक लगाने की उपलब्धि ने पडिक्कल को भारतीय क्रिकेट के एक खास क्लब में पहुंचा दिया है। साल 2018-19 के बाद विदेशी जमीन पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे पहले चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान यह उपलब्धि हासिल की थी। पुजारा ने मेलबर्न टेस्ट में 106 और सिडनी टेस्ट में 193 रन की शानदार पारियां खेली थीं। अब पडिक्कल ने भी लगातार दो विदेशी टेस्ट में शतक लगाकर इस खास रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।

    कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया को शुरुआती झटका केएल राहुल के रूप में लगा। राहुल केवल 18 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद यशस्वी जायसवाल और पडिक्कल ने पारी को संभालने की कोशिश की। जायसवाल ने 45 रन की उपयोगी पारी खेली लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इसके बाद पडिक्कल ने कप्तान शुभमन गिल के साथ मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी हुई। गिल ने भी अर्धशतक जमाते हुए 50 रन बनाए लेकिन फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। दूसरी तरफ पडिक्कल लगातार क्रीज पर डटे रहे और अपने शतक तक पहुंचकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    भारतीय टीम ने इस मुकाबले में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका दिया है। कुलदीप संक्रमण के कारण मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन इसी मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे हैं। वहीं भारत की नजर अब दूसरे टेस्ट में बड़ी पहली पारी का स्कोर खड़ा करने और सीरीज पर कब्जा मजबूत करने पर है। इस बीच पडिक्कल की लगातार दूसरी शतकीय पारी टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर बनकर सामने आई है।

  • दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास

    दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता की कहानी जब भी लिखी जाएगी तो उसमें दीप्ति शर्मा का नाम बेहद खास अंदाज में दर्ज होगा। गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए मैच का रुख बदलने वाली दीप्ति ने 2025 वनडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। खुद को बजरंगबली का भक्त बताने वाली दीप्ति मैदान पर भी अपनी टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाती नजर आती हैं। 24 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मी दीप्ति ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित की।

    दीप्ति बाएं हाथ से बल्लेबाजी करती हैं जबकि दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हैं। भारतीय टीम के लिए उन्होंने 2014 में वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2016 में टी20 और 2021 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। धीरे धीरे वह टीम इंडिया की ऐसी ऑलराउंडर बन गईं जिनसे किसी भी मुकाबले में बल्ले और गेंद दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहती हैं।

    2025 में भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में दीप्ति ने अपनी इसी क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मुकाबलों में 215 रन बनाए और तीन अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन विश्व कप के फाइनल में आया जहां उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

    फाइनल मुकाबले में दीप्ति ने पहले बल्ले से शानदार पारी खेली और 58 गेंदों पर 58 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर ऐसा शिकंजा कसा कि मैच का रुख भारत की ओर पूरी तरह मुड़ गया। दीप्ति ने 9.3 ओवर में 39 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को 52 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और टीम पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने में सफल रही।

    दीप्ति का रिकॉर्ड सिर्फ विश्व कप तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने सात मैचों की 12 पारियों में 402 रन बनाए हैं और उनके नाम 25 विकेट भी हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 124 मैचों की 106 पारियों में 2771 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वाधिक वनडे स्कोर 188 रन है जो भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 149 मैचों में उनके नाम 1270 रन और 168 विकेट दर्ज हैं।

    दीप्ति की प्रतिभा का सम्मान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह विमेंस प्रीमियर लीग के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और द हंड्रेड जैसी बड़ी विदेशी लीग में भी अपना जलवा दिखा चुकी हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल करती है। आने वाले वर्षों में भी उनसे कई बड़े प्रदर्शन और रिकॉर्ड की उम्मीद की जा सकती है।

  • WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर

    WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट्स टेबल में ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट के नतीजे का असर साफ दिखाई देने लगा है। मैके में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर न सिर्फ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर की बल्कि डब्ल्यूटीसी की तालिका में अपनी स्थिति भी और मजबूत कर ली। इस हार का सीधा फायदा भारतीय टीम को मिला है क्योंकि बांग्लादेश का जीत प्रतिशत गिर गया है और अब अगर भारत श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में जीत दर्ज करता है तो वह बांग्लादेश को पीछे छोड़कर अंक तालिका में ऊपर पहुंच सकता है। ऑस्ट्रेलिया इस समय 80 प्रतिशत जीत के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत जीत के साथ दूसरे नंबर पर है। न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है। बांग्लादेश को दूसरे टेस्ट से पहले तक 66 प्रतिशत जीत हासिल थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मिली करारी हार के बाद उसका जीत प्रतिशत घटकर 55.56 हो गया है और टीम चौथे स्थान पर है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि टीम इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। पहले टेस्ट में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट में भी मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। यदि टीम इंडिया कोलंबो टेस्ट अपने नाम करने में सफल रहती है तो डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल में उसका समीकरण और बेहतर हो सकता है। ऐसे में बांग्लादेश की हार भारतीय टीम के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि डब्ल्यूटीसी में सिर्फ जीत ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि जीत प्रतिशत के आधार पर टीमों की स्थिति तय होती है इसलिए हर टेस्ट का परिणाम बेहद अहम माना जाता है।

    मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा। बांग्लादेश की पहली पारी महज 64 रन पर सिमट गई जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 210 रन बनाए और 146 रन की बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद बांग्लादेश की दूसरी पारी भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सिर्फ 95 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे दिन ही पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस मैच में मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया की जीत के सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में छह और दूसरी पारी में चार विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट झटके।

    ऑस्ट्रेलिया की इस शानदार जीत में कप्तान पैट कमिंस और नाथन लायन ने भी अहम भूमिका निभाई। कमिंस ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लिए जबकि लायन ने भी महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। बांग्लादेश ने सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को नौ विकेट से हराकर बड़ा उलटफेर किया था लेकिन दूसरे टेस्ट में कंगारू टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए मेहमान टीम को कोई मौका नहीं दिया। अब सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी है और डब्ल्यूटीसी की दौड़ में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। वहीं भारतीय टीम की नजर अब श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के नतीजे पर है क्योंकि जीत उसे डब्ल्यूटीसी की तालिका में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।

  • साइकिल पर सवार हुए BRICS देश, मांडविया और रक्षा खडसे ने किया नेतृत्व; युवाओं को दिया फिट और स्वस्थ रहने का

    साइकिल पर सवार हुए BRICS देश, मांडविया और रक्षा खडसे ने किया नेतृत्व; युवाओं को दिया फिट और स्वस्थ रहने का


    नई दिल्ली। विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अनोखा संगम देखने को मिला। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया तथा युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने BRICS Friendship Cycling Event का नेतृत्व किया। यह कार्यक्रम Fit India Sundays on Cycle के 87वें संस्करण के तहत आयोजित किया गया। खास बात यह रही कि BRICS युवा और खेल मंत्रियों की बैठक के दौरान हुए इस आयोजन में कई सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी साइकिल चलाकर दोस्ती सहयोग और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

    साइकिलिंग कार्यक्रम में मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया संयुक्त अरब अमीरात ईरान और दक्षिण अफ्रीका के मंत्री तथा विभागीय प्रमुखों ने हिस्सा लिया। अलग अलग देशों के प्रतिनिधियों का एक साथ साइकिल चलाना BRICS देशों के बीच सहयोग और आपसी मित्रता का प्रतीक बना। इस सप्ताह Fit India Sundays on Cycle की थीम उन्नत भारत अभियान रखी गई थी। आयोजन के जरिए फिटनेस को केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य से जोड़ने के बजाय पर्यावरण संरक्षण ईंधन की बचत और स्वस्थ समाज के निर्माण से भी जोड़ा गया।

    कार्यक्रम के दौरान मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Fit India Movement देशभर में लगातार विस्तार कर रहा है। उनके मुताबिक देश में 18 हजार से ज्यादा स्थानों पर Fit India Sundays on Cycle के जरिए युवा और आम लोग साइकिल चलाकर फिटनेस का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने साइकिलिंग को बेहतरीन व्यायाम बताते हुए कहा कि इससे शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के साथ प्रदूषण कम करने और ईंधन बचाने में भी मदद मिलती है। साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल ट्रैफिक पर दबाव कम करने में भी उपयोगी हो सकता है।

    मांडविया ने फिटनेस को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही खुशहाल तथा मजबूत देश की नींव तैयार करता है। उन्होंने लोगों से प्रत्येक रविवार साइकिल चलाने और अपनी फिटनेस को प्राथमिकता देने की अपील की। BRICS देशों से आए प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और पूरे भारत में फिटनेस अभियान को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की।

    Fit India Sundays on Cycle का 87वां संस्करण देश के अलग अलग हिस्सों में आयोजित किया गया। नई दिल्ली के अलावा लेह कारगिल और पोर्ट ब्लेयर जैसे स्थानों पर भी लोगों ने साइकिलिंग और फिटनेस गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत की शपथ भी ली। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखते हुए स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था।

    नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में सुबह साढ़े पांच बजे से फिटनेस कार्यक्रम शुरू हुआ जिसमें एक हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। यहां योग जुम्बा और रस्सी कूदने जैसी गतिविधियों के बाद इंडिया गेट के आसपास पांच किलोमीटर की साइकिल रैली आयोजित की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अलग अलग उम्र के लोगों ने कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन स्थल पर कैरम शतरंज बैडमिंटन रस्साकशी और बाधा दौड़ जैसी गतिविधियों के लिए विशेष गेम जोन भी तैयार किया गया था।

    Fit India Sundays on Cycle युवा मामले और खेल मंत्रालय की पहल है जिसे Cycling Federation of India राहगिरी फाउंडेशन और MY Bharat के सहयोग से आयोजित किया जाता है। यह अभियान देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना और साइकिलिंग को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। विशाखापत्तनम का BRICS Friendship Cycling Event इसी अभियान को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने वाला विशेष आयोजन बन गया।

  • अजीत डोभाल कल चीन जाएंगे, वांग यी के साथ LAC तनाव, सैनिक तैनाती और सीमा विवाद पर अहम बातचीत की संभावना

    अजीत डोभाल कल चीन जाएंगे, वांग यी के साथ LAC तनाव, सैनिक तैनाती और सीमा विवाद पर अहम बातचीत की संभावना

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक स्तर पर एक बार फिर महत्वपूर्ण बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे। इस दौरान वह भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता में हिस्सा लेंगे। बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव को कम करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में प्रमुख मुद्दा रहा है।

    विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में एलएसी की मौजूदा स्थिति, सैनिकों की तैनाती, सैन्य गतिविधियों में कमी, डिसएंगेजमेंट और सीमा प्रबंधन जैसे विषय प्रमुखता से उठ सकते हैं। दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी विचार कर सकते हैं।

    भारत और चीन के रिश्तों में जून 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है।

    सीमा पर तनाव कम करने के साथ दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश भी चलती रही है। भारत का लगातार रुख रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल करना मुश्किल होगा।

    विशेष प्रतिनिधि तंत्र की भूमिका केवल तत्काल सैन्य तनाव को संभालने तक सीमित नहीं है। यह भारत और चीन के बीच सीमा प्रश्न के व्यापक और दीर्घकालिक समाधान की संभावनाओं पर बातचीत का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। ऐसे में डोभाल की यात्रा को सीमा विवाद के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वांग यी के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर तनाव की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर भी विचार हो सकता है। सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने तथा सैन्य गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित गलतफहमियों को रोकने पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

    डोभाल और वांग यी पहले भी भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता के माध्यम से सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत करते रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के बीच यह संवाद सीमा विवाद को कूटनीतिक माध्यम से संभालने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    भारत के लिए सीमा पर स्थायी शांति और सैनिकों की स्थिति से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, जबकि चीन के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर रखने की जरूरत भी बनी हुई है। व्यापार, आर्थिक सहयोग और अन्य क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर तनाव कम करना आवश्यक माना जाता है।

    अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। वार्ता से तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद के बजाय सीमा पर स्थिरता, संवाद को निरंतर बनाए रखने और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में प्रगति पर नजर रहेगी। विशेष प्रतिनिधियों की बैठक से निकलने वाले संकेत आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  • यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां तेज होने लगी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सोमवार से दो दिनों के लिए उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेगा। इस दौरान चुनावी व्यवस्था की तैयारियों को समझने के साथ मतदाताओं और युवाओं को मतदान प्रक्रिया की जानकारी देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दौरे के दौरान चुनाव से जुड़े अधिकारी भी निर्वाचन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इनमें छात्रों के साथ संवाद से लेकर चुनावी अधिकारियों के साथ बैठक और बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों से सीधी बातचीत शामिल है। कार्यक्रमों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ आम लोगों और विशेष रूप से युवा मतदाताओं को मतदान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है।

    ज्ञानेश कुमार लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई इसी कॉलेज से की थी। छात्रों के साथ संवाद के दौरान मतदान के महत्व, मतदाता बनने की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की जाएगी।

    इसके बाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चुनावी जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें ईएलसी 2.0 और ईसीआईनेट के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 20 जिलों से चुनाव से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। इनमें लखनऊ के अलावा अयोध्या, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव सहित अन्य जिले भी शामिल हैं।

    ईएलसी यानी इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब की शुरुआत युवाओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देने के उद्देश्य से की गई थी। अब इसके नए स्वरूप ईएलसी 2.0 के माध्यम से स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को चुनाव से जुड़ी जानकारी और अधिक आसान तरीके से उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल मतदान करने के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को समझाना भी है।

    लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में लाइव डेमो के माध्यम से मतदाता बनने, मतदान करने और मतगणना की प्रक्रिया समझाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए तीन स्टॉल लगाए जाएंगे। इनके जरिए विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी चुनाव की अलग-अलग प्रक्रियाओं को व्यावहारिक तरीके से समझ सकेंगे। ईएलसी को पूरे वर्ष सक्रिय रखने की योजना भी है, ताकि युवाओं को चुनावी जानकारी लगातार मिलती रहे।

    दौरे के दूसरे दिन 25 अगस्त को ज्ञानेश कुमार करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ से सीधे बातचीत करेंगे। बीएलओ मतदाता सूची से जुड़े काम, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाताओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके साथ संवाद के दौरान जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों और निर्वाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।

    इस दौरे में 20 जिलों के डिप्टी जिला चुनाव अधिकारी भी शामिल होंगे। इससे राज्य में चुनावी तैयारियों को लेकर विभिन्न स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत करने का अवसर मिलेगा। छात्रों, नए मतदाताओं और चुनावी कर्मचारियों के साथ संवाद के जरिए निर्वाचन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुगम और सहभागी बनाने पर जोर रहेगा।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की यह गतिविधि युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने और बूथ स्तर की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खास तौर पर ईएलसी 2.0 के माध्यम से नई पीढ़ी को मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं करीब 500 बीएलओ के साथ सीधा संवाद जमीनी स्तर की तैयारियों को समझने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने के दौरान की गई अपनी कथित टिप्पणी को लेकर विवाद में घिरने के बाद सफाई दी है। हुड्डा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनकी मंशा सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका रिश्ता परिवार जैसा है और जरूरत के समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

    सज्जन कुमार का हाल ही में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता थे। उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देते हुए हुड्डा की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सज्जन कुमार के सार्वजनिक जीवन और लोगों से जुड़ाव की प्रशंसा की।

    इस टिप्पणी के बाद हुड्डा पर सवाल उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप शर्मा ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद हुड्डा ने अपने बयान को लेकर विस्तृत सफाई सामने रखी और कहा कि उनकी बात का अर्थ उस तरह नहीं था, जिस तरह उसे सार्वजनिक चर्चा में पेश किया जा रहा है।

    हुड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से वह देख रहे हैं कि उनके बयान को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द भी जोड़ा गया, जिसका उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भी भावना सिख समाज के किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचाने वाली नहीं थी।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिख समाज देश का गौरवशाली समाज है और उसके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय के साथ उनके परिवार और राजनीतिक जीवन का पुराना संबंध रहा है।

    हुड्डा ने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परदादा चौधरी मातूराम का संबंध पंजाब के पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से रहा था। उन्होंने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि यह इतिहास दोनों समुदायों के बीच पुराने संबंधों को दर्शाता है।

    उन्होंने किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। हुड्डा के मुताबिक, जब पंजाब से किसान आंदोलन के दौरान किसान हरियाणा पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बना हुआ है।

    1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हुड्डा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में वह सिख समाज के साथ हैं और दंगों के मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।

    इस सफाई के बाद हुड्डा ने विवादित टिप्पणी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अब राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    नई दिल्ली । योगगुरु रामदेव और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही जुबानी जंग रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गई। कंगना की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से इनकार किया, लेकिन उनके बयान में कंगना पर तीखा तंज भी नजर आया। हरिद्वार में जब उनसे कंगना की टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते जिन्हें वह ओछा मानते हैं।

    दोनों के बीच विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के Gen-Z को लेकर दिए गए बयान से हुई थी। कंगना ने नई पीढ़ी के लिए ‘गटर जनरेशन’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान पर रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है और ऐसी सोच युवाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

    रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने भी पलटवार किया था। उन्होंने रामदेव पर तंज कसते हुए अपनी प्रतिक्रिया में निजी और तीखे अंदाज का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    रविवार को जब रामदेव से कंगना की ताजा टिप्पणी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम लेने से बचते हुए कहा कि वह विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कंगना के लिए ओछे लोगों वाला बयान दिया। रामदेव ने अपने सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनके काम और योगदान से परिचित है।

    इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की टिप्पणियां सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मामला किसी औपचारिक राजनीतिक टकराव के बजाय व्यक्तिगत बयानबाजी से जुड़ा दिखाई दे रहा है, लेकिन कंगना बीजेपी की सांसद होने के कारण उनके बयानों और उनसे जुड़े विवादों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।

    रामदेव ने इसी दौरान एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को संतों का समर्थन मिला है और इससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर होने वाली बार-बार की गतिविधियों को कम करने में मदद मिल सकती है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं और एक साथ चुनाव कराने से व्यवस्था में स्थिरता आ सकती है।

    योगगुरु ने शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया और कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। उनके अनुसार, चुनाव सुधारों के जरिए देश में विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के अपमान को संविधान के खिलाफ माना जाता है, उसी तरह ब्राह्मणों के अपमान को लेकर भी समान दृष्टिकोण होना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत विभिन्न वर्गों के साथ होने वाले अन्याय का उल्लेख करते हुए समान सम्मान और अधिकार की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय या वर्ग के अपमान को लेकर समान संवेदनशीलता जरूरी है।

    फिलहाल कंगना और रामदेव के बीच विवाद का केंद्र Gen-Z को लेकर हुई बयानबाजी है। रामदेव ने इसे आगे बढ़ाने से बचने की बात कही है, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी के बाद दोनों के बीच चल रहा यह विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

  • टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अगस्त से दो दिन के रूस दौरे पर जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और रूस के संबंधों के साथ-साथ भारत के ऊर्जा हित भी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच चर्चा में हैं। यात्रा के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

    जयशंकर व्यापार, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति से जुड़े भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।

    जयशंकर का रूस दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बीच हो रहा है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार इस यात्रा के महत्वपूर्ण संदर्भों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और रूस पिछले कुछ समय में उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है।

    यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। हालांकि अमेरिकी दबाव और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूसी तेल आयात में बदलाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और भारत के लिए रूसी तेल का महत्व फिर बढ़ गया।

    जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को विशेष महत्व मिल सकता है।

    दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रक्षा और सैन्य तकनीकी सहयोग है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्य समूह की बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने और आगामी गतिविधियों की योजना पर चर्चा की थी।

    इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं, हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की बैठक इसी व्यापक सहयोग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।

    रूसी नेतृत्व भी हाल के समय में भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास की सराहना करता रहा है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को दोनों देशों के बीच पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिकी टैरिफ दबाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

  • UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    नई दिल्ली ।भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख माध्यमों में शामिल UPI पर लंबे समय से शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही है। मौजूदा व्यवस्था में आम तौर पर UPI लेनदेन पर सीधे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR का बोझ नहीं पड़ता। इससे ग्राहकों के लिए भुगतान आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क के बना हुआ है, लेकिन डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों और बुनियादी ढांचे की लागत को लेकर वित्तीय दबाव की चर्चा लगातार सामने आती रही है।

    इसी चुनौती के बीच डेबिट कार्ड से जुड़े पुराने नियामकीय मॉडल को UPI के लिए संभावित आधार के तौर पर देखा जा रहा है। इस विचार के तहत शुल्क व्यवस्था ऐसी बनाई जा सकती है, जिसमें छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त लागत से बचाया जाए और बड़े तथा संगठित कारोबारियों से सीमित शुल्क लिया जाए।

    डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों में छोटे कारोबारियों के लिए MDR की ऊपरी सीमा कम रखी गई है। सालाना 20 लाख रुपये से कम कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए अधिकतम MDR 0.40 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। इसी तरह के सिद्धांत को UPI में अपनाने पर छोटे किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों को शुल्क से पूरी तरह राहत देने का विकल्प बन सकता है।

    दूसरी ओर बड़े शोरूम, मॉल, ई-कॉमर्स कंपनियों और संगठित रिटेल कारोबार को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे कारोबारियों से उनकी भुगतान क्षमता और कारोबार के आकार के अनुसार मामूली MDR लेने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य UPI के संचालन और भुगतान व्यवस्था की लागत को साझा करना हो सकता है, बिना छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाले।

    इस संभावित मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम उपभोक्ताओं को सीधे शुल्क से बचाना है। बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजने वाले ग्राहकों के लिए भुगतान मुफ्त रखने की कोशिश की जा सकती है। यानी शुल्क व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी इसका सीधा असर सामान्य व्यक्ति के प्रत्येक UPI भुगतान पर डालने से बचने का विकल्प रखा जा सकता है।

    UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लेनदेन की संख्या और डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे की लागत भी बढ़ रही है। भुगतान कंपनियों को सर्वर, सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक शून्य MDR व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की जरूरत पड़ती है।

    प्रस्तावित मॉडल का एक उद्देश्य इस वित्तीय दबाव को कम करना भी हो सकता है। यदि बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लिया जाता है, तो भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बन सकता है। इससे तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों को UPI पर उसी रूप में लागू करना तय नहीं है। UPI की मौजूदा संरचना, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल संस्थाओं को देखते हुए किसी भी शुल्क मॉडल के लिए अलग नियम और शर्तें तय करनी पड़ सकती हैं।

    फिलहाल चर्चा का केंद्र यही है कि डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता और मुफ्त लेनदेन की सुविधा बरकरार रखते हुए व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यदि छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों को सुरक्षित रखते हुए बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लेने का मॉडल तैयार होता है, तो UPI के विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।