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  • कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रविवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। तेल विपणन कंपनियों ने 23 अगस्त के लिए घरेलू बाजार में ईंधन के दाम पहले के स्तर पर ही बनाए रखे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और आने वाले समय में ईंधन लागत को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    23 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में रविवार होने के कारण कारोबार बंद है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार के बंद भाव के आसपास ही बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा, जबकि शुक्रवार को इसमें 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। दूसरी ओर, अमेरिकी WTI क्रूड 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर रहा और इसमें शुक्रवार को 0.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    घरेलू बाजार की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 111.12 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.43 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर है।

    चेन्नई में पेट्रोल 107.75 रुपये और डीजल 99.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का 98.79 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर पर है।

    अन्य प्रमुख शहरों में गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये प्रति लीटर है, जबकि गाजियाबाद में इसका भाव 101.80 रुपये है। पटना में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 113.35 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। गाजियाबाद में डीजल 95.29 रुपये और चंडीगढ़ में डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का असर देश की ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तेल विपणन कंपनियों की लागत और उनकी अंडर-रिकवरी पर दबाव बढ़ सकता है।

    पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होतीं। इनमें केंद्र और राज्य स्तर के कर, वैट, डीलर कमीशन तथा परिवहन लागत जैसे कई घटक शामिल होते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग रहते हैं।

    देश में तेल कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव लागू करती हैं। कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर विनिमय दर सहित विभिन्न बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है। फिलहाल 23 अगस्त को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत यह है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड महंगा होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।

  • डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    नई दिल्ली । खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य नियामक ने हाल के महीनों में 150 से अधिक फूड ब्रांड्स और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से भ्रामक विज्ञापनों, बिना पर्याप्त आधार किए गए दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है।

    नियामक की कार्रवाई में कई बड़े और जाने-पहचाने ब्रांड्स के नाम भी सामने आए हैं। इनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया, हेल एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, डियाजियो, पेरनोड रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि नोटिस जारी होना अपने आप में किसी कंपनी को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    FSSAI की नजर ऐसे विज्ञापनों पर है जिनमें खाद्य और पेय उत्पादों को लेकर ऐसे दावे किए जाते हैं, जिन्हें पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण या निर्धारित नियमों के आधार पर साबित करना जरूरी होता है। इनमें उत्पाद को 100 प्रतिशत प्राकृतिक बताना, किसी तरह की मिलावट नहीं होने का दावा करना, वजन घटाने में प्रभावी बताना या प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने जैसे दावे शामिल हो सकते हैं।

    खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों का उपभोक्ताओं के फैसले पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से नियामक ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि विज्ञापन और पैकेजिंग पर दी गई जानकारी वास्तविक, स्पष्ट और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

    इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेबलिंग से जुड़ा है। पैकेट पर उत्पाद की सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लेबल पर दी गई जानकारी नियमों के अनुरूप नहीं है या उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है, तो नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

    FSSAI ने केवल कंपनियों के पारंपरिक विज्ञापनों तक अपनी निगरानी सीमित नहीं रखी है। खाद्य उत्पादों के प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फूड डिलीवरी ऐप और प्रभावशाली लोगों यानी इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से किए जाने वाले दावों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इसका उद्देश्य विज्ञापन के अलग-अलग माध्यमों में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली जानकारी की निगरानी करना है।

    नियामक के अनुसार, खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यदि नोटिस के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं और उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कारोबारियों पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में विनिर्माण लाइसेंस के निलंबन या रद्द किए जाने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

    इस कार्रवाई से खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसके विज्ञापन और पैकेजिंग में दी जाने वाली जानकारी भी नियामकीय निगरानी के दायरे में है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी से देखें।

    FSSAI की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब खाद्य और पेय कंपनियां अपने उत्पादों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से जोड़कर बड़े पैमाने पर प्रचारित कर रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रमाण और नियमों के अनुरूप दावे करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में नियामक की निगरानी और कार्रवाई से खाद्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

  • भारत ने सितंबर डिलीवरी के लिए 23 डॉलर से अधिक में LNG खरीदी, यूरोप की मांग से बढ़ी बाजार चुनौती

    भारत ने सितंबर डिलीवरी के लिए 23 डॉलर से अधिक में LNG खरीदी, यूरोप की मांग से बढ़ी बाजार चुनौती

    नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बीच वैश्विक गैस आपूर्ति व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का असर अब भारत की LNG खरीद पर भी दिखाई देने लगा है। भारतीय कंपनियों को प्राकृतिक गैस की जरूरत पूरी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से अपेक्षाकृत ऊंची कीमत पर LNG खरीदनी पड़ रही है। सितंबर में डिलीवरी के लिए किए गए कुछ सौदों में कीमत 23 डॉलर प्रति MMBtu से अधिक बताई गई है। यह स्तर वर्ष 2022 के बाद भारत की महंगी LNG खरीद में शामिल है।

    सरकारी गैस कंपनी GAIL India ने सितंबर में डिलीवरी के लिए LNG की एक खेप स्पॉट मार्केट से खरीदी है। इसके लिए कंपनी ने 23 डॉलर प्रति MMBtu से ज्यादा कीमत चुकाई है। गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन यानी GSPC ने भी सितंबर में मिलने वाली LNG के लिए करीब 23 डॉलर प्रति MMBtu की कीमत पर खरीदारी की है। इन सौदों से संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता और कीमत दोनों ही भारत के लिए चुनौती बन रहे हैं।

    भारत में महंगी LNG खरीदने की जरूरत कई कारणों से बढ़ी है। देश की गैस और बिजली कंपनियां घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त LNG खरीद रही हैं। विशेष रूप से उर्वरक क्षेत्र में गैस की लगातार आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राकृतिक गैस उर्वरक उत्पादन की प्रमुख जरूरतों में शामिल है। ऐसे में कंपनियों को ऊंची कीमतों के बावजूद खरीदारी करनी पड़ रही है।

    भारत लंबे समय से LNG की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक समझौतों के माध्यम से पूरा करता रहा है। कतर भारत के प्रमुख LNG आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ऊर्जा ढांचे पर असर पड़ने से समुद्री मार्गों और LNG आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली आवाजाही में बाधा की आशंका ने भी वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    कतर के LNG निर्यात ढांचे पर संघर्ष से जुड़े प्रभावों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण एशियाई खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों से गैस जुटाने की कोशिश करनी पड़ रही है। इसका असर कीमतों पर पड़ रहा है और भारत जैसे आयात पर निर्भर बाजारों के लिए खरीद लागत बढ़ रही है।

    भारत को LNG खरीद के लिए यूरोपीय खरीदारों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। यूरोप में गैस की कीमतों में तेजी आने से वहां LNG की मांग बढ़ी है। ऐसे में उपलब्ध कार्गो के लिए एशियाई और यूरोपीय खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होने की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा असर स्पॉट मार्केट की कीमतों पर पड़ सकता है।

    सरकारी ऊर्जा कंपनी BPCL ने भी इस सप्ताह स्पॉट मार्केट से LNG की एक खेप खरीदने का समझौता किया है। हालांकि इस सौदे की कीमत सार्वजनिक नहीं हुई है। लगातार महंगी LNG खरीदने की स्थिति बनी रहती है तो गैस आधारित बिजली, उर्वरक और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    LPG की कीमतों पर इसका असर तुरंत और सीधे पड़ना तय नहीं माना जा सकता, क्योंकि घरेलू रसोई गैस की कीमतें कई नीतिगत और बाजार संबंधी कारकों पर निर्भर करती हैं। हालांकि आयातित गैस और ऊर्जा लागत में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने पर पेट्रोलियम क्षेत्र की लागत संरचना पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में LPG की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

    फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक LNG आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता है। पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री परिवहन की स्थिति और यूरोप की बढ़ती मांग के बीच भारत के लिए सस्ती गैस की उपलब्धता महत्वपूर्ण रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों की खरीद लागत और ऊर्जा क्षेत्र पर उसका प्रभाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकता है।

  • सोना फिर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ा, चांदी में भी जोरदार तेजी, वैश्विक घटनाक्रमों से बाजार पर असर

    सोना फिर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ा, चांदी में भी जोरदार तेजी, वैश्विक घटनाक्रमों से बाजार पर असर


    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में अगस्त के दौरान एक बार फिर तेज तेजी देखने को मिली है। महीने के शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत नरम रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं ने तेजी पकड़ी और पिछले करीब 20 दिनों में सोने का भाव लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तथा चांदी का भाव करीब 32 हजार रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया है। इस तेजी ने निवेशकों की नजर एक बार फिर सर्राफा बाजार पर केंद्रित कर दी है।

    इस साल की शुरुआत में भी सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर बनाया था। 29 जनवरी को सोने की कीमत करीब 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी का भाव करीब 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रहा था। इसके बाद फरवरी से जुलाई के बीच वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई।

    जुलाई के अंत तक सोने का भाव घटकर करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया था। हालांकि अगस्त में बाजार की दिशा फिर बदल गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी को सोने और चांदी की हालिया तेजी से जोड़कर देखा जा रहा है। अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशकों का रुझान अक्सर सुरक्षित निवेश माने जाने वाली कीमती धातुओं की ओर बढ़ता है।

    रविवार को भारतीय बुलियन बाजार में कारोबार बंद रहता है। इसलिए 23 अगस्त को सोने के भाव शुक्रवार के बंद स्तर के आधार पर रहे। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में करीब 1,63,090 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। दिल्ली में इसका भाव करीब 1,63,240 रुपये और अहमदाबाद में करीब 1,63,140 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    22 कैरेट सोने की कीमत भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। कई बड़े शहरों में इसका भाव करीब 1,49,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1,49,650 रुपये और अहमदाबाद में करीब 1,49,550 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई।

    चांदी की बात करें तो इसकी कीमत भी अगस्त में काफी मजबूत हुई है। मौजूदा स्तर करीब 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। शहर, गुणवत्ता और स्थानीय बाजार की स्थिति के आधार पर वास्तविक खुदरा कीमत में मामूली अंतर हो सकता है।

    साल 2026 की शुरुआत से भी सोने और चांदी ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,33,195 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब औसतन करीब 1,60,620 रुपये तक पहुंच चुकी है। यानी साल की शुरुआत से इसमें लगभग 27,425 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसी अवधि में चांदी 2,30,420 रुपये से बढ़कर करीब 2,46,630 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

    आगे की दिशा वैश्विक तनाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और केंद्रीय बैंक सोने की खरीद जारी रखते हैं, तो साल के अंत तक कीमतों में और तेजी की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि कीमती धातुओं में निवेश से पहले बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • 18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    नई दिल्ली।  विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और भारत की वैश्विक खेल पहल का अनोखा संगम देखने को मिला। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित बैठकों के बीच केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने BRICS Friendship Sunday on Cycle कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस खास आयोजन के जरिए फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में साइकिल चलाकर लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित किया गया। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान को देशभर में लगातार मजबूती मिल रही है और रविवार को आयोजित होने वाला यह साइकिलिंग अभियान युवाओं के बीच फिटनेस को जन आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मांडविया ने कहा कि विशाखापत्तनम में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर आयोजित BRICS Friendship Sunday on Cycle का यह संस्करण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि देशभर में 18000 से अधिक स्थानों पर Sunday on Cycle कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए युवाओं और आम लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना था कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी व्यायाम है और इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    मांडविया ने साइकिलिंग को केवल फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है। इससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के नागरिकों का स्वस्थ और फिट रहना जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही मजबूत और फिट राष्ट्र की नींव तैयार करता है।

    दरअसल भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 22 और 23 अगस्त को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ब्रिक्स युवा मंत्रियों और खेल मंत्रियों की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। बैठकों का मुख्य उद्देश्य युवा मामलों और खेल के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

    केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया इन बैठकों की अध्यक्षता कर रहे हैं। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी इन महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हैं। 23 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के खेल मंत्री और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान खेलों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है।

    भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय लचीलेपन नवाचार सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। इस थीम में लोगों को केंद्र में रखते हुए मानवता को प्राथमिकता देने की सोच दिखाई देती है। ऐसे में BRICS Friendship Sunday on Cycle जैसे कार्यक्रम भारत की फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की पहल को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे फिट इंडिया अभियान को नई ऊर्जा मिलने के साथ युवाओं को खेल और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश को भी मजबूती मिलती है।

  • देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    नई दिल्ली ।देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले रोजमर्रा की इस जरूरी वस्तु के महंगे होने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी के दाम में 10 से 18 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    चीनी की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि ओडिशा में दर्ज की गई है। 21 अगस्त को यहां चीनी का भाव 64.72 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 17.80 रुपये अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    देश में चीनी की औसत कीमत फिलहाल करीब 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। हालांकि कई राज्यों में खुदरा बाजार का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल समेत कई इलाकों में चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक के स्तर तक पहुंच गई है।

    मध्य प्रदेश में भी चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले महीने की समान तारीख की तुलना में राज्य में कीमत करीब 15.70 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है। पंजाब में भी लगभग 14.67 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। इन बढ़ती कीमतों का असर घरों के साथ-साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य कारोबारों पर भी पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। यहां चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। थोक बाजार में तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है और कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ रहा है।

    दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ महानगरों में एक महीने के भीतर ही चीनी के दाम में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

    बढ़ती कीमतों के पीछे बाजार में आपूर्ति और मांग से जुड़े कई कारक अहम माने जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में यदि बाजार में उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रहती है तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सरकार भी चीनी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि खुदरा बाजार में अलग-अलग शहरों और गुणवत्ता के आधार पर वास्तविक कीमत में अंतर हो सकता है।

    वर्तमान स्थिति में दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 60 से 63 रुपये किलो, मुंबई में 65 से 70 रुपये, कोलकाता में 64 से 70 रुपये, पंजाब और ओडिशा में 64 से 65 रुपये, लखनऊ में 65 से 68 रुपये तथा पटना में 65 से 68 रुपये किलो के आसपास बताया गया है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग और बाजार की आपूर्ति के आधार पर कीमतों में आगे बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • LPG e-KYC की समयसीमा आज खत्म, सरकार ने अभी नहीं बढ़ाई डेडलाइन, उपभोक्ताओं के लिए वेरिफिकेशन जरूरी

    LPG e-KYC की समयसीमा आज खत्म, सरकार ने अभी नहीं बढ़ाई डेडलाइन, उपभोक्ताओं के लिए वेरिफिकेशन जरूरी

    नई दिल्ली ।देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 23 अगस्त 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू गैस कनेक्शन से जुड़े ई-केवाईसी की बढ़ाई गई समयसीमा आज समाप्त हो रही है। इंडेन गैस, एचपी गैस और भारत गैस के उपभोक्ताओं को आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले 16 अगस्त तक का समय दिया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 23 अगस्त किया गया था। फिलहाल इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    ई-केवाईसी का उद्देश्य एलपीजी उपभोक्ताओं की पहचान और कनेक्शन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन करना है। बड़ी संख्या में ग्राहक इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अपने संबंधित गैस वितरक केंद्रों का रुख कर रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपना सत्यापन पूरा नहीं किया है, उनके लिए आज प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ई-केवाईसी लंबित रहने की स्थिति में उपभोक्ताओं को भविष्य में गैस कनेक्शन से जुड़ी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सत्यापन नहीं होने पर कनेक्शन की सेवाओं, रिफिल बुकिंग या सब्सिडी से संबंधित लाभ प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि किसी भी उपभोक्ता के मामले में वास्तविक कार्रवाई संबंधित नियमों और तेल विपणन कंपनियों की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

    ई-केवाईसी पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं को अपने गैस कनेक्शन से जुड़े विवरण और आधार से संबंधित जानकारी तैयार रखनी चाहिए। ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने पर संबंधित गैस कंपनी के आधिकारिक डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। जिन लोगों को ऑनलाइन सत्यापन में परेशानी हो रही है, वे अपने गैस वितरक से संपर्क कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

    समयसीमा बढ़ाने की संभावना को लेकर फिलहाल उपभोक्ताओं के बीच सवाल बने हुए हैं। इससे पहले निर्धारित अंतिम तारीख को उपभोक्ताओं की सुविधा और तकनीकी समस्याओं से जुड़ी शिकायतों के बीच आगे बढ़ाया गया था। लेकिन 23 अगस्त के बाद नई समयसीमा घोषित की गई है या नहीं, इसे लेकर आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा। इसलिए जिन ग्राहकों का ई-केवाईसी अभी बाकी है, उन्हें केवल डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध समय में सत्यापन पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी और घरेलू सिलेंडर से जुड़े लाभ भी ई-केवाईसी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए पहचान सत्यापन महत्वपूर्ण है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित लाभों पर असर पड़ सकता है, इसलिए पात्र उपभोक्ताओं को अपनी स्थिति समय रहते जांच लेनी चाहिए।

    इस बीच 23 अगस्त को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर के दाम शहर के अनुसार अलग-अलग हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, जयपुर में 945.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये बताई गई है। पटना में घरेलू सिलेंडर की कीमत 1,031.50 रुपये है, जबकि लखनऊ में यह 979.50 रुपये और हैदराबाद में 994 रुपये है।

    वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी शहर के हिसाब से अलग हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 2,738 रुपये, मुंबई में 2,691.50 रुपये और पटना में 3,018 रुपये बताई गई है। घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में अंतर के साथ उपभोक्ताओं को अपने कनेक्शन की स्थिति और लागू नियमों की जानकारी भी रखनी चाहिए।

    ई-केवाईसी को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय के लिए उपभोक्ताओं को संबंधित गैस कंपनी और सरकारी स्तर से जारी आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए। अगर आज तक सत्यापन नहीं हुआ है, तो जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करना भविष्य में संभावित असुविधा से बचने का सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • मनुस्मृति और महिलाओं की स्वतंत्रता पर राहुल गांधी की टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू-विरोधी होने का आरोप लगाया

    मनुस्मृति और महिलाओं की स्वतंत्रता पर राहुल गांधी की टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू-विरोधी होने का आरोप लगाया

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मनुस्मृति और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर पुणे में की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से संबंधित विचारों का जिक्र करते हुए ऐसी व्यवस्था को गलत और शर्मनाक बताया, जिसमें महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में पुरुष के अधीन रहने की बात कही गई है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं के जीवन को लेकर ऐसी बातें कही गई हैं, जिनके अनुसार बचपन में महिला पिता के अधीन, विवाह के बाद पति के अधीन और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहती है। उन्होंने इस तरह की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को हमेशा किसी पुरुष के अधीन रखने की विचारधारा स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक महिलाओं को स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए।

    राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू धर्म और उसके धार्मिक ग्रंथों को राजनीतिक नजरिये से पेश करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदू धर्मग्रंथों को अपने राजनीतिक नैरेटिव के अनुसार प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी को मनुस्मृति पर टिप्पणी करने से पहले उसे पूरी तरह पढ़ने की सलाह भी दी।

    अमित मालवीय ने कहा कि धर्मग्रंथों को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को हिंदू धर्म के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को किसी राजनीतिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं है और धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करते समय उनके व्यापक संदर्भ को समझना जरूरी है।

    बीजेपी के एक अन्य नेता निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार के पुराने राजनीतिक फैसलों का उल्लेख करते हुए पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी भी की और कहा कि वह अपने भाई से ज्यादा समझदार हैं।

    दुबे ने कांग्रेस के पुराने इतिहास से जुड़े कई राजनीतिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन सिद्धांतों और विचारों की बात दूसरों के संदर्भ में करती है, उन्हें अपने परिवार और संगठन के भीतर भी लागू करना चाहिए। इस बयान के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की।

    मनुस्मृति को लेकर भारतीय राजनीति में पहले भी अलग-अलग समय पर तीखी बहस होती रही है। सामाजिक समानता, जाति व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति से जुड़े इसके संदर्भों पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के अलग-अलग विचार रहे हैं। इसी वजह से राहुल गांधी की ताजा टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

    कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की टिप्पणी को महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि बीजेपी ने इसे हिंदू धर्म और उसके ग्रंथों के संदर्भ में राजनीतिक हमला बताया है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    मध्य प्रदेश: में कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। सीहोर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए भोपाल-इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है। यह व्यवस्था 23 अगस्त की सुबह 9 बजे से 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू रहेगी।

    इस दौरान भारी वाहनों को भोपाल-इंदौर हाईवे से सीधे गुजरने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था में किए गए इस बदलाव का असर दूसरे वाहनों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करने की सलाह दी गई है।

    सीहोर में 25 अगस्त को कांवड़ यात्रा का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान सीहोर से होकर गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए पहले से व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है।

    भारी वाहनों के लिए रूट में बदलाव किए जाने के कारण भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। यातायात पुलिस के अनुसार लोगों को अपने सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को समय का ध्यान रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आवश्यकता नहीं होने पर भीड़ वाले मुख्य रास्तों से बचें और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करें। वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को भी निर्धारित दिशा और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में मार्ग परिवर्तन से होने वाली असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय रखने की जरूरत है। खासकर बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी वाहनों से सफर करने वालों को निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।

    भोपाल-इंदौर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में तीन दिनों के लिए लागू होने वाली यह व्यवस्था यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है। सामान्य यातायात के मुकाबले वैकल्पिक मार्गों पर दूरी और भीड़ के कारण सफर लंबा होने की संभावना है।

    यातायात संबंधी किसी परेशानी या मार्ग को लेकर जानकारी की जरूरत होने पर यातायात पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

    कांवड़ यात्रा समाप्त होने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू इस बदलाव के कारण भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना और संभावित देरी के लिए पर्याप्त समय रखना जरूरी होगा।

  • खेत में फसल तैयार, लेकिन बाजार तक पहुंचने से पहले बर्बाद: MP में स्टोरेज की कमी बनी किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत

    खेत में फसल तैयार, लेकिन बाजार तक पहुंचने से पहले बर्बाद: MP में स्टोरेज की कमी बनी किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख कृषि राज्यों में गिना जाता है और यहां बड़ी संख्या में किसान फल सब्जियों तथा अलग अलग बागवानी फसलों की खेती पर निर्भर हैं। सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लगातार दावे किए जाते हैं लेकिन फसल तैयार होने के बाद उसकी सही तरीके से देखभाल और भंडारण की व्यवस्था आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्थिति यह है कि खेतों में मेहनत से तैयार की गई उपज का एक हिस्सा मंडी तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। मध्य प्रदेश में फलों में अमरूद और सब्जियों में लौकी की बर्बादी सबसे ज्यादा सामने आई है। उपलब्ध सर्वे आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 14.93 प्रतिशत अमरूद और 7.46 प्रतिशत लौकी उचित भंडारण और रखरखाव के अभाव में खराब हो जाती है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है क्योंकि जिस फसल के लिए किसान महीनों मेहनत और खर्च करता है उसका एक हिस्सा बाजार तक पहुंचने से पहले ही बेकार हो जाता है।

    फसल कटने के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था को बेहद जरूरी माना जाता है लेकिन कई इलाकों में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक सप्लाई चेन उपलब्ध नहीं है। जल्दी खराब होने वाले फल और सब्जियों के मामले में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। अमरूद की बर्बादी का आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को सामने रखता है। सब्जियों में लौकी के अलावा फूलगोभी भी बड़े स्तर पर खराब हो रही है। आंकड़ों के अनुसार फूलगोभी का करीब 6.46 प्रतिशत हिस्सा उचित रखरखाव नहीं मिलने के कारण नष्ट हो जाता है। वहीं नींबू वर्गीय फलों में भी करीब 7.40 प्रतिशत तक फसलोत्तर नुकसान दर्ज किया गया है।

    नकदी फसलों और मसालों पर नजर डालें तो मिर्च में करीब 6.29 प्रतिशत और हरी मटर में 6.27 प्रतिशत तक नुकसान सामने आया है। धनिया भी इससे अछूता नहीं है और करीब 6.01 प्रतिशत फसल उचित भंडारण व्यवस्था के अभाव में खराब हो जाती है। दलहन में मध्य प्रदेश की प्रमुख फसल चना भी करीब 5.85 प्रतिशत तक नुकसान का सामना करती है। इसी तरह बाजरा में भी करीब 4.53 प्रतिशत तक फसलोत्तर नुकसान दर्ज किया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल किसी एक फल या सब्जी तक सीमित नहीं है बल्कि खेती से बाजार तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत है।

    दरअसल फल और सब्जियां लंबे समय तक सामान्य तापमान पर सुरक्षित नहीं रह पातीं। कटाई के बाद यदि उन्हें जल्द बाजार तक नहीं पहुंचाया जाए या उचित तापमान पर संग्रहित नहीं किया जाए तो उनकी गुणवत्ता तेजी से गिरने लगती है। कई बार किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ती है और जहां खरीदार नहीं मिलते वहां फसल खेत या मंडी में ही खराब होने लगती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ता है।

    दूसरे राज्यों के आंकड़े भी फसलोत्तर नुकसान की तस्वीर को सामने रखते हैं। बिहार में अमरूद का करीब 15.36 प्रतिशत और टमाटर का 12.36 प्रतिशत तक नुकसान बताया गया है। उत्तर प्रदेश में खरबूजे का करीब 7.25 प्रतिशत और पोल्ट्री मीट का 7.24 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि देश के कई कृषि राज्यों में उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ भंडारण और परिवहन की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।

    मध्य प्रदेश में यदि गांवों और प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों के आसपास छोटे कोल्ड स्टोरेज फूड प्रोसेसिंग यूनिट और बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएं तो किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसान मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने के बजाय बेहतर बाजार का इंतजार कर सकेंगे। साथ ही खराब होने वाली उपज को प्रोसेसिंग के जरिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि खेत से बाजार तक फसल को सुरक्षित पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।