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  • टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अगस्त से दो दिन के रूस दौरे पर जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और रूस के संबंधों के साथ-साथ भारत के ऊर्जा हित भी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच चर्चा में हैं। यात्रा के दौरान जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

    जयशंकर व्यापार, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति से जुड़े भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।

    जयशंकर का रूस दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बीच हो रहा है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार इस यात्रा के महत्वपूर्ण संदर्भों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और रूस पिछले कुछ समय में उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है।

    यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। हालांकि अमेरिकी दबाव और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूसी तेल आयात में बदलाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और भारत के लिए रूसी तेल का महत्व फिर बढ़ गया।

    जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को विशेष महत्व मिल सकता है।

    दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रक्षा और सैन्य तकनीकी सहयोग है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्य समूह की बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने और आगामी गतिविधियों की योजना पर चर्चा की थी।

    इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं, हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की बैठक इसी व्यापक सहयोग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।

    रूसी नेतृत्व भी हाल के समय में भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास की सराहना करता रहा है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को दोनों देशों के बीच पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिकी टैरिफ दबाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

  • UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    नई दिल्ली ।भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख माध्यमों में शामिल UPI पर लंबे समय से शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही है। मौजूदा व्यवस्था में आम तौर पर UPI लेनदेन पर सीधे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR का बोझ नहीं पड़ता। इससे ग्राहकों के लिए भुगतान आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क के बना हुआ है, लेकिन डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों और बुनियादी ढांचे की लागत को लेकर वित्तीय दबाव की चर्चा लगातार सामने आती रही है।

    इसी चुनौती के बीच डेबिट कार्ड से जुड़े पुराने नियामकीय मॉडल को UPI के लिए संभावित आधार के तौर पर देखा जा रहा है। इस विचार के तहत शुल्क व्यवस्था ऐसी बनाई जा सकती है, जिसमें छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त लागत से बचाया जाए और बड़े तथा संगठित कारोबारियों से सीमित शुल्क लिया जाए।

    डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों में छोटे कारोबारियों के लिए MDR की ऊपरी सीमा कम रखी गई है। सालाना 20 लाख रुपये से कम कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए अधिकतम MDR 0.40 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। इसी तरह के सिद्धांत को UPI में अपनाने पर छोटे किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों को शुल्क से पूरी तरह राहत देने का विकल्प बन सकता है।

    दूसरी ओर बड़े शोरूम, मॉल, ई-कॉमर्स कंपनियों और संगठित रिटेल कारोबार को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे कारोबारियों से उनकी भुगतान क्षमता और कारोबार के आकार के अनुसार मामूली MDR लेने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य UPI के संचालन और भुगतान व्यवस्था की लागत को साझा करना हो सकता है, बिना छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाले।

    इस संभावित मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम उपभोक्ताओं को सीधे शुल्क से बचाना है। बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजने वाले ग्राहकों के लिए भुगतान मुफ्त रखने की कोशिश की जा सकती है। यानी शुल्क व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी इसका सीधा असर सामान्य व्यक्ति के प्रत्येक UPI भुगतान पर डालने से बचने का विकल्प रखा जा सकता है।

    UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लेनदेन की संख्या और डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे की लागत भी बढ़ रही है। भुगतान कंपनियों को सर्वर, सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक शून्य MDR व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की जरूरत पड़ती है।

    प्रस्तावित मॉडल का एक उद्देश्य इस वित्तीय दबाव को कम करना भी हो सकता है। यदि बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लिया जाता है, तो भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बन सकता है। इससे तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों को UPI पर उसी रूप में लागू करना तय नहीं है। UPI की मौजूदा संरचना, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल संस्थाओं को देखते हुए किसी भी शुल्क मॉडल के लिए अलग नियम और शर्तें तय करनी पड़ सकती हैं।

    फिलहाल चर्चा का केंद्र यही है कि डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता और मुफ्त लेनदेन की सुविधा बरकरार रखते हुए व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यदि छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों को सुरक्षित रखते हुए बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लेने का मॉडल तैयार होता है, तो UPI के विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा

    कोलंबो टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, पडिक्कल ने जड़ा अर्धशतक तो गिल ने भी जमाया पचासा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे सेशन में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। टी-ब्रेक तक भारतीय टीम ने पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 187 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया जबकि कप्तान शुभमन गिल ने भी बेहतरीन पारी खेलते हुए पचासा जड़ा। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई मजबूत साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    पहले टेस्ट में शतक लगाने वाले देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में भी अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। टी-ब्रेक तक वह 117 गेंदों में 63 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। उनकी पारी में सात शानदार चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी शानदार बल्लेबाजी की और 108 गेंदों पर 50 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए। गिल और पडिक्कल ने तीसरे विकेट के लिए 209 गेंदों पर 120 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय पारी को मजबूती दी और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि अर्धशतक पूरा करने के बाद गिल ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और असिथा फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को कैच दे बैठे।

    भारत की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआती दौर में ही केएल राहुल का विकेट गंवा दिया। राहुल सिर्फ 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत की और कई शानदार चौके लगाए लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। जायसवाल 53 गेंदों पर 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इन शुरुआती झटकों के बाद गिल और पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य से बल्लेबाजी की और लगातार रन बनाते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। टी-ब्रेक के समय ऋषभ पंत एक रन बनाकर पडिक्कल का साथ दे रहे थे। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो अब तक दो विकेट ले चुके थे जबकि लाहिरू कुमारा को एक सफलता मिली।

    दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। कुलदीप यादव की जगह मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। सारांश ने इसी मुकाबले से अपना टेस्ट डेब्यू किया। कप्तान गिल ने टॉस के समय बताया था कि कुलदीप संक्रमण के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    वहीं श्रीलंका की टीम में भी एक खिलाड़ी ने टेस्ट डेब्यू किया है। कामिल मिशारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले टेस्ट में भारत ने श्रीलंका को 165 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर है।

  • स्टार्क के तूफान में उड़ी बांग्लादेशी टीम, हार के बाद कप्तान शांतो बोले- विदेशों में और टेस्ट खेलने की जरूरत

    स्टार्क के तूफान में उड़ी बांग्लादेशी टीम, हार के बाद कप्तान शांतो बोले- विदेशों में और टेस्ट खेलने की जरूरत


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट में मिली करारी हार के बाद बांग्लादेश के कप्तान नजमुल हुसैन शांतो निराश नजर आए। मैके में खेले गए मुकाबले में बांग्लादेश को महज दो दिन के भीतर पारी और 51 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। बांग्लादेश ने डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी लेकिन दूसरे टेस्ट में टीम अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकी।

    शांतो ने मैच के बाद माना कि बांग्लादेश ने इस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम की क्षमता और अनुभव की तारीफ करते हुए कहा कि कंगारू खिलाड़ियों ने मुश्किल परिस्थितियों में अपना जज्बा दिखाया। उनके मुताबिक बांग्लादेश के लिए यह मुकाबला सीखने का महत्वपूर्ण अवसर है और विदेशों में मुश्किल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव आगे टीम के काम आएगा।

    मैके टेस्ट में बांग्लादेश की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई। पहली पारी में टीम सिर्फ 64 रन पर ऑलआउट हो गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने 210 रन बनाकर 146 रन की बड़ी बढ़त हासिल कर ली। दूसरी पारी में भी बांग्लादेश के बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का सामना नहीं कर सके और पूरी टीम 95 रन पर सिमट गई। कप्तान शांतो ने दूसरी पारी में 31 रन बनाकर टीम की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाए जबकि मुशफिकुर रहीम 29 रन बनाकर नाबाद रहे।

    हालांकि बांग्लादेश के गेंदबाजों ने मुकाबले में कुछ शानदार प्रदर्शन जरूर किया। शोरिफुल इस्लाम ने पहली पारी में 48 रन देकर 7 विकेट हासिल किए। उनका यह प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया में किसी विदेशी गेंदबाज के शानदार प्रदर्शनों में शामिल रहा। शांतो ने शोरिफुल के साथ तस्कीन अहमद और हसन महमूद की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि पिच पर बल्लेबाजी करना दोनों टीमों के लिए मुश्किल था और उनके गेंदबाजों ने परिस्थितियों का अच्छी तरह इस्तेमाल किया।

    कप्तान शांतो ने मैके की परिस्थितियों को डार्विन से अलग बताया। उनके मुताबिक यहां हवा में ज्यादा बाउंस और स्विंग था जिससे बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ गईं। हालांकि उनका मानना है कि अगर बांग्लादेश को टेस्ट क्रिकेट में आगे बढ़ना है तो खिलाड़ियों को ऐसी परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालना होगा। इस दौरे से टीम को इसी दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव मिला है।

    शांतो ने विदेशों में अधिक टेस्ट खेलने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि अगर बांग्लादेश को हर साल ऑस्ट्रेलिया जैसी परिस्थितियों में खेलने का मौका मिले तो टीम के खिलाड़ियों को काफी फायदा होगा। उन्होंने लंबे अंतराल के बाद विदेश दौरे पर सिर्फ दो टेस्ट खेलने को पर्याप्त नहीं माना। उनके मुताबिक लगातार मुश्किल परिस्थितियों में खेलने से ही टीम अपनी कमजोरियों को पहचानकर सुधार सकती है।

    बांग्लादेश के कप्तान ने हार के बावजूद टीम के जज्बे को सकारात्मक बताया। पहले टेस्ट में मिली ऐतिहासिक जीत ने दिखाया कि टीम में क्षमता है लेकिन दूसरे टेस्ट के प्रदर्शन ने यह भी साफ कर दिया कि विदेशों में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बांग्लादेश को अभी काफी मेहनत करनी होगी। सीरीज 1-1 से बराबर होने के साथ ही दोनों टीमों के लिए यह दौरा अलग-अलग सबक छोड़ गया।

  • इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    मध्य प्रदेश : के इंदौर में सामने आए सट्टा मटका मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम जांच में सामने आने के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाया है। पुलिस के अनुसार नाना पटवारी के मोबाइल फोन से मिले डेटा और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े सुरागों ने मामले में कई नए कनेक्शन सामने लाए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को नाना पटवारी के मोबाइल फोन से दो ऑनलाइन सट्टा एप से संबंधित जानकारी मिली। आरोप है कि क्रिकेट बेटिंग के लिए उन्हें एक व्यक्ति के माध्यम से आईडी उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस का कहना है कि संबंधित आईडी बाद में डिलीट कर दी गई, लेकिन तकनीकी जांच के दौरान उससे जुड़े कुछ डिजिटल सुराग सामने आए। इन्हीं सुरागों के आधार पर जांच एजेंसियां नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    पुलिस के मुताबिक इस मामले में सौम्य प्रीत शिंदे समेत तीन नए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में राजेंद्र नगर निवासी राहुल निंबोला और रावजी बाजार क्षेत्र का धर्मेंद्र खींची शामिल हैं। जांच में सौम्य प्रीत शिंदे की भूमिका ऑनलाइन सट्टा एप और आईडी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आने की बात कही गई है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल के जरिए सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मनीष पमनानी, पिंकेश माहेश्वरी और बंटी असरानी जैसे नामों से जुड़े संभावित कनेक्शनों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा धर्मेंद्र खींची और राहुल निंबोला के विदेशी सट्टेबाजों से कथित संपर्क तथा जूनी इंदौर क्षेत्र के एक अन्य संदिग्ध से संबंधों की भी पड़ताल जारी है।

    पुलिस जांच में इस सट्टा नेटवर्क के विदेशों से जुड़े होने के संकेत मिलने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ लोग दुबई और अन्य देशों में मौजूद सट्टेबाजों या बुकियों के संपर्क में हो सकते हैं। विदेशी नेटवर्क के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा एप और वेबसाइट के लिंक भारत में सक्रिय लोगों तक पहुंचाए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।

    मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सामान्य जुआ संबंधी प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं। संगठित तरीके से सट्टा संचालन की आशंका को देखते हुए पुलिस डिजिटल लेनदेन, मोबाइल डेटा और आरोपियों के आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही है।

    नाना पटवारी की भूमिका को लेकर पुलिस ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम जांच में सामने आने के बाद उनकी भूमिका और कथित संपर्कों की विस्तृत जांच की जा रही है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का जोर इस बात का पता लगाने पर है कि स्थानीय स्तर पर संचालित नेटवर्क का विदेशी सट्टेबाजों से किस तरह संपर्क था और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इसका संचालन कैसे किया जा रहा था।

    जांच के आगे बढ़ने के साथ पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा संभावित आर्थिक लेनदेन के जरिए पूरे नेटवर्क की संरचना समझने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

  • हार के बाद कंगारुओं का पलटवार, बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर कमिंस बोले- खिलाड़ियों ने शानदार जवाब दिया

    हार के बाद कंगारुओं का पलटवार, बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर कमिंस बोले- खिलाड़ियों ने शानदार जवाब दिया

    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जोरदार वापसी करते हुए पारी और 51 रन से शानदार जीत दर्ज की। मैके में खेले गए मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने बांग्लादेश की बल्लेबाजी पूरी तरह बेबस नजर आई और मैच महज दो दिन में खत्म हो गया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। पहले टेस्ट में डार्विन के मैदान पर मिली 9 विकेट की हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम पर सवाल उठ रहे थे लेकिन दूसरे टेस्ट में टीम ने गेंदबाजी और फील्डिंग में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए आलोचकों को करारा जवाब दिया।

    मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने टीम की वापसी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह कई चीजें सही नहीं हुई थीं लेकिन मैके में टीम ने दो दिनों तक शानदार क्रिकेट खेला। कमिंस के मुताबिक टीम को इस तरह की वापसी की जरूरत थी और खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करके इसका जवाब दिया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने खास तौर पर टीम की शुरुआती गेंदबाजी को जीत की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि मुकाबले के शुरुआती एक-दो घंटे में अगर टीम को अच्छी शुरुआत मिल जाती है तो उससे पूरे मैच की दिशा तय हो सकती है।

    दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पहली पारी में महज 64 रन पर समेट दिया। मिचेल स्टार्क ने कहर बरपाते हुए 6 विकेट अपने नाम किए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 210 रन बनाए और 146 रन की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कैमरून ग्रीन ने 67 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली जबकि स्टीव स्मिथ ने 42 और नाथन लियोन ने 32 रन बनाए। बांग्लादेश के लिए शोरिफुल इस्लाम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 7 विकेट हासिल किए लेकिन उनकी टीम को बल्लेबाजों से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका।

    दूसरी पारी में भी बांग्लादेश की कहानी नहीं बदली। पूरी टीम 38.3 ओवर में सिर्फ 95 रन पर ढेर हो गई। कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 31 रन बनाए जबकि मुशफिकुर रहीम 29 रन बनाकर नाबाद रहे। बाकी बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सके। मिचेल स्टार्क ने दूसरी पारी में भी 4 विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट पूरे किए। पैट कमिंस और नाथन लियोन ने भी 3-3 विकेट झटके।

    कमिंस ने इस दौरान कैमरून ग्रीन की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ग्रीन ने मुश्किल स्थिति में टीम की पारी को संभाला और उनकी 67 रन की पारी से उन्हें काफी आत्मविश्वास मिलेगा। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान का मानना है कि ग्रीन के अंदर टेस्ट क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है और आगे उनके पास काफी क्रिकेट है।

    यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि टेस्ट मैच महज दो दिन और 750 गेंदों में समाप्त हो गया। डार्विन में मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलिया ने मैके में जिस अंदाज में पलटवार किया उससे टीम का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा होगा। अब सीरीज 1-1 से बराबर होने के बाद दोनों टीमों के बीच मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

  • इगा स्वियाटेक को हराकर पेगुला फाइनल में, गॉफ से होगी टक्कर; पुरुष वर्ग में टियाफो-फिल्स आमने-सामने

    इगा स्वियाटेक को हराकर पेगुला फाइनल में, गॉफ से होगी टक्कर; पुरुष वर्ग में टियाफो-फिल्स आमने-सामने


    नई दिल्ली। सिनसिनाटी ओपन 2026 के खिताबी मुकाबलों की तस्वीर साफ हो गई है। महिला एकल के फाइनल में जेसिका पेगुला और कोको गॉफ आमने-सामने होंगी, जबकि पुरुष एकल के खिताब के लिए फ्रांसेस टियाफो और आर्थर फिल्स के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिलेगा। दोनों फाइनल मुकाबले 24 अगस्त को खेले जाएंगे और दुनिया भर के टेनिस प्रशंसकों की नजर इन मुकाबलों पर टिकी होगी।

    महिला एकल के फाइनल में पहुंचने के लिए जेसिका पेगुला ने बड़ा उलटफेर करते हुए मौजूदा चैंपियन इगा स्वियाटेक को तीन सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में शिकस्त दी। पेगुला ने स्वियाटेक को 7-5, 4-6, 6-4 से हराया। करीब 2 घंटे 47 मिनट तक चले इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पेगुला ने जीत के बाद मुकाबले को बेहद मुश्किल बताया और कहा कि स्वियाटेक जैसी शानदार खिलाड़ी के खिलाफ जीत दर्ज करना और एक और डब्ल्यूटीए 1000 फाइनल में पहुंचना उनके लिए बेहद खास है।

    दूसरी ओर कोको गॉफ ने सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की सारा बेजलेक को सीधे सेटों में 6-4, 6-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। गॉफ ने महज 76 मिनट में मुकाबला अपने नाम किया और अब खिताब के लिए पेगुला की चुनौती का सामना करेंगी। पेगुला और गॉफ के बीच महिला एकल का फाइनल 24 अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे खेला जाएगा।

    पुरुष एकल में भी फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक होने वाला है। फ्रांस के आर्थर फिल्स ने सेमीफाइनल में इटली के फ्लेवियो कोबोली को 6-3, 6-4 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। 67 मिनट तक चले मुकाबले में फिल्स ने आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने दमदार फोरहैंड के साथ 22 विनर्स लगाए और छह ऐस भी जड़े। यह उनकी लगातार पांचवीं जीत रही।

    दूसरे सेमीफाइनल में अमेरिका के फ्रांसेस टियाफो ने ब्रैंडन नाकाशिमा को 7-5, 6-3 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। पहले सेट में टियाफो को कई ब्रेक प्वाइंट मिले और उन्होंने अहम मौकों पर दबाव बनाए रखते हुए सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी उन्होंने लय बरकरार रखी और मुकाबला सीधे सेटों में खत्म कर दिया।

    अब पुरुष एकल के फाइनल में टियाफो और फिल्स की भिड़ंत होगी। यह मुकाबला भी 24 अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे से पहले शुरू नहीं होगा। दोनों फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म और खिताब जीतने की भूख मुकाबले को खास बना सकती है। सिनसिनाटी ओपन के ये फाइनल मुकाबले टूर्नामेंट के रोमांचक समापन का गवाह बनने वाले हैं।

  • चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेजी देखी जा रही है। चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ गया है। खास तौर पर चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में चीनी के दाम करीब 7 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं, जबकि एक महीने में इसकी कीमत में लगभग 17 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कई बाजारों में चीनी करीब 70 रुपये किलो तक बिक रही है।

    चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर चिंता प्रमुख कारणों में शामिल है। सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा निर्धारित की गई है। घरेलू स्तर पर नई चीनी की उपलब्धता जल्दी बढ़ाने के लिए चीनी मिलों में पेराई सत्र भी सामान्य से पहले शुरू करने की तैयारी है।

    प्याज की कीमतों में भी पिछले कुछ सप्ताह में बढ़ोतरी हुई है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह लगभग 36.56 रुपये और एक महीने पहले 34.87 रुपये प्रति किलो था। इस तरह कुछ ही समय में प्याज के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। दक्षिण भारत में आवक प्रभावित होने के साथ महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की स्थिति का भी असर पड़ा है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    दालों की कीमतों में भी हल्की तेजी का रुख बना हुआ है। अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों के दाम में पिछले एक महीने में लगभग 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। दलहन की बुवाई के रकबे में कमी और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। कमजोर बारिश या फसल उत्पादन में कमी की आशंका आगे दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है।

    खाद्य तेल भी महंगाई के इस दबाव से अछूते नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादन वाले क्षेत्रों में मौसम संबंधी परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत खाद्य तेल की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पिछले एक महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में करीब 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।

    इस तरह रसोई की महंगाई के पीछे किसी एक वस्तु की समस्या नहीं बल्कि आपूर्ति, मौसम, घरेलू उत्पादन, आयात लागत और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई दे रहा है। सरकार चीनी और प्याज की उपलब्धता बढ़ाने तथा जमाखोरी पर रोक लगाने जैसे कदम उठा रही है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा नई फसल की आवक, मानसून और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • 9 विकेट की हार का ऑस्ट्रेलिया ने लिया हिसाब, बांग्लादेश 95 रन पर ढेर; दूसरे टेस्ट में पारी से मिली करारी शिकस्त

    9 विकेट की हार का ऑस्ट्रेलिया ने लिया हिसाब, बांग्लादेश 95 रन पर ढेर; दूसरे टेस्ट में पारी से मिली करारी शिकस्त


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार वापसी करते हुए पहले टेस्ट में मिली हार का करारा जवाब दे दिया है। साउथ मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को दूसरे ही दिन पारी और 51 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ दो टेस्ट मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर हो गई। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराकर इतिहास रचा था लेकिन दूसरे मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जबरदस्त पलटवार किया और बांग्लादेश को पूरे मैच में वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    दूसरे दिन ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी 8 विकेट पर 165 रन से आगे शुरू की। टीम की पहली पारी 210 रन पर समाप्त हुई। कैमरन ग्रीन ने 67 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली जबकि स्टीव स्मिथ ने 42 और नाथन लियोन ने 32 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी के आधार पर बांग्लादेश के खिलाफ 146 रन की बड़ी बढ़त मिली। बांग्लादेश की ओर से शोरिफुल इस्लाम सबसे सफल गेंदबाज रहे और उन्होंने 7 विकेट अपने नाम किए।

    इसके बाद बांग्लादेश की दूसरी पारी शुरू हुई तो ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों ने बल्लेबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। पूरी टीम 38.3 ओवर में सिर्फ 95 रन पर ढेर हो गई। बांग्लादेश की पारी दूसरे दिन तीसरे सत्र की तीसरी गेंद पर समाप्त हुई और इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 31 रन बनाकर टीम की ओर से सबसे ज्यादा योगदान दिया। मुशफिकुर रहीम 29 रन बनाकर नाबाद रहे लेकिन उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज 10 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका।

    ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई एक बार फिर मिचेल स्टार्क ने की। स्टार्क ने दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए जबकि पैट कमिंस और नाथन लियोन ने 3-3 विकेट लेकर बांग्लादेश की बल्लेबाजी को पूरी तरह तहस नहस कर दिया। इससे पहले बांग्लादेश की पहली पारी भी केवल 64 रन पर सिमट गई थी और स्टार्क ने उस पारी में 6 विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी थी।

    इस मुकाबले में मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया की जीत के सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने मैच में कुल 10 विकेट हासिल किए और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरी सीरीज में भी स्टार्क का प्रदर्शन शानदार रहा। पहले टेस्ट में उन्होंने 2 विकेट लिए थे जबकि दूसरे मुकाबले में 10 विकेट झटककर उन्होंने अपनी टीम को जीत दिलाई। इसी प्रदर्शन के चलते स्टार्क को प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला।

    डार्विन में मिली हार ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए बेहद निराशाजनक रही थी क्योंकि यह अपने घरेलू मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ उसकी पहली टेस्ट हार थी। उस मुकाबले में 9 विकेट से मिली हार के बाद टीम की आलोचना हुई थी। लेकिन साउथ मैके टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार प्रदर्शन किया और बांग्लादेश को संभलने का अवसर तक नहीं दिया। खास बात यह रही कि बांग्लादेश लगातार दूसरी पारी में भी 100 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी। इस शानदार जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज बराबर कर ली और पहले टेस्ट की हार का हिसाब भी चुकता कर दिया।

  • कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका

    कोलंबो टेस्ट में नहीं खेलेंगे कुलदीप यादव, BCCI ने किया साफ; MP के सारांश जैन को मिला डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार स्पिनर कुलदीप यादव इस मुकाबले में भारतीय प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं। टॉस जीतकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और इसके बाद टीम की अंतिम एकादश सामने आई तो उसमें कुलदीप यादव का नाम नहीं था। इसके बाद उनके बाहर रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने बताया कि कुलदीप अभी वायरल बीमारी से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और इसी वजह से वह इस मुकाबले के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

    बीसीसीआई ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि कुलदीप यादव वायरल बीमारी से पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। इसी कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतर सकते हैं। यानी टीम में उनकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह इस टेस्ट में गेंदबाजी या बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे।

    कप्तान शुभमन गिल ने भी टॉस के दौरान कुलदीप की स्थिति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से कुलदीप को इन्फेक्शन हो गया है और इसी कारण वह इस मुकाबले का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप का बाहर होना भारतीय टीम के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वह टीम के प्रमुख स्पिन विकल्पों में शामिल हैं और टेस्ट क्रिकेट में अपनी विविधतापूर्ण गेंदबाजी से बल्लेबाजों के लिए लगातार परेशानी खड़ी करते रहे हैं।

    कुलदीप यादव इससे पहले गाले में खेले गए पहले टेस्ट का हिस्सा थे। हालांकि उस मुकाबले में उनका प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक प्रभावी नहीं रहा और उन्हें केवल एक विकेट मिला था। दूसरे टेस्ट से पहले यह चर्चा थी कि टीम मैनेजमेंट उन्हें आराम देकर किसी दूसरे स्पिन विकल्प को मौका दे सकता है। लेकिन अब बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि कुलदीप के बाहर रहने की मुख्य वजह उनकी बीमारी है।

    कुलदीप की अनुपस्थिति में भारतीय टीम ने मध्यप्रदेश के अनुभवी ऑलराउंडर सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। यह सारांश के अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मुकाबला है। 33 वर्षीय सारांश लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और मध्यप्रदेश की टीम के लिए उनके प्रदर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। उन्होंने टीम को रणजी ट्रॉफी का पहला खिताब दिलाने के सफर में भी अहम भूमिका निभाई थी।

    सारांश जैन बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं। ऐसे में भारतीय टीम को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से उपयोगी योगदान की उम्मीद होगी। कुलदीप की गैरमौजूदगी में सारांश के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर साबित करने का बड़ा मौका है। कोलंबो की परिस्थितियों में उनकी ऑफ स्पिन भारतीय टीम के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है और डेब्यू मैच में वह कैसा प्रदर्शन करते हैं इस पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी।