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  • प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को याद किया और इसे भारतीय सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक बताया। यह वही मंदिर है जिस पर आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले यानी 1026 में गजनी के महमूद ने पहला भीषण आक्रमण किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से बात करते हुए इसे भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

    सोमनाथ मंदिर का महत्व

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर के दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य बन चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सदैव अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”

    गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण

    जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था जिसका उद्देश्य केवल मंदिर को तोड़ना नहीं था बल्कि भारतीय आस्था और संस्कृति को नष्ट करना था। यह आक्रमण भारतीय इतिहास का एक अत्यधिक कष्टकारी क्षण था लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ के प्रति भारतीयों की आस्था और विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।

    सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीयों की न केवल आस्था बल्कि उनकी संकल्पशक्ति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से खड़ा हो सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

    आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ की यह कहानी केवल भारत के इतिहास से जुड़ी नहीं है बल्कि यह भारत के पुनर्निर्माण और सामर्थ्य की भी गाथा है। वह मानते हैं कि आज के समय में जब भारत पुनः अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व महसूस करता है सोमनाथ मंदिर से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी आस्था और संस्कृति के साथ आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण है।

    सोमनाथ के द्वारा दिया गया संदेश
    आज भी सोमनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय समाज के अदम्य साहस संघर्ष और पुनर्निर्माण की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है। पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में इस तथ्य का उल्लेख किया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के अदम्य साहस आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति आस्थाओं की महत्ता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।

  • उज्जैन में बाबा महाकाल का भांग और भस्म से अलौकिक शृंगार दर्शन कर गदगद हुए श्रद्धालु

    उज्जैन में बाबा महाकाल का भांग और भस्म से अलौकिक शृंगार दर्शन कर गदगद हुए श्रद्धालु


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार सुबह भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा जो रातभर लाइन में लगे रहे ताकि वे बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया जिसमें भांग और भस्म से सजावट की गई।

    विशेष शृंगार और भस्म आरती का महत्व

    बाबा महाकाल का शृंगार भांग और भस्म से किया गया जो भगवान शिव का प्रिय अलंकार मानी जाती है। यह शृंगार जीवन और मृत्यु के चक्र और निराकार स्वरूप का प्रतीक है। मंदिर के गर्भगृह में सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। उनका मस्तक चंद्रमा और कमल से सजाया गया जो श्रद्धालुओं के लिए एक अलौकिक दृश्य था। यह देखकर भक्त गदगद हो गए और जय श्री महाकाल के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म श्मशान से लाई गई ताजी चिता की राख से बनाई जाती है जिसमें गोहरी पीपल पलाश शमी और बेल की लकड़ियों की राख भी मिलाई जाती है। इस शृंगार के बाद भक्तों को पवित्रता और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भस्म आरती की यह परंपरा सदियों पुरानी है और हर दिन हजारों भक्त इस आरती में भाग लेने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

    भस्म आरती की पारंपरिक प्रक्रिया

    महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दुनिया में अपनी तरह की एकमात्र आरती मानी जाती है। यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 4 बजे शुरू होती है। इस दौरान भगवान शिव का शृंगार और आरती भस्म से की जाती है। आरती के समय शंखनाद ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच भस्म चढ़ाई जाती है। इसके बाद पंचामृत अभिषेक और अन्य अलंकारों से बाबा महाकाल को सजाया जाता है।इस आरती में भक्तों की आस्था और श्रद्धा का कोई जवाब नहीं होता। कई भक्तों का मानना है कि भस्म आरती में भाग लेने से उन्हें अपने जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और वे सुख-समृद्धि के साथ-साथ मोक्ष भी प्राप्त करते हैं।

    महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के समय महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं इस कारण महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। हालांकि विशेष व्यवस्था के तहत महिलाएं बाहर से दर्शन कर सकती हैं। इसके अलावा महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करती हैं ताकि वे श्रद्धा और सम्मान के साथ पूजा-अर्चना कर सकें।

    श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह

    देर रात से ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। उज्जैन का महाकाल मंदिर हमेशा श्रद्धालुओं से भरा रहता है और इस विशेष दिन पर तो भक्तों की भीड़ और भी अधिक थी। श्रद्धालु इस अवसर को अत्यंत पवित्र मानते हुए बाबा महाकाल के दर्शन करके अपार आशीर्वाद प्राप्त करने की उम्मीद में आते हैं।

    सदियों पुरानी परंपरा

    महाकाल की भस्म आरती एक ऐसी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है और आज भी इसका महत्व उतना ही है। यह धार्मिक आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए पुण्य का अवसर है बल्कि यह उज्जैन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक भी है। भक्त यहां आकर अपने जीवन के सारे दुखों से मुक्त होकर संतुष्ट महसूस करते हैं।

  • प्रयागराज माघ मेला हर हर गंगे के उद्घोष में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई

    प्रयागराज माघ मेला हर हर गंगे के उद्घोष में श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के तीसरे दिन संगम घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह मेला 15 फरवरी तक चलेगा और दिन-ब-दिन श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। सोमवार सुबह से ही संगम के त्रिवेणी घाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर हर गंगे और जय गंगे के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई और पुण्य लाभ लिया।

    श्रद्धालुओं की आस्था और उनके अनुभव

    देशभर से आए श्रद्धालुओं ने माघ मेले में शामिल होने के लिए लंबी यात्रा की। एक श्रद्धालु ने बताया “हम हैदराबाद से आए हैं। पहले महाकुंभ में भी आए थे और अब माघ मेले में डुबकी लगाई है। स्नान के बाद गंगा यमुना और सरस्वती के आशीर्वाद से आज रात काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे। फिर अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करेंगे और उसके बाद हैदराबाद लौट जाएंगे। योगी सरकार ने बहुत अच्छे इंतजाम किए हैं हर-हर गंगे।

    अनेक श्रद्धालुओं ने प्रशासन के द्वारा किए गए व्यवस्थाओं की सराहना की। एक भक्त ने कहा “सरकार ने यहां भीड़ को बहुत अच्छे से मैनेज किया है। ट्रैफिक और पार्किंग के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। मैं लोगों को यहां आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। कोई दिक्कत नहीं होगी सभी व्यवस्थाएं बढ़िया हैं।

    एक अन्य श्रद्धालु ने कहा “माघ मेला का अपना अलग आकर्षण है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है। पिछली बार भी प्रशासन ने अच्छे इंतजाम किए थे और इस साल भी वैसा ही है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार के इंतजाम तारीफ के काबिल हैं। पुलिस हर समय मौजूद है और श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैयार रहती है। युवाओं में आस्था की भावना बहुत ज्यादा है। कुल मिलाकर इंतजाम बहुत अच्छे हैं। कई सुविधाएं उपलब्ध हैं और साफ-सुथरे चेंजिंग रूम भी दिए गए हैं।

    सुरक्षा और सुविधाएं

    माघ मेला 2026 के पहले तीन दिनों में लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया और पुण्य की प्राप्ति की। प्रशासन ने सुरक्षा स्वच्छता ट्रैफिक और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

    कलपवास और धार्मिक आयोजन

    माघ मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है जहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या है। संगम घाटों पर स्नान के साथ-साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी हो रहे हैं जिससे धार्मिक माहौल और भी पवित्र हो गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।माघ मेला भारतीय संस्कृति आस्था और एकता का प्रतीक है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु एक साथ जुटते हैं जो अपनी धार्मिक आस्थाओं को पूरी श्रद्धा के साथ व्यक्त करते हैं।

    माघ मेला का महत्व

    माघ मेला विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए है जो अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं। संगम में स्नान करने को वे एक पवित्र कार्य मानते हैं जिससे न केवल शारीरिक सफाई होती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को आस्था और विश्वास की ओर अग्रसर करते हैं।

  • KKR विवाद के बाद BJP नेता संगीत सोम को बम से उड़ाने की धमकी, बंगाली भाषा में आया मैसेज

    KKR विवाद के बाद BJP नेता संगीत सोम को बम से उड़ाने की धमकी, बंगाली भाषा में आया मैसेज


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीजेपी नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम को 5 जनवरी 2026 को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी का मैसेज बंगाली भाषा में उनके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया, और इसमें समाचार चैनल को भी उड़ाने की बात कही गई है। संगीत सोम ने तुरंत मेरठ पुलिस को इसकी जानकारी दी और व्हाट्सएप मैसेज तथा कॉल डिटेल की जानकारी भी दी। इस धमकी के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

    संगीत सोम जो बीजेपी के तेजतर्रार नेताओं में शुमार हैं हाल ही में आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के बांग्लादेशी खिलाड़ी को लेकर शाहरुख़ खान के खिलाफ बयानबाजी करने की वजह से चर्चा में थे। बीजेपी नेता ने शाहरुख़ खान पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करके देश के खिलाफ गद्दारी की है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी और बाद में KKR ने बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर कर दिया था।

    शिकायत में क्या कहा गया

    संगीत सोम ने पुलिस को दिए गए अपनी शिकायत में बताया कि सुबह करीब 8 बजे उनके व्हाट्सएप पर एक बंगाली भाषा में धमकी भरा मैसेज आया। इस मैसेज में उन्हें और एक न्यूज चैनल को बम से उड़ाने की बात की गई। साथ ही फोन कॉल डिटेल भी पुलिस को भेजी गई ताकि आरोपी का पता लगाया जा सके।

    पुलिस का मानना है कि यह धमकी संभवतः संगीत सोम के हालिया बांग्लादेशी खिलाड़ी के खिलाफ बयान के बाद दी गई है। उन्होंने आईपीएल टीम में बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल करने पर शाहरुख़ खान को गद्दार करार दिया था। इसके बाद उनके समर्थकों में गुस्सा देखा जा रहा था और इसी बीच उन्हें धमकी मिल गई।

    क्या था KKR विवाद

    संगीत सोम ने आरोप लगाया था कि शाहरुख़ खान ने बांग्लादेशी खिलाड़ी को अपनी आईपीएल टीम में शामिल करके भारतीय क्रिकेट का अपमान किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि देश में बांग्लादेशी खिलाड़ी को खेलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और विरोध बढ़ा जिसके बाद KKR ने बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर कर दिया था।

    इस बयानबाजी के बाद संगीत सोम के समर्थक और विरोधी दोनों ही सक्रिय हो गए थे। वहीं, इस विवाद के बाद उन्हें धमकी मिलने का मामला सामने आया है, जिससे यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है।

    पुलिस जांच की शुरुआत

    मेरठ पुलिस ने संगीत सोम की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह धमकी कैसे और क्यों दी गई इसका पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।

    संगीत सोम का बयान

    संगीत सोम ने इस धमकी के बाद किसी भी प्रकार की चिंता जाहिर नहीं की है। उनका कहना है कि इस तरह की धमकियों से उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और वे देश के हित में हमेशा अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास उन्हें डराने के बजाय और ज्यादा मजबूती से काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।

    समर्थकों का गुस्सा
    संगीत सोम को मिली धमकी के बाद उनके समर्थकों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। वे इसे उनके खिलाफ साजिश के रूप में देख रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने इस घटना की निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    अभी तक पुलिस की प्रतिक्रिया
    मेरठ पुलिस से अभी तक किसी आधिकारिक बयान की जानकारी नहीं मिली है लेकिन सूत्रों के मुताबिक पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। आरोपी की पहचान होने पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

  • बैंकों ने 27 जनवरी को हड़ताल का ऐलान, लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, कर्मचारी कर रहे 5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग

    बैंकों ने 27 जनवरी को हड़ताल का ऐलान, लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, कर्मचारी कर रहे 5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग


    नई दिल्ली । जनवरी के आखिरी हफ्ते में बैंकिंग सेवाओं से जुड़े किसी काम की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। बैंक कर्मचारियों ने 27 जनवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का कारण है कर्मचारियों द्वारा की जा रही 5 डेज वीक की मांग। यदि हड़ताल होती है तो बैंकों का काम लगातार चार दिनों तक ठप रहेगा क्योंकि 24 जनवरी को चौथा शनिवार 25 जनवरी को रविवार और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की छुट्टी होगी। ऐसे में 27 जनवरी को होने वाली हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं।

    क्यों हो रही है हड़ताल

    बैंक कर्मचारियों का संघ, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 5 दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की है। वर्तमान में बैंक कर्मचारियों को हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश मिलता है, जबकि रविवार के दिन भी अवकाश होता है। कर्मचारियों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए वेतन संशोधन समझौते के तहत भारतीय बैंकों के संघ आईबीए और यूएफबीयू के बीच सहमति बनी थी कि वे हर महीने के दो शनिवारों को अवकाश देंगे लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।

    यूनियन ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार उनकी वास्तविक मांग पर ध्यान नहीं दे रही है। संघ का कहना है कि यदि 5 डेज वीक लागू किया जाता है तो वे हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने के लिए तैयार हैं जिससे कार्य समय में कोई कमी नहीं होगी।

    क्या हैं बैंकों की मुख्य मांगें

    संघ का कहना है कि अन्य सरकारी संस्थान जैसे कि आरबीआई भारतीय रिजर्व बैंक एलआईसी भारतीय जीवन बीमा निगम जीआईसी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन पहले से ही सप्ताह में 5 दिन काम कर रहे हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार, करेंसी मार्केट और स्टॉक एक्सचेंज जैसे वित्तीय बाजार भी शनिवार को बंद रहते हैं। ऐसे में बैंकों द्वारा सप्ताह में पांच दिन काम करने की कोई वजह नहीं बनती।

    यूएफबीयू के बारे में

    यूएफबीयू भारत के नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का एक संगठन है। यह संगठन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और कुछ पुराने निजी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। संघ ने कहा कि उनकी सोशल मीडिया अभियान को जबरदस्त समर्थन मिला है, जिसमें 18 लाख से अधिक इंप्रेशन और पूर्व में ट्विटर पर लगभग 2,85,200 पोस्ट्स मिली हैं।

    आगे क्या होगा
    27 जनवरी को होने वाली इस हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है। यह हड़ताल एक दिन की होगी, लेकिन इसके कारण बैंकों की सेवाएं तीन दिन तक ठप रह सकती हैं। क्योंकि हड़ताल के दिन के अलावा, 24, 25, और 26 जनवरी को पहले से ही छुट्टियां हैं। इसलिए अगर आप जनवरी के अंत में किसी बैंक से जुड़ा काम निपटाना चाहते हैं तो इसे पहले के हफ्ते में निपटा लें या फिर आपको अगले महीने तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

    हालांकि यूएफबीयू ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्यभार के लिए तैयार हैं बशर्ते उन्हें सप्ताह में पांच दिन काम करने का अवसर मिले। कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम न केवल उनके लिए बल्कि ग्राहकों के लिए भी सुविधाजनक होगा क्योंकि इससे बैंकों का कामकाज और भी व्यवस्थित हो सकता है।

  • दिल्ली दंगों में SC का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, 5 आरोपियों को मिली राहत

    दिल्ली दंगों में SC का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, 5 आरोपियों को मिली राहत


    नई दिल्ली । 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगों के बाद दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद शरजील इमाम समेत सात अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दंगे पूर्व-योजना के तहत आयोजित किए थे। पुलिस ने इन पर भारतीय दंड संहिता और की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस का कहना था कि यह हिंसा एक सोची-समझी साजिश का परिणाम थी न कि एक आकस्मिक घटना।

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला 5 जनवरी 2026

    5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में जमानत याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया शामिल थे ने 7 आरोपियों में से 5 को जमानत दे दी जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी।

    क्यों नहीं मिली जमानत

    अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका को मामले में केंद्रीय और गंभीर बताया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक जेल में रहने के कारण जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने प्रत्येक आरोपी के मामले को अलग-अलग आधार पर तौला और फिर अपना फैसला सुनाया।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत देने के मामले में अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार का हवाला केवल तभी दिया जा सकता है, जब इसका आधार ठोस साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा हो। यदि आरोप गंभीर हैं और साक्ष्य मजबूत हैं तो जीवन के अधिकार के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

    अतीत के फैसले का संदर्भ

    उमर खालिद शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के खिलाफ यह मामला काफी लंबा खींच चुका है। इन आरोपियों को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है और वे पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं। 10 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने इस मामले में जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने भी इन आरोपियों को जमानत देने से मना कर दिया था। 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद इन आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    अन्य आरोपियों की जमानत

    सुप्रीम कोर्ट ने बाकी 5 आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इन आरोपियों की जमानत से ट्रायल प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

    फैसले का महत्व

    यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह दर्शाता है कि न्यायपालिका गंभीर साजिशों और सामूहिक हिंसा के मामलों में जमानत देने में बेहद सावधान रहती है, विशेष रूप से जब आरोप UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक अधिकारों को हमेशा कानूनी ढांचे और साक्ष्यों के संदर्भ में समझा जाएगा न कि केवल व्यक्तिगत कठिनाई या जेल में लंबे समय तक रहने के आधार पर।

    आगे क्या होगा

    उमर खालिद और शरजील इमाम अब ट्रायल कोर्ट में फिर से जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। ट्रायल की प्रक्रिया अभी भी जारी रहेगी और अदालत भविष्य में साक्ष्यों और मामलों की गंभीरता के आधार पर निर्णय लेगी। यह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अदालत के फैसले ही इन आरोपियों के भविष्य का निर्धारण करेंगे।

  • मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल 16 घंटे तक रहेगा, जो 15 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दिन विशेष रूप से स्नान, सूर्य पूजा और दान का महत्व है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को विशेष दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण की दिशा में प्रवेश करते हैं, जिससे पृथ्वी पर दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता है और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्यदेव का उत्तरायण में प्रवेश शुभ होता है।कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री और ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
    इस दिन, स्नान, सूर्यदेव की उपासना और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है, जिसके अनुसार भगवान सूर्य, अपने पुत्र भगवान शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य उत्तर पथगामी होते हैं और पृथ्वी की ओर उनका रुख बदलता है।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से स्नान का महत्व है, खासकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में। इस दिन को पुण्यकाल माना गया है, और इस दौरान दान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता आती है।
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से नया अन्न, तिल, कम्बल, घी और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में खासतौर पर तिल और खिचड़ी बनाई जाती है, जो प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान को अर्पित की जाती है, फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

    धार्मिक आचार्यों का मानना है कि इस दिन तिल का दान करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके अलावा, गरीबों को बर्तन, तिल और अन्य सामान दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैमौसम को लेकर भी मकर संक्रांति विशेष महत्व रखता है। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अगर मौसम अनुकूल रहा तो गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या गंगा घाटों पर पहुंच सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई इलाकों से लोग इस दिन गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।

    इसके अलावा, मकर संक्रांति के बाद खरमास का समय समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 4 फरवरी को पहला वैवाहिक लग्न मुहूर्त भी शुरू होगा। 2026 में मकर संक्रांति का दिन धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भरपूर रहेगा। यह दिन सूर्य की उपासना, तिल दान, और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा। विशेष रूप से इस दिन की महत्वता को समझते हुए श्रद्धालु इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे।

  • सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं

    सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं


    सागर । सागर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने सोमवार को नगर निगम टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड सीवर प्रोजेक्ट और एमपीयूडीसी के अधिकारियों के साथ नगर के जलस्रोतों की जांच की। इस दौरान वे जवाहरगंज भीतर बाजार स्थित शीतला माता मंदिर के पास पहुंचे जहां पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि इन जलस्रोतों में बड़ी मात्रा में अम्लीय गंदा पानी मिल चुका था जो पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

    अधिकांश नागरिक इन कुओं और हैंडपंप का पानी पीने के लिए उपयोग कर रहे थे। इसलिए निगमायुक्त ने तत्काल कदम उठाते हुए इन कुओं और हैंडपंपों पर लाल रंग से यह चेतावनी लिखवाने का आदेश दिया कि इस जल का उपयोग न करें यह पीने योग्य नहीं है। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जलस्रोत गुणवत्ता में सही न पाए जाएं उन पर इस तरह की चेतावनी तत्काल लिखवाई जाए। उन्होंने कहा जब तक इन जलस्रोतों का पानी वैज्ञानिक तरीके से टेस्ट न हो जाए तब तक इन्हें पीने योग्य नहीं माना जाएगा।

    स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता

    राजकुमार खत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वर्तमान में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा राजघाट जलप्रदाय योजना के तहत प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस जल की नियमित गुणवत्ता जांच कराई जा रही है और मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही इसकी आपूर्ति की जा रही है।

    नागरिकों से अपील

    नगर निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे तब तक कुओं और हैंडपंप के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में न करें जब तक उसकी गुणवत्ता जांच पूरी न हो जाए।

  • अमरकंटक में शीतलहर का प्रकोप बर्फ से ढकी वादियां शिमला-मनाली जैसा नजारा

    अमरकंटक में शीतलहर का प्रकोप बर्फ से ढकी वादियां शिमला-मनाली जैसा नजारा


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अमरकंटक में सोमवार सुबह तापमान में आई गिरावट ने क्षेत्र को बर्फीला बना दिया। सतपुड़ा और विंध्य की पहाड़ियों पर समुद्र तल से 1048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरकंटक में नर्मदा नदी तट मैदानों और खुले स्थानों पर पाला जम गया और घास पर ओस बर्फ की तरह दिखने लगी। तापमान शून्य डिग्री के करीब पहुंचते ही पूरा क्षेत्र शीतलहर और घना कोल्ड स्नैप से ढक गया जिससे यह स्थान शिमला और मनाली जैसे पहाड़ी क्षेत्रों का रूप धारण कर चुका था।

    शून्य डिग्री के पास पहुंचा तापमान

    मौसम विभाग के मुताबिक अमरकंटक का न्यूनतम तापमान एक बार फिर शून्य डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। नववर्ष के बाद तीन दिनों तक काले बादल छाए रहे जिससे ठंड में थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन जैसे ही बादल छंटे ठंड का असर जबरदस्त रूप से बढ़ गया। इसका असर यह रहा कि घास-फूस पत्तियों और वाहनों की छतों पर बर्फ की मोटी परत जम गई।

    सफेद चादर में ढकी अमरकंटक

    रामघाट माई की बगिया जमुना दादर कपिलधारा और अन्य क्षेत्रों में सुबह बर्फ का नजारा कुछ इस प्रकार था कि अमरकंटक की वादियां शिमला कुल्लू और मनाली जैसी लग रही थीं। पूरी नगरी बर्फ की सफेद चादर में ढकी हुई नजर आ रही थी जिससे प्रकृति का अनोखा सौंदर्य सामने आ रहा था।

    श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

    कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद अमरकंटक में श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और पर्यटक मां नर्मदा के पावन जल में डुबकी लगाने के लिए आए। ठंडी हवाओं के बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई और वे स्नान व दर्शन करने में व्यस्त रहे।

    पर्यटकों का विशेष आकर्षण

    अमरकंटक का बर्फ से ढका नजारा ठंडी हवाएं और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक इस बर्फीले मौसम और प्राकृतिक नजारों से अभिभूत नजर आ रहे हैं। अमरकंटक की ठंड और बर्फीली हवाएं इन दिनों एक विशेष अनुभव बन चुकी हैं और यह स्थान पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय गंतव्य बन गया है।