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  • नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें

    नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें


    नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 19 जुलाई को जबलपुर भोपाल नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। शुरुआती जांच में जिसे सामान्य सड़क दुर्घटना माना जा रहा था वह दरअसल अवैध रेत कारोबार की खूनी रंजिश का नतीजा निकला। छह दिन तक चली गहन जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित सामूहिक हत्या थी जिसे दुर्घटना का रूप देने की पूरी तैयारी पहले से कर ली गई थी। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी शहपुरा जनपद पंचायत सदस्य आनंद पटेल समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।

    पुलिस के मुताबिक अवैध रेत खनन और परिवहन के कारोबार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए कारोबारी राजेंद्र लोधी को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। वारदात वाले दिन आरोपियों ने राजेंद्र लोधी की हर गतिविधि पर नजर रखी। उसकी लोकेशन लगातार मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती रही। जैसे ही राजेंद्र अपने साथियों के साथ तय स्थान पर पहुंचा वैसे ही पहले से हाईवे के दोनों ओर खड़े हाईवा वाहनों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और कुचल दिया। इस हमले में राजेंद्र लोधी सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसका इलाज जारी है।

    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक वाहन का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर ए मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और हत्या में इस्तेमाल हाईवा को हीरापुर बंदरोहा के जंगल से बरामद कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी राजा पटेल ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया जिसके बाद एक के बाद एक आरोपियों की गिरफ्तारी होती चली गई।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जबलपुर स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ अमित खरे भी इस साजिश का हिस्सा थे। आरोप है कि उन्होंने हत्या को सड़क हादसा दिखाने और सबूत मिटाने के तरीके बताए। वारदात के बाद आरोपियों के बीच हुई बातचीत में मौत की पुष्टि होने पर खुशी जताने जैसी बातें भी सामने आई हैं जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाती हैं।

    पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हाईवा के अलावा थार और फॉर्च्यूनर वाहन भी जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार राजेंद्र लोधी और मुख्य आरोपी आनंद पटेल के बीच लंबे समय से अवैध रेत कारोबार और आर्थिक हितों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया और पांच लोगों की जान चली गई।

    पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। इस खुलासे के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े आपराधिक गठजोड़ पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • 'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस कार्यक्रम को जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण को प्रोत्साहित करने वाला प्रभावी मंच बताया। नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम राजनीति से अलग समाज के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों और प्रेरणादायी कहानियों को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य करता है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे उल्लेखनीय कार्यों को व्यापक स्तर पर सामने लाया जाता है। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम से आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों के प्रयासों को सम्मान मिलता है, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बताया।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में बस्तर ओलंपिक्स, बस्तर पांडुम, मल्हार से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ और इस बार जल संरक्षण अभियान के तहत कोरबा की पहल का जिक्र राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने स्थानीय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील को भी महत्वपूर्ण बताया।

    त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सकारात्मक सोच और जनता से लगातार संवाद बनाए रखना है। उनके अनुसार, कार्यक्रम में त्रिपुरा में स्वदेशी रूप से तैयार किए गए पहले संगीत वाद्ययंत्र का उल्लेख होने से राज्य के कारीगरों और कलाकारों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने इसे स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया।

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान के स्मरण और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदर्भ को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश देश के कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक है।

    केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कार्यक्रम में राजनीतिक विषयों के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे प्रेरक कार्यों को प्रमुखता दी जाती है। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने को इस कार्यक्रम की विशेषता बताया। वहीं भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम नागरिकों के योगदान को महत्व देता है और वर्षों से देशभर की प्रेरक कहानियों को लोगों तक पहुंचा रहा है।

    उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ‘मन की बात’ को दुनिया के लोकप्रिय मासिक कार्यक्रमों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आती हैं, जिनकी मेहनत और उपलब्धियां सामान्यतः चर्चा में नहीं आ पातीं। वहीं बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ने वाला मंच बताया। पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करने को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी संदेश बताया।

  • देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां

    देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां


    भोपाल । देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। नवयुवक मंडल साहू समाज द्वारा श्री लक्ष्मीनारायण साहू समाज मंदिर स्थित मां कर्मा देवी रोड घोड़ा निक्कास में भव्य श्रीरामचरितमानस सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम और संकटमोचन हनुमानजी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयघोष से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया। सुंदरकांड के प्रत्येक चौपाई और दोहे के साथ पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और हनुमानजी की अटूट भक्ति का स्मरण करते हुए सुख समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना की।

    सुंदरकांड पाठ के पश्चात आयोजित भजन संध्या ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। प्रसिद्ध भजन गायक रुपेश राज और हरीश कुशवाहा ने श्रीराम और हनुमानजी की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनकी मधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर झूमते रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत और जयकारों से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण क्षण 111 दीपों से की गई भव्य महाआरती रही। दीपों की दिव्य रोशनी और आरती की गूंज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। महाआरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने धर्म एवं समाज की उन्नति की प्रार्थना की।

    नवयुवक मंडल साहू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह मंडल का पहला सामूहिक धार्मिक आयोजन था। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके।

    इस अवसर पर प्रदेश जिला और स्थानीय इकाइयों के पदाधिकारी समाज के वरिष्ठजन महिलाएं युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज को एकजुट करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

    देवशयनी एकादशी के इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ता है तो आस्था के साथ साथ सामाजिक एकता भी मजबूत होती है। सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने इस धार्मिक उत्सव को श्रद्धा भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का यादगार आयोजन बना दिया।

  • बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति

    बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 लागू होने के बाद विभागों में प्रमोशन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सामान्य प्रशासन और वाणिज्यिक कर विभाग के बाद अब ऊर्जा विभाग की बिजली कंपनियों में भी पदोन्नति को लेकर असंतोष सामने आया है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ ने आरोप लगाया है कि पात्र और वरिष्ठ इंजीनियरों को पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है जबकि बड़ी संख्या में पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। संघ ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

    अभियंता संघ का कहना है कि सरकार की मंशा सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरकर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की है लेकिन बिजली कंपनियों में इसके विपरीत स्थिति बनी हुई है। संघ का आरोप है कि जुलाई 2026 में मंडल कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई लेकिन कंपनी कैडर के योग्य और वरिष्ठ इंजीनियरों को अब तक पदोन्नति नहीं दी गई। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

    संघ के अनुसार मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के लगभग 69 पद रिक्त हैं। वहीं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ऐसे 72 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में भी कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता तक के कई पद रिक्त हैं लेकिन इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।

    अभियंता संघ ने यह भी दावा किया है कि 10 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच ऐसी स्थिति थी जब मंडल कैडर में पदोन्नति के लिए कोई पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कंपनी कैडर के योग्य इंजीनियरों को अवसर नहीं दिया गया। संघ का कहना है कि अब हाल ही में जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है वे कई वर्षों तक अगली पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे जिससे रिक्त पद लंबे समय तक खाली रह सकते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी।

    संघ ने ऊर्जा विभाग पर वर्ष 2011 के आदेश की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 में इसी प्रकार की परिस्थितियों में कंपनी कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी लेकिन इस बार अलग रवैया अपनाया जा रहा है। अभियंताओं के अनुसार यह निर्णय न तो नियमों की भावना के अनुरूप है और न ही कर्मचारियों के साथ न्याय करता है।

    अभियंता संघ का कहना है कि वरिष्ठ इंजीनियरों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से केवल अधिकारियों का करियर प्रभावित नहीं होगा बल्कि नीचे के पद भी रिक्त नहीं हो पाएंगे। इसका सीधा असर नई भर्तियों पर पड़ेगा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे। इसलिए रिक्त पदों को समय पर भरना प्रशासनिक और रोजगार दोनों दृष्टि से आवश्यक है।

    संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि पदोन्नति नियम 2025 के तहत पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर सभी रिक्त पदों पर जल्द पदोन्नति दी जाए। साथ ही सभी बिजली कंपनियों के लिए एक समान और स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    अभियंता संघ ने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इंजीनियरों का बढ़ता असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और अधिकारियों की होगी।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद चुनाव सुधार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने एक नई शुरुआत की है और भविष्य में यह अभियान चुनावी सुधार तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों तक भी पहुंचेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

    अखिलेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज ने यह साबित किया है कि संगठित जनआंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके समर्थन में खड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी की मिसाल बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि अब संविधान में निहित अधिकारों को आधार बनाकर चुनाव सुधार और ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा और जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष भविष्य में इन विषयों को भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा।

    अपने बयान में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    उन्होंने कानून व्यवस्था, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बीच विपक्ष शिक्षा, रोजगार और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों तथा चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होता है। फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने शिक्षा, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र

    दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब पूरी तरह गर्मा चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी सभाओं में विकास के मुद्दों के साथ साथ तंज व्यंग्य और राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियां बटोर रही है। नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां इस उपचुनाव को लगातार दिलचस्प बना रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है लेकिन प्रचार अभियान में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी बेहद अहम नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान आशुतोष तिवारी और नरोत्तम मिश्रा को मंच पर साथ खड़ा करते हुए दोनों को राम लक्ष्मण की जोड़ी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे भाजपा की ऐसी रणनीति बता रहे हैं जिसमें प्रत्याशी के साथ वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता का भी पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

    इसी बीच दतिया में सड़क किनारे खड़े एक पुराने टैंकर ने भी चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया। टैंकर पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लिखा होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता को राजनीतिक रूप से पीछे कर दिया है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस तरह की टिप्पणियों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।

    उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी दतिया में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि उनका पूरा ध्यान दतिया उपचुनाव पर है और कांग्रेस इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। भाजपा ने भी इस बयान पर पलटवार किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जीतू पटवारी आजकल हर जगह घूम रहे हैं लेकिन उनका अपना कोई हल्का नहीं है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

    चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपने अपने तरीके से उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की पृष्ठभूमि को लेकर बयान दिए तो कांग्रेस ने लोकतंत्र में जनता को सबसे बड़ा बताया। दोनों दल अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि वही जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दतिया पहुंचकर भाजपा के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए पुराने दिनों का उदाहरण दिया और अपने खास अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उनके भाषण और मंचीय प्रस्तुति को लेकर भी सभा में मौजूद लोगों के बीच खूब चर्चा रही।

    राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रचार से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी चर्चा का विषय बना। भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मजाकिया अंदाज में संगठन के एक पदाधिकारी से मुख्यमंत्री बनने की बात कह दी। इस टिप्पणी पर कुछ देर के लिए बैठक में मौजूद नेताओं के बीच हल्की मुस्कान और हास्य का माहौल बन गया।

    दतिया उपचुनाव में अब प्रचार अंतिम दौर में पहुंच रहा है। दोनों प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है जबकि अंतिम फैसला मतदाता अपने वोट के जरिए करेंगे।

  • भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता

    भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रविवार को नशे के खिलाफ जनजागरूकता का बड़ा संदेश देते हुए रन फॉर लाइफ मैराथन का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी महाअभियान नशे से दूरी है जरूरी 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं खिलाड़ियों पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुलिस और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन की शुरुआत सुबह टीटी नगर स्टेडियम से हुई। प्रतिभागियों के लिए दो किलोमीटर वॉकथॉन पांच किलोमीटर हाफ मैराथन और दस किलोमीटर मैराथन जैसी अलग अलग श्रेणियां रखी गई थीं ताकि हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान से जुड़ सकें। तिरंगा हाथों में लेकर दौड़ते युवाओं ने नशामुक्त समाज का संदेश दिया और पूरे आयोजन में देशभक्ति तथा सामाजिक जिम्मेदारी का उत्साह दिखाई दिया।

    कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ यह केवल एक प्रतीकात्मक दौड़ नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है और नशे से दूर रहकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सभी नागरिकों को से नो टू ड्रग्स का संकल्प लेकर समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देना चाहिए।

    एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस मुख्यालय एवं अपराध डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी दोनों पीढ़ियों को मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    मैराथन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इस अभियान को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि खेल और फिटनेस की गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता अभियानों को लगातार जारी रखने का भरोसा दिलाया।

    मध्य प्रदेश पुलिस का नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान प्रदेशभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति की मजबूत संस्कृति विकसित करना है। भोपाल में आयोजित रन फॉर लाइफ मैराथन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिसने युवाओं को सामाजिक बदलाव की मुहिम से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।

  • खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई

    खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के दौरान खाद संकट को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य को जरूरत से कहीं अधिक यूरिया उपलब्ध कराने के बावजूद किसान खाद के लिए भटकते रहे। संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक खरीफ सीजन के लिए मध्य प्रदेश को लगभग 9.61 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी जबकि केंद्र सरकार ने 14.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया। यानी राज्य को मांग से लगभग 147 प्रतिशत अधिक यूरिया मिला। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और अव्यवस्था देखने को मिली।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या यूरिया की उपलब्धता नहीं बल्कि उसके वितरण और प्रबंधन में रही। केंद्र सरकार का दायित्व राज्य तक खाद पहुंचाने का होता है जबकि जिलों ब्लॉकों और सहकारी समितियों तक समय पर और पारदर्शी वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाना वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    दूसरी ओर खरीफ सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डीएपी खाद की कमी बनकर सामने आई। राज्य को इस अवधि में लगभग 3.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी लेकिन केवल 3.05 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो सकी। यानी करीब 52 हजार मीट्रिक टन डीएपी की कमी रही। यही वजह रही कि बुवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ी और कई स्थानों पर धक्का मुक्की तथा हंगामे की स्थिति भी बनी।

    संसद में पेश आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि एनपीकेएस उर्वरक की स्थिति बेहतर रही। लगभग 4.21 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले राज्य को 6.67 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस उपलब्ध कराया गया। यानी इस उर्वरक की भी पर्याप्त उपलब्धता रही। इसके बावजूद डीएपी की कमी ने खेती की तैयारियों को प्रभावित किया और किसानों की चिंता बढ़ा दी।

    केंद्र सरकार ने खाद आपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और निगरानी आधारित बताया है। फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकार के साथ मिलकर महीनेवार जरूरत तय करता है। इसके बाद उर्वरक विभाग राज्यों को आवंटन जारी करता है और रेलवे रैक के माध्यम से खाद की आपूर्ति की जाती है। सभी रैक की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिए की जाती है तथा हर सप्ताह केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक भी होती है।

    मध्य प्रदेश स्वयं भी देश के प्रमुख यूरिया उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में राज्य में लगभग 19.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक ही 5.40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। इससे पहले वर्ष 2022-23 में राज्य ने 22.37 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था। देश में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 के बाद कई नई यूरिया उत्पादन इकाइयों की भी शुरुआत की है।

    खाद उपलब्धता के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वास्तविक चुनौती उत्पादन या केंद्रीय आवंटन की नहीं बल्कि जरूरत के अनुरूप डीएपी उपलब्ध कराने और अंतिम छोर तक समय पर वितरण सुनिश्चित करने की है। यदि वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को हर खरीफ सीजन में इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    नई दिल्ली । झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ धाम में आयोजित होने वाले राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सबसे अहम निर्णय यह है कि पूरे मेले के दौरान बाबा वैद्यनाथ मंदिर में वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर के साथ दर्शन की सुविधा मिल सके।

    श्रावणी मेले की तैयारियों की समीक्षा के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि 28 जुलाई तक सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं। इसके बाद 29 जुलाई को देवघर और दुमका में उपलब्ध सुविधाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी, ताकि मेले के शुभारंभ से पहले किसी भी कमी को दूर किया जा सके। अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने पर विशेष जोर दिया गया।

    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मेले में एआई आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहां से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। इसके अलावा एआई कैमरे, फेस रिकॉग्निशन प्रणाली, ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली, ड्रोन निगरानी, वाहन पहचान कैमरे और हेड काउंटिंग तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर आधारित शिकायत प्रणाली और डिजिटल सूचना व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टेंट सिटी की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही पेयजल, शौचालय, स्नानगृह, साफ-सफाई, कूड़ेदान और कचरा उठाने की व्यवस्था चौबीसों घंटे सुचारु रखने पर विशेष जोर दिया गया है। गर्मी और उमस से राहत देने के लिए मिस्ट कूलिंग सिस्टम और अन्य शीतलन सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस चौकियां, ट्रैफिक नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, सूचना एवं सहायता केंद्र, विद्युत केंद्र और मातृत्व विश्राम गृह जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक प्रवेश द्वार और वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

    देवघर और बासुकीनाथ के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ यातायात व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान जाम या अन्य अव्यवस्थाओं का सामना न करना पड़े।

    प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के समन्वय से इस वर्ष का श्रावणी मेला अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-केंद्रित होगा। समान दर्शन व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।