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  • IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ

    IVF को लेकर मन में हैं सवाल? जानें कब पड़ती है जरूरत, कितनी है सफलता और क्या हैं सच-झूठ


    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, देर से शादी, पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, मोटापा और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं के कारण इनफर्टिलिटी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF लाखों दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है। हालांकि IVF जितना लोकप्रिय हुआ है, उससे जुड़े भ्रम और मिथक भी उतनी ही तेजी से फैले हैं। कई लोग मानते हैं कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं या यह प्रक्रिया हर बार सफल हो जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन धारणाओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    IVF एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां आगे की गर्भावस्था सामान्य तरीके से ही विकसित होती है।

    सबसे बड़ा मिथक यह है कि IVF कराने के बाद गर्भधारण तय होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। महिला की उम्र, अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, भ्रूण की स्थिति, गर्भाशय का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां सफलता की संभावना तय करती हैं। कई मामलों में पहली कोशिश सफल नहीं होती और दूसरी या तीसरी बार सफलता मिलती है।

    एक और आम धारणा यह है कि IVF से पैदा होने वाले बच्चे शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं। उनका कहना है कि IVF में केवल निषेचन की प्रक्रिया प्रयोगशाला में होती है। इसके बाद भ्रूण का विकास गर्भाशय में बिल्कुल उसी तरह होता है, जैसा प्राकृतिक गर्भधारण में होता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि अधिकांश IVF से जन्मे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह ही होता है। बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता की आनुवंशिक स्थिति, गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण, जीवनशैली, संक्रमण और प्रसव की परिस्थितियों पर अधिक निर्भर करता है।

    कई लोगों को लगता है कि IVF से हमेशा जुड़वां या तीन बच्चे पैदा होते हैं। पहले सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थापित किए जाते थे, इसलिए मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक रहती थी। लेकिन आधुनिक तकनीकों में डॉक्टर अधिकतर मामलों में केवल एक स्वस्थ भ्रूण ही प्रत्यारोपित करते हैं। इससे जुड़वां गर्भावस्था की संभावना कम होती है और मां तथा बच्चे दोनों के लिए जोखिम भी घट जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि IVF उन दंपतियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है जिन्हें लंबे समय तक प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। हालांकि इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से पूरी जांच और सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक मानसिक स्थिति IVF की सफलता की संभावना को बेहतर बना सकती है।

    आज की आधुनिक चिकित्सा ने लाखों परिवारों की जिंदगी में खुशियां लौटाई हैं। इसलिए IVF को लेकर फैली अफवाहों और मिथकों पर भरोसा करने के बजाय सही और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

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  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा किचन की इन प्राकृतिक चीजों से पाएं दमकती और बेदाग त्वचा

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा किचन की इन प्राकृतिक चीजों से पाएं दमकती और बेदाग त्वचा


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई स्वस्थ और चमकदार त्वचा चाहता है। बाजार में मिलने वाले महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स तुरंत निखार का दावा तो करते हैं लेकिन इनमें मौजूद कई तरह के रसायन लंबे समय में त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आपकी अपनी रसोई यानी किचन कई ऐसे प्राकृतिक खजानों से भरी हुई है जो बिना अधिक खर्च किए त्वचा को पोषण देने के साथ उसे मुलायम चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यदि इन घरेलू चीजों को सही तरीके और नियमितता के साथ इस्तेमाल किया जाए तो स्किन केयर रूटीन पूरी तरह प्राकृतिक और प्रभावी बन सकता है।

    सुबह चेहरे की सफाई से दिन की शुरुआत करें। इसके लिए कच्चे दूध या गुलाब जल का उपयोग किया जा सकता है। कच्चा दूध त्वचा से धूल और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है जबकि गुलाब जल त्वचा को ताजगी और ठंडक देता है। इसके बाद सप्ताह में दो से तीन बार बेसन और हल्दी का उबटन लगाना फायदेमंद माना जाता है। बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है जबकि हल्दी में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को संक्रमण से बचाने और रंगत निखारने में मदद करते हैं।

    शहद भी किचन में मौजूद सबसे बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर माना जाता है। यदि त्वचा रूखी रहती है तो चेहरे पर कुछ मिनट तक शुद्ध शहद लगाकर छोड़ दें और फिर सादे पानी से धो लें। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और चेहरा मुलायम महसूस होता है। वहीं दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर उसे चमकदार बनाने में मदद करता है। दही में थोड़ा सा शहद मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है जिसे सप्ताह में एक या दो बार लगाने से त्वचा को प्राकृतिक चमक मिलती है।

    खीरा और टमाटर भी स्किन केयर रूटीन का अहम हिस्सा बन सकते हैं। खीरे का रस त्वचा को ठंडक देने के साथ सूजन कम करने में मदद करता है जबकि टमाटर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी त्वचा की रंगत सुधारने में सहायक माने जाते हैं। धूप में अधिक समय बिताने वालों के लिए खीरे का रस चेहरे पर लगाना काफी लाभदायक हो सकता है।

    एलोवेरा जेल भी लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध होता है। ताजा एलोवेरा जेल त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ छोटे दाग धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकता है। रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल की हल्की परत लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और सुबह चेहरा अधिक ताजा दिखाई देता है। इसके अलावा नारियल तेल का सीमित मात्रा में उपयोग त्वचा को पोषण देने और रूखेपन को कम करने में सहायक हो सकता है।

    हालांकि केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भरपूर पानी पीना संतुलित भोजन करना पर्याप्त नींद लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करना भी जरूरी है। साथ ही किसी भी घरेलू सामग्री को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण जरूर करें ताकि एलर्जी या जलन की संभावना से बचा जा सके।

    प्राकृतिक स्किन केयर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम खर्चीला होने के साथ त्वचा को धीरे धीरे अंदर से स्वस्थ बनाता है। यदि नियमित रूप से सही खानपान और घरेलू देखभाल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो बिना महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों के भी त्वचा लंबे समय तक चमकदार स्वस्थ और आकर्षक बनी रह सकती है।

  • कॉमिक-कॉन के बाद इंटरनेट पर लीक हुआ 'रामायण' का ट्रेलर, भव्य विजुअल्स और यश के रावण लुक की चर्चा तेज

    कॉमिक-कॉन के बाद इंटरनेट पर लीक हुआ 'रामायण' का ट्रेलर, भव्य विजुअल्स और यश के रावण लुक की चर्चा तेज


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर स्टारर बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ अपनी आधिकारिक रिलीज से पहले ही चर्चा के केंद्र में आ गई है। फिल्म का ट्रेलर अभी तक मेकर्स की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका कथित लीक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो अमेरिका के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन 2026 में दिखाए गए ट्रेलर का हिस्सा है, जिसे किसी दर्शक ने रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर साझा कर दिया।

    दरअसल, फिल्म निर्माता नमित मल्होत्रा ने पहले घोषणा की थी कि 24 जुलाई को दुनियाभर में फिल्म का ट्रेलर जारी किया जाएगा। हालांकि अंतिम समय में इसकी रिलीज टाल दी गई, जिससे प्रशंसकों का इंतजार और बढ़ गया। इससे पहले दिल्ली में आयोजित एक विशेष लॉन्च इवेंट में चुनिंदा लोगों को ट्रेलर दिखाया गया था। उस दौरान सोशल मीडिया पर फिल्म के विजुअल्स और भव्य प्रस्तुति की जमकर तारीफ हुई थी। उसी कार्यक्रम के बाद ट्रेलर का एक छोटा हिस्सा ऑनलाइन सामने आया था, लेकिन अब कथित तौर पर लगभग पूरा ट्रेलर ही इंटरनेट पर वायरल हो गया है।

    वायरल वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा अभिनेता यश के रावण अवतार की हो रही है। ट्रेलर में उनका विशाल और प्रभावशाली लुक दिखाई देता है। एक युद्ध दृश्य में रावण को इंद्रदेव के ऐरावत हाथी पर शक्तिशाली वार करते हुए दिखाया गया है, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा है। इसके बाद भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर की एंट्री दिखाई देती है, जिनका शांत और दिव्य स्वरूप दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।

    ट्रेलर में माता सीता के किरदार में साई पल्लवी की भी झलक देखने को मिलती है। वहीं, स्वयंवर का दृश्य भी दिखाया गया है, जिसमें भगवान राम शिव धनुष उठाते नजर आते हैं। वीडियो के अंतिम हिस्से में शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह दिखाई देती हैं और लक्ष्मण द्वारा उनकी नाक काटे जाने वाला प्रसिद्ध प्रसंग भी शामिल है।

    हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो कम गुणवत्ता वाला बताया जा रहा है, इसलिए फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स और सिनेमैटिक अनुभव का पूरा अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसके बावजूद ट्रेलर के भव्य सेट, वीएफएक्स और किरदारों की प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कॉमिक-कॉन में मौजूद कई दर्शकों ने भी फिल्म के ट्रेलर की सराहना करते हुए इसे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े विजुअल अनुभवों में से एक बताया है।

    फिलहाल मेकर्स की ओर से ट्रेलर लीक होने पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो वास्तविक ट्रेलर का पूर्ण संस्करण है या उसका संपादित हिस्सा। ऐसे में दर्शकों को फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर का इंतजार है, जो बेहतर गुणवत्ता के साथ जल्द रिलीज किया जा सकता है।

    ‘रामायण’ लंबे समय से भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। बड़े सितारों, आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और विशाल पैमाने पर बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेलर के कथित लीक होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि आधिकारिक रिलीज पर फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा

    टीम इंडिया की फिर बादशाहत, जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ICC टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पर कब्जा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ सीरीज अपने नाम कर ली, बल्कि आईसीसी टी20 टीम रैंकिंग में भी एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टीम बनने का गौरव हासिल कर लिया। हरारे में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत ने मेजबान जिम्बाब्वे को 90 रन से करारी शिकस्त देकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए टी20 रैंकिंग का शीर्ष स्थान भी वापस हासिल कर लिया।

    आईसीसी की 25 जुलाई को जारी ताजा टीम रैंकिंग के अनुसार भारत और इंग्लैंड दोनों के 268 रेटिंग अंक हैं, लेकिन बेहतर दशमलव रेटिंग के आधार पर भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। इंग्लैंड अब दूसरे नंबर पर खिसक गया है। भारत ने करीब दो सप्ताह पहले इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद नंबर-1 की कुर्सी खो दी थी, लेकिन जिम्बाब्वे दौरे पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उसने फिर से शीर्ष पर वापसी कर ली।

    टी20 रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 260 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड 247 अंकों के साथ चौथे नंबर पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं। जिम्बाब्वे 202 अंकों के साथ 12वें स्थान पर बना हुआ है। भारत यदि सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला भी जीत लेता है तो उसकी नंबर-1 स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

    दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 44 गेंदों में 81 रन की तूफानी पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए। दूसरी ओर तिलक वर्मा ने केवल 20 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाकर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। उनकी विस्फोटक पारी में पांच चौके और तीन छक्के शामिल रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी 25 रन का उपयोगी योगदान दिया, जबकि युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने 20 रन बनाए। निर्धारित 20 ओवर में भारत ने पांच विकेट के नुकसान पर 219 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

    220 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पूरी टीम 17.5 ओवर में 129 रन पर सिमट गई। ब्रायन बेनेट ने 32 रन और तादिवानाशे मारुमानी ने 24 रन बनाए, जबकि रेयान बर्ल ने 20 रन की पारी खेली। हालांकि कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सका।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट झटके। यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। ईशान किशन को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

    टी20 प्रारूप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही टीम इंडिया अब वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में दुनिया की नंबर-1 टीम बन चुकी है। वहीं टेस्ट रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है और भारत चौथे स्थान पर मौजूद है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर सीरीज के अंतिम मुकाबले पर होगी, जहां भारत क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • सूर्य देव की पूजा के अचूक नियम और व्रत विधि जानिए कैसे मिलेगी सुख समृद्धि आरोग्य और सफलता का आशीर्वाद

    सूर्य देव की पूजा के अचूक नियम और व्रत विधि जानिए कैसे मिलेगी सुख समृद्धि आरोग्य और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। वे ऊर्जा प्रकाश जीवन और सकारात्मक शक्ति के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा और रविवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि यश और आरोग्य का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा पिता नेतृत्व क्षमता और मान सम्मान का कारक ग्रह माना गया है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है उन्हें सूर्य उपासना करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान से की गई पूजा व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत करती है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं को दूर करने में सहायक बनती है।

    सूर्य देव की पूजा के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ लाल या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के पात्र में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल रोली अक्षत तथा यदि संभव हो तो थोड़ा गुड़ या लाल चंदन डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते सूर्य को धीरे धीरे जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय सूर्य की किरणों को जलधारा के बीच से देखना शुभ माना जाता है। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र गायत्री मंत्र या ऊँ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। अंत में सूर्य देव से परिवार के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

    रविवार का व्रत भी सूर्य देव को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत की जाती है। श्रद्धालु दिनभर सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और क्रोध झूठ तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। कई लोग एक समय भोजन करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु फलाहार करके व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान नमक का सेवन न करने की भी परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। शाम के समय सूर्य देव का स्मरण कर व्रत का समापन किया जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन गेहूं गुड़ तांबा लाल वस्त्र लाल फूल और लाल चंदन का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और गौ सेवा करना भी सूर्य कृपा प्राप्त करने के श्रेष्ठ उपायों में गिना जाता है। मान्यता है कि दान और सेवा से पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य उपासना करने से आत्मबल नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता मजबूत होती है। सरकारी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है और समाज में मान सम्मान प्राप्त होता है। धार्मिक दृष्टि से यह पूजा व्यक्ति को अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था है और इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य के सामने कुछ समय बिताना लाभकारी माना जाता है। सुबह की हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में सहायता करती है। ताजी हवा में प्रार्थना और ध्यान करने से मानसिक तनाव कम हो सकता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। यही कारण है कि सूर्य उपासना को केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक

    सरकार-CJP वार्ता के बाद दिखी सौहार्द की तस्वीर, JP नड्डा बोले- 'हाथ तो मिलाइए'; गर्मजोशी से हुआ हैंडशेक


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी। समझौते के बाद दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर एक आत्मीय दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP नेताओं से हाथ मिलाकर बातचीत के सकारात्मक माहौल का संदेश दिया।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद जब दोनों पक्ष उठने लगे, तभी जेपी नड्डा ने मुस्कुराते हुए CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका से कहा, “हाथ तो मिलाइए…”। इस पर रांका भी मुस्कुरा दिए और आगे बढ़कर उन्होंने नड्डा से हाथ मिलाया। इसके बाद CJP के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने भी जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से हाथ मिलाया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    20 जून से चल रहा था आंदोलन
    CJP के नेतृत्व में 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन जारी था। आंदोलन में देशभर के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और कई विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए विवाद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद आंदोलन ने और तूल पकड़ लिया था। इसी दिन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर सरकार और CJP के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई थी। इसके बाद लगातार तीन दौर की बातचीत के जरिए दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचे।

    आंदोलन समाप्त करने का ऐलान
    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से तय समयसीमा में सहमत बिंदुओं को लागू करने के आश्वासन के बाद संगठन आंदोलन वापस ले रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 3 मई के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है। वहीं, प्रवक्ता आशुतोष रांका ने देशभर के छात्रों और समर्थकों से शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने की अपील की। उनका कहना था कि संगठन की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    चार सप्ताह बाद होगी समीक्षा बैठक
    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार आंदोलन से जुड़े छात्रों को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध कराएगी और भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी या आयोजक के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पांच सूत्रीय मांगों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच चार सप्ताह बाद फिर बैठक आयोजित की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एसआईटी में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन नामों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

    इससे पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब उनकी जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

    पहले भी हुई थी कार्रवाई
    राम मंदिर में चढ़ावे के आभूषणों के कथित गबन की शिकायत के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी से जांच कराई थी। जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी एंट्री
    इस बीच मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल दोबारा मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

    निर्माण कार्य प्रभावित होने के बाद लिया गया फैसला
    ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव के बाद पुराने पहचान पत्रों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं। एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं के इंजीनियरों और कर्मचारियों के काम पर भी इसका असर पड़ा। मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई परियोजनाओं का कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल पुराने पासों को अस्थायी रूप से फिर से वैध करने का निर्णय लिया है।

  • अगस्त के पहले सप्ताह में चाल बदलेंगे मंगल, 4 राशियों की खुलेगी किस्‍मत, जाने क्‍या होगा लाभ?

    अगस्त के पहले सप्ताह में चाल बदलेंगे मंगल, 4 राशियों की खुलेगी किस्‍मत, जाने क्‍या होगा लाभ?


    नई दिल्ली। अगस्त के पहले सप्ताह में ग्रहों की चाल में होने वाला बड़ा बदलाव कई राशियों के जीवन पर असर डालने वाला है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल 2 अगस्त 2026 की रात 10:59 बजे वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल 18 सितंबर 2026 तक मिथुन राशि में रहेंगे। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर आर्थिक और करियर के लिहाज से लाभकारी रहेगा। आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के जीवन में यह गोचर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। पढ़ाई या काम के सिलसिले में यात्रा के योग बन सकते हैं। मित्रों और करीबी लोगों का सहयोग मिलने से कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे होंगे।

    मकर राशि
    मकर राशि के लोगों को परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतने और अनावश्यक विवादों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए यह गोचर आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर रहने के साथ तरक्की के योग भी बनेंगे।

  • कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?

    कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?


    नई दिल्ली। आज उत्तर कोरिया का नाम आते ही दुनिया से कटे हुए एक ऐसे देश की तस्वीर सामने आती है, जहां कड़े सरकारी नियंत्रण, परमाणु हथियार, सीमित स्वतंत्रता और बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग-थलग व्यवस्था है। लेकिन करीब आठ-नौ दशक पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। आज का उत्तर कोरिया कभी पूरे कोरियाई प्रायद्वीप का सबसे विकसित, औद्योगिक और आधुनिक क्षेत्र माना जाता था।

    इतिहास से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि 1948 में उत्तर कोरिया के गठन और किम इल सुंग के सत्ता में आने से पहले यह क्षेत्र एकीकृत कोरिया का हिस्सा था। उस समय राजधानी प्योंगयांग शिक्षा, संस्कृति और ईसाई धर्म का प्रमुख केंद्र थी। बड़ी संख्या में चर्च, मिशनरी स्कूल और आधुनिक शिक्षण संस्थान मौजूद थे। इसी वजह से प्योंगयांग को कभी “पूर्व का यरुशलम” भी कहा जाता था। यहां लोगों को धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी।

    औद्योगिक विकास में था सबसे आगे
    1910 से 1945 के बीच जापान के औपनिवेशिक शासन के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्से को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यहां खनिज संपदा, कोयला और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण बड़े स्टील प्लांट, जलविद्युत परियोजनाएं, रासायनिक कारखाने और रेलवे नेटवर्क विकसित किए गए। उस समय दक्षिणी क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर था, जबकि उत्तर तकनीकी और औद्योगिक रूप से अधिक मजबूत माना जाता था।

    विभाजन के बाद बदल गई तस्वीर
    द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद 1945 में कोरिया को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया। उत्तरी भाग सोवियत संघ के प्रभाव में आया और 1948 में किम इल सुंग के नेतृत्व में उत्तर कोरिया की स्थापना हुई। इसके बाद 1950 से 1953 तक चले कोरियाई युद्ध ने देश के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया। भारी बमबारी में शहर, उद्योग और बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।

    युद्ध के बाद सोवियत संघ और चीन की आर्थिक सहायता से उत्तर कोरिया ने तेज़ी से पुनर्निर्माण किया और 1970 के दशक तक उसकी अर्थव्यवस्था कई मामलों में दक्षिण कोरिया के बराबर या उससे बेहतर मानी जाती थी।

    ‘जुचे’ नीति और अलगाव की शुरुआत
    बाद के वर्षों में किम इल सुंग ने ‘जुचे’ (आत्मनिर्भरता) की नीति अपनाई, जिसके तहत देश ने बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली। 1990 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद आर्थिक सहायता और सस्ते तेल की आपूर्ति बंद हो गई, जिससे उत्तर कोरिया गंभीर आर्थिक संकट और अकाल की चपेट में आ गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उस दौर में भुखमरी और कुपोषण से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

    दक्षिण और उत्तर कोरिया की अलग राह
    जहां दक्षिण कोरिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और खुली अर्थव्यवस्था को अपनाते हुए तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई, वहीं उत्तर कोरिया ने सीमित संसाधनों का बड़ा हिस्सा रक्षा और परमाणु कार्यक्रमों पर केंद्रित किया। समय के साथ दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास में बड़ा अंतर पैदा हो गया।

    सख्त नियंत्रण वाली व्यवस्था
    उत्तर कोरिया में नागरिकों के जीवन पर सरकारी नियंत्रण बेहद कड़ा माना जाता है। वहां सामाजिक स्थिति का निर्धारण कथित ‘सोंगबुन’ व्यवस्था के आधार पर किया जाता है, जिसमें परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि और शासन के प्रति निष्ठा को महत्व दिया जाता है। शिक्षा व्यवस्था में भी शासन और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है।

    देश के भीतर आवागमन, सूचना तक पहुंच और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर भी व्यापक नियंत्रण है। बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क और बंद व्यवस्था के कारण उत्तर कोरिया आज भी दुनिया के सबसे रहस्यमयी देशों में गिना जाता है।

    कभी औद्योगिक प्रगति, आधुनिक शिक्षा और आर्थिक विकास का केंद्र रहा यह क्षेत्र आज अपनी राजनीतिक व्यवस्था, सीमित खुलापन और वैश्विक अलगाव के कारण पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है।

  • रोज सूर्यदेव को अर्घ्य देने से खुलते हैं सफलता के द्वार जानिए जल चढ़ाने के अद्भुत धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ

    रोज सूर्यदेव को अर्घ्य देने से खुलते हैं सफलता के द्वार जानिए जल चढ़ाने के अद्भुत धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि वे ऐसे देव हैं जिनका दर्शन प्रतिदिन किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करना केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आत्मविश्वास और अनुशासन लाने वाली एक महत्वपूर्ण साधना भी है। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्यदेव को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और सफलता के नए द्वार खुलते हैं। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह आत्मा पिता सम्मान नेतृत्व क्षमता और सरकारी क्षेत्र का कारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो उसे आत्मविश्वास की कमी मान सम्मान में बाधा और करियर में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नियमित रूप से सूर्यदेव को जल अर्पित करने और आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप करने से सूर्य की शुभता बढ़ने की मान्यता है। इससे आत्मबल मजबूत होता है और निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार आता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को जल अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह साधना मन को शांत करने के साथ सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक मानी जाती है। कई लोग इसे मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी मानते हैं। नियमित पूजा से व्यक्ति में अनुशासन आता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक भाव के साथ होती है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से भी सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए लाभदायक मानी जाती है। सूर्योदय के समय मिलने वाली सूर्य की किरणें शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद करती हैं जो हड्डियों मांसपेशियों और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। सुबह जल्दी उठकर खुले वातावरण में सूर्य की ओर जल अर्पित करने से ताजी हवा मिलती है जिससे मानसिक तनाव कम करने और शरीर को सक्रिय रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    मान्यता है कि सूर्य को जल अर्पित करते समय तांबे के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है। जल धीरे धीरे अर्पित करते हुए सूर्य की किरणों को जलधारा से देखने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके साथ यदि श्रद्धा और एकाग्रता से सूर्य मंत्रों का स्मरण किया जाए तो पूजा का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं का आधार आस्था है और इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जिन लोगों को सरकारी कार्यों में बाधा आती है नौकरी में सम्मान नहीं मिल रहा हो या आत्मविश्वास की कमी महसूस होती हो वे नियमित रूप से सूर्यदेव की उपासना कर सकते हैं। इसके साथ सत्यनिष्ठा अनुशासित जीवन और सकारात्मक सोच अपनाने की भी सलाह दी जाती है क्योंकि केवल पूजा ही नहीं बल्कि कर्म भी सफलता का आधार माने गए हैं।

    सूर्य उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि स्वस्थ दिनचर्या का भी प्रतीक है। सुबह जल्दी उठना स्वच्छ वातावरण में समय बिताना ध्यान और प्रार्थना करना तथा प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों की दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।