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  • Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त

    Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त


    मुजफ्फरपुर।
    बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर जिले (Muzaffarpur district) में पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सिगरेट (Fake cigarettes) बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री (Illegal Factory) का भंडाफोड़ किया है. तुर्की थाना क्षेत्र के लक्की नंदलालपुर गांव में की गई इस कार्रवाई में लाखों रुपये की तैयार नकली सिगरेट, भारी मात्रा में कच्चा माल और करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें जब्त की गई हैं।

    यह कार्रवाई पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी और तुर्की थाना प्रभारी पंकज कुमार के नेतृत्व में की गई. पुलिस के अनुसार, आईटीसी की इंटेलिजेंस टीम पिछले एक महीने से इस फैक्ट्री की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. पुख्ता जानकारी मिलने के बाद कंपनी के अधिकारियों ने तुर्की थाना पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस और कंपनी की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की।

    छापेमारी के दौरान फैक्ट्री और उससे जुड़े दो गोदामों से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की गोल्ड फ्लैक ब्रांड के नाम पर तैयार की गई नकली सिगरेट बरामद हुई. इसके अलावा अन्य कंपनियों के नाम पर बनाई गई 10 से 12 लाख रुपये मूल्य की नकली सिगरेट भी जब्त की गई।

    पुलिस ने फैक्ट्री में लगी करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की मेड इन वियतनाम सिगरेट निर्माण मशीनें भी जब्त की हैं. इसके अलावा एक टाटा मैजिक, एक मालवाहक ऑटो, करीब सात मोटरसाइकिल और सिगरेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए. पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर मौके से फरार हो गए. पुलिस ने पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर जब्त सामान की सूची तैयार की और आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी ने बताया कि फैक्ट्री में एक नामी ब्रांड के नाम और उसके कॉपीराइट का अवैध इस्तेमाल कर नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।


    पुलिस की भनक लगते ही फैक्ट्री से फरार हुए मजदूर

    छापेमारी के बाद संबंधित कंपनी की लीगल ऑथराइज्ड टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया. प्रारंभिक जांच के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट कंपनी मुख्यालय को भेज दी है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन कर नकली उत्पाद बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत

    अफ्रीकी देश कांगो में इबोला का कहर…. अब तक 1,031 लोगों की हो चुकी है मौत


    घाना।
    अफ्रीकी देश कांगो (Congo) में इबोला (Ebola) के प्रकोप से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यह इतिहास का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप माना जा रहा है।

    बुधवार को घाना में एक स्वास्थ्य सम्मेलन में बोलते हुए, ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया (Dr. Jean Casey) ने बताया कि अब तक 1,031 मौतों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, ‘ये लोग मर रहे हैं. वे इसलिए मर रहे हैं क्योंकि हमारे पास वैक्सीन नहीं हैं, दवाएं नहीं हैं और फंड नहीं है।

    कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, सोमवार तक इस प्रकोप में 2,473 मामले दर्ज किए गए थे. मंत्रालय ने बताया कि कम से कम 737 मरीज आइसोलेशन में थे या अस्पताल में भर्ती थे।

    इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इबोला प्रकोप का वास्तविक दायरा आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में दो से चार गुना बड़ा हो सकता है. WHO के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहे हैं.

    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 80% नए मामले संक्रमण की ज्ञात चेन के बाहर सामने आए हैं. यह इस बात का संकेत है कि प्रकोप स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा ट्रैक किए जा सकने की गति से भी तेजी से फैल रहा है.

    बता दें, इबोला एक बहुत खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है. यह संक्रमण दुर्लभ जरूर है, लेकिन काफी गंभीर और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है.

    यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना या वीर्य के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. इसका कोई पक्का इलाज अभी तक नहीं है।

  • नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र

    नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र


    मुंबई।
    वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) ने नई दिल्ली (New Delhi) के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन (Student movement) के पक्ष में गुरुवार को ‘महाराष्ट्र बंद’ का आह्वान किया है। वीबीए अध्यक्ष और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर (Dr. Babasaheb Ambedkar) के पोते प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि वामपंथी राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों ने बंद का समर्थन किया है।


    क्या खुला रहेगा, क्या बंद

    बंद के समर्थन में कुछ क्षेत्रों ऐच्छिक रूप से कुछ दुकानें और बाजार बंद रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। खबर है कि इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट सामान्य रूप से चल सकता है। हालांकि, अगर प्रदर्शन होता है तो यातायात व्यवस्था, रोड ब्लॉक जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    क्यों बुलाया बंद

    उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रादेशिक सेना तक को तैनात कर दिया है। वामपंथी दलों और शैक्षणिक संस्थानों ने हमारे बंद का समर्थन किया है, वहीं राज्य के कोचिंग संस्थान भी हमारे संपर्क में हैं।’


    राहुल गांधी से कर दी डिमांड

    उन्होंने कहा, ‘हम नई पीढ़ी खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। छात्रों के आंदोलन पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, इसलिए 23 जुलाई का महाराष्ट्र बंद होकर रहेगा। मेरी यह भी राय है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।’

    उन्होंने यह भी कहा कि यह छात्र आंदोलन हालांकि उनका नहीं है, फिर भी वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के छात्र संगठन से भी इस इस बंद में हिस्सा लेने की अपील की।


    चर्चाएं जारी

    वीबीए प्रमुख ने कहा, ‘इस बंद को सफल बनाने के लिए हम मजदूर यूनियनों, बेस्ट यूनियनों, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की यूनियनों और अन्य श्रमिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर अमानवीय अत्याचार हुए हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। कई संगठन इस बंद में शामिल होने को उत्सुक हैं।’


    रिजर्व पुलिस फोर्स बुलाने पर आपत्ति

    उन्होंने कहा ‘दिल्ली में छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए कश्मीर से रिजर्व पुलिस बल बुलाये गए हैं, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार छात्रों पर आंसू गैस या बल प्रयोग न करे। हमने भाजपा को छोड़कर सभी दलों से बंद में शामिल होने की अपील की है, ताकि आंदोलनकारी छात्रों के प्रति एकजुट होकर हम समर्थन दिखा सकें।’


    दादर में पुलिस कार्रवाई

    इससे पहले मुंबई पुलिस ने आज दादर वेस्ट में समुद्र तट पर स्थित ऐतिहासिक चैत्यभूमि पर वामपंथी दलों की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर कर दिया। यह स्थान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का समाधि स्थल होने के साथ-साथ दलित समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल भी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार एहतियाती तौर पर चैत्यभूमि से हिरासत में लिए गये भाकपा के कॉमरेड मिलिंद रानाडे और अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया है। वहीं माकपा के कॉमरेड शैलेंद्र कांबले और शेतकारी कामगार पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के राजू कोरडे के आवासों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

    उन्होंने बताया कि एहतियाती कार्रवाई के तहत भाकपा से जुड़े अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) के युवा नेता कॉमरेड आमिर काजी और पीडब्ल्यूपी के साम्य कोरडे को चेतावनी दी गई है कि यदि वे अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

    इस बीच मुंबई पुलिस ने चैत्यभूमि को भारी बैरिकेड्स और नाकेबंदी लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पहले से ही एक स्थायी पुलिस चौकी मौजूद है। प्रदर्शनकारी जहां तक संभव हो छोटे समूहों में जुटने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तंग गलियों से होते हुए चैत्यभूमि पहुंचे, तो कुछ ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।

    कांग्रेस भी साथ
    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कहा कि कांग्रेस ने गुरुवार को वीबीए के बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का समर्थन किया, जो राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में है।

  • आज का मौसम अपडेट बारिश और बादलों का रहेगा असर जानिए किन इलाकों में भारी वर्षा की संभावना

    आज का मौसम अपडेट बारिश और बादलों का रहेगा असर जानिए किन इलाकों में भारी वर्षा की संभावना


    नई दिल्ली । आज देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। मानसून की सक्रियता के कारण कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं जबकि कुछ स्थानों पर तेज वर्षा भी देखने को मिल सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बादलों की आवाजाही पूरे दिन बनी रह सकती है जिससे कई इलाकों में तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बारिश के बाद उमस बढ़ सकती है जिससे लोगों को असहजता का सामना भी करना पड़ सकता है।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में बादल छाए रहने और रुक रुककर बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चल सकती हैं जिससे मौसम सुहावना बनेगा। वहीं निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बनी रह सकती है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    मध्य भारत के राज्यों में भी मानसून का असर जारी रहने के संकेत हैं। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। लगातार हो रही वर्षा के कारण नदी नाले और जलाशयों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इन इलाकों में कई स्थानों पर गरज चमक के साथ वर्षा हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कों पर फिसलन की स्थिति बनने की आशंका को देखते हुए यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहने का अनुमान है जबकि तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चल सकती हैं। समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है। मौसम में लगातार बदलाव के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लोगों को पर्याप्त पानी पीने और बदलते मौसम के अनुसार खानपान का ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना हो वहां अनावश्यक यात्रा से बचना और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना ही सुरक्षित रहेगा।

    कुल मिलाकर आज का दिन देश के कई हिस्सों में बारिश और बादलों के बीच बीतने की संभावना है। कहीं मौसम सुहावना रहेगा तो कहीं तेज बारिश और उमस लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सतर्कता और सावधानी के साथ मौसम का आनंद लेना ही सबसे बेहतर विकल्प होगा।

  • त्योहारी सीजन में महंगी हुई शक्कर…. एक माह में 15% बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम

    त्योहारी सीजन में महंगी हुई शक्कर…. एक माह में 15% बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive Season) से ठीक पहले देश में चीनी की कीमतों (Sugar Prices) में आई तेज बढ़ोतरी ने केंद्र सरकार (Central government) के साथ-साथ आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। बीते एक महीने में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें 15 फीसदी से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर (Record level) पर पहुंच गई हैं।

    उत्तर प्रदेश में एक्स-मिल कीमतें 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं, जबकि दिल्ली के थोक बाजार (Wholesale market) में चीनी 4,800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। कीमतों में इस अप्रत्याशित उछाल के बाद सरकार ने चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ आपात बैठक की है। सट्टेबाजी और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए कारोबारियों और चीनी मिलों पर स्टॉक सीमा लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल चीनी आयात करने की कोई योजना नहीं है।

    बढ़ती कीमतों को लेकर चीनी मिलें और व्यापारी आमने-सामने आ गए हैं। चीनी मिल मालिकों का कहना है कि वे किसी भी तरह की जमाखोरी नहीं कर रहे हैं। उनका दावा है कि कीमतों में तेजी आने से पहले ही मिलें जुलाई महीने का अपना 80 फीसदी से अधिक बिक्री कोटा बाजार में जारी कर चुकी थीं।

    मिलों का आरोप है कि जमाखोरी व्यापारियों के स्तर पर हो रही है। उनका कहना है कि इस पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सरकार को भौतिक सत्यापन के साथ सख्त स्टॉक सीमा लागू करनी चाहिए, ताकि कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर कार्रवाई हो सके।

    व्यापारियों का कहना है कि एक्स-फैक्ट्री कीमतें खुद चीनी मिलें बढ़ा रही हैं। उनका आरोप है कि मिलों ने शुरुआत में उत्पादन के गलत अनुमान पेश कर सरकार से अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी हासिल कर ली, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति अचानक कम हो गई और कीमतों में तेज उछाल आ गया।

  • Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

    Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने राम मंदिर (Ram Temple) की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों की पूरी निगरानी अब अयोध्या के संत समाज को सौंप दी है। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राम मंदिर (Ram Temple ) की सभी धार्मिक गतिविधियां वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित होंगी और इस संबंध में समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।

    समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि (Swami Govind Dev Giri) होंगे, जबकि इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉक्टर रामानंद दास (रामकथा कुंज), अधिकारी राजकुमार दास (रामबल्लबा कुंज) और महंत मिथिलेशनंदिनी शरणको शामिल किया गया है। इनके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ और राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समिति में रहेंगे। नौ सदस्यीय समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।

    स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है और यहां सेवा-पूजा रामानंदी वैदिक परंपरा के अनुसार ही होती रहे, यह सुनिश्चित करना समिति का सबसे बड़ा दायित्व होगा। अब मंदिर अयोध्या के संतों की निगरानी में चलेगा और वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित होगा। ट्रस्ट के इस फैसले को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव माना जा रहा है।


    समिति को मिले पांच बड़े अधिकार

    – मंदिर में नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी।
    -रामनवमी, विवाह पंचमी, सीता नवमी जैसे सभी वार्षिक पर्वों की तिथि का अंतिम निर्धारण और आयोजन।
    – विशेष वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे धार्मिक आयोजनों की योजना और संचालन।
    – अर्चकों (पुजारियों) के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी तथा स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
    – अयोध्या के मठों, मंदिरों, संत समाज और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित करना।


    दिनेंद्र दास की भूमिका हुई और मजबूत

    धार्मिक समिति में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया जाना भी अहम माना जा रहा है। पिछले कई महीनों से वह लगातार राम मंदिर की पूजा व्यवस्था को पूरी तरह शास्त्रोक्त और परंपरागत बनाए जाने की मांग उठा रहे थे। हाल के दिनों में वह लगभग प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रहे थे और धार्मिक परंपराओं के पालन पर जोर देते रहे। ऐसे में उन्हें समिति में प्रमुख भूमिका मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ट्रस्ट ने पूजा व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनके सुझावों और संत समाज की भूमिका को औपचारिक मान्यता दे दी है।

    बनेगी अर्चकों की स्थायी पाठशाला, तैयार होंगे प्रशिक्षित पुजारी
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के लिए प्रशिक्षित अर्चकों (पुजारियों) की स्थायी व्यवस्था करने का फैसला किया है। धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें करीब 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई। अब ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करेगा, जहां पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


    राम मंदिर की पूजन व्यवस्था : पहले क्या था, अब क्या बदलेगा

    – पूजा व्यवस्था की निगरानी ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर होती थी। अब धार्मिक समिति सीधे पूजा-पद्धति और धार्मिक कार्यों की निगरानी करेगी।
    – पूजा शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार होती थी, लेकिन निगरानी के लिए अलग धार्मिक समिति सक्रिय नहीं थी। अब वैदिक रामानंदी परंपरा के पालन की जिम्मेदारी नौ सदस्यीय धार्मिक समिति को दी गई है।
    – पर्व-उत्सवों की तिथि और आयोजन ट्रस्ट तय करता था। अब रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी जैसे सभी पर्वों की तिथि और आयोजन धार्मिक समिति तय करेगी।
    – विशेष धार्मिक अनुष्ठानों पर अलग-अलग निर्णय लिए जाते थे। अब वेद पारायण, रामार्चा, यज्ञ और अन्य नित्य-अनुष्ठानों की रूपरेखा समिति तय करेगी।
    – पुजारियों की कार्यप्रणाली पर सामान्य निगरानी थी। अब अर्चकों के ड्रेस कोड, पूजा-विधि, आचरण और शास्त्रीय नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होगी।
    – अयोध्या के संतों की भूमिका परामर्श तक सीमित मानी जाती थी। अब अयोध्या के पांच संत समिति में बहुमत के साथ धर्म व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।
    – धार्मिक निर्णय ट्रस्ट स्तर पर लिए जाते थे। अब पूजा-पद्धति और धार्मिक विषयों पर समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।


    चोरी में किसी ट्रस्टी का हाथ नहीं, बैंक कर्मी थे जिम्मेदार : दिनेंद्र दास

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े के महंत एवं ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी ट्रस्टी की संलिप्तता नहीं थी, बल्कि बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है।

    मणिराम दास छावनी में मंगलवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि चोरी की घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं। अब मंदिर में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चोरी की घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

  • ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी

    ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान को अपना तेल निर्यात करने से रोका गया, तो क्षेत्र में कोई भी देश आसानी से तेल नहीं बेच पाएगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में हालात अब युद्ध से पहले जैसे नहीं होंगे।

    ‘या सब बेचेंगे, या कोई नहीं’
    मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मौजूदा हालात का संदेश बिल्कुल साफ है—”या तो सभी तेल बेचेंगे या फिर कोई नहीं।” उन्होंने कहा कि यदि ईरान की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो क्षेत्र के अन्य देशों की तेल आपूर्ति भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा खतरे में होगी तो किसी अन्य देश का महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबाफ ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बिना ही संभव है और यह समुद्री मार्ग अब पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा।

    ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।

    ट्रंप ने लिखा कि यदि ईरान समुद्री मार्ग में जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे हमलों के दायरे में तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकाने भी आ सकते हैं।

    तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हॉर्मुज स्ट्रेट
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शुरुआती युद्धविराम समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर जारी है। अमेरिका कई बार ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।

    दुनिया की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर
    हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।

  • आज का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों के लिए जानिए क्या है रणनीति

    आज का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों के लिए जानिए क्या है रणनीति


    नई दिल्ली । आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर सबसे पहले एशियाई बाजारों की चाल अमेरिकी बाजार के रुख विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली के आंकड़ों के साथ कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी संकेत निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है। दूसरी ओर यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ता है तो घरेलू बाजार में भी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव बन सकता है। ऐसे समय में निवेशकों की नजर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा एफएमसीजी और मेटल सेक्टर के प्रमुख शेयरों पर बनी रहेगी।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं बिकवाली बढ़ने की स्थिति में प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही भारतीय रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार चढ़ाव भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेगा।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वाले कारोबारियों को स्टॉप लॉस का पालन करते हुए जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है।

    आज के कारोबारी सत्र में बैंकिंग वित्तीय सेवाएं आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। यदि इन क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख शेयरों में खरीदारी बनी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और कॉर्पोरेट घोषणाओं के आधार पर दिनभर बाजार की दिशा बदल सकती है।

    कुल मिलाकर आज का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए अवसर और सतर्कता दोनों लेकर आ सकता है। सही जानकारी धैर्य और संतुलित निवेश रणनीति अपनाकर बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अफवाहों के बजाय प्रमाणिक जानकारी और मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन को आधार बनाकर ही निवेश संबंधी निर्णय लें।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते की शर्तों पर सहमति बन चुकी है और दस्तावेज भी तैयार हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीनों के भीतर दोनों देशों के बीच इस अहम व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

    आखिर देरी क्यों हो रही है?
    मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अंतिम रूप ले चुकी हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 (Section 301) ट्रेड जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

    अधिकारी के मुताबिक, भारत सहित करीब 60 देशों से जुड़े मामलों की जांच इस प्रावधान के तहत चल रही है, जिसके नतीजे अगले दो से तीन सप्ताह में आने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

    क्या है सेक्शन 301?
    अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के तहत सेक्शन 301 अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके। यदि जांच में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव या अनुचित व्यापारिक व्यवहार पाया जाता है तो अमेरिका उस देश पर व्यापारिक प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) या अन्य कार्रवाई कर सकता है।

    हाल के दिनों में अमेरिका ने इसी प्रावधान के तहत ब्राजील और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापारिक वार्ता में भी इस प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

    टैरिफ भी बना बड़ी चुनौती
    भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता के दौरान टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख बाधाओं में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे चुका है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की है। प्रस्ताव के अनुसार पहले दो वर्षों तक टैरिफ में राहत, उसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सेक्शन 301 और टैरिफ नीति के जरिए अपनी शर्तों के अनुरूप समझौता करना चाहता है। वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल ऐसे व्यापारिक समझौतों को स्वीकार करेगा, जो उसके राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप हों।

  • गुरुवार पूजा के विशेष नियम इन बातों का पालन करने से मिलेगा धन समृद्धि और सुख का आशीर्वाद

    गुरुवार पूजा के विशेष नियम इन बातों का पालन करने से मिलेगा धन समृद्धि और सुख का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से पूजा करने तथा निर्धारित नियमों का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि ज्ञान और सौभाग्य का आगमन होता है। ज्योतिष शास्त्र में भी बृहस्पति ग्रह को ज्ञान धन संतान विवाह और सम्मान का कारक माना गया है। इसलिए गुरुवार के दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यदि इस दिन पूजा के नियमों का पालन किया जाए तो भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कई परेशानियां दूर होने लगती हैं।

    गुरुवार की शुरुआत प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ और विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और पीले फूल हल्दी चंदन अक्षत तथा पीले रंग के फल अर्पित करें। बेसन के लड्डू चने की दाल या केले का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा अथवा ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। श्रद्धापूर्वक जल अर्पित कर दीपक जलाने और परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। यदि संभव हो तो इस दिन पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल हल्दी पीले वस्त्र या मिठाई का दान भी करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी शुभ फल देने वाला माना गया है।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बिना आवश्यकता बाल कटवाना नाखून काटना और अनावश्यक विवाद करना शुभ नहीं माना जाता। क्रोध करना कटु वचन बोलना या किसी का अपमान करना भी इस दिन वर्जित माना गया है। परिवार में प्रेम और सम्मान का वातावरण बनाए रखना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। साथ ही फिजूलखर्ची और नकारात्मक विचारों से भी दूरी बनाकर रखना लाभकारी माना गया है।

    जो लोग गुरुवार का व्रत रखते हैं उन्हें दिनभर सात्विक भोजन करना चाहिए। कई श्रद्धालु केवल एक समय भोजन करते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करके व्रत का पालन करते हैं। व्रत के दौरान मन और वाणी की पवित्रता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना गया है जितना पूजा करना। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई आराधना को ही सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुरुवार के नियमों का नियमित पालन करने से करियर में सफलता शिक्षा में उन्नति विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने की मान्यता है। भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा से परिवार में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए इस दिन केवल पूजा करना ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण सेवा भाव और सकारात्मक सोच को भी जीवन का हिस्सा बनाना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।