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  • बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्‍यमंत्री ? जाने किन कारणों से लेना पड़ा फैसला

    बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्‍यमंत्री ? जाने किन कारणों से लेना पड़ा फैसला

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी और टीएमसी के मजबूत रणनीतिकार माने जाने वाले शुभेंदु अब बीजेपी का सबसे बड़ा बंगाली चेहरा बनकर उभरे हैं। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 293 में से 207 सीटों पर जीत मिली है, जबकि एक सीट पर मतदान 21 मई को होना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की जमीनी पकड़, टीएमसी की अंदरूनी रणनीति की समझ और हिंदुत्व के मुद्दों पर उनकी आक्रामक छवि ने उन्हें इस पद तक पहुंचाया है।

    ममता बनर्जी को उनके गढ़ में दी चुनौती

    शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में खुद को उस नेता के रूप में स्थापित किया, जो सीधे ममता बनर्जी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने नंदीग्राम सीट पर 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया था। बाद में ममता को भवानीपुर सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को उसके मजबूत गढ़ में हराना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है और इसी ने शुभेंदु को बीजेपी के लिए सबसे मजबूत विकल्प बना दिया।

    बीजेपी के एजेंडे के लिए फिट चेहरा

    विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी को बंगाल में ऐसा नेता चाहिए था, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की तरह आक्रामक और संगठनात्मक रूप से मजबूत हो। पार्टी पहले ही यह संकेत दे चुकी थी कि बंगाल का मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति होगा, जिसका राज्य से गहरा जुड़ाव हो। बीजेपी ने चुनावी घोषणापत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने और बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी पार्टी की रणनीति के अनुरूप सबसे उपयुक्त चेहरे के तौर पर सामने आए।

    प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी बना आधार

    शुभेंदु अधिकारी को सरकार चलाने का अनुभव भी है। टीएमसी सरकार में वह मंत्री रह चुके हैं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझते हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि नई सरकार बनने के बाद वे ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल को लेकर श्वेतपत्र जारी कर सकते हैं और विभिन्न मामलों की जांच के लिए आयोग भी गठित किया जा सकता है।

    हिंदुत्व की छवि से RSS का समर्थन

    राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की हिंदुत्व समर्थक छवि भी उनके पक्ष में गई। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ उन्होंने खुलकर आवाज उठाई थी। नंदीग्राम क्षेत्र में उन्हें हिंदुत्व के मजबूत चेहरे के तौर पर पेश किया गया। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भीतर भी उन्हें लेकर सकारात्मक रुख बताया जा रहा है।

    छात्र राजनीति से बंगाल की सत्ता तक का सफर

    शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और बंगाल की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाते थे। शुभेंदु ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस की छात्र इकाई से की थी। बाद में, जब बंगाल में वामपंथ का दबदबा था, तब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर टीएमसी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। पूर्व मेदिनीपुर में उन्होंने वाम दलों को कड़ी चुनौती दी। वर्ष 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया और इसके बाद से वे पार्टी के सबसे प्रभावशाली बंगाली नेताओं में शामिल हो गए।

  • भारत-पाक रिश्ते सुधारने की दिशा में पहल शुरू, 3 महीनों में हुई दो गुप्त बैठकें, NSA डोभाल सक्रिय

    भारत-पाक रिश्ते सुधारने की दिशा में पहल शुरू, 3 महीनों में हुई दो गुप्त बैठकें, NSA डोभाल सक्रिय


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा होने के बीच भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दोनों देशों के बीच भले ही आधिकारिक स्तर पर बातचीत बंद हो, लेकिन बैक-चैनल संवाद को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें जारी हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले तीन महीनों में दोनों पक्षों के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों और पूर्व राजनयिकों के बीच कम से कम दो गुप्त बैठकें हुई हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, ये मुलाकातें कतर और एशिया के एक अन्य देश की राजधानी में आयोजित की गईं। हालांकि इन बैठकों को औपचारिक वार्ता का दर्जा नहीं दिया गया है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिशें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि भारत में भी इस बात पर सहमति बन रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ संपर्क का एक गोपनीय माध्यम खुला रहना चाहिए।

    सूत्रों के मुताबिक, इस पहल की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को भी दी गई है। वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी ऐसे बैक-चैनल संवाद में रुचि दिखाई गई है।

    बताया जा रहा है कि इस पूरी कवायद का मकसद भविष्य में किसी आतंकी हमले या बड़े तनाव की स्थिति में हालात को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकना है। फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद का एकमात्र आधिकारिक माध्यम डीजीएमओ स्तर की साप्ताहिक हॉटलाइन बातचीत है, जो हर मंगलवार को होती है।

    भारत का मानना है कि बैक-चैनल बातचीत उसकी उस नीति के खिलाफ नहीं है, जिसमें कहा गया है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते। इसे एक ऐसे संपर्क तंत्र के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकट की स्थिति में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद संभव हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत के लिए यह संवाद तंत्र जरूरी माना जा रहा है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है और उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी हासिल बताया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी आतंकी घटना की स्थिति में भारत के लिए वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना आसान नहीं होगा।

    भारत और पाकिस्तान के बीच बैक-चैनल वार्ता का इतिहास पहले भी रहा है। वर्ष 2015 से 2018 के दौरान NSA अजीत डोभाल ने बैंकॉक में अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। हाल ही में 30 अप्रैल 2025 को लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को पाकिस्तान का नया NSA नियुक्त किया गया है। वे पाकिस्तान के पहले ऐसे अधिकारी हैं जो ISI प्रमुख और NSA दोनों जिम्मेदारियां एक साथ संभाल रहे हैं। इससे पाकिस्तान की सैन्य और नागरिक सत्ता पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है।

  • एमपी में आज 13 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, दो सिस्टम एक्टिव, रविवार से फिर बढ़ेगी गर्मी

    एमपी में आज 13 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, दो सिस्टम एक्टिव, रविवार से फिर बढ़ेगी गर्मी

    भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। प्रदेश के बीच से दो ट्रफ लाइन गुजर रही हैं, जबकि ऊपरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय बना हुआ है। इसी के असर से कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। शुक्रवार को 20 से अधिक जिलों में मौसम बदला रहा, वहीं शनिवार के लिए 13 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

    शुक्रवार को भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग रंग दिखाई दिए। कहीं तेज गर्मी रही तो कहीं आंधी और हल्की बारिश दर्ज की गई। सिवनी, छिंदवाड़ा, रायसेन, सागर, दमोह, बालाघाट, भोपाल, देवास, खरगोन, राजगढ़, विदिशा, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, बैतूल, नरसिंहपुर, मंडला, पांढुर्णा, डिंडौरी और अनूपपुर समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई।

    दूसरी ओर कई शहरों में गर्मी का असर भी बना रहा। रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में पारा 42.6 डिग्री तक पहुंचा। बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में 42.4 डिग्री, भोपाल और इंदौर में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री तथा ग्वालियर में 37.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, मई की शुरुआत से ही प्रदेश में मौसम सामान्य नहीं रहा है। आमतौर पर इस समय भीषण गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर बना हुआ है। इसके पीछे चक्रवात, ट्रफ लाइन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस को प्रमुख वजह बताया गया है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार से अधिकांश जिलों में पारे में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान या पक्के मकान में शरण लेने की सलाह दी गई है। वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होने की आशंका भी जताई गई है।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट

    इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की गणेश मंदिर वाली गली में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में हुई कहासुनी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पक्ष ने सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष से सहयोग की बात कही। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और लोग डंडे व पाइप लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े।
    घटना के वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पक्षों के लोग सड़क पर हंगामा करते हुए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान लात-घूंसे भी चले और कुछ लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी रही। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति का गला पकड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हो गए।
    घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
    पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें लक्की बिंजवा की शिकायत पर धीरज और गिरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि धीरज बिंजवा की शिकायत पर सुनील, लक्की और अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को राउंडअप भी किया गया है और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद की जड़ सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण से जुड़ी हुई है। एक पक्ष सड़क को चौड़ा करने के पक्ष में था, जबकि दूसरे पक्ष पर निर्माण कर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
  • गर्मियों की छुट्टियों में बनाएं इन खूबसूरत जगहों का प्लान, कैमरे में कैद करें यादगार नजारे

    गर्मियों की छुट्टियों में बनाएं इन खूबसूरत जगहों का प्लान, कैमरे में कैद करें यादगार नजारे


    नई दिल्ली।  गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं, जहां तपती गर्मी से राहत मिले और मन को सुकून देने वाले नजारे देखने को मिलें। भारत में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप भी इस समर वेकेशन में फैमिली, दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो दार्जिलिंग, शिमला और लेह-लद्दाख जैसी जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं।
    पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत वादियों में बसा दार्जिलिंग गर्मियों में घूमने के लिए सबसे पसंदीदा हिल स्टेशनों में गिना जाता है। यहां की ठंडी जलवायु, दूर-दूर तक फैले चाय के बागान और पहाड़ों पर तैरते बादल पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं। दार्जिलिंग की सबसे खास जगह टाइगर हिल मानी जाती है, जहां सुबह के समय सूर्योदय का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। सूरज की पहली किरण जब कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों पर पड़ती है, तो पूरा दृश्य सुनहरी रोशनी से चमक उठता है। इसके अलावा यहां की टॉय ट्रेन की सैर, लोकल मार्केट में शॉपिंग और मोमोज-थुकपा जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद यात्रा को और खास बना देता है।
    वहीं, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जिससे लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। शिमला की मॉल रोड पर शाम के समय घूमना, कैफे में बैठकर पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेना और लोकल मार्केट से खरीदारी करना पर्यटकों को खूब पसंद आता है। देवदार के ऊंचे पेड़, बादलों से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा जाखू मंदिर और द रिज जैसी जगहों से पूरे शहर का शानदार दृश्य दिखाई देता है, जिसे कैमरे में कैद करना हर किसी को पसंद आता है।
    अगर आप एडवेंचर और रोमांच पसंद करते हैं, तो लेह-लद्दाख आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और बर्फ से ढकी पहाड़ियां, नीला आसमान तथा शांत झीलें पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। पैंगोंग लेक का नीला पानी और नुब्रा वैली की खूबसूरत वादियां यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करती हैं। बाइक राइडिंग, कैंपिंग और पहाड़ों के बीच बिताए गए पल जिंदगीभर याद रहते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में लेह-लद्दाख युवाओं की पहली पसंद बन जाता है।
    इस समर वेकेशन अगर आप भी प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो इन शानदार डेस्टिनेशंस का प्लान जरूर बनाएं। यहां की खूबसूरती न सिर्फ आपकी यात्रा को खास बनाएगी, बल्कि कैमरे में कैद किए गए नजारे जिंदगीभर की यादें बन जाएंगे।

  • गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों का राज, घड़े का पानी क्यों है विशेषज्ञों की पसंद

    गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों का राज, घड़े का पानी क्यों है विशेषज्ञों की पसंद


    नई दिल्ली ।गर्मियों का मौसम जैसे-जैसे तेज होता है, वैसे-वैसे शरीर को ठंडक और संतुलन की अधिक जरूरत महसूस होने लगती है। तापमान बढ़ने के साथ लोग राहत पाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, लेकिन पुराने और प्राकृतिक उपाय आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। इन्हीं में सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है मिट्टी के घड़े या मटके का पानी।

    मिट्टी के घड़े में रखा पानी किसी मशीन या बिजली की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रक्रिया से ठंडा होता है। मिट्टी की खास बनावट और उसकी सांस लेने की क्षमता पानी के तापमान को संतुलित बनाए रखती है, जिससे यह शरीर को धीरे-धीरे ठंडक पहुंचाता है। यही वजह है कि यह पानी पीने के बाद शरीर में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना कई बार शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अचानक अत्यधिक ठंडक गले और पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है। इसके विपरीत घड़े का पानी शरीर के प्राकृतिक तापमान के करीब होता है, जिससे यह शरीर को बिना झटका दिए ठंडक प्रदान करता है।

    माना जाता है कि मिट्टी के घड़े में रखा पानी हल्का प्राकृतिक रूप से शुद्ध भी होता है, क्योंकि मिट्टी पानी में मौजूद कुछ अशुद्धियों को सोखने की क्षमता रखती है। इससे पानी अधिक संतुलित और हल्का महसूस होता है। लोग अक्सर बताते हैं कि इस पानी को पीने से उन्हें एक अलग तरह की ताजगी और हल्कापन महसूस होता है।

    गर्मी के मौसम में शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में सही तरीके से हाइड्रेशन बेहद जरूरी हो जाता है। घड़े का पानी शरीर को सिर्फ ठंडक ही नहीं देता, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।

    परंपरागत रूप से भी मिट्टी के घड़े का उपयोग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से किया जाता रहा है। बिना किसी तकनीक के यह तरीका आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सरल, सस्ता और प्राकृतिक है। यही कारण है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद लोग इसे अपनाना पसंद करते हैं।

    गर्मी में जब शरीर थकान, गर्मी और डिहाइड्रेशन से प्रभावित होता है, तब घड़े का पानी एक प्राकृतिक राहत की तरह काम करता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि एक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा भी बन सकता है।

    आज के समय में जब लोग तेज और कृत्रिम ठंडक की ओर बढ़ रहे हैं, तब भी मिट्टी के घड़े का पानी अपनी प्राकृतिक विशेषताओं के कारण एक भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। यह दिखाता है कि सरलता और प्रकृति पर आधारित उपाय आज भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।

  • वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति

    वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति




    नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत 2026 इस वर्ष 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और वट वृक्ष की परिक्रमा करने से सौभाग्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।

    शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री पूजा के दौरान यदि महिलाएं अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जाप करें तो इसका प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैवाहिक जीवन में स्थिरता मिलती है। इस दिन शिव, विष्णु और देवी से जुड़े मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना गया है।

    मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं, जिनका जाप श्रद्धा भाव से करने पर जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानी जाती है और वर्षों से महिलाएं इसे श्रद्धापूर्वक निभाती आ रही हैं।

  • Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका

    Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका


    नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल Bank of Baroda की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम इन दिनों निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न की वजह से FD हमेशा से भरोसेमंद विकल्प मानी जाती रही है। खास बात यह है कि बैंक की लंबी अवधि वाली FD स्कीम में ₹2 लाख जमा करने पर निवेशक को मैच्योरिटी तक करीब ₹1.03 लाख तक ब्याज मिल सकता है।
    बैंक फिलहाल अलग-अलग अवधि की FD पर 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दर ऑफर कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले सुपर सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज का लाभ भी दिया जा रहा है। बैंक की चर्चित “bob Square Drive Deposit Scheme” 444 दिनों की अवधि पर आम ग्राहकों को 6.45 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 6.95 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दे रही है।
    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए ₹2 लाख की FD कराता है और ब्याज को कंपाउंडिंग के साथ निवेश में ही रहने देता है, तो मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹3 लाख से अधिक पहुंच सकती है। कई FD कैलकुलेशन के अनुसार, 5 साल या उससे ज्यादा की अवधि में ब्याज की राशि ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहने वाले निवेशक FD की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
    FD का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि इसमें शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा या भविष्य के सुरक्षित निवेश के लिए लोग FD को प्राथमिकता देते हैं।
    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक की FD उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है जो बिना जोखिम के निवेश करना चाहते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज दर इस योजना को और आकर्षक बनाती है।
    हालांकि निवेश से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। FD कराने से पहले ब्याज दर, निवेश अवधि, कंपाउंडिंग का तरीका और समय से पहले पैसा निकालने के नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं, इसलिए निवेश से पहले ताजा ब्याज दर जरूर जांच लें।
    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई निवेशक सुरक्षित, स्थिर और गारंटीड रिटर्न चाहता है, तो सरकारी बैंक की FD आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक मानी जाती है।
  • Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें

    Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में घर की दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हर दिशा किसी न किसी ग्रह और ऊर्जा से जुड़ी होती है। घर की पश्चिम दिशा का संबंध न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव से माना जाता है। इसलिए इस दिशा को साफ, व्यवस्थित और संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यदि पश्चिम दिशा में गंदगी, टूटे सामान या अव्यवस्था हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर के सदस्यों के जीवन पर पड़ सकता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम दिशा का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक संतुलन लेकर आता है। वहीं यदि यह दिशा दोषपूर्ण हो जाए तो आर्थिक परेशानियां, तनाव, मेहनत के बावजूद सफलता न मिलना और परिवार में कलह जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक पश्चिम दिशा में टूटे-फूटे फर्नीचर, कबाड़ या अनुपयोगी सामान नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। माना जाता है कि यह स्थिति शनिदेव के अशुभ प्रभाव को बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर घर से बेकार और टूटी वस्तुओं को हटाते रहना शुभ माना गया है।
    घर की पश्चिम दिशा में गंदगी या बदबू भी नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर कूड़ेदान को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी माना गया है। वास्तु मान्यता है कि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साफ-सफाई बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
    पश्चिम दिशा में पुराने, फटे या गंदे पर्दे लगाना भी अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साफ और सुंदर पर्दे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं और मानसिक शांति बढ़ाते हैं। वहीं फटे पर्दे दुर्भाग्य और नकारात्मकता को बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
    रिश्तों और पारिवारिक स्थिरता के लिए भी पश्चिम दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम बनाना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा में शयनकक्ष बनाना शुभ माना जाता है। इससे पति-पत्नी के संबंध मजबूत होते हैं और करियर में स्थिरता आती है।
    वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि घर का मंदिर पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर के मुखिया की सेहत और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। मंदिर के लिए उत्तर, पूर्व या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    वास्तु के छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। घर की पश्चिम दिशा को साफ, संतुलित और व्यवस्थित रखने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है और जीवन में स्थिरता, तरक्की और खुशहाली आती है।