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  • डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

    डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में किसान हित और आधारभूत संरचना विकास को लेकर सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में किसानों को राहत देने के साथ साथ सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निर्णय लिए गए

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में सार्थक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं इसी क्रम में कृषि कार्य में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करेगा और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसानों को टोल शुल्क देना पड़ता था जिससे लागत बढ़ती थी अब टोल से छूट मिलने के बाद परिवहन खर्च में कमी आएगी और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन की लागत और अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ेगा यह निर्णय किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन दोनों के रूप में देखा जा रहा है

    बैठक में केवल किसान हित ही नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए संचालक मंडल ने इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है इन परियोजनाओं को नॉन एक्सेस कंट्रोल के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में कमी आएगी

    इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है इस परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी यह निर्णय आने वाले समय में भोपाल के यातायात ढांचे को नई दिशा देगा

    बैठक में वार्षिक लेखों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

    कुल मिलाकर यह बैठक किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है एक ओर जहां किसानों को सीधी आर्थिक राहत दी गई है वहीं दूसरी ओर सड़क परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के विकास को गति देने की मजबूत आधारशिला रखी गई है सरकार का यह कदम समृद्ध किसान और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है

  • प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार

    प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार


    नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (आईओसी) ने प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ा है।

    एक्सपी100 पेट्रोल में बड़ा उछाल

    आईओसी के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 160 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 149 रुपए थी। यह हाई-ऑक्टेन फ्यूल खासतौर पर लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इंजन की क्षमता और स्मूद परफॉर्मेंस बेहतर होती है। कीमतों में यह उछाल प्रीमियम फ्यूल सेगमेंट में बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार के दबाव को दर्शाता है।

    प्रीमियम डीजल भी हुआ महंगा

    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। यह डीजल बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन के लिए जाना जाता है और मुख्य रूप से कमर्शियल और प्रीमियम उपयोग के लिए अपनाया जाता है।

    आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत

    हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल अभी भी 94.72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Mumbai में पेट्रोल 103.44 रुपए और डीजल 89.97 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है।

    एलपीजी और एटीएफ में भी भारी बढ़ोतरी

    इस बीच, अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में तेजी देखने को मिली है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें दोगुने से अधिक बढ़कर 2 लाख रुपए प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं, जिससे विमानन सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।

    वैश्विक तनाव का असर

    ईंधन कीमतों में यह बदलाव वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अमेरिका आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों को सीमित कर सकता है, जिससे हालात में कुछ नरमी की उम्मीद है।

    हालांकि, Iran ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    भारत में कीमतें क्यों स्थिर?

    वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं। तेल कंपनियां फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत देने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जबकि प्रीमियम और अन्य उत्पादों में लागत का असर दिख रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है और यह बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर में राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ करते हुए इस सकारात्मक परिवर्तन को शिक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक से चार अप्रैल तक चलने वाला स्कूल चले हम अभियान बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है जिसका असर अब जमीन पर नजर आ रहा है

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शासकीय विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है वर्ष 2025 26 में कुल नामांकन में लगभग बीस प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि सरकारी स्कूलों में यह वृद्धि बत्तीस प्रतिशत से अधिक रही है राज्य सरकार ने इस शैक्षणिक सत्र में एक करोड़ पैंतालीस लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नव प्रवेशित बच्चों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उन्हें नि शुल्क साइकिलें तथा पाठ्य पुस्तकें वितरित की उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिले इसके लिए बड़े स्तर पर साइकिल वितरण किया जा रहा है आने वाले महीनों में लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा साथ ही गणवेश किताबें और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि शासकीय स्कूलों में ड्रॉप आउट की संख्या शून्य करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किया है उन्होंने इसके लिए शिक्षकों अभिभावकों और समाज के सहयोग की सराहना की और कहा कि हर बच्चे को स्कूल तक लाना ही सरकार का लक्ष्य है

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों और पीएमश्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है इन संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब रोबोटिक लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन भी किया जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा अब तकनीक से जुड़ रही है

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर इंजीनियर और उद्यमी बनें और अपने भविष्य को मजबूत करें उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की गई है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके

    मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है और आगामी बजट में भी इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है

    कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यह दिन शिक्षा विभाग के लिए उत्सव जैसा है उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले ही एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है और प्रयास है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे साथ ही विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है जिससे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सस्ती पुस्तकें उपलब्ध हो सकें

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों अधिकारियों शिक्षकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है

  • जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

    जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा


    नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रह

    यदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है।

    उपकर संग्रह में गिरावट

    हालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है।

    पिछले महीने का प्रदर्शन

    फरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है।

    विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।

  • आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा

    आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा


    नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। आयोग के सदस्य 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े सुझाव साझा करेंगे।

    आयोग ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यापक रूप से समझा जा सके। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि वेतन, पेंशन और अन्य लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए।

    इच्छुक समूहों और व्यक्तियों को बैठक में भाग लेने के लिए 10 अप्रैल तक समय का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है कि स्थान और कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी।

    कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और व्यक्तिगत कर्मचारी भी वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में भेज सकते हैं। आयोग इन सभी प्रस्तुतियों और बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

    वर्तमान में लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की त्वरित सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है।

  • भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी

    भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।  भारत की डेटा सेंटर इंडस्ट्री अगले सालों में तेजी से बढ़ने की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश की डेटा सेंटर क्षमता सालाना आधार पर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसके पीछे मजबूत मांग और निवेशकों की लगातार रुचि मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

    सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट से अधिक है। 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच चुकी थी।

    निवेश में तेजी और विदेशी पूंजी का योगदान

    डेटा सेंटर सेक्टर में नई पूंजी निवेश भी लगातार आकर्षित हो रही है। 2025 में इस क्षेत्र में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ 126 अरब डॉलर तक पहुँच गईं। इस वर्ष निवेश में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

    सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ Anshuman Magazine ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।

    राज्यों और शहरों की भूमिका

    रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य डेटा सेंटर निवेश में आगे रहेंगे। वहीं, कम लेटेंसी, 5G रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण टियर-II शहर जैसे अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल में भी तेजी से विकास हो रहा है।

    मुंबई का दबदबा, एआई और क्लाउड की बढ़ती मांग

    भारत में वर्तमान में कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान देते हैं।

    एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दे रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

    सरकारी नीतियों का समर्थन

    रिपोर्ट के अनुसार कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियां निवेश में और तेजी लाने और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

  • बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान

    बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान


    नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं।

    बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है।

    वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है।

    इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है।

    इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।

  • बॉक्स ऑफिस से आगे बढ़ा क्रेज हांगकांग में धुरंधर मैराथन ने रचा नया इतिहास

    बॉक्स ऑफिस से आगे बढ़ा क्रेज हांगकांग में धुरंधर मैराथन ने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली । धुरंधर 2 का जलवा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा बल्कि दुनियाभर में इस फिल्म ने अपनी धाक जमा दी है। खासकर हांगकांग में इस फिल्म को लेकर जो दीवानगी देखने को मिल रही है वह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। रणवीर सिंह की इस स्पाई थ्रिलर ने विदेशी बाजारों में भी ऐसा असर छोड़ा है कि दर्शक इसे बार बार देखने के लिए तैयार हैं।

    हांगकांग में फिल्म के इसी जबरदस्त क्रेज को देखते हुए एक अनोखा इवेंट आयोजित किया जा रहा है जिसे धुरंधर मैराथन नाम दिया गया है। इस खास आयोजन में धुरंधर और धुरंधर 2 को बैक टू बैक दिखाया जाएगा। दोनों फिल्मों का कुल रनटाइम करीब 8 घंटे का है जो किसी भी दर्शक के लिए एक लंबा लेकिन रोमांचक सिनेमाई अनुभव साबित होने वाला है। दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मैराथन स्क्रीनिंग के दौरान तीन ब्रेक भी रखे गए हैं ताकि लोग आराम से इस सफर का आनंद ले सकें।

    इस मैराथन को हांगकांग में फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा प्लान किया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए बताया गया कि यह फैसला वहां मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण लिया गया है। यह साफ दिखाता है कि फिल्म ने दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी जगह बना ली है।

    अगर बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर 2 ने हांगकांग में भी शानदार प्रदर्शन किया है। खास बात यह है कि बिना चीनी सबटाइटल्स के ही इस फिल्म ने वहां 1 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने इस तरह का रिकॉर्ड बनाया।

    इतना ही नहीं महज 12 दिनों के अंदर फिल्म 2 मिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है और यह पूरी कमाई सिर्फ दो थिएटर्स से हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि दर्शकों में फिल्म को लेकर कितना उत्साह है। अब जब फिल्म के लिए चीनी सबटाइटल्स भी उपलब्ध हो गए हैं तो उम्मीद की जा रही है कि इसका कलेक्शन और तेजी से बढ़ेगा।

    वैश्विक स्तर पर भी धुरंधर 2 का प्रदर्शन शानदार रहा है। ओवरसीज मार्केट में फिल्म 37 मिलियन डॉलर यानी करीब 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। यह इसे दुनिया की सबसे सफल भारतीय फिल्मों में शामिल करता है।

    इस पूरी सफलता से यह साफ हो जाता है कि अब भारतीय सिनेमा की पहुंच और प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। धुरंधर 2 जैसी फिल्में न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।

    हांगकांग में आयोजित हो रही यह 8 घंटे की मैराथन स्क्रीनिंग सिर्फ एक इवेंट नहीं बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब कंटेंट दमदार हो तो भाषा और देश की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। रणवीर सिंह की यह फिल्म अब एक ग्लोबल फेनोमेनन बन चुकी है और आने वाले समय में इसके और भी बड़े रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं

  • “महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”

    “महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Mahindra & Mahindra ने मार्च 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बिक्री के नए आंकड़े छू लिए हैं। कंपनी ने कुल 99,969 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्शाती है। यह आंकड़ा घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर है, जो कंपनी की मजबूत बाजार पकड़ और बढ़ती मांग का संकेत देता है।

    SUV सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजन

    महिंद्रा की इस तेज रफ्तार का सबसे बड़ा कारण उसका यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट रहा। मार्च में घरेलू बाजार में कंपनी ने 60,272 यूनिट SUV बेचीं, जो 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं निर्यात को मिलाकर कुल SUV बिक्री 62,109 यूनिट तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने SUV सेगमेंट में 6,60,276 यूनिट की बिक्री की, जो 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाती है।

    कमर्शियल व्हीकल में भी दमदार प्रदर्शन

    कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी कंपनी ने संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया। मार्च में घरेलू CV बिक्री 24,928 यूनिट रही, जो 11 प्रतिशत की बढ़त है। खासतौर पर 2 से 3.5 टन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21,402 यूनिट की बिक्री हुई। वहीं 3.5 टन से कम वाले वाहनों की सालाना बिक्री 2,89,597 यूनिट रही, जो 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाती है।

    थ्री-व्हीलर सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

    कंपनी के थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी तेज रफ्तार देखने को मिली। मार्च में 39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,801 यूनिट की बिक्री हुई। इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण रही। पूरे वित्त वर्ष में इस श्रेणी में 1,12,003 यूनिट की बिक्री हुई, जो 30 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है।

    निर्यात में सालाना बढ़त, लेकिन मार्च में हल्की गिरावट

    निर्यात के मोर्चे पर कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 40,990 यूनिट का आंकड़ा पार किया। हालांकि मार्च महीने में निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 3,968 यूनिट रहा, जो वैश्विक बाजार की चुनौतियों की ओर इशारा करता है।

    सीईओ का बयान: मांग बनी हुई मजबूत

    कंपनी के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने कहा कि मार्च में SUV की 60,272 यूनिट बिक्री और LCV सेगमेंट में 24,928 यूनिट की बिक्री कंपनी की मजबूत मांग को दर्शाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी यह ग्रोथ जारी रहेगी।

    शेयर बाजार में भी दिखा असर

    कंपनी के इस शानदार प्रदर्शन का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। NSE पर महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 3,051 रुपये के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला

    गौरतलब है कि कंपनी ने फरवरी 2026 में भी 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97,177 यूनिट की बिक्री दर्ज की थी। लगातार दूसरे महीने मजबूत प्रदर्शन से साफ है कि महिंद्रा की रणनीति और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बाजार में अच्छी पकड़ बनाए हुए है।

  • इलीगल बैट पर सख्त नजर आईपीएल में तेवतिया को मैदान पर ही बदलना पड़ा बल्ला

    इलीगल बैट पर सख्त नजर आईपीएल में तेवतिया को मैदान पर ही बदलना पड़ा बल्ला


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के एक मुकाबले में उस समय दिलचस्प और थोड़ा विवादित माहौल बन गया जब राहुल तेवतिया बल्लेबाजी करने उतरे और मैदानी अंपायर की नजर उनके बल्ले पर टिक गई। गुजरात टाइटन्स के इस फिनिशर को पंजाब किंग्स के खिलाफ खेलते हुए अंपायर ने रोक लिया और उनके बैट की जांच की गई। जांच में पाया गया कि उनका बल्ला तय मानकों के अनुरूप नहीं है जिसे क्रिकेट की भाषा में इलीगल बैट कहा जाता है।

    मैदान पर मौजूद अंपायर ने तुरंत बैट गेज की मदद से बल्ले को परखा। यह एक खास उपकरण होता है जिससे यह जांचा जाता है कि बल्ला निर्धारित मोटाई और चौड़ाई के नियमों में फिट बैठता है या नहीं। जब बल्ला इस गेज से पास नहीं हो पाया तो अंपायर ने बिना देर किए राहुल तेवतिया को बल्ला बदलने का निर्देश दिया। तेवतिया ने भी इस फैसले का सम्मान करते हुए तुरंत नया बल्ला मंगवाया और खेल जारी रखा।

    हालांकि इस दौरान तेवतिया ने यह समझाने की कोशिश की कि उनके बल्ले पर लगे स्टीकर की वजह से वह गेज से पार नहीं हो पा रहा है लेकिन अंपायरों ने नियमों के तहत कोई ढील नहीं दी। आईपीएल में अब तकनीकी जांच काफी सख्त हो गई है और किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत रोका जाता है।

    दरअसल आईपीएल 2025 से ही बल्लों की जांच को और कड़ा कर दिया गया है। अब बल्लेबाज के मैदान पर उतरने से पहले और यहां तक कि मैच के बीच में भी बल्ला चेक किया जा सकता है। फोर्थ अंपायर या ऑन फील्ड अंपायर कभी भी यह जांच कर सकते हैं जिससे खेल में निष्पक्षता बनी रहे।

    अगर नियमों की बात करें तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी के अनुसार बल्ले की मोटाई 67 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और किनारों की मोटाई 40 मिलीमीटर के अंदर रहनी जरूरी है। यही मानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में लागू होते हैं।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इलीगल बैट इस्तेमाल करने पर कोई सजा मिलती है। इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है। पहली बार अगर किसी खिलाड़ी का बल्ला नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो उसे सिर्फ बदलने के लिए कहा जाता है और खेल जारी रहता है। इसमें न तो रन की पेनल्टी दी जाती है और न ही खिलाड़ी को तुरंत बैन किया जाता है।

    लेकिन अगर कोई खिलाड़ी बार बार ऐसे नियमों का उल्लंघन करता है तो आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी पहली गलती पर चेतावनी और सुधार का मौका मिलता है लेकिन बार बार गलती करने पर आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है।

    इस घटना के बाद एक बार फिर यह साफ हो गया है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक और नियमों की भूमिका कितनी अहम हो गई है। अब खिलाड़ियों को न सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होता है बल्कि उपकरणों के नियमों का भी पूरी तरह पालन करना पड़ता है ताकि खेल की निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी तरह का अनुचित लाभ न लिया जा सके