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  • पंजाब में कैंसर का बढ़ता संकट, पांच साल में मामले बढ़े और मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई

    पंजाब में कैंसर का बढ़ता संकट, पांच साल में मामले बढ़े और मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई

    नई दिल्ली ।पंजाब में कैंसर का बढ़ता प्रकोप राज्य के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कैंसर से हर 21 मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य का मालवा बेल्ट इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।

    कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए पंजाब सरकार ने इसे अधिसूचित रोग घोषित किया है। इसके तहत सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए कैंसर के नए मामलों और बीमारी से होने वाली मौतों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बीमारी से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से जुटाना और उनके आधार पर उपचार तथा रोकथाम की नीतियां तैयार करना है।

    प्रदेश में कैंसर के नए मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021 में पंजाब में 39,521 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 40,435 हो गई। इसके बाद 2023 में 41,337 मामले सामने आए। वर्ष 2024 में मरीजों की संख्या 42,288 तक पहुंच गई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 43,196 हो गया।

    पांच वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंजाब में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और मरीजों की नियमित निगरानी जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए उसके प्रसार और प्रभावित आबादी से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

    मालवा क्षेत्र में कैंसर का प्रभाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। इस इलाके के कई हिस्सों में बीमारी के मामलों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच की सुविधा, उपचार तक पहुंच और बीमारी के प्रति जागरूकता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

    कैंसर को अधिसूचित रोग का दर्जा मिलने के बाद अस्पतालों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर राज्य में बीमारी की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के मामलों, मरीजों की संख्या और मृत्यु के आंकड़ों का अधिक व्यवस्थित विश्लेषण संभव होगा।

    सरकार के सामने अब चुनौती केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है। बढ़ते मामलों के बीच कैंसर की जल्द पहचान, जांच सुविधाओं का विस्तार, उपचार की उपलब्धता और मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

    पंजाब में कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है। हर 21 मिनट में एक मौत का अनुमान इस बीमारी के प्रभाव की गंभीरता को सामने रखता है। ऐसे में रोकथाम, शुरुआती जांच और इलाज को लेकर व्यापक स्वास्थ्य रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है।

    पड़ोसी हरियाणा में भी कैंसर के मामलों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में वहां 30,015 मामले सामने आए थे, जो 2025 में बढ़कर 33,395 हो गए। इसी अवधि में कैंसर से होने वाली मौतें 16,543 से बढ़कर 18,387 तक पहुंच गईं। इससे स्पष्ट है कि उत्तर भारत के कई राज्यों में कैंसर का बढ़ता बोझ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

  • सावन सोमवार 2026: 24 अगस्त को बन रहा है शिव भक्ति का विशेष अवसर, ये 5 उपाय दूर कर सकते हैं जीवन की परेशानियां

    सावन सोमवार 2026: 24 अगस्त को बन रहा है शिव भक्ति का विशेष अवसर, ये 5 उपाय दूर कर सकते हैं जीवन की परेशानियां



    नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है और 24 अगस्त 2026 को चौथा और अंतिम सावन सोमवार मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित इस दिन का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। सावन सोमवार पर शिव भक्त व्रत रखते हैं और विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन के सोमवार को सच्चे मन से महादेव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख शांति तथा सकारात्मकता का संचार होता है। इस साल का आखिरी सावन सोमवार होने के कारण भक्तों के लिए यह दिन और भी खास माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

    अंतिम सावन सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान शिवलिंग की विशेष पूजा की जा सकती है। इसके अलावा प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।

    इस दिन सबसे पहले शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा है। पंचामृत में दूध दही घी शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत अभिषेक से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में सुख शांति का वातावरण बनता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना भी बेहद शुभ माना जाता है। बेलपत्र पर चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाने की मान्यता है। कहा जाता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और रुके हुए कार्यों में गति आने की कामना की जाती है।

    सावन सोमवार के दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। दूध चावल सफेद वस्त्र या अन्य उपयोगी सफेद सामग्री का दान अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही शिवलिंग पर गेहूं अर्पित करने और गन्ने के रस से अभिषेक करने की भी परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि इस उपाय से जीवन में सफलता और समृद्धि की कामना की जा सकती है।

    अंतिम सावन सोमवार पर भगवान शिव को खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद खीर को प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांट सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को श्रद्धा से भोग अर्पित करने से घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    हालांकि इन सभी उपायों का आधार धार्मिक मान्यताएं हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सावन सोमवार पर सबसे महत्वपूर्ण भगवान शिव की श्रद्धा पूर्वक पूजा और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। अंतिम सावन सोमवार पर भक्त यदि अपनी क्षमता के अनुसार पूजा दान और सेवा करते हैं तो यह दिन उनके लिए आध्यात्मिक रूप से विशेष बन सकता है।

  • अरुणाचल का डोंग गांव बना खास सनराइज डेस्टिनेशन, पहाड़ों और लोहित नदी के बीच दिखती है सूरज की पहली किरण

    अरुणाचल का डोंग गांव बना खास सनराइज डेस्टिनेशन, पहाड़ों और लोहित नदी के बीच दिखती है सूरज की पहली किरण

    नई दिल्ली ।भारत में सूर्योदय देखने के लिए कई खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं, लेकिन अरुणाचल प्रदेश की डोंग वैली अपनी भौगोलिक स्थिति और शानदार प्राकृतिक नजारों के कारण खास पहचान रखती है। अंजॉ जिले में स्थित डोंग गांव और आसपास की घाटी को देश में सबसे पहले सूर्योदय देखने वाली प्रमुख जगहों में गिना जाता है। यहां पहाड़ों के बीच उगते सूर्य की पहली किरणें देखने के लिए पर्यटक सुबह से पहले ही निकल पड़ते हैं।

    डोंग वैली वालॉन्ग और लोहित नदी के आसपास के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। चारों ओर फैले घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, गहरी घाटियां और नदी का बहता पानी इस क्षेत्र को बेहद आकर्षक बनाते हैं। सूर्योदय के समय जब आसमान का रंग धीरे-धीरे बदलता है और पहाड़ों के पीछे से सूर्य दिखाई देता है, तब पूरा इलाका सुनहरी रोशनी से भर उठता है।

    डोंग को भारत में सबसे पहले सूर्योदय देखने वाली जगह के तौर पर विशेष पहचान वर्ष 1999 के आसपास मिली थी। इसके बाद नए साल के मौके पर यहां सूर्योदय देखने की दिलचस्पी बढ़ी। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस अनोखे अनुभव के लिए डोंग पहुंचने लगे। हालांकि वास्तविक सूर्योदय का समय मौसम और वर्ष के समय के अनुसार बदलता रहता है।

    डोंग में सूर्योदय देखना सामान्य पर्यटन अनुभव से थोड़ा अलग है। इसके लिए कई पर्यटकों को अंधेरे में पहाड़ी रास्तों पर पैदल ट्रेक करना पड़ता है। सूर्योदय के लिए निर्धारित व्यू पॉइंट तक पहुंचने के बाद इंतजार का सिलसिला शुरू होता है। रात का अंधेरा कम होने के साथ क्षितिज पर हल्की रोशनी दिखाई देती है और कुछ समय बाद सूर्य की पहली किरणें पहाड़ियों को रोशन करती हैं।

    डोंग की यात्रा केवल सूर्योदय तक सीमित नहीं है। आसपास स्थित वालॉन्ग भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। डोंग से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र पहाड़ी वातावरण और शांत प्राकृतिक परिवेश के कारण यात्रियों को आकर्षित करता है। इसके अलावा किबिथू भी इस इलाके का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, जो भारत के पूर्वी छोर के निकट अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण खास महत्व रखता है।

    लोहित नदी इस पूरे क्षेत्र की खूबसूरती को और बढ़ाती है। पहाड़ों के बीच बहती नदी और आसपास की हरियाली यहां के प्राकृतिक दृश्य को अलग पहचान देती है। क्षेत्र में स्थानीय समुदायों की संस्कृति और परंपराओं को जानना भी यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव हो सकता है।

    डोंग का इलाका भारत, चीन और म्यांमार की सीमाओं के नजदीक स्थित है। इसलिए यहां घूमने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों और सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता हो सकती है। यात्रा से पहले मौसम, सड़क की स्थिति, स्थानीय नियम और ट्रेकिंग मार्ग की जानकारी लेना भी उपयोगी रहता है।

    डोंग वैली की खासियत यही है कि यहां सूर्योदय केवल आसमान में बदलते रंगों का दृश्य नहीं, बल्कि पहाड़ों, जंगलों और नदी के बीच प्रकृति को करीब से देखने का अवसर देता है। शांत वातावरण और अनोखी भौगोलिक स्थिति इसे उन यात्रियों के लिए आकर्षक बनाती है, जो सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग अनुभव तलाशते हैं।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?

    नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?


    नई दिल्ली।
    कैब बुकिंग कंपनी उबर (Cab Booking Company Uber) पर यूरोप (Europe) में बड़ा जुर्माना लगाया गया है। नीदरलैंड्स (Netherlands) के डेटा प्रोटेक्शन वॉचडॉग (Data Protection Watchdog) ने कंपनी पर 825 मिलियन यूरो यानी करीब ₹9,226 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला ड्राइवरों के अकाउंट को कथित तौर पर बिना पहले चेतावनी दिए और बिना इंसानी जांच के ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए सस्पेंड या डिएक्टिवेट करने से जुड़ा है। नियामक ने इसे ड्राइवरों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। उसका कहना है कि किसी कंप्यूटर सिस्टम को अकेले ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिनसे किसी व्यक्ति की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी के मुताबिक Uber ने कुछ मामलों में ड्राइवरों के अकाउंट को बिना पर्याप्त चेतावनी और मानवीय हस्तक्षेप के बंद किया। नियामक की डिप्टी चेयर मोनिक वर्डियर ने इसे “गंभीर उल्लंघन” बताया। उनका कहना है कि कई ड्राइवरों के लिए अकाउंट बंद होने का सीधा मतलब उनकी आय का अचानक खत्म होना था। नियामक का तर्क है कि जब किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी पर इतना बड़ा असर पड़ रहा हो, तो केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के आधार पर फैसला लेना उचित नहीं है और प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    यह मामला यूरोप में 2018 से 2022 के बीच हुई घटनाओं से जुड़ा है। इसकी शुरुआत फ्रांस में एक शिकायत से हुई थी, बाद में जांच नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने संभाली, क्योंकि Uber का यूरोपीय मुख्यालय नीदरलैंड्स में स्थित है। जांच में Uber के उन सिस्टम पर सवाल उठे, जिनका इस्तेमाल ड्राइवरों की संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने और उनके अकाउंट पर कार्रवाई करने के लिए किया जाता था। कंपनी के सिस्टम कुछ ड्राइवरों पर अनावश्यक लंबे रास्ते लेने से किराया बढ़ाने या यात्रा स्वीकार करने के बाद उसे पूरा न करने जैसी गतिविधियों का संदेह कर सकते थे।

    Uber का कहना है कि ऐसे कई सस्पेंशन अस्थायी थे और स्थायी रूप से अकाउंट बंद करने का फैसला इंसानी समीक्षा के बिना नहीं किया जाता था। कंपनी ने नियामक के इस निष्कर्ष को भी खारिज किया कि कम ग्राहक रेटिंग के आधार पर कुछ ड्राइवरों को स्थायी रूप से ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए डिएक्टिवेट किया गया। Uber ने जुर्माने को अनुपातहीन और अत्यधिक बताते हुए कहा कि वह ड्राइवरों के अधिकारों को गंभीरता से लेती है। कंपनी के मुताबिक उसके पास मानव समीक्षा और ड्राइवरों को सस्पेंशन के खिलाफ चुनौती देने का विकल्प देने वाली नीतियां मौजूद हैं।

    इस मामले में यूरोप के GDPR (General Data Protection Regulation) के नियम महत्वपूर्ण हैं। GDPR के तहत कंपनियां ऐसे फैसले केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के भरोसे नहीं छोड़ सकतीं, जिनका किसी व्यक्ति पर महत्वपूर्ण असर पड़ता हो। ऐसे मामलों में सार्थक मानवीय निगरानी और फैसले को चुनौती देने का अवसर जरूरी माना जाता है। Uber पर लगाया गया जुर्माना इसी सिद्धांत से जुड़ा है। नियामक ने बताया कि जुर्माने की राशि कंपनी के 2025 के सालाना कारोबार के एक हिस्से के आधार पर तय की गई है। Uber का कहना है कि प्रभावित ड्राइवरों की संख्या सीमित थी और 2021 में कम ग्राहक रेटिंग के कारण पूरे यूरोप में केवल 126 ड्राइवरों को डिएक्टिवेट किया गया था।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूरोपीय नियामक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों पर डेटा प्राइवेसी, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल नियमों के उल्लंघन को लेकर लगातार सख्ती कर रहे हैं। Meta, Google, Apple और Amazon जैसी कंपनियों पर भी अरबों यूरो के जुर्माने लग चुके हैं। Uber के मामले में यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है कि AI और ऑटोमेशन से लिए गए फैसलों में भी इंसानी निगरानी और अपील का अधिकार जरूरी है, खासकर तब जब किसी फैसले का सीधा असर किसी व्यक्ति की नौकरी या आय पर पड़ता हो।

  • US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल

    US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल


    वाशिंगटन।
    एफबीआई निदेशक काश पटेल (FBI Director Kash Patel) ने शनिवार को कहा कि संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Federal Law Enforcement Agencies) ने एक आतंकी साजिश (Terrorist plot) नाकाम की है। उन्होंने कहा कि यह न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने की साजिश थी। पटेल के मुताबिक, यह साजिश आईएसआईएस (ISIS) से प्रेरित थी।

    काश पटेल के मुताबिक, इस साजिश में अल्बानी की 35 साल की एक महिला शामिल थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। पटेल ने संघीय आतंकवाद रोधी अभियानों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 640 आतंकी हमलों की साजिशें नाकाम की गईं।


    काश पटेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

    उन्होंने एक्स पर लिखा, अमेरिकी जमीन पर एक और संभावित आतंकी हमला नाकाम किया गया। 35 साल की अल्बानी की एक महिला पर न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने का आरोप है। उसने आईएसआईएस से प्रेरित हमले की साजिश रची थी। यह उन खतरों में से सिर्फ एक है, जिनका संघीय कानून प्रवर्तन सामना कर रहा है। पिछले साल 640 आतंकी हमलों की योजनाएं नाकाम की गईं।

    पटेल ने मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि खतरे कई तरह के हैं। अधिकारी अमेरिका में लोगों को निशाना बनाने वाले खतरों से निपट रहे हैं। इसके साथ ही विदेश में तैनात अमेरिकी सैनिक भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि इन खतरों से भी अधिकारी निपट रहे हैं। अल्बानी की साजिश नाकाम होने पर पटेल ने कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाने से पहले एक और कथित आतंकी साजिश रोक दी गई। उन्होंने कहा कि कुछ अभियानों के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है। कई अभियानों के बारे में कभी पता नहीं चलता। उन्होंने कहा, यही हमारा मिशन है।


    साजिश को नाकाम करने में शामिल टीमों की सराहना की

    पटेल ने हमले को नाकाम करने में शामिल टीमों की तारीफ की। उन्होंने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की कार्रवाई को भी सराहा। उन्होंने कहा, हमारी एफबीआई अल्बानी टीम ने शानदार काम किया। न्याय विभाग में हमारे सहयोगियों ने भी अच्छा काम किया। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांशे ने भी सहयोग किया। यह एफबीआई खतरों का पता लगाती रहेगी। उन्हें नाकाम करती रहेगी। अमेरिकियों को सुरक्षित रखेगी।


    आईएसआईएस के खिलाफ पहले भी चला था अभियान

    इससे पहले मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया के सशस्त्र बलों के साथ मिलकर अभियान चलाया। इस अभियान में आईएसआईएस के दूसरे नंबर के कमांडर को मार गिराया गया था। ट्रंप ने इसे ‘जटिल और सटीक’ सैन्य अभियान बताया था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी को संयुक्त अभियान में मार गिराया गया।

  • PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील

    PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील


    लंदन।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir-PoK) में बिगड़ते हालात को लेकर 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों (British MPs) ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (United Nations Secretary-General António Guterres) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही पाकिस्तानी बलों द्वारा किए जा रहे नरसंहार को खत्म करने और नागरिकों की जान की सुरक्षा के उपाय करने की अपील भी की गई है।

    ब्रिटिश सांसदों की अपील क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार के बीच आई है, जहां पाकिस्तानी बलों की क्रूर कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। क्षेत्र में अभी भी सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और पूरी तरह से कम्युनिकेशन्स ब्लैकआउट लागू है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव को संबोधित पत्र में ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, मौतों, संचार पर प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान और शांतिपूर्ण नागरिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर लगाम की रिपोर्टों ने काफी चिंता पैदा की है। हमने ब्रिटिश कश्मीरियों से भी लगातार सुना है, जो संबंधित क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।


    संयुक्त राष्ट्र की तरफ से उठाया गया था मुद्दा

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पीओके में पाकिस्तान की बर्बरता को लेकर आवाज उठाई थी और कहा था कि शांतिपूर्ण प्रद्र्शन के दौरान इस तरह का अत्याचार करने को लेकर पाकिस्तानी सरकार को जवाब देना चाहिए।


    खत्म कर दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ”यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।” पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की।

    मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • गोविंदा को अस्पताल के बाहर देख फैंस हुए परेशान पैप्स के सवालों का नहीं दिया जवाब हाथ हिलाकर बढ़े कार की ओर

    गोविंदा को अस्पताल के बाहर देख फैंस हुए परेशान पैप्स के सवालों का नहीं दिया जवाब हाथ हिलाकर बढ़े कार की ओर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब अभिनेता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गोविंदा अस्पताल के बाहर नजर आ रहे हैं। अभिनेता ने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था और पैपराजी के सवालों का जवाब देने से भी बचते दिखाई दिए। गोविंदा को इस तरह अस्पताल के बाहर देखकर उनके फैंस चिंता जाहिर कर रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोविंदा अस्पताल किस वजह से पहुंचे थे और उनकी तबीयत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    वायरल वीडियो में गोविंदा सफेद शर्ट और जींस पहने नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर मास्क लगा हुआ है और वह अस्पताल से बाहर निकलते हुए दिखाई देते हैं। वहां मौजूद पैपराजी ने अभिनेता से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन गोविंदा ने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ हाथ हिलाकर वहां से निकलने का इशारा किया और सीधे अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गए। अभिनेता के इस अंदाज को देखकर सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर सवाल कर रहे हैं। हालांकि सिर्फ वीडियो के आधार पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

    गोविंदा का अस्पताल के बाहर नजर आना ऐसे समय हुआ है जब उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों की शादीशुदा जिंदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सुनीता ने गोविंदा के खिलाफ तलाक का मामला दायर किया था लेकिन बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इसी बीच राखी सावंत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था जिसमें वह सुनीता आहूजा से फोन पर बातचीत करती नजर आई थीं। इस दौरान सुनीता ने कथित तौर पर तलाक का केस वापस लेने की वजह बताते हुए गोविंदा की दूसरी शादी की योजना का जिक्र किया था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। गोविंदा की दूसरी शादी को लेकर सामने आई खबरों पर उनके मैनेजर ने सफाई देते हुए इसे गलत बताया था। मैनेजर के मुताबिक गोविंदा दूसरी शादी नहीं कर रहे हैं और अभिनेता ने खुद अपने निजी रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    गोविंदा और सुनीता की शादी साल 1987 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं। उनकी बेटी टीना और बेटा यशवर्धन हैं। पारिवारिक विवाद और रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यशवर्धन के बॉलीवुड डेब्यू की खबर भी सामने आ चुकी है। उनकी फिल्म को लेकर भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    फिलहाल अस्पताल के बाहर गोविंदा के वीडियो ने उनके फैंस की चिंता जरूर बढ़ा दी है लेकिन अभिनेता अस्पताल क्यों पहुंचे थे इसकी वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में उनकी सेहत को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना ही उचित होगा। वहीं गोविंदा और सुनीता के रिश्ते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच यह नया वीडियो एक बार फिर अभिनेता की निजी जिंदगी को सुर्खियों में ले आया है।

  • एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी

    एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    देशभर में लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Elections) साथ कराने को लेकर कवायद तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘एक देश, एक चुनाव’ (‘One Nation, One Election’) को लेकर बनाई गई संसद की संयुक्त समिति ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में सलाह लेनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार एक देश एक चुनाव के लिए 20234 की डेडलाइन को घटाकर 2029 ही करना चाहती है। यानी अगला लोकसभा चुनाव बिल्कुल अलग अंदाज में हो सकता है। इसके साथ ही विधानसभा के चुनाव भी करवाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो एक साथ ही सभी राज्य की विधानसभाओं को भंग कर दिया जाएगा।


    दो साल में 11 राज्यों में होना है चुनाव, अभी एनडीए की सरकार

    इस समय देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें से 11 राज्यों में अगले दो सालों में विधानसभा का चुनाव होना है। चार ऐसे राज्य हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हो सकते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा का नाम शामिल है। 2024 में एक देश एक चुनाव को लेकर जो कमेटी बनाई गई थी उसका टारगेट यही था कि 2034 में साथ में चुनाव कराने को लेकर रणनीति तैयार की जाए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि अब सरकार इस प्रयास में है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार ना किया जाए।


    शीत सत्र में सौंप सकती है रिपोर्ट

    संयुक्त संसदीय समिति पिछले दो साल से अपने काम में लग है और इस शीत सत्र में संसद में रिपोर्ट जमा कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 174 2, बी राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। ऐसे में अगर एक साथ चुनाव करवाने होंगे तो जनवरी में ही राज्यों की विधानसभा भंग कर दी जाएगी। जिन राज्यों में एनडीए की सरकार है वहां यह आसान होगा। क्योंकि मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही राज्यपाल विधानसभा भंग कर सकते हैं।

    संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले संपन्न हो जाता है। यह 41 सदस्यीय समिति ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति 2029 तक, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर देश भर में परामर्श कर रही है।

    बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों ने पहले ही लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की है। गोवा, हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने इसका समर्थन किया है। इसके साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 1 जुलाई को कमेटी के साथ बैठक की थी।

  • श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश

    श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के 2017 के उस आदेश को शनिवार को रद्द कर दिया, जिसमें साल 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव (World Culture Festival) के कारण यमुना (Yamuna) के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्रीश्री रविशंकर (Sri Sri Ravi Shankar) के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ (‘Art of Living Foundation’) को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को फाउंडेशन द्वारा जमा किए गए पांच करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे को भी वापस करने का निर्देश दिया और इसके लिए उसे चार सप्ताह का समय भी दिया।

    यमुना के बाढ़ क्षेत्र डीएनडी फ्लाईवे में गंदगी फैलाने के आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग को क्लीन चिट देते हुए जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे पता चलता है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सौंपे जाने से पहले ही कार्यक्रम स्थल खराब स्थिति में था। पीठ ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री वास्तव में यह साबित करती है कि यदि कोई नुकसान हुआ भी है, तो उसके लिए अपीलकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता…।’


    सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 9 साल पुराना फैसला

    पीठ ने कहा, ‘सात दिसंबर 2017 के फैसले को रद्द किया जाता है और इसके परिणामस्वरूप अपीलकर्ता के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों और अंतरिम आदेशों को भी निरस्त किया जाता है। अपीलकर्ता नौ मार्च 2016 के अधिकरण के आदेश के अनुपालन में डीडीए के पास जमा की गई पांच करोड़ रुपए की राशि वापस पाने का हकदार है। डीडीए आज से चार सप्ताह के भीतर यह राशि वापस करेगा।’


    NGT ने दिया था 5 करोड़ रुपए DDA को देने का आदेश

    शीर्ष अदालत ने यह आदेश ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़े ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की ओर से दायर एक अपील पर दिया। एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि कार्यक्रम से बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।


    कोर्ट बोला- रिपोर्ट से पूरी तरह प्रभावित हो गया था NGT

    शीर्ष अदालत ने कहा कि NGT, विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट से प्रभावित हो गया, जिसमें कहा गया था कि स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही थीं और इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे काम करके अपीलकर्ता (आर्ट ऑफ लिविंग) ने बाढ़ क्षेत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।


    बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम की अनुमति देने पर भड़का कोर्ट

    अदालत ने सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए डीडीए की भी आलोचना की और उसे एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बहाली का काम जारी रखने का निर्देश दिया। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 11 से 13 मार्च, 2016 तक आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में यमुना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में डीएनडी फ्लाईवे के आगे की ओर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।