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  • शरद पूर्णिमा 2026 पर 30 साल बाद दुर्लभ संयोग की चर्चा, हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व

    शरद पूर्णिमा 2026 पर 30 साल बाद दुर्लभ संयोग की चर्चा, हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रमा के दर्शन और रात्रि में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान गुणों वाला माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार 30 साल बाद दुर्लभ शुभ संयोग बनने की चर्चा के चलते भी इस पर्व को लेकर लोगों में उत्सुकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व बताया जा रहा है। इन योगों को पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग को ज्योतिष में विभिन्न शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल समझा जाता है। वहीं, हर्षण योग को प्रसन्नता, उत्साह और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन योगों के प्रभाव से जीवन में होने वाले बदलाव धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं।

    कोजागरी पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन उनकी आराधना के लिए जाग रहा है। इसी मान्यता से कोजागरी नाम जुड़ा है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है’। इस अवसर पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी की पूजा करके घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर रात में जागरण, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी किया जाता है। भक्तों के लिए यह रात पूजा, साधना और धार्मिक आस्था से जुड़ी मानी जाती है।

    चांदनी में खीर रखने की परंपरा

    शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से खीर बनाने तथा उसे रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। इसी विश्वास के आधार पर खीर को चांदनी में रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा देश के कई हिस्सों में श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। हालांकि, चंद्रमा की किरणों में विशेष औषधीय या अमृत जैसे गुण होने की मान्यता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं है।

    शरद पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?

    इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। शाम को चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है और खीर का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

    इस प्रकार शरद पूर्णिमा धार्मिक आस्था, चंद्र उपासना और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा पर्व है। हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग को लेकर बताई जा रही ज्योतिषीय मान्यताएं इस अवसर को विशेष बनाती हैं। वहीं, मां लक्ष्मी की आराधना, भजन-कीर्तन, दान और चांदनी में खीर रखने की परंपरा इस पर्व की प्रमुख विशेषताएं हैं।

  • अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर की वापसी, बोले- अभी और आराम की जरूरत

    अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर की वापसी, बोले- अभी और आराम की जरूरत

    नई दिल्ली । अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कुछ दिनों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद एक बार फिर वापसी की है। उन्होंने अपनी सेहत और आराम को लेकर पहले ही जानकारी दी थी कि उन्हें कुछ समय के लिए बातचीत और लिखने से दूर रहने की सलाह दी गई है। अब करीब तीन दिन बाद उनकी वापसी से प्रशंसकों को राहत मिली है। हालांकि, अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें अभी पूरी तरह सहज होने के लिए और आराम की जरूरत है।

    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखे नए संदेश में बताया कि उन्हें फिलहाल आराम जारी रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी मौजूदा स्थिति के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, वह इंसानी शरीर की विशेषताओं और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में भी विचार कर रहे हैं। उनके इस संदेश से संकेत मिलता है कि वह अभी अपनी दिनचर्या को संभलकर आगे बढ़ा रहे हैं और रिकवरी के लिए समय दे रहे हैं।

    अभिनेता ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी एक छोटा-सा संदेश साझा किया। उन्होंने केवल ‘चलो’ लिखा, जिसके बाद उनके प्रशंसकों को उनकी वापसी की जानकारी मिली। इससे पहले उन्होंने कुछ दिनों तक सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रह पाने के लिए अपने चाहने वालों से माफी मांगी थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें आराम करने और अपनी स्थिति में सुधार लाने के लिए समय निकालने की सलाह दी गई है। इसी कारण वह नियमित रूप से लिख नहीं पा रहे थे और बातचीत भी सीमित रखनी पड़ रही थी।

    अमिताभ बच्चन ने दशहरे के अवसर पर प्रशंसकों को शुभकामनाएं देते हुए भी अपनी स्थिति का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें सख्त आराम करने और रिकवरी पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। इस वजह से वह पहले की तरह अधिक बातचीत नहीं कर सकेंगे। उनके इस संदेश के बाद प्रशंसकों के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब उनके दोबारा सक्रिय होने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अभिनेता ने अभी अपनी पूरी तरह स्वस्थ होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

    अमिताभ बच्चन की सेहत को लेकर चिंता उस समय भी बढ़ी थी, जब उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के सेट पर अपने घुटने में चोट लगने की जानकारी दी थी। अभिनेता ने कार्यक्रम के दौरान बताया था कि शूटिंग से एक दिन पहले वह फिसलकर गिर गए थे, जिससे उनके घुटने में चोट आई थी। उन्होंने बताया था कि आमतौर पर वह मंच के बीच में खड़े होकर अपना संवाद बोलते हैं, लेकिन चोट के कारण उस दिन ऐसा करना मुश्किल हो रहा था।

    हालांकि, उस समय अमिताभ बच्चन ने चोट को बहुत गंभीर नहीं बताया था। फिलहाल उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह घुटने की चोट के कारण दी है या इसका कोई अन्य कारण है। इसलिए उनकी मौजूदा रिकवरी और पहले लगी चोट के बीच संबंध को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिलहाल अभिनेता आराम कर रहे हैं और धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर सक्रिय हो रहे हैं।

  • इंदौर के ट्रैफिक को राहत देने की तैयारी, कुमेड़ी ISBT से शुरू होगा बसों का ट्रायल; पहले राजस्थान-गुजरात के रूट पर संचालन

    इंदौर के ट्रैफिक को राहत देने की तैयारी, कुमेड़ी ISBT से शुरू होगा बसों का ट्रायल; पहले राजस्थान-गुजरात के रूट पर संचालन


    इंदौर । इंदौर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और लंबी दूरी की बसों के संचालन को व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम उठाया जा रहा है। एमआर-10 स्थित कुमेड़ी अंतरराज्यीय बस टर्मिनल यानी ISBT से 28 अक्टूबर से बसों का ट्रायल रन शुरू करने की तैयारी है। शुरुआती चरण में राजस्थान और गुजरात के विभिन्न शहरों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की बसों को नए टर्मिनल से रवाना किया जाएगा। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य टर्मिनल की संचालन व्यवस्था को परखना और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है। ट्रायल के दौरान बसों की आवाजाही से लेकर यात्रियों के आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी ताकि नियमित संचालन शुरू होने से पहले जरूरी कमियों को दूर किया जा सके।

    कुमेड़ी ISBT से बसों का संचालन शुरू होने से इंदौर में लंबी दूरी की बस सेवाओं को एक व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पहले चरण में चुनिंदा मार्गों की बसों को ही नए टर्मिनल से संचालित करने की योजना है। इसके जरिए प्रशासन यह समझने का प्रयास करेगा कि टर्मिनल पर बसों के आने और रवाना होने की व्यवस्था कितनी सुचारु है और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है। ट्रायल के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के आधार पर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। इसके बाद नियमित संचालन को लेकर आगे की योजना बनाई जा सकेगी।

    नए टर्मिनल की तैयारियों में बसों की आवाजाही के साथ यात्रियों की सुविधाओं को भी प्रमुखता दी जा रही है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बसों तक पहुंचने और टर्मिनल से बाहर निकलने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा बस संचालकों के लिए संचालन संबंधी सुविधाओं और यातायात प्रबंधन की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि ट्रायल के दौरान सभी जरूरी पहलुओं की जांच हो जाए ताकि नियमित बस संचालन के समय किसी बड़ी समस्या का सामना न करना पड़े।

    इस संबंध में कलेक्टर शिवम वर्मा ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों और लंबी दूरी की बसों के संचालकों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। बैठक में इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप केरकेट्टा स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्थ जैन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा यातायात पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और एआईसीटीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में टर्मिनल के संचालन यातायात प्रबंधन और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार किया गया।

    बस संचालकों के प्रतिनिधियों ने भी प्रस्तावित ट्रायल रन के लिए मौखिक सहमति दी है। इससे निर्धारित तारीख पर परीक्षण शुरू करने की तैयारियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ट्रायल के दौरान अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की नजर इस बात पर रहेगी कि बसों का संचालन निर्धारित तरीके से हो रहा है या नहीं और यात्रियों को टर्मिनल पर किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं।

    कुमेड़ी ISBT से राजस्थान और गुजरात के लिए बसों का ट्रायल रन इंदौर की परिवहन व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परीक्षण के परिणामों के आधार पर आगे की व्यवस्थाएं तय होंगी। यदि संचालन सुचारु रहता है और जरूरी सुधार समय पर पूरे हो जाते हैं तो नए टर्मिनल से लंबी दूरी की बस सेवाओं को व्यवस्थित रूप से चलाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। हालांकि शुरुआत में किन मार्गों पर कितनी बसें चलेंगी और नियमित संचालन का विस्तार कब होगा इस बारे में आगे की जानकारी का इंतजार रहेगा।

  • शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी जिले: में दीपावली से पहले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लोहे, स्टील और पीवीसी पाइप में कैल्शियम कार्बाइड भरकर तेज धमाका करने वाली इन देसी गनों को बच्चों के लिए खतरनाक माना गया है। प्रशासन ने इनके इस्तेमाल से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    जिले में कार्बाइड गन की कीमत लगभग 150 से 300 रुपये बताई जा रही है। कम कीमत के कारण बच्चे इन्हें खिलौना समझकर खरीद सकते हैं और इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, इन उपकरणों से होने वाला तेज धमाका गंभीर चोटों का कारण बन सकता है। इनमें कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पाइप के भीतर गैस बनती है और उसे प्रज्वलित करने पर जोरदार आवाज के साथ विस्फोट जैसा प्रभाव पैदा होता है।

    ऐसी गनों से निकलने वाली चिंगारी, पाइप के टुकड़े और तेज धमाके के कारण आंखों, चेहरे और कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। अन्य जिलों में इनके इस्तेमाल के दौरान आंखों में गंभीर चोट लगने, चेहरा झुलसने और कान के पर्दे प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई है। इसी तरह की दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए शिवपुरी प्रशासन ने त्योहार से पहले इनकी बिक्री और उपयोग रोकने का निर्णय लिया है।

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इसके अनुसार शिवपुरी जिले की सीमा में कोई भी व्यक्ति, दुकानदार या संस्था प्रतिबंधित कार्बाइड गन और तेज आवाज वाले अवैध पटाखों का निर्माण, भंडारण, खरीद-बिक्री या प्रदर्शन नहीं कर सकेगा। यह आदेश त्योहारों तक प्रभावी रहेगा।

    प्रशासन ने आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी अनुविभागीय दंडाधिकारियों, तहसीलदारों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से पटाखा बाजारों और हार्डवेयर की दुकानों पर निगरानी रखने को कहा गया है। इन दुकानों से पाइप और कार्बाइड जैसी सामग्री उपलब्ध होने की आशंका के कारण जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।

    आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित गन बनाने, बेचने, रखने या चलाने के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करना होगा।

    प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी बाजार, दुकान या अन्य स्थान पर कार्बाइड गन की बिक्री होती दिखाई दे अथवा कोई व्यक्ति इसका इस्तेमाल करता मिले, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या कंट्रोल रूम को देने को कहा गया है। समय पर सूचना मिलने से खतरनाक गतिविधियों को रोकने और संभावित दुर्घटनाओं से बचने में मदद मिल सकती है।

    दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के बीच यह प्रतिबंध बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रशासन का उद्देश्य जिले में कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर रोक लगाकर आंखों, चेहरे और कानों को होने वाली संभावित चोटों का जोखिम कम करना तथा त्योहार के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना को रोकना है।

  • करैरा में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा, शहर काजी पर हमला होने से लोगों में दहशत..

    करैरा में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा, शहर काजी पर हमला होने से लोगों में दहशत..


    शिवपुरी जिले: के करैरा नगर में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से स्थानीय नागरिक परेशान हैं। बंदरों के झुंड घरों, छतों और गलियों में उत्पात मचा रहे हैं, जबकि आवारा कुत्तों के समूहों के कारण लोगों को सड़कों पर आने-जाने में परेशानी हो रही है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि काजी मोहल्ले में शहर काजी मंजरे आलम पर बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद नगर में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, शहर काजी मंजरे आलम अपने घर के आंगन में बैठे थे। इसी दौरान पीछे से आए बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों ने उनके शरीर के कई हिस्सों में काटकर उन्हें घायल कर दिया। घर के आंगन में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, करैरा में लगभग 20 से 25 बंदरों का झुंड अलग-अलग इलाकों में घूमता रहता है। ये बंदर सुबह और शाम के समय गलियों तथा घरों की छतों पर अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। लोगों की शिकायत है कि बंदर सामान उठाकर फेंक देते हैं, महिलाओं के हाथों से थैलियां छीन लेते हैं और बच्चों के पीछे दौड़ते हैं। इस वजह से परिवारों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। नगर की कई गलियों और सड़कों पर कुत्तों के झुंड दिखाई देने से राहगीरों में डर बना रहता है। बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में अभिभावक संकोच कर रहे हैं, जबकि बुजुर्गों को मंदिरों और पार्कों तक जाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, शाम के समय महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    पिछले कुछ दिनों में कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आने की बात भी कही गई है। समस्या तब और बढ़ जाती है, जब पीड़ितों को इलाज के लिए जरूरी एंटी रेबीज इंजेक्शन स्थानीय अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने की शिकायत मिलती है। ऐसी स्थिति में लोगों को उपचार के लिए शिवपुरी जाना पड़ता है। कुत्ते के काटने के बाद समय पर चिकित्सा और रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर उपचार की उपलब्धता भी नागरिकों की प्रमुख चिंता है।

    नागरिकों का आरोप है कि बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर परिषद और सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस कार्रवाई के बजाय आश्वासन ही मिले हैं। लोगों का कहना है कि समस्या लगातार बनी रहने से बच्चों, बुजुर्गों और अन्य राहगीरों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

    स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उचित स्थान पर पहुंचाने के लिए वन विभाग की टीम की मदद ली जाए तथा जरूरत के अनुसार पिंजरे लगाए जाएं। आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कुत्तों के काटने के मामलों को देखते हुए अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब नगरवासियों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग समस्या के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।

  • शिवपुरी में सरकारी चबूतरे पर बैठने को लेकर विवाद, मारपीट के बाद 42 वर्षीय सुरेश की मौत, तीन आरोपी गिरफ्तार

    शिवपुरी में सरकारी चबूतरे पर बैठने को लेकर विवाद, मारपीट के बाद 42 वर्षीय सुरेश की मौत, तीन आरोपी गिरफ्तार

    शिवपुरी जिले: में शासकीय चबूतरे पर बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद एक व्यक्ति की मौत का कारण बन गया। पिछोर अनुविभाग के भौती थाना क्षेत्र के महोबा डामरौन गांव में कथित मारपीट के बाद 42 वर्षीय सुरेश जाटव की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती कार्रवाई में मारपीट की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था, लेकिन सुरेश की मौत के बाद पुलिस ने इसमें हत्या की धारा बढ़ा दी।

    जानकारी के अनुसार, महोबा डामरौन निवासी सुरेश जाटव, पुत्र बाबूलाल जाटव, 20 अक्टूबर की शाम अपने घर के पास स्थित सरकारी चबूतरे पर बैठा था। गांव में पंचायत के इस चबूतरे पर लोग खाली समय में बैठते रहते हैं। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला रामसेवक जाटव अपने दो बेटों कृष्ण कुमार और रोहित के साथ वहां पहुंचा। आरोप है कि तीनों ने सुरेश के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। सुरेश ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया और तीनों ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की।

    घटना के अगले दिन, 21 अक्टूबर को सुरेश शिकायत लेकर भौती थाने पहुंचा। पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। जांच के बाद चिकित्सक ने उसे घर जाने दिया। हालांकि, उसी दिन शाम को सुरेश की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

    सुरेश की मौत की सूचना मिलने पर पुलिस ने दर्ज प्रकरण में हत्या की धारा जोड़ दी। अब पुलिस मारपीट की घटना और उसके बाद हुई मौत के बीच परिस्थितियों की जांच कर रही है। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मौत के वास्तविक कारणों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    पुलिस ने कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी घनश्याम भदौरिया के नेतृत्व में टीम गठित की थी। टीम ने तलाश और दबिश के बाद 23 अक्टूबर को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में रामसेवक जाटव, उम्र 50 वर्ष, पुत्र स्वर्गीय राजाराम जाटव, उसका बेटा कृष्ण कुमार जाटव, उम्र 28 वर्ष, और दूसरा बेटा रोहित जाटव, उम्र 22 वर्ष शामिल हैं। तीनों महोबा डामरौन गांव के निवासी बताए गए हैं।

    मामले की जांच के दौरान सुरेश की दिनचर्या और घटना वाले दिन की परिस्थितियों से जुड़ी कुछ अन्य जानकारियां भी सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक विवेचना में पता चला कि सुरेश नवरात्र के दौरान उपवास रख रहा था और काफी समय से भूखा था। वह शराब का सेवन भी करता था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि उसने मारपीट वाले दिन शराब पी थी। थाने में शिकायत दर्ज कराने और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद घर लौटने पर भी उसने शराब का सेवन किया था।

    इन परिस्थितियों के सामने आने के बाद पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, उपवास और शराब के सेवन की जानकारी अपने आप में मौत का कारण साबित नहीं करती। सुरेश की मौत किन परिस्थितियों में हुई और मारपीट की घटना की उसमें क्या भूमिका रही, इसका निष्कर्ष जांच के तथ्यों और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

    सुरेश के पारिवारिक हालात भी इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। उसकी पत्नी की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। उसका 20 वर्षीय बेटा उससे अलग खोड़ क्षेत्र में रहता था, जबकि सुरेश गांव में अकेला रहता था। उसके भाई सहित अन्य परिजन आसपास रहते थे। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

  • 2017 के बाद कॉलेजों में नहीं चुने गए छात्र प्रतिनिधि, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; सितंबर 2026 में चुनाव कराने का था कार्यक्रम

    2017 के बाद कॉलेजों में नहीं चुने गए छात्र प्रतिनिधि, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; सितंबर 2026 में चुनाव कराने का था कार्यक्रम


    इंदौर । मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस आलोकश कोगजे और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने उच्च शिक्षा विभाग से पूछा है कि सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए पहले दिए गए आदेश के पालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। इस मामले में अब सरकार के जवाब पर नजर रहेगी कि निर्धारित कार्यक्रम के बावजूद चुनाव क्यों नहीं कराए गए और आगे इन्हें लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।

    एडवोकेट आदिश टोंग्या की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। इसके कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी हो गई लेकिन उन्हें अपने संस्थानों में छात्र प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिल सका। याचिका में इस स्थिति को विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्रसंघ विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं सामने रखने और संस्थानों में अपनी आवाज पहुंचाने का मंच उपलब्ध कराते हैं।

    याचिका में उच्च शिक्षा विभाग के 20 जुलाई 2026 के परिपत्र का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक विभाग ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का कार्यक्रम निर्धारित किया था। इसके साथ ही चुनाव की पूरी प्रक्रिया 10 कार्यदिवसों में संपन्न करने की योजना बनाई गई थी। इसके बावजूद चुनाव नहीं होने पर याचिका में सरकारी कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जब चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम तय किया गया था तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ।

    मामले में हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। याचिका के अनुसार उस सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव का प्रावधान शामिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत के सामने प्रस्तुत कैलेंडर में सितंबर 2026 को चुनाव के लिए निर्धारित किया गया था। वर्तमान याचिका में इसी आदेश और घोषित कार्यक्रम के पालन का मुद्दा उठाया गया है। हाईकोर्ट ने अब उच्च शिक्षा विभाग से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है।

    याचिकाकर्ता ने छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराने की मांग की है। याचिका में यूनिवर्सिटी ऑफ केरल बनाम काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स ऑफ कॉलेजेस केरल एवं अन्य मामले का उल्लेख करते हुए छात्रसंघ चुनाव से जुड़े कानूनी पहलुओं की ओर भी अदालत का ध्यान दिलाया गया है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) का हवाला देते हुए विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े अधिकारों का मुद्दा उठाया गया है।

    जनहित याचिका में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश देने के साथ भविष्य में नियमित चुनाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव पी. धनोडकर अदालत में उपस्थित हुए। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को सितंबर 2026 के निर्धारित चुनाव कार्यक्रम पर की गई कार्रवाई और चुनाव नहीं होने के कारणों के बारे में जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
     

  • शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके

    शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके


    शिवपुरी: शहर में नगर पालिका परिषद का सम्मेलन लंबे समय से नहीं होने के कारण विकास कार्यों की मंजूरी और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ रहा है। नियमानुसार नगर पालिका का साधारण सम्मेलन प्रत्येक दो महीने में आयोजित किया जाना चाहिए, लेकिन शिवपुरी में पिछले सात महीनों से परिषद की बैठक नहीं हुई है। इस स्थिति में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में हैं। नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक-दूसरे को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, लेकिन बैठक की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।

    नगर पालिका में सम्मेलन नहीं होने की प्रमुख वजह अध्यक्ष और 20 से अधिक विरोधी पार्षदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद बताया जा रहा है। पार्षदों और अध्यक्ष के बीच कुछ मुद्दों पर करीब दो साल से मतभेद हैं। परिषद की बैठकों के दौरान विरोधी पार्षदों के हंगामे और पहले हुए बहिष्कार के कारण भी बैठक आयोजित करने को लेकर मुश्किलें सामने आती रही हैं। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच शहर के विकास से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं।

    नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर जुलाई में पदस्थ हुए थे। उनके मुताबिक, परिषद सम्मेलन का एजेंडा तैयार कर लिया गया है और बैठक आयोजित करने के संबंध में अध्यक्ष को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। उन्होंने जल्द सम्मेलन कराने की बात कही है। दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि वह सीएमओ को तीन बार पत्र लिखकर सम्मेलन आयोजित करने के लिए कह चुकी हैं। अध्यक्ष के अनुसार, एजेंडे के कुछ बिंदु भी निर्धारित किए जा चुके हैं और उनकी ओर से बैठक बुलाने में कोई बाधा नहीं है। इस तरह दोनों पक्ष सम्मेलन में देरी के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी बता रहे हैं।

    प्रस्तावित सम्मेलन में शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। मड़ीखेड़ा और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट के लिए तीन-तीन मोटरों की दरों को स्वीकृति देने का प्रस्ताव एजेंडे में रखा गया है। इनमें से एक फिल्टर प्लांट की तीन मोटरें आ चुकी हैं और अब उनके संबंध में नगर पालिका से स्वीकृति ली जानी है। इसके अतिरिक्त बस स्टैंड के संचालन के लिए ठेका देने से संबंधित प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा गया है।

    वार्ड नंबर 29, 30 और 35 में पानी की टंकियों के निर्माण पर हुए व्यय से संबंधित प्रस्ताव भी सम्मेलन में शामिल किए जाने हैं। शहर में बाजार बैठक की वसूली, सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए दो नई जेसीबी मशीनों की खरीद तथा दो नए डंपर और एक पोकलेन मशीन खरीदने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के मुद्दे भी लंबित एजेंडे का हिस्सा हैं। इन प्रस्तावों पर निर्णय होने से नगर पालिका के संसाधनों और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इसके अलावा वर्ष 2026-27 में आयोजित होने वाले सिद्धेश्वर वाणगंगा मेले, गांधी पार्क मेले और अन्य मेलों के आयोजन पर भी परिषद में विचार किया जाना है। इन सभी प्रस्तावों पर निर्णय के लिए सम्मेलन आवश्यक है। नगर पालिका में कुछ कार्य बिना पूर्व स्वीकृति के किए जाने और बाद में उनकी मंजूरी लेने की स्थिति भी सामने आई है। इससे परिषद की नियमित बैठक और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    नगर पालिका परिषद के वर्तमान कार्यकाल में करीब दस महीने शेष बताए गए हैं। ऐसे में लंबित प्रस्तावों पर निर्णय लेने और विकास कार्यों को गति देने के लिए परिषद तथा पीआईसी की बैठकें समय पर आयोजित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में लगातार देरी जारी रहने पर शहर की पेयजल व्यवस्था, सफाई, परिवहन सुविधाओं और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष और सीएमओ के बीच पत्राचार के बाद परिषद की बैठक कब आयोजित होती है और लंबित प्रस्तावों पर कब निर्णय लिया जाता है।

  • इंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डर

    इंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डर


    इंदौर । इंदौर में क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास तेंदुए की मौजूदगी से दहशत के बीच वन विभाग को शनिवार को बड़ी सफलता मिली है। उमरिया खुर्द गांव के पास विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में एक नर तेंदुआ कैद हो गया। वन विभाग के अधिकारिइंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डरयों ने जांच के बाद उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है। अब उसे आबादी से दूर जंगल में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। तेंदुए के पकड़े जाने से आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है लेकिन इलाके में चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसकी वजह दो दिन पहले दिखाई दिया वह तेंदुआ है जिसके सिर और चेहरे पर चोट के निशान नजर आए थे। ग्रामीणों को आशंका है कि पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ घायल तेंदुए से अलग हो सकता है। ऐसे में वन विभाग के सामने अब घायल तेंदुए का पता लगाने की चुनौती बनी हुई है।

    जानकारी के मुताबिक क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास स्थित उमरिया खुर्द गांव में गुरुवार को तेंदुआ दिखाई देने के बाद इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई थी। तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग की टीम ने उसकी तलाश शुरू की और उसे सुरक्षित पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए। शनिवार को भोजन की तलाश में एक तेंदुआ पिंजरे के पास पहुंचा और उसमें फंस गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच में पकड़ा गया तेंदुआ नर पाया गया और अधिकारियों के मुताबिक उसकी सेहत सामान्य है। विभाग अब उसे सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर जंगल में छोड़ने की तैयारी कर रहा है।

    तेंदुए के पकड़े जाने से स्थानीय लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है लेकिन ग्रामीणों की चिंता का कारण गुरुवार को सामने आया मामला है। उस दिन एक ग्रामीण के घर के पास तेंदुआ दिखाई दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसके सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे और खून भी नजर आ रहा था। इस घटना के बाद से आसपास के लोगों में डर का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल तेंदुआ अब भी क्षेत्र में कहीं मौजूद हो सकता है। हालांकि वन विभाग ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि पहले दिखाई दिया घायल तेंदुआ और पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ एक ही है या दोनों अलग-अलग हैं।

    इस अनिश्चितता के चलते वन विभाग की टीमें आसपास के इलाकों में निगरानी बनाए हुए हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता पकड़े गए तेंदुए को सुरक्षित जंगल में पहुंचाने के साथ ही घायल तेंदुए की संभावित मौजूदगी का पता लगाना है। जब तक घायल तेंदुए की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक ग्रामीणों की चिंता पूरी तरह दूर होना मुश्किल है।

    डीएफओ लाल सुधाकर सिंह के मुताबिक पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ है और उसे दूरस्थ जंगल में छोड़ा जाएगा। वन विभाग का प्रयास है कि वन्यजीव को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पहुंचाया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों में किसी तरह की अनहोनी की आशंका को कम किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर इंदौर के आसपास के इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही और ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और तेंदुआ दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे घेरने के बजाय वन विभाग को सूचना देने की जरूरत है।

  • शिवपुरी में नारी इन साड़ी प्रतियोगिता का आयोजन, रैंप वॉक में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों से बिखेरा आकर्षण

    शिवपुरी में नारी इन साड़ी प्रतियोगिता का आयोजन, रैंप वॉक में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों से बिखेरा आकर्षण

    शिवपुरी में करवाचौथ के अवसर पर भारतीय परंपरा, पारंपरिक परिधानों और महिलाओं की प्रतिभा को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुरुवार को कमलागंज स्थित होटल शगुन वाटिका में करवाचौथ मेले के साथ ‘नारी इन साड़ी’ सौंदर्य प्रतियोगिता संपन्न हुई। ‘नारी की शान है साड़ी’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने साड़ी पहनकर रैंप वॉक की और अपने आत्मविश्वास, व्यक्तित्व तथा भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव का प्रदर्शन किया। आयोजन महिला समन्वय एवं विश्व मांगल्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

    कार्यक्रम में प्रतियोगिता के साथ खरीदारी और उत्सव से जुड़ी गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में आर्टिफिशियल ज्वेलरी, फैशनेबल एवं डिजाइनर सूट, साड़ियां, करवाचौथ की पूजन सामग्री और घर की सजावट से संबंधित सामान के स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा नमकीन, पापड़ तथा खानपान से जुड़े विभिन्न उत्पाद भी उपलब्ध रहे। जलपान के लिए छोटे-छोटे स्टॉल लगाए गए थे, जहां लोगों को खरीदारी के साथ खानपान के विकल्प मिले।

    इस मेले में शिवपुरी के दुकानदारों के अलावा करेरा, झांसी, ग्वालियर और इंदौर से भी व्यापारी पहुंचे। विभिन्न शहरों से आए दुकानदारों की भागीदारी के कारण मेले में अलग-अलग तरह के उत्पाद देखने और खरीदने का अवसर मिला। आयोजन में करवाचौथ की तैयारियों से जुड़ी सामग्री के साथ महिलाओं की रुचि के अनुरूप परिधान और सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शित की गईं।

    प्रतियोगिता में लगभग 15 महिलाओं ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने साड़ी पहनकर रैंप वॉक की और अपनी प्रस्तुति के माध्यम से व्यक्तित्व तथा आत्मविश्वास का परिचय दिया। प्रतियोगिता में नवनीता जैन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कुमारी ऋतु दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि ग्वालियर की विनीता ने तीसरा स्थान हासिल किया। अपनी प्रस्तुति से अलग पहचान बनाने वाली रुपाली सोनी को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।

    प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार भी निर्धारित किए गए थे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली नवनीता जैन को 5,100 रुपये, द्वितीय स्थान पर रहीं ऋतु को 3,100 रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली विनीता को 2,100 रुपये दिए गए। विशेष पुरस्कार के रूप में रुपाली सोनी को 1,100 रुपये की राशि प्रदान की गई। पुरस्कार महिला समन्वय की अध्यक्ष डॉ. सुषमा पांडेय और विश्व मांगल्य सभा की अध्यक्ष विभा रघुवंशी ने वितरित किए।

    कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण साक्षी अग्रवाल की प्रस्तुति रही। वह अपने दोनों बच्चों के साथ रैंप वॉक करती नजर आईं। उनकी इस प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान दर्शकों से तेजी से सवाल पूछने की गतिविधि भी आयोजित की गई। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत विश्व मांगल्य सभा के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। शांति गीत सुमन तिवारी और राधा सूर्यवंशी ने प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. आकांक्षा गौड़, दीपा शर्मा और दिव्या व्यास शामिल रहीं। मंच संचालन मणिका शर्मा ने किया। समापन पर निर्णायकों को स्मृति चिह्न स्वरूप उपहार भेंट किए गए, जबकि प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।