Blog

  • श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश

    श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के 2017 के उस आदेश को शनिवार को रद्द कर दिया, जिसमें साल 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव (World Culture Festival) के कारण यमुना (Yamuna) के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्रीश्री रविशंकर (Sri Sri Ravi Shankar) के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ (‘Art of Living Foundation’) को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को फाउंडेशन द्वारा जमा किए गए पांच करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे को भी वापस करने का निर्देश दिया और इसके लिए उसे चार सप्ताह का समय भी दिया।

    यमुना के बाढ़ क्षेत्र डीएनडी फ्लाईवे में गंदगी फैलाने के आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग को क्लीन चिट देते हुए जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे पता चलता है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सौंपे जाने से पहले ही कार्यक्रम स्थल खराब स्थिति में था। पीठ ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री वास्तव में यह साबित करती है कि यदि कोई नुकसान हुआ भी है, तो उसके लिए अपीलकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता…।’


    सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 9 साल पुराना फैसला

    पीठ ने कहा, ‘सात दिसंबर 2017 के फैसले को रद्द किया जाता है और इसके परिणामस्वरूप अपीलकर्ता के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों और अंतरिम आदेशों को भी निरस्त किया जाता है। अपीलकर्ता नौ मार्च 2016 के अधिकरण के आदेश के अनुपालन में डीडीए के पास जमा की गई पांच करोड़ रुपए की राशि वापस पाने का हकदार है। डीडीए आज से चार सप्ताह के भीतर यह राशि वापस करेगा।’


    NGT ने दिया था 5 करोड़ रुपए DDA को देने का आदेश

    शीर्ष अदालत ने यह आदेश ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़े ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की ओर से दायर एक अपील पर दिया। एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि कार्यक्रम से बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।


    कोर्ट बोला- रिपोर्ट से पूरी तरह प्रभावित हो गया था NGT

    शीर्ष अदालत ने कहा कि NGT, विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट से प्रभावित हो गया, जिसमें कहा गया था कि स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही थीं और इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे काम करके अपीलकर्ता (आर्ट ऑफ लिविंग) ने बाढ़ क्षेत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।


    बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम की अनुमति देने पर भड़का कोर्ट

    अदालत ने सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए डीडीए की भी आलोचना की और उसे एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बहाली का काम जारी रखने का निर्देश दिया। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 11 से 13 मार्च, 2016 तक आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में यमुना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में डीएनडी फ्लाईवे के आगे की ओर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

  • Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान

    Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान


    धनबाद।
    झारखंड (Jharkhand) के धनबाद (Dhanbad) में जमीन धंसने (Land subsidence) की एक और घटना सामने आई है। बस्ताकोला क्षेत्र (Bastakola area) अंतर्गत बंद झरिया आरएसपी कॉलेज के समीप स्थित कामिनी कल्याण बस्ती में शनिवार की दोपहर जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई। इससे करीब एक दर्जन घरों में दरार पड़ गई। घटना से पूरी बस्ती में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। इस घटना के बाद लोग अपने घरों से निकलकर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

    भू-धंसान इतना भीषण था कि कई घरों की भूमिगत पाइपलाइन टूट गई, जिससे बस्ती में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। माइंस रेस्क्यू की पूरी तकनीकी टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटना से आक्रोशित लोगों ने झरिया-धनबाद मुख्य मार्ग पर आकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इससे मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    मेयर संजीव सिंह सबसे पहले पहुंचे। उन्होंने बीसीसीएल अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू करने के लिए कहा। इसके बाद बस्ताकोला जीएम एसके गायकवाड़ और राजापुर परियोजना पदाधिकारी एम कुंडू पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों के साथ वार्ता की। मौके पर सिंदरी डीएसपी प्रकाश चंद महतो दलबल के साथ मौजूद थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कार्रवाई का भरोसा देकर किसी तरह शांत कराया।


    मेयर संजीव के समझाने पर शांत हुए प्रभावित

    मेयर संजीव सिंह ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। कहा कि सभी प्रभावितों को सुरक्षित जगहों पर बसाया जाएगा। तत्काल राहत के तौर पर मेयर ने बेघर हुए आशीष रवानी, निरंजन रवानी, बेबी देवी और विश्वजीत दे के परिवार को रात गुजारने के लिए बस्ताकोला रेस्क्यू स्कूल स्थित जीएम ऑफिस में रहने की व्यवस्था कराई।

  • डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के बीच डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी ही दिखाई देती है, इसलिए मरीज और परिवार के लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी जैसी शिकायतें डेंगू में देखी जा सकती हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी होता है।

    डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। ऐसे में पानी जमा होने वाली जगहों की नियमित सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। दिन के समय भी मच्छरों से बचने के लिए शरीर को ढककर रखना और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।

    डेंगू के मरीज में कमजोरी और शरीर में दर्द होना आम लक्षण हो सकते हैं, लेकिन अगर कमजोरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए और मरीज को उठने-बैठने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या तेजी से बिगड़ती तबीयत भी चिकित्सकीय मदद लेने का संकेत हो सकती है।

    तेज बुखार के साथ पेट में गंभीर दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द होना भी चिंता का कारण है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल संतुलन और रक्तसंचार से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार पेट दर्द या असामान्य बेचैनी होने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।

    सांस सामान्य से बहुत तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक उपचार तय किया जा सकता है।

    नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून दिखाई देना अथवा मल में रक्त आना भी डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बुखार के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अत्यधिक रक्तस्राव गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

    डेंगू के इलाज में आमतौर पर लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना अधिक सुरक्षित है।

    बरसात में डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले, टंकियों और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। बुखार आने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चेतावनी संकेत दिखाई देने पर घरेलू देखभाल तक सीमित रहना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    नई दिल्ली ।अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की सड़कों पर भारतीय ऑटो रिक्शा दिखाई देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में सड़क पर कई पीले-काले रंग के ऑटो रिक्शा एक के बाद एक गुजरते नजर आते हैं। भारत में रोजमर्रा के परिवहन का हिस्सा माने जाने वाले इन वाहनों को विदेश की सड़क पर देखकर वीडियो बनाने वाला भारतीय शख्स भी हैरान रह गया।

    वीडियो में दिखाई दे रहे ऑटो का रंग और डिजाइन भारतीय शहरों में आम तौर पर नजर आने वाले वाहनों जैसा है। खास बात यह है कि इनकी मौजूदगी काबुल की सड़क पर एक साथ दिखाई देती है। यही वजह है कि सामान्य परिवहन का यह दृश्य भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के लिए खास बन गया और वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

    वीडियो में भारतीय व्यक्ति एक ऑटो चालक से बातचीत करता हुआ नजर आता है। वह चालक से पूछता है कि क्या यह ऑटो भारत में बना हुआ है। इसके जवाब में अफगान चालक हामी भरता है। बातचीत के दौरान भारतीय शख्स अपनी खुशी जाहिर करते हुए भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर प्रतिक्रिया देता है। यह छोटा संवाद वीडियो को और दिलचस्प बना देता है।

    भारत में ऑटो रिक्शा केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का हिस्सा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों और कस्बों तक कम दूरी की यात्राओं के लिए इनका इस्तेमाल व्यापक रूप से किया जाता है। बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्थानीय इलाकों के बीच आवागमन में ऑटो रिक्शा आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

    इन वाहनों की उपयोगिता का एक बड़ा कारण उनका छोटा आकार और अपेक्षाकृत कम लागत वाला परिवहन है। संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी ऑटो रिक्शा आसानी से चल सकते हैं। इसी वजह से तीन पहिया वाहन भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी स्थानीय परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बने हैं।

    काबुल से सामने आए इस वीडियो ने लोगों की दिलचस्पी इस बात में बढ़ा दी कि भारतीय ऑटो वहां तक कैसे पहुंचे। हालांकि वीडियो में इन वाहनों के आयात, निर्माता, मॉडल, संख्या या अफगानिस्तान में इनके इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए केवल वायरल वीडियो के आधार पर इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोगों ने भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर उत्साह जताया। कुछ यूजर्स ने इसे भारत की रोजमर्रा की चीजों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से जोड़ा, जबकि कई लोगों ने पीले-काले ऑटो को देखकर अपनी परिचित सड़कों की याद साझा की।

    विदेश में किसी भारतीय वाहन को चलते देखना भारतीय दर्शकों के लिए इसलिए भी आकर्षक होता है क्योंकि ऑटो रिक्शा देश के सार्वजनिक परिवहन की एक पहचान बन चुका है। भारत में लाखों यात्रियों के लिए यह कम दूरी का सुविधाजनक और अपेक्षाकृत किफायती साधन है।

    काबुल की सड़क पर दिखाई दे रहे ऑटो रिक्शा का वीडियो किसी बड़े घटनाक्रम की तस्वीर नहीं दिखाता, लेकिन भारत से दूर परिचित वाहनों की मौजूदगी इसे सोशल मीडिया के लिए रोचक जरूर बना रही है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला यही दृश्य लोगों के बीच चर्चा और उत्सुकता का कारण बना हुआ है।

  • तापसी की एक टिप्पणी से भड़कीं कंगना रनौत माता पिता तक पहुंची जुबानी जंग फिर याद आया सस्ती कॉपी वाला विवाद

    तापसी की एक टिप्पणी से भड़कीं कंगना रनौत माता पिता तक पहुंची जुबानी जंग फिर याद आया सस्ती कॉपी वाला विवाद


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और तापसी पन्नू के बीच वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दोनों अभिनेत्रियों के बीच लंबे समय से चली आ रही जुबानी तकरार ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब तापसी पन्नू ने इंडिया टुडे वुमन समिट 2026 में कंगना के साथ अपने बिगड़े रिश्ते को लेकर बात की। तापसी के बयान के कुछ ही घंटे बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की और तापसी पर बेहद तीखा हमला बोला। इस बार विवाद सिर्फ दोनों अभिनेत्रियों तक सीमित नहीं रहा बल्कि कंगना ने तापसी की परवरिश और उनके माता पिता तक पर सवाल खड़े कर दिए।

    दरअसल समिट के दौरान तापसी से कंगना के साथ रिश्ते सुधरने को लेकर सवाल पूछा गया था। जवाब में तापसी ने कहा कि वह कभी कंगना से मिली ही नहीं हैं। उन्होंने कंगना के बारे में कुछ कहने से इनकार करते हुए इशारों में कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में इस तरह बात करना उसकी परवरिश और उसके नजरिए को दिखाता है। तापसी ने यह भी कहा कि लोग खुद देख सकते हैं कि कौन कहां से आता है। तापसी ने अपनी बात यहीं खत्म कर दी लेकिन उनका यह बयान कंगना को पसंद नहीं आया।

    तापसी की टिप्पणी सामने आने के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तापसी को एक बार फिर सस्ती कॉपी कहकर निशाना बनाया। कंगना ने आरोप लगाया कि तापसी मीडिया के सामने जब भी आती हैं तो उनके पास बात करने के लिए कंगना रनौत के नाम के अलावा कुछ नहीं होता। कंगना ने कहा कि इस बार तापसी ने उनकी परवरिश और माता पिता का मजाक उड़ाने की हद पार कर दी है। कंगना ने यह भी कहा कि वह आमतौर पर किसी बहस में सामने वाले के माता पिता को शामिल नहीं करतीं क्योंकि उनका मानना है कि हर माता पिता अपने बच्चों के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं।

    हालांकि इसके बाद कंगना ने तापसी के माता पिता को लेकर भी तीखी टिप्पणी कर दी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर तापसी के माता पिता उनके माता पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर पाए और ऐसी सस्ती कॉपी क्यों पैदा हुई। कंगना की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों अभिनेत्रियों के पुराने विवाद की चर्चा फिर तेज हो गई है। उनके बयान को लेकर प्रशंसक और सोशल मीडिया यूजर्स भी अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    कंगना और तापसी के बीच यह विवाद नया नहीं है। इसकी जड़ करीब सात साल पुरानी है। वर्ष 2019 में कंगना की फिल्म जजमेंटल है क्या के ट्रेलर की तापसी ने तारीफ की थी लेकिन उस दौरान कंगना का नाम नहीं लिया था। इसके बाद कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को सस्ती कॉपी कहकर निशाना बनाया था। बाद में वर्ष 2020 में बॉलीवुड में नेपोटिज्म और आउटसाइडर्स की बहस के दौरान कंगना ने तापसी को B-ग्रेड एक्ट्रेस और जरूरतमंद आउटसाइडर तक कह दिया था।

    इतने वर्षों के बाद तापसी ने अब इस पुराने विवाद पर अपनी बात रखी तो एक बार फिर दोनों के बीच जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। तापसी ने जहां अपने बयान में कंगना का नाम लेकर सीधे हमला करने से बचने की कोशिश की वहीं कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए खुलकर जवाब दिया। अब इस नए विवाद के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि तापसी पन्नू कंगना के इस तीखे पलटवार पर कोई प्रतिक्रिया देती हैं या फिर मामले को यहीं खत्म करना पसंद करेंगी।

  • निज्जर हत्याकांड पर कथित बातचीत सामने आई, गोल्डी बराड़ ने हत्या के पीछे दुश्मनी और नेटवर्क का जिक्र किया

    निज्जर हत्याकांड पर कथित बातचीत सामने आई, गोल्डी बराड़ ने हत्या के पीछे दुश्मनी और नेटवर्क का जिक्र किया

    नई दिल्ली ।कनाडा में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कथित तौर पर सामने आए एक ऑडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। वायरल ऑडियो में भारत में वांटेड गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को खालिस्तानी आतंकवादी परमजीत सिंह पम्मा से बातचीत करते हुए सुना जाने का दावा किया जा रहा है। बातचीत में बराड़ ने कथित तौर पर निज्जर की हत्या कराने की जिम्मेदारी लेने और इसके पीछे कई कारण बताए हैं।

    कथित ऑडियो में बराड़ ने निज्जर को अपना विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि वह उसके दुश्मनों की मदद कर रहा था। बातचीत के दौरान उसने दावा किया कि निज्जर ने उसके विरोधी अर्श डाला को छिपने में सहायता दी, हथियारों की व्यवस्था कराने और नेटवर्क तैयार करने में मदद की। बराड़ ने यह भी आरोप लगाया कि निज्जर ने उसकी टीम से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी विरोधियों तक पहुंचाई थी।

    ऑडियो में बराड़ ने निज्जर पर युवाओं को नशे के कारोबार में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार, निज्जर कथित तौर पर कम उम्र के युवाओं को ड्रग्स की बिक्री के लिए तैयार करता और दबाव या ब्लैकमेल के जरिए उनका इस्तेमाल करता था। हालांकि, ऑडियो में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें कथित बातचीत में बराड़ के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    बराड़ ने कथित बातचीत में कहा कि निज्जर द्वारा उसके विरोधियों की लगातार मदद किए जाने के बाद उसकी टीम ने उसे निशाना बनाया। उसने यह भी दावा किया कि निज्जर के कारण उसकी गैंग से जुड़े कई लोग जेल पहुंचे थे। बातचीत में हत्या को लेकर जिम्मेदारी का दावा किए जाने से यह ऑडियो सामने आने के बाद निज्जर हत्याकांड पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

    हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित भूमिका के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था और कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

    निज्जर लंबे समय से भारत की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। उसे भारत सरकार ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था। उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही थी। 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया था। निज्जर पर खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़े होने और भारत में हिंसक गतिविधियों की साजिश से संबंधित आरोप लगाए गए थे।

    निज्जर की हत्या के बाद कनाडा में जांच आगे बढ़ी और कई संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इसी बीच गोल्डी बराड़ का नाम भी हत्याकांड की जांच से जुड़े आरोपों में सामने आता रहा है। कथित नए ऑडियो में बराड़ द्वारा हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा मामले की जांच और पहले सामने आए आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन केवल किसी लीक रिकॉर्डिंग के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    इस पूरे मामले में ऑडियो की प्रामाणिकता, बातचीत की तारीख, रिकॉर्डिंग के संदर्भ और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी। निज्जर हत्याकांड भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों से जुड़ा संवेदनशील मामला रहा है और सामने आए किसी भी नए दावे का मूल्यांकन उपलब्ध साक्ष्यों तथा आधिकारिक जांच के आधार पर ही किया जाना जरूरी है।

  • पेट के दाईं हिस्से में दर्द है तो रहें सावधान गैस नहीं इन गंभीर बीमारियों का भी हो सकता है इशारा

    पेट के दाईं हिस्से में दर्द है तो रहें सावधान गैस नहीं इन गंभीर बीमारियों का भी हो सकता है इशारा


    नई दिल्ली। पेट में दर्द होना आम समस्या है और अक्सर लोग इसे गैस अपच या ज्यादा खाना खाने की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासतौर पर पेट के दाईं तरफ दर्द होने पर कई लोग बिना जांच के गैस की दवा ले लेते हैं लेकिन ऐसा करना हर बार सही नहीं होता। पेट के दाईं हिस्से में होने वाला दर्द कई बार शरीर के महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। इसके पीछे गैस और कब्ज जैसी सामान्य समस्या से लेकर पित्ताशय की पथरी अपेंडिसाइटिस किडनी की पथरी लिवर से जुड़ी बीमारी और आंतों के संक्रमण तक कई कारण हो सकते हैं। इसलिए दर्द को केवल उसकी जगह देखकर नहीं बल्कि उसकी तीव्रता अवधि और साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों के आधार पर समझना जरूरी है।

    पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में लिवर और पित्ताशय जैसे महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं। अगर इस हिस्से में दर्द खासकर तला भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद बढ़ता है और पीठ या दाएं कंधे तक महसूस होता है तो यह पित्ताशय में पथरी की ओर संकेत कर सकता है। ऐसे मामलों में मतली और उल्टी भी हो सकती है। वहीं दर्द के साथ बुखार या आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे तो लिवर या पित्त नलिकाओं से जुड़ी परेशानी की संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए।

    पेट के निचले दाएं हिस्से में अचानक बढ़ने वाला दर्द अपेंडिसाइटिस का संकेत भी हो सकता है। कई बार इसकी शुरुआत नाभि के आसपास दर्द से होती है और धीरे धीरे दर्द दाईं निचली तरफ केंद्रित होने लगता है। चलने खांसने या शरीर को हिलाने पर दर्द बढ़ सकता है। इसके साथ भूख कम लगना मतली उल्टी और बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे दर्द को गैस समझकर लगातार दवा लेते रहना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि गंभीर अपेंडिसाइटिस में अपेंडिक्स के फटने जैसी जटिलता हो सकती है।

    दाईं तरफ पेट या कमर में होने वाला दर्द किडनी की पथरी या मूत्र मार्ग की समस्या से भी जुड़ा हो सकता है। यदि दर्द पीठ या कमर की तरफ फैल रहा है और पेशाब करते समय जलन पेशाब में खून या बार बार पेशाब आने जैसी समस्या भी है तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। दूसरी ओर गैस कब्ज या आंतों की सामान्य परेशानी में पेट फूलना ऐंठन भारीपन और मल त्याग में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं और कई बार मल त्याग के बाद राहत भी मिल जाती है।

    इसलिए पेट के दाईं तरफ होने वाले दर्द को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि दर्द कब शुरू हुआ लगातार है या रुक रुककर हो रहा है और उसके साथ कौन से दूसरे लक्षण मौजूद हैं। तेज या लगातार बढ़ता दर्द बुखार बार बार उल्टी मल में खून पीलापन बेहोशी या पेट में अत्यधिक जकड़न जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच के साथ खून और पेशाब की जांच या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच करा सकते हैं। सही समय पर कारण की पहचान होने से गंभीर बीमारी और संभावित जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।

  • हरिद्वार के जंगलों में छिपा कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, जहां शिव बारात और रहस्यमयी पेड़ से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    हरिद्वार के जंगलों में छिपा कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, जहां शिव बारात और रहस्यमयी पेड़ से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    नई दिल्ली ।हरिद्वार के आसपास धार्मिक आस्था से जुड़े कई ऐसे स्थल मौजूद हैं, जिनसे पौराणिक कथाएं और स्थानीय लोकमान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर का नाम भी लिया जाता है। श्यामपुर और सज्जनपुर पीली क्षेत्र के पास राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के साथ अपनी रहस्यमयी लोककथाओं के लिए भी जाना जाता है।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर में मौजूद शिवलिंग किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि यह स्वयं जमीन से प्रकट हुआ था। श्रद्धालुओं के बीच इसे स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर से भी लोग मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से संबंधित है। लोककथा के अनुसार जब भगवान शिव कैलाश से माता पार्वती से विवाह करने के लिए बारात लेकर निकले थे, तब उनकी बारात इस स्थान पर रुकी थी। शिव की बारात में देवताओं के साथ उनके गण और विभिन्न अलौकिक शक्तियों के शामिल होने की मान्यता बताई जाती है।

    कहा जाता है कि शिव बारात के दौरान उनके गणों ने यहां भांग तैयार करने के लिए कुंडी और सोटे का इस्तेमाल किया था। इसी लोकविश्वास के आधार पर इस स्थान का नाम कुंडी सोटेश्वर पड़ने की कथा प्रचलित है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता आज भी सुनाई जाती है और मंदिर की पहचान से इसका विशेष संबंध माना जाता है।

    मंदिर के आसपास मौजूद एक पुराने पेड़ को लेकर भी एक अलग लोककथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार शिव की बारात में शामिल कुछ भूत-प्रेत और गण यहां रुकने के दौरान बारात से अलग हो गए थे। कहा जाता है कि भांग के नशे में मस्त रहने के कारण वे आगे नहीं जा सके और बाद में इसी पेड़ के आसपास उनका ठिकाना बन गया।

    इसी मान्यता के कारण स्थानीय लोग इस पेड़ को सामान्य पेड़ से अलग धार्मिक और रहस्यमयी नजरिए से देखते हैं। कई लोग इसके बेहद करीब जाने से भी बचते हैं। हालांकि इन कथाओं का आधार धार्मिक लोकविश्वास है और इनके संबंध में किसी वैज्ञानिक प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस पेड़ से जुड़ी एक और परंपरा स्थानीय स्तर पर बताई जाती है। मान्यता है कि यहां शिवगणों के लिए भोजन रखा जाता है। स्थानीय विश्वास के अनुसार भोजन रखने की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और माना जाता है कि अदृश्य शक्तियां इसे ग्रहण करती हैं। इसी वजह से मंदिर और पेड़ से जुड़ी कथा श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के बीच आकर्षण का विषय बनी हुई है।

    कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता इसकी प्राकृतिक स्थिति भी है। जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में धार्मिक आस्था और प्रकृति का अलग वातावरण दिखाई देता है। हालांकि मंदिर से जुड़ी शिव बारात, स्वयंभू शिवलिंग और रहस्यमयी पेड़ की कथाएं स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें ऐतिहासिक तथ्य के बजाय लोकपरंपरा के रूप में देखना उचित है।

  • रक्षाबंधन 2026 पर राखी खरीदते समय रखें डिजाइन का ध्यान, जानिए भगवान की तस्वीर से काले धागे तक क्या मान्यताएं हैं

    रक्षाबंधन 2026 पर राखी खरीदते समय रखें डिजाइन का ध्यान, जानिए भगवान की तस्वीर से काले धागे तक क्या मान्यताएं हैं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प से जुड़ा माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में राखी को केवल धागा नहीं माना जाता, बल्कि इसके रंग, डिजाइन और उस पर बने प्रतीकों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

    राखी खरीदते समय बाजार में कई तरह के डिजाइन देखने को मिलते हैं। इनमें देवी-देवताओं की तस्वीर वाली राखी, ॐ और स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्नों वाली राखी, सूती या रेशमी धागे की राखी के अलावा बच्चों के लिए कार्टून और आधुनिक डिजाइन भी शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन सभी का महत्व एक जैसा नहीं माना जाता।

    भगवान गणेश, भगवान कृष्ण या भगवान हनुमान की तस्वीर वाली राखी को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी राखी भाई के जीवन में ईश्वर की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक बन सकती है। हालांकि धार्मिक चित्र वाली राखी को रक्षाबंधन के बाद सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है और उसे इधर-उधर फेंकने से बचने की परंपरा बताई जाती है।

    ॐ और स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्नों वाली राखी को भी धार्मिक दृष्टि से सकारात्मक माना जाता है। इन प्रतीकों का संबंध मंगल, शांति और समृद्धि से जोड़ा जाता है। ऐसी राखी चुनने वाले लोग इसकी पवित्रता और साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं। धार्मिक प्रतीकों वाली वस्तुओं को सम्मान के साथ रखने की परंपरा भी भारतीय संस्कृति में रही है।

    साधारण सूती या रेशमी धागे की राखी को सबसे पारंपरिक विकल्पों में माना जाता है। इसमें किसी विशेष सजावट की जरूरत नहीं होती और यह भाई-बहन के स्नेह तथा रिश्ते की सरलता का प्रतीक मानी जाती है। पारंपरिक रूप से सादे और पवित्र धागे को रक्षाबंधन की भावना से जोड़ा जाता है।

    बच्चों के बीच कार्टून और फैंसी राखियों का चलन काफी बढ़ा है। अलग-अलग पात्रों और आकर्षक आकृतियों वाली ऐसी राखियां बच्चों को पसंद आती हैं। हालांकि धार्मिक दृष्टि से इनका कोई विशेष महत्व नहीं माना जाता। इन्हें मुख्य रूप से पसंद और सुविधा के आधार पर चुना जा सकता है।

    इवल आई यानी नजर से बचाने वाले प्रतीक वाली राखियों को लेकर भी अलग-अलग धारणाएं हैं। आधुनिक मान्यताओं में इसे बुरी नजर से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पारंपरिक वैदिक मान्यताओं में इसका कोई अनिवार्य धार्मिक महत्व नहीं है। इसलिए इसे न पूरी तरह शुभ माना जाता है और न ही अशुभ।

    काली राखी को लेकर कुछ धार्मिक मान्यताओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसी तरह टूटी, खंडित या बहुत नुकीली डिजाइन वाली राखी से बचने की बात कही जाती है। राखी बांधते समय उसके टूट जाने को भी कुछ परंपराओं में अपशकुन माना जाता है। प्लास्टिक से बनी राखियों को लेकर भी पारंपरिक पसंद कम बताई जाती है।

    हालांकि राखी के शुभ या अशुभ प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ये बातें मुख्य रूप से धार्मिक विश्वास, ज्योतिषीय मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित हैं। इसलिए राखी चुनते समय भाई-बहन के रिश्ते की भावना, पसंद और सुविधा को प्राथमिकता देना सबसे महत्वपूर्ण है।

  • E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस

    E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस


    नई दिल्ली। E20 फ्यूल पॉलिसी और चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से पहले एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने दिल्ली पुलिस पर उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देने का आरोप लगाया है। पूनावाला का दावा है कि शनिवार को पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर जाने से रोक दिया।

    पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई वीडियो शेयर किए हैं। इनमें वह पुलिसकर्मियों से सवाल करते नजर आ रहे हैं कि उन्हें जंतर-मंतर जाने से क्यों रोका जा रहा है। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहता नजर आता है कि प्रदर्शन स्थल पर उनके पहुंचने से समर्थक जुट सकते हैं और भीड़ में कुछ गलत लोग शामिल हो सकते हैं। पूनावाला ने इस पर सवाल उठाया कि महज आशंका के आधार पर पुलिस किसी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने से कैसे रोक सकती है।

    ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं, कोई दस्तावेज नहीं मिला’
    पूनावाला ने इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में दावा किया कि उनके सिटिजन एडवोकेसी ग्रुप ‘टीम भारत’ ने चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं। कोई दस्तावेज नहीं दिया गया है।’ पूनावाला ने पुलिसकर्मियों पर तंज कसते हुए उन्हें गन्ने का जूस भी ऑफर किया। इसका वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीनी और एथेनॉल से जुड़ी नीतियां आगे बढ़ रही हैं, आने वाले समय में गन्ने का जूस भी महंगा हो सकता है।

    E20 नीति को लेकर भी विरोध
    पूनावाला का विरोध केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर भी है। इस नीति के तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने का प्रावधान है। पूनावाला का आरोप है कि एथेनॉल और चीनी से जुड़ी नीतियों का असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने इन नीतियों को ‘शुगर स्कैम’ और ‘एथेनॉल स्कैम’ बताते हुए दावा किया कि इससे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के परिवारों को फायदा पहुंच रहा है।

    हालांकि, पूनावाला द्वारा साझा किए गए वीडियो में पुलिस की ओर से उन्हें नजरबंदी या हिरासत का कोई लिखित आदेश देते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें जंतर-मंतर नहीं जाने की बात कहते हुए संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते नजर आते हैं।

    पहले भी पुलिस से हुआ है टकराव
    E20 के विरोध को लेकर पूनावाला और दिल्ली पुलिस के बीच पहले भी टकराव हो चुका है। 31 जुलाई को उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम रोड से तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति तक अकेले मार्च और दिनभर की भूख हड़ताल का ऐलान किया था।

    इससे पहले भी उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस ने संसद तक ‘टीम भारत’ की प्रस्तावित ‘गाड़ी मार्च’ को अनुमति नहीं दी थी। पूनावाला का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है और सरकार की चीनी तथा एथेनॉल नीति पर सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।