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  • इंदौर में आने वाले समय में गहरा सकता है जलसंकट, कैलाश विजयवर्गीय ने दी चेतावनी; बोले- नर्मदा का जलस्तर बनाए रखना जरूरी

    इंदौर में आने वाले समय में गहरा सकता है जलसंकट, कैलाश विजयवर्गीय ने दी चेतावनी; बोले- नर्मदा का जलस्तर बनाए रखना जरूरी


    इंदौर । इंदौर में आने वाले समय में जलसंकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे देखते हुए प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों को अभी से पानी की कमी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शहर में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि भविष्य में पानी की संभावित कमी से निपटने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। विजयवर्गीय ने नर्मदा नदी के घटते जलस्तर पर भी चिंता जताई और कहा कि नदी का निर्धारित स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि जलस्तर नीचे जाने पर पंपिंग प्रभावित हो सकती है। इससे इंदौर में पानी की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय शुक्रवार को इंदौर के कुशवाह नगर चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यहां कुशवाह नगर मेन रोड के निर्माण कार्य और अमृत 2.0 योजना के तहत नर्मदा लाइन बिछाने के काम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने शहर में भविष्य में पैदा होने वाली पानी की समस्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आने वाला समय सभी के लिए जलसंकट की चुनौती लेकर आ सकता है। ऐसे में केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे बल्कि जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को भी पानी बचाने की जिम्मेदारी समझनी होगी।

    विजयवर्गीय ने कहा कि वह अपने स्तर पर पानी बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और सभी जनप्रतिनिधियों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करेंगे। उन्होंने नर्मदा नदी के जलस्तर को लेकर कहा कि यदि पानी निर्धारित स्तर से नीचे चला जाता है तो पंपिंग की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए नर्मदा परियोजना और हाइड्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ भोपाल में बैठक करने की योजना है। बैठक में नदी का जरूरी जलस्तर बनाए रखने और पंपिंग व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

    कुशवाह नगर में सड़क निर्माण को लेकर भी मंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को नुकसान से बचाने के लिए सड़क की चौड़ाई 60 फीट रखने की अनुमति दी गई है। सड़क निर्माण से पहले संबंधित लाइन बिछाने का काम पूरा किया जाएगा और दीपावली के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके। इसके अलावा कालानी नगर में लगातार बने रहने वाले यातायात दबाव को देखते हुए वहां ब्रिज बनाने की जरूरत भी बताई। विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इसके लिए योजना तैयार करने को कहा है।

    इस दौरान मंत्री ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद देश में इतना गैरजिम्मेदार विपक्ष देखने को नहीं मिला। उन्होंने एक नेता के उस ट्वीट का जिक्र किया जिसमें अल्बेरिया में छात्रों के आंदोलन को लेकर टिप्पणी की गई थी। विजयवर्गीय ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे बयान देश में भी अशांति फैलाने की कोशिशों को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के साथ विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उनके मुताबिक सरकार किसी भी दल की हो लेकिन देश में लोकतंत्र का मजबूत बने रहना जरूरी है।

    विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पर विजयवर्गीय ने बताया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। कुछ लोगों को निलंबित किया गया है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया है। मंत्री के बयान के बाद इंदौर में जल संरक्षण और नर्मदा के जलस्तर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तैयारियों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी अहम मानी जा रही है।

  • दिवाली पर घर में बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा पोहा चिवड़ा, स्वाद बढ़ाने और लंबे समय तक क्रिस्पी रखने के आसान तरीके

    दिवाली पर घर में बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा पोहा चिवड़ा, स्वाद बढ़ाने और लंबे समय तक क्रिस्पी रखने के आसान तरीके


    नई दिल्ली ।
    करवाचौथ का त्योहार महिलाओं के लिए सजने-संवरने और खास दिखने का अवसर होता है। इस दिन कपड़ों से लेकर गहनों और मेकअप तक हर चीज का चुनाव सोच-समझकर किया जाता है। अगर इस बार आप सामान्य मेकअप से हटकर कुछ पारंपरिक और शाही अंदाज अपनाना चाहती हैं, तो राजस्थानी राजपूती ब्राइडल लुक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस लुक में गहरी आंखें, सुनहरी चमक, निखरा हुआ बेस और पारंपरिक आभूषण खास आकर्षण पैदा करते हैं। सही तरीके से मेकअप करने पर यह अंदाज करवाचौथ की शाम को और भी खास बना सकता है। इसके लिए त्वचा की तैयारी से लेकर अंतिम फिनिशिंग तक कुछ जरूरी चरणों का ध्यान रखना चाहिए।

    Beautyलंबे समय तक टिकने वाले मेकअप के लिए त्वचा की तैयारी बेहद जरूरी है। सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ करें, ताकि धूल, अतिरिक्त तेल और गंदगी हट जाए। इसके बाद त्वचा के अनुरूप टोनर लगाएं और ऐसा मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करें, जो पर्याप्त नमी दे। इससे त्वचा रूखी दिखने और मेकअप के दौरान दरारें पड़ने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। होंठों पर भी लिप बाम लगाएं। त्वचा पर लगाए गए उत्पादों को अवशोषित होने के लिए लगभग पांच मिनट का समय दें। इसके बाद मेकअप शुरू करें।

    आंखों को दें राजपूती अंदाज
    राजपूती ब्राइडल लुक में आंखों का मेकअप सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। सबसे पहले पलकों पर त्वचा के रंग से थोड़ा हल्का कंसीलर लगाकर उसे हल्के पाउडर से सेट करें। अब गहरे भूरे या काले आईशैडो की मदद से क्रीज को उभारें। कट क्रीज को स्पष्ट दिखाने के लिए फ्लैट ब्रश और कंसीलर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    इसके बाद आंखों के बाहरी कोने पर लाल आईशैडो लगाएं और मरून रंग की मदद से उसे स्मोकी प्रभाव दें। पलकों के बीच वाले हिस्से पर गोल्ड ग्लिटर लगाएं, जबकि आंखों के अंदरूनी कोनों पर हल्का शिमर इस्तेमाल करें। आखिर में विंग्ड आईलाइनर लगाकर आंखों को आकर्षक आकार दें। लाल, मरून और सुनहरे रंगों का यह मेल पारंपरिक दुल्हन जैसा शाही प्रभाव पैदा करने में मदद करता है।

    बेस मेकअप से पाएं निखरा चेहरा
    आंखों का मेकअप पूरा होने के बाद चेहरे के बेस पर ध्यान दें। आंखों के नीचे मौजूद काले घेरों या दाग-धब्बों को छिपाने के लिए जरूरत के अनुसार कंसीलर लगाएं। इसके बाद अपनी त्वचा के रंग से मेल खाने वाला लिक्विड फाउंडेशन चुनें। इसे हल्के नम मेकअप स्पॉन्ज की मदद से अच्छी तरह ब्लेंड करें, ताकि चेहरे पर एकसमान परत बने।

    चेहरे को उभरा हुआ आकार देने के लिए क्रीम आधारित या लिक्विड कॉन्टूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे गालों, जबड़े की रेखा और नाक के आसपास लगाकर अच्छी तरह ब्लेंड करें। गालों पर गहरे गुलाबी रंग का हल्का ब्लश लगाएं। अंत में ट्रांसलूसेंट लूज पाउडर की पतली परत से बेस को सेट करें। इससे मेकअप को अधिक व्यवस्थित और लंबे समय तक टिकने वाला बनाने में मदद मिल सकती है।

    फाइनल टच से पूरा करें ब्राइडल लुक
    मेकअप को अंतिम रूप देने के लिए चेहरे के उभरे हुए हिस्सों पर हाइलाइटर लगाएं। जरूरत महसूस होने पर ब्लश और कॉन्टूर की हल्की अतिरिक्त परत भी लगाई जा सकती है। आइब्रो को भरा हुआ दिखाने के लिए भूरे या काले रंग की आइब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करें। इसके बाद ब्रश से बालों को व्यवस्थित करें, ताकि भौंहें प्राकृतिक दिखें।

    आंखों की वॉटरलाइन पर जेल आधारित काला लाइनर लगाएं और उसे आईशैडो के साथ हल्के से ब्लेंड करें। इसके बाद फॉल्स आईलैशेज और मस्कारा लगाएं। होंठों के लिए मध्यम गुलाबी रंग की लिपस्टिक चुनी जा सकती है। अंत में मेकअप फिक्सिंग स्प्रे का इस्तेमाल करें, ताकि मेकअप अधिक समय तक बना रहे।

    राजपूती अंदाज को दें पारंपरिक पहचान
    इस लुक को पूरा करने के लिए राजस्थानी आभूषण और पारंपरिक परिधान चुनें। पोशाक के रंग के अनुसार आईशैडो और लिपस्टिक का चयन करें, ताकि सभी रंग एक-दूसरे के साथ मेल खाएं। पारंपरिक गहनों, सलीके से किए गए मेकअप और शाही रंगों का संतुलन राजपूती ब्राइडल लुक को खास बनाता है। करवाचौथ पर इस अंदाज को अपनाकर आप पारंपरिक सुंदरता और आधुनिक मेकअप का आकर्षक मेल तैयार कर सकती हैं।

  • हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्ति का आंकड़ा 65.71 करोड़ तक पहुंचा, लोकायुक्त को मिले नए प्लॉट और बैंक खातों के रिकॉर्ड

    हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्ति का आंकड़ा 65.71 करोड़ तक पहुंचा, लोकायुक्त को मिले नए प्लॉट और बैंक खातों के रिकॉर्ड


    इंदौर  । इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल ड्राइवर फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान देवास की आदर्श कॉलोनी में दो प्लॉट बैंक खातों में जमा रकम और एक आरा मशीन की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के मुताबिक अब तक फिरोज खान से संबंधित 50 अचल संपत्तियां चिह्नित की जा चुकी हैं। इनकी सरकारी गाइडलाइन के अनुसार कीमत 18.29 करोड़ रुपये आंकी गई है जबकि अनुमानित बाजार मूल्य 65.71 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी संपत्तियों के दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है ताकि संपत्ति से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा सके।

    लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को फिरोज खान से जुड़े विभिन्न आवासों और ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के बाद से जमीनों मकानों बैंक खातों और अन्य निवेशों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में देवास के सीनियर राधागंज क्षेत्र की आदर्श कॉलोनी में दो प्लॉट की जानकारी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार प्लॉट नंबर 16ए का क्षेत्रफल 958 वर्गफीट और प्लॉट नंबर 45 का क्षेत्रफल 1060 वर्गफीट है। दोनों प्लॉट साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर क्रमशः 8.74 लाख रुपये और 9.32 लाख रुपये में खरीदे गए थे। इनकी मौजूदा अनुमानित बाजार कीमत करीब 60.54 लाख रुपये बताई गई है।

    जांच में बैंक खातों में जमा रकम का विवरण भी सामने आया है। लोकायुक्त को बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक महाराजा रियल एस्टेट के खाते में 9.70 लाख रुपये जमा पाए गए हैं। अब तक विभिन्न बैंक खातों में कुल 19.76 लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली है। एजेंसी इन खातों से जुड़े लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य संपत्तियों के स्वामित्व और खरीद से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल करना है। आगे की जांच में खातों में जमा रकम के स्रोत और संबंधित लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

    देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के पिपलरावां में लकड़ी की आरा मशीन होने की जानकारी भी जांच के दौरान मिली है। रिकॉर्ड के अनुसार यह आरा मशीन फिरोज खान की मां वहीदा खान के नाम पर 6 लाख रुपये में खरीदी गई थी। लोकायुक्त इस संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। इसके साथ ही अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित संपत्तियां कब और किसके नाम पर खरीदी गईं और उनके लेनदेन का विवरण क्या है।

    लोकायुक्त के अनुसार अब तक फिरोज खान से संबंधित 50 अचल संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इनकी गाइडलाइन कीमत और बाजार मूल्य में बड़ा अंतर बताया गया है। सरकारी गाइडलाइन के आधार पर इन संपत्तियों की कीमत 18.29 करोड़ रुपये है जबकि अनुमानित बाजार मूल्य 65.71 करोड़ रुपये आंका गया है। जांच एजेंसी संपत्तियों के साथ चल संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।

    इस मामले में पहले भी फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों के नाम कई संपत्तियों बैंक खातों और वाहनों की जानकारी सामने आने की खबरें प्रकाशित हुई थीं। बेटी की शादी में नोट उड़ाने के वीडियो सामने आने के बाद भी यह मामला चर्चा में आया था। अब देवास में दो प्लॉट और आरा मशीन की जानकारी मिलने के बाद जांच का दायरा आगे बढ़ा है। हालांकि संपत्तियों के मूल्य और स्वामित्व से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल लोकायुक्त की टीम उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच जारी रखे हुए है।

  • भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध

    भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विरोध और आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अब तक योजना के प्रस्तावों पर 5000 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आपत्तियों की छंटनी करने में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से सुनवाई का शेड्यूल जारी किया जाएगा। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन अवैध निर्माण और चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को लेकर लोगों ने सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बताई गई है। अंतिम समय में आवेदन करने वाले लोगों को तकनीकी परेशानी या समयसीमा को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े इसे लेकर भी मांग उठाई गई है।

    शाहपुरा स्थित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी टीएंडसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ी हुई है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और स्थानीय रहवासी भी कार्यालय पहुंचे। लोगों ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। कई लोगों की चिंता निर्माण और जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रहना चाहिए जबकि कुछ स्थानीय रहवासी प्रस्तावित चौड़ी सड़कों और अन्य नियोजन प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

    मास्टर प्लान पर आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी को आवेदन भेजकर अंतिम तारीख और समय को लेकर स्पष्ट जानकारी देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि विभिन्न संस्थाएं और नागरिक समूह योजना पर आपत्तियां और सुझाव जुटा रहे हैं। ऐसे में अंतिम दिनों में कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक की आपत्ति दर्ज होने से छूट सकती है। आवेदन में काउंटर चालू रखने स्टाफ की उपलब्धता और संपर्क अधिकारी की जानकारी वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने की मांग भी की गई है। साथ ही आवेदन की रसीद पर तारीख समय आवक नंबर और जमा किए गए दस्तावेजों का विवरण दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

    क्रेडाई की ओर से भेजे गए आवेदन में मध्य प्रदेश राजपत्र में 25 सितंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट के संदर्भ में आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा का उल्लेख किया गया है। आवेदन के मुताबिक प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम दिन 25 अक्टूबर पड़ता है। इसी कारण विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि काउंटर ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किस तारीख और समय तक स्वीकार किए जाएंगे। अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को आवेदन जमा करने में परेशानी न हो।

    मास्टर प्लान को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि और उसके भू-उपयोग में प्रस्तावित बदलाव हैं। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में कुछ कृषि भूमि को दूसरी श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव है जिससे भविष्य में खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसान प्रतिनिधि अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती ही कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। इसी वजह से किसान भोजताल संरक्षण जोन एक यानी BIZ-1 और जोन दो यानी BIZ-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और आसपास की जमीन के उपयोग से जुड़े फैसलों पर पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं मिसरोद के रहवासियों की ओर से 45 मीटर चौड़ी सड़क के प्रस्ताव को हटाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।

    अब विभाग के सामने हजारों आपत्तियों की जांच और उनकी श्रेणीवार छंटनी करने की चुनौती है। छंटनी पूरी होने के बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की उम्मीद है। भोपाल मास्टर प्लान 2047 शहर के भविष्य के विकास और भूमि उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसलिए किसानों व्यापारियों और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई और प्रस्तावों के प्रभावों का आकलन आने वाले समय में इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहेगा।

  • केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट


    भोपाल । भोपाल के केरवा डैम के आसपास अतिक्रमण और निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर किए गए निरीक्षण में 19 स्थानों पर कथित अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश के बाद गठित टीम ने डैम के फुल टैंक लेवल यानी FTL बफर जोन और ग्रीन बेल्ट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में निजी निर्माणों के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग के निर्माणों का भी उल्लेख किया गया है। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के परिवार से जुड़े निर्माणों का भी जिक्र है। निरीक्षण दल की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जानी है। फिलहाल रिपोर्ट में दर्ज विवरण और आरोपों के आधार पर मामलों की जांच तथा संबंधित निर्माणों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

    निरीक्षण के दौरान मेंडोरा बरखेड़ी बाज्याफ्त कुशलपुरा मुल्ला जी की टेकरी फतेहपुर डोगरा महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में निर्माण और जमीन के भराव से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। टीम ने GPS लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें लीं। निरीक्षण में जलाशय के किनारे मिट्टी और पत्थरों का भराव पानी की ओर जाती रिटेनिंग वॉल सीमेंट कंक्रीट के पिलर और निर्माणाधीन परिसरों जैसी स्थितियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर डैम की सीमा दर्शाने वाली मुनारें गायब मिलीं जबकि एक स्थान पर सीमा चिह्न खिसकाए जाने की बात दर्ज की गई है। इससे FTL की वास्तविक सीमा निर्धारित करने को लेकर सवाल उठते हैं।

    रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में सबसे अधिक 12 अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग का केरवा रेस्ट हाउस भी शामिल बताए गए हैं। पर्यटन निगम के परिसर में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने का उल्लेख है। वहीं जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस के पास FTL क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट के पिलर बनाए जाने और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात भी निरीक्षण विवरण में दर्ज है। इन मामलों में संबंधित विभागों की स्थिति और निर्माणों की अनुमति से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।

    निजी निर्माणों के संबंध में रिपोर्ट में अजय सिंह से जुड़ी भूमि पर FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख किया गया है। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा की पत्नी निशा डागा से जुड़ी जमीन पर लगभग 0.93 हेक्टेयर क्षेत्र में मिट्टी और पत्थरों का भराव तथा निर्माण कार्य जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं जिन पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने या ग्रीन बेल्ट में निर्माण करने के आरोप दर्ज हैं। बरखेड़ी बाज्याफ्त क्षेत्र में प्रकाश झा से जुड़े PJP एस्टेट के संबंध में भी आरक्षित भूमि पर रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने का उल्लेख है। इन सभी विवरणों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

    रिपोर्ट में कुशलपुरा क्षेत्र में डैम की सीमा बताने वाली मुनार खिसकाए जाने और FTL के भीतर बाउंड्री बनाकर पानी के बहाव को प्रभावित करने का आरोप भी दर्ज है। कुछ स्थानों पर निजी तालाब और व्यावसायिक गतिविधियां होने की बात कही गई है। मुल्ला जी की टेकरी में FTL के भीतर कई परतों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगले का निर्माण दर्ज किया गया है। फतेहपुर डोगरा में जमीन के भराव और RCC दीवार के निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने इन गतिविधियों को तस्वीरों और ड्रोन के माध्यम से दर्ज करने की बात कही है।

    महुआखेड़ा में भी अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार एनजीटी ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में वहां का कोपरा यानी मिट्टी और पत्थरों का भराव हटाने का निर्देश दिया था लेकिन निरीक्षण के समय यह मौजूद मिला। वहीं मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बिना अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के सीमेंट कंक्रीट का पुल बनाए जाने की बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

    वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण भराव और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित है। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 भी जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। अब निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के सामने रखे जाने के बाद संबंधित निर्माणों की अनुमति नियमों के पालन और कथित अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

  • भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब

    भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय मामलों पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों का हिसाब मांगा। इस पर मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने जवाब देते हुए कहा कि भुगतान नियमानुसार किए गए हैं और कोई दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। सवाल-जवाब के दौरान दोनों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। बैठक में बजट और विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे जाने हैं लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई।

    नगर निगम परिषद का सम्मेलन आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में शुरू हुआ। बैठक के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। अहिरवार ने तीन दिन पहले ही पदभार संभाला है। बैठक में महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन का संचालन नहीं किया जा सकता। इस पर अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने उन्हें समझाइश दी जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

    प्रश्नकाल के दौरान ऑडिट आपत्तियों से जुड़े भुगतानों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित वित्तीय मामलों पर सवाल करते हुए जवाब मांगा तो एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं और किसी तरह की जानकारी छिपाई नहीं गई है। इसी दौरान वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में प्रस्तावित राशि से तैयार योजना के आय-व्यय पर भी सवाल किया गया। शुक्ला ने प्रश्न में बताई गई 108 करोड़ रुपये की राशि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम का प्रावधानिक बजट 3938.45 करोड़ रुपये का है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल हाउसिंग फॉर ऑल योजना का बजट ही लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच है। इसके बाद उन्होंने बजट से संबंधित जानकारी देना शुरू किया।

    बैठक के एजेंडे में नगर निगम के नए मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए देने और इसके बाद अगले 10 साल के लिए नवीनीकरण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के संचालन और अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने का प्रस्ताव भी परिषद के सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।

    दूसरी ओर विपक्ष ने शहर की बदहाल सड़कों और बारिश के बाद खराब हुई अंदरूनी सड़कों का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जताई। विपक्ष का कहना है कि सड़कें और गड्ढे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़े मुद्दे हैं और इन पर परिषद में चर्चा होनी चाहिए। पार्षदों की ओर से शहर में वैध और अवैध होर्डिंग्स सहित अन्य नागरिक समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में बैठक में वित्तीय प्रस्तावों के साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • रफी साहब भी जिसके गानों के थे दीवाने, जिंदगी में आए ऐसे मोड़ कि जेल तक पहुंच गए मन्ना डे! जानिए अनसुने किस्से

    रफी साहब भी जिसके गानों के थे दीवाने, जिंदगी में आए ऐसे मोड़ कि जेल तक पहुंच गए मन्ना डे! जानिए अनसुने किस्से


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अपनी सुरीली आवाज और शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ से पहचान बनाने वाले मन्ना डे आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं। एक चतुर नार बड़ी होशियार और ऐ मेरी जोहरा जबीं जैसे सदाबहार गीतों से लेकर जिंदगी कैसी है पहेली तक उन्होंने संगीत की दुनिया को अनमोल खजाना दिया। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई भी थी और आम जिंदगी से जुड़ी भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति भी। 24 अक्टूबर 2013 को दुनिया को अलविदा कहने वाले मन्ना डे की 13वीं पुण्यतिथि पर उनकी जिंदगी के ऐसे किस्से याद किए जा रहे हैं जो उनके संघर्ष प्रतिभा और दिलचस्प व्यक्तित्व को सामने लाते हैं।

    मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत के साथ कुश्ती और मुक्केबाजी का भी शौक था। वह पहलवान बनकर अपनी पहचान कायम करना चाहते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कुश्ती का प्रशिक्षण लिया और ऑल बंगाल कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे। उनकी आत्मकथा मेमोरीज कम अलाइव में इस दौर से जुड़े अनुभवों का जिक्र मिलता है। हालांकि कमजोर होती नजर उनके खेल के रास्ते में बाधा बन गई। कुश्ती के दौरान चश्मे के टूटने से उन्हें चोट भी लगी। आखिरकार उन्हें खेल और संगीत में से किसी एक को चुनना पड़ा और उन्होंने संगीत को अपना जीवन बना लिया। यही फैसला आगे चलकर भारतीय संगीत के इतिहास में यादगार साबित हुआ।

    पढ़ाई के दौरान भी मन्ना डे की गायकी का जादू दिखाई देने लगा था। स्कॉटिश चर्च कॉलेज में वह दोस्तों के बीच मेज को तबले की तरह बजाकर गाने गाते थे। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लगातार तीन साल तक कॉलेजों के बीच आयोजित गायन प्रतियोगिताओं में पहला स्थान हासिल किया। उनके चाचा कृष्ण चंद्र डे ने उन्हें संगीत की शुरुआती शिक्षा दी। इसके बाद उन्होंने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान जैसे संगीत गुरुओं से प्रशिक्षण लिया। शास्त्रीय संगीत की बारीकियों पर उनकी पकड़ ने उन्हें दूसरे गायकों से अलग पहचान दिलाई।

    साल 1942 में मन्ना डे अपने चाचा के साथ मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। शुरुआत में उन्होंने संगीतकारों के सहायक के रूप में काम किया और 1943 की फिल्म तमन्ना से पार्श्व गायन की शुरुआत की। सुरैया के साथ गाया गया उनका शुरुआती गीत उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। बाद में फिल्म मशाल के गीत ऊपर गगन विशाल ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। उन्होंने छह दशकों से अधिक लंबे करियर में हिंदी बांग्ला और दूसरी भारतीय भाषाओं में 3500 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए।

    मन्ना डे की प्रतिभा का सम्मान उनके समकालीन दिग्गज गायक भी करते थे। मोहम्मद रफी की ओर से उनकी गायकी की प्रशंसा किए जाने का किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। वहीं 1968 की फिल्म पड़ोसन का गीत एक चतुर नार आज भी उनके हुनर का शानदार उदाहरण माना जाता है। इस गीत में किशोर कुमार के साथ उनकी गायकी का मुकाबला श्रोताओं को खूब पसंद आया। इसके अलावा फिल्म आनंद का जिंदगी कैसी है पहेली गीत भी उनकी पहचान का अहम हिस्सा बना।

    मन्ना डे की जिंदगी में एक ऐसा प्रसंग भी आया जब उन्हें पुलिस हिरासत में जाना पड़ा। बताया जाता है कि वह लखनऊ में एक संगीत कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन कार्यक्रम के आयोजक गायब हो गए। दर्शकों के नाराज होने और शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की। बाद में अन्य कलाकारों के हस्तक्षेप से मामला सुलझ गया और उन्हें राहत मिली। यह घटना उनके जीवन के उन अनपेक्षित मोड़ों में शामिल हो गई जिनकी चर्चा आज भी होती है।

    मन्ना डे की निजी जिंदगी भी भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भरी रही। उनकी पत्नी सुलोचना कुमरन का जनवरी 2012 में निधन हो गया था। दोनों ने करीब छह दशक साथ बिताए थे। पत्नी के जाने के बाद उनके जीवन में अकेलापन बढ़ गया। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बाद 24 अक्टूबर 2013 को बेंगलुरु में उनका निधन हो गया। भले ही मन्ना डे आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज और सदाबहार गीत संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों को आज भी मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

  • दिसंबर में फिर बढ़ सकता है रेपो रेट, 50 बेसिस प्वाइंट तक इजाफे का अनुमान

    दिसंबर में फिर बढ़ सकता है रेपो रेट, 50 बेसिस प्वाइंट तक इजाफे का अनुमान


    नई दिल्ली। महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, अगली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दर में 50 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी संभव है। अक्टूबर की एमपीसी बैठक के मिनट्स से केंद्रीय बैंक का रुख पहले के मुकाबले अधिक सख्त नजर आया है। बढ़ती महंगाई और रुपये पर दबाव को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दिसंबर की एमपीसी बैठक में 50 बेसिस प्वाइंट तक नीतिगत बदलाव की संभावना जताई गई है। यह बदलाव सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के रूप में हो सकता है। दूसरा विकल्प रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) कॉरिडोर में 25 बेसिस प्वाइंट के समायोजन का है।

    एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ रहा है और रुपये में कमजोरी बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई को हालात पर करीबी नजर रखते हुए संतुलित नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।

    नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद

    डॉ. घोष ने कहा कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई की सतर्क निगरानी जरूरी है।

    डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव के मुताबिक, अक्टूबर की एमपीसी बैठक के बाद आरबीआई का सख्त रुख स्पष्ट हुआ है। बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई और नीतिगत रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला गया। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने महंगाई के बढ़ते दबाव और मजबूत आर्थिक वृद्धि को ब्याज दर बढ़ाने के प्रमुख कारणों के रूप में देखा।

    महंगाई के जोखिम पर पहले से कदम उठाने पर जोर

    महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए समय रहते कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। हालांकि, कुछ सदस्य रेपो रेट में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के पक्ष में रहे और लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति के संकेत देने से बचते दिखाई दिए।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि महंगाई का दबाव अधिक व्यापक रूप लेता दिख रहा है। राधिका राव के अनुसार, यदि चालू कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई दर करीब 6 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो दिसंबर में ब्याज दर में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।

    विदेशी मुद्रा बाजार के उपायों से रुपये को सहारा

    बाजार में बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े उपायों के बाद रुपये में मजबूती आई है। इन कदमों के असर से इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया करीब डेढ़ प्रतिशत मजबूत हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम अब भी चुनौती बने हुए हैं।

    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में विदेशी निवेश बढ़ने से भी रुपये को सहारा मिला है। फिलहाल रुपया बाहरी घटनाक्रमों पर सीमित प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

  • ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही

    ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही


    बलूचिस्तान।
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ग्वादर में सैन्य ठिकानों और पुलिस स्टेशन पर हमले करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, ऑपरेशन अलमास के तहत फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के कैंप और माजानी पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। सैन्य काफिले पर हमले का दावा भी किया गया है। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने हमले की कोशिश नाकाम करने और तीन हमलावरों को मार गिराने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    FWO कैंप पर कब्जे और झंडा फहराने का दावा

    BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने गुरुवार को जारी बयान में ऑपरेशन की जानकारी दी। उनके अनुसार, अभियान में संगठन की विशेष सद्दो ऑपरेशनल बटालियन और अन्य इकाइयां शामिल थीं। BLF का दावा है कि ऑपरेशन की शुरुआत ग्वादर जीरो पॉइंट स्थित फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के कैंप पर हमले से हुई।

    संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने सैन्य परिसर पर नियंत्रण हासिल कर वहां अपना झंडा फहराया। BLF के मुताबिक, इस दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई कर्मियों की मौत हुई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। FWO पाकिस्तानी सेना से जुड़ा सैन्य इंजीनियरिंग संगठन है। यह सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में काम करता है।

    माजानी पुलिस स्टेशन और सैन्य काफिले को निशाना बनाने का दावा

    BLF ने माजानी पुलिस स्टेशन पर कब्जा करने और वहां से सरकारी हथियार व उपकरण जब्त करने का दावा भी किया है। संगठन के अनुसार, इस झड़प में एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई।

    इसके अलावा, BLF ने ग्वादर जिले के गाबद इलाके में सैन्य काफिले पर हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन का दावा है कि हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए या घायल हुए। BLF ने गाबद क्रॉस स्थित पुलिस चौकी पर नियंत्रण हासिल करने का दावा भी किया है।

    पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का अलग दावा

    पाकिस्तानी मीडिया संस्थानों जियो न्यूज और डॉन से जुड़ी रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से अलग जानकारी सामने आई है। पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक निर्माण कंपनी के खाली कैंप पर हमले की कोशिश नाकाम कर दी। इस कार्रवाई में तीन हमलावरों के मारे जाने की बात कही गई है। कुछ अन्य संदिग्धों को घेरने की जानकारी भी सामने आई।

    हालांकि, घटनास्थल पर हुई कार्रवाई, हताहतों की संख्या और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अहम है ग्वादर

    ग्वादर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। इस परियोजना के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापार, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    ऐसे में ग्वादर में सैन्य ठिकानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों के दावे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में चल रही रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं।

    बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी है विद्रोह

    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। सशस्त्र संगठन पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी मानती है और उनके खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाती है।

    ग्वादर में हालिया घटनाक्रम को लेकर BLF और पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में हमले की वास्तविक स्थिति, नुकसान और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर आधिकारिक तथा स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।

  • प्रभास की फौजी का धमाकेदार टीजर रिलीज! हिटलर के सामने सुभाष चंद्र बोस ने भरी हुंकार, विद्रोही सैनिक बने रिबेल स्टार

    प्रभास की फौजी का धमाकेदार टीजर रिलीज! हिटलर के सामने सुभाष चंद्र बोस ने भरी हुंकार, विद्रोही सैनिक बने रिबेल स्टार


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरफिल्म का निर्देशन हनु राघवपुडी ने किया है। वह अपनी कहानी कहने की शैली और भव्य सिनेमाई प्रस्तुति के लिए पहचाने जाते हैं। फौजी का निर्माण मैथरी मूवी मेकर्स ने किया है जबकि टी-सीरीज फिल्म्स इसे प्रस्तुत कर रही है। फिल्म के निर्माता नवीन यरनेनी वाई रवि शंकर और भूषण कुमार हैं। मेकर्स ने इस परियोजना को ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में तैयार किया है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि के साथ बड़े स्तर का एक्शन और भावनात्मक पहलू देखने को मिल सकता है।
    स्टार प्रभास एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपने दमदार अंदाज से दर्शकों का दिल जीतने की तैयारी में हैं। उनकी आगामी फिल्म फौजी का टीजर रिलीज कर दिया गया है। प्रभास के जन्मदिन के मौके पर जारी इस पहली झलक में देशभक्ति का जज्बा इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और जबरदस्त एक्शन के साथ नजर आ रहा है। फिल्म में प्रभास एक निडर और विद्रोही सैनिक की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। टीजर सामने आने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रभास के अलग अवतार ने इस फिल्म को उनकी आगामी चर्चित परियोजनाओं में शामिल कर दिया है।

    फौजी के टीजर की सबसे खास बात इसमें हिटलर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच दिखाई गई बातचीत है। फिल्म की कहानी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित है। टीजर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की आजादी के लिए समर्थन मांगते नजर आते हैं। वहीं हिटलर ब्रिटेन के लंबे शासन का हवाला देते हुए भारत की आजादी की लड़ाई को मुश्किल बताते हैं। इसके बावजूद नेताजी भारतीयों की क्षमता और उनके साहस पर भरोसा जताते हैं। वह एक ऐसे सैनिक का जिक्र करते हैं जो अपनी बहादुरी से इतिहास बदलने का दम रखता है। इसके बाद प्रभास की दमदार झलक सामने आती है और उनका विद्रोही अंदाज कहानी के रोमांच को बढ़ा देता है।

    टीजर में प्रभास का लुक उनकी पिछली फिल्मों से काफी अलग दिखाई देता है। उनके किरदार में आक्रामकता साहस और देश के लिए लड़ने का जज्बा नजर आता है। फिल्म में उनका चरित्र केवल एक सैनिक तक सीमित नहीं दिखता बल्कि उसे आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले निडर योद्धा के रूप में पेश किया गया है। प्रभास की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस और ऐतिहासिक माहौल को बड़े स्तर पर दिखाने की कोशिश टीजर को खास बनाती है। हालांकि फिल्म की पूरी कहानी और किरदार के सभी पहलुओं को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुडी ने किया है। वह अपनी कहानी कहने की शैली और भव्य सिनेमाई प्रस्तुति के लिए पहचाने जाते हैं। फौजी का निर्माण मैथरी मूवी मेकर्स ने किया है जबकि टी-सीरीज फिल्म्स इसे प्रस्तुत कर रही है। फिल्म के निर्माता नवीन यरनेनी वाई रवि शंकर और भूषण कुमार हैं। मेकर्स ने इस परियोजना को ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में तैयार किया है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि के साथ बड़े स्तर का एक्शन और भावनात्मक पहलू देखने को मिल सकता है।

    प्रभास की लोकप्रियता केवल दक्षिण भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं है। बाहुबली सीरीज और अन्य बड़ी फिल्मों के बाद उन्होंने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। दर्शक उन्हें अलग-अलग किरदारों में देखने के लिए उत्साहित रहते हैं। ऐसे में फौजी में उनका देशभक्त सैनिक का किरदार उनके प्रशंसकों के लिए खास आकर्षण बन सकता है। फिल्म का टीजर कहानी को लेकर कई सवाल भी छोड़ता है और दर्शकों को यह जानने के लिए उत्सुक करता है कि प्रभास का किरदार आजादी की लड़ाई में किस तरह की भूमिका निभाएगा।

    रिलीज की बात करें तो फौजी को 19 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है। फिल्म को लेकर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। अब दर्शकों की नजर इसके अगले टीजर ट्रेलर और अन्य प्रचार सामग्री पर रहेगी। प्रभास की लोकप्रियता ऐतिहासिक विषय और देशभक्ति से जुड़ी कहानी का मेल बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करता है यह फिल्म रिलीज होने के बाद ही स्पष्ट होगा।