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  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य चक्र से हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।

    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।

    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई।सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।

    यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है। सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के और इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।

  • ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के जरिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप अपने हिसाब से लगातार तमाम देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।

    दरअसल, आज के वक्त में हमारे जीवन में डिजिटल फ्रेमवर्क एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। डिजिटल जगत की ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की देन हैं। ऐसे में अगर यह फ्रेमवर्क टूटता है, तो कई जरूरी सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

    ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में एक तनाव पैदा कर दिया है। दुनिया के कई देश राजनीति और व्यापार से लेकर तकनीक के क्षेत्र में डायनेमिक्स चेंज करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की बार-बार की मांगों और टैरिफ की धमकियों ने ईयू को अपने पुराने साथी के साथ संबंधों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर स्टोर होता है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से ज्यादा मार्केट का मालिकाना हक है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिका-बेस्ड एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे हैं।

    यूरोपियन पार्लियामेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू 80 फीसदी से ज्यादा डिजिटल प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के लिए नॉन-ईयू देशों पर निर्भर करता है।

    ईयू के लॉ-मेकर्स अमेरिका से इतर अलग तकनीकी निर्भरता पर जोर दे रहे हैं। ईयू के कानून बनाने वाले गूगल, ओपन एआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी तमाम कंपनियों के बदले अन्य सोर्स या देसी जुगाड़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

    स्वीडन के राइज रिसर्च इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्चर और लुंड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर जोहान लिनाकर के अनुसार यूरोप की लापरवाही ने इस समूह को एक ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां यूरोप का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका के बिग टेक के दिए गए क्लाउड पर चल रहा है।

    उन्होंने कहा, “पब्लिक सेक्टर और सरकारें दशकों से एक कम्फर्ट सिंड्रोम से जूझ रही हैं। यहां कंजर्वेटिव प्रोक्योरमेंट कल्चर, रिस्क से बचने की आदत और जैसा है, वैसा ही रहने को तरजीह देने का रिवाज रहा है। अब फर्क यह है कि भूराजनीतिक माहौल जोखिम का एक नया पहलू जोड़ता है, इनोवेशन की कमी और बढ़ती लाइसेंस कॉस्ट से भी आगे है।”

    थिंक-टैंक बर्टेल्समैन स्टिफ्टंग का अनुमान है कि यूरोस्टैक को अपना लक्ष्य हासिल करने में लगभग एक दशक और 300 बिलियन यूरो लगेंगे। अमेरिकी ट्रेड ग्रुप चैंबर ऑफ प्रोग्रेस (जिसमें अमेरिका की कई दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं) के एक कम कंजर्वेटिव अनुमान के अनुसार, पूरी लागत 5 ट्रिलियन यूरो से कहीं ज्यादा होगी।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर मिला शौर्य चक्र, हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
    शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।
    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन का स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।
    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है।
    सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
    पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है।सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव केऔर इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।
  • विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर संशय, टीम चयन के बाद भी जारी है अटकलें

    विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर संशय, टीम चयन के बाद भी जारी है अटकलें

    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टी20 विश्व कप 2026 के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। टीम के ऐलान के साथ ही माना जा रहा है कि पाकिस्तान विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए तैयार है, लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के विश्व कप खेलने पर अब भी संशय बना हुआ है।

    पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने साफ किया है कि टीम की घोषणा को टूर्नामेंट में भागीदारी की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, टीम की घोषणा के बाद नकवी ने विश्व कप के लिए चुने गए खिलाड़ियों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की। बैठक में खिलाड़ियों को पीसीबी के मौजूदा रुख और सरकार की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

    लाहौर में हुई चर्चा के दौरान नकवी ने खिलाड़ियों और हेड कोच माइक हेसन से कहा, “हम सरकार की सलाह का इंतजार कर रहे हैं। सरकार जो भी फैसला लेगी, हम उसका पालन करेंगे। अगर वे नहीं चाहते कि हम विश्व कप में हिस्सा लें, तो हम नहीं जाएंगे।”

    इस बैठक में खिलाड़ियों को बांग्लादेश के समर्थन में पीसीबी के रुख के बारे में भी बताया गया। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत जाने से इनकार कर दिया था, जिसे पाकिस्तान ने आईसीसी का गलत फैसला करार दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों ने इस मुद्दे पर पीसीबी और सरकार का समर्थन किया। खिलाड़ियों ने कथित तौर पर कहा कि बोर्ड और सरकार जो भी फैसला लेंगी, वे उसके साथ खड़े रहेंगे। पाकिस्तान के सोमवार को इस पूरे मामले पर अपना अंतिम फैसला घोषित करने की उम्मीद है।

    मीडिया से बातचीत में नकवी ने रविवार को कहा कि बोर्ड अभी भी पाकिस्तान सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रही है कि टीम को विश्व कप खेलना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि ये बात खिलाड़ियों को भी स्पष्ट रूप से बता दी गई है।

    टी20 विश्व कप में पाकिस्तान को भारत, नामीबिया, यूएसए और नीदरलैंड के साथ ग्रुप ए में रखा गया है। भारत और श्रीलंका की मेजबानी में हो रहे विश्व कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम विश्व कप के अपने सारे मैच श्रीलंका में खेलेगी।

    अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट से हटने का फैसला लेती है, तो आईसीसी उस पर सख्त प्रतिबंध लगा सकती है। वहीं विश्व कप में उसकी जगह युगांडा को मौका दिया जा सकता है

  • चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम

    चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम


    नई दिल्ली। चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने 6 दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अभ्यास 19 से 24 जनवरी तक पूर्वी सियांग जिले के सिगार में आयोजित किया गया, जिसका मकसद इंटर-फोर्स कोऑर्डिनेशन और युद्ध की तैयारी को और मजबूत करना था।

    अग्नि परीक्षा: युद्धक्षेत्र की नई तैयारी
    रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह अभ्यास दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और संयुक्त कौशल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    इस अभ्यास में स्पीयर कोर के स्पीयरहेड गनर्स ने पैदल सेना रेजिमेंट और ITBP कर्मियों के साथ मिलकर इसे संचालित किया। यह अपनी तरह की पहली सहयोगात्मक गोलाबारी (Artillery firing) प्रशिक्षण पहल है।

    तोपखाने की ताकत को समझना, लक्ष्य यही
    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था कि नॉन-आर्टिलरी (non-artillery) कर्मियों को तोपखाने के अभियानों और प्रक्रियाओं से परिचित कराकर युद्धक्षेत्र में तालमेल बढ़ाया जा सके।

    कर्नल रावत ने कहा कि इससे पारंपरिक भूमिकाओं के बीच के अलगाव को तोड़ने में मदद मिलती है और गतिशील युद्ध परिदृश्यों में गोलाबारी के एकीकरण की समझ बढ़ती है।

    आर्टिलरी फायरिंग का प्रशिक्षण
    प्रशिक्षण के दौरान पैदल सेना और ITBP कर्मियों को अनुभवी गनर्स की देखरेख में स्वतंत्र रूप से कई तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
    इस प्रक्रिया से आपसी विश्वास, समन्वय और तत्परता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

    अग्नि परीक्षा का पहला चरण: भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी
    लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह अभ्यास भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए एकीकृत युद्ध क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    इस अभ्यास ने भारतीय सेना की ज्वाइंट कार्यकुशलता, मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
    चीन सीमा के पास यह अभ्यास भारतीय सेना और ITBP की तैयारी, एकता और युद्ध कौशल का एक मजबूत संदेश है। ‘अग्नि परीक्षा’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हर स्तर पर तैयार है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका ने भारत को बधाई दी और दोनों देशों के बीच गहरे और मजबूत रिश्तों का जिक्र किया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक ऐतिहासिक और मजबूत बंधन है, जो समय के साथ और अधिक व्यापक और प्रभावशाली हुआ है।

    रुबियो ने अपने संदेश में कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों की ओर से, मैं भारत के लोगों को आपके गणतंत्र दिवस पर दिल से बधाई देता हूं।” उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उभरती हुई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही क्वाड मंच के तहत भी भारत और अमेरिका की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बना रही है।

    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए ठोस और सकारात्मक परिणाम ला रहे हैं। उन्होंने भविष्य की ओर देखते हुए कहा, “मैं आने वाले वर्ष में अपने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं।”

    पिछले दो दशकों में अमेरिका और भारत के रिश्ते रक्षा, व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़े हैं। आज यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जहां दोनों देश अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर स्थिरता, आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

    इस बीच, भूटान के पीएम त्शेरिंग तोबगे ने संदेश जारी कर भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। और लिखा, “मैं इस खुशी के गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार और लोगों को गर्मजोशी भरी और दिल से शुभकामनाएं देने में भूटान के लोगों के साथ शामिल हूं। यह अवसर देश की समृद्ध यात्रा और उस भावना का सम्मान करता है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है, साथ ही यह हमारे दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों और गहरे संबंधों को भी दर्शाता है। जैसे ही हम इस सार्थक रास्ते पर पीछे मुड़कर देखते हैं, हमें भूटान और भारत के बीच स्थायी दोस्ती की याद आती है, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी और साझा आकांक्षाएं और मजबूत होती रहेंगी। भारत में हमारे प्यारे दोस्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।”

    रूस के दूतावास ने भी भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं, जिससे भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और मित्रता का संदेश मजबूत बताया।

    रूस के दूतावास ने अलग-अलग भाषाओं में 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। रूस के दूतावास ने कहा, “भारत एक ऐसी जगह है जहां पुरानी समझ और भविष्य के सपने साथ-साथ चलते हैं। भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विविधता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। भारत का गणतंत्र हर इंसान की गरिमा में विश्वास पर आधारित है।” रूसी दूतावास की ओर भारत की विभिन्न भाषाओं में ये शुभकामनाएं दी गई।

    बांग्लादेश के दूतावास ने भी भारत को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

    वहीं, ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “26 जनवरी ऑस्ट्रेलिया और भारतीयों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास दिन है। गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और ऑस्ट्रेलिया-भारत की मजबूत दोस्ती के एक और साल के लिए भी शुभकामनाएं।”

  • रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल

    रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात रिंग रोड निर्माण के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र के ललपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान शेख नैरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के समय पुल के पिलर पर सेंट्रिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से भारी ढांचा गिर पड़ा। सेंट्रिंग के नीचे काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई।

    हादसे में घायल हुए मजदूरों के नाम राहिल और राजेश्वर बताए जा रहे हैं। दोनों को हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों मजदूर फिलहाल निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और एहतियातन रिंग रोड पर चल रहा निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया। प्रारंभिक जांच में सेंट्रिंग के गिरने की वजह तकनीकी खामी या लापरवाही मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    बताया जा रहा है कि रिंग रोड पर यह पुल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य में नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे कार्य में लगाया गया था। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों की कमी के आरोप भी सामने आए हैं।

    इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। मजदूरों की जान की कीमत पर तेजी से काम पूरा करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं मृतक मजदूर के परिजनों को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।

  • गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष स्वदेशी रक्षा उपकरणों की बेहतरीन झलक देखने को मिली। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत भी स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया।

    इस दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, व समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण करके अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ ‘पारंपरिक बग्गी’ में कर्तव्य पथ पर आईं। उनके साथ राष्ट्रपति के अंगरक्षक थे जो भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में बना तोपखाना हथियार सिस्टम है।

    वहीं पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब बीते कुछ समय से 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी दे रही है। दरअसल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। इस परंपरा के तहत गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया। गौरतलब है कि यह भारत में ही बनी एक पूर्णत स्वदेशी तोप प्रणाली है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है।

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 105 मिमी लाइट फील्ड गन के प्रयोग से न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला है, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के सशक्त होने का संदेश गया है। यह स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर भारतीय सेना के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिया जाने वाला 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।

    भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का प्रत्येक क्षण अत्यंत अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी गई। 21 तोपों की यह सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त छवि को भी राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके उपरांत ‘विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करते हुए कर्तव्य पथ पर अग्रसर हुए। यह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार प्रदर्शन रहा।

    इस दृश्य ने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। वहीं 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करते हुए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर, हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति के सलामी लेने के साथ परेड शुरू हुई।

    दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने परेड की कमान संभाली। वह दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड थे। वह तीसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी हैं। इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गर्वित विजेता आए। इनमें परमवीर चक्र विजेता – सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार – और अशोक चक्र विजेता – मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।

  • अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित

    अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित


    वॉशिंगटन। अमेरिका में बर्फीले तूफान ने तबाही मचा दी है और इसी बीच मेन राज्य के बैंगर एयरपोर्ट पर एक निजी जेट क्रैश होने की खबर ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। रविवार शाम टेकऑफ के दौरान ही बॉम्बार्डियर चैलेंजर 650 बिजनेस जेट क्रैश हो गया। इस विमान में 8 लोग सवार थे—3 क्रू मेंबर और 5 यात्री। हादसे के बाद एयरपोर्ट को तुरंत बंद कर दिया गया और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यात्रियों की स्थिति क्या है।

    हादसा कब और कैसे हुआ?
    CNN की रिपोर्ट के मुताबिक हादसा रविवार शाम 7.45 बजे के करीब हुआ। टेकऑफ से कुछ मिनट पहले कंट्रोल रूम और पायलट के बीच बातचीत में कम दृश्यता और बर्फ जमने की समस्या का जिक्र हुआ। रनवे से उड़ान की अनुमति मिलने के करीब दो मिनट बाद कंट्रोलर ने आदेश दिया“सभी विमानों की आवाजाही रोक दी जाए।”

    इसके बाद बताया गया कि विमान उल्टा पड़ा हुआ है। तुरंत एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू कर दी गई और सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को रनवे पर जाने की अनुमति दी गई।

    बर्फीले तूफान की चपेट में अमेरिका: 37 राज्य प्रभावित, 20 से ज्यादा में आपात स्थिति
    यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका का बड़ा हिस्सा भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में है।

    भारी बर्फबारी और जमाव वाली बारिश से 37 राज्यों में करीब 19 करोड़ लोग प्रभावित हैं। 20 से ज्यादा राज्यों में आपात स्थिति घोषित करनी पड़ी है।

    रॉकी पर्वत से लेकर न्यू इंग्लैंड तक बर्फ की चादर बिछ गई है। कई इलाकों में तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री तक महसूस किया गया। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस भी बर्फ से ढक गया है।

    तूफान से उड़ानें और बिजली व्यवस्था चरमरा गई, हजारों उड़ानें रद्द
    तूफान के कारण घरों में बिजली गुल हो चुकी है।

    शनिवार तक लगभग 1.32 लाख घरों में बिजली बंद थी। टेक्सास और लुइज़ियाना सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जहां बर्फ और जमाव से बिजली की लाइनें टूट रही हैं और ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है।

    यात्रा व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वीकेंड में पूरे अमेरिका में 14 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अधिकारियों का कहना है कि यह रविवार विमानन इतिहास के सबसे खराब दिनों में से एक साबित हो सकता है। डलास-फोर्ट वर्थ, शार्लेट और नैशविले जैसे बड़े एयरपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

    अमेरिका में यह बर्फीला तूफान केवल मौसम की आपदा नहीं, बल्कि लाइव यात्रा, बिजली और जनजीवन को प्रभावित करने वाली बड़ी तबाही बनकर उभरा है। और इसी बीच प्राइवेट जेट क्रैश ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

  • हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    नई दिल्ली। भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, यह अन्य उभरते हुई बाजार हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया से अधिक है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई।

    अधिक कर-से-जीडीपी अनुपात दिखाता है कि देश में कर दक्षता बढ़ रही है और संग्रह में सुधार हो रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाने वाला कर संग्रह शामिल है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत का केंद्रीय सकल कर राजस्व जीडीपी के 11.7 प्रतिशत पर कम है, लेकिन समग्र एकीकृत आंकड़ा राज्यों की मजबूत भागीदारी और पूरे सिस्टम में बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    हालांकि, अभी भी भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात जर्मनी के 38 प्रतिशत और अमेरिका के 25.6 प्रतिशत से काफी कम है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि विशेष रूप से इसकी अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति को देखते हुए, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा नीतिगत अवसर प्रस्तुत करता है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से व्यापक कर सुधारों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है।

    इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में कर-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    आयकर अधिनियम, 2025 की शुरुआत और कॉर्पोरेट कर संरचनाओं का सरलीकरण सहित प्रमुख नियामकीय कदमों से पारदर्शिता में सुधार और अनुपालन में आसानी होने की उम्मीद है।

    नया आयकर अधिनियम, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाला है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के अधिक हिस्से को औपचारिक प्रणाली में लाकर कर आधार को व्यापक बनाने की भी उम्मीद है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि ऐतिहासिक विश्लेषण से पता चलता है कि समय के साथ कर संग्रह और नॉमिनल जीडीपी में निकटता बढ़ने लगी है।

    रिपोर्ट में बताया गया कि आयकर संग्रह का नॉमिनल जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय दोनों के साथ मजबूत सहसंबंध दिखता है – जो बढ़ती आय और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    कंपनियों को बेहतर मुनाफे से कॉर्पोरेट कर संग्रह को भी लाभ हुआ है, और ऐतिहासिक रुझानों की तुलना में इसमें मजबूती का स्तर बरकरार है।