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  • बिना जानकारी शेयर बाजार में न लगाएं पैसा, निवेश शुरू करने से पहले इन जरूरी नियमों को जरूर समझें

    बिना जानकारी शेयर बाजार में न लगाएं पैसा, निवेश शुरू करने से पहले इन जरूरी नियमों को जरूर समझें

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में निवेश आज के समय में पैसे को लंबे समय में बढ़ाने का एक विकल्प माना जाता है लेकिन इसमें मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता और बाजार में उतार चढ़ाव के कारण नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। इसलिए शेयर मार्केट में कदम रखने से पहले निवेशक को बाजार की बुनियादी जानकारी समझना और अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रणनीति बनाना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए केवल किसी दोस्त की सलाह सोशल मीडिया की पोस्ट या तेजी से मुनाफे के वादे के आधार पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर बाजार में निवेश शुरू करने के लिए सबसे पहले डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। इसके लिए निवेशक को किसी पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से अकाउंट खोलना होता है। डीमैट अकाउंट में खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज अन्य शुल्क और संबंधित सुविधाओं को समझ लेना चाहिए।

    निवेश की शुरुआत हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करनी चाहिए। ऐसा पैसा शेयर बाजार में नहीं लगाना चाहिए जिसकी जरूरत निकट भविष्य में पड़ने वाली हो। पहले इमरजेंसी फंड और जरूरी खर्चों की व्यवस्था करना बेहतर माना जाता है। इसके बाद अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि तय करनी चाहिए। लंबे समय के लिए निवेश करने वाले व्यक्ति और कुछ महीनों के लिए ट्रेडिंग करने वाले निवेशक की रणनीति अलग होती है।

    किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। कंपनी का कारोबार किस क्षेत्र में है उसकी आय और मुनाफा कैसा है उस पर कितना कर्ज है और भविष्य में उसके सामने कौन से अवसर और चुनौतियां हैं जैसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट और आधिकारिक वित्तीय जानकारी को समझना सोशल मीडिया की अफवाहों पर भरोसा करने से कहीं बेहतर तरीका है।

    नए निवेशकों के लिए एक ही कंपनी में अपनी पूरी रकम लगाने से बचना भी महत्वपूर्ण है। अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में निवेश फैलाने से किसी एक शेयर के खराब प्रदर्शन का पूरे पोर्टफोलियो पर असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि विविधीकरण भी नुकसान की गारंटी नहीं देता। बाजार में निवेश करते समय जोखिम हमेशा बना रहता है।

    शेयर बाजार में धैर्य भी बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार में कभी तेजी तो कभी गिरावट आती है और छोटी अवधि के उतार चढ़ाव देखकर घबराकर फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है। निवेशक को अपने तय लक्ष्य और निवेश अवधि के अनुसार समय समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। अगर किसी शेयर को खरीदने की वजह बदल गई है तो उसके प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर दोबारा विचार करना जरूरी है।

    निवेशकों को गारंटीड रिटर्न के दावों से सावधान रहना चाहिए। शेयर बाजार में कोई भी व्यक्ति निश्चित और बिना जोखिम वाले मुनाफे की गारंटी नहीं दे सकता। ट्रेडिंग खासकर इंट्राडे और डेरिवेटिव्स में जोखिम काफी अधिक हो सकता है इसलिए शुरुआती निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी और अनुभव के ऐसे विकल्पों में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर शेयर बाजार में सफल निवेश का आधार जल्दी पैसा कमाना नहीं बल्कि सही जानकारी अनुशासन जोखिम प्रबंधन और लंबी अवधि की सोच है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें जोखिम समझें और जरूरत पड़ने पर सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। किसी भी निवेश का फैसला अपनी परिस्थितियों के अनुसार सोच समझकर लेना चाहिए।

  • Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए 22 अगस्त का दिन अहम है। घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें कई कारकों के असर से बदलती रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल से लेकर डॉलर की स्थिति कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की खरीदारी तक इन धातुओं के भाव को प्रभावित करती है। ऐसे में अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो केवल एक दिन के भाव को देखकर फैसला करने के बजाय बाजार की मौजूदा दिशा को समझना जरूरी है।

    सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट का सीधा असर आभूषण खरीदने वालों के बजट पर पड़ता है। खासकर शादी विवाह या किसी बड़े पारिवारिक आयोजन के लिए सोना खरीदने वाले लोग कीमत में मामूली बदलाव को भी गंभीरता से लेते हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है जबकि आभूषणों के लिए आम तौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। इसलिए बाजार में सोने का भाव जानने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि कीमत किस कैरेट के सोने की बताई जा रही है।

    चांदी की बात करें तो इसकी कीमत भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख पर निर्भर करती है। चांदी को केवल आभूषणों और पारंपरिक खरीदारी तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर पैनल और कई तकनीकी उत्पादों में चांदी की मांग बनी रहती है। यही वजह है कि वैश्विक औद्योगिक मांग में बदलाव का असर भी चांदी की कीमत पर दिखाई दे सकता है। निवेशकों की गतिविधियां बढ़ने पर चांदी में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    22 अगस्त को सोने और चांदी की खरीदारी करने वालों को एक और महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी चाहिए। बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव में कई बार मेकिंग चार्ज जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते हैं। इसलिए यदि आप आभूषण खरीद रहे हैं तो दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत बाजार भाव से अलग हो सकती है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। इसी कारण खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में उसी दिन का ताजा रेट और बिल में लगने वाले सभी शुल्क जरूर जांचें।

    वर्तमान वैश्विक माहौल में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों डॉलर की चाल और दुनिया की आर्थिक अनिश्चितताओं पर भी बनी हुई है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं चांदी में निवेश का रुख औद्योगिक मांग और निवेश दोनों से प्रभावित होता है।

    अगर आप सोना या चांदी निवेश के उद्देश्य से खरीदना चाहते हैं तो केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर है। कीमतों में कभी भी बदलाव हो सकता है। जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करना और शुद्धता तथा बिल की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। सोने में हॉलमार्क और चांदी में शुद्धता की जांच जरूर करें। 22 अगस्त के भाव को देखते हुए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका रहेगा।

  • क्रूड ऑयल में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी ने बढ़ाई टेंशन, आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

    क्रूड ऑयल में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी ने बढ़ाई टेंशन, आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

    नई दिल्ली । पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। 20 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 2.4 फीसदी की तेजी के साथ 93.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। दूसरी तरफ अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत में भी करीब 2.5 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। कच्चे तेल की इस तेजी ने भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ने वाले हैं लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लंबे समय तक महंगा बना रहा तो घरेलू कीमतों पर असर पड़ने की संभावना जरूर बढ़ सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में तनाव बढ़ने के साथ बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं मजबूत हुई हैं। अमेरिका की ओर से ईरान के समर्थन वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। तेल बाजार में किसी बड़े उत्पादक क्षेत्र से सप्लाई बाधित होने की आशंका पैदा होते ही कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। यही स्थिति अभी दिखाई दे रही है।

    इस पूरे मामले में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व बेहद ज्यादा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और इस मार्ग से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर पड़ सकता है।

    भारत के लिए यह चिंता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होता है तो भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होती। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स डीलर कमीशन तेल कंपनियों की लागत और मार्जिन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति जैसे कई कारक शामिल होते हैं। इसलिए क्रूड में तेजी आने के साथ ही अगले दिन पेट्रोल और डीजल महंगा हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो क्या होगा। ऐसी स्थिति में घरेलू ईंधन की कीमतों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना तेल कंपनियों और नीति निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर क्रूड की कीमतें और ऊपर जाती हैं तथा रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो आयात लागत पर दोहरा दबाव पड़ सकता है। इसका असर पेट्रोल और डीजल के साथ परिवहन लागत पर भी दिखाई दे सकता है।

    ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमत बढ़ने पर माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इससे सब्जियों खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। उद्योगों की लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि क्रूड की कीमतें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं और सरकार तथा तेल कंपनियां घरेलू कीमतों को लेकर क्या फैसला करती हैं।

    फिलहाल सबसे बड़ी निगाह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति पर बनी हुई है। अगर तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ता है तो क्रूड में और तेजी संभव है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईंधन की कीमत निश्चित रूप से बढ़ने वाली है लेकिन महंगे क्रूड ने सस्ते पेट्रोल-डीजल की उम्मीदों के सामने जरूर एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

  • Shani Dev Puja: आखिर शनि देव को ही क्यों चढ़ाया जाता है तेल? जानें इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा

    Shani Dev Puja: आखिर शनि देव को ही क्यों चढ़ाया जाता है तेल? जानें इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा


    नई दिल्ली ।
    हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसी वजह से शनि देव की पूजा में तेल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। खासकर सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था के रूप में ही समझना चाहिए।

    पौराणिक कथाओं में शनि देव को सूर्य देव का पुत्र बताया गया है। उनका स्वभाव न्यायप्रिय और कठोर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं। इसी कारण कई लोग शनि की साढ़ेसाती या ढैया जैसे ज्योतिषीय समय को लेकर विशेष पूजा करते हैं। शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

    शनि देव को तेल चढ़ाने से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा हनुमान जी से भी संबंधित है। मान्यता के अनुसार एक बार शनि देव को अपने बल और प्रभाव पर गर्व था। इसी दौरान उनका सामना हनुमान जी से हुआ। कथा में बताया जाता है कि संघर्ष के दौरान शनि देव को चोट लगी और उनके शरीर में पीड़ा होने लगी। इसके बाद हनुमान जी ने उन्हें तेल लगाने की सलाह दी। तेल से शनि देव की पीड़ा शांत हुई। इसी मान्यता के आधार पर शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई।

    एक अन्य धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि तेल अर्पित करने से व्यक्ति शनि देव के प्रति अपनी श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करता है। यहां तेल केवल एक पूजा सामग्री नहीं बल्कि समर्पण और सेवा का प्रतीक माना जाता है। भक्त अपनी परेशानियों और चिंताओं को शनि देव के सामने रखते हुए न्याय और सद्बुद्धि की कामना करते हैं। कई लोग शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और शनि मंत्र का जाप भी करते हैं।

    शनि देव की पूजा में केवल तेल चढ़ाना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति को अपने आचरण और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना गरीबों को भोजन कराना बुजुर्गों का सम्मान करना और किसी के साथ अन्याय न करना भी शनि देव की कृपा पाने से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि शनि देव कर्मों के देवता हैं इसलिए अच्छे कर्मों को उनकी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार को शनि मंदिर में तेल चढ़ाते समय श्रद्धालु अक्सर काले तिल काला कपड़ा और सरसों का तेल अर्पित करते हैं। कुछ लोग पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं। हालांकि पूजा की विधि अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति व्रत या विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर रहा है तो उसे अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार पूजा करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा श्रद्धा पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य केवल किसी परेशानी को दूर करना नहीं बल्कि व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने और न्यायपूर्ण आचरण की प्रेरणा देना भी माना जाता है। इसलिए शनिवार को शनि देव की पूजा करते समय बाहरी अनुष्ठान के साथ अपने व्यवहार और कर्मों को बेहतर बनाने पर ध्यान देना भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण संदेश माना जाता है।

  • उत्तर से दक्षिण तक हर दिशा का है अपना महत्व, वास्तु के अनुसार घर में क्या रखें और किन बातों से बचें जानें पूरी जानकारी

    उत्तर से दक्षिण तक हर दिशा का है अपना महत्व, वास्तु के अनुसार घर में क्या रखें और किन बातों से बचें जानें पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । 
    वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं को विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार घर में मौजूद अलग अलग दिशाएं ऊर्जा और वातावरण से जुड़ी होती हैं और इनका सही तरीके से उपयोग घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यही वजह है कि घर बनवाते समय या घर में सामान व्यवस्थित करते समय लोग वास्तु के दिशा नियमों का ध्यान रखते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपायों को वैज्ञानिक तथ्य के बजाय पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए। घर की सही योजना के साथ साफ सफाई रोशनी हवा और सुविधाजनक व्यवस्था को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।

    वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा को धन और अवसरों से जुड़ा माना जाता है। इस दिशा को साफ सुथरा और खुला रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान या भारी वस्तुएं रखने से घर की ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए इस हिस्से में कबाड़ और लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली चीजें जमा करने से बचना बेहतर माना जाता है।

    पूर्व दिशा का संबंध सूर्य की ऊर्जा और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर की पूर्व दिशा में पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रवेश होना अच्छा माना जाता है। सुबह के समय खिड़की दरवाजे खोलने से प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा घर के वातावरण को बेहतर बना सकती है। इस दिशा में अत्यधिक भारी सामान रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    दक्षिण दिशा को लेकर वास्तु में विशेष नियम बताए गए हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार घर की इस दिशा में भारी वस्तुएं रखना उचित माना जाता है। कई वास्तु विशेषज्ञ दक्षिण दिशा में मास्टर बेडरूम या स्टोरेज जैसी व्यवस्था की सलाह देते हैं। हालांकि घर की संरचना और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही कोई बदलाव करना चाहिए।

    पश्चिम दिशा को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिशा में ऐसी चीजों की व्यवस्था करने की सलाह दी जाती है जिनके लिए घर में स्थिर स्थान की आवश्यकता हो। पश्चिम दिशा में साफ सफाई बनाए रखना और अनावश्यक सामान को जमा न होने देना घर के वातावरण के लिए उपयोगी हो सकता है।

    वास्तु में उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे महत्वपूर्ण दिशाओं में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस हिस्से को साफ और हल्का रखना शुभ माना जाता है। कई लोग यहां पूजा स्थान बनाने को प्राथमिकता देते हैं। वहीं दक्षिण पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण को स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है और यहां भारी सामान रखने की परंपरा है।

    वास्तु के अनुसार घर की दिशाओं का ध्यान रखने के साथ मुख्य दरवाजे के आसपास साफ सफाई रखना भी जरूरी माना जाता है। घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह बनाए रखना सकारात्मक वातावरण के लिए व्यावहारिक रूप से भी उपयोगी है। टूटे फूटे सामान और बेकार वस्तुओं को लंबे समय तक घर में जमा करने से जगह अव्यवस्थित हो सकती है। इसलिए समय समय पर घर की सफाई और सामान की व्यवस्थित व्यवस्था करना बेहतर है।

    कुल मिलाकर वास्तु दिशा से जुड़े नियम लोगों के लिए अपने घर को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाने का एक पारंपरिक तरीका हैं। किसी भी वास्तु उपाय को अपनाते समय अंधविश्वास के बजाय अपनी सुविधा और व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है। साफ घर पर्याप्त रोशनी अच्छा वेंटिलेशन और शांत वातावरण किसी भी परिवार के सुखद जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

  • ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    नई दिल्ली । अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस पावर के शेयरों में शुक्रवार को तेज उछाल देखने को मिला। कंपनी को करीब 715 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नोटिस मिलने की जानकारी सामने आने के बावजूद कारोबार के दौरान शेयर 5.55 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 23.38 रुपये तक पहुंच गया। इस तेजी ने बाजार में निवेशकों के रुख को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है।

    रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी रिलायंस क्लीनजेन लिमिटेड को नई दिल्ली स्थित विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश की ओर से प्री-कॉग्निजेंस नोटिस मिला है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर जारी किया गया है। मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य पक्षों से संबंधित बताया गया है।

    प्रवर्तन निदेशालय ने करीब 715 करोड़ रुपये की कथित रकम से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की है। इसमें अधिनियम की धारा 3 और 4 का उल्लेख किया गया है। शिकायत में रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी का नाम संभावित आरोपियों के रूप में शामिल किए जाने की जानकारी कंपनी की ओर से दी गई है।

    नोटिस की खबर सामान्य तौर पर कंपनी के लिए नकारात्मक मानी जा सकती है, लेकिन शुक्रवार को शेयर बाजार में इसका तत्काल असर अलग दिखाई दिया। रिलायंस पावर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी और कीमत 23.38 रुपये तक पहुंच गई। हालांकि शेयर की मौजूदा स्थिति को केवल एक कारोबारी सत्र की तेजी से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि पिछले कुछ समय में स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव रहा है।

    कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो छह महीने की अवधि में इसमें करीब 9.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। एक साल के दौरान शेयर करीब 53 प्रतिशत टूट चुका है। हालांकि पांच साल की अवधि में स्टॉक ने लगभग 131.49 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इससे कंपनी के शेयर में लंबी अवधि और छोटी अवधि के प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

    शुक्रवार को कारोबार के दौरान रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण करीब 9,574 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी के शेयर का 52 सप्ताह का उच्च स्तर 50.90 रुपये और निचला स्तर 20.23 रुपये बताया गया है। मौजूदा भाव इन दोनों स्तरों के बीच कारोबार कर रहा है।

    रिलायंस पावर मुख्य रूप से बिजली उत्पादन से जुड़ी कंपनी है। इसे भारत और विदेशों में बिजली परियोजनाओं के विकास, निर्माण और संचालन के लिए स्थापित किया गया था। कंपनी के पास बिजली उत्पादन से संबंधित परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जिसमें चालू और निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं का संचालन कंपनी सीधे या अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से करती है।

    715 करोड़ रुपये के मामले में जारी नोटिस अब कंपनी के लिए कानूनी और कारोबारी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि नोटिस मिलना अपने आप में आरोपों का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

    इस बीच शेयरों में आई तेजी यह दिखाती है कि बाजार में किसी खबर पर तत्काल प्रतिक्रिया हमेशा उसी दिशा में नहीं होती, जिस दिशा में खबर को सामान्य तौर पर देखा जाता है। रिलायंस पावर के मामले में भी कानूनी खबर के बीच शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है, जबकि निवेशकों के लिए कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और आगे की कानूनी प्रक्रिया दोनों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • देश के कई हिस्सों में आफत बन सकती है बारिश, 22 अगस्त को भारी वर्षा और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें आपके शहर का मौसम

    देश के कई हिस्सों में आफत बन सकती है बारिश, 22 अगस्त को भारी वर्षा और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें आपके शहर का मौसम


    भोपाल 22 अगस्त 2026 को देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है और कुछ इलाकों में भारी वर्षा के साथ गरज चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम में बदलाव का असर सामान्य जनजीवन के साथ यातायात और स्थानीय गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    मध्य प्रदेश की बात करें तो 22 अगस्त की सुबह से 23 अगस्त की सुबह तक कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। रायसेन नर्मदापुरम दतिया भिंड सिंगरौली सीधी छिंदवाड़ा सिवनी बालाघाट पन्ना दमोह सागर छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी और पांढुर्णा में भारी बारिश के साथ गरज चमक और करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बताई गई है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।

    भोपाल में भी 22 अगस्त को मौसम सुहावना रहने के साथ बादल छाए रहने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल में शनिवार को न्यूनतम तापमान करीब 20.3 डिग्री और अधिकतम तापमान करीब 26.4 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। अगले कुछ दिनों में भी शहर में बादल और कहीं कहीं बारिश की स्थिति बनी रहने का अनुमान है। ऐसे में सुबह और शाम के समय मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    देश के दूसरे हिस्सों में भी 22 अगस्त को मौसम पूरी तरह सामान्य रहने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर पश्चिम बंगाल पंजाब राजस्थान मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है जबकि निचले इलाकों में जलभराव की परेशानी सामने आ सकती है।

    लगातार बारिश वाले इलाकों में नदी नालों और छोटे जलस्रोतों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले मैदान पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना जरूरी है। वाहन चालकों को भी तेज बारिश के दौरान गति नियंत्रित रखने और जलभराव वाली सड़कों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मौसम के इस बदले मिजाज का असर किसानों पर भी पड़ सकता है। जहां बारिश फसलों के लिए राहत लेकर आ सकती है वहीं अत्यधिक वर्षा से खेतों में जलभराव और फसल को नुकसान की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने की जरूरत है।

    कुल मिलाकर 22 अगस्त को मानसून कई क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाला है। मध्य प्रदेश में कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है जबकि भोपाल समेत कई इलाकों में बादल और बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम को देखते हुए लोगों के लिए जरूरी है कि घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देखें और भारी बारिश या आंधी की स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करें।

  • शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार को ऐसे करें व्रत, पूजा विधि से लेकर किन चीजों का करें दान जानें पूरी जानकारी

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार को ऐसे करें व्रत, पूजा विधि से लेकर किन चीजों का करें दान जानें पूरी जानकारी

    नई दिल्ली । शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव कर्मों के फलदाता हैं और व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार परिणाम प्रदान करते हैं। माना जाता है कि शनिवार के दिन श्रद्धा और नियम के साथ शनिदेव की पूजा तथा व्रत करने से जीवन में चल रही परेशानियों से राहत पाने की कामना की जा सकती है। नौकरी में बाधा हो कारोबार में परेशानी हो आर्थिक संकट बना हो या किसी कार्य में बार बार रुकावट आ रही हो तो भक्त शनिवार के दिन शनिदेव की आराधना करते हैं। हालांकि व्रत के दौरान मन की शुद्धता और नियमों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके शनिदेव का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो तो शनिदेव के मंदिर जाकर दर्शन और पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शनिदेव को सरसों का तेल काले तिल और काले वस्त्र जैसी चीजें अर्पित करने की परंपरा है। कई भक्त शनिदेव को तेल चढ़ाकर उनकी प्रतिमा के सामने दीपक भी जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की नकारात्मक परिस्थितियां दूर होने की कामना की जाती है।

    शनिवार व्रत में भगवान हनुमान की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव भगवान हनुमान के भक्तों पर विशेष कृपा रखते हैं। इसलिए शनिवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना और बजरंगबली का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शनिदेव के मंत्रों का जाप कर सकते हैं और शनि स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना व्रत की आध्यात्मिक भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    व्रत के दौरान भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं प्रचलित हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। कई भक्त शाम के समय पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बिना चिकित्सकीय सलाह के कठिन उपवास नहीं करना चाहिए।

    शनिवार के दिन जरूरतमंद लोगों को दान देना भी शुभ माना जाता है। काले तिल काला कपड़ा सरसों का तेल उड़द की दाल और लोहे से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की धार्मिक परंपरा है। इसके अलावा किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी पुण्यदायक माना जाता है। मान्यता है कि दान करते समय दिखावे से बचना चाहिए और सेवा की भावना रखनी चाहिए।

    शनिवार व्रत के दौरान कुछ बातों से बचने की सलाह धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना क्रोध करना और जरूरतमंद व्यक्ति को परेशान करना शुभ नहीं माना जाता। शनिदेव को कर्मों का न्याय करने वाला देवता माना जाता है इसलिए इस दिन अच्छे कर्म करने और दूसरों की सहायता करने पर विशेष जोर दिया जाता है। इस तरह शनिवार का व्रत केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि संयम सेवा और सदाचार से जुड़ी धार्मिक परंपरा भी है। श्रद्धा के साथ व्रत रखकर शनिदेव का ध्यान करने से भक्त सुख शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव की कामना करते हैं।

  • आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    आईआरसीटीसी में पर्यटन मॉनिटर के 9 पदों पर भर्ती, 8 और 9 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू, जानें योग्यता और वेतन

    नई दिल्ली । इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने पर्यटन क्षेत्र में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर जारी किया है। कंपनी ने संविदा के आधार पर पर्यटन मॉनिटर के कुल नौ पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की है। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। उपलब्ध पदों में छह रिक्तियां कॉरपोरेट ऑफिस और तीन पद नॉर्थ जोन के लिए निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन वॉक-इन इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में सफल रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता और निर्धारित मानकों के अनुसार लगभग 30 हजार से 35 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त पद और नियमों के अनुसार अन्य लाभ तथा भत्ते भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

    पर्यटन मॉनिटर के पद के लिए शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव को महत्वपूर्ण रखा गया है। उम्मीदवार के पास पर्यटन विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी विषय में तीन वर्ष की स्नातक डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में एक वर्ष का डिप्लोमा और टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी से जुड़े काम में कम से कम एक वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे।

    एक अन्य निर्धारित योग्यता के अनुसार किसी भी विषय में तीन वर्ष की बैचलर डिग्री के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म में दो वर्ष की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। इस श्रेणी में उम्मीदवार के पास टूर ऑपरेशन या ट्रैवल एजेंसी फर्म में कम से कम दो वर्ष का कार्य अनुभव होना आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की अधिकतम उम्र एक सितंबर 2026 को 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और आयु संबंधी सभी निर्धारित शर्तों को ध्यान से जांच लें।

    वॉक-इन इंटरव्यू 8 और 9 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। दोनों दिनों इंटरव्यू का समय सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित किया गया है। इंटरव्यू का आयोजन आईआरसीटीसी नॉर्थ जोन कार्यालय, बी-148, 11वीं मंजिल, स्टेट्समैन हाउस, बाराखंबा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में किया जाएगा।

    इंटरव्यू में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। उन्हें भरे हुए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, आयु और अन्य जरूरी दस्तावेजों की मूल प्रतियां तथा उनकी फोटोकॉपी साथ ले जानी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो भी रखना जरूरी होगा। इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों का पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन किया जाएगा।

    आवेदन पत्र के लिए उम्मीदवार संबंधित भर्ती अधिसूचना में उपलब्ध फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। फॉर्म का प्रिंट निकालने के बाद उसमें मांगी गई सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी। उम्मीदवारों को यह आवेदन पत्र इंटरव्यू के दिन निर्धारित दस्तावेजों के साथ लेकर जाना होगा। भर्ती संविदा आधार पर होने के कारण उम्मीदवारों को नियुक्ति की अवधि और अन्य शर्तों को भी अधिसूचना के अनुसार समझना चाहिए।

  • जिम जॉइन करने से पहले करा लें ये टेस्ट, शरीर में छिपी कमी का चल जाएगा पता

    जिम जॉइन करने से पहले करा लें ये टेस्ट, शरीर में छिपी कमी का चल जाएगा पता


    नई दिल्ली। फिट रहने के लिए नियमित एक्सरसाइज जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है और अचानक हैवी वर्कआउट शुरू करने की तैयारी में है, तो पहले अपनी सेहत की स्थिति जानना जरूरी है।

    जिम शुरू करने के बाद कुछ लोगों को अत्यधिक थकान, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन या दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायत हो सकती है। इन्हें हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर लंबे समय से एक्सरसाइज से दूर रहे लोगों, अधिक उम्र वालों या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह लेकर ही हैवी वर्कआउट शुरू करना चाहिए।

    CBC से पता चल सकती है खून की कमी

    कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) से लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स समेत कई जरूरी मानकों की जानकारी मिलती है। हीमोग्लोबिन कम होने पर कमजोरी, जल्दी थकान, सांस फूलना और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर पहले से लगातार कमजोरी, थकान, पीलिया या सांस फूलने की शिकायत है तो जिम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    लिपिड प्रोफाइल से समझें हार्ट रिस्क

    लिपिड प्रोफाइल में LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल, HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है। अगर कोई व्यक्ति अचानक भारी वर्कआउट शुरू करने वाला है, तो हृदय संबंधी जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण है।

    खासकर अधिक वजन वाले लोगों, धूम्रपान करने वालों या परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर डॉक्टर इस जांच की सलाह दे सकते हैं। रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हों तो एक्सरसाइज की तीव्रता तय करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

    सोडियम-पोटैशियम का बैलेंस भी जरूरी

    सोडियम, पोटैशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी या बहुत अधिक पसीना आने जैसी स्थिति में डॉक्टर इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

    इनका स्तर बहुत कम या ज्यादा होना दोनों ही शरीर के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए खासकर हैवी वर्कआउट करने वालों को शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना चाहिए।

    आयरन, B12 और विटामिन D की भी जांच

    अगर पहले से थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट या मांसपेशियों-हड्डियों से जुड़ी परेशानी है, तो डॉक्टर की सलाह पर आयरन, विटामिन B12 और विटामिन D की जांच कराई जा सकती है। इन पोषक तत्वों की कमी से थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं और व्यायाम के बाद शरीर की रिकवरी प्रभावित हो सकती है।

    हर व्यक्ति को सारे टेस्ट जरूरी नहीं

    ध्यान रखें कि हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए जिम शुरू करने से पहले इन सभी ब्लड टेस्ट की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। जांच की जरूरत उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण, फिटनेस लेवल और डॉक्टर की सलाह के आधार पर तय होती है। अगर लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं की है या कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो वर्कआउट शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।