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  • केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर कांग्रेस का हमला, अजय राय बोले- 'राम सबके हैं, VIP छूट क्यों?'

    केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर कांग्रेस का हमला, अजय राय बोले- 'राम सबके हैं, VIP छूट क्यों?'


    लखनऊ। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अयोध्या में दर्शन व्यवस्था को लेकर सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब भगवान राम सबके हैं, तो फिर अलग-अलग नेताओं और श्रद्धालुओं के लिए अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं।

    अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि अयोध्या में अरविंद केजरीवाल को कैमरों और विशेष सुविधाओं के साथ दर्शन की अनुमति दी गई, जबकि कांग्रेस नेताओं और आम श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम लागू किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले जब वह स्वयं रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या गए थे, तब वहां की व्यवस्था अलग थी।

    उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए लिखा कि आखिर राजनीतिक सुविधा के अनुसार नियम बदलने का क्या औचित्य है। उन्होंने इसे आस्था के केंद्र पर वीआईपी संस्कृति और दोहरी राजनीति करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह निंदनीय है।

    दरअसल, अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे थे, जहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए। दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले पर भी सवाल उठाए थे। उनके इस दौरे और बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिना नाम लिए केजरीवाल पर तीखा हमला बोला था। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्षों तक मौका दिया, लेकिन बदले में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का विकास डबल इंजन सरकार की देन है और दिल्ली के नेताओं को यहां आकर विकास मॉडल देखना चाहिए।

    सीएम योगी ने कहा कि यदि दिल्ली में भी इसी तरह विकास कार्य किए गए होते, तो राजधानी की तस्वीर भी आज अलग होती। उन्होंने अयोध्या के कायाकल्प का उल्लेख करते हुए इसे भाजपा सरकार की उपलब्धि बताया।

    केजरीवाल के अयोध्या दौरे के बाद अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर कांग्रेस सरकार पर वीआईपी संस्कृति और भेदभाव का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा विपक्षी नेताओं के शासनकाल और कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। ऐसे में अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।

  • सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी

    सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी


    सीहोर सीहोर जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के पीपलखेड़ा गांव में एक किसान की मेहनत पर दबंगों ने ट्रैक्टर चलाकर पानी फेर दिया। आपसी रंजिश के चलते गांव के कुछ लोगों ने खेत में जबरन ट्रैक्टर और खेती के उपकरण उतार दिए तथा बोई हुई फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। जब किसान और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने खुलेआम दादागिरी दिखाते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ही खेत में कई ट्रैक्टर कल्टीवेटर और बोनी मशीन के साथ लोग जबरन जुताई कर रहे हैं। किसान पक्ष के लोग ट्रैक्टर रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन आरोपी उन्हें धक्का देकर हटाने का प्रयास करते हैं। विरोध के दौरान एक युवक ट्रैक्टर के सामने जमीन पर बैठ जाता है ताकि फसल को बचाया जा सके लेकिन दबंग बेखौफ होकर कहते हैं कि ट्रैक्टर इसी रास्ते से जाएगा और जो होना है हो जाने दो। जब पीड़ित पक्ष पटवारी की मौजूदगी में फैसला कराने की बात करता है तो आरोपी साफ शब्दों में कहते हैं कि कोई पटवारी नहीं आएगा और ट्रैक्टर यहीं चलेगा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति बन जाती है।

    पीड़ित किसान मानसिंह ने अहमदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गांव के राजू महेंद्र चंदरसिंह अरविंद और योगेंद्र ने पुरानी रंजिश के चलते उनकी कृषि भूमि में घुसकर जानबूझकर ट्रैक्टर चलाया जिससे बोई हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसान का कहना है कि विरोध करने पर आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और भविष्य में भी खेत को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

    घटना के बाद किसान ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और आपसी रंजिश के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर ओपी राजभर का हमला, बोले- भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना, 'सैफई परिवार को मिलेगी सजा

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर ओपी राजभर का हमला, बोले- भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना, 'सैफई परिवार को मिलेगी सजा


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना” करार दिया।

    ओपी राजभर ने कहा कि यदि किसी को अखिलेश यादव सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार के उदाहरण देखने हों तो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे सबसे बड़ा उदाहरण है। उनका आरोप है कि निजी लाभ और धन कमाने की लालसा में एक्सप्रेसवे के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह सड़क हादसों का केंद्र बन गई। उन्होंने दावा किया कि कई लोग इसे “मौत का एक्सप्रेसवे” भी कहने लगे हैं क्योंकि यहां बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं हुई हैं।

    राजभर ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान सैफई परिवार और उनके करीबी लोगों ने जनता के धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक जमीन खरीद और मुआवजे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उनके मुताबिक पहले औने-पौने दाम पर जमीनें खरीदी गईं, फिर एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया और रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीनों को आवासीय श्रेणी में दिखाया गया, जिससे भारी मुआवजा हासिल किया जा सके।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद भी कई जमीनों की रजिस्ट्रियां कराई गईं और बाद में उन जमीनों का मुआवजा लिया गया। राजभर का दावा है कि एक्सप्रेसवे का मार्ग इस तरह बदला गया कि सैफई परिवार और उनसे जुड़े लोगों की जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ गया।

    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मूल रूप से करीब 270 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे निजी हितों के चलते 300 किलोमीटर से अधिक लंबा कर दिया गया। उनका कहना था कि इसका खामियाजा आज भी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय करने के कारण यात्रियों का समय, ईंधन और पैसा तीनों अधिक खर्च हो रहे हैं।

    ओपी राजभर ने कहा कि इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की परतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और समय आने पर सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को सजा मिलेगी और कानून अपना काम करेगा।

    राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। हालांकि, इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

  • कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान

    कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान


    देवास । देवास जिले के टोंककला क्षेत्र में शनिवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया जिसमें ट्रक चालक की जान बाल बाल बच गई। कंटेनर के अचानक ब्रेक लगाने के कारण पीछे से आ रहा ट्रक उससे जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक केबिन के भीतर स्टेयरिंग और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और आसपास मौजूद ग्रामीणों तथा राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार अनीश पाल नामक चालक ट्रक लेकर देवास से मक्सी की ओर जा रहा था। इसी दौरान आगे चल रहे कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आ गए। मवेशियों को बचाने के प्रयास में कंटेनर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रहा ट्रक समय पर नहीं रुक सका और तेज रफ्तार में कंटेनर से जा भिड़ा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह पिचक गया और चालक अंदर ही फंस गया।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मदद के लिए मौके पर पहुंचे। चालक को बाहर निकालने के कई प्रयास किए गए लेकिन केबिन पूरी तरह दब जाने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए रस्सियों की मदद से केबिन और उसके गेट को बांधकर खींचने का प्रयास किया। करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गेट खुल सका और चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    हादसे में चालक के पैर में गंभीर चोट आई है। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए देवास जिला अस्पताल भेजा गया जहां उसका उपचार जारी है। समय पर राहत कार्य शुरू होने और स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण चालक की जान बचाई जा सकी।

    टोंककला चौकी प्रभारी मलखान सिंह भाटी ने बताया कि कंटेनर और ट्रक दोनों देवास से मक्सी की ओर जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आने के कारण ब्रेक लगाए गए जिससे पीछे से आ रहा ट्रक टकरा गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

  • विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें

    विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें


    नई दिल्ली । टेनिस की दुनिया में विंबलडन सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट नहीं बल्कि परंपरा प्रतिष्ठा और इतिहास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट ने दुनिया को अनगिनत यादगार मुकाबले और महान खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान सेंटर कोर्ट है जिसे विंबलडन का दिल कहा जाता है। यही वह मंच है जहां हर टेनिस खिलाड़ी खेलने और जीत दर्ज करने का सपना देखता है।

    सेंटर कोर्ट का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितना यहां खेले गए मुकाबलों का। शुरुआती दौर में विंबलडन के कोर्ट अलग-अलग बनाए गए थे लेकिन वर्ष 1881 में दो कोर्ट को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट रखा गया। बाद में वर्ष 1922 में जब ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब नए परिसर में स्थानांतरित हुआ तब आधुनिक सेंटर कोर्ट का निर्माण हुआ और तभी से यह विंबलडन की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे वर्ष में केवल दो सप्ताह के लिए किया जाता है। बाकी समय इसकी घास और सतह की विशेष देखभाल की जाती है ताकि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोर्ट मिल सके। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और उसकी लंबाई करीब 8 मिलीमीटर रखी जाती है जिससे खेल की गति और गुणवत्ता बनी रहती है।

    सेंटर कोर्ट की एक और खास पहचान इसका रॉयल बॉक्स है जहां ब्रिटिश शाही परिवार और विशेष अतिथि बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते हैं। वर्ष 2009 में यहां आधुनिक रिट्रैक्टेबल रूफ लगाया गया जिससे बारिश के दौरान भी मुकाबले बिना ज्यादा बाधा के जारी रखे जा सकते हैं। महज कुछ मिनटों में छत बंद कर खेल दोबारा शुरू कर दिया जाता है।

    इस कोर्ट पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि विंबलडन की पारंपरिक गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे।

    सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई स्वर्णिम पल देखे हैं। रोजर फेडरर ने अपने आठ विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल आज भी टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है। वहीं वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी इसी कोर्ट का हिस्सा बना।

    आज सेंटर कोर्ट केवल एक खेल मैदान नहीं बल्कि उत्कृष्टता परंपरा और गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जाता है। यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले सेंटर कोर्ट की भव्यता और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यादें लोगों के सामने उभर आती हैं।

  • मुंबई: मुहर्रम जुलूस के दौरान 14,900 जहरीले कैप्सूल जब्त, पुलिस ने बड़ी साजिश की आशंका जताई

    मुंबई: मुहर्रम जुलूस के दौरान 14,900 जहरीले कैप्सूल जब्त, पुलिस ने बड़ी साजिश की आशंका जताई


    मुंबई। मुहर्रम जुलूस के दौरान मुंबई पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर उसके पास से जहर मिले चूहे मारने वाले 14,900 कैप्सूल बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी बिना किसी अनुमति के लोगों में कैप्सूल बांटता हुआ मिला था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और इसे संभावित बड़ी साजिश के रूप में भी देख रही है।

    डीसीपी जयंत मीणा ने बताया कि मुहर्रम जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति पर पुलिस की नजर पड़ी। पूछताछ में पता चला कि वह बिना अनुमति कैप्सूल वितरित कर रहा था। इसी बीच सुबह करीब चार बजे सूचना मिली कि एक व्यक्ति को उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई है। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि उसका उद्देश्य मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाना था।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पुणे का निवासी है और पेंट के कारोबार से जुड़ा बताया गया है। जांच में सामने आया कि उसने कथित तौर पर 50 किलोग्राम जिंक फॉस्फाइड मंगाया था और अपने ठिकाने पर कैप्सूल में करीब एक-एक ग्राम जहर भरने का काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी वर्ष 2025 में ईरान और इराक भी गया था।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक 14,900 कैप्सूल जब्त किए जा चुके हैं, जबकि आरोपी का लक्ष्य करीब 30,000 कैप्सूल तैयार करने का था। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने के कारण ये कैप्सूल लोगों तक नहीं पहुंच पाए।

    डीसीपी जयंत मीणा ने कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ी त्रासदी टल गई। उन्होंने बताया कि आरोपी के मकसद, उसके संपर्कों और इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या साजिश की संभावना की गहन जांच की जा रही है। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं से मामले की पड़ताल कर रही है।

  • रायबरेली में बड़ा हादसा: चार्जर लगाते वक्त करंट की चपेट में आया हलवाई, अस्पताल में तोड़ा दम

    रायबरेली में बड़ा हादसा: चार्जर लगाते वक्त करंट की चपेट में आया हलवाई, अस्पताल में तोड़ा दम


    रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक दर्दनाक हादसे में मोबाइल चार्जर लगाते समय करंट लगने से रेस्टोरेंट में काम करने वाले एक हलवाई की मौत हो गई। घटना के बाद रेस्टोरेंट में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से झुलसे युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मोबाइल चार्ज करते समय हुआ हादसा

    घटना लालगंज कोतवाली क्षेत्र स्थित प्रताप पैलेस रेस्टोरेंट की है। जानकारी के अनुसार, रेस्टोरेंट में पिछले कई वर्षों से भोजन बनाने का काम कर रहे अजय प्रजापति मोबाइल चार्ज करने के लिए बिजली के बोर्ड में चार्जर लगा रहे थे। इसी दौरान वह अचानक करंट की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए।

    मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल उन्हें करंट से अलग किया और आनन-फानन में लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। हालांकि, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    आठ वर्षों से कर रहे थे काम

    मृतक अजय प्रजापति पिछले करीब आठ वर्षों से प्रताप पैलेस रेस्टोरेंट में हलवाई के रूप में कार्यरत थे। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस रेस्टोरेंट संचालक और कर्मचारियों से पूछताछ कर हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

    प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा किस परिस्थिति में हुआ और कहीं बिजली व्यवस्था में कोई लापरवाही तो नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट

    ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में बेल्जियम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 5-1 से करारी शिकस्त दी और शानदार अंदाज में राउंड ऑफ 32 का टिकट पक्का कर लिया। बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बेल्जियम ने शुरुआत से अंत तक पूरी तरह दबदबा बनाए रखा। स्टार विंगर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने दो गोल दागकर जीत के हीरो की भूमिका निभाई, जबकि केविन डी ब्रूने ने शानदार खेल दिखाते हुए एक गोल और दो असिस्ट अपने नाम किए।

    इस बड़ी जीत के साथ बेल्जियम ने ग्रुप जी में पांच अंक हासिल किए। मिस्र के भी पांच अंक रहे, लेकिन बेहतर गोल अंतर के आधार पर बेल्जियम ग्रुप विजेता बना। वहीं मिस्र ने दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट चरण में जगह बनाई। ईरान तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा और उसकी उम्मीदें अन्य नतीजों पर टिकी हैं, जबकि न्यूजीलैंड सिर्फ एक अंक के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक रुख अपनाया और गेंद पर लगातार नियंत्रण बनाए रखा। 11वें मिनट में ट्रॉसार्ड गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट से टकरा गया। कुछ देर बाद बेल्जियम को पेनल्टी भी मिली, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद रेफरी ने फैसला बदल दिया और पेनल्टी रद्द कर दी। इसके बावजूद बेल्जियम का दबाव कम नहीं हुआ।

    आखिरकार 28वें मिनट में केविन डी ब्रूने के शानदार क्रॉस पर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने बेहतरीन फिनिश करते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों की यह जोड़ी फिर चमकी। 49वें मिनट में डी ब्रूने के सटीक पास पर ट्रॉसार्ड ने अपना दूसरा गोल दागते हुए स्कोर 2-0 कर दिया।

    इसके बाद बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। गोलकीपर थिबो कोर्टोइस ने विपक्ष के कुछ अच्छे प्रयासों को शानदार बचाव से नाकाम किया। 66वें मिनट में केविन डी ब्रूने ने खुद गोल दागकर बढ़त 3-0 कर दी। इस गोल के साथ 34 वर्षीय डी ब्रूने फीफा वर्ल्ड कप में बेल्जियम के लिए गोल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए।

    मैच के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड ने 84वें मिनट में एलिजा जस्ट के गोल से सम्मान बचाने की कोशिश की, लेकिन बेल्जियम ने तुरंत जवाब दिया। अगले ही मिनट रोमेलु लुकाकू ने शानदार हेडर के जरिए चौथा गोल कर मुकाबला पूरी तरह अपने नाम कर लिया। स्टॉपेज टाइम में एलेक्सिस सालेमेकर्स ने पांचवां गोल दागकर बेल्जियम की 5-1 की धमाकेदार जीत पर मुहर लगा दी।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ बेल्जियम ने न केवल नॉकआउट चरण में जगह बनाई बल्कि खिताब की मजबूत दावेदारी भी पेश कर दी। टीम का संतुलित आक्रमण, मजबूत मिडफील्ड और अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों में विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर

    फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट मुकाबलों से पहले स्वीडन को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर इसाक हिएन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। फ्रांस के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 32 के अहम मुकाबले से पहले यह खबर स्वीडिश टीम के लिए बड़ी चिंता लेकर आई है, क्योंकि हिएन टीम की रक्षापंक्ति के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल थे।

    27 वर्षीय इसाक हिएन को गुरुवार को जापान के खिलाफ खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था और इसी नतीजे के साथ स्वीडन ने तीसरे स्थान की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाते हुए नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि मैच के दौरान लगी चोट अब इतनी गंभीर साबित हुई कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।

    स्वीडिश फुटबॉल एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि हिएन अब विश्व कप में आगे हिस्सा नहीं ले पाएंगे। मेडिकल जांच में उनके बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट पाई गई है। टीम के डॉक्टर जोनास वर्नर ने बताया कि खिलाड़ी को तुरंत रिहैबिलिटेशन के लिए अपने क्लब लौटना होगा और पूरी तरह फिट होने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस चोट के कारण हिएन फिलहाल फुटबॉल से दूर रहेंगे।

    स्वीडन के मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने भी इसाक हिएन के बाहर होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी खिलाड़ी का चोट के कारण सफर खत्म होना बेहद दुखद होता है। टीम हिएन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें विश्वास है कि वह पूरी तरह फिट होकर पहले से अधिक मजबूत वापसी करेंगे। कोच ने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम को अपनी रक्षापंक्ति में बदलाव करना पड़ेगा।

    जापान के खिलाफ मैच में हिएन को चोट उस समय लगी थी जब उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के अंदर युकिनारी सुगावारा के क्रॉस को रोकने के लिए लंबा स्ट्रेच किया। इसी प्रयास में उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह युवा मिडफील्डर लुकास बर्गवैल को उतारा गया, जबकि कप्तान विक्टर लिंडेलोफ ने सेंटर बैक की जिम्मेदारी संभाली।

    अब स्वीडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रक्षापंक्ति को संतुलित रखना होगी। हिएन की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम की रणनीति और डिफेंस पर असर डालेगी। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी कि वे इस कमी को पूरा करते हुए टीम को नॉकआउट मुकाबले में जीत दिलाने का प्रयास करें।

  • अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे

    अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे


    अयोध्या। श्रीहनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे महंत ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे नया घाट पर पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।

    महंत संत रामदास लंबे समय से उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। हाल ही में उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया।

    मुख्यमंत्री योगी ने जताया गहरा शोक

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत संत रामदास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि संत रामदास का आध्यात्मिक जीवन, धर्म और समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    संत समाज में था विशेष सम्मान

    महंत संत रामदास अयोध्या के संत समाज के अत्यंत सम्मानित संतों में गिने जाते थे। धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका रही और श्रद्धालुओं के बीच उनका विशेष स्थान था। अयोध्या प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समय-समय पर उनके आश्रम पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते रहे थे। उनके निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं।