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  • से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण

    से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण


    ग्वालियर । दीपावली के त्योहार पर ग्वालियर शहर में घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। त्योहार के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। टिपर वाहनों से रात में भी कचरा उठाया जाएगा और जरूरत के अनुसार प्रत्येक वाहन के दो से तीन फेरे लगवाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी वार्ड में कचरा जमा न हो और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

    अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डिपो प्रभारियों के साथ सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखे जाएं ताकि टिपर वाहनों को कचरा खाली करने के लिए इंतजार न करना पड़े। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ड्राइवरों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे रात में कचरा संग्रहण का काम जारी रखने और वाहनों के अतिरिक्त फेरे लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों को ग्रीन नेट से ढककर ले जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम 29 नए टिपर वाहन अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इन वाहनों के जुड़ने के बाद सक्रिय वाहनों की संख्या बढ़कर 286 होने की बात कही गई है। अतिरिक्त वाहनों से कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ सकती है और अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य को गति मिल सकती है। हालांकि केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित फेरे लगाना और कचरे को समय पर ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना भी जरूरी रहेगा।

    नगर निगम ने कचरा संग्रहण में लापरवाही रोकने के लिए वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टिपर वाहन कम कचरा लेकर ट्रांसफर स्टेशन न पहुंचें। इसके लिए कचरा संग्रहण के बाद वाहन का वजन कराया जाएगा और ट्रांसफर स्टेशन पहुंचने पर दोबारा वजन जांचने की व्यवस्था की जाएगी। यदि दोनों वजन में अंतर पाया जाता है तो संबंधित ड्राइवर हेल्पर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा संग्रहण की निगरानी करना और जिम्मेदारी तय करना है।

    दीपावली के दौरान बाजारों में खरीदारी और घरों की सफाई के कारण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकल सकता है। ऐसे में समय पर कचरा नहीं उठने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है। नगर निगम ने इसी चुनौती को देखते हुए रात में भी सफाई कार्य जारी रखने की योजना बनाई है। अतिरिक्त फेरे और देर रात तक खुले रहने वाले ट्रांसफर स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।

    हालांकि शहर के कई इलाकों में पहले से कचरे के ढेर लगे होने और सड़कों पर गंदगी फैलने की शिकायतों के बीच निगम की तैयारियों की प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का पालन कितना नियमित रूप से होता है और प्रत्येक वार्ड में कचरे का उठाव समय पर हो पाता है या नहीं। दीपावली से पहले नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने और त्योहार के दौरान शहर को साफ रखने की चुनौती है।

  • 16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च

    16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए ग्राम सातऊं शीतला माता कल्याण समिति आगे आई है। समिति ने मृतकों के परिजनों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हादसे से प्रभावित 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो हादसे के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया जबकि घायल लोगों और उनके परिजनों के सामने इलाज तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सहायता देने की योजना तैयार की है। इसके लिए अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहत संबंधी निर्णय लिए।

    समिति के फैसले के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों के परिवारों को 10 हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया गया है। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है। किसी परिवार के लिए अचानक अपने कमाने वाले सदस्य या प्रियजन को खो देना बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाली सहायता उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

    समिति ने प्रभावित परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 40 प्रभावित परिवारों को लाभ देने की बात कही गई है। शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। हादसे के बाद जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की पहचान और खर्च से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    इस संबंध में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर के साथ मजबूत सिंह गजराज सिंह जितेंद्र सिंह और कृष्णकांत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में हादसे से प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों पर चर्चा की गई और उनकी मदद के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया गया। समिति के सदस्यों ने सहायता संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सके।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने ग्वालियर में कई परिवारों को गहरे दुख और कठिनाइयों में डाल दिया है। ऐसे में आर्थिक मदद के साथ बेटियों की शादी का खर्च उठाने का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग का उदाहरण है। अब सहायता किस प्रक्रिया के तहत और कब तक परिवारों तक पहुंचाई जाएगी इस पर नजर रहेगी। फिलहाल समिति के इस निर्णय से हादसे के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। 

  • शिवपुरी में आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन, वक्ताओं ने कहानियों को संस्कार और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया

    शिवपुरी में आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन, वक्ताओं ने कहानियों को संस्कार और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में 22 अक्टूबर 2026 को कहानीकार आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, सामाजिक जीवन और संस्कारों में कहानियों की भूमिका पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि कहानी केवल घटनाओं का वर्णन नहीं होती, बल्कि समाज को दिशा देने, जीवन मूल्यों को मजबूत करने और लोगों को अपने आसपास की समस्याओं के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी है।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रचारक श्रीधर पराड़कर ने कहा कि कहानियों के माध्यम से समाज को दिशा और संस्कार मिलते हैं। हर व्यक्ति के जीवन की अपनी कहानी होती है और उसे शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला कहानीकार कहलाता है। उन्होंने कहा कि गीता और रामचरितमानस में निहित जीवन मूल्यों को अलग-अलग समय में परिवार के बुजुर्गों ने कहानियों के जरिए बच्चों तक पहुंचाया। दादा-दादी और नाना-नानी द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियां बचपन से ही संस्कार देने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।

    श्रीधर पराड़कर ने कहा कि आशुतोष ओज की कहानियां रोजमर्रा के जीवन में घटने वाली घटनाओं और अनुभवों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कहानी एक सशक्त माध्यम है। इसके जरिए सामान्य जीवन की परिस्थितियों और सामाजिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहानी लेखन की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विधा जीवन और समाज को समझने में मदद करती है।

    विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री और वरिष्ठ प्रचारक राम अरावकर ने संग्रह के विमोचन को व्यक्तिगत प्रसन्नता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष को बचपन से देखते आए हैं और अब उनका कहानी लेखन के क्षेत्र में प्रवेश करना खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि ‘प्रेमपाश’ में राष्ट्रीयता के भावों से जुड़ी कहानियां शामिल हैं। उनके अनुसार, कहानी केवल घटनाओं को दर्ज करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में आदर्श स्थापित करने और लोगों को लोभ-लालच से दूर रहने की प्रेरणा देने का काम भी करती है।

    राम अरावकर ने परिवारों में कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले घरों में बुजुर्ग बच्चों को कहानियां सुनाकर जीवन मूल्यों और संस्कारों से परिचित कराते थे। समय के साथ परिवारों के बिखराव, कुटुंब व्यवस्था में बदलाव और तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने इस परंपरा को प्रभावित किया है। ऐसे में साहित्य और कहानी लेखन के माध्यम से संस्कारों तथा सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

    कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के उप महानिरीक्षक राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के बढ़ने का एक कारण लोगों का चुपचाप तमाशा देखते रहना भी है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं को समाज अपने आसपास देखता है, उनके बारे में मुखर होकर बोलना और लिखना समय की मांग है। प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सके।

    राजीव लोचन शुक्ला ने आशुतोष ओज के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आसपास मौजूद समस्याओं को कहानी संग्रह के माध्यम से प्रस्तुत किया है। सरल भाषा में आम लोगों के जीवन से जुड़ी कहानियों को सामने लाना महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इसके लिए कहानीकार को बधाई दी।

    इस अवसर पर सौम्या उपाध्याय और डॉ. आकांक्षा गौड़ ने कहानी संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया। समारोह में विद्यापीठ के पूर्व छात्र और भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल का अभिनंदन भी किया गया। मंच पर डॉ. कुमार संजीव, पुरुषोत्तम गौतम और प्रमोद भार्गव सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में आशुतोष शर्मा ओज ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा

    ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन घटना के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाने में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर जिला दंडाधिकारी यानी ADM सीबी प्रसाद को सौंपी है। प्रशासन ने आम लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि जांच में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

    यह हादसा 18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ था। जानकारी के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार रहे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रशासन ने हादसे से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक तीन दिन निर्धारित किए हैं। जांच अधिकारी ADM सीबी प्रसाद के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका मामले से कोई व्यक्तिगत हित या विवाद नहीं है वे घटना से संबंधित जानकारी और साक्ष्य दे सकते हैं। इसके लिए प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित लोग 26 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ADM न्यायालय कक्ष क्रमांक 201 ग्वालियर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकेंगे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी एकत्र करना है।

    जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हादसे के समय मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के पास घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज तस्वीरें और वीडियो भी जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खबर में लाइव वीडियो को भी जांच का संभावित आधार बताया गया है। ऐसे दृश्य उपलब्ध होने पर उनसे हादसे के समय ट्रक की स्थिति घटनास्थल की परिस्थितियों और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी वीडियो या अन्य सामग्री की प्रामाणिकता और उपयोगिता जांच के दौरान परखी जाएगी।

    मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना ही नहीं बल्कि संभावित लापरवाही और सुरक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल करना भी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है इसलिए प्रवेश द्वार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ेंगे। प्रशासन की अपील है कि जिन लोगों के पास घटना से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी है वे निर्धारित तारीख और समय पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब लोगों की नजर मजिस्ट्रियल जांच पर रहेगी कि हादसे के वास्तविक कारण क्या सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम सुझाए जाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी संभावित कारण या जिम्मेदारी को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

  • ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज

    ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज


    ग्वालियर । ग्वालियर में ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां पढ़ाई कर रही तंजानिया की 22 वर्षीय छात्रा को घर बैठे कमाई का झांसा देकर कथित तौर पर 50 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन फीस फाइल चार्ज और वेरिफिकेशन सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर छात्रा से पैसे ट्रांसफर कराए। 15 और 16 अक्टूबर 2026 के दौरान Paytm UPI के जरिए कुल 13 बार में रकम भेजी गई। जब छात्रा को न नौकरी मिली और न ही उसके पैसे वापस किए गए तो उसे ठगी का अहसास हुआ। रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। शिकायत के बाद सिरोल थाना पुलिस ने ई-जीरो FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक तंजानिया की रहने वाली हेरियथ जस्टीना ग्वालियर के एक विश्वविद्यालय में स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई कर रही हैं। वह सिरोल थाना क्षेत्र की एमके सिटी टाउनशिप में अपने भाई के साथ रहती हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद के लिए वह इंटरनेट पर पार्ट टाइम और वर्क फ्रॉम होम नौकरी तलाश रही थीं। इसी दौरान 15 अक्टूबर को उन्हें घर बैठे काम करने और अच्छी कमाई का ऑफर देने वाला संदेश मिला। छात्रा ने इसे नौकरी का वास्तविक अवसर समझा और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    आरोप है कि नौकरी देने के नाम पर उनसे अलग-अलग बहाने बनाकर भुगतान मांगा जाने लगा। कभी फाइल चार्ज तो कभी वेरिफिकेशन फीस और कभी अन्य औपचारिकताओं के लिए पैसे जमा करने को कहा गया। नौकरी मिलने की उम्मीद में छात्रा ने आरोपियों के बताए तरीके से Paytm UPI के माध्यम से भुगतान किया। 15 और 16 अक्टूबर के बीच 13 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 50 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए। लगातार रकम मांगने के बावजूद जब नौकरी शुरू नहीं हुई तो छात्रा को संदेह होने लगा।

    इसके बाद छात्रा ने अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उससे और पैसे मांगे जाने लगे। जब उसने आगे भुगतान करने से इनकार किया और अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। इस तरह नौकरी पाने की उम्मीद में भेजी गई रकम वापस नहीं मिल सकी। इसके बाद छात्रा ने साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।

    सिरोल थाना पुलिस ने शुक्रवार को भारतीय न्याय संहिता के तहत ई-जीरो FIR दर्ज की है। अब पुलिस छात्रा के Paytm ट्रांजैक्शन और आरोपियों के साथ हुई बातचीत की चैट हिस्ट्री खंगाल रही है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है उनके खाताधारकों की जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रकम किन खातों में पहुंची और ठगी में कौन लोग शामिल हैं।

    डीएसपी साइबर मनीष यादव के मुताबिक छात्रा ने हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की थी जिसके बाद सिरोल थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर ऑनलाइन नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के खतरे को सामने लाती है। नौकरी देने से पहले रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के नाम पर बार-बार पैसे मांगने वाले ऑफर से सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति या कंपनी को भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही आरोपियों की पहचान और ठगी से जुड़े बाकी तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।

  • ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप

    ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप


    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े मामले में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान को लेकर एक नया वीडियो सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की बात कही जा रही है। मामला मगरखेड़ी की कस्तूरीबाई की पारिवारिक जमीन से जुड़ा है जिसका करीब 150 करोड़ रुपये में सौदा होने की बात सामने आई थी। इस सौदे में फिरोज खान को गवाह बताया जा रहा है। अब अस्पताल से जुड़े एक कथित वीडियो ने पूरे मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि बीमारी के दौरान अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से उनके परिवार के लोगों को मिलने से रोकने के लिए लिखित सूचना दी गई थी।

    जानकारी के मुताबिक जमीन के सौदे के कुछ दिन बाद कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी दौरान कथित तौर पर अस्पताल को सूचना दी गई कि कस्तूरीबाई से किसी को मिलने न दिया जाए। इस घटनाक्रम को जमीन के सौदे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मुलाकात पर रोक लगाने का निर्देश किसने दिया था और इसके पीछे क्या कारण था इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में पुलिस सुरक्षा के बीच फिरोज खान का करीबी बताया जा रहा एक व्यक्ति मौजूद था। वीडियो में एक अन्य पुलिसकर्मी के नजर आने की बात भी कही गई है। आरोप है कि फिरोज खान के कहने पर अस्पताल को लिखित सूचना दी गई थी ताकि कस्तूरीबाई से उनके परिजन मुलाकात न कर सकें। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर भी अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटनाक्रम के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं। यदि अस्पताल में मुलाकात पर रोक लगाने के लिए लिखित सूचना दी गई थी तो उसे किसने दिया था और उसका आधार क्या था। क्या यह कदम कस्तूरीबाई की चिकित्सा संबंधी जरूरतों के कारण उठाया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। क्या इस कथित रोक का जमीन के सौदे से कोई संबंध था। फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है और बिना जांच के किसी व्यक्ति की भूमिका को दोषपूर्ण मानना उचित नहीं होगा।

    मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच जारी होने की जानकारी दी गई है। जांच के दौरान जमीन के सौदे में फिरोज खान की बताई जा रही भूमिका अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान हुए घटनाक्रम और कथित लिखित सूचना जैसे पहलुओं को खंगाला जा सकता है। साइबर सेल की मदद से वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच किए जाने की भी बात कही गई है। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो कब और कहां बनाया गया था उसमें कौन लोग दिखाई दे रहे हैं और क्या उसमें सामने आ रहे दावों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज उपलब्ध हैं।

    फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर भी लोकायुक्त की जांच चल रही है। इसी जांच से जुड़े अन्य तथ्यों में देवास के दो प्लॉट खरीदने के लिए उनकी पत्नी मां और बेटी द्वारा ऑनलाइन बोली लगाए जाने की बात सामने आई थी। दोनों प्लॉट की बोली करीब 92 लाख रुपये में तय होने और रजिस्ट्री सहित अन्य खर्च जोड़कर कुल लागत लगभग एक करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया गया है। इन सभी मामलों में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कस्तूरीबाई से मुलाकात रोकने के कथित निर्देश और जमीन के सौदे के बीच संबंध जांच का अहम पहलू बना हुआ है।

  • फेस्टिव सीजन में साड़ी और लहंगे के साथ बनाएं 5 खूबसूरत बन हेयर स्टाइल, घर पर मिनटों में पाएं पार्लर जैसा लुक

    फेस्टिव सीजन में साड़ी और लहंगे के साथ बनाएं 5 खूबसूरत बन हेयर स्टाइल, घर पर मिनटों में पाएं पार्लर जैसा लुक

    नई दिल्ली । त्योहारों के मौसम में खूबसूरत दिखने के लिए कपड़ों और मेकअप के साथ हेयर स्टाइल पर ध्यान देना भी जरूरी होता है। खासकर साड़ी, सूट, अनारकली और लहंगे के साथ सही हेयर स्टाइल पूरे लुक को आकर्षक बना सकता है। अगर आप हर बार पार्लर जाने के बजाय घर पर ही बालों को स्टाइल करना चाहती हैं, तो पांच आसान बन हेयर स्टाइल आजमा सकती हैं। हेयर स्टाइलिंग क्रिएटर श्रेया अरोड़ा ने ऐसे पांच तरीके बताए हैं, जिन्हें थोड़ी प्रैक्टिस के साथ खुद तैयार किया जा सकता है। इन स्टाइल्स को दिवाली, भाई दूज, ऑफिस पार्टी और शादी के कार्यक्रमों में भी अपनाया जा सकता है।

    ब्रेडेड बन हेयर स्टाइल
    ब्रेडेड बन उन महिलाओं के लिए अच्छा विकल्प है, जो साधारण लेकिन खूबसूरत हेयर स्टाइल पसंद करती हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बालों को अच्छी तरह सुलझाकर पोनीटेल बना लें। अब पोनीटेल के बालों को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर सामान्य चोटी गूंथें। इसके बाद चोटी को पोनीटेल के आधार के चारों ओर गोल घुमाते हुए लपेट दें। बॉबी पिन की मदद से इसे अच्छी तरह सुरक्षित कर लें, ताकि बन अपनी जगह पर बना रहे। सिल्क साड़ी या एथनिक सूट के साथ यह स्टाइल आकर्षक लगता है। इसे और पारंपरिक रूप देने के लिए बन के एक तरफ छोटा गजरा भी लगाया जा सकता है।

    डोनट बन से पाएं साफ-सुथरा लुक
    अगर बाल पतले हैं या उनमें घनापन कम दिखाई देता है, तो डोनट बन आजमाया जा सकता है। इसके लिए गोल आकार की हेयर डोनट एक्सेसरी का इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्यूटी शॉप पर मिल सकती है। सबसे पहले पोनीटेल बनाएं और उसके आधार पर डोनट लगाएं। अब बालों को इसके चारों ओर फैलाकर पूरी एक्सेसरी को ढक दें। ऊपर से पतला रबर बैंड लगाकर बालों को जगह पर रखें। बाहर बची हुई लटों को बन के चारों ओर लपेटकर पिन से फिक्स कर दें। इससे जूड़े को गोल और व्यवस्थित आकार मिलता है। बनारसी साड़ी या कढ़ाई वाले सूट के साथ यह स्टाइल अच्छा लग सकता है।

    ट्विस्टेड बन हेयर स्टाइल
    जिन्हें चोटी गूंथने में परेशानी होती है, वे ट्विस्टेड बन बना सकती हैं। इसके लिए बालों को सुलझाकर पोनीटेल बनाएं और उसे दो हिस्सों में बांट लें। दोनों हिस्सों को अलग-अलग घुमाकर ट्विस्ट करें। इसके बाद दोनों लटों को पोनीटेल के आधार के चारों ओर लपेटकर बॉबी पिन से सुरक्षित कर दें। इस तरीके से बन में घुमावदार परतें बनती हैं, जो साधारण जूड़े को भी अलग अंदाज देती हैं। दिवाली पार्टी में शरारा या इंडो-वेस्टर्न कपड़ों के साथ यह हेयर स्टाइल अपनाया जा सकता है। सजावट के लिए छोटे पर्ल पिन भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

    रैप्ड बन से बनाएं पार्टी लुक
    रैप्ड बन में बालों की अलग-अलग लटों को लपेटकर जूड़े को आकर्षक आकार दिया जाता है। इसे बनाने के लिए पहले पोनीटेल तैयार करें। फिर बालों की छोटी-छोटी लटें लेकर उन्हें हल्का ट्विस्ट करते हुए पोनीटेल के चारों ओर लपेटें। हर लट को बॉबी पिन से फिक्स करना जरूरी है, ताकि बन खुलने न पाए। इसी तरह बाकी बालों को भी लपेटकर जूड़े का आकार पूरा करें। इस स्टाइल में बालों की अलग-अलग परतें दिखाई देती हैं। लंबे बालों में यह विशेष रूप से अच्छा लग सकता है। फेस्टिव कुर्ता सेट, अनारकली या लहंगे के साथ इसे ट्राई किया जा सकता है।

    क्लासिक चोटी वाला गोल बन
    पारंपरिक परिधानों के साथ चोटी से बना गोल बन भी अच्छा विकल्प है। इसके लिए बालों को पीछे इकट्ठा करके पोनीटेल बनाएं और पूरी पोनीटेल की चोटी गूंथ लें। अब चोटी को गोल आकार में पोनीटेल के आधार के चारों ओर लपेटें। आखिरी सिरे को बन के भीतर छिपाकर हेयर पिन से सुरक्षित कर दें। इस स्टाइल में चोटी की बनावट जूड़े पर साफ नजर आती है। कांजीवरम या बनारसी साड़ी और पारंपरिक सिल्क सूट के साथ इसे बनाया जा सकता है। बन के चारों ओर मोगरे का गजरा लगाने से पारंपरिक लुक और निखर सकता है।

    बन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
    हेयर स्टाइल बनाने से पहले बालों को अच्छी तरह सुलझाना जरूरी है। बहुत ज्यादा तेल लगे बालों में बन सपाट दिखाई दे सकता है। पोनीटेल को जरूरत से ज्यादा कसकर बांधने से सिर की त्वचा पर खिंचाव और सिरदर्द हो सकता है। अगर बाल बहुत मुलायम हैं और बार-बार फिसलते हैं, तो हल्का टेक्सचराइजिंग स्प्रे इस्तेमाल किया जा सकता है। बॉबी पिन सही तरीके से लगाएं और जरूरत पड़ने पर हल्का हेयर स्प्रे इस्तेमाल करें, ताकि हेयर स्टाइल लंबे समय तक बना रहे। इन आसान तरीकों से घर पर ही त्योहारों और खास अवसरों के लिए सुंदर बन हेयर स्टाइल तैयार किए जा सकते हैं।

  • इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति

    इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति


    इंदौर । मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने और प्रदेश को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में दो दिवसीय सेमीकंडक्टर समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार से ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुरू होने वाली इस समिट में देश की 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित करेंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए निवेश की संभावनाएं तलाशना और मध्य प्रदेश को इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार करना है। समिट में प्रस्तावित 6200 करोड़ रुपये के निवेश पर विशेष नजर रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस आयोजन में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करने का विजन प्रस्तुत करेंगे। वे प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ उद्योग से जुड़े निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में प्रदेश में निवेश की संभावनाओं तकनीकी सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए निवेशकों को मध्य प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

    समिट का सबसे अहम पहलू पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से दिया गया करीब 6200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव है। कंपनी प्रदेश में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग इकाई स्थापित करने की योजना के तहत यह प्रस्ताव लेकर आई है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना भी रहेगी। हालांकि प्रस्तावित निवेश को वास्तविक परियोजना में बदलने के लिए आगे की प्रक्रिया और फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

    दो दिवसीय समिट में चिप डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श होगा। एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग इसमें हिस्सा लेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य उद्योग की जरूरतों को समझना और प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए संभावित रास्ते तलाशना है।

    समिट में लगने वाली प्रदर्शनी भी निवेश और कारोबारी साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें 50 से अधिक कंपनियां चिप डिजाइन पैकेजिंग और टेस्टिंग उपकरण तकनीकी सामग्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित उत्पादों और क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी। इससे कंपनियों को संभावित निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलेगा। तकनीकी समाधान प्रदर्शित करने के साथ यह मंच उद्योग की जरूरतों और उपलब्ध क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है।

    राज्य सरकार सेमीकंडक्टर नीति 2025 के तहत इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। समिट के दौरान पैनल चर्चाओं और राउंडटेबल बैठकों में निवेश आकर्षित करने तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने और मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के उपायों पर मंथन होगा। इस उद्योग के विस्तार के लिए केवल निवेश ही नहीं बल्कि कुशल मानव संसाधन अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं भी जरूरी हैं। ऐसे में इंदौर में होने वाली यह समिट मध्य प्रदेश की औद्योगिक रणनीति के लिहाज से अहम अवसर है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चर्चाओं और निवेश प्रस्तावों से प्रदेश को कितने ठोस औद्योगिक अवसर मिलते हैं।

  • शिवपुरी में 68 डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का अटैचमेंट निरस्त, मूल अस्पतालों में लौटने के आदेश जारी

    शिवपुरी में 68 डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का अटैचमेंट निरस्त, मूल अस्पतालों में लौटने के आदेश जारी

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रवाई की है। जिला मुख्यालय और अन्य शहरी कार्यालयों में अटैच होकर काम कर रहे 68 डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और दूसरे कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाले अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में वापस भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषीश्वर ने 19 से 21 अक्टूबर के बीच यह कार्रवाई की। इसके बाद जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    इस कार्रवाई में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों के अटैचमेंट भी समाप्त किए गए हैं। करैरा के बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा जिला कार्यालय में जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी (डीटीओ) का काम देख रहे थे। वहीं, कोलारस के बीएमओ डॉ. सुनील खण्डोलिया और खनियाधाना के बीएमओ डॉ. रोहित भदकारिया भी जिला मुख्यालय पर जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। अब इन अधिकारियों को उनके मूल ब्लॉक में वापस जाकर बीएमओ के रूप में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। संविदा डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा गया है। इनमें 14 संविदा डॉक्टरों के साथ नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, सहायक नर्स मिडवाइफ यानी एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। इन कर्मचारियों को शहरी कार्यालयों या अन्य स्थानों पर अटैच रखने के बजाय मूल कार्यस्थलों पर सेवाएं देने के लिए कहा गया है।

    इसके अतिरिक्त नेत्र सहायकों, मल्टीपर्पज वर्करों और सहायक ग्रेड-2 के 33 कर्मचारियों का अटैचमेंट भी समाप्त किया गया है। ये कर्मचारी जिला अस्पताल, कलेक्टर कार्यालय और कोल्ड चेन से संबंधित कामों में लगाए गए थे। आदेश के अनुसार, उन्हें वहां से हटाकर उनके मूल उप स्वास्थ्य केंद्रों में वापस भेजा गया है। विभाग ने पिछोर, करैरा और नरवर क्षेत्रों में डॉक्टरों को दिए गए दोहरे प्रभार भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं।

    पोहरी ब्लॉक में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया है। यहां संविदा चिकित्सक डॉ. द्वारिका प्रसाद वर्मा से ब्लॉक का प्रभार वापस ले लिया गया है। उनकी जगह नियमित चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत साहू को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के जरिए ब्लॉक की स्वास्थ्य व्यवस्था में नियमित चिकित्सा अधिकारी की भूमिका बढ़ाई गई है।

    सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर के अनुसार, शासन की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उनके गांव और कस्बों के आसपास ही बेहतर इलाज मिल सके। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी निर्धारित पदस्थापना पर मौजूद रहकर काम करें। विभाग का कहना है कि इसी उद्देश्य से अटैचमेंट समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

    ग्रामीण अस्पतालों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा कर्मचारियों की उपलब्धता स्थानीय मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि स्वीकृत पदों के अनुसार कर्मचारी अपने निर्धारित स्थानों पर सेवाएं देते हैं, तो मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक आने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इस कार्रवाई का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित कर्मचारी मूल स्थानों पर नियमित रूप से काम करते हैं और वहां जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं या नहीं।

    सीएमएचओ ने बताया कि पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट भोपाल भेजी जा रही है। अब विभाग के सामने आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।

  • इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली

    इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली


    इंदौर । मध्यप्रदेश में भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। इंदौर में 27 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से जनसंघर्ष महारैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी सरकार की नीतियों आम जनता से जुड़े मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महारैली के माध्यम से जनता की समस्याओं को उठाने के साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

    इंदौर शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित इस महारैली की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से होगी। यहां से कार्यकर्ता और पार्टी नेता रैली के रूप में रवाना होंगे। प्रस्तावित मार्ग में पढ़ीनाथ चौराहा हरसिद्धि मंदिर और मोती तबेला शामिल हैं। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। वहां कांग्रेस नेता राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध के साथ निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाने वाली है। पार्टी उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महारैली को महत्वपूर्ण कार्यक्रम मान रही है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और आधिकारिक तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

    कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से जुड़ी समस्याओं को जनता के बीच उठाने और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

    महारैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के विभिन्न स्तरों पर संपर्क शुरू किया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर शहर और जिला कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों से भी कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों को कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    युवा कांग्रेस सेवादल एनएसयूआई महिला कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के पदाधिकारियों को भी महारैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। वर्तमान और पूर्व पार्षदों पार्षद प्रत्याशियों तथा पंचायतों के पंच सरपंच और अन्य पदाधिकारियों से भी समर्थकों के साथ पहुंचने की अपील की गई है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में संगठन के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जा सके।

    अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली इस महारैली पर रहेगी। कांग्रेस इसे केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का माध्यम बता रही है। रैली के बाद सौंपे जाने वाले ज्ञापन में उठाई गई मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय हो सकती है।