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  • यूक्रेन के क्रिवी रिह में रूसी ड्रोन अटैक, शॉपिंग मॉल को बनाया निशाना, 14 की मौत, 121 घायल

    यूक्रेन के क्रिवी रिह में रूसी ड्रोन अटैक, शॉपिंग मॉल को बनाया निशाना, 14 की मौत, 121 घायल


    कीव। रूस ने शुक्रवार को मध्य यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर में कई ड्रोन से हमला किया। हमले में एक बड़े शॉपिंग मॉल को निशाना बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि 121 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 22 बच्चे भी शामिल हैं। 29 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, इनमें पांच बच्चे हैं। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है।

    मॉल पर बार-बार किए गए ड्रोन हमले

    क्रिवी रिह रक्षा परिषद के प्रमुख ओलेक्सांद्र विकुल के अनुसार, शॉपिंग मॉल को कई बार निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए हमला कर रहे थे। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, रूसी सेना ने क्रिवी रिह के चार जिलों में करीब 60 हमले किए। इनमें ड्रोन, तोपों और एक हवाई बम का इस्तेमाल किया गया।

    हमले की चपेट में क्रिवी रिह जिले के जेलेनोडोल्स्क और ह्रुशिव्का इलाके भी आए। निकोपोल जिले में तीन और सिनेल्निकोव जिले में दो लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    लगातार बढ़ती गई घायलों की संख्या

    हमले के तुरंत बाद दो लोगों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद घायलों की संख्या 50, 91 और फिर 96 तक पहुंच गई। शाम तक अधिकारियों ने 14 मौतों और 121 लोगों के घायल होने की पुष्टि की।

    जेलेंस्की ने रूस पर साधा निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का गृहनगर होने के कारण क्रिवी रिह पर हुए हमले को लेकर उनकी प्रतिक्रिया भी सामने आई। जेलेंस्की ने शॉपिंग सेंटर पर हमले को निंदनीय बताते हुए इसे आतंकवादी कार्रवाई करार दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से रूस पर प्रभावी दबाव बनाने की अपील की।

    क्रिवी रिह इससे पहले भी रूसी हमलों का निशाना बन चुका है। 16 अगस्त को शहर की प्रमुख इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह पर हुए हमले में दो कर्मचारियों की मौत हुई थी।

    बच्चे भी हुए हमले में घायल

    ताजा हमले में 22 बच्चों के घायल होने की पुष्टि हुई है। गंभीर रूप से घायल 29 लोगों में पांच बच्चे भी शामिल हैं। घटनास्थल से घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। बचाव दल प्रभावित इलाकों में राहत और खोज अभियान चला रहा है।

    पहले भी हो चुका है बड़ा हमला

    क्रिवी रिह में अप्रैल 2025 में भी बड़ा रूसी हमला हुआ था। उस दौरान शहर के एक बच्चों के खेल मैदान को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

    ताजा हमले ने एक बार फिर यूक्रेन के नागरिक इलाकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शॉपिंग मॉल जैसे सार्वजनिक स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने से रूस-यूक्रेन युद्ध में नागरिकों पर पड़ रहे असर की तस्वीर और गंभीर हुई है।

  • ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट

    ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट


    हेडिंग्ले। पाकिस्तान की बल्लेबाजी एक बार फिर इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बेनकाब हो गई। हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को दूसरी पारी में महज 135 रन पर समेटते हुए पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी, जबकि जोफ्रा आर्चर ने भी अहम मौकों पर विकेट चटकाए।

    171 पर ढेर हुआ पाकिस्तान, इंग्लैंड ने खड़ा किया 409 का पहाड़
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम पहली पारी में सिर्फ 171 रन बना सकी। अब्दुल्ला शफीक ने 61 और इमाम-उल-हक ने 42 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के पेस अटैक के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सके। रॉबिन्सन और टंग ने पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तानी पारी को समेट दिया।

    जवाब में इंग्लैंड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 409 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 238 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 93 गेंदों में 91 रन बनाए। जॉर्डन कॉक्स ने 73, जो रूट ने 66 और डेन लॉरेंस ने 51 रन की पारियां खेलीं।

    दूसरी पारी में भी नहीं संभला पाकिस्तान
    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए लंबी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन उसकी शुरुआत ही खराब रही। जोफ्रा आर्चर ने इमाम-उल-हक को आउट किया, जबकि अजान अवैस 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद रॉबिन्सन ने अब्दुल्ला शफीक को 15 रन पर चलता कर दिया।

    शान मसूद ने 29 रन बनाकर संघर्ष की कोशिश की, लेकिन जोश टंग ने आते ही पाकिस्तान के मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने सऊद शकील को 14 रन पर आउट करने के बाद एक ही ओवर में शान मसूद और सलमान आगा के विकेट निकाल दिए। टंग ने महज 11 गेंदों में तीन विकेट लेकर पाकिस्तान को 76 रन पर छह विकेट के संकट में पहुंचा दिया।

    रिजवान ने दिखाया संघर्ष, फिर भी 135 पर सिमटी टीम
    विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 39 गेंदों पर 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया। वह दूसरी पारी में पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, लेकिन उनकी पारी भी टीम को हार से नहीं बचा सकी। गस एटकिंसन ने रिजवान को आउट किया और इसके बाद आर्चर ने आखिरी बल्लेबाज को पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान की पूरी टीम 37.3 ओवर में 135 रन पर ऑलआउट हो गई और इंग्लैंड ने तीन दिन में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    रॉबिन्सन-टंग ने मिलकर बरपाया कहर
    इंग्लैंड की जीत में ओली रॉबिन्सन सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में 5/51 और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए। मैच में कुल 8/80 के शानदार आंकड़े के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    जोश टंग ने भी मैच में आठ विकेट लिए। उन्होंने पहली पारी में 5/46 और दूसरी पारी में तीन विकेट चटकाए। जोफ्रा आर्चर ने दूसरी पारी में तीन विकेट हासिल किए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लगातार फुल लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    जो रूट की कप्तानी में शानदार वापसी
    बेन स्टोक्स के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास और ब्रेंडन मैकुलम के कोच पद से हटने के बाद इंग्लैंड नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान के तौर पर जो रूट की वापसी जीत के साथ हुई। इंग्लैंड ने गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में पाकिस्तान को पछाड़ दिया। पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने भी मैच के बाद माना कि इंग्लैंड ने उनकी टीम को हर विभाग में मात दी।

    लॉर्ड्स में होगी अगली भिड़ंत
    इस जीत से इंग्लैंड को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में भी अहम अंक मिले हैं। वहीं पाकिस्तान का अंक प्रतिशत गिरकर 19.05 हो गया है। दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा।

    पाकिस्तान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी को संभालने की है। हेडिंग्ले में जिस तरह उसका शीर्ष और मध्यक्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बिखरा, अगर यही कहानी लॉर्ड्स में भी दोहराई गई तो सीरीज में वापसी मुश्किल हो सकती है।

  • एक लाख रुपये के निवेश में FD और RD का फर्क, जानिए ब्याज, परिपक्वता राशि और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें

    एक लाख रुपये के निवेश में FD और RD का फर्क, जानिए ब्याज, परिपक्वता राशि और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें

    नई दिल्ली ।बैंक में सुरक्षित निवेश की बात आती है तो फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट आम निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय विकल्प हैं। दोनों योजनाओं में पैसा बैंक में जमा किया जाता है और उस पर तय दर के अनुसार ब्याज मिलता है, लेकिन दोनों में निवेश करने का तरीका अलग होता है। इसी अंतर की वजह से समान ब्याज दर होने के बावजूद मिलने वाला अंतिम रिटर्न अलग हो सकता है।

    फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में निवेशक एकमुश्त रकम बैंक में निश्चित अवधि के लिए जमा करता है। जमा की गई पूरी राशि पर निवेश शुरू होने के बाद से ही निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज मिलता है। FD की अवधि बैंक और योजना के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। वहीं रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD में निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम जमा करता है। इस वजह से पूरी निवेश राशि शुरुआत में बैंक के पास नहीं रहती और ब्याज की गणना भी उसी हिसाब से होती है।

    रिटर्न के अंतर को एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी निवेश पर सालाना ब्याज दर 6.5 प्रतिशत है और निवेश की अवधि पांच साल है। अगर कोई व्यक्ति एक लाख रुपये की FD करता है तो पांच साल की अवधि पूरी होने पर उसे लगभग 1,38,042 रुपये मिल सकते हैं। इसमें मूलधन के साथ ब्याज भी शामिल होगा।

    दूसरी तरफ, यदि वही व्यक्ति पांच साल तक हर महीने लगभग 1,666 रुपये की RD करता है तो कुल जमा रकम करीब एक लाख रुपये होगी। इसी उदाहरण में परिपक्वता राशि लगभग 1,18,270 रुपये के आसपास बताई गई है। इस तरह दोनों में जमा की गई कुल मूल रकम लगभग समान होने के बावजूद FD से मिलने वाली राशि करीब 19,772 रुपये अधिक हो सकती है।

    इस अंतर की मुख्य वजह निवेश की अवधि और रकम के बैंक में उपलब्ध रहने का समय है। FD में पूरी राशि पहले दिन से जमा होती है, इसलिए पूरी रकम पर निर्धारित अवधि के दौरान ब्याज मिलता रहता है। RD में पैसा धीरे-धीरे हर महीने जमा होता है, इसलिए बाद में जमा होने वाली रकम को पूरी अवधि का ब्याज नहीं मिल पाता।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक के लिए FD ही बेहतर विकल्प है। यदि किसी व्यक्ति के पास एकमुश्त रकम उपलब्ध है और निकट भविष्य में उसकी जरूरत नहीं है, तो वह FD पर विचार कर सकता है। इसके विपरीत जिन लोगों के पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है, लेकिन वे नियमित रूप से बचत करना चाहते हैं, उनके लिए RD उपयोगी हो सकती है।

    RD के जरिए हर महीने एक निश्चित राशि बचाने की आदत भी विकसित की जा सकती है। नौकरीपेशा लोगों या नियमित आय वाले निवेशकों के लिए यह तरीका भविष्य में किसी बड़े खर्च के लिए रकम तैयार करने में मददगार हो सकता है। दूसरी ओर, FD उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकती है जिनके पास पहले से पर्याप्त एकमुश्त बचत मौजूद है।

    टैक्स के लिहाज से भी निवेश से मिलने वाले ब्याज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। FD और RD से प्राप्त ब्याज कर नियमों के तहत आय का हिस्सा हो सकता है। निर्धारित सीमा और लागू नियमों के अनुसार बैंक ब्याज पर TDS भी काट सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले ब्याज दर के साथ टैक्स प्रभाव, अवधि, समय से पहले निकासी के नियम और अपनी वित्तीय जरूरतों को भी देखना जरूरी है।

    अंततः FD और RD में चुनाव केवल ज्यादा रिटर्न के आधार पर नहीं होना चाहिए। एकमुश्त रकम और निवेश की अवधि उपलब्ध हो तो FD का विकल्प उपयोगी हो सकता है, जबकि नियमित छोटी बचत के जरिए भविष्य के लिए रकम तैयार करने वालों के लिए RD अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

  • शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    नई दिल्ली । धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही शुभ और अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के उपायों के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में ऐसा माना जाता है कि अगर व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे जरूरतमंदों की मदद करे और गलत कार्यों से दूर रहे तो शनिदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए केवल पूजा पाठ ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण और सेवा भाव को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई करके शनिदेव का ध्यान किया जा सकता है। भक्त शनिदेव के मंदिर जाकर उनकी पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को सरसों का तेल काले तिल और काला वस्त्र अर्पित किया जाता है। कुछ लोग दीपक में सरसों का तेल डालकर शनिदेव के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हैं। पूजा के दौरान शनिदेव के मंत्रों का जाप करने और मन को शांत रखने की परंपरा भी है।

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा को भी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्त को मानसिक मजबूती और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को काली उड़द काले तिल कंबल कपड़े या भोजन का दान करने की परंपरा भी है। दान करते समय दिखावे से बचना और अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी गरीब बुजुर्ग असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना भी शनिदेव की उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार के दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या सात्विक भोजन करके व्रत का पालन करते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए उपवास जरूरी नहीं है। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जिन्हें नियमित दवा और भोजन की आवश्यकता होती है उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के कठोर उपवास नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता में पूजा के साथ व्यक्ति का व्यवहार भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन झूठ बोलने क्रोध करने किसी का अपमान करने छल कपट करने और गलत कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शनिदेव कर्मों का फल देने वाले देवता हैं इसलिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धा का सबसे बड़ा आधार अच्छे कर्म माने जाते हैं। माता पिता बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करना पशु पक्षियों के प्रति दया रखना और अपने काम के प्रति ईमानदार रहना भी शुभ माना जाता है। इसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए केवल एक दिन की पूजा के बजाय पूरे जीवन में अच्छे कर्म और संयम अपनाना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • बुखार आते ही घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सांस फूलना हो तो रहें अलर्ट; स्वाइन फ्लू से बचाव और टेस्ट की पूरी जानकारी

    बुखार आते ही घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सांस फूलना हो तो रहें अलर्ट; स्वाइन फ्लू से बचाव और टेस्ट की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के इंदौर में 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद देश के कई हिस्सों में इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के मामले पिछले साल की तुलना में करीब छह गुना बढ़ने की बात सामने आई है। वहीं बेंगलुरु के एक स्कूल में 500 से ज्यादा विद्यार्थी और 21 स्टाफ सदस्य बीमार पड़ने की खबर ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क कर दिया है। मेरठ में भी मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हरियाणा चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर स्वास्थ्य विभागों ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर H1N1 टेस्ट कराना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका जवाब नहीं है। हर बुखार में तुरंत स्वाइन फ्लू टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। टेस्ट का फैसला मरीज के लक्षणों बीमारी की अवधि आसपास संक्रमण की स्थिति और उसके जोखिम वाले कारकों को देखकर किया जाता है।

    स्वाइन फ्लू जिसे H1N1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है उसके लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे ही दिखाई देते हैं। इसमें बुखार खांसी गले में खराश शरीर में दर्द सिरदर्द थकान और कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मरीजों में नाक बहने या बंद होने जैसी शिकायत भी देखी जाती है। सामान्य तौर पर हल्के लक्षण होने पर घबराने के बजाय आराम करना पर्याप्त हो सकता है। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि अगर बुखार लगातार बढ़ रहा हो सांस लेने में परेशानी हो छाती में दर्द हो अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या बीमारी के लक्षण लगातार बिगड़ रहे हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

    स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने बोलने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। खास बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखाई देने से पहले भी वायरस फैला सकता है। बच्चों में संक्रमण फैलने की अवधि कुछ मामलों में अधिक हो सकती है। यही वजह है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और बीमारी के दौरान दूसरों से दूरी रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    स्वाइन फ्लू का खतरा हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। दो साल से कम उम्र के बच्चे 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं और अस्थमा डायबिटीज या हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम ज्यादा हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार नाक या गले के स्वैब से जांच करा सकते हैं। RT-PCR जैसे टेस्ट वायरस की पहचान में मदद करते हैं। लेकिन हर सामान्य बुखार में जांच कराना जरूरी नहीं है। यदि लक्षण हल्के हैं और मरीज की हालत स्थिर है तो डॉक्टर स्थिति देखकर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसके उलट तेज या लगातार बुखार सांस लेने में परेशानी तेजी से बिगड़ती तबीयत या हाई रिस्क श्रेणी में आने वाले मरीजों के मामले में जांच और उपचार को लेकर जल्द चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभागों की ओर से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचना हाथ साफ रखना बीमारी के दौरान भीड़ से दूरी बनाना और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं न लेना महत्वपूर्ण है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वाइन फ्लू को लेकर डरने के बजाय लक्षणों को समझकर समय पर चिकित्सा सलाह ली जाए। वर्ष 2009 में H1N1 वैश्विक महामारी का कारण बना था लेकिन आज H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है। इसलिए मौजूदा मामलों को सीधे कोरोना जैसी नई महामारी मानना सही नहीं होगा। फिर भी बुजुर्गों बच्चों गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह संक्रमण गंभीर हो सकता है। ऐसे में सावधानी और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • सावन में शिव आराधना के साथ खानपान और पूजा विधि का रखें ध्यान, जानिए महिलाओं के लिए बताए गए जरूरी नियम

    सावन में शिव आराधना के साथ खानपान और पूजा विधि का रखें ध्यान, जानिए महिलाओं के लिए बताए गए जरूरी नियम


    नई दिल्ली । 
    हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में की गई शिव उपासना, सोमवार व्रत और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का अलग महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं भी पति की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ इस महीने में विभिन्न व्रत और पूजा करती हैं।

    सावन के दौरान महिलाओं के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद भगवान शिव की पूजा और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत या धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि दिन की शुरुआत धार्मिक कार्यों और सकारात्मक विचारों के साथ करने से पूजा के प्रति एकाग्रता बनी रहती है।

    धार्मिक मान्यताओं में सावन के दौरान काले वस्त्रों से परहेज करने की बात कही जाती है। इसके स्थान पर हरे रंग को शुभ माना जाता है। सावन में हरा रंग प्रकृति, हरियाली और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। हालांकि इन परंपराओं को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में इनके पालन का तरीका अलग हो सकता है।

    शिव पूजा से जुड़ी सामग्री को लेकर भी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। सावन में भगवान शिव को बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करने की परंपरा है। वहीं तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल को शिव पूजा में अर्पित न करने की धार्मिक मान्यता बताई जाती है। पूजा सामग्री का उपयोग करते समय श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि का भी ध्यान रखते हैं।

    सावन के व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मांसाहार और मदिरा से दूर रहने की परंपरा है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करती हैं। भोजन को लेकर किसी भी प्रकार का व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    सावन के व्रत और पूजा के दिनों में बैंगन, मूली तथा कुछ पत्तेदार सब्जियों से परहेज करने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ मौसम संबंधी पारंपरिक कारण भी बताए जाते हैं। बारिश के मौसम में कुछ सब्जियों में कीड़े लगने की संभावना अधिक मानी जाती थी, इसलिए पुराने समय से इनके सेवन को सीमित करने की परंपरा विकसित हुई।

    मासिक धर्म को लेकर भी कुछ पारंपरिक धार्मिक नियम बताए जाते हैं, जिनमें शिवलिंग को स्पर्श न करने की मान्यता शामिल है। हालांकि यह धार्मिक परंपरा का विषय है और अलग-अलग परिवारों तथा समुदायों में इसके पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं। इस दौरान महिलाओं के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    सुहागिन महिलाओं के लिए सावन में मंगली गौरी, शिवरात्रि और हरियाली तीज जैसे व्रतों का भी विशेष महत्व बताया जाता है। वहीं अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखने की धार्मिक परंपरा का पालन करती हैं। सावन का मूल उद्देश्य श्रद्धा, संयम और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा माना जाता है। इसलिए पूजा और व्रत करते समय धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और अपनी क्षमता का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

  • अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

    अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी के जाट समाज को निशाना बनाए जाने के आरोप के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती भी उनके समर्थन में उतर आई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अहंकारी और अशोभनीय बताते हुए उनसे तुरंत माफी मांगने की मांग की है।

    जयंत बोले- राजनीतिक लड़ाई में मेरा नाम लेते, समाज को क्यों घसीटा?

    जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के बीच अखिलेश ने पूरे जाट समाज को निशाना बनाया। जयंत ने कहा कि अगर अखिलेश को उनसे कोई शिकायत थी तो सीधे उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी। पूरे समाज को इस विवाद में घसीटना उचित नहीं है।

    जयंत ने अखिलेश के रवैये को अहंकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह के राजनीतिक अहंकार को करीब से देखा है और यही किसी के राजनीतिक पतन की वजह बनता है।

    मायावती ने जयंत का किया समर्थन

    मायावती ने भी X पर पोस्ट कर जयंत चौधरी का समर्थन किया। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को न केवल जयंत और राष्ट्रीय लोकदल का अपमान बताया, बल्कि इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का भी अपमान करार दिया।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

    1993 के सपा-बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

    मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के इसी अहंकारी रवैये के कारण गठबंधन टूट गया था और इसके बाद स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

    मायावती का कहना है कि बाद में दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन जरूर हुआ, लेकिन अखिलेश यादव के रवैये में भी कथित तौर पर वही अहंकार दिखाई दिया। उन्होंने सपा पर राजनीतिक जरूरत के हिसाब से रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी काम निकलने के बाद ‘गिरगिट की तरह रंग बदलती है।’

    PDA में पंडितों को शामिल करने पर भी साधा निशाना

    मायावती ने अखिलेश यादव के PDA में ‘P’ को पंडितों से जोड़ने वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अब पंडित समाज को अपना हितैषी बताने की कोशिश कर रही है, जबकि उनके मुताबिक पार्टी ने कभी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों या ब्राह्मण समाज के हित में वास्तविक रूप से काम नहीं किया।

    क्या था अखिलेश का ‘चवन्नी’ वाला बयान?

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों और राजनीतिक साथियों का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए आरएलडी और जयंत चौधरी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी का साथ छोड़कर चले गए।

    अखिलेश ने इसी संदर्भ में कहा था कि ‘हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।’ इसी बयान को लेकर अब जयंत चौधरी और मायावती ने सपा प्रमुख पर हमला बोला है।

  • वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना जरूरी माना जाता है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी दें। रोजाना के भोजन में शामिल दाल इस लिहाज से एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। खास तौर पर मूंग दाल को हल्के और संतुलित भोजन के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    मूंग दाल में प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, जबकि फाइबर युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इससे बार बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने और भोजन के बीच अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायता मिल सकती है।

    वजन घटाने के लिए मूंग दाल को बनाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। यदि दाल में बहुत अधिक तेल, घी या क्रीम का इस्तेमाल किया जाए तो भोजन की कुल कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए इसे हल्के मसालों और सीमित मात्रा में तेल के साथ तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    मूंग दाल की आसान रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले दाल को अच्छी तरह साफ करके धो लें। इसे करीब 15 से 20 मिनट के लिए पानी में भिगोया जा सकता है। इसके बाद दाल को कुकर में पानी, हल्दी, नमक और कटे हुए टमाटर के साथ डालकर पकाएं। दाल के अच्छी तरह नरम होने के बाद इसमें जीरा, हींग और लहसुन का हल्का तड़का लगाया जा सकता है।

    वेट लॉस डाइट के दौरान तड़के में तेल या घी की मात्रा कम रखना बेहतर रहता है। स्वाद बढ़ाने के लिए धनिया, हरी मिर्च और दूसरे हल्के मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे दाल स्वादिष्ट भी रहेगी और भोजन को अनावश्यक रूप से भारी बनाने से भी बचा जा सकेगा।

    मूंग दाल को और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए इसमें अलग अलग सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं। पालक, लौकी, गाजर, टमाटर और तोरई जैसी सब्जियों को दाल के साथ पकाने से भोजन में पोषक तत्व और फाइबर की मात्रा बढ़ सकती है। इस तरह तैयार दाल दोपहर या रात के भोजन का हिस्सा बन सकती है।

    हालांकि वजन कम करने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। दाल के साथ भोजन में हरी सब्जियां और सलाद शामिल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार रोटी या चावल की संतुलित मात्रा भी ली जा सकती है। भोजन की मात्रा और पूरे दिन की कुल कैलोरी का ध्यान रखना भी वजन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

    इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन की आदत वजन घटाने की कोशिश में मददगार हो सकती है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या लंबे समय से चल रही समस्या में व्यक्तिगत डाइट के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    मूंग दाल को इसलिए वजन घटाने की कोई जादुई चीज नहीं माना जाना चाहिए। यह प्रोटीन और फाइबर वाले संतुलित भोजन का एक हिस्सा हो सकती है। सही मात्रा, कम तेल में तैयारी और सब्जियों के साथ इसका सेवन रोजाना की डाइट को अधिक संतुलित और पौष्टिक बनाने में मदद कर सकता है।

  • शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, 19 को अष्टमी-नवमी एक साथ, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

    शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, 19 को अष्टमी-नवमी एक साथ, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान व्रत, दुर्गा सप्तशती पाठ, पूजा-अर्चना और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि अष्टमी और नवमी का पर्व 19 अक्टूबर को एक ही दिन मनाया जाएगा।

    11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना

    पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर 2026 को रहेगी। इसी दिन घटस्थापना के साथ नवरात्र शुरू होंगे। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर माना जाएगा।

    कलश स्थापना के लिए ये समय शुभ

    11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसकी अवधि करीब 3 घंटे 52 मिनट रहेगी। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना में थोड़ा अंतर होने के कारण मुहूर्त में बदलाव संभव है।

    नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी
    11 अक्टूबर – मां शैलपुत्री
    12 अक्टूबर – मां ब्रह्मचारिणी
    13 अक्टूबर – मां चंद्रघंटा
    14 अक्टूबर – मां कूष्मांडा
    15 अक्टूबर – मां स्कंदमाता
    16 अक्टूबर – मां कात्यायनी
    17 अक्टूबर – मां कालरात्रि
    18 अक्टूबर – मां महागौरी
    19 अक्टूबर – मां सिद्धिदात्री

    19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी

    2026 में तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर, सोमवार को पड़ेंगी। ऐसे में अष्टमी-नवमी के पूजन, कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन किए जाएंगे। संधि पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।

    घर में ऐसे करें कलश स्थापना

    सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करें।

    इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें और विधि-विधान से आराधना करें। जिन घरों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, वहां दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है।

    नवरात्र में इन बातों का रखें ध्यान

    नवरात्र के दौरान पूजा स्थल को स्वच्छ रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सात्विक भोजन किया जाता है और मांसाहार, शराब व अन्य तामसिक भोजन से परहेज रखा जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही उपवास करें। अखंड ज्योति जलाने पर उसे सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि आग लगने का खतरा न रहे।

    20 अक्टूबर को विजयदशमी

    नवरात्र के समापन के अगले दिन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। कई स्थानों पर इसी दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाएगी।

    शारदीय नवरात्र 2026 की प्रमुख तारीखें

    पर्व – तारीख
    नवरात्र प्रारंभ/घटस्थापना – 11 अक्टूबर 2026
    दुर्गा अष्टमी – 19 अक्टूबर 2026
    महानवमी – 19 अक्टूबर 2026
    विजयदशमी – 20 अक्टूबर 2026

  • आज का राशिफल 22 अगस्त 2026: इन राशियों के लिए खुलेगा तरक्की और धन का रास्ता, जानें मेष से मीन तक का हाल

    आज का राशिफल 22 अगस्त 2026: इन राशियों के लिए खुलेगा तरक्की और धन का रास्ता, जानें मेष से मीन तक का हाल


    नई दिल्ली । 22 अगस्त 2026 का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आज कुछ राशि के जातकों को कामकाज में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं तो कुछ लोगों को अपने खर्च और फैसलों पर विशेष नियंत्रण रखना होगा। नौकरी करने वालों के लिए कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं वहीं कारोबार से जुड़े लोगों को किसी पुराने संपर्क से लाभ मिलने की उम्मीद है। पारिवारिक जीवन में भी दिन मिला जुला रह सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर अलग अलग प्रभाव डालती है इसलिए आज का दिन अपनी राशि के अनुसार योजनाएं बनाने और सावधानी से निर्णय लेने का संकेत दे रहा है।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कामकाज में आपकी सक्रियता से वरिष्ठ लोग प्रभावित हो सकते हैं। किसी पुराने काम को पूरा करने का अवसर मिलेगा। कारोबार में जल्दबाजी से बचें और आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला लें। परिवार में किसी सदस्य के साथ अच्छा समय बीतेगा।

    वृषभ राशि के जातकों को आज धन से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचें। परिवार में छोटी बात को लेकर तनाव हो सकता है लेकिन समझदारी से स्थिति संभाली जा सकती है।

    मिथुन राशि वालों के लिए दिन मेहनत के बाद सफलता दिलाने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी योजनाओं की सराहना होगी। व्यापार में नए संपर्क लाभदायक साबित हो सकते हैं। प्रेम जीवन में बातचीत से गलतफहमी दूर होगी। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अच्छा समय है।

    कर्क राशि वालों को आज भावनाओं में बहकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए। नौकरी में काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन मेहनत का परिणाम भी मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। परिवार के किसी बुजुर्ग की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता का लाभ मिलेगा। कारोबार में नई योजना शुरू करने का विचार बन सकता है। धन संबंधी मामलों में लाभ के संकेत हैं लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी होगा। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी।

    कन्या राशि वालों को आज अपने काम में अनुशासन बनाए रखना होगा। नौकरी में किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापारियों को लाभ का अवसर मिल सकता है। घर परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। यात्रा की योजना बन सकती है।

    तुला राशि के लिए आज का दिन नए अवसर लेकर आ सकता है। करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी। प्रेम संबंधों में भरोसा बढ़ेगा।

    वृश्चिक राशि वालों को आज विरोधियों से सतर्क रहना चाहिए। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें। नौकरी में मेहनत का लाभ मिलेगा। परिवार के साथ समय बिताने से तनाव कम होगा।

    धनु राशि वालों के लिए आज भाग्य का साथ मिल सकता है। लंबे समय से अटका काम पूरा होने की संभावना है। कारोबार में विस्तार की योजना बन सकती है। धन लाभ के अवसर मिलेंगे। विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा।

    मकर राशि वालों को आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलना होगा। काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। नौकरी में अधिकारी आपकी कार्यशैली से प्रभावित हो सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो शांत रहकर बातचीत करें।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रह सकता है। करियर में नई दिशा मिलने के संकेत हैं। व्यापार में लाभ के अवसर मिलेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। किसी खास व्यक्ति से महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है।

    मीन राशि वालों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहने वाला है। मेहनत करने पर सफलता जरूर मिलेगी लेकिन धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। धन संबंधी मामलों में जोखिम लेने से बचें। परिवार का सहयोग मिलेगा और मानसिक शांति के लिए धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है।