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  • थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

    थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

    नई दिल्ली। सदियों से भारत में जड़ी-बूटियों के माध्यम से कई बीमारियों का उपचार किया जाता रहा है। आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जिसका उपयोग शरीर की गांठों, सूजन और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याओं में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औषधि थायराइड जैसी समस्याओं में भी सहायक भूमिका निभा सकती है, बशर्ते इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से किया जाए।

    कंचनार गुग्गुलु क्या है?

    कंचनार गुग्गुलु आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसे मुख्य रूप से कंचनार वृक्ष की छाल और गुग्गुलु से तैयार किया जाता है। यह शरीर में कफ और मेद धातु को संतुलित करने में मदद करती है और ग्रंथियों की सूजन को कम करने में सहायक मानी जाती है।

    थायराइड और हार्मोन संतुलन में मददगार

    आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन) जमा होने से गांठें और हार्मोन असंतुलन की समस्या बढ़ सकती है, जिससे थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कंचनार गुग्गुलु शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारकर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

    एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्स गुण

    कंचनार गुग्गुलु में एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की सूजन को कम करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है।

    सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी

    विशेषज्ञों का कहना है कि कंचनार गुग्गुलु पाउडर और टैबलेट दोनों रूप में उपलब्ध है, लेकिन इसका सेवन सही मात्रा और सही स्थिति में ही करना चाहिए। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

    जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

    इसके साथ ही केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है। जंक फूड और अधिक चीनी का सेवन कम करना चाहिए, नियमित व्यायाम और सुबह की सैर को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। आयुर्वेद में हल्दी वाला दूध और हरे धनिए का सेवन भी थायराइड संतुलन में सहायक माना गया है।

  • 22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय

    22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय


    नई दिल्ली:
    धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 22 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जा रहा है यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं

    पंचांग के अनुसार यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है जो रात 10 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर निर्धारित है वहीं आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का आरंभ होगा

    इस दिन का सबसे खास पहलू रवि योग का निर्माण है जो सुबह 5 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा ज्योतिष के अनुसार यह योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए उपयुक्त माना जाता है इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ समय माना जाता है

    दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी जो सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा यह समय पूजा और ध्यान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है वहीं शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना जाता है

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है इसके अलावा यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगा दुर्मुहूर्त का समय दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जिसे अशुभ माना जाता है

    इसके साथ ही वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा इस दौरान भी शुभ कार्यों से परहेज करना उचित माना जाता है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही मुहूर्त का चयन जीवन में सकारात्मक परिणाम लाने में सहायक होता है

     22 अप्रैल का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है जहां एक ओर स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा का विशेष महत्व है वहीं दूसरी ओर शुभ योगों का संयोग इसे और भी खास बनाता है ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की योजना बनाएं ताकि उन्हें बेहतर फल प्राप्त हो सके

  • शाजापुर में चलती बस में भीषण आग, 60 से ज्यादा बारातियों ने कूदकर बचाई जान

    शाजापुर में चलती बस में भीषण आग, 60 से ज्यादा बारातियों ने कूदकर बचाई जान


    शाजापुर। जिले के नेशनल हाईवे-52 पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया, जब इंदौर से शडोरा जा रही एक बारात बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर खाक हो गई। बस में सवार करीब 60 से 70 बारातियों ने सूझबूझ दिखाते हुए कूदकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
    चलती बस से उठता धुआं बना खतरे का संकेत
    जानकारी के अनुसार, बस इंदौर से गुना जिले के शडोरा की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक बस के अंदर से धुआं उठने लगा। चालक कुछ समझ पाता, इससे पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
    बारातियों ने कूदकर बचाई जान, सामान जलकर राख
    आग लगते ही बस में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस से कूदकर अपनी जान बचाई। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यात्रियों का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया।
    5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पाया काबू
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। शाजापुर और मक्सी से कुल 5 दमकल गाड़ियां बुलवाई गईं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी।
    प्रशासन मौके पर पहुंचा, यात्रियों को सुरक्षित ठहराया
    घटना की जानकारी मिलते ही एसपी यशपाल सिंह राजपूत, एसडीएम मनीषा वास्कले और तहसीलदार सुनील पाटिल मौके पर पहुंचे। बाद में कलेक्टर ऋजु बाफना ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन ने सभी यात्रियों को पास के ढाबे पर सुरक्षित ठहराया और उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरी बस की व्यवस्था की।
    हाईवे पर लगा जाम, यातायात प्रभावित
    आग की घटना के चलते हाईवे के एक हिस्से पर यातायात बाधित हो गया, जिससे कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। यातायात पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहनों को नियंत्रित किया और बाद में क्रेन की मदद से जली हुई बस को हटाकर यातायात सामान्य कराया गया।
    चालक-परिचालक फरार, जांच जारी
    लालघाटी थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। घटना के बाद बस चालक और परिचालक मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
    फायर सिस्टम पर भी उठे सवाल
    राहत कार्य के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पाइप कई जगह से खराब होने के कारण पानी का नुकसान हुआ, जिससे आग बुझाने में दिक्कत आई। नगर पालिका कर्मचारियों ने भी संसाधनों की कमी और खराब स्थिति पर चिंता जताई है।

  • घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम

    घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली जीवनशैली के कारण शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर टखनों, पीठ, कंधों और कमर में अकड़न आम हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ छोटे लेकिन असरदार व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है ‘एंकल मूवमेंट’, जो टखनों की जकड़न और दर्द में तेजी से राहत देता है।
    आयुष मंत्रालय भी मानता है प्रभावी
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी एंकल मूवमेंट को एक सरल और प्रभावी व्यायाम मानता है। इसे रोजाना सिर्फ 3 से 5 मिनट करने से पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है, जकड़न कम होती है और शरीर का संतुलन मजबूत होता है। यह व्यायाम घर, ऑफिस या किसी भी जगह आसानी से किया जा सकता है।
    टखनों और पैरों के लिए बेहद फायदेमंद
    विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह एक्सरसाइज बेहद लाभकारी है। नियमित अभ्यास से टखनों की लचीलापन बढ़ती है, जोड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और चलने-फिरने में आसानी होती है। यह खासकर बुजुर्गों के लिए गिरने के खतरे को भी कम करता है।
    आसान है करने की प्रक्रिया
    एंकल मूवमेंट करना बेहद सरल है। इसके लिए पहले सीधे खड़े होकर शरीर को संतुलित करें और एक पैर को लगभग 9 इंच तक ऊपर उठाएं। फिर उस पैर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं और गोल घुमाव में चलाएं—पहले घड़ी की दिशा में और फिर उल्टी दिशा में। हर दिशा में 5 से 10 बार यह प्रक्रिया दोहराएं, फिर दूसरे पैर से भी यही करें।
    किसी भी समय किया जा सकता है अभ्यास
    यह व्यायाम दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, जैसे सुबह उठने के बाद या काम के दौरान छोटे ब्रेक में। जरूरत पड़ने पर दीवार या कुर्सी का सहारा भी लिया जा सकता है ताकि संतुलन बना रहे।
    नियमित अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ
    नियमित एंकल मूवमेंट करने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सूजन और थकान कम होती है और जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है। इससे घुटनों और कूल्हों पर दबाव भी कम पड़ता है और शरीर अधिक सक्रिय रहता है।
  • शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय

    शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय


    नई दिल्ली।  गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके मुकाबले लस्सी एक पारंपरिक और प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है।
    दही से बनने वाली सेहतमंद ड्रिंक
    लस्सी दही से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय भारतीय पेय है, जिसे मथकर उसमें चीनी या नमक और अन्य स्वाद बढ़ाने वाली चीजें मिलाकर बनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन मानी जाती है।
    गर्मी में शरीर को देती है ठंडक
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जिसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को तुरंत राहत देता है और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करती है।
    पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद
    लस्सी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
    लस्सी पीने का सही समय
    विशेषज्ञों के अनुसार लस्सी का सेवन दिन के समय, विशेषकर दोपहर में करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। दोपहर के भोजन के साथ लस्सी पीने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को गर्मी से राहत मिलती है।
    रात में सेवन से बचें
    हालांकि कुछ लोग रात में भी लस्सी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। रात में इसका सेवन कुछ लोगों में भारीपन या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए इसे दिन में ही पीना बेहतर माना जाता है।
    गर्मी में प्राकृतिक राहत
    कुल मिलाकर, लस्सी गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करती है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा

  • सूरज बड़जात्या ये प्रेम मोल लिया में आयुष्मान और शरवरी की जोड़ी बनेगी आकर्षण का केंद्र..

    सूरज बड़जात्या ये प्रेम मोल लिया में आयुष्मान और शरवरी की जोड़ी बनेगी आकर्षण का केंद्र..

    नई दिल्ली।  हिंदी सिनेमा में पारिवारिक फिल्मों की एक अलग पहचान बनाने वाले सूरज बड़जात्या एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी नई फिल्म ये प्रेम मोल लिया के साथ वापसी करने जा रहे हैं। इस फिल्म के ऐलान के साथ ही दर्शकों के बीच उत्सुकता का माहौल बन गया है क्योंकि यह एक म्यूजिकल फैमिली एंटरटेनर के रूप में सामने आएगी जिसमें भावनाओं और रिश्तों को खास महत्व दिया जाएगा। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ नजर आएंगे और दोनों कलाकार पहली बार एक साथ स्क्रीन साझा करते दिखाई देंगे।

    फिल्म को 27 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है और इसे लेकर फिल्म प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए लंबे समय बाद राजश्री फिल्मों का लोकप्रिय किरदार प्रेम फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहा है। लगभग बारह वर्षों के अंतराल के बाद लौट रहे इस किरदार को इस बार आयुष्मान खुराना निभाते नजर आएंगे। अपनी सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान इस भूमिका में एक नया रंग भर सकते हैं जिससे यह किरदार आधुनिक दौर के दर्शकों के साथ भी गहराई से जुड़ सके।

    फिल्म में शरवरी वाघ का किरदार भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो पारंपरिक भारतीय नारी की छवि को एक नए अंदाज में प्रस्तुत करेगा। उनके किरदार में सादगी के साथ आत्मविश्वास और भावनात्मक मजबूती देखने को मिलेगी जो पारिवारिक फिल्मों की मूल भावना को और गहरा बनाएगी। आयुष्मान और शरवरी की ताजा जोड़ी को लेकर दर्शकों में खास दिलचस्पी है और माना जा रहा है कि दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

    फिल्म की कहानी पूरी तरह परिवार और रिश्तों के इर्द गिर्द बुनी गई है जिसमें प्रेम त्याग और आपसी समझ जैसे मूल्यों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। सूरज बड़जात्या की फिल्मों की खासियत हमेशा यह रही है कि वे दर्शकों को एक सुकून भरा अनुभव देती हैं और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती हैं। बदलते समय में भी ऐसी फिल्मों की प्रासंगिकता बनी हुई है और यही वजह है कि इस फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    फिल्म का संगीत हिमेश रेशमिया द्वारा तैयार किया जा रहा है जो लंबे समय बाद सूरज बड़जात्या के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले दोनों ने प्रेम रतन धन पायो में साथ काम किया था और उस फिल्म के गानों ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ऐसे में इस नई फिल्म के संगीत को लेकर भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं और माना जा रहा है कि इसके गीत कहानी को और अधिक भावनात्मक गहराई देंगे।

    निर्माताओं का विश्वास है कि यह फिल्म एक बार फिर परिवारों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल होगी और उन्हें एक साथ बैठकर फिल्म देखने का अवसर देगी। ऊंचाई जैसी सराहनीय फिल्म के बाद सूरज बड़जात्या अपनी पारंपरिक शैली में लौटते नजर आ रहे हैं और यह फिल्म दर्शकों को भावनाओं से जुड़ा एक यादगार अनुभव देने की पूरी कोशिश करेगी।

  • देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत

    देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत


     देवास। जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच शंकरगढ़ पहाड़ी स्थित गोशाला में गोवंश को राहत देने के लिए सराहनीय पहल की गई है। संस्था अभिरंग ने गर्मी से बेहाल गायों के लिए गोशाला में दो बड़े कूलर लगाए हैं, जिससे वातावरण को ठंडा रखने में मदद मिल रही है।
    43 डिग्री तक पहुंचा तापमान, गोवंश पर बढ़ा असर
    जानकारी के अनुसार, देवास जिले में इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है, जबकि शंकरगढ़ पहाड़ी क्षेत्र में यह सामान्य से 2 से 3 डिग्री अधिक रहता है। इस कारण गोशाला में गोवंश को अत्यधिक गर्मी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
    संस्था अभिरंग की पहल से मिली राहत
    भीषण गर्मी को देखते हुए संस्था अभिरंग के सदस्यों ने आपसी सहयोग से गोशाला में कूलर लगाने की व्यवस्था की। मंगलवार को दो बड़े कूलर लगाए गए, जिनसे गोशाला के अंदर ठंडी हवा पहुंच रही है और गोवंश को राहत मिल रही है।
    गोशाला में बदला माहौल, पशुओं को मिली राहत
    कूलर लगने के बाद गोशाला के वातावरण में काफी सुधार देखा गया है। पहले जहां गर्मी के कारण गायें बेचैन रहती थीं, वहीं अब उन्हें अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण मिल रहा है, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
    संस्था अध्यक्ष ने बताया उद्देश्य
    संस्था अभिरंग के अध्यक्ष बसंत वर्मा ने बताया कि वर्तमान में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर गोवंश पर पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सके।
    पशुसेवा की मिसाल बनी पहल
    स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में गोवंश की देखभाल के लिए किया गया यह प्रयास एक प्रेरणादायक कदम है, जो पशुसेवा और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करता है।

  • वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जा रही है इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर आ रही है

    दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है आंकड़ों के अनुसार यूएई में डीजल की कीमतों में लगभग 85 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं वहीं कनाडा पाकिस्तान फ्रांस श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में यह वृद्धि 35 से 50 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण मानी जा रही है

    पेट्रोल की कीमतों का रुझान भी इसी प्रकार का रहा है पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जबकि अमेरिका और यूएई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है अन्य देशों जैसे कनाडा श्रीलंका और चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है हालांकि ब्राजील और रूस जैसे देशों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है

    इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें वर्ष की शुरुआत के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं डीजल की कीमत लगभग 87 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 94 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है यह स्थिरता ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता अपने चरम पर है और कई देश महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान है तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन की खरीद इस तरह कर रही हैं जिससे खुदरा कीमतों को स्थिर रखा जा सके हालांकि इसके चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है

    आर्थिक विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है अनुमान के अनुसार यदि कीमतें 135 से 165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 35 रुपए तक का नुकसान हो सकता है इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से लागत में करीब 6 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है

    कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जहां वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है वहीं भारत में संतुलित नीतियों और प्रबंधन के चलते ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है

  • हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    मंदसौर/नीमच। मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। यहां छोड़े गए दो चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने अपने प्रवास का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि प्रदेश में चल रहे चीता प्रोजेक्ट और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

    20 अप्रैल 2025 को हुआ था पुनर्वास, मुख्यमंत्री ने छोड़ा था अभयारण्य में

    इन दोनों चीतों को चीता प्रोजेक्ट के तहत 20 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा गया था। यह पहल प्रदेश में वन्यजीवों के पुनर्वास और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था।

    नए वातावरण में सफलतापूर्वक ढले दोनों चीते

    एक वर्ष के दौरान ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने नए पर्यावरण के साथ खुद को पूरी तरह अनुकूलित कर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों चीते स्वस्थ हैं और उनकी गतिविधियों में प्राकृतिक व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यह संकेत इस परियोजना की सफलता को मजबूत करता है।

    हाईटेक सिस्टम से लगातार निगरानी

    वन विभाग द्वारा दोनों चीतों की 24 घंटे सख्त निगरानी की जा रही है। उनके मूवमेंट, स्वास्थ्य और शिकार गतिविधियों पर GPS कॉलर और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्थिति का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो।

    वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करना मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देता है, बल्कि भविष्य की वन्यजीव पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत करता है

    गांधी सागर बनेगा चीतों का स्थायी आवास

    वन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ‘प्रभास’ और ‘पावक’ गांधी सागर अभयारण्य में स्थायी रूप से बस जाएंगे। इसके साथ ही यह क्षेत्र चीतों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित होगा।

    प्रदेश के लिए गर्व का विषय

    इन दोनों चीतों का एक वर्ष पूरा करना न केवल वन विभाग, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि राज्य को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला सकती है।