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  • कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा

    कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा


    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। बुधवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में खरगे ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कई सदस्य खुलकर उनके समर्थन में सामने नहीं आए और उन्होंने इस घटना की निंदा नहीं की। खास तौर पर उन्होंने उन नेताओं का जिक्र किया जो लगातार मीडिया में सक्रिय रहते हैं। हालांकि खरगे ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी बैठक में मौजूद नेताओं के हवाले से सामने आई है और कांग्रेस की ओर से खरगे की निजी प्रतिक्रिया को लेकर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    दरअसल यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। 8 अगस्त को खरगे ने यहां एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की और आरोप लगाया कि आयोजन से जुड़े लोगों का बीजेपी से संबंध है। दूसरी तरफ बीजेपी ने इस आयोजन से दूरी बनाई और पार्टी के स्तर पर किसी तरह की भूमिका से इनकार किया। मामले ने धीरे धीरे राजनीतिक रंग ले लिया और अब यह मुद्दा संसद से लेकर कांग्रेस की CWC बैठक तक पहुंच गया है।

    खरगे पहले ही राज्यसभा में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने सदन में कहा था कि रैली के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह दलित समुदाय से आते हैं लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने लिए विशेष संरक्षण की मांग नहीं की। उनके मुताबिक इस घटना ने उन्हें छुआछूत के दर्द का एहसास कराया। खरगे ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई थी।

    CWC की बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस घटना का मुद्दा उठाया था और इसकी निंदा भी की थी। उनके मुताबिक कार्य समिति ने इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय माना है। हालांकि बैठक में खरगे ने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेता ऐसे हैं जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान देते हैं और लेख भी लिखते हैं। इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर चल रही असहजता से जोड़कर देखा जा रहा है।

    विवाद के दूसरे पक्ष में बीजेपी ने भी मामले की जांच का भरोसा दिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यानी एक तरफ कांग्रेस इस घटना को सामाजिक और जातिगत सम्मान से जोड़कर देख रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे पार्टी से जोड़ने के आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कर रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अब खरगे की अपनी पार्टी के नेताओं से अपेक्षा को लेकर हो रही है। CWC जैसी शीर्ष बैठक में उन्होंने जिस तरह अपनी नाराजगी और दुख जाहिर किया है उससे साफ है कि हल्द्वानी का विवाद कांग्रेस के लिए केवल बीजेपी पर हमला करने का मुद्दा नहीं रहा बल्कि पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि खरगे की टिप्पणी से किन नेताओं की ओर संकेत था। इसलिए बिना नाम सामने आए किसी नेता को उनकी नाराजगी का जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल हल्द्वानी का यह विवाद जाति सम्मान राजनीतिक बयानबाजी और दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East tensions) के बाद तेल कंपनियों ने मई में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे. जून के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में जब कमी आई तो फ्यूल प्राइस कम होने का भरोसा बढ़ गया था. लेकिन खाड़ी में तनाव फिर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद टूटने लगी है. दरअसल, इस वक्त दुनियाभर में चल रहे तनाव का असर भारत के ईंधन और खाने-पीने के सामानों पर सबसे ज्यादा नजर आ रहा है.


    कच्चा तेल में फिर तेजी
    अमेरिका-ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ने से कच्चे तेल में तेजी आ रही है. इससे ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब और WTI क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. आशंका है कि क्रूड जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच सकता है. तेल की कीमतों में ये तेजी ऐसे समय आई है, जब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद लगाई जा रही थी. लेकिन हालात फिलहाल राहत वाले नहीं दिख रहे क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी दूरी ने एनर्जी मार्केट की बेचैनी बढ़ा दी है।


    भारत पर ज्यादा असर

    भारत के लिए हालात ज्यादा गंभीर हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है. लंबे समय तक ऊंचे दाम रहने पर ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    तेल के साथ-साथ खाने की थाली से जुड़ी एक और चिंता भी सिर उठाने लगी है. गेहूं की कीमतों में तेजी ने आटा और ब्रेड जैसे जरूरी सामान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव ने काला सागर क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मंडियों तक दिखाई देने लगा है. वैश्विक बाजार में गेहूं करीब 6.7 डॉलर प्रति बुशेल के स्तर पर पहुंच गया है. देश की प्रमुख मंडियों में एक महीने में गेहूं के भाव करीब 4 फीसदी तक बढ़ गए हैं. जाहिर है कि गेहूं की बढ़ती कीमतें आटा, ब्रेड और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ा सकती हैं।


    प्याज भी महंगा
    रसोई की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, प्याज भी लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगा है. प्याज का औसत खुदरा भाव 37 रुपये 20 पैसे प्रति किलो पर पहुंच गया है जबकि एक महीने पहले कीमत 34 रुपये 53 पैसे प्रति किलो थी. एक साल पहले प्याज का भाव 26 रुपये 86 पैसे प्रति किलो था. इस तेजी की वजह खरीफ प्याज की आवक में देरी है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

    तेल से लेकर गेहूं और प्याज तक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पैदा हुआ तनाव भारतीय ग्राहकों की जेब तक पहुंच रहा है. ऐसे में सबकी नजर दो मोर्चों पर टिकी हैं. पहला है कि मिडिल ईस्ट में तेल की दिशा क्या रहती है और दूसरा ये कि काला सागर क्षेत्र में सप्लाई का संकट कितना गहराता है क्योंकि इन दोनों का असर सीधे आपकी गाड़ी के खर्च और रसोई के बजट पर पड़ सकता है।

  • US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम

    US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड (Green Card Applications) पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक बोझ से जुड़े नियमों का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत सरकारी आर्थिक मदद लेने वाले कुछ प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन (Green Card Applications) पर सवाल उठ सकते हैं और आवेदन खारिज भी किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (U.S. Citizenship and Immigration Services) का यह नियम 18 सितंबर से लागू होगा। इसका असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।


    क्या सरकारी मदद लेने से ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा?

    पहले सार्वजनिक बोझ का आकलन मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी मदद के आधार पर किया जाता था। नए नियम में अधिकारियों को ज्यादा पहलुओं को देखने का अधिकार दिया गया है। अब आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक हालत और शिक्षा को भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा आवेदक पर निर्भर लोगों की ओर से ली गई कुछ सरकारी मदद को भी आवेदन पर फैसला करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।


    भारतीयों पर कितना पड़ सकता है असर?
    वर्ष 2023 में 78,100 भारतीयों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें करीब 60 प्रतिशत भारतीयों ने परिवार के किसी सदस्य या अमेरिकी नागरिक रिश्तेदार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया था। नए नियम के कारण ऐसे परिवारों में सरकारी सहायता लेने की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करता है तो अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए आवेदन पर फैसला कर सकते हैं।


    क्या अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की ज्यादा ताकत मिलेगी?

    आव्रजन मामलों के जानकारों के अनुसार नए नियम से अधिकारियों के पास आवेदन को लेकर फैसला करने की गुंजाइश बढ़ जाएगी। यानी केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने सरकारी मदद ली है या नहीं। अधिकारी उसकी पूरी परिस्थिति को देखकर यह आकलन कर सकते हैं कि वह भविष्य में सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। इससे ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है।


    किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

    नए नियम का असर सभी प्रवासियों पर एक जैसा नहीं होगा। शरणार्थियों, उत्पीड़न के पीड़ितों और कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को इससे छूट दी गई है। यानी इन लोगों के आवेदन पर सार्वजनिक बोझ से जुड़े नए नियम उसी तरह लागू नहीं होंगे। हालांकि सामान्य ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार की परिस्थितियां अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


    18 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
    यह नया नियम 2022 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए नियम को रद्द करने के बाद आया है। 18 सितंबर से इसके लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच में सरकारी सहायता के साथ आवेदक की व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाएगा। भारतीयों की बड़ी संख्या परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी नागरिकता हासिल करती है। ऐसे में नए नियम के बाद भारतीय आवेदकों को अपनी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

  • चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी

    चीनी के दाम आसमान पर… सरकार ने तय की लिमिट, 15 दिन का स्टॉक नहीं रख सकेंगे कारोबारी


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी (Sugar Stock Limit) इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती (Rising Sugar Demand) है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं।


    चीनी स्टॉक पर किस कारण लिया गया फैसला?

    सरकार के मुताबिक रिकॉर्ड चीनी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए नया आदेश जारी किया गयाहै। इस आदेश के तहत, 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख पाएंगे। यह सरकारी आदेश बुधवार को सामने आया। नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।


    कीमतों में उछाल से चिंता, जुलाई में चीनी को लेकर क्या फैसला हुआ?

    दरअसल, पिछले महीने, भारत ने डीलरों को 30 दिन से अधिक स्टॉक न रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, भारतीय चीनी की कीमतें पिछले महीने 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है। इससे पहले मंगलवार को आई रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत चीनी आपूर्ति बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहा है। खबर के मुताबिक सरकार सीमित शुल्क-मुक्त आयात और थोक व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक सीमा जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।


    चीनी की मांग और आपूर्ति की स्थिति कैसी?

    गौरतलब है कि भारत में अगस्त से नवंबर तक चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। बिस्किट और कन्फेक्शनरी निर्माता जैसे थोक उपभोक्ता त्योहारों से पहले स्टॉक बनाते हैं। अनियमित बारिश और शुष्क मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। चीनी भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह कई गरीब परिवारों के लिए कैलोरी का एक सस्ता स्रोत है।


    भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?

    इससे पहले मई में चीनी निर्यात पर रोक लगाई गई थी। सरकार ने कहा था कि निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • भारत का 'जैसे को तैसे' वाला जवाब…. पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहरी अतिक्रमण पर चलाया बुलडोजर

    भारत का 'जैसे को तैसे' वाला जवाब…. पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहरी अतिक्रमण पर चलाया बुलडोजर


    नई दिल्ली।
    भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते हैं। इस बीच पाकिस्तान (Pakistan) ने फिर कुछ ऐसा कर दिया जिससे भारत (India) को ‘जैस को तैसे’ वाला जवाब देने पड़ा। नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन (Pakistan High Commission) के बाहर बनी कुछ अनधिकृत संरचनाओं और अतिक्रमण को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि ये ढांचे पाकिस्तानी मिशन के वीजा सेक्शन के पास थे और हाई कमीशन के तय परिसर की सीमा के बाहर बने हुए थे। संबंधित एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए इन्हें साफ कर दिया।

    WION की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस कार्रवाई को पाकिस्तान की ओर से इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर की गई हालिया कार्रवाई के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पार्किंग पोल हटा दिए थे। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तनातनी के बीच दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई पहले भी होती रही है।


    पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर क्या हुआ?

    नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर, खास तौर पर उसके वीजा सेक्शन के आसपास कुछ ऐसी संरचनाएं थीं जो निर्धारित परिसर की सीमा के बाहर थीं। इनको अनधिकृत माना गया और संबंधित एजेंसियों ने इन्हें हटा दिया।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक रिश्ते बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि कार्रवाई का सीधा कारण अतिक्रमण और निर्धारित सीमा से बाहर बनी संरचनाएं होना बताया गया है, लेकिन इसका समय इसे दोनों देशों के बीच चल रही पारस्परिक कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।


    इस्लामाबाद में भारत के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई थी?

    नई दिल्ली की कार्रवाई से कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पार्किंग पोल हटा दिए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में जब भी तनाव बढ़ा है, दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे के खिलाफ समान या जवाबी प्रशासनिक कदम उठाए हैं। इनमें राजनयिक कर्मचारियों की संख्या घटाना, आवाजाही और पहुंच पर पाबंदियां लगाना तथा मिशन से जुड़ी सुविधाओं को सीमित करना जैसे कदम शामिल रहे हैं। इसलिए पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर दिल्ली में हुई ताजा कार्रवाई को भी इसी व्यापक सिलसिले की कड़ी माना जा रहा है।


    भारत-पाकिस्तान के रिश्ते इतने खराब क्यों हैं?

    भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव की सबसे बड़ी वजह सीमा पार आतंकवाद है। पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलता है। पिछले साल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा खराब हो गए। अप्रैल 2025 में हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया।

    इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक गंभीर सैन्य तनाव रहा। यह संघर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक माना गया। आखिरकार पाकिस्तान की ओर से संपर्क किए जाने के बाद संघर्ष विराम की स्थिति बनी।


    ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या बदला?

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सामान्य स्थिति वापस नहीं आ सकी है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग ठप हैं और प्रमुख जमीनी सीमा मार्ग भी बंद है। वीजा व्यवस्था भी पहले की तुलना में काफी सीमित कर दी गई है। दोनों देशों में स्थित हाई कमीशन पहले की तुलना में कम कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। यानी दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संपर्क पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन रिश्तों में सामान्य गर्मजोशी फिलहाल दिखाई नहीं देती।


    सिंधु जल संधि भी बनी बड़ा मुद्दा

    भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को भी फिलहाल स्थगित रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और पूरी तरह समाप्त करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण जल समझौता है। ऐसे में इसका स्थगन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की गंभीरता को दिखाता है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • घर की इन गलतियों से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें रसोई से लेकर मुख्य द्वार तक किन बातों का रखें खास ध्यान

    घर की इन गलतियों से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें रसोई से लेकर मुख्य द्वार तक किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं को लेकर कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि घर का वातावरण केवल साफ सफाई से ही नहीं बल्कि उसकी बनावट और वस्तुओं की सही स्थिति से भी प्रभावित हो सकता है। वास्तु के अनुसार यदि घर में कुछ चीजें गलत दिशा में रखी हों या निर्माण के दौरान दिशाओं का ध्यान नहीं रखा गया हो तो इसे वास्तु दोष से जोड़ा जाता है। हालांकि इन बातों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    वास्तु दोष की चर्चा सबसे पहले घर के मुख्य द्वार से शुरू होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। यदि प्रवेश द्वार के आसपास हमेशा गंदगी रहे या वहां टूटी फूटी वस्तुएं जमा हों तो इसे शुभ नहीं माना जाता। इसलिए मुख्य द्वार को साफ रखना चाहिए और वहां पर्याप्त रोशनी का इंतजाम करना बेहतर माना जाता है। दरवाजे के आसपास कबाड़ या बेकार सामान जमा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    घर की रसोई को लेकर भी वास्तु में विशेष नियम बताए गए हैं। रसोई को सामान्य तौर पर अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार रसोई में गैस चूल्हे और पानी से जुड़े स्थानों के बीच उचित संतुलन होना चाहिए। रसोई में गंदगी या लंबे समय तक खराब पड़े सामान को रखना नकारात्मक माना जाता है। इसलिए समय समय पर रसोई की सफाई करना और खराब खाद्य सामग्री को हटाना जरूरी है।

    बेडरूम में भी कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार सोते समय सिर किस दिशा में हो इसका भी महत्व माना जाता है। कमरे में टूटे हुए शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या लंबे समय से इस्तेमाल में न आने वाली वस्तुओं को जमा करके रखना उचित नहीं माना जाता। माना जाता है कि इससे कमरे का वातावरण भारी हो सकता है।

    घर के उत्तर पूर्व हिस्से को वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। इसे ईशान कोण कहा जाता है और धार्मिक मान्यताओं में इसे पूजा तथा सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इस हिस्से में अत्यधिक भारी सामान या अनावश्यक कबाड़ रखने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना भी शुभ माना जाता है।

    बाथरूम और पानी की निकासी को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। घर में कहीं पानी का रिसाव हो तो उसे तुरंत ठीक करवाना चाहिए। लगातार टपकता नल या पाइप से पानी का रिसाव केवल वास्तु की दृष्टि से ही नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से भी नुकसानदायक हो सकता है। पानी की बर्बादी रोकना और घर की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

    वास्तु दोष के उपायों में सबसे महत्वपूर्ण उपाय घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना माना जा सकता है। प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवेश घर के वातावरण को बेहतर बनाता है। पूजा स्थल की नियमित सफाई करें और घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और संवाद को प्राथमिकता दें। किसी गंभीर निर्माण संबंधी समस्या में बिना तोड़फोड़ किए विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    वास्तु से जुड़ी मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है इसलिए इन्हें निश्चित परिणाम देने वाले उपाय के रूप में नहीं देखना चाहिए। घर की सुरक्षा स्वच्छता रोशनी हवा और सही रखरखाव को हमेशा प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

  • बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    नई दिल्ली ।कमरे को खुशबूदार और ताजा रखने के लिए रूम फ्रेशनर, एयर फ्रेशनर और सुगंधित स्प्रे का इस्तेमाल आम हो गया है। घर, कार्यालय और कार में इन उत्पादों का उपयोग खास तौर पर तब बढ़ जाता है, जब बारिश या नमी के कारण कमरे में सीलन और अप्रिय गंध महसूस होने लगती है। हालांकि, लगातार और जरूरत से ज्यादा रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

    रूम फ्रेशनर में खुशबू पैदा करने वाले फ्रेगरेंस कंपाउंड, सॉल्वेंट और दूसरे रासायनिक पदार्थ हो सकते हैं। इन पदार्थों का प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। कुछ संवेदनशील लोगों को तेज खुशबू के संपर्क में आने के बाद सिरदर्द, छींक, खांसी, आंखों में जलन या गले में परेशानी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सांस लेने में असहजता भी हो सकती है।

    बंद कमरे में लगातार स्प्रे करने से समस्या बढ़ सकती है। कमरे में हवा का पर्याप्त आवागमन नहीं होने पर फ्रेशनर से निकलने वाले रसायनों की मौजूदगी कुछ समय तक हवा में बनी रह सकती है। इसलिए किसी छोटे या पूरी तरह बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल करने के बजाय खिड़की और दरवाजे खोलकर हवा का संचार बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

    रूम फ्रेशनर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह आमतौर पर बदबू के वास्तविक स्रोत को खत्म नहीं करता। अगर कमरे में सीलन, गीला कचरा, नमी, गंदे कपड़े या किसी अन्य कारण से दुर्गंध पैदा हो रही है, तो केवल खुशबू वाला स्प्रे उस समस्या को कुछ समय के लिए ढक सकता है। इसलिए दुर्गंध का कारण पता लगाकर उसे दूर करना ज्यादा प्रभावी तरीका है।

    तेज खुशबू के प्रति संवेदनशील लोगों को ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल विशेष सावधानी से करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के आसपास भी जरूरत से ज्यादा सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। जिन लोगों को फ्रेगरेंस या परफ्यूम से परेशानी होती है, उन्हें हल्की खुशबू या बिना तेज सुगंध वाले विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अगर रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद लगातार सिरदर्द, आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर ताजी हवा में जाना चाहिए। लक्षण बने रहने या गंभीर होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करना हो तो उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा मात्रा में स्प्रे करने से बचें और इसे चेहरे या शरीर के बेहद करीब से इस्तेमाल न करें। भोजन, खाने के बर्तनों और ऐसी सतहों पर सीधे स्प्रे नहीं करना चाहिए जहां खाद्य सामग्री रखी जाती है।

    एक साथ कई अलग अलग सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी नहीं है। एयर फ्रेशनर के साथ सुगंधित मोमबत्ती, स्प्रे और दूसरे फ्रेगरेंस उत्पाद लगातार इस्तेमाल करने के बजाय सीमित मात्रा में किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना बेहतर है।

    कमरे को वास्तव में साफ और ताजा रखने के लिए नियमित सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। कूड़ा समय पर बाहर निकालना, गीली चीजों को कमरे में जमा नहीं होने देना, सीलन और नमी को नियंत्रित करना तथा खिड़की दरवाजे खोलकर पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना ज्यादा उपयोगी उपाय हैं।

    इसलिए रूम फ्रेशनर को कमरे की सफाई का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सीमित मात्रा में इस्तेमाल और पर्याप्त हवा का आवागमन रखते हुए इसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लगातार तेज खुशबू बनाए रखने के लिए बार बार स्प्रे करना उचित नहीं है। साफ हवा, नियमित सफाई और दुर्गंध के वास्तविक कारण को दूर करना कमरे को स्वस्थ और आरामदायक बनाए रखने का बेहतर तरीका है।

  • बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल

    बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है और 20 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है जबकि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम के बदलते मिजाज पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    20 अगस्त को टीकमगढ़ और सागर समेत कुछ इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 21 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का असर बना रहेगा। ग्वालियर दतिया और शिवपुरी सहित कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इस दौरान गरज चमक और तेज हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है।

    राजधानी भोपाल की बात करें तो 20 अगस्त को मौसम मुख्य रूप से बादलों से घिरा रहने और बारिश के आसार बने रहने की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान में दिन का तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अगले कुछ दिनों में भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना दिखाई दे रही है।

    प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में नदी नालों और जलाशयों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने और खेतों में पानी जमा होने जैसी स्थिति भी सामने आ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश की गतिविधि के पीछे सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अहम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर रहने के बाद यह गतिविधि मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती है। ऐसे में इंदौर उज्जैन भोपाल सागर जबलपुर रीवा और ग्वालियर चंबल संभाग के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि किसी एक शहर में बारिश की तीव्रता अलग अलग हो सकती है इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनी पर ध्यान देना जरूरी है।

    बारिश के साथ बिजली गिरने और गरज चमक का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे मौसम में खुले मैदान खेत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना बेहतर होगा क्योंकि कई बार कम समय में हुई तेज बारिश से पानी तेजी से बढ़ सकता है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त को मध्य प्रदेश में मौसम सक्रिय रहने वाला है। कई जिलों में बारिश का दौर तेज हो सकता है जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले दिनों में भी प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं।