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  • निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर

    निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल काफी अहम रहने वाला है। लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स और निफ्टी में अब रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है। 19 अगस्त को सेंसेक्स 326 अंक गिरकर 76909.68 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 77 अंक फिसलकर 24078.30 पर पहुंच गया। निफ्टी लगातार सातवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और इस दौरान इसमें करीब 2.1 प्रतिशत की कमजोरी आई।

    बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखाई दे रहे हैं।

    इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी भू राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर तनाव कम होने की कोई सकारात्मक खबर आती है तो बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है।

    अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ऊंची यील्ड की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए विकसित बाजारों में पैसा लगाना अधिक आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।

    19 अगस्त को बाजार में अधिकांश प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। हालांकि आईटी और फार्मा जैसे कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। ऐसे में 20 अगस्त को निवेशकों की नजर सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर भी रहेगी। मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबारी संभावनाओं वाले शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेतों वाले क्षेत्रों में दबाव कायम रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दौर में निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बड़े दांव लगाने के बजाय जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। लगातार गिरावट के बाद कुछ शेयर आकर्षक स्तर पर नजर आ सकते हैं लेकिन बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई है ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी। निफ्टी के 24000 के आसपास के स्तर पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में और दबाव बन सकता है जबकि मजबूती की स्थिति में रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की तेजी या गिरावट देखकर घबराहट में फैसला न लें और किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा वित्तीय सलाह को ध्यान में रखें

  • फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    नई दिल्ली ।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की कुछ अवधि वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली चुनिंदा बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से कम अवधि वाली बल्क एफडी पर किया गया है, जबकि लंबी अवधि की कई जमाओं की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

    बैंक की ओर से किए गए बदलाव के तहत 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली जमा पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इससे इन अवधि में बड़ी राशि एफडी के रूप में रखने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलेगा।

    हालांकि 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक की नई बल्क एफडी दरें अलग-अलग अवधि के आधार पर 5.25 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत के बीच हैं। इसलिए बड़ी राशि को कम अवधि के लिए एफडी में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

    बल्क एफडी में किया गया यह बदलाव सामान्य एफडी ग्राहकों पर लागू नहीं होता। 3 करोड़ रुपये से कम की घरेलू जमा राशि पर बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक जिनकी एफडी राशि इस सीमा से कम है, उनके मौजूदा ब्याज ढांचे पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    सामान्य एफडी में आम नागरिकों को अलग-अलग अवधि के आधार पर 3.05 प्रतिशत से 6.40 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अवधि के अनुसार 3.55 प्रतिशत से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस वजह से कम राशि वाली नियमित एफडी करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच राशि की सीमा महत्वपूर्ण होती है। बड़ी राशि जमा करने वाले ग्राहकों के लिए बैंक अलग दरें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में निवेश से पहले संबंधित अवधि और लागू ब्याज दर को देखना जरूरी होता है। खास तौर पर छोटी अवधि की एफडी में मामूली दर बदलाव भी बड़ी जमा राशि पर मिलने वाले कुल ब्याज को प्रभावित कर सकता है।

    एफडी को आमतौर पर निश्चित रिटर्न वाले निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। ब्याज दर पहले से तय होने के कारण निवेशक को मैच्योरिटी तक संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने में आसानी होती है। हालांकि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग होती है और समय से पहले एफडी तोड़ने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या जुर्माने में बदलाव हो सकता है।

    SBI की नई दरों का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि को छोटी अवधि की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट में रखने की योजना बना रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी बुक करने से पहले नई दरों और अवधि की तुलना करना उपयोगी होगा।

    वहीं सामान्य ग्राहकों और 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि रखने वालों के लिए इस बदलाव से राहत है, क्योंकि उनकी एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मौजूदा नियमित एफडी दरें जारी हैं। इसलिए निवेशकों को अपनी जमा राशि, निवेश अवधि और लागू ब्याज दर के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

  • MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। ट्रफ और डिप्रेशन के असर से पूर्वी हिस्से में बारिश का जोर है। मौसम विभाग ने सागर संभाग के टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर और दमोह में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे में इन जिलों में 8 इंच तक पानी गिर सकता है। दतिया, भिंड, निवाड़ी, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, कटनी, मैहर और सतना में भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 18 से 24 अगस्त के बीच प्रदेश में बारिश का मिजाज बदलता रहेगा। 19 अगस्त को विंध्य और महाकौशल में भारी से अति भारी बारिश हुई। अब 20 से 24 अगस्त के दौरान बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    चित्रकूट में गुप्त गोदावरी उफनी, गुफाएं बंद

    बुधवार को पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश से कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने। सतना के तराई क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद चित्रकूट की गुप्त गोदावरी में पानी बढ़ गया। पहाड़ी का पानी गुफाओं के ऊपर से बहने लगा। सुरक्षा को देखते हुए चित्रकूट नगर परिषद ने दोनों गुफाएं बंद कर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी।

    सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भुमकहर गांव में 55 वर्षीय चरवाहा नाले में बह गया। सूचना मिलने के बाद SDERF की टीम मौके पर पहुंची और उसकी तलाश शुरू की।

    डिंडौरी में नदी-नाले उफने, 12 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा

    डिंडौरी में बुधवार सुबह से तेज बारिश जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं और 12 से ज्यादा गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पन्ना के बृजपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया। सिमरिया के बोदा गांव में भी जलभराव हुआ। घरों में रखा खाद्य सामग्री भी बारिश के पानी से भीग गई।

    उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के तीन गेट 4 मीटर तक खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    MP में अब तक 23 इंच बारिश, फिर भी 12% कम

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में 1 जून से अब तक 583.4 मिमी यानी करीब 23 इंच बारिश हो चुकी है। इस अवधि में सामान्य बारिश 663.7 मिमी यानी 26.1 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 3.1 इंच यानी 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 14% और पश्चिमी हिस्से में 10% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। 18 जिलों में बारिश 4% से 58% तक कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के 21 जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके विपरीत अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    जून में कमी, जुलाई में कोटा पूरा; अगस्त में फिर तेज हुआ मानसून

    मौसम विभाग के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन इसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ा और कई दिनों तक बारिश थमी रही।

    अगस्त में मानसून ने फिर जोर पकड़ा और महीने के दूसरे हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ। इससे बारिश के आंकड़े में सुधार आया, लेकिन जून की कमी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में औसतन 37.3 इंच बारिश होती है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच रहती है।

  • बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों के लिए धन-करियर में तरक्की, इन्हें रहना होगा सावधान

    बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों के लिए धन-करियर में तरक्की, इन्हें रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह 22 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 24 मिनट पर कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह सूर्य की राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध के इस गोचर का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए यह समय करियर, धन और शिक्षा के लिहाज से शुभ रह सकता है, जबकि कुछ को खर्च और रिश्तों के मामले में सावधानी बरतनी होगी।

    ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार जानते हैं बुध के सिंह राशि में प्रवेश का किस राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

    मेष: पढ़ाई और करियर में सफलता के योग

    मेष राशि वालों के पांचवें भाव में बुध का गोचर होगा। प्रतियोगिता के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। नई ट्रेनिंग या कुछ नया सीखने वालों को अच्छे परिणाम मिलेंगे। शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। एआई और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वालों को भी लाभ मिल सकता है। धन लाभ के योग हैं और संतान पक्ष से भी अच्छी खबर मिल सकती है।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करें और बेसन के लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।

    वृषभ: परिवार में बढ़ेगा सुख-शांति

    वृषभ राशि के चौथे भाव में बुध का गोचर होगा। घर-परिवार में सुख-शांति बढ़ सकती है। प्रॉपर्टी या घर से जुड़ा कोई फैसला परिवार की सहमति से लेना लाभकारी रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। करियर में मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है और सुख-सुविधाओं में वृद्धि के योग हैं।

    उपाय: बुधवार को गाय को चारा खिलाएं।

    मिथुन: मेहनत से बढ़ेगी कमाई

    मिथुन राशि के तीसरे भाव में बुध का गोचर होगा। कार्यक्षमता बढ़ेगी और आप अधिक सक्रिय होकर काम करेंगे। मार्केटिंग, शिक्षण, कानून और मीडिया से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। लंबी दूरी की यात्रा से फायदा होगा और रुके हुए काम पूरे होने के योग हैं। व्यापार में नई तकनीक अपनाने के लिए भी समय अच्छा है।

    उपाय: बुधवार को पक्षियों को दाना खिलाएं।

    कर्क: धन और नौकरी के लिए शुभ समय

    कर्क राशि के दूसरे भाव में बुध का गोचर होगा। सम्मान बढ़ सकता है और धन कमाने के प्रयास सफल हो सकते हैं। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिलने के योग हैं। कहीं अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। घर-परिवार में भी सुख-शांति बढ़ेगी।

    सिंह: मजबूत होगी आर्थिक स्थिति

    बुध का गोचर सिंह राशि में ही होगा। इस दौरान आपकी विश्लेषण क्षमता बेहतर हो सकती है। काम को व्यवस्थित तरीके से करने में सफलता मिलेगी। सामाजिक स्थिति मजबूत होगी और धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ाने से फायदा मिलेगा। परिवार का सहयोग भी प्राप्त होगा।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश के मंदिर में धूप की माला चढ़ाएं।

    कन्या: विदेश से जुड़े कामों में फायदा

    कन्या राशि के बारहवें भाव में बुध का गोचर होगा। विदेश में नौकरी या कारोबार करने वालों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। विदेश यात्रा और वीजा से जुड़े प्रयासों में सफलता के योग हैं। हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट पर नियंत्रण रखें। सेहत को लेकर भी लापरवाही न करें।

    तुला: इनकम बढ़ाने के अवसर

    तुला राशि के ग्यारहवें भाव में बुध का गोचर होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। इनकम बढ़ाने के लिए समय अनुकूल है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों के लिए भी समय अच्छा है। शिक्षक, वकील, मीडिया और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं और प्रसाद गरीबों में बांटें।

    वृश्चिक: करियर में मिलेगा वरिष्ठों का सहयोग

    वृश्चिक राशि के दसवें भाव में बुध का गोचर होगा। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। व्यापारियों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। रुका हुआ कारोबारी पैसा मिल सकता है। करियर में सफलता के लिए प्रयास बढ़ाने की जरूरत होगी।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को धूप की माला चढ़ाएं।

    धनु: भाग्य का मिलेगा साथ

    धनु राशि के नौवें भाव में बुध का गोचर होगा। पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और भाग्य का सहयोग मिल सकता है। धार्मिक यात्रा या पूजा-पाठ के अवसर बन सकते हैं। छात्रों को सफलता मिल सकती है। नौकरी तलाश रहे लोगों को नए सिरे से प्रयास शुरू करना चाहिए। कारोबार में योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर फायदा मिल सकता है।

    उपाय: गणेशजी को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाकर 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

    मकर: रिसर्च और विदेश से जुड़े कामों में लाभ

    मकर राशि के आठवें भाव में बुध का गोचर होगा। एमफिल, पीएचडी या रिसर्च से जुड़े लोगों को सफलता मिल सकती है। विदेश में नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को अच्छी खबर मिलने के योग हैं। हालांकि किसी भी फैसले में जल्दबाजी से बचें। रिश्तों के मामले में भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत होगी।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को हरे फल का भोग लगाएं और 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

    कुंभ: नौकरी और रिश्तों में संयम जरूरी

    कुंभ राशि के सातवें भाव में बुध का गोचर होगा। नौकरी में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद से बचें। जीवनसाथी के साथ भी वैचारिक मतभेद बढ़ने न दें। धैर्य से निर्णय लेने की जरूरत होगी। आर्थिक लिहाज से समय अनुकूल रह सकता है। मेहनत करने पर करियर और कारोबार में सफलता मिल सकती है।

    उपाय: बुधवार को गाय को चारा खिलाएं।

    मीन: इनकम बढ़ेगी, विवाद से बचें

    मीन राशि के छठे भाव में बुध का गोचर होगा। इनकम बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं और प्रतियोगिता में सफलता हासिल हो सकती है। हालांकि बिना जरूरत लोन लेने से बचें। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों से विवाद न करें। व्यापारियों को भी साझेदारों और कारोबारी लोगों के साथ अनावश्यक बहस से बचना चाहिए।

    उपाय: बुधवार को भगवान गणेश को दूब की माला चढ़ाएं, बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं और 11 गरीबों को प्रसाद बांटें।

  • नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल

    नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजाLord Vishnu, Vishnu Puja, Hindu Religion, Lord Vishnu Bhog, Sanatan Dharma श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए भक्त अलग अलग प्रकार की पूजा सामग्री और भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि नारायण को कुछ विशेष चीजें बेहद प्रिय हैं और पूजा के दौरान इनका इस्तेमाल करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। हालांकि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज भक्त की श्रद्धा और सच्ची भावना को माना गया है।

    भगवान विष्णु को पीला रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि उनकी पूजा में पीले फूल पीले वस्त्र और पीले रंग की मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भक्त भगवान को पीले चंदन का तिलक भी लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पीले रंग का संबंध गुरु और ज्ञान से भी है इसलिए विष्णु पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।

    भगवान विष्णु को केले का फल भी प्रिय माना जाता है। पूजा में केले का भोग लगाया जा सकता है। कई स्थानों पर गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण मजबूत होता है।

    नारायण को पंचामृत का भोग भी अर्पित किया जाता है। दूध दही घी शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी कई घरों में है। इसके अलावा तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। विष्णु पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। मान्यता है कि तुलसी के बिना विष्णु पूजा को कई भक्त अधूरा मानते हैं।

    भगवान विष्णु को खीर और पीली मिठाइयों का भोग लगाने की भी परंपरा है। बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू या अन्य सात्विक मिठाइयां श्रद्धा के अनुसार अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।

    भगवान विष्णु की पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और भोग अर्पित करें। विष्णु मंत्र का जाप करें और भगवान से परिवार की सुख शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए दिखावे से ज्यादा जरूरी मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा है।

  • गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम

    गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन व्रत और विधि विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। बृहस्पति ग्रह को ज्ञान विवाह संतान धन और सौभाग्य का कारक माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग विवाह में आ रही बाधा दूर करने आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार में सुख शांति बनाए रखने के लिए गुरुवार का व्रत रखते हैं। हालांकि व्रत और पूजा से जुड़े ये नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के साथ देवगुरु बृहस्पति का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है इसलिए पूजा में पीले फूल पीले फल चने की दाल और हल्दी जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है।

    पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धालु को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु को जल अर्पित करके पीले फूल चंदन अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। कई जगहों पर केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यदि घर में पूजा की जा रही हो तो केले के पेड़ की उपलब्धता के अनुसार पूजा की जा सकती है।

    गुरुवार व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा बृहस्पति देव की कथा सुनना या पढ़ना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद भगवान की आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तु भोजन चने की दाल या अन्य उपयोगी सामग्री का दान भी कर सकते हैं।

    गुरुवार के व्रत में खानपान को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और क्षमता के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। पूजा और व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम माना जाता है इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर कठोर उपवास करने से बचना उचित है।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कई परंपराओं में इस दिन बाल और नाखून काटने तथा कुछ विशेष घरेलू कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन नियमों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए व्रत करने वाले व्यक्ति को अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक आस्था के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए।

    शाम के समय भगवान विष्णु की दोबारा पूजा करके आरती की जा सकती है। इसके बाद व्रत रखने वाला व्यक्ति फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकता है। कई श्रद्धालु लगातार कई गुरुवार तक व्रत रखने का संकल्प लेते हैं और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उद्यापन करते हैं। उद्यापन की विधि भी अलग अलग परंपराओं में अलग हो सकती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार का व्रत श्रद्धा संयम और सकारात्मक सोच के साथ किया जाए तो मन को शांति मिलती है। भगवान विष्णु की भक्ति के साथ जरूरतमंदों की सहायता और दान को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि गुरुवार का व्रत केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि सेवा दान और सद्भाव की भावना से जोड़कर भी देखा जाता है।

  • गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने पर मिल सकती है राहत, जानिए सही तरीका और किन बातों का रखें ध्यान

    गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने पर मिल सकती है राहत, जानिए सही तरीका और किन बातों का रखें ध्यान

    नई दिल्ली । गले में खराश, दर्द या जलन होने पर गुनगुने नमक के पानी से गरारे करना लंबे समय से अपनाया जाने वाला घरेलू उपाय है। मौसम में बदलाव, वायरल संक्रमण, एलर्जी, अधिक बोलने या गले में जलन जैसी स्थितियों में यह उपाय कुछ लोगों को अस्थायी राहत दे सकता है। हालांकि, नमक के पानी से गरारे किसी संक्रमण या बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने का सबसे प्रमुख फायदा गले की खराश और हल्के दर्द में राहत मिलना माना जाता है। नमक पानी गले के ऊतकों में मौजूद अतिरिक्त तरल पदार्थ को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे सूजन और असहजता कुछ हद तक घट सकती है। इसी कारण हल्के गले के दर्द में इसे सहायक उपाय के तौर पर अपनाया जाता है।

    दूसरा फायदा गले में जमा बलगम से जुड़ा है। सर्दी या वायरल संक्रमण के दौरान गले में म्यूकस जमा होने से बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस हो सकती है। गरारे करने से जमा बलगम ढीला पड़ सकता है और उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। इससे गले में भारीपन और जलन की अनुभूति कम हो सकती है।

    नमक के पानी से गरारे मुंह और गले की सफाई बनाए रखने में भी मदद कर सकते हैं। नमक वाला पानी मुंह के वातावरण को प्रभावित करता है, जिससे कुछ सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां कम हो सकती हैं। हालांकि, इसे संक्रमण खत्म करने वाली दवा नहीं माना जाना चाहिए। बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण होने पर चिकित्सकीय सलाह की जरूरत पड़ सकती है।

    इस उपाय का एक अन्य लाभ मुंह की दुर्गंध को लेकर हो सकता है। यदि सांसों की बदबू मुंह में जमा बैक्टीरिया या खराब ओरल हाइजीन से जुड़ी है, तो नमक के पानी से कुल्ला या गरारे करने से मुंह की सफाई में कुछ मदद मिल सकती है। लेकिन लगातार बदबू बनी रहने पर इसके पीछे मसूड़ों, दांतों या किसी अन्य समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।

    नमक के पानी से गरारे मुंह के छोटे घावों, हल्के छालों या मसूड़ों की मामूली परेशानी में भी कुछ राहत दे सकते हैं। दांत निकलवाने जैसी कुछ परिस्थितियों में भी डॉक्टर कभी-कभी नमक के पानी से कुल्ला करने की सलाह देते हैं। हालांकि, गंभीर घाव, लगातार रक्तस्राव या बढ़ते दर्द की स्थिति में घरेलू उपाय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    गरारे करने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में लगभग आधा चम्मच नमक मिलाया जा सकता है। पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए। तैयार घोल को मुंह और गले में करीब 15 से 30 सेकंड तक घुमाकर गरारे करें और फिर उसे थूक दें। नमक का पानी निगलने से बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार दिन में दो से तीन बार गरारे किए जा सकते हैं।

    यह भी समझना जरूरी है कि हर तरह की गले की समस्या में केवल नमक का पानी पर्याप्त नहीं होता। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, निगलने में गंभीर कठिनाई, लगातार बढ़ता दर्द या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वे पानी निगल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, गुनगुने नमक के पानी से गरारे गले की खराश, हल्की सूजन, बलगम और मुंह की कुछ परेशानियों में अस्थायी आराम देने वाला आसान उपाय हो सकते हैं। लेकिन इन्हें चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लक्षणों की वजह और गंभीरता के अनुसार सही उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • रोज खाली पेट एंटासिड खाने की आदत पड़ सकती है भारी, शुरुआत में दिखने वाले इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    रोज खाली पेट एंटासिड खाने की आदत पड़ सकती है भारी, शुरुआत में दिखने वाले इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    नई दिल्ली । सुबह उठते ही खाली पेट सीने में जलन, खट्टी डकार या पेट में एसिडिटी महसूस होने पर तुरंत एंटासिड लेना कई लोगों की आदत बन जाती है। कभी-कभार एंटासिड का इस्तेमाल आम तौर पर परेशानी की बात नहीं होता, लेकिन यदि हर दिन इसकी जरूरत पड़ रही है तो इसे सामान्य गैस समझकर लगातार लेते रहना उचित नहीं है। बार-बार एसिडिटी होना किसी अन्य पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है और ऐसे में केवल लक्षणों को दबाने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

    एंटासिड ऐसी दवाएं हैं जो पेट में मौजूद अतिरिक्त एसिड को निष्क्रिय करके कुछ समय के लिए जलन और असहजता से राहत देती हैं। अलग-अलग एंटासिड में अलग-अलग सक्रिय तत्व मौजूद हो सकते हैं। कैल्शियम या एल्यूमिनियम आधारित दवाओं के अधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो सकती है, जबकि मैग्नीशियम आधारित दवाओं से दस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक या जरूरत से अधिक सेवन करने पर कुछ परिस्थितियों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और किडनी के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।

    बार-बार एंटासिड या अन्य एसिड कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों में कुछ पोषक तत्वों के अवशोषण पर भी प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक एसिड कम करने वाली दवाओं के इस्तेमाल से कुछ लोगों में विटामिन बी12 या मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसका खतरा दवा के प्रकार, मात्रा, इस्तेमाल की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए लंबे समय तक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    रोज खाली पेट एंटासिड लेने की सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि इससे बार-बार होने वाली एसिडिटी के वास्तविक कारण की पहचान में देरी हो सकती है। लगातार सीने में जलन या खट्टी डकार गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी जीईआरडी, गैस्ट्राइटिस या पेप्टिक अल्सर जैसी स्थितियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल एंटासिड लेकर लक्षणों को दबाते रहना समस्या के उचित मूल्यांकन में देरी कर सकता है।

    शुरुआती तौर पर लंबे या बार-बार इस्तेमाल के दौरान कब्ज, दस्त, पेट में असहजता, मतली या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा एंटासिड से होने वाला नुकसान नहीं होता और इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसी तरह लगातार एसिडिटी बने रहना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि दवा समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं कर रही है।

    एसिडिटी से राहत के लिए खान-पान और दिनचर्या में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भोजन कम मात्रा में और नियमित समय पर लेना, बहुत तला-भुना तथा मसालेदार भोजन कम करना, खाने के तुरंत बाद न लेटना और रात में सोने से कुछ घंटे पहले भोजन कर लेना मददगार हो सकता है। अधिक वजन होने की स्थिति में वजन कम करने से भी रिफ्लक्स के लक्षणों में सुधार हो सकता है।

    यदि एसिडिटी लगातार कई सप्ताह से बनी हुई है या बार-बार एंटासिड लेने की जरूरत पड़ती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। निगलने में कठिनाई, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काला मल, बिना कारण वजन कम होना या तेज सीने का दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। एंटासिड कभी-कभार राहत देने वाली दवा हो सकती है, लेकिन रोज खाली पेट इसकी जरूरत पड़ना समस्या के मूल कारण की जांच कराने का संकेत है।

  • आज का राशिफल 20 अगस्त 2026: किस राशि के सितारे चमकेंगे और किसे मिलेगा सावधानी का संकेत, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज का राशिफल 20 अगस्त 2026: किस राशि के सितारे चमकेंगे और किसे मिलेगा सावधानी का संकेत, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में नौकरी कारोबार धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। किसी राशि के जातकों को काम में नई सफलता मिलने के संकेत हो सकते हैं तो किसी को महत्वपूर्ण फैसले लेते समय धैर्य रखने की जरूरत होगी। आज का दिन कई लोगों के लिए अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने और पुराने काम पूरे करने का अवसर लेकर आ सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। कारोबार से जुड़े लोगों को कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। परिवार में किसी सदस्य से सहयोग प्राप्त होगा। खर्च करते समय बजट का ध्यान रखना बेहतर रहेगा।

    वृषभ राशि के लिए दिन आर्थिक मामलों में राहत देने वाला हो सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की संभावना है। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें। परिवार में सुखद माहौल बना रहेगा।

    मिथुन राशि के जातकों को आज अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए। किसी से बातचीत के दौरान गलतफहमी पैदा हो सकती है। कार्यक्षेत्र में एक साथ कई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मेहनत के बल पर सफलता हासिल होगी। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई पर ध्यान देने का अच्छा समय है।

    कर्क राशि के लिए आज का दिन परिवार और रिश्तों के लिहाज से अच्छा रह सकता है। घर में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल बन सकता है। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। धन संबंधी मामलों में लाभ के संकेत हैं लेकिन अनावश्यक खरीदारी से बचना उचित रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिलेगा। किसी पुराने संपर्क से फायदा हो सकता है। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिल सकता है। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    कन्या राशि को आज योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत होगी। छोटी सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है। नौकरी में काम का दबाव रह सकता है लेकिन मेहनत से स्थिति संभल जाएगी। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। स्वास्थ्य को लेकर दिनचर्या पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा।

    तुला राशि के लिए दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नौकरी में तरक्की या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। कारोबार में लाभ के अवसर बन सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। किसी करीबी व्यक्ति से महत्वपूर्ण सलाह मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को आज धैर्य से काम लेना होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सावधान रहें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। परिवार के किसी सदस्य की मदद से समस्या का समाधान मिल सकता है।

    धनु राशि के लिए दिन भाग्य का साथ देने वाला रह सकता है। लंबे समय से रुका काम पूरा हो सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। यात्रा की योजना बन सकती है। धन लाभ के साथ खर्च भी बढ़ सकता है इसलिए संतुलन जरूरी रहेगा।

    मकर राशि के जातकों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारी बढ़ सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नई योजना बना सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो तो बातचीत से समाधान निकालें।

    कुंभ राशि के लिए दिन नए अवसरों वाला रह सकता है। नौकरी बदलने या नई परियोजना शुरू करने का विचार आगे बढ़ सकता है। धन से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। अपनी योजनाओं को हर किसी के सामने साझा करने से बचें।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन मिलाजुला रहने वाला है। काम में सफलता पाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है। परिवार में किसी सदस्य की चिंता हो सकती है लेकिन स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें और अनावश्यक जोखिम लेने से बचें।

    ज्योतिष में राशिफल को ग्रहों की स्थिति पर आधारित सामान्य अनुमान माना जाता है। इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में अपनी परिस्थितियों और उचित सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

  • रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    नई दिल्ली । घर की रसोई में रखी हरी मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर सब्जी और चटनी का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन अगर आप चाहें तो इसी मिर्च की मदद से घर में नया पौधा तैयार करने की कोशिश भी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है कि पूरी तरह बीजरहित मिर्च से सीधे नया पौधा तैयार नहीं किया जा सकता। पौधा विकसित करने के लिए मिर्च के अंदर मौजूद विकसित बीज या किसी उपयुक्त पौधे की कटिंग की जरूरत होती है। इसलिए बाजार से लाई गई मिर्च को इस्तेमाल करने से पहले उसके अंदर मौजूद छोटे बीजों को ध्यान से अलग किया जा सकता है।

    अगर मिर्च में बीज मौजूद हैं तो सबसे पहले उन्हें सावधानी से निकालकर साफ पानी से धो लें। इसके बाद बीजों को कुछ समय के लिए छाया में सुखाना बेहतर रहता है। बीजों में नमी पूरी तरह खत्म होने के बाद इन्हें हल्की और उपजाऊ मिट्टी में लगाया जा सकता है। मिर्च के बीजों को बहुत अधिक गहराई में दबाने की जरूरत नहीं होती। लगभग आधा सेंटीमीटर गहराई पर्याप्त रहती है।

    गमले का चुनाव भी पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। शुरुआत में छोटे गमले या सीडलिंग ट्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी आसानी से निकल सके और वह लंबे समय तक पानी से भरी न रहे। सामान्य गार्डन मिट्टी के साथ जैविक खाद और थोड़ी रेत या अन्य जलनिकासी वाली सामग्री मिलाने से मिट्टी को बेहतर बनाया जा सकता है।

    बीज लगाने के बाद मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा पानी देने से बीज सड़ सकते हैं और नई जड़ें विकसित होने में परेशानी हो सकती है। गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी और गर्माहट मिले। मिर्च के पौधे को अच्छी वृद्धि के लिए धूप पसंद होती है, इसलिए पर्याप्त प्रकाश मिलने पर पौधा मजबूत बनने की संभावना बढ़ती है।

    कुछ समय बाद जब छोटे पौधे दिखाई देने लगें और उनमें कई वास्तविक पत्तियां विकसित हो जाएं, तब उन्हें बड़े गमले में स्थानांतरित किया जा सकता है। पौधे को निकालते समय उसकी जड़ों को नुकसान न पहुंचाएं। बड़े गमले में लगाने के बाद मिट्टी को हल्का दबाएं और जरूरत के अनुसार पानी दें।

    मिर्च का पौधा बढ़ने के दौरान नियमित देखभाल मांगता है। जब पौधा पर्याप्त ऊंचाई हासिल कर ले तो उसकी ऊपरी बढ़त को हल्का पिंच करने से शाखाएं ज्यादा निकलने में मदद मिल सकती है। इससे पौधा अधिक घना हो सकता है और आगे चलकर उसमें ज्यादा फूल और मिर्च आने की संभावना बढ़ सकती है।

    फूल आने के समय पौधे को पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। इस दौरान अच्छी तरह सड़ी जैविक खाद या उपयुक्त संतुलित खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में लगातार नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। पौधे पर एफिड, सफेद मक्खी या अन्य छोटे कीट दिखाई दें तो समय रहते उनकी जांच और नियंत्रण करना जरूरी है।

    अच्छी धूप, सही मिट्टी, संतुलित पानी और नियमित देखभाल मिलने पर मिर्च का पौधा कुछ महीनों में फल देना शुरू कर सकता है। लगभग दो महीने में मिर्च आने का दावा परिस्थितियों और पौधे की किस्म पर निर्भर करता है, इसलिए हर पौधे में बिल्कुल इसी समय पर फल लगना जरूरी नहीं है। फल अच्छी लंबाई हासिल कर लें तो उन्हें हरा रहते हुए तोड़ा जा सकता है। नियमित रूप से तैयार मिर्च तोड़ने से पौधे पर नई फलियों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इस तरह थोड़ी मेहनत और धैर्य के साथ बालकनी या छत के छोटे से हिस्से में भी घर की ताजी हरी मिर्च उगाई जा सकती है।