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  • कौन हैं पैरा तैराक शम्स आलम? जापान में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, आजीवन प्रतिबंध का खतरा

    कौन हैं पैरा तैराक शम्स आलम? जापान में यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, आजीवन प्रतिबंध का खतरा


    नई दिल्ली। भारतीय पैरा तैराक मोहम्मद शम्स आलम शेख पर जापान में एक महिला होटल कर्मचारी के साथ कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद जापानी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें भारत वापस भेज दिया गया। 40 वर्षीय शम्स आलम को अब भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) की अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध लगाने पर जांच के बाद फैसला लिया जाएगा।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नागोया में भारतीय दल के साथ मौजूद PCI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की पुष्टि की। अधिकारी ने कथित व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी खिलाड़ी के ऐसे आचरण को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    शम्स आलम पर आजीवन प्रतिबंध की मांग
    रिपोर्ट के मुताबिक, PCI के अधिकारी ने कहा कि शम्स आलम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने भारतीय दल की छवि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का हवाला देते हुए आजीवन प्रतिबंध की मांग की। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला जांच के बाद ही लिया जाएगा।

    होटल में हाउसकीपिंग के दौरान हुई घटना
    बताया जा रहा है कि यह घटना सोमवार को नागोया के फोर पॉइंट्स बाय शेरेटन होटल में हुई, जहां भारतीय पैरा तैराकी टीम ठहरी हुई थी। आरोप है कि घटना के समय एक महिला कर्मचारी शम्स आलम के कमरे में हाउसकीपिंग का काम कर रही थी।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस उन्हें स्थानीय थाने ले गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने मामले को अदालत तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रयास किए। इसके बाद लिखित माफी और शम्स आलम को तत्काल जापान छोड़ने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। घटना के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने होटल प्रबंधन और संबंधित महिला कर्मचारी से माफी भी मांगी।

    कौन हैं शम्स आलम शेख?
    मोहम्मद शम्स आलम शेख भारत के पैरा तैराक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पैरा स्विमिंग में उनकी पहचान एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में रही है।
    – विश्व रैंकिंग: वर्ल्ड पैरा स्विमिंग रिकॉर्ड के अनुसार, शम्स आलम पुरुषों की 100 मीटर बटरफ्लाई (S5) और 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक (SB4) स्पर्धाओं में दुनिया के नंबर-1 तैराक रह चुके हैं।
    – एशियाई पैरा गेम्स: उन्होंने 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
    – अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल रेकजाविक इंटरनेशनल गेम्स में 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रदर्शन के दौरान भारतीय और एशियाई रिकॉर्ड बनाया था।

  • 22 अक्टूबर का राशिफल, मेष से मीन तक जानें सभी 12 राशियों का हाल, किसे मिलेगी खुशखबरी और किसे रहना होगा सतर्क

    22 अक्टूबर का राशिफल, मेष से मीन तक जानें सभी 12 राशियों का हाल, किसे मिलेगी खुशखबरी और किसे रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। आज का राशिफल 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग संभावनाएं लेकर आया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज कुछ राशि वालों को करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं तो कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। पारिवारिक जीवन में तालमेल बनाए रखना और महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेना फायदेमंद हो सकता है। नौकरी करने वालों विद्यार्थियों कारोबारियों और प्रेम संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए भी दिन कई तरह के संकेत दे सकता है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का आज का राशिफल।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने की उम्मीद है। धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। वृषभ राशि के जातकों को नौकरी और कारोबार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अनुभवी लोगों की सलाह उपयोगी रहेगी और आर्थिक फैसले लेते समय बजट का ध्यान रखना जरूरी होगा। मिथुन राशि वालों के लिए करियर में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

    कर्क राशि के जातकों को आज पारिवारिक और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलना होगा। संपत्ति से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचें और खर्चों पर नियंत्रण रखें। सिंह राशि वालों को कार्यक्षेत्र में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी कामकाज और कारोबारी फैसलों में सावधानी बरतना बेहतर रहेगा। कन्या राशि के लोगों के लिए मेहनत का फल मिलने के संकेत हैं। नौकरी और शिक्षा से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। किसी नए अवसर को स्वीकार करने से पहले उससे जुड़ी शर्तों को अच्छी तरह समझ लें।

    तुला राशि के जातकों के घर में सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी की योजना बन सकती है। परिवार में किसी शुभ कार्यक्रम को लेकर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी होगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन सामाजिक और पारिवारिक दृष्टि से अच्छा रह सकता है। पुराने मित्रों से मुलाकात या किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है। धनु राशि के जातकों के संपर्क नए लोगों से बढ़ सकते हैं। करियर और कारोबार में भविष्य के लिए उपयोगी अवसर तलाशने का समय है। प्रेम और विवाह से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक बातचीत हो सकती है।

    मकर राशि वालों को आज अपने अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान देना चाहिए। व्यवस्थित तरीके से काम करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में बचत की आदत फायदेमंद रहेगी। कुंभ राशि के जातकों के लिए दिन नई योजनाओं पर काम करने का अवसर लेकर आ सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता बनाए रखने और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिल सकता है। मीन राशि के लोगों को लेनदेन के मामलों में विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें।

    आज गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा करना और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु पीले फूल अर्पित कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु मंत्र का जाप कर सकते हैं। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिल सकती है। कुल मिलाकर आज का दिन अपनी प्राथमिकताएं तय करने योजनाओं को व्यवस्थित करने और रिश्तों में संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। ध्यान रखें कि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति की परिस्थितियों तथा प्रयासों पर निर्भर करते हैं।
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  • MP Weather: 11 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 24 अक्टूबर से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम

    MP Weather: 11 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 24 अक्टूबर से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम


    भोपाल। मध्यप्रदेश में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, 24 अक्टूबर से एक नया सिस्टम सक्रिय होने के कारण प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में मौसम बदलेगा। वहीं, अगले दो दिन इंदौर संभाग के जिलों के साथ नर्मदापुरम क्षेत्र में भी बारिश होने की संभावना है। आंधी-बारिश के बीच प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    11 जिलों में बारिश के साथ 40 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 11 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें इंदौर, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल शामिल हैं। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

    15 जिलों में हुई बारिश, गैरतगंज में सवा इंच पानी गिरा

    मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात प्रदेश के 15 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, हरदा, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, गुना, सागर, सीहोर और रतलाम शामिल हैं।

    इस दौरान सबसे ज्यादा बारिश रायसेन जिले के गैरतगंज में दर्ज की गई, जहां करीब सवा इंच पानी गिरा। खंडवा में एक इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सीहोर में हवा की रफ्तार 37 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

    गुरुवार को भी इंदौर, सीहोर और शाजापुर में दोपहर बाद तेज बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और रात में कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई।

    अमरकंटक में पारा 15.8 डिग्री, अगले चार दिन में और गिरेगा तापमान

    आंधी-बारिश के असर से प्रदेश के कई शहरों में रात का तापमान नीचे आया है। मौसम विभाग के मुताबिक, बीती रात अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा में पारा 16 डिग्री, पचमढ़ी में 16.6 डिग्री, मंदसौर में 16.8 डिग्री और दतिया में 17 डिग्री सेल्सियस रहा।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिन में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। दूसरी ओर, दिन में गर्मी का असर भी बना हुआ है। भोपाल, राजगढ़, खरगोन, खंडवा, उज्जैन, खजुराहो, नर्मदापुरम और मंदसौर में अधिकतम तापमान 34.4 से 35.8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका मानसून, फिर भी जारी है बारिश

    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही विदा हो गया था। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून की वापसी हो गई थी। इसके बावजूद सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश का सिलसिला जारी है।

    पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में आंधी-बारिश का असर देखने को मिल रहा है। पिछले छह दिनों में कई जिलों में तेज बारिश भी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को भी प्रदेश के 11 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 24 अक्टूबर से सक्रिय होने वाला नया सिस्टम महीने के आखिरी सप्ताह में भी मौसम को प्रभावित कर सकता है।

  • दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल


    उज्जैन।  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे दिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार को तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई यात्रा में दिग्विजय सिंह समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए। हाथ में डंडा लेकर चल रहे दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।

    दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।

    दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।

    दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

  • सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, घरेलू बाजार में फिसले भाव, अमेरिकी फेड की बैठक से पहले निवेशक सतर्क

    सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, घरेलू बाजार में फिसले भाव, अमेरिकी फेड की बैठक से पहले निवेशक सतर्क


    नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव कच्चे तेल की ऊंची कीमतों मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी आशंकाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी का असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। निवेशक फिलहाल अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने की कीमत खबर लिखे जाने तक 0.23 प्रतिशत गिरकर 4 हजार 133 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। वहीं चांदी में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली और इसकी कीमत 1.03 प्रतिशत फिसलकर 57.405 डॉलर प्रति औंस रह गई। वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती को इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है इसलिए विदेशी बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय निवेशकों की नजर भी सोने और चांदी के भाव पर बनी हुई है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एमसीएक्स पर करीब 519 रुपये यानी 0.35 प्रतिशत गिरकर 1 लाख 46 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोना अपने पिछले बंद भाव 1 लाख 46 हजार 519 रुपये से गिरकर 1 लाख 46 हजार 328 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और कीमत घटकर 1 लाख 45 हजार 689 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस तरह कारोबार के दौरान सोने में 830 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली।

    चांदी की कीमतों में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी करीब 2 हजार 267 रुपये यानी 1.07 प्रतिशत गिरकर 2 लाख 9 हजार 218 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2 लाख 11 हजार 485 रुपये के बंद भाव के मुकाबले 2 लाख 10 हजार 400 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली थी। इसके बाद कीमतों में और गिरावट आई और एक समय चांदी 2 लाख 8 हजार 801 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी दिन के कारोबार में इसमें 2 हजार 684 रुपये तक की कमजोरी दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कमोडिटी बाजार को प्रभावित किया है। महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है जिससे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है।

    निवेशकों की नजर अब 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर है। बाजार के अनुमानों के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 16 प्रतिशत जबकि दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 90 प्रतिशत बताई जा रही है। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने जैसी संपत्तियों का आकर्षण घट सकता है क्योंकि इनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। मजबूत डॉलर भी सोने की मांग को सीमित कर सकता है।

    आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों खासकर व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है। यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत महंगाई के नरम संकेत मिलने पर कीमती धातुओं में खरीदारी लौटने की संभावना बन सकती है। ऐसे में सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव और अपने बजट को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • SBI के ग्राहकों का निजी डेटा साइबर अपराधियों के हाथ पहुंचने की आशंका, 3,897 रिकॉर्ड उजागर, बैंक ने उठाए कदम

    SBI के ग्राहकों का निजी डेटा साइबर अपराधियों के हाथ पहुंचने की आशंका, 3,897 रिकॉर्ड उजागर, बैंक ने उठाए कदम


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। बैंक ने बुधवार को पुष्टि की कि उसके 3,897 ग्राहकों से संबंधित ऐसे रिकॉर्ड डार्क वेब पर पाए गए हैं जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मौजूद थीं। इस खुलासे के बाद बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। एसबीआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके सामान्य कारोबार और बैंकिंग सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है।

    एसबीआई ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि उसे अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल यानी सीईआरटी-इन से ग्राहकों के डेटा के संभावित लीक होने संबंधी अलर्ट मिले थे। इसके बाद डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड का प्रारंभिक विश्लेषण किया गया। इस जांच के दौरान 3,897 ऐसे ग्राहक रिकॉर्ड की पहचान हुई जिनमें व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी शामिल थी। बैंक अब इस बात का पता लगाने में जुटा है कि उजागर हुए डेटा की वास्तविक स्थिति क्या है और यह किन परिस्थितियों में डार्क वेब तक पहुंचा।

    रिपोर्ट के मुताबिक उजागर हुए रिकॉर्ड में ग्राहकों के नाम जन्मतिथि मोबाइल नंबर ईमेल आईडी लिंग और आवासीय पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा शाखा से संबंधित विवरण सीआईएफ पहचान संख्या लीड आईडी और ऋण आवेदन या लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडाटा तथा अन्य फाइलें भी सामने आने की बात कही गई है। इस तरह की जानकारी का गलत इस्तेमाल होने पर ग्राहकों को फर्जी कॉल संदेश ईमेल और अन्य प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सामने आए सभी रिकॉर्ड पूरी तरह प्रामाणिक हैं या उनमें से कितनी जानकारी वास्तव में ग्राहकों से संबंधित है।

    बैंक ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उसकी साइबर घटना प्रतिक्रिया और नियंत्रण प्रक्रिया सक्रिय कर दी गई थी। मामले की विस्तृत जांच करने और संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए सीईआरटी-इन से अनुमोदित एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी नियुक्त किया गया है। जांच के दौरान डेटा के स्रोत उसकी प्रामाणिकता उजागर हुई जानकारी की कुल मात्रा और उससे जुड़े संभावित जोखिमों का पता लगाया जा रहा है। एसबीआई ने कहा है कि ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी निवारक और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस बीच बैंक ने साफ किया है कि डेटा ब्रीच की घटना से उसके मुख्य कारोबारी संचालन वित्तीय प्रदर्शन या सेवाओं की निरंतरता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। बैंक की प्रमुख सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं और ग्राहकों को बैंकिंग सुविधाएं मिलने में किसी व्यवधान की सूचना नहीं है। हालांकि डेटा लीक की वास्तविक सीमा और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    गौरतलब है कि सप्ताह की शुरुआत में सिरियसिम नामक एक हैकर समूह ने दावा किया था कि उसने एसबीआई से जुड़े गोपनीय ग्राहक डेटा हासिल किए हैं। कथित तौर पर इनमें व्यक्तिगत जानकारियां ऋण आवेदनों और खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज शामिल थे। साइबर सुरक्षा निगरानी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट साइबरपल्स56 ने भी इस दावे को एक्स पर साझा किया था। पोस्ट में लगभग 3.75 लाख डेटा एंट्री और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज होने का दावा किया गया था। इन दावों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

    शेयर बाजार में भी इस घटनाक्रम के बीच एसबीआई के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजकर 18 मिनट पर एनएसई में बैंक का शेयर लगभग 0.61 प्रतिशत गिरकर 967 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि केवल इस गिरावट को डेटा ब्रीच से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिलहाल निवेशकों और ग्राहकों की नजर बैंक की जांच तथा आगे सामने आने वाले तथ्यों पर बनी हुई है।

  • किसानों की होगी डबल कमाई, एक ही खेत में उगेगी फसल और बनेगी बिजली, एग्रीवोल्टाइक्स से ग्रामीण समृद्धि को नई उड़ान

    किसानों की होगी डबल कमाई, एक ही खेत में उगेगी फसल और बनेगी बिजली, एग्रीवोल्टाइक्स से ग्रामीण समृद्धि को नई उड़ान


    नई दिल्ली। देश के किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को साझा करते हुए इस तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृषि गतिविधियों के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने वाली यह व्यवस्था किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस तकनीक के जरिए किसान एक ही जमीन पर खेती जारी रखने के साथ बिजली उत्पादन से भी अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स किसानों के लिए कमाई का अतिरिक्त स्रोत बन सकती है। इससे ऊर्जा पर होने वाला खर्च कम करने और फसल उत्पादकता को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। खेती में मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में कृषि और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल किसानों को आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है।

    भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन की थीम पावरिंग द ग्लोबल साउथ रखी गई है। इसका उद्देश्य कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं पर चर्चा करना है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने अपने लेख में एग्रीवोल्टाइक्स को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी मॉडल बताया है। इसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है। इस व्यवस्था में खेतों में सौर पैनल इस तरह लगाए जाते हैं कि उनके नीचे या आसपास खेती की जा सके और जमीन का उपयोग कृषि उत्पादन के साथ बिजली बनाने के लिए भी हो।

    मंत्रियों के अनुसार भारत में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। ऐसे किसानों के लिए आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। एग्रीवोल्टाइक्स के माध्यम से किसान खेती से होने वाली कमाई के अलावा सौर ऊर्जा उत्पादन और बिजली की बिक्री से भी आय अर्जित कर सकते हैं। इसके साथ ही सिंचाई के लिए डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता घटाने की संभावना भी बनती है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    इस तकनीक का लाभ केवल अतिरिक्त आमदनी तक सीमित नहीं है। सौर पैनलों की उचित व्यवस्था खेतों में सूक्ष्म जलवायु तैयार करने में मदद कर सकती है। इससे कुछ परिस्थितियों में फसलों को अत्यधिक गर्मी और तेज सौर विकिरण से राहत मिल सकती है। उपयुक्त डिजाइन और फसल चयन के आधार पर सूखे तथा ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ फसल के प्रकार जलवायु और सौर पैनलों की बनावट पर निर्भर करेगा।

    सरकार प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष महत्व देने की तैयारी कर रही है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल और सिंचाई व्यवस्था के सौरकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर संयंत्रों की स्थापना रखरखाव और उनसे जुड़ी कृषि सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

    मंत्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मॉडल की सफलता के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाना जरूरी होगा। ऐसी फसलों का चयन करना होगा जिन्हें उपलब्ध धूप में बेहतर तरीके से उगाया जा सके। सिंचाई पोषक तत्व प्रबंधन और सौर पैनलों की ऊंचाई तथा दूरी पर भी ध्यान देना होगा ताकि खेती के लिए पर्याप्त सूर्य प्रकाश उपलब्ध रहे। इसके अलावा कृषि और ऊर्जा विभागों राज्य सरकारों अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ एग्रीवोल्टाइक्स किसानों की आमदनी बढ़ाने और गांवों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन

    बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। इससे बैंकिंग सेक्टर में पूंजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में प्रारूप कैबिनेट नोट तैयार किया है। प्रस्तावित बदलाव को आगे बढ़ाने से पहले अन्य मंत्रालयों से उनकी राय मांगी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने भी सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर जल्द विचार करने की सिफारिश की थी। ऐसे में आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए एफडीआई की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत तक निर्धारित है। इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से सरकारी बैंकों में निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में सबसे अधिक 11.07 प्रतिशत विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। इसके बाद केनरा बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.55 प्रतिशत है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    इस प्रस्ताव पर विचार ऐसे समय में किया जा रहा है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 18.62 अरब डॉलर था। मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 6.6 अरब डॉलर था। मई में निवेश घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा लेकिन जून में फिर बढ़कर 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र विदेशी निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में 7.04 अरब डॉलर का निवेश आया। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र को 2.84 अरब डॉलर तथा व्यापार क्षेत्र को 1.92 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला। इसके अलावा गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इक्विटी निवेश पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी को शामिल करने वाला कुल एफडीआई अप्रैल से जून के दौरान लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया।

    राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु 5.95 अरब डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। अब सरकारी बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश की भूमिका बढ़ सकती है।

  • भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर

    भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम आने वाले दो से तीन वर्षों में शेयर बाजार के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में एआई स्टार्टअप्स की संभावित लिस्टिंग से सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्यांकन में 50 अरब डॉलर से लेकर 100 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मध्यम से लेकर अंतिम विकास चरण तक पहुंच चुकी करीब 70 निजी एआई कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले समय में अपना आईपीओ ला सकती हैं। इन कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग उनके मौजूदा अनुमानित मूल्यांकन से औसतन करीब चार गुना अधिक वैल्यूएशन पर हो सकती है। इससे भारतीय शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों की संख्या बढ़ने के साथ निवेशकों को इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं।

    एआई स्टार्टअप्स की फंडिंग में तेजी

    भारत में एआई कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के बाद से भारतीय एआई स्टार्टअप्स के लिए निजी इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो गई है। वहीं देश में कुल निजी इक्विटी निवेश में एआई की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशक अब एआई को केवल उभरती हुई तकनीक के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में बड़े कारोबार और कमाई की संभावना वाले क्षेत्र के तौर पर देख रहे हैं। भारत निजी एआई फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल है। वहीं नई फंडिंग हासिल करने वाली एआई कंपनियों की संख्या के आधार पर देश दुनिया के शीर्ष चार देशों में जगह रखता है। इस स्थिति से भारतीय एआई उद्योग को वैश्विक निवेश बाजार में मजबूती मिलने की संभावना है।

    84 निजी एआई कंपनियों की कुल वैल्यू 55 अरब डॉलर

    गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में भारत की 84 निजी कंपनियों को प्राइवेट एआई कंटेंडर्स के रूप में पहचाना गया है। इन कंपनियों का कुल अनुमानित मूल्यांकन करीब 55 अरब डॉलर है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के बाद से भारत में एआई से जुड़ी कुल निजी फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों को मिला है। ये कंपनियां एआई तकनीक से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इनमें एआई सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं के साथ ऐसे व्यवसाय भी शामिल हैं जो एआई सिस्टम के संचालन के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन कंपनियों के संभावित आईपीओ से शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कारोबारी गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।

    अपस्ट्रीम एआई क्षेत्र में सबसे बड़ा अवसर

    रिपोर्ट में एआई वैल्यू चेन के शुरुआती और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्र को सबसे बड़े अवसर के रूप में बताया गया है। इसे अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स कहा जाता है और इसका अनुमानित मूल्यांकन करीब 35 अरब डॉलर है। इस क्षेत्र में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से लेकर सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन चिप डिजाइन क्वांटम कंप्यूटिंग डेटा सेंटर क्लाउड सेवाओं और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां आती हैं। एआई तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित करने और चलाने के लिए इन क्षेत्रों की अहम भूमिका होती है। इसी वजह से इनके कारोबार में वृद्धि की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    आईपीओ में दो-तिहाई हिस्सेदारी की संभावना

    गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भविष्य में एआई कंपनियों की संभावित लिस्टिंग के कुल मूल्य में से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स का हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में एआई वैल्यू चेन के उन हिस्सों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है जो फिलहाल बाजार में कम दिखाई देते हैं। गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो के मुताबिक एआई कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय बाजार में इस क्षेत्र से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि संभावित मूल्यांकन और आईपीओ की संख्या अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक नतीजे बाजार की स्थिति कंपनियों के प्रदर्शन और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेंगे।

  • .ऑटो सेक्टर में कारोबार का नया दौर, बैटरी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक कंपनियों में बढ़ा निवेश

    .ऑटो सेक्टर में कारोबार का नया दौर, बैटरी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक कंपनियों में बढ़ा निवेश


    नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इस अवधि में कुल 1.7 अरब डॉलर के 33 सौदे हुए जबकि पिछली तिमाही में 71.7 करोड़ डॉलर के 20 सौदे दर्ज किए गए थे। बुधवार को जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 65 प्रतिशत और कुल मूल्य में 131 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस तेजी के पीछे विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए निजी इक्विटी निवेश वेंचर कैपिटल और सार्वजनिक बाजार से दोबारा पूंजी जुटाने की गतिविधियों में बढ़ोतरी प्रमुख वजह रही। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब पारंपरिक वाहन निर्माण से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीक पर आधारित कारोबार की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीक पर निवेशकों की नजर

    तीसरी तिमाही में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान निवेश का प्रमुख विषय बना रहा। निवेशकों ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के साथ बैटरी तकनीक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में पूंजी लगाई। रिपोर्ट के अनुसार निवेशक ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका कारोबार बड़े स्तर पर विस्तार कर सकता है और जिनके पास दूसरों से अलग तकनीक या मजबूत कारोबारी मॉडल है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संभावनाओं और परिवहन व्यवस्था में हो रहे बदलावों ने इन क्षेत्रों को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निवेश केवल कार और दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि उन व्यवसायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के पूरे ढांचे को मजबूत करते हैं।

    एमएंडए और निजी निवेश के तहत 808 मिलियन डॉलर के सौदे

    रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही में विलय एवं अधिग्रहण तथा निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों के तहत कुल 808 मिलियन डॉलर के 28 सौदे हुए। वहीं केवल एमएंडए गतिविधियों के अंतर्गत 389 मिलियन डॉलर के 12 सौदे दर्ज किए गए। पिछली तिमाही में एमएंडए के तहत 138 मिलियन डॉलर के पांच सौदे हुए थे। इससे पता चलता है कि कंपनियां अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने के लिए अधिग्रहण तथा रणनीतिक साझेदारी जैसे विकल्पों पर जोर दे रही हैं। निवेशकों का रुझान उन कारोबारों की ओर है जो भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरतों को पूरा कर सकें।

    घरेलू सौदों की रही बड़ी हिस्सेदारी

    तीसरी तिमाही में घरेलू सौदे निवेश गतिविधियों के प्रमुख चालक बने रहे। कुल सौदों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत रही जबकि कुल सौदा मूल्य में घरेलू सौदों का योगदान 87 प्रतिशत दर्ज किया गया। रणनीतिक निवेश मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं मोबिलिटी प्लेटफॉर्म ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनियों और ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों में केंद्रित रहा। यह रुझान बताता है कि कंपनियां नई क्षमताएं हासिल करने और मोबिलिटी इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

    ऑटो सेक्टर में निवेश के नए चक्र के संकेत

    ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑटोमोटिव एवं ईवी इंडस्ट्री के लीडर और पार्टनर साकेत मेहरा के अनुसार ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है। यह बदलाव मोबिलिटी क्षेत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन से प्रेरित है। अब पूंजी वाहन निर्माताओं के अलावा बैटरी तकनीक चार्जिंग नेटवर्क ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में भी पहुंच रही है। निवेशक ऐसी कंपनियों को समर्थन देना चाहते हैं जो भारत में परिवहन के भविष्य के लिए जरूरी तकनीक और बुनियादी ढांचा विकसित कर रही हैं। तीसरी तिमाही के आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशक फंडिंग के मामले में चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद भारत के मोबिलिटी और इलेक्ट्रिफिकेशन क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर भरोसा बनाए हुए हैं।